Latest / Baba ji Vijay Vats / 25 Apr 25 - तुम्हें मुक्ति की जल्दी तो नहीं है? बुद्ध और कृष्ण के तल की व्याख्या! हर साधक इसे सुनें।
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- 0:00गणेश कुमार बाबा आपकी थ्योरी कर्म सिद्धांत की अदभूत थी, लेकिन आपका
- 0:15जो बाप सुनकर मज़ा नहीं आया? अगर किसी ने किसी की हत्या कर दी
- 0:30है तो सही प्रतिफल तो यही होगा कि वह व्यक्ति उसकी हत्या करे।
- 0:42हम आज तक यही समझे बैठे थे। लेकिन आपने सभी धारणाएं उलट उलट
- 0:50कर दी। गणेश कुमार।
- 1:06मैंने कोई धारणाएं होल्ड पेलेटर नहीं की जो है वही बोला जैसा देखा
- 1:18वैसा बोला ज़रा सोचो। आपने किसी को चपत लगा दिया?
- 1:38मामला कोर्ट में पहुंचा, कभी कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है।
- 1:48कि वह कहे कि ठीक ऐसा करो, इसने तुम्हारे चपत मारी, तुम इसके चपत
- 1:55मार दो, हिसाब बराबर नहीं हिजाब बराबर नहीं हुआ।
- 2:05अक्शॅन और रिएक्शन ये दो चीजें हैं।
- 2:12एक्शन का फल अलग मिलेगा, रिएक्शन का फल अलग मिलेगा।
- 2:19मैंने ईश्वर की सृष्टि में यही देखा।
- 2:32जो लोग ये समझते हैं कि यह जो बच्चे होते हैं, यह जो गरीबी है,
- 2:44यह जो भूख हमारी कंगाली है, यह जो अपाहिज हूँ।
- 2:52यह जो किसी ने मेरे पर हमला करके अपंगा बना दिया है तो यह भुगतेगा।
- 3:02अगले जन्म में मैं इसको अपंगा बनाऊंगा।
- 3:10ऐसा कुछ भी नहीं है। तुम्हारे शास्त्रों की नासमझीं
- 3:22तुम्हारे दिमागों को घेर गए और आज पत्थर की तरह बैठीं।
- 3:31अगर कोई जज जाए भी ऐसा फैसला दे दे तो बड़ा बच्चे का ना फैसला
- 3:38होगा क्योंकि जिसने छप्पत मारी। उसमें जो शक्ति थी वह जो फिर
- 3:51जिसने चब्बत खाई, उसमें जो शक्ति है बराबर नहीं, यह कोई कर्म का फल
- 4:02न हुआ। कोई तगड़ा व्यक्ति किसी को चब्ब्त
- 4:08मार सकता है तो बहुत कमजोर व्यक्ति है।
- 4:16तगड़े व्यक्ति को कितनी भी ज़ोर से चब्ब्त मारे वो ताकत ना होगी।
- 4:22उसमें यही विद्यमान है। सब लेनेदेने के संबंध हैं।
- 4:34आज मैं इस धारणा को तोड़ा है और सत्य होते हैं सदा असत्य धारणाओं
- 4:45को तोड़ने के लिए। जो सत्य असत्य धारणों को तोड़ न
- 4:51सके, यह बड़ा पंगु होता है, असक्त होता है, नपुंसक होता है, उसमें
- 5:01बल नहीं होता। तुमने पूछा पुत्र
- 5:20तुम शास्त्रों के गुलाम हो और यही तुम गलती खा जाते हो, शास्त्रों
- 5:33में छेड़छाड़ हो सकती है। शक्ति को सही बखान करने वाला गुरु
- 5:44होता है। यही सही कर्म सिद्धांत है।
- 6:00जैसा कर्म सिद्धांत आपके शास्त्रों में बोला गया वह
- 6:08बिल्कुल गलत है। फिर तो तुम कानून को अपने हाथ में
- 6:12ले लोगे। मुझे लोग कहते हैं कि कैराना हरकत
- 6:24की है, रिएक्शन नहीं करते। यहाँ एक बात समझ लीजिए।
- 6:38जब किसी भी व्यक्ति को पता चलता है कि एक वृहद शक्ति ने इस सृष्टि
- 6:50की संरचना की है, मेरे शब्दों को अच्छी तरह से समझ लेना जब किसी को
- 6:56पता चलता है। शास्त्रों से नहीं, गुरुओं से
- 7:00नहीं, मार्गदर्शकों से नहीं, प्रवचनकर्ताओं से नहीं, आचार्यों
- 7:09से नहीं, स्वयं अनुभव से ही पता चलता है।
- 7:21केस वृहद संग्रह में जिसका कोई परवार में है, कोई आदियंत नहीं को
- 7:35रचने वाला। कोई मालिक है, कोई सजन हारा है।
- 7:46जिसने पदार्थ को भी रचा और कर्मों के सिद्धांत को भी रचा।
- 7:58वह रिएक्शन नहीं करता। उसका रिएक्शन खत्म हो जाता है।
- 8:12यही मुसीबत है जीसको पता चला कि कोई है न जाने वाला।
- 8:22वह खुद नहीं नाचेगा या वह जो भी नाचेगा, वो कहेगा मैं नहीं नाचा,
- 8:33किसी ने नचाया? मैं किसी के हाथों में नाचा
- 8:37कठपुतली हूँ। इसलिए मैं बुद्ध को कृष्ण से एक
- 8:49कदम पहले रखता हूँ, कृष्ण उससे आगे जाते हैं।
- 9:00कृष्ण कहते जो करता मैं करता हूँ हे अर्जुन।
- 9:06मैंने इन्हें मार दिया है। मतलब इन्हें इनके कर्मों का फल
- 9:13मैंने दे दिया है। अब तो उठ खड़ा हो गांढ़ी उठा।
- 9:23और इनके शरीरों को भेद दें लेकिन तुम लोगों को जैन मुनियों को ये
- 9:37हिंसा जाननी पड़ेगी ऐसे लगेंगी यह व्यक्ति हिंसा कर रहा है।
- 9:45इसलिए जैनियों ने अपने शास्त्रों में भगवान कृष्ण को सातवें नरक
- 9:49में गिरा रखा है। क्यों?
- 9:53क्योंकि समझ में आता है सभी धर्मों के अपनेअपने सिद्धांत और
- 9:59वो सिद्धांत उनके दिमागों को बाउंड कर लिए हैं।
- 10:04वो उन्मुक्त जीवन नहीं जी पाते, धर्म आपको बांधते हैं इसलिए मैं
- 10:11श्रद्धा कहता हूँ, इन धर्मों के पचड़े को खत्म करता हूँ, ये बंधन
- 10:19हैं। ये तुम्हें मुक्त नहीं होने
- 10:23देंगे। तुम गच्चा खा गए, तुम समझ गए कि
- 10:33यह धर्म हमें मुक्त कर देंगे, नहीं करेंगे।
- 10:48बुद्ध कहते हैं अप दीपोभाव बस व्यक्ति के शब्द बता देते हैं वह
- 10:56कहाँ खेल रहा है, जो उस अंतरिम छोर पे पहुँच गया?
