Latest / Baba ji Vijay Vats / 4 Apr 26 - संत कबीर के शब्द "लाली मेरे लाल की" के माध्यम से सर्वत्र परमात्मा को देखने का विज्ञान।
Transcript
- 0:12मुकेश, गौरव कबीर का एक दोहा लाली मेरे लाल की।
- 0:35ये तो देखूं तो लाल लाली खोजन मैं।
- 0:42गई। मैं भी।
- 0:44हो गई लाल। कृपया इसका अर्थ।
- 0:54रहस्यत्मक। वर्णन से समझाने का कष्ट कर लाली
- 1:04मेरे लाल के लाल रंग शगुनु का रंग है।
- 1:19तीन रंग होते हैं, मुख्य, लाल, नीला।
- 1:22पीला। इन तीन रंगों से सभी रंग बनाए जा
- 1:29सकते हैं। लेकिन।
- 1:32किसी भी रंग को। मिलाकर ये।
- 1:35तीनों में से कोई रंग नहीं बनाया। जा सकता।
- 1:41यानी के मुख्य रंग ये तीन हैं लाल, नीला, पीला, लाल रंग, शगुनों
- 1:51का रंग है। लाली मेरे लाल की।
- 1:59जित्त देखूं तित्त लाश? ध्यान से समझिएगा तुमने पुत्र
- 2:08पूछा है। रहस्यत्मक वर्णन कीजिए चलो हम
- 2:17रहस्य में उतरते। हैं।
- 2:25सुना था परमात्मा? की सृष्टि में बड़ा आनंद है।
- 2:38लेकिन जब सृष्टि को भोग तो पाया। दुख ही दुख।
- 2:51तो कबीर कहते हैं। के।
- 2:55सोना था। कि ईश्वर की?
- 2:59सृजना में आनंद का रस है। बौगा तो पाया रस नहीं।
- 3:11जैसे बुध ने पाया सभी भोग भोग लिए।
- 3:15पाया। संसार दुख है फिर।
- 3:22सुना। था कि सुख भी है फिर वो सुख कब
- 3:28है? वह सुख बनाएगा, बताएगा।
- 3:38जो? उस सुख में पहुँच गया।
- 3:42तो गुरु की पहली। पहचान गुरु आनंद।
- 3:48के उस रस से सराबोर। होगा।
- 3:55जीसको। सारी दुनिया का प्रत्येक।
- 3:57व्यक्ति चाहता। है।
- 4:05और मज़े की बात है कि जो भोग लेता।
- 4:11है। वह निष्कर्ष उल्टा देता है।
- 4:17कि संसार सुख नहीं। दुख तो फिर।
- 4:24संत कहते हैं बिना गुरु के अगर संसार को पोगोगे तो संसार में दुख
- 4:34ही पाओगे। गुरु के मार्गदर्शन में।
- 4:44उसी संसार। को भोगोगे तो सुख पाओगे।
- 4:52सिक्के का दूसरा पहलू आ गया। गुरु बदल देगा लाली।
- 5:05मेरे लाल के सुना था वह परमात्मा। बड़ा आनंद से भरा पड़ा।
- 5:15है और। संसार को होगा तो।
- 5:19पाया दुख। तो कहाँ चूक हो?
- 5:24गई कहीं चूक? है।
- 5:32जो? वो अभी तक मिला नहीं तो कहीं चुका
- 5:36है जो तुम। अतिरिक्त अतिरिक्त से।
- 5:43इस संसार में अभी तक भटक। रहे हो अभी स्टेबिलिटी।
- 5:50आई नहीं? तो इसका कारण है कि तुम ने उस रस
- 6:01को जिया नहीं पिया। अष्टावक्र हो, बुद्ध हो।
- 6:09महावीर हो कबीर। हो नानक हो।
- 6:19जब वह भोगेगा तो। पायेगा संसार दुख है।
- 6:27और ऋषि कहते हैं कि संसार सुख का सागर।
- 6:31है। तो कहाँ चूक हो गए?
- 6:40चूक हमारी यात्रा में हो गए। दिशा देने वाला।
- 6:48गुरु गलत निकला। अगर दिशा विपरीत हो।
- 6:57बताने वाला गुरु आपको। विपरीत बता दे तो जाना होता है।
- 7:04लाहौर। पहुँच जाते हो।
- 7:07मुंबई। फिर तुम कहते हो बड़ा।
- 7:14दुख है संसार में तुम पहली बात समझ लेना संसार अगर भोग कर तुम्हे
- 7:30दुख दे, जो कि दुख देता ही है, फिर तुमने पहला काम करना है।
- 7:42गुरु से दिशा। लेने का मार्गदर्शन और दिशा
- 7:48किस्से। लेनी है जिसने खुद पे लिया।
- 7:53है उस आनंद को। अनुभव ही तो बता।
- 8:00पाएगा कि चीनी मीठी? होती है।
- 8:06कुनिन कड़वा होता है, सॉल्ट नमकीन होता।
- 8:13है। अनुभव।
- 8:17बता पाएगा तो कबीर। कहते हैं।
- 8:26संसार में जब भी। दुख पाओ और दुख ही।
- 8:29पाओ। कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसने
- 8:35संसार को भोंगा हो और दुख न पाया हो।
- 8:45यह भी कुछ दिन से बहस बाजी हो निकली।
- 8:59राजा ने क्या किया? राजा ने क्या किया?
- 9:03और राजा चाहे कोई भी हो। और ट्रंप महोदय हो और मोदी महोदय
- 9:09हो, देखिये बात राजनीतिक नहीं। आपको समझ में जल्दी आ जाएगा।
- 9:15इसलिए मैंने पात्र ऐसे ही चुने। कहते हैं एपस्टीन कांड?
- 9:26में डोनाल्ड ट्रम्प थे। बड़े बड़े अमीरजादे।
- 9:33थे, थे बिलक्षक थे। और यहाँ।
- 9:43भी कुछ दिनों से मैं मेरे मित्र, मेरे शिष्य।
- 9:51मुझे कल्प से भेज देते है छोटे से कि एक मधु नाम।
- 9:57की कोई स्त्री है। एक सुब्रमण्यम स्वामी है।
- 10:04वो कहते हैं, मोदी। जी चार स्त्रियों के साथ सोया
- 10:07करते थे। तो मैं पूछता हूँ तुम्हें घर जा
- 10:13क्या? है।
- 10:18अगर मोदी जी चार स्त्रियों को छोड़ो, 40।
- 10:23स्त्रियों के साथ भी सोएं, तो तुम्हे हरजक तुम्हे क्या तकलीफ है
- 10:32तुम चार? के 700 लो तुम 40 के 700 लो।
- 10:36तुम्हे को रोकता है। बात।
- 10:42क्या है ये मूड? लोग अभी कुछ दिन पहले मधु नाम की
- 10:53मैं पूरा नाम नहीं जानता। कोई किताब लिखी थी पहले वो
- 10:57वाजपेयी? थी, अब वो मोदी।
- 11:00के विरुद्ध हो गई। कहती ये स्मृति इरानी।
- 11:08के साथ सोया। यह कंगना।
- 11:20के साथ सोया चार इसरो के साथ सोया।
- 11:26मैंने कहा तू हर जा। क्या है चार?
- 11:31के साथ सोया। और उसको मिनिस्ट्री।
- 11:33भी बना दिया। मैंने कहा ये गलत।
- 11:37किया। बोलता मैं भी हूँ मोदी के खिलाफ़
- 11:47लेकिन। मैं मोदी की मनेजमेंट।
- 11:49के खिलाफ़ हूँ। और शायद मेरे जैसे अतीक्षण शब्द
- 11:57का इस्तेमाल न भी करता। हूँ।
- 12:05तो आपको एतराज है क्यों है? ये भी बता दूँ?
- 12:11सुब्रमण्यम स्वामी जी आप? भी भोगना चाहते हो।
- 12:16ये मधु नाम की जो। स्त्री है ये भी भोगना चाहते हो।
- 12:19मैं क्षमा नहीं मांगूंगा। क्योंकि सत्य की।
- 12:23विवेचना करनी चला। रहस्यम का अर्थ बोलने चला भीतर से
- 12:31तुम्हारी। भी इच्छा है।
- 12:33या हम भी भोगले? फिर मैं क्यों बखिला?
- 12:40बोलता हूँ। इसीलिए कि जीस।
- 12:46काम के लिए मोदी जी तुमको भेजा था तुमने, वो तो किया।
- 12:50नहीं वो कर देते तो चार की बजाई 40 के 700।
- 12:56लेते कोई बात नहीं कॉम्प्रोमाइसिंग है।
- 13:02और आज हिंदुस्तान में जो व्यवस्था है संविधान की और चम्प्रोमाइजिंग
- 13:09अगर। स्त्री पुरुष साथ सोते।
- 13:11हैं। तो किसी को एतराज।
- 13:13नहीं होना चाहिए। तो आप क्यों क्यों?
- 13:22मिर्ची लगी, वास्तविकता क्या है कि तुम भी भोग न चौथे हो?
- 13:31संत तुम्हारी। दागी खोल देता है संत कहता है
- 13:39तुम? साथ सोना चाहते हो तो?
- 13:41सोल बस। तुम्हें तुम अज्ञानी हो तुम्हें
- 13:49अभी काम वासना में। आनंद नजर आता है और वह भी अखंड और
- 13:56संत जानता है। क्योंकि संत।
- 14:00इन गलियों से गुजरा हुआ है वो जानता है हम बिस्तर कितने जन्मों
- 14:13में। तुम कितनी औरतों और पुरुषों के
- 14:17संग होली? लेकिन फिर भी यहीं बैठी उस।
- 14:21इंसान में माजरा है कि तुम उस तल पे उतर नहीं पाए।
- 14:32जीस तल पर उतर। जाने से।
- 14:36वह अन्तरंग संबंधों के। पीक पैंट पर जवाब।
- 14:39को आनंद आता। है वह।
- 14:44यज्ञ सा हो जाए। और।
- 14:46उसकी धारा टूटे ना वह अखंड हो जाए।
- 14:55मैं चीजों को एक आयनी। की तरह लेता।
- 14:58हूँ मुझे कोई ऐतराज ऐतराज करें तो मोदी?
- 15:08के धर्मपति नहीं करें। मुझे तो बिल्कुल ही एतराज।
- 15:16नहीं क्योंकि मैं जानता हूँ मैंने भोगा बहुत भोगा।
- 15:25और। भोग भोग के दुखाये।
- 15:30तो मैं भला इन दुख चाहने वाले लोगों से।
- 15:35करूँगा करूँगा या ईर्ष्या। करूँगा।
- 15:43नहीं, मैं ईर्ष्या नहीं करूँगा, मैं कहूंगा बे चार्ज।
- 16:04पल भर के लिए मेहमान यहाँ मालूम नहीं मंजिल है कहाँ।
- 16:25पलभरी के लिए वस्तु। पल भर के लिए।
- 16:34अंतरंग संबंधों में। जीस पीक प्वाइंट में उसको देख
- 16:40लेते हो? जीसको तुमने।
- 16:46देखा मैं वहाँ ही। चला गया ईसा सागर।
- 16:52तुम भी कर लो, तो तुम भी कामवासियों को गलत कहना बंद कर
- 17:00देंगे। काम।
- 17:04वासना कृष्ण के तल। पर जाकर बेकार हो।
- 17:10जाती है क्योंकि। कृष्ण ने वह आनंद पा लिया जिससे
- 17:21बड़ा आनंद कुछ होता है। इसलिए कृष्ण?