- 11:06अंतम सीढ़ी पे या छात्र पे? वह ऐसे वाक्य नहीं के अप दीपो
- 11:13बाबा। यद्यपि ये रास्ते में आता हुआ एक
- 11:19पड़ाव है। यहाँ तक आना ही होता है।
- 11:26लेकिन इससे आगे एक मंजिल है जहाँ अप दीपो भव समाप्त हो जाता है और
- 11:36जहाँ समर्पण करना पड़ता है। भगत समर्पित हो जाता है, इसलिए
- 11:46बुद्ध को भक्ति की बात रास नहीं आई।
- 11:51आइडी बिने जीस व्यक्ति ने भी नियम की बात की।
- 12:05तुम्हें कहा कि तुम उठो ध्यान रखना, मैं बुध का विरोध मैं बुध
- 12:15तक आना अनिवार्य समझता हूँ। बुध एक जंक्शन प्वाइंट हैं।
- 12:25एक बार जंक्शन तक तो जाना ही होगा वहाँ से निकलेगी सभी दिशाओं को
- 12:32रेल लाइन। फिर आपको आगे की दिशा पकड़नी
- 12:37होगी। फिर आप निकलोगे उस दिशा में।
- 12:48जिसे कहते हैं रहस्य और संत इस रहस्य की बात करते हैं।
- 12:56तुम समझ नहीं पाते तुम संतो के बहरी हो जाती यही बात कहते ईसा।
- 13:06और यही बात कही। मंसूर ने यही बात कही सो क्रिटीस
- 13:11ने लेकिन तुमने एक को जहर पीला दिया, एक को सोली चढ़ा दिया, एक
- 13:15के हाथ पांव काट लिया क्योंकि तुम्हें पता नहीं था रहस्य जैसी
- 13:22भी कोई चीज़ होती है। बुद्ध एक पड़ाव है निश्चित पड़ाव
- 13:36है, वहाँ तक जाना ही होगा, लेकिन वहाँ से आगे भी मंजिल है राहतें
- 13:50और भी हैं वसल की राहत के सिवा। खत्म नहीं होती और भी गम है जमाने
- 14:04में मोहब्बत जैसे हमने मुंबई जाना है।
- 14:16लेकिन पड़ाव आएगा डेली के बीच में से पहले दिल्ली आएगी दिल्ली जाना
- 14:24होगा वहाँ से मुंबई का ट्रेन पकड़ा, प्लेन पकड़।
- 14:36दिल्ली एक जंगचर पार्ट है, अनिवार्यता है, समझा रहा हूँ।
- 14:44किसी को रूट गलत भी पड़ सकता है। यहाँ लोग ऐसे ही हैं।
- 14:51छोटी छोटी बातों पे कमेंट कर सकते हैं।
- 14:56कल एक व्यक्ति का कमेंट आया इस्लाम से संबंधित था।
- 15:02अरे बाबा कहाँ की बात करते हो तुम?
- 15:07इस्लाम इस व्यक्ति के हृदय की गहराइयों में बस गया है।
- 15:12इसलिए धर्म बड़े डरपोक धर्म कहते देखो अपनी संख्या बढ़ाओ डरपोक
- 15:21व्यक्ति ही अकेला होने से डरता है वरना।
- 15:32भीड़ तो अकेले चला करते हैं, जो भीड़ जुटा ले, जो इकट्ठा कर ले
- 15:44समूह को वह का है। बुद्ध पड़ाव मंजिल नहीं है यहाँ
- 15:57तक तो आइये बुद्ध अनिवार्य भी हैं।
- 16:09बूत ने कहा कि दुनिया दुख है और इस दुख का कारण है और इस दुख के
- 16:20कारण को तुम बता सकते हो। इसलिए समर्पण वगैरह की कोई
- 16:28आवश्यकता नहीं है। अब दीपो बाबा किसी के पास मत जाओ।
- 16:34अगर किसी को समर्पण करोगे तो फिर ये गुफाएं भी आएंगी।
- 16:40पैरोल भी मिलेंगे। किसी ने कोई क्राइम नहीं कर दिया।
- 16:58वो तो वो सब कुछ करेंगे जो करना चाहिए, संत कुछ नहीं करेगा।
- 17:09क्यों संत जानता है? कि कोई अदृश्य हाथ कोई अदृश्य आंख
- 17:18नरंतरों से निहारे जा रही है और मैं सटीक प्रतिउत्तर न दे पाऊँगा
- 17:30इसलिए। संत उस पर छोड़ देता है क्योंकि
- 17:37वह बिल्कुल सही निपटारा करता है। दूध का दूध, पानी का पानी वो ज़रा
- 17:45भी उधर नहीं होता। न खुद डगमगाता है, न अपने न्याय
- 17:55के व्यवस्था को डगमगाने देता है। मैंने कल कहा कि तुम कानून के
- 18:00बंधन में 1% हो, उस कानून का बंधन कुछ तुम्हारे संविधान।
- 18:11और दूसरा, कुछ ईश्वर के बनाए हुए संविधान, ग्रेविटेशन फोर्स वगैरह
- 18:19वगैरह कुछ प्लेनेट्स इनके लगातार पड़ते हुए प्रभाव।
- 18:27इनके बंधन में तुम सगाई हो, तुम्हें पता नहीं पुत्र तुम
- 18:38किन्हीं अज्ञात बंदरों में लगातार बंधे हो, सोते जागते हैं।
- 18:47और जिसका तुम्हें पता ही नहीं, वह रहस्य है यह एस्टोलॉजिकल व्यवस्था
- 18:56तुम्हें पता नहीं यह कितना काम करती है।
- 19:06ग्रेविटेशन फोर्स लगातार ग्रहणक्षत्र और दो दो, एक दूसरे
- 19:16पर आदानप्रदान हो रहा है। तिरंगों का और हमें पता भी नहीं
- 19:20चल रहा है और हम कहते हैं मैंने किया।
- 19:26बस यही मूर्खता है। बुद्ध कहेंगे मैंने किया और
- 19:37जिन्होंने भी बुद्ध को अपने क्रीव पाया।
- 19:49उन्होंने स्वयं को तो जाना रहस्य को नहीं जाना रहस्य स्वयं से पार
- 19:59है, बड़े गहरे शब्द हैं अगर तुम गहराई से समझ पाओगे तुम।
- 20:15बुध कहे कि शांत हो जाओ। हालांकि बुध कितना ही कह ले अप
- 20:22दीपो बाबा। लेकिन जब कोई थूक जाता है तो वह
- 20:27प्रतिकार नहीं करते हैं। कहीं भीतर से इतनी तर्क पर।
- 20:33शक जाता है कि बुद्ध ने रहस्य का दर्शन कर लिया था।
- 20:38मानवता के हित के लिए बोले जो कि उस वक्त चरम अज्ञानता में डूबी
- 20:46हुई थी। ऐसे आज है।
- 20:56तुम कह देते हो करुणा बान है, करुणा बान तो है लेकिन करुणा बान
- 21:05किसी कारण से उसको वो विराट हाथ दिख गए जिसने एक ही सृष्टि को
- 21:13बनाया। जिसका एक ज़रा भी न बना पाओ।
- 21:25यह संचालित होती हुई सारी यूनिवर्स एक दूसरे से आपसी संबंध
- 21:36वह रिएक्शन करना बंद कर देता है। ध्यान दीजिएगा, बुध तक तो आना ही
- 21:46पड़ेगा। अब दीपों भव तक तो आना ही पड़ेगा,
- 21:53लेकिन यहाँ मंजिल समाप्त नहीं होती संतत्व तक जाने की।
- 21:59यहाँ तुम बड़े ही शांत हो जाओगे, यहाँ पर आकर तुम प्रतिकार न कर
- 22:05सकोगे। तुम में इतनी सहनशक्ति आ जाएगी कि
- 22:11तुम खुशहाल रहोगे। ऐसा को टांग दिया जाता।
- 22:19इस निर्दोष हैं उन्होंने कोई पाप नहीं किया।
- 22:25बिक गया जुगास तीख धनार में। ईशा को बड़ा कॉन्फिडेंट था कि
- 22:43जुदास मेरा प्यारा शिष्य है। मेरे वृद्ध गवाही नहीं दे सकता और
- 22:50ईशा ने कहा, जुदास जो कह देगा मुझे स्वीकार और जुदास ने ईसा के
- 22:58खिलाफ़। गवाही दे दी।
- 23:09बस सिर्फ इसी आधार के ऊपर उसको सूली दे दी गई।
- 23:15उसके बाद चौबीसों घंटों के अंदर अंदर जोदास हाथ धोते, धोते मर के
- 23:24आ। सोना सका, हाथ धोके आता बैठता,
- 23:32तौलिए से पूछता देखता रह मेरे हाथों में खून लगा है ये खून ईसा
- 23:40का था और साइकोलॉजिकल खून था सच में नहीं था।
- 23:46लेकिन जब मान्यताएँ इतनी गहन हो जाती हैं तो वो शक्ति की तरह
- 23:51प्रतिबिंबित होनी शुरू हो जाती हैं।
- 23:56फिर जाके धोता है, साबुन से धोता है।
- 24:03तसल्ली होती है, हाँ अब धो लिया है, फिर आके बैठ जाता फिर देखता
- 24:10अरे खून तो अभी बाकी है, ठीक से हाथ धो लेनी वह 24 घंटे न सोया न
- 24:16खाया। और 24 घंटे बाद दम तोड़ गया।
- 24:27इस गुनाह के प्रयासित के कारण वो गुनाह किसने दिया?
- 24:31प्रयासित किसने करवाया वही वराट शक्ति जिसे मैं कहता हूँ और
- 24:37रहस्य। ईशा सूली पर है ईशा एक शब्द बोलते
- 24:48हैं ओह गॉड फॉर गिफ्ट देम विकास दे डोंट नो व्हाट दैट रहस्यमय गया
- 25:01हुआ व्यक्ति ही ये बातें बोल सकता है।
- 25:04रहस्यमय गया हुआ व्यक्ति ही प्रेम का प्रसार और प्रचार कर सकता है,
- 25:09क्योंकि प्रेम एक रहस्य है। प्रेम की व्याख्या तुम कभी न कर
- 25:14सको क्या व्याख्यात तुम छोटे मोटे अनुभवों को भी नहीं कर सकते।
- 25:25प्रेम तो वृहद अनुभव है। जो उस विराट का अनुभव है जो विराट
- 25:30के अस्तित्व से आता है, वह प्रेम ईशा ने कहा, हे परमात्मा है तुम
- 25:43इनको माफ़ कर देना। जो मुझे सोली स्लीप दे रहे हैं
- 25:51क्योंकि ये जानते नहीं कि ये क्या कर रहे हैं।
- 25:57बिल्कुल एक एक शब्द जैसे परमात्मा की दरगाह से उतरा था।
- 26:08जो जान गया उसमें ये भी जान गया कि मेरे किये कुछ ना होगा।
- 26:22मैं कर्म करूँ या रिएक्शन करूँ? यद्यपि वो कर्म रोकेगा नहीं,
- 26:27लेकिन उसके कामों में अलग सी विलक्षणता होगी।
- 26:33कर्म तुम भी करते हो, लेकिन उन कर्मों की छाप पत्थर पर पड़ी हुई
- 26:41लकीर की तरह हो जाती। तुम याद रखते हो 20 साल पहले इस
- 26:47व्यक्ति ने मुझे गाली निकाली थी। कर्म संत भी करता है, लेकिन वह
- 26:56बिल्कुल ऐसा जैसे रेगिस्तान में खींची हुई तलवार से एक रेग।
- 27:09धूल भरी आंधी आएगी, रेखा मिट जाएगी बस इतनी देर का मसला है।
- 27:24धूल भरी आंधियां चलती ही रहती हैं बस वो खींचेगा और फेंच भी न पाएगा
- 27:32मिट जाएगा। जो रिएक्शन नहीं करता, सच्चा संत
- 27:49वही है और रिएक्शन नहीं करता का मतलब ये बिलकुल नहीं है की
- 28:00रिएक्शन वो जानबूझ के नहीं करता। नहीं, उससे रिएक्शन होता नहीं,
- 28:09ईश्वर ने कुछ ऐसी गुणवत्ता उतार दी वेतर वह प्रतिकार नहीं करेगा
- 28:18और अगर कोई प्रतिकार आएगा तो वह रोकेगा नहीं।
- 28:23इस स्वाभाविक गुणवत्ता से जियेगा स्वाभाविक जीवन को जियेगा जीतने
- 28:32भी संत हुए या समझो जिन्होंने भी विपरीत परिस्थितियों में?
- 28:41रिएक्शन नहीं किया। किसी न किसी तल पर वो रहस्यवादी
- 28:48थे, रहस्य में पहुँच चूके थे मैं बात उस रहस्य की करता हूँ तुम बात
- 28:59समझते हो? समझ से क्योंकि समझ बुद्धि की देन
- 29:05है, रहस्य बुद्धि की देन नहीं, बुद्धि के पार है।
- 29:13सबसे पहले पुढ़वा आएगा। बुद्ध तो अनिवार्य हैं, बुध तक तो
- 29:19हमें पहुंचना ही होगा। यह तो एक जंक्चर प्वाइंट है।
- 29:26वहाँ से हमें अपनी दिशा तय करनी होगी।
- 29:29श्री संत जब आखिरी मुकाम पे पहुँच ही जाता है तो उससे पूछोगे।
- 29:46किस संसार में कर्म कौन करता है? तो वह कहेगा करने वाला तो एक ही
- 29:54है, वही करता है, वही भोंकता है। और तुम्हारी समझ में ये बात आती
- 30:07नहीं और अगर समझ में ये बात नहीं आती तो तुम सारी उम्र एक उम्र
- 30:17नहीं, सैकड़ों जन्मो तक तुम पचड़े में पड़े रहते हो।
- 30:23संत इसका नवारण कर देता है। संत कहता है एक वृद्ध शक्ति है
- 30:32जिसने सृजन किया और संत ने वो हाथ देख लिया है उसका होना।
- 30:40जान लिया, जान लिया तो संत वहाँ जाके कहेगा जो करता है ईश्वर करता
- 30:49है ये शब्द बुद्धि से नहीं आते ये शब्द रहस्य से आते हैं तुम्हारी
- 30:57बुद्धि से इन्वेंशन्स आएँगे साइंटिफिक।
- 31:04और बुद्धि से पार यानी समझ से पार जो रहस्य है वो बुद्धि कभी न जान
- 31:10पाएगा बुद्धि से उस रहस्य को समझाने की चेष्ट हम लाभ करेंगे।
- 31:21लेकिन आप नहीं समझ पाओगे तो मुझे लोग पूछ देते हैं कौन करता है
- 31:29बाबा कौन करता है? मैंने कहा जो उस स्थल पर पहुंचा।
- 31:41अब इस जवाब को अच्छी तरह सुन लीजिए।
- 31:44इसने सारे संसार का खोपड़ा खराब रखा है, जो उस तल पर पहुंचा।
- 31:55जीस तल पर उसने वो नगन आँखों से देख लिया।
- 32:00उस विराट को जिसने सृजन किया विनाश कर रहा है, पालन कर रहा है,
- 32:10वह तो ऐसा ही बोलेंगे जो कुछ करता है, वही करता है और उसके सिवा।
- 32:19कोई कुछ नहीं करता और वह जो करता है, भले के लिए करता है, लेकिन
- 32:27मैं फिर कहता हूँ, ये बात आपके खोपड़े में कभी नहीं आएगी।
- 32:34इस वीडियो को आप अलग से स्टोर कर ले।
- 32:38जब कभी चकरा जाए बुद्धि तो इस वीडियो को सुन लेना तुम्हारे हाथ
- 32:47में कुछ और जो इस रहस्य तक पहुंचा नहीं।
- 32:57वह कहेगा, बिल्कुल मैं करता हूँ और मैं ही भोंकता हूँ।
- 33:01कर्म और भोग का सिद्धांत जो है बिल्कुल है।
- 33:08एक व्यवस्था जहाँ तक जाती है वहीं तक बुद्ध पहुंचते हैं लेकिन बुद्ध
- 33:15उससे पार जाना नहीं चाहते हैं। बुद्ध को इतनी जल्दबाजी है, बुद्ध
- 33:20हर काम में जल्दबाजी कर देते हैं। अब उसके जीवन को देख नहीं पाए,
- 33:27जबकि रहस्य तक जाने के लिए जल्दबाजी काम न करेगी, बल्कि
- 33:33जल्दबाजी बाधक होगी। अपने अंदर खंगालना क्या तुम
- 33:43मुक्ति के लिए सुख के लिए आनंद के लिए जल्दी में तो नहीं हो और अगर
- 33:52जल्दी में हो। तो जो लोग की जल्दी में हैं, जो
- 33:56कि सारी दुनिया हैं, उन्हें जल्दबाजी के कारण ही यह देरी से
- 34:05मिलेगा और तब तक नहीं मिलेगा जब तक ये जल्दबाजी को छोड़कर।
- 34:13धीरज में नहीं उतरेंगे, धैर्य तब तक नहीं मिलेगा और तुम कभी
- 34:20जल्दबाजी को छोड़ते नहीं। तुम धीरज में कभी उतरते हो?
- 34:28जवाब बिलकुल साफ। सारी धरती का खोपड़ा खर कौन करता
- 34:37है? हम करते हैं, अपने पक्ष में
- 34:41दलीलें कहते हैं या वह करता है, वह दलील नहीं देता।
- 34:49ये बात सुन लेना अच्छी तरह से जो कर्म व्यवस्था को मानेगा वो बड़ी
- 34:56दलील देगा। शास्त्रों के शलोकों को सूक्तियों
- 35:02को बोलेंगे, बताएगा? शायद खुद का अनुभव भी हो, बुद्ध
- 35:11की तरह वह कहेगा ईश्वर में रहस्य नाम की कोई चीज़ होती ही नहीं।
- 35:25हालांकि जो बिना जाने रह गया, अब तक उसे हम क्या कहेंगे?