- 17:31कहाँ भाषण का कभी? विरोध नहीं करेगा वो कहेंगे
- 17:39नेचुरल। बस इसको हौ टु यूटिलाइज।
- 17:50तुमने इसको उत्थान। के लिए प्रयोग करना।
- 17:55तो तुमने इसको डालन के लिए प्रयोग करना, यह तुम्हारी मर्जी।
- 18:02है ऐसे ही पल पल भर के। सुखों।
- 18:06को जानना चाहते हो जीवन? भर और।
- 18:10उठ जाना। चाहते हो यहाँ से?
- 18:12विदा हो जाना चाहते। हो तो कृष्ण को कोई एतराज, मुझे
- 18:19भी कोई एतराज। नहीं।
- 18:25तो मुझे कोई इतना मोदी। ने कुछ गलत नहीं।
- 18:31किया सहमति से किया। हम विस्तार हुआ।
- 18:39और मैं मोदी। जी को भी कहूंगा।
- 18:41कि ऐसी बातों को छिपाया मत करो। यह कोई गुनाह?
- 18:45नहीं है, लेकिन गुनाह। क्या है?
- 18:53गुनाह है कि जो। तुमने हमारे संग वायदे।
- 18:58किए हैं। 2,00,00,000 रोजगार दो।
- 19:08काला। धन वापस ले आऊंगा।
- 19:10भ्रष्टाचार समाप्त कर दूंगा, बेरोजगारी समाप्त कर दूंगा
- 19:14महंगाई। घट जाएगी रपया।
- 19:20डॉलर के मुकाबले ऊंचा हो जाएगा। अच्छे दिन आएँगे।
- 19:32मुझे एतराज। सिर्फ़ इन बातों पर।
- 19:37पर्सनल जिंदगी में तुम क्या? करते हो हमें से कोई ताल्लुकात?
- 19:43नहीं है। हमें ऐतराज है कि हमने मैनेजर
- 19:54चुना। था देश के लिए।
- 20:03सुग्रीव किश्किंदा में मारे मारे फिरते थे।
- 20:08हनुमान जी ने भगवान श्रीराम। को सुग्रीव से मिला।
- 20:15दिया हनुमान। जी कहने लगे, प्रभु।
- 20:23इसकी व्यथा को सुनिए इसकी धर्मपत्नी को इसके बड़े भाई बाली
- 20:32ने क्योंकि वह बलि। वह।
- 20:39अपने पास रख लिया है। और इसको लात मार के भगा दिया जबकि
- 20:45ये बराबर। का भाई है आदि।
- 20:46का मालिका? तो अत्याचार तो गुरु।
- 20:57गोविन्द सिंह जी ने। कहा है सूरा।
- 21:05सोई जानिए जो लड़ै दीन के है। सूरा सुई, जानिए जो लड़ा दिन के
- 21:14है उर्जा पुर्जा। कड़ में कभी ना छांडे खेत वही
- 21:21सूर्य वीर होता। है।
- 21:24जो निर्बल के लिए लड़। यहाँ तो ठीक है लेकिन इसमें एक
- 21:32व्यापार था। व्यापार ये था कि राम ने अपनी
- 21:41धर्मपत्नी सीता को छुड़वाना था रावण की चंगुल।
- 21:51और। वो जानते थे कि।
- 21:52वो बाली को मार सकते हैं। तो सीधा सीधा।
- 22:00तो मार। नहीं सकते छुपके मार?
- 22:02दिया यह एक व्यापार। था राम का।
- 22:11तो मरते हुए बाली ने। पूछा, प्रभु, मैं।
- 22:16बैरी सुगरी प्यार मैं। बैरी सुगुजा प्यार।
- 22:23कारण कवन नात मोहिमार। किस कारण से आपने मुझे?
- 22:31मार दिया अपनी पर्सन दुश्मनी तो कोई थी।
- 22:33नहीं व्यक्तिगत तो खैर। राम ने कुछ बातें कही जो उस वक्त
- 22:40समाज में प्रचलित थी। तो सीता को छुड़ा लिया।
- 22:51क्या रावण को मार के राजा मुगल काल में हर मौत?
- 23:09200300500 राणियाँ होते थे। किसने ऐतराज नहीं किया, आज ऐतराज?
- 23:18क्यों? राजा हैंडमास का?
- 23:26पुतला है। अगर।
- 23:30संत होता तो राज़। करने की इच्छा भी नहीं होती।
- 23:37संत कभी? राज़ करने की इच्छा।
- 23:41क्या वह तो सब। इच्छाओं से मुक्त होता है।
- 23:47क्योंकि इच्छणी वासनाएं हैं। जिसके भीतर सारी वासनाएं इच्छाएं
- 23:53खत्म हो गई। वही सुनते हैं और जो निर्वासना
- 24:00होकर उस आनंद के अमृत स्तोत्र में पहुँच गया वह भगवान हैं।
- 24:07भाग्यवान मैं वासना को गलत नहीं कहता।
- 24:16गलत कहता। हूँ तुम निर्वासना होने का मुकुट
- 24:20धारण करके। छवि को साथ लेकर साफ सुथरी गप्पे
- 24:30मारकर लोगों से वायदा करके वायदा खिलाफ़ ही कर देते।
- 24:33हो ये करते है। विरोध तो मैं भी करता हूँ, लेकिन
- 24:41तुम किसी और। कारण से करते हो?