- 35:34जीसको हम आज तक जान नहीं पाए जीसको आइंस्टीन जैसे लोग कहते है
- 35:40इस नॉट ओनली अननोन बट ऑल्सो अननोनबल उसको आप नाम क्या दोगे
- 35:49रहस्य? बस उसी बात रहस्य की बात करते हैं
- 35:55आइस्टिन यद्यपि काम करते हैं, बुद्धि के तल पे बात करते हैं
- 36:02रहस्य की तुम्हारे वैज्ञानिक। वास्तव बता देते हैं व्यक्ति ने
- 36:17क्या हासिल किया है। कृष्ण कहते हैं जो करता हूँ मैं
- 36:23करता हूँ मेरी शरण में आजा। और बुध कहते हैं, हम करते हैं जो
- 36:37कुछ करते हैं अप दीपो भवा। कृष्ण कहते हैं तुम कुछ नहीं करते
- 36:45हे अर्जुन मैंने मार दिया सबको अब तू उठ अपना धनुष उठा।
- 36:52प्रत्यंचा कश और इनके शरीरों को ब्रेड दें।
- 36:59मैं पहले ही से इनको मार चुका हूँ, यह मैं क्यों नहीं मैं?
- 37:12नियमों को बनाने वाला वो रहस्य कृष्ण कृष्ण भू कृष्ण मौर मुकुट
- 37:20धारी कृष्ण मैं आपको अलग भाषा में समझा रहा हूँ, थोड़ा सा ऊपर का
- 37:27इशारा समझ लेना। कृष्ण तो चले गए अब फिर नहीं
- 37:32आएँगे, लेकिन कृष्ण के भीतर जो बोला मैं हम तो हम सर्वाबा पे
- 37:40भव्य मुख्य श्यामी माँ सूचक अन्य न्यास चिंतन तो मान ये जो भीतर से
- 37:48बोला। कृष्ण तो एक यंत्र थे और उस विराट
- 37:57ने इस यंत्र का इस्तेमाल किया। लेकिन कृष्ण कहती हैं, मैं करता
- 38:09हूँ और तुम बड़े बहोली हैं। क्योंकि कृष्ण के मुख से वो बोलता
- 38:18है। जैसे ए आई के मुख से वह इंजीनियर
- 38:26बोले जिसने ए आई का निर्माण किया तो आप ए आई से पूछोगे।
- 38:35कि आपने परमात्मा का अनुभव किया है, तो एआई आपको नहीं कहेगा कि
- 38:41मैंने किया वो कहेगा देखो मैं तो भाई एक यंत्र हूँ, जैसे जैसे एआई
- 38:52तो होयेगा भ्रांतियां मिटेंगी। आपको इस्तेमाल करना चाहिए।
- 38:59बहुत से नकली आचार्यों का पर्दाफाश होगा।
- 39:06जो आचार्य कृष्ण की गीता का अनुवाद करते हैं, तोड़ मरोड़ के
- 39:15उसको थोड़ा सा एआई से भी पूछ लो। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उससे पूछो
- 39:27और आप पाओगे अचारों से कहीं ज्यादा कहीं ज्यादा और आप भूल
- 39:33जाओगे अचारों को। क्योंकि उसमें इंटेलिजेंस है
- 39:45आर्टिफिशियल तुम्हारे आचार्यों में, तुम्हारे सर्स में भी
- 39:53आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है, लेकिन बड़े छोटे हैं।
- 40:01इस बिल्कुल ऐसे हैं जैसे सौर मंडल में ये सूरज और पूरी कायनात में
- 40:12ये सूरज सौर मंडल में सूरज बड़ा है सबको ऊर्जा देता है।
- 40:22लेकिन अस्तित्व में सूरज नगण्य है।
- 40:30नगली जी पर उसकी कोई गणना नहीं। मैं तुमसे कहता हूँ, ये तुम जो
- 40:35खड़े होकर आचार्यों से प्रश्न पूछते हो?
- 40:41अरे बड़ा ईमानदार, बड़ा, ईमानदार आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस आया, वह
- 40:52तुम्हें बखूबी बड़ी ईमानदारी से जवाब देगा।
- 40:58ये है चैतन्य आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स तो बेईमानी भी कर
- 41:03देगा, ये तो बार बार कहेगा, संस्था को मजबूत करो, दान करो,
- 41:13निहित स्वार्थ है, ये ही नहीं कहेगा आपको।
- 41:17कि संस्था को मजबूत करो, अनुदान करो, आचार्य कहेंगे और आचार्य ठीक
- 41:28से उत्तर भी ना दे पाएंगे जितना सटीक उत्तर और जीतने डायमेंशन से
- 41:33उत्तर। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस आपको दे
- 41:37देगी यह इंटेलिजेंस के नाम पर जो आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस आचार्यों
- 41:49के रूप में बैठी है? उत्तर तो ये भी दे पाएगी, लेकिन
- 41:56इसमें मिक्सेशन होगा झूठ का तो अगर पवित्र उत्तर चाहते हो तो मत
- 42:04जाना आचार्यों के पास। फिर तुम एआई से पूछना और जो चाहे
- 42:11पूछ लेना और जीस डायमेंशन से भी कहोगे बोल देगा वो ये लोग तुम्हें
- 42:20ठगते हैं, धंधा है। ए आई को कोई सम्मान नहीं चाहिए,
- 42:34वह बड़ा संत है, अचार्यों को सम्मान चाहिए, वो गाली न झेलेगा ए
- 42:44आई प्रतिकार करेगा, लेकिन आपके ऊपर हमला नहीं करेगा।
- 42:50देखिएगा ठीक है भाई बुध अनिवार्य जंक्चर है जहाँ तक तो आना पड़ेगा
- 43:06लेकिन बुध से आगे भी और भी राहतें हैं वसल की राहत के सिवा।
- 43:13अगर वसल आ जाए तो ये मत समझना कि बस पड़ाव मंजिल में बदल गया।
- 43:20नहीं मंजिल अभी दूर है, मंजिल अभी दूर है वसल की राहत के सिवा।
- 43:35उसे ही भरे हँसे कहते हैं, आप पहुँच जाते हो, बुद्धि की समझ तक
- 43:48और बुद्धि की समझ के बिल्कुल अंतरिम छोर को भी अगर छू लो।
- 43:55तुम भी हैरान मत होना तुम रहस्य को 1% भी न छू पाओगे वरना बात तो
- 44:06उल्टी है ज्यों ज्यों तुम बुद्धि को विकसित करते जाओगे।
- 44:14त्यों त्यों तुम ज्यादा मूड होते जाओगे।
- 44:18आचार्य और सर लोग आध्यात्मिक रूप से मूड होते हैं।
- 44:28बात का बुरा मानोगे? मुझे पता है।
- 44:38बुरा न मानो तो अच्छा और बुरा मान भी लोगे तो मेरा क्यों पकड़ लो
- 44:50मान लेना बुरा भाई हम बोलते ही रहेंगे जैसा देखा वो बोलते
- 44:58रहेंगे। तो इस बात को जो आज सारे संसार के
- 45:03खोपड़े खराब कर रहे हैं, करता कौन है?