- 24:44मैं किसी अन्य कारण। से करता हूँ और।
- 24:48मेरा कारण मेरी। बुद्धि के हिसाब से ठीक है।
- 24:53इसलिए मैं रोज़ बोलता हूँ एक ही। व्यक्ति सुखी हो सकता।
- 24:57है और वह है। संत उसके पास चाहे कुछ भी ना हो।
- 25:04उससे चाहे आप उसका शरीर भी। छीन लो।
- 25:09तो भी ईसा मसीह सलीब के ऊपर लटका हुआ कहेगा।
- 25:13ओह। गॉड।
- 25:14फ़ोर गिव। देम विकास दे डू नॉट नो व्हॉट दे
- 25:17आर डूइंग। ऐसा जानते हैं कि ये मुझे फांसी
- 25:26लगा रहे हैं जबकि मैं वो नहीं। हूँ जिसके हाथ।
- 25:32के भीतर ये कीले गढ़ा रहे हैं। मंसूर भी यही जानते हैं और मंसूर
- 25:38तो सरेआम कहते हैं, अनलहक? मैं खुद खोद हूँ तो मुझे ज़रा भी
- 25:49इतराना। है मैं।
- 25:53इन सारी सर्कस ड्रमों को जानता हूँ और इतने जन्मो में।
- 26:00मैं स्वयं भी। यह कर चुका हूँ।
- 26:10इसलिए मैं इन्हें स्वीकार करता हूँ।
- 26:14क्योंकि सत्य से परे। हटने का कोई।
- 26:17कारण नहीं होता। सत्य।
- 26:22को स्वीकार करते ही असत्य विदा हो।
- 26:24जाता है। जैसे मल मूत्र का विसर्जन होता
- 26:32है। ऐसे बीरे का?
- 26:33विसर्जन होता है कौन? ऐतराज उठाता है।
- 26:37कोई मूर्ख ऐतराज? उठाये तो आज मैं।
- 26:43आपकी ये। गुंडे भी तोड़ते है।
- 26:51और यह बिल्कुल नेचुरल। है बहुत सी बातें।
- 27:03तुमने पाप। की तरह सर के ऊपर गठड़ी।
- 27:06की तरह बाध ली। है।
- 27:11ये भार? भी बहुत है तुम्हारे।
- 27:13सर पर झूठ। का भार इतना होता है।
- 27:28कि वह गठड़ी। तुमसे उठाई नहीं जाते।
- 27:33इसलिए संतों ने अगर परमात्मा तक पहुंचने का रास्ता बताया तो उसमें
- 27:40पतंजलि हो महाबीर। हो बुद्ध हो।
- 27:46सबसे पहले। का है।
- 27:47सत्य सत्य। बुद्ध खुद को जान के खुद को जानने
- 27:59के बाद एनलाइटनमेंट के बाद। फिर तुम काम।
- 28:06बसना के जरिए आनंद का रस नहीं। क्योंकि तुम्हें दूसरा।
- 28:13क्षेत्र बन गया, लेकिन तब तक अगर। तुम नैचुरली कुछ भी करते हो?
- 28:25समाज में मान्यता प्राप्त है कि नहीं है।
- 28:29लेकिन करते हो सहमति से तो उसमें ज़रा भी अपराध नहीं और आज कानून
- 28:40इसे सहमति देता है। कानून कहता है ठीक है।
- 28:43इसमें कोई गैरकानूनी काम नहीं। तो अगर सुब्रमण्यम स्वामी कहते
- 28:50हैं कि चार हिस्सों के। साथ सोया करता।
- 28:54जैसे बम फट गया हो तुम्हारे लिए, लेकिन मेरे लिए बम नहीं फटा
- 29:00क्योंकि मैं कहूंगा यह आपसी सहमत है, क्योंकि किसी ने ऐफ़ आई आर
- 29:07कराई है। कानूनी जर्म नहीं है।
- 29:14और आज अदालतें न्यायप्रिय ज्यादा हो गए हैं।
- 29:25वो वक्त चले गए। जब कोई व्यक्ति।
- 29:29कहता था अहम ब्रह्मस्म और उसको काट दिया जाता था।
- 29:34आज मानवता ज्यादा सभ्य हुई है। आज मानवता ज्यादा सभ्य।
- 29:41हुई है। वो चले गए भक्त जो अपने आप को।
- 29:46परमात्मा का प्रिय पुत्र। कहता था उसको।
- 29:53सलीब के ऊपर लटका। के तुम उसके हाथों में केले ठोक
- 29:58दो। वो भक्ति चले गए।
- 30:02और यह वक्त अगर आज आया है तो यह उनकी शहादत के परिणाम।
- 30:09शुभ हो। पाया, लोगों ने देखा।
- 30:16कसूर तो कोई। नहीं था।
- 30:20लोगों ने देखा। मंसूर।
- 30:21के टुकड़े कर दिए। कसूर तो कोई नहीं था।
- 30:27आज दुनिया थोड़ी सी ज्यादा ऑथेंटिक हो गई है।
- 30:37समझदार हो गई। है उसकी क्षमता।
- 30:44बढ़ गई सहनशक्ति विज्ञान। ने बहुत कुछ साफ कर।
- 30:52दिया लेकिन। अपराध मैं नहीं मानता।
- 31:05उससे लोग। पूछ लेते हैं बाबा?