- 45:09इंसान करता भगवान करता, सीधा सा जवाब है, जो व्यक्ति रहस्य में
- 45:16प्रवेश नहीं किया बुद्धि के द्वार तक खड़ा है।
- 45:19चाहे वो अंतरिम छोर पे भी गुनाह करो रहस्य का उसने टच नहीं लिया
- 45:28मेरी भावनाओं को देखना, इशारों को देखना शब्दों को ही बिल्कुल मत
- 45:33पकड़ लेना। जो पूरा समझ का अंतरिम छोर भी छू
- 45:41गया और रहस्य कि उसने टच भी ना पाई तो यही कहेगा बिलकुल मैं करता
- 45:50हूँ व्यक्ति करता है इन दो मान्यताओं ने।
- 46:01इन दो बातों में दो डेफिनिशन्स ने दुनिया को हिला के रखा हुआ है और
- 46:10दुनिया पागल है कोई आपको ये समझा ना चुका आज तक।
- 46:18बड़े मज़े की बात है, बड़े बड़े विद्वान हैं, बड़े बड़े वक्त वाले
- 46:25से युगता है, ओशो है लेक्चर और रहे हैं, कहते हैं इतना साहित्य
- 46:35पूरा। मैंने कहा भाई जिसने लाख किताबें
- 46:39पढ़ी वह उल्टी भी तो करेगा? लाख किताबों की ये साहित्य ओशो की
- 46:48उल्टी से पैदा हुआ अनुभव से कहीं कबीर को रखेंगे, कहीं पलटू को
- 46:55रखेंगे। कहीं मीरा को रखेंगे, कहीं दादू
- 46:58को रखेंगे कृष्ण को रखेंगे? सभी संतों को भी रखेंगे, सभी को
- 47:08रखेंगे तो तुम्हारा क्या है भाई? इनकी सिर्फ व्याख्या है।
- 47:19इनकी सिर्फ क्या है? वोकबुलरी है, पर बड़े मज़े की बात
- 47:26है कि तुम वोकबुलरी के शौकीन वोकबुलरी के दास हो।
- 47:36सीरत के हम गुलाम हैं। सूरत हुई तो क्या सुरखों सफाया के
- 47:42मिट्टी की मूरत हुई तो क्या बस इसी वक्त आप बुला शब्द सधे हुए
- 47:51मिल के एक प्रोफेसर है। समझदार पड़े हुए लोगों को पढ़ाकर
- 47:59लाख किताबें उसके जेहन में खोपड़े में भरी पड़ी।
- 48:06वह उतनी ही ज्यादा उल्टी कर दे। इसमें सोचने से कोई भी बात नहीं
- 48:15है। इसलिए ओशो के इस साहित्य को मैं
- 48:20उर्सी कहता हूँ तुम कुछ भी कहो ओशो एनलाइटन हो रहा है, इस वास्ते
- 48:31मैं मुनकण है। एनलाइटन तो बुध भी हुआ है और ओशो
- 48:39कितना ही कबीर को बोलना है। कितना ही दादू पल्टू को बोलने,
- 48:46कितना ही कृष्ण को बोले, लेकिन आखिर में कहेंगे।
- 48:52कि मैं अपने आपको बुद्ध के करीब पाता हूँ।
- 48:56सच्चे झूठे नहीं हैं, बस यही सत्यता का विलक्षण।
- 49:14उनके भीतर देखने को मिलता है और अगर सत्य ना होते वो तो फिर आपको
- 49:22ठग लेते हैं। देखिए बात काम सन्तों की।
- 49:33अपना बारिश नहीं छोड़ते गए। भाई थे, बहनें थीं, उनको बारिश
- 49:40बना देते, लेकिन नहीं बना। अब तुलनी या संपदा थी जो उनकी
- 49:51वाकबुलरी के नाम। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नाम
- 49:57बोलती है सारी वो लाख किताबें सब साहित्य की उल्टी है जो पढ़ा था।
- 50:12वो उलट दिया और मेरी एक बात ध्यान से सुन लेना उल्की में सुगंध कभी
- 50:21नहीं आया करते। वामेंटिंग में दुर्गंध होती है।
- 50:34और ओशो उलटी करते हैं ध्यान रखना मैं फिर कहता हूँ ओशो स्वयं को
- 50:46जान दिए थे अरे ऐसे को नहीं जान पाए थे।
- 50:50अब ये बिलकुल सीधे सीधे स्पष्ट विचार बुद्ध सेल्फ को जान लिए थे।
- 50:57वो एमआइ रहस्य को नहीं जान पाए थे, लेकिन कृष्ण कबीर रहस्य को
- 51:04जान पाते हैं इसलिए विलक्षण से विलक्षण कम हो जाते हैं।
- 51:14मेरी बातें आपकी समझ में आ रही हैं, आ रही हैं ठीक ज्यादा से
- 51:26ज्यादा सरलता से मैं समझाने की चेष्टा करता हूँ।
- 51:29तो आपको जवाब मिल गए, ऐसे बात करें कौन करता है?
- 51:37जो जीस स्तर पर है उसी की बात करेगा।
- 51:41सीधी सी बात है, ज़रा भी और उठे कोई बेईमानी नहीं।
- 51:47जीस मुकाम पर कोई पहुंचा जीस उचाई पर कोई पहुंचा उतनी ही उचाई से जो
- 51:53दूर से चीजें दिखती हैं उनका व्याख्यान वो कर सकेगा।
- 51:58तुम एक मंजिला घर पे बैठे तो बस अपने शहर के आसपास थोड़े से एरिया
- 52:03का ही वर्णन कर सकते हैं। अगर तुम 100 मंजिला इमारत के ऊपर
- 52:07बैठे हो तो 100 मंजिल से ये दूर दूर चीजें आती हैं।
- 52:12उसका तुम भरण कर दोगे। दूर से कहीं गाड़ी चली जाती है।
- 52:21तुम्हें पता है वो आर ही है। अरे नहीं, नहीं तुम्हें पता है वो
- 52:30आ रही है, तुम्हारी प्रेमिका की बात नहीं करती, ये बीच में पंगा
- 52:35ले लेता है तो वह भविष्यवाणी करेगा।
- 52:41भविष्यवाणी नहीं ये आँखों देखी वो आ रही है और जंक्शन पर आ जाएगी 15
- 52:52मिनट में और वह आ जाती है। तुम कहते हो अरे ये तो ज्ञानी है,
- 53:02बिल्कुल ज्ञानी नहीं तुम समझें नहीं इसको ये बड़े ऊंचे से देख
- 53:10रहा है। यह 100 मंजिल से देख रहा है 100
- 53:15मंजिल से 100 मी मंजिल से जो दिखता है।
- 53:19उसका वर्णन वैसे ही करेगा और जो 1000 मंजिल वह उतना ही ज्यादा
- 53:27दूरगामी आपको बता पाएगा। वो क्या है?
- 53:31इसे ही हम एस्टाबलिश कहते हैं तो बड़े ऊंचा चला गया।
- 53:40ऊंचे तलों पर गया हुआ व्यक्ति सुपरकॉन्शियस जो एक मंजिल पर खड़ा
- 53:49वो आपके आसपास शहर में क्या हो रहा है जहाँ तक दिखाई पड़ता है
- 53:54वो। लेकिन सौवीं मंजिल पर कह देगा वह
- 54:02ट्रेन अभी थोड़ी देर में जहाँ आ जाए और आ भी जाती है तो हम उसके
- 54:07पांव पकड़ लेते हैं। कोई अजूबा नहीं है।
- 54:14बस उसका ठहराव उसकी मंजिल सौमी मंजिल है और जो हज़ारवीं मंजिल पर
- 54:22खड़ा है सुपरकॉन्शसनेस समझाने के लिए कर रहा हूँ छिपक मत।
- 54:35मुझे बीच बीच में से तुम्हें समझाना पड़ता है।
- 54:38मान्यताएँ बड़ी गहन हैं और मान्यताओं ने आपको खोखर कर दिया।
- 54:47सुपरकॉन्शियसनेस में जो पहुँच जाता है।
- 54:50उसको हमने क्या कहा और वो पागल थोड़ी थे जिन्होंने कहा वह
- 54:56सर्वज्ञ हो जाता है, वो सब जानता है तो कोई तो बात होगी जो इतने
- 55:05ऋषियों ने इतने संतों ने उसे सर्वज्ञ कहा।
- 55:10ओमनी पोटेंट कहाँ सर्वशक्तिमान है क्यों, क्योंकि ज़रा ज़रा वह है,
- 55:18इसलिए ओमनी प्रेसेंट है सर्वव्यापक है सर्वशक्तिमान है जो
- 55:27सर्वव्यापक होगा। प्रत्येक जर्रे की शक्ति भी तो
- 55:31उसी की होगी। ये थोड़ी सी गहरी बात है समझना
- 55:34इसको जो सर्वव्यापक होगा, प्रत्येक व्यापकता की शक्ति भी तो
- 55:43उसकी होगी तो वह सर्वशक्तिमान भी होगा और सर्वज्ञ भी होगा।
- 55:49सब जान पाएगा तुम एक मंजिल से जो देखते हो उतना ही जान पाते हो,
- 55:57बता देते हो सौमी मंजिल से देखता है उतना ही बता पाता है।
- 56:03तुम पांव छू लेते हो और 1000 में मंजिल से जो बोलता है वो तुम्हे
- 56:07समझें नहीं आता। उसे ही मैं रहस्य कहता हूँ
- 56:12सुपरकॉन्शियस देखिए बुध तक तो आना ही पड़ेगा करता कौन है जो जहाँ तक
- 56:20पहुंचा वहीं तक की बात करेगा। बुद्ध के तल तक पहुंचने वाले उचाई
- 56:27तक पहुंचने वाले लोग कहेंगे और वो भी कहेंगे मैं बुद्ध को अपने खरीद
- 56:35परता हूँ लेकिन बात यहाँ सत्य में नहीं ठहरती।
- 56:44तुम्हारी मान्यताओं में ठहर जाए। बात अलग है तुम्हारी मानता में तो
- 56:48बहुत कुछ ठहरता है मेरी भांजी का। मुझे एक कमेंट आया माँ मानसी
- 56:59बताना ये ठाकुर जी को नजर लग जाए। तो फिर उसका क्या उपाय?