- 31:08ये क्या कर रहा है, मैंने कहा, देखो।
- 31:11पर्सनल लाइफ के। लिए तो ठीक कर।
- 31:13रहा है। वो तो जो आदमी देखो प्रोटीन युक्त
- 31:18मशरूम खायेगा। निश्चित रूप से।
- 31:25वह जहाज की पुड़ियां 16 साल के जवान।
- 31:31के समान ही। कूद कूद के जाएगा भला ही आगे।
- 31:37होंठ फूट जाएं जाके। दिखाने की चेष्टा मैं गलत किसे
- 31:48समझता हूँ? मैं गलत समझता हूँ।
- 31:52अगर मैंने कल को इन्हें दंड देना पड़ा तो मैं इन।
- 31:57तुझसे बातों के। बीच में नहीं देख पाऊंगा।
- 31:59यह तुम्हारा प्रश्न मामला। है आपसी।
- 32:06सहमति से तुमने। जो किया वो किया।
- 32:09तुम्हारे समाज में गलत होगा, लेकिन मेरी निगाह में गलत नहीं।
- 32:14है। अगर काम वासना करित होती तो
- 32:21परमात्मा इसे बनाते ही क्यों? इसे परमात्मा ने बनाया, परमात्मा
- 32:28की सृजना है और आपको थोड़ी सी। और बात बता?
- 32:32दो। जानबूझकर परमात्मा ने काम भाषण
- 32:37में ज्यादा। आनंद डाला क्रोध।
- 32:40में आनंद नहीं है, लोभ में आनंद नहीं है, मोह में नहीं।
- 32:46और किसी। विकार में आनंद नहीं है कामभाषण
- 32:50में है। एक अकेला।
- 32:53विकार जिसमें आनंद है। दूर से देख लेते हो?
- 32:58तुम परमात्मा को तो आनंद सिर्फ काम वासना में क्यों डाल वह इतनी
- 33:09सृजना को रचने वाला विराट? कमतर तो बना नहीं सकता।
- 33:16कुछ परफेक्ट बनाया उसने जो बनाया क्योंकि अगर वह काम वासना।
- 33:29में परमात्मा। के दर्शन में न होते पर भर के
- 33:36लिए। तो निश्चित रूप से तुम बच्चे पैदा
- 33:40न। करते।
- 33:44और परमात्मा ये चाहता है। प्रकृति ये चाहती है।
- 33:49कि संसार चलता रहे और तुम तो मनुष्य हो।
- 33:57प्रत्येक प्राणी में उसकी। वंश वृद्धि के लिए।
- 34:03कामभासन अपनाई गई है। और सभी।
- 34:06चाहे कीड़े मकोड़े हो, मच्छर हो, कीटाणु।
- 34:12हो बैक्टीरिया हो सभी। कामभासन में उतरते हैं।
- 34:18दरअसल उतरते हैं शब्द गलत है। उतरना पड़ता।
- 34:23है। क्योंकि इतने आनंद को देखकर कोई
- 34:32बेहोश ना हो जाए यह असंभव है करीब।
- 34:39इसलिए। ब्रह्मचर्य साधना इतना मुश्किल है
- 34:43नेक्स्ट टु इम्पॉसिबल। उससे बहुत बड़ा वृहद।
- 34:51आनंद आना। चाहिए तो वो उसको।
- 34:54छोड़ेगा अन्यथा नहीं छोड़ेगा। या तुम दबाओगे दबाना गलत।
- 35:03है या तुम भोगोगे। और भोगना तुम्हें पड़ता है
- 35:15क्योंकि परमात्मा ने उन लम्हों में।
- 35:20आपको इतना। बेहोश कर दिया कि।
- 35:26काम वासना तुम्हें खींच। ही ले।
- 35:30अन्यथा उसकी रचना चलेगी। नहीं इसलिए उसने सिर्फ।
- 35:36मनुष्य में नहीं। प्रत्येक जीव।
- 35:38जंतु प्राणी में छोटा बैक्टीरिया में सब में कामवासना का संचार
- 35:44करता है। यह उसकी एक।
- 35:46प्रणाली है कामवासना तुम्हें। मूर्छित कर देती है, इतनी मूर्छित
- 35:58कर देती है। बस इस।
- 36:01कारण से संतो ने। कहा परमात्मा।
- 36:07तो दिखता है विला शक लेकिन तुम अपने आप।
- 36:15को रोक भी ना पाओगे। ये भी ठीक है।
- 36:18क्योंकि तुम्हें प्रकृति मूर्छित। कर देती है।
- 36:22ऐसे तो तुम मर भी न पाओ, मरणकाल में भी तुम्हें।
- 36:27प्रकृति बहुत मूर्छित। कर देती है क्योंकि उसमें एक।
- 36:32बहुत बड़ा विराट सर्जिकल। ऑपरेशन करना होता है।
- 36:39करीब तीन। 4 घंटे लग जाते हैं उस ऑपरेट में
- 36:45तो वह तुम्हें ऐनेस्थीसिया दे देता है।
- 36:49यह ऑटोमैटिक प्रोसेसर है। तो जीस घड़ी में ये गुरु कहते।
- 36:56हैं कि हम आयेंगे और तुम्हें सत्यकंठ ले जाएंगे।
- 36:59उस वक्त। तुम इतने मूर्छित।
- 37:03होते हो? कि प्रकृति तुम्हारी कांठ क्षण कर
- 37:10रही होती है, तुम्हें अगले घर में जाना है, सारे संबंध तोड़ रहे
- 37:14हैं। सारा जो जाल बिछाया।
- 37:16था तारों का। एक एक तार को तोड़ना है।
- 37:19कितना मुश्किल होता है पूरी जिंदगी का लबों लबास समेटना होता
- 37:27है और। पूरी गठड़ी।
- 37:29बांधनी होती है अगले जन्म की तैयारी करने में।
- 37:32जैसे घर बदल। रहा हो?
- 37:40तो काम। भाषणों को संतो ने।
- 37:43कभी निंदित नहीं किया। संत कहते काम भाषण से।
- 37:49उठ जाओ ऊपर जो। काम भाषण में देखा।
- 37:54कितना अच्छा। होगा अगर तुम उसी।
- 37:56तक पहुँच। जाओ।
- 38:00उन तरंग क्षणों में वह। दिखता है उसके दर्शन।
- 38:03होते हैं और मिलन। के क्षणों में तुम उसी।
- 38:08के अंदर समाहित हो जाते हो तो ज़रा सोचो।
- 38:16जीसको देखने पर से इतना आनंद आता है।
- 38:20उसके भीतर। अगर समय गए तुम तो फिर आनंद कितना
- 38:25आएगा? यह एक साइंटिफिक प्रोसेसर।
- 38:27है मूड? लोग इसको समाज के।
- 38:32टेढ़े मेढ़े ढंगों में। गढ़मड़ लेते हैं ये उनकी इच्छा।
- 38:36है मैंने आपको सरलतम। ढंग से वैज्ञानिक तरीके से बतला।
- 38:43दिया तो राजनीतिक क्या करते? हैं।
- 38:54क्या खाते हैं? हमें कोई मतलब नहीं है।
- 38:59अभी मैंने कल। कहा कि मैं।
- 39:03146,00,00,000 लोगों से जो वायदे की ओर अनभाई।
- 39:08नहीं हूँ। इस झूठ के लिए बड़े से बड़ा दंड।
- 39:12दूंगा और उसका आखिरी दंड होगा। फांसी तो बहुत।
- 39:19से लोगों के कमेंट आए है मेरे। पास।
- 39:22बाबा ये तो गलत। है।
- 39:25मैंने कहा फिर तुमने कुछ न कुछ कबाड़ा किया, मैंने कहा मैं 25।
- 39:33करोड़ रुपए पर। लिमिट बांधूंगा मेरे को बहुत
- 39:36कमेंट आया बाबा। ये कैसा हो सकता है?
- 39:43मैंने कहा फिर आपके पास 25 25,00,00,000 से ज़्यादा है चोर
- 39:50की दाढ़ी में। तनखा?
- 39:54अरे भाई मैं ये। स्वीकार नहीं कर सकता।
- 40:00मानस की जात सब एक को पहचान भाव। तुमने विभक्त कर दिया।
- 40:09है। मैं भक्त करना चाहता।
- 40:12हूँ। मैं तुम्हें भक्त बनाना चाहता हूँ
- 40:15तुमने। वि भक्त कर।
- 40:16दिया मैं कहता हूँ हर। व्यक्ति खाना खाकर सोये।
- 40:28अगर भूखा। सोता है तो वह अपनी इच्छा से व्रत
- 40:30रख के होगा। अनीता अभाव।
- 40:35के वश में भूखा न सोय। ठंडी में बिना कपड़े।
- 40:41के न सोय बारिश में बिना क्षति के न सोय मेरी।
- 40:48मूलभूत बातें हैं। मैं आपकी समस्याएं देखता।
- 40:51हूँ मैं आपकी। जरूरतें देखता हूँ, मुझे कोई मतलब
- 40:59नहीं है तुम क्या करते हो उससे कोई मतलब?
- 41:02नहीं है सिर्फ तुम। कानून के दायरे से बाहर नहीं
- 41:05करते, बस इतना बहुत। है अतीत।
- 41:08के जमाने में अगर। लड़कियों के साथ इतना संहार किया
- 41:15तो ही तो माँ बाप। बच्चियों को पैदा करने में कतराने
- 41:19लगे। और कोई कारण ना था।
- 41:25जबकि लड़की। ज्यादा आसानी से पड़ जाते हैं
- 41:32ज्यादा बिखिड़ा नहीं करती वो आराम।
- 41:34से पड़ जाती है। मेरा भाई मुझे कहा करता था।
- 41:41जब हम टेस्ट करते। हैं वहाँ तो खुली इजाज़त है कि
- 41:46वहाँ शैतान नहीं है। तो हम जिसे लिख देते हैं बेबी घर
- 41:57तो अगर वह अंग्रेज है तो खुश होता।
- 41:59है नाचता है, मिठाई बांटता है, अगर वह इंडियन है, हम लिख।
- 42:04देते हैं बेबी, वह। खुश होता है नाचते।
- 42:08तो मिठाई बाट देता है यानी? लड़की हो या लड़का हमे तो मिठाई
- 42:12मिल ही जाती है लेकिन अगर उल्टा हो जाए दोनों।
- 42:17के मुँह लटक जाते। हैं।
- 42:19ये है समाज के बेमाने। लड़की बड़े आराम से पल।
- 42:26जाती है। ज्यादा मीन मेक नहीं करते।
- 42:30लड़का उपद्रव उठा लेता। है क्योंकि अटैकिंग वृद्धि का है।
- 42:34लड़की पैसिब है। समाज की इन घनौनी हरकतों को और
- 42:43कोई बोला नहीं है, है ना? कौन बोला?