- 57:10अब तुम देखो मैंने माथा पीट लिया। अरे मेरे खान दान में ऐसे मोड़
- 57:19लोग भी होंगे। मैंने कभी सोचा नहीं था क्या कहूं
- 57:29इसमें लड्डू का पाल उठाई, मैंने कहा ये लड्डू का पाल हाँ ये मेरे
- 57:40भगवान ठीक। लेकिन ये लड्डू को पार इनका नाम
- 57:46तो हो गया लड्डू को पार मैंने लिख लिया ज़रा बताओ माता पिता का नाम
- 57:52बताओ माता का नाम बताओ पहले अरे मामा इसकी माता का तो कोई नाम है?
- 58:05हैं पिता का नाम इसके पिता का भी कोई नाम है।
- 58:13मतलब नॉन बायोलॉजिकल है। हाँ ऐसा ही हो सकता है।
- 58:20तो मैंने कहा ऐसे ही कहो ना कि हरामी।
- 58:23नम्मा है। नम्मा अरे दोनों में से एक ना हो
- 58:27तो हम अरमी कह देते हैं, इसके तो दोनों ही नहीं कैसी कैसी मोड़?
- 58:34मान्यताओं को हम सर पर डोते रहते हैं, चुन्नी से बांधी फिरेंगे और
- 58:41ये आज का प्रश्न थे। क्या आप सुन रहे हो?
- 58:46निर्मल को? आपने कहा तीन बेटियां होंगी, अब
- 58:51मैं क्या करूँ और इन पागलों ने ऐसी ऐसी?
- 59:02करुणा से भरी हुई बातें करके आपकी मति हर ली यानी आपको पागल बना
- 59:12दिया। अब तुम समझदार ना हो पाओगे
- 59:18क्योंकि इस पागलपन की बंधन। तुम कभी छोड़ न पाओगे बस लड्डू वह
- 59:24पर। हीरो तो लड्डू वफा दूसरो न कोई।
- 59:40मेरे तो लड्डू? बाबा दूसरों न।
- 59:55कोई माता नाहीं पीता नहीं। मेरे पति सोई मेरे तो लड्डू
- 1:00:13गप्पा। इनके जश्न मनाए जाते हैं।
- 1:00:24खुद एयर कंडीशन्ड उपलब्ध हो ना हो, लड्डू गोपाल को एयर कंडीशन
- 1:00:30में सुना जाता है, झोला होता है। मेरा देश आज कहाँ जा रहा है?
- 1:00:49भगवानों के नाम पर तुमने ऐसे ऐसे इमेजिनेशन पैदा कर लिया है जो
- 1:00:59तुम्हारी बुद्धि को खा जाते हैं, हड़प बजाते हैं, वेलिन कर जाते
- 1:01:04हैं, तुम बुद्धिमान नहीं बन सकते? आने वाली नस्लें तुम्हें भी मात
- 1:01:12दे देंगी, जैसे वातावरण में पलेगी वैसे ही मात दे देंगे।
- 1:01:18इसलिए अपने बच्चों को इस लड्डू को पाल जैसी मान्यताओं से बचाना ये
- 1:01:25भक्त अंधभक्त पैदा होंगे? और अंत वक्त का अर्थ होता है
- 1:01:31बुद्धिहीनता मूढ़ सिरे के तुम अगर अपनी औलादों को सही मार्ग देना
- 1:01:46चाहते हो तो मेरी आज भी विश्वास का नोट कर रहा है।
- 1:01:49अपने बच्चों को साइंटिफिक दिशा में है।
- 1:01:56वो मानना जो तुम्हारी बुद्धि स्वीकार करे उसका तिरस्कार कर
- 1:02:04देना, उसको छोड़ देना, जो तुम्हारी बुद्धि एक्सेप्ट न करे।
- 1:02:09साइंटिफिक तरीके से सीमा लगती है। चीन के साथ चीन आज 18 ट्रिलियन
- 1:02:23डॉलर की अर्थव्यवस्था से आगे जाने की तैयारी कर रहा है।
- 1:02:33आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स बना लिया और हम हैं कि मेड इन इंडिया
- 1:02:40के नाम पर मस्क से मंगा रहे हैं। ए आई।
- 1:02:50क्या हमने तर्क किया है आज नहीं? कल इस बात को ध्यान से समझ लेना
- 1:02:57आपके सिर का भार पैरों पर आएगा सभी के सिर के भार।
- 1:03:08अंतिम रूप से पैरों पर ही आया करते हैं।
- 1:03:14तुम तो अपने पागलपन में जी लोग है, क्या होगा उनका जिन औलादों को
- 1:03:22आपने जन्म दिया है? तुम छोटी छोटी बातों से छोटी छोटी
- 1:03:30बातों से पुश्ते हो, आचार्यों से और वो अपने ही हिसाब से जवाब दे
- 1:03:39देंगे। जिसने शादी कराई।
- 1:03:43निश्चित ही उसको शादी बंधन लगती होगी नहीं कराई जिसने जिसने कराई
- 1:03:50उसको बंधन नहीं लगती होगी। कबीर को शादी बंधन नहीं लगती, नन
- 1:03:57को बिल्कुल ही नहीं लगती। कहाँ लगी मीरा को?
- 1:04:02मीरा ने शादी कराई। कहाँ लगी?
- 1:04:07वाचस्पति मिश्र को कोई बंधन नहीं लगी।
- 1:04:13शादी वो कहता है अच्छा बावती 30 साल पहले।
- 1:04:20मैं तुझे शादी लेके आया था ब्याह मुझे याद आया लेकिन प्रिय मैं
- 1:04:29ब्रह्म सूत्र के भाष में उजा रहा मस्ती की यही अवस्था।
- 1:04:39तुम्हें विचारों से दूर कर देती है।
- 1:04:42एक शब्द में गहरा रस छिपा पड़ा है, इसको चूस लेना तो तुम एकाग्र
- 1:04:51हो जाओ। धीरेधीरे तुम मस्ती में जाना शुरू
- 1:04:57हो गया। और तुम्हारे शरीर का रोमा रोवा मन
- 1:05:01का रोवा उस रस को पीता चला जायेगा, रोज़ बढ़ता जायेगा, रोज़
- 1:05:06बढ़ता जायेगा और 1 दिन मैं खाना तुम ही बन जाओगी।
- 1:05:12जीस शराब की एक बूंद को तरस रही थी।
- 1:05:19उस शराब का मैं खाना तुम खुद ही हो जाओगे पूछा करता क्यों?