- 42:51किसने? आवाज उठाई किसने उठाई लाली मेरे
- 42:56लाल की संसार बड़ा आनंद से भरा हुआ है।
- 43:05मैं बुद्ध के शब्दों के। बिलकुल विपरीत बोल रहा हूँ।
- 43:10थीम के रूप में। चित्त देखूं तित्त लाल तो कबीर
- 43:20गुरु के पास। जाते हैं।
- 43:21रामानंद के पास रामानंद को आशीर्वादित।
- 43:26कबीर उस तल पर। पहुँच जाते हैं।
- 43:33तब ये शब्द बोले। गए मैं।
- 43:38जीस आनंद को ढूंढता था लाली बोलने का ढंग है उनका।
- 43:46जीत देखूं तितला। हर झर्रे मैं तेरी रोशनाई।
- 43:53जिधर देखता हूँ उधर तू ही तो है। हर झर्रे मैं।
- 43:57तू ही तो रो बरू है। लाली मेरे लाल।
- 44:01की जित देखूं तित। लाल हर तरफ।
- 44:08तेरी ही। रौशनी देखी मैंने इस।
- 44:16संसार में खुदाई देखी। तो कबीर कहते हैं फिर मैंने ये
- 44:27देखकर के। संसार में तो सुख है नहीं।
- 44:32तो गुरु। ने मुझे राह बताया, मैं उस गुरु
- 44:34के राह पे चला। वहाँ पहुँच गया जहाँ।
- 44:40लाली थी। लाली खोजने में गई।
- 44:46खोजना सबको पड़ता है। भीतर उतरना सबको पड़ता।
- 44:53है अपने आनंद में उस समुद्र में गोंते लगाने।
- 45:03के लिए उसको पीने के लिए मदहोशी। के आलम में खोने के लिए।
- 45:11तुम्हें भीतर उतरना होगा। और उस तथ्यों में लीन।
- 45:16होना होगा जहाँ सिर्फ आनंद की सुगंध है।
- 45:23लाली मेरे लाल की जीत देखूं तो लाल।
- 45:30लाली खोजन में। गई।
- 45:33मैं भी हो। गई लाल कबीर कहते हैं, ऐसा नहीं।
- 45:38होगा कि तुम खोजोगे और तुम पा नहीं।
- 45:41सकोगे। नहीं।
- 45:44वो कहते हैं, जिन। खोजाते ना पानी?
- 45:46गहरे पानी बैठ मिलेगा, लेकिन गहराई में मिलेगा।
- 45:52मैं। पूरा बूढ़न डरा गयो।
- 45:54किनारे बैठ अगर तुम मृत्यु से डरोगे बूढ़े हो।
- 45:59कमजोर हो निर्भर हो मिटने को राजी नहीं तुम्हारा अहंकार किसका
- 46:06अहंकार? मिटने को राजी होता है, किसी का
- 46:08नहीं होता। लेकिन उस परम आनंद को पाने के लिए
- 46:17मिटना ही एकमात्र तरीका है मिटा दे अपनी हस्ती।
- 46:24को। अगर कुछ मर्तबा चाहे।
- 46:27कि दाना खाक में मिलकर गुलगुलजार होता है अगर दाना कहे के मिटूंगा।
- 46:33नहीं, लेकिन वट वृक्ष बनना चाहता। हूँ नहीं बनेगा।
- 46:38भाई वट वृक्ष बनने के लिए तेरी आहुति।
- 46:45जरूरी है। लाली खोजन में गई, मैं भी हो गई।
- 46:56लाज अपने भीतर कैसे? उतरे कोई भी प्रवचन उठा लो।
- 47:0723000 वीडियो। हैं।
- 47:11और तुम्हें तरीके मालूम पड़ जाएंगे अपने ही।
- 47:15भीतर उतरने का लेकिन। बाहर पदार्थों की खोज में जाना हो
- 47:22तो चले। जाना व्यापार करने के।
- 47:24लिए जाना तो। चले जाना अगर आनंद।
- 47:27को खोजने चले तो? बाहर नहीं मिलेगा।
- 47:31वो मिलेगा भीतर तो इसको अच्छी तरह।
- 47:37से समझ लेना। पदार्थ मिलेगा बाहर।
- 47:43आनंद मिलेगा भीतर। अब देखो चॉइस देखो।
- 47:48पदार्थ चाहिए डिग्री चाहिए। आई एस।
- 47:50वन आई एस वन मान सम्मान। चाहिए लोग आरती।
- 47:56उतारें आपके मंदिर बने। आपकी पूजा हो ये चाहते हैं।
- 48:06या कि ये चाहते हैं एकांत के किसी कोने में बैठे आप?
- 48:10उस मधुर रस। का स्वाद लेते रहो, ये तुम अपने
- 48:16दिल से पूछो। अगर परमात्मा की याद।
- 48:20के बिना तुम्हें जीवन नीरस नजर। आता है तो फिर तुम।
- 48:30अगर सुना सुना रिक्त रिक्त तुम्हारा जीवन बीता।
- 48:37तो फिर तुम्हारा जीवन। नहीं बीता, फिर तुमने दिनों को
- 48:41धक्के दिए। जीवन होता है।
- 48:49जो वक्त तुमने रस। से पीते, पीते आनंद को पीते पीते
- 48:55गुजार दिया। इसलिए जब कोई व्यक्ति प्रबुद्ध हो
- 48:59जाता। तो उसका नाम बदल दिया जाता।
- 49:03उसका दूसरा जन्म हुआ। जीवन की नीरस तक हुई और वह रस से
- 49:13सराबोर। हो गया।
- 49:17उसे द्वैजे कहते थे। हम।
- 49:19द्वैजे उसका दूसरा जन्म। हुआ।
- 49:25पहले का जीवन रूखा, सूखा और दूसरा।
- 49:30जीवन हरा भरा। फूलों से लगा।
- 49:35फलों से लगा मीठे फलों को। खाओ।
- 49:41झूमो आनंद की मस्ती में। तुम बिन जी बना कैसे भी था तुम
- 50:08बिन जी बना। कैसे बी पूछो मेरे दिल से पूछो
- 50:27मेरे दिल से। तुम बिन जीवन कैसे बीतता हो पूछो
- 50:40मेरे दिल से। तो जब दूसरा जन्म हो जाता।
- 50:48है तब तुम्हें बड़ा। पक्षदा होता है।
- 50:56फिर तुम कहते। हो जीवन इतना आनंद से भरा हुआ था।
- 51:07और मैं गंदगी के ढेरों। पर टक्करें मारता रहा।
- 51:13जबकि जीवन के भीतर हीरे छुपे हुए। थे अभी तक तुम चूक।
- 51:24रहे हो और उसे। चूकने का।
- 51:28कारण है अन्नास्तिकता। तुम्हें ठीक से विश्वास।
- 51:37नहीं हो रहा। कि वह है और बस यही अविश्वास
- 51:47तुम्हें? उस रस से वंचित रखे रहता है।
- 51:51तो गोस्वामी कितना ही कह लें। श्रद्धा, विश्वास, रूपणों या
- 51:56व्यायाम बिनाना पश्न लेकिन। आप श्रद्धा और विश्वास करोगे भी
- 52:04तो थोथत होता होगा। तुम स्मरण भी करोगे तो थोथत होता
- 52:09होगा, जिसे देखा ही नहीं। जिसे चखा ही नहीं।
- 52:13जो अब तक अनजान है। अनजाने मुसाफिर की तुम?