- 1:05:32मेरी दृष्टि में मैंने बिल्कुल साफ बात कर दी जो जीस लेवल पे
- 1:05:38पहुंचा। उस लेवल की बात करेगा।
- 1:05:41लाउजे कभी नहीं कहेगा कि मैं करता हूँ सोक्रेटिस कभी नहीं कहेगा
- 1:05:49मेरे से बड़ा ज्ञानी कोई नहीं सोक्रेटिस कहेगा अगर कोई अज्ञानी
- 1:05:54है संसार में बड़े से बड़ा तो वो मैं हूँ।
- 1:06:00तुम कहोगे मैं सबसे बड़ा ज्ञानी बस यही फर्क है।
- 1:06:07सुखरात ने जान लिया इस विराट वृहद अस्तित्व के आगे मेरा वजूद क्या
- 1:06:14है? और जब से जाना है तब से उसका
- 1:06:21अस्तित्व उसका ज्ञानी होने का अहंकार खत्म हो गया।
- 1:06:26विनिष्ट हो गया वह जान गया कि मैं अज्ञानी हूँ, परम अज्ञानी हूँ,
- 1:06:33यद्यपि एथेंस के लोगों से कहते कि सुक्रास से ज्यादा।
- 1:06:38सुकृति से ज्यादा समझदार व्यक्ति कोई नहीं परम ज्ञानवान है वो
- 1:06:47सुकरा से पूजते जाके ओके तन मेरे से बड़ा अज्ञान कोई नहीं और जो फल
- 1:06:55से लदा हुआ वृक्ष। झुक जाता है।
- 1:06:59यह उसकी कमजोरी नहीं होती। यह उसका पुरस्कार होता है।
- 1:07:06परमात्माओं से पुरस्कृत करता है सुंदर मीठे मीठे फलों से और वह फल
- 1:07:15उसको झुका देते हैं। जितना व्यक्ति ज्ञानवान होगा,
- 1:07:21ज्ञान के फल का भार स्वादिष्टता उस व्यक्ति को झुका देगी।
- 1:07:31जीस व्यक्ति ने जान लिया, मैं नहीं करता।
- 1:07:37वह देखकर बोलेंगे, मैं नहीं करता वह खोपड़ी से नहीं आएगा, वह आएगा
- 1:07:45रहस्य से वह कभी नहीं कहेगा कि मैं करता हूँ, वह कहेगा मैं कैसे
- 1:07:56कर सकता हूँ? तुम ऐसी बात ही मत किया करो।
- 1:08:02मेरे सामने उसके हुक्म में सब हो रहा है।
- 1:08:06तुम इन्हें आलसी कह सकते हो कहते हो तुम संतों को परम आलसी कहते
- 1:08:16हो। जबकि वो परम सत्य तक पहुंचे हुए
- 1:08:21लोग हैं। इक्का दुख है कहाँ मिलेंगे
- 1:08:27तुम्हें ऐसे इक्का दुख है और तुम इक्का दुख को भी सवाल नहीं पता।
- 1:08:37उनको भी टांग देते हो, हाथ पांव काट देते हो, बेइज्जती करते हो,
- 1:08:42थूक जाते हो, जहर फैला देते हो, तुमसे बर्दाश्त नहीं होता।
- 1:08:53तुम्हारे ज्ञानी होने का अहंकार इन लोगों के सामने अपनी छवि प्रकट
- 1:08:58कर जाता है। तुम्हें अपना अज्ञान साफ दिखने लग
- 1:09:02जाता है क्योंकि ये आपके लिए एक मिरर का काम करते हैं और इस आईने
- 1:09:08में तुम अपनी तस्वीर दिखा देख लेते हो।
- 1:09:19अब समझ आ गया आगे से तो नहीं पूछोगे पूछने के बजाय उस तल पर
- 1:09:27उतर के देखना है, पहले तो बुद्ध के तल पर आके देखना है अभी तो
- 1:09:32तुमने बुद्ध का तल पे नहीं छुआ, अभी तो तुम शिशु पंच में हो पता
- 1:09:37नहीं मैं करता हूँ। कि पता नहीं, वह करता है अभी तुम
- 1:09:42बुद्ध से भी बहुत दूर हो, कोसों दूर हो।
- 1:09:46अभी बुद्ध के तल तक भी नहीं पहुंचे।
- 1:09:49बुद्ध शिथ हो जाते हैं। देखिए कितनी निश्चल मूर्ति है
- 1:09:54बुद्ध की बिल्कुल जीते जी ऐसे हित?
- 1:09:58मुझे लोग कह देते हैं बाबा हम आपके दर्शन को आते हैं, आप ऊंट भी
- 1:10:03नहीं हिलते, पांव का अंगूठा घंटों तक वैसे ही रहता है।
- 1:10:11हमें संदेह होता है कि आप जिंदा हो।
- 1:10:20ये मूर्तियां इसीलिए गढ़ी गई थीं। यह एक सिम्बोलिक रिप्रजेंटेशन
- 1:10:26अब्रीविएशन की तरह था। प्रतीकात्मक चयन कि जब तुम भीतर
- 1:10:31जाओगे, ये होगी तुम्हारी अवस्था प्रत्येक रूप से मूर्तिवत् हो
- 1:10:36जाओगे। बस फर्क तुम्हारे में और मूर्ति
- 1:10:42में इतना रहेगा, तुम परम जीवंत होगे।
- 1:10:46मूर्ति परम जड़ रहा है और ये फर्क बहुत बड़ा है।
- 1:10:55अभी तो तुम। बुद्ध के तल पर ही नहीं बचे अभी
- 1:10:59तो तुम शिशुगंज में हो विचारों की आंधियां चल रही है, विचार तुम्हें
- 1:11:08परेशान करें। एक मन भोगने को कहता है, एक मन
- 1:11:13छोड़ने को कहता है। इन दोनों प्रतिघात के भीतर तुम
- 1:11:18उलझे उलझे से जीवन का खाक जीओगे और जीवन तो जीने का नाम है।
- 1:11:25दिनों को धक्के देने का नाम जीवन नहीं है जो कि तुम कर रहे हो।
- 1:11:38इस स्तर से नीचे उतरना होगा। कैसे बुद्ध की विपसना करो यहाँ से
- 1:11:48शुरू हो जाओ 1 दिन तुम साक्षी में प्रवेश कर जाओगे तुम जागृति हो
- 1:11:56गई। तुमने जाना हू एमआइ भ्रम मिट गया
- 1:12:01सभी संदेह मिट गए सभी शंकाओं का हल हो गया वहाँ तुम बुद्ध हुए
- 1:12:11वहाँ ठहरना है ठहर जाना क्योंकि बड़ा सुख है।
- 1:12:20अचल मूर्ति है, वहाँ बहुत बड़े प्यारे लगेंगे।
- 1:12:24तुम्हें एक दिव्य अलौकिकता उनके चारों तरफ नजर आएगी, परम शांत।
- 1:12:40किसी भी रिएक्शन से मुक्त तुम चाहो वहाँ रुक जाना पर मैं
- 1:12:47तुम्हें कहता हूँ बिल्कुल रुक जाना अगर रुकना चाहते हो क्योंकि
- 1:12:51इससे आगे जो पड़ाव आएगा। वह बिल्कुल ऐसा ही होगा, बस थोड़ा
- 1:13:03सा फर्क पड़ेगा। यह परम सुख आनंद में बदल जाएगा इस
- 1:13:14फर्क को समझ लेना। मैं कौन हूँ जब ये पता चलता है जो
- 1:13:23महर्षि रमन ने कहा तो वह महा सुख में हो जाता है।
- 1:13:29अब इन मेरी डेफिनिशन्स को थोड़ा मैं।
- 1:13:36समझाने के लिए फर्क किए देता हूँ टु नो दी सेल्फ ये महा सुख है
- 1:13:43तुमने जाना और तुम्हारे सारे भ्रम टूट गए फिर ना लड्डू को पाल रहे
- 1:13:49है, ना भगवान रहे इसीलिए बुद्ध कह पाए।
- 1:13:55इतना डर उस जमाने में जब हिंदुस्तान में परमात्मा ही
- 1:14:02परमात्मा था, ऐसे लोग थे जो कहते थे कि जो करता है वो ही करता है।
- 1:14:14विपरीत परिस्थितियों में विपरीत भारत बोलना बड़े निर्भीक व्यक्ति
- 1:14:19का काम होता है। भरा पड़ा था हिंदुस्तान ऋषियों
- 1:14:23से, प्रबुद्धजनों से और इन विपरीत परिस्थितियों में।
- 1:14:32इन विपरीत बातों को कहने का मतलब था डियरनेस फुल डेयरनेस परम साहस
- 1:14:44और बुद्ध ने किया। बुद्ध कहते हैं नहीं नहीं है
- 1:14:49परमात्मा कोई परमात्मा नहीं है। और अपने अनुभव से कहा आप भी कहते
- 1:14:55हो नहीं है परमात्मा चारबाक भी कहते हैं, नहीं है कर्म व्यवधान
- 1:15:03कर्म विधान कुछ नहीं होता उसी तल पर बैठे हैं भाई क्या करेंगे मरकस
- 1:15:11भी कहते हैं। नहीं है।
- 1:15:13परमात्मा उसी तल की बात करेंगे, उससे आगे कहना भी नहीं चाहिए।
- 1:15:19बस मैं सिर्फ इन लोगों को ईमानदार कहती हूँ, जैसा जाना वैसा कह
- 1:15:24दिया। अपनी स्थिति को यथावत वर्णन कर
- 1:15:28देना, ये भी एक ईमानदारी होती है। वरन कर दिया उन्होंने, लेकिन इसका
- 1:15:39अंतर नहीं। अगर चारवाक कहते हैं तो कर्म
- 1:15:42सिद्धांत है नहीं। अगर मार्क्स कहते हैं तो परमात्मा
- 1:15:47है नहीं। बुद्ध कहते हैं।
- 1:15:51थोड़ा लेबर बदल क्या थोड़ा नहीं बहुत ज्यादा गुणवत्ता बदल गई।
- 1:15:55बात वही रही। बुध भी कहते है कोई परमात्मा नहीं
- 1:15:58है, लेकिन मार्क्स के चेहरे पे तुम वो लाबनी की शांति न पाओगे।
- 1:16:12ठहराव न पाओगे और मीठी मीठी छैया न पाओगे जो बुद्ध के चेहरे पर लगी
- 1:16:26हिंदुस्तान के लोग बुद्ध के चेहरे को देखते।
- 1:16:33तो प्रभावित हो जाते हैं। अरे इतना लबंड इतना ठहराव क्रांति
- 1:16:39हो गई है इसमें लेकिन फिर ऋषियों की वो बात रहस्य की वो बात अरे आ
- 1:16:49जाती है क्योंकि रहस्यवादी बहुत थे यहाँ।
- 1:16:53जिन्होंने रहस्यपा लिया उनको हम कहते थे सन्यासी कहलो संत कहलो
- 1:17:07उनकी तादाद थी, ऋषि ऋषि मुन्या। उनका प्रभाव क्षेत्र बढ़ा था तो
- 1:17:19इनके शिष्यों ने उन्हें बाहर से भेज दिया।
- 1:17:21जाओ किसी और देश में जाओ और वो बाहर निकल गए।
- 1:17:24इसलिए बौद्ध धर्म जो यहाँ फैला वो ज्यादा नहीं फैला।
- 1:17:31बाहर के मुल्कों में बहुत फैला है, इसलिए मैं कहता हूँ कि होशों
- 1:17:39को सेल्फ अवेयरने से आगे रहस्यमय अभी जाना बाकी है।
- 1:17:50इसलिए इनका एक जन्म और होगा नहीं तो शास्त्र का सबूत है बुद्ध को
- 1:17:59एक कदम और आगे इस संस्थिति से आगे।
- 1:18:07रहस्य में उतरना होगा। इसीलिए कहते हैं मैत्री के रूप
- 1:18:11में फिर से अवतरण होना पड़ेगा। बुद्ध को फिर सम्पूर्णता आएगी तो
- 1:18:21आपको समझाई बात करता कौन? था।
- 1:18:27आदमी करता है, परमात्मा करता है। ऐसा समझलो कोई भी नहीं करता है।
- 1:18:32जो जीस स्थल पर पहुँच गया वैसे ही बात करेगा लव से कहेगा जो करता है
- 1:18:39परमात्मा करता है, पहले के लिए करता है तुम कहोगे।
- 1:18:46ऐसा परमात्मा हमें नहीं चाहिए जो हमें खाने को नहीं और बुद्ध
- 1:18:51कहेंगे परमात्मा नहीं है। जो जीस स्तर पर पहुंचा उसी स्तर
- 1:18:58की बात करे तो ईमानदार भी और प्रमाणिक भी।
- 1:19:03वो भी है उनमें। ऐसे लोग दुनिया को प्रभावित कर
- 1:19:11पाएं। किसके कारण ईमानदारी के कारण यह
- 1:19:16बेईमान होगा जो गप हांकेगा अब इस बात को आप ध्यान में रख लेना।
- 1:19:23उसको दुनिया में मान सम्मान नहीं मिलेगा।
- 1:19:26यद भी वो उम्मीद इसी हिसाब से रखेगा कि मेरी बातों को मान
- 1:19:30सम्मान मिलेगा। गपोड़ी व्यक्ति को कभी मान सम्मान
- 1:19:34नहीं मिलता। बुद्ध ने कोई गप नहीं बोला, मारकस
- 1:19:39ने गप नहीं बोला, देखो जान से कहें।
- 1:19:43और चारबाक ने कोई कप और ऐसा सिद्धांत जो जड़ों को हिला दे, जो
- 1:19:48बेईमान बना दे, जो लुटेरे बना दे जो डाकू बना दे अप्रत्यक्ष रूप से
- 1:19:55कह रहे हैं चारबाक के लूट लो। क्योंकि तुम लूट लोगे तो जियो
- 1:20:06मज़े से बस यही जीवन है एक या जीवित, सुखी जीवित ऋणं कृतवा
- 1:20:18ग्रितं पीवित? बसु में भूत से देहस्य पुनर्गमनम
- 1:20:23कुतह कभी देखा जो मर गया। तर्क बड़ा शानदार है लेकिन तर्कों
- 1:20:29से सत को सिद्ध या असिद्ध नहीं किया जा सकता इसलिए मैंने कभी
- 1:20:37जीवन में शास्त्र। जो शास्त्र अर्थ करने आ गया,
- 1:20:43मैंने पांव पकड़ लिया। भाई कृपा करो उस विराट के पति
- 1:20:49क्या शास्त्र अर्थ करूँ? मैं तो नहीं कर सकता, तुम किसी और
- 1:20:52से शास्त्र अर्थ कर रहे हो इसलिए मैं शंकर को कहता हूँ मुझे।
- 1:20:59शक हो जाता है जो शास्त्रार्थ करेगा वह उसकी वृहदता को देख नहीं
- 1:21:07सका अन्यथा वो शास्त्रार्थ क्यों करेगा?
- 1:21:11वो चुप हो जायेगा, उसकी मूर्ति बंद हो जाएगी।
- 1:21:19उसके ये तुम क्रियाएं करते हो जीवा तालू से लगाते हो, खुद ब खुद
- 1:21:25लग जाएगी छिपक जाएगी जीवा तुम बोल न सकोगे चाहोगे बोलना तो भी न बोल
- 1:21:36सकोगे। और यह शास्त्र करते करते हाथों
- 1:21:39में झंडा उठाई फोड़ते किसको जीतना चाहते हैं?
- 1:21:48जब सब कुछ परमात्मा है तो फिर जीते होगे किसको?
- 1:22:00सिद्धांत देने से कभी कुछ नहीं होता।
- 1:22:04सिद्धांतों के भीतर का राशि भी तो होना चाहिए।
- 1:22:08तुम गन्ना भी देते हो, एक लंबी गति नहीं हो, 20 फुट की हो, लेकिन
- 1:22:17जब खाओ तो रसनो। क्या करोगे ऐसे गन्ने का बस ऐसी
- 1:22:27ही तुम्हारी वोकबुलरी से क्या होने वाला है पीटते जाओ ढोल अपनी
- 1:22:34बुद्धिमत्ता के। लेकिन अगर उसमें रसना हुआ तो तो
- 1:22:40फिर सब तुम्हारा कहासुना बेकार कुछ रखा।
- 1:22:49तकदीर की वह। कोई बोलूं डाली से बिछुड़ा हुआ
- 1:23:09बोलूं। तकदीर की मैं कोई भूल हूँ डाली से
- 1:23:26बिछुड़ा। 713 नहीं 713 नै संग?
- 1:23:44दुनिया। चले भी तो क्या है?
- 1:23:52एक। तू ना मिला एक तू ना मिला सारी
- 1:24:03दुनिया मिले भी तो क्या? एक तुम ना मिला श्री कृष्ण
- 1:24:24गोविंद? हरे मुरारी हिनाथ नारायण यन
- 1:24:41वासुदेव। श्री?
- 1:24:47कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव भितुमात स्वामी
- 1:25:02सखा हार। पितुमात स्वामी सखा हमर हे
- 1:25:16नाथनारां यन वासुदेव। श्री कृष्ण।
- 1:25:28गोविंद हारे मुरारी हेनाथ नारायण वासुदेव ओम।
- 1:25:44आपको कोटे कोटे पढ़ना धन्यवाद।