- 52:20शकलो। सूरत कैसे गड़पोग कैसी होगी उसकी
- 52:25नकाशी नैन नक्श। आँखें तुम्हे।
- 52:32पता ही नहीं। इसलिए।
- 52:37अनजान अतिथि से तुम कभी प्रेम नहीं कर।
- 52:42पाओगे और तुम्हारे गुरु तुम्हे रोज़ कहते हैं, उसका शरण करो।
- 52:53बड़ी भ्रांति में डाल रहे हैं ये लोग।
- 53:01मैं तुम्हें सीधी सीधी डगर दिखाता हूँ।
- 53:04मैं तुम्हें कहता हूँ। उसको तो तुम कभी।
- 53:07जी। नहीं पाओगे खोजे बिना।
- 53:13उसको याद मत करो उसको। खोजो नो।
- 53:19दाय सेल्फ रिमेम्बर यूर, सेल्फ हू आर यू?
- 53:27यह जानो फिर स्मरण तुम्हें करना नहीं पड़ेगा।
- 53:33फिर उसका शरण आएगा। फिर तुम्हें ऐसा लगेगा एक पल के
- 53:40लिए भी अगर। तुम।
- 53:43आनंद से चूक गए। तो वह फल भी तुम्हें ऐसा।
- 53:46लगेगा जैसे। मैंने उसके बिना यह पल क्यों?
- 53:54बताया और। तुम्हारे तो जन्म भीत गए बहुत
- 54:04जन्म भीत थे मेरे। माध हो अब समझ।
- 54:11जाओ इस जन्म में ही जाग जाओ। अभी तो चारों तरफ।
- 54:19आग है आँख का। धुआं ये तुम्हारी।
- 54:26आँखों में पड़ेगा आंसू आएँगे लेकिन वो आंसू बेरहा के नहीं।
- 54:35वो आंसू। तुम्हें अंधे कर जाएंगे।
- 54:43पूछो ना कैसे मैंने रहने बीताए पूछो।
- 54:54ना कह। ऐसे मैंने रहने बेता है एक पल
- 55:05जैसे एक युग बेता एक पल जैसे। एक युग बीता युग बीते मुझे नींव
- 55:27धना आये पूछो ना कैसे मैंने? पहुँचने के बाद तुम पाओगे कि
- 55:44मैंने ये ज़िन्दगी। कैसे जी हो जबकि?
- 55:50तुमने ही जी है ज़िन्दगी। लेकिन तुम आश्चर्य के भाव से पर।
- 55:55जाओगे वंट वंट। इस हीरे के होते हुए।
- 56:10भी इसके। आनंद से मैं कैसे चूका रह।
- 56:13गया तुम फिर। हुत जले दीपुक।
- 56:21तुम्हारे भीतर दीपक जला। हित मन मेरा।
- 56:32मन्नू मेरा मेरा मेरा। इक मन मेरा फिर भी ना जाए मेरे घर
- 56:59का देरा। भीतर आनंद का रस बरस रहा है।
- 57:10और। तुम रूखे, सूखे, असंतुष्ट हो।
- 57:15तड़पती, तरसती उम्र गवाह तड़पता रहा तरसता रहा।
- 57:30और। उम्र बीत गई।
- 57:34वो छोड़ो, घर से मैंने रहने बीता। एक।
- 57:43पाल जैसे एक जुग। एक फल जैसे एक युग बीता युग बीते
- 58:01मुझे निंदना आ। पूछो ना कैसे मैंने रैन बेसा लाली
- 58:20मेरे लाल। की जीत देखूं तित लाल।
- 58:25लाली खोजने में गई में भी हो। गई लाल उस।
- 58:31लाली में उतर जाओ, जिसे संत कहते हैं तुम्हें पश्चाताप।
- 58:39नहीं होगा। अब जब तुम पहुंचोगे तो तुम्हें
- 58:45पश्चात होगा। हमने इतने जन्म।
- 58:48इस रस के बिना ही गुजारती। है।
- 58:53अब पश्चात होगा नहीं पहुंचोगे तो पश्चात होगा कि मैंने कैसे इतने
- 59:01जन्म। बिना उषा आनंद का।
- 59:04रसपिये गुजार दिए। कितना भाग्यहीन रहा मैं इसलिए
- 59:10जिसने पा लिया जब भी पा लिया। उसको भाग्यवान कहा गया, उसको
- 59:19भगवान कहा गया। जिसने उस रस को।
- 59:22पा लिया। तत्पश्चात उसको भगवान कहा गया
- 59:27भाग्यवान उससे ज्यादा भाग्यवान कोई नहीं वो तुम्हारी आखिरी
- 59:32मंजिल। है धन्यवाद।