Latest / Baba ji Vijay Vats / 27 Sep 25 - क्या कृष्ण हिंसक थे? कृष्ण vs बुद्ध | कर्मणे वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन का सही अर्थ? Karma Philosophy
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- 0:01बाबा जी प्रणब श्रीकृष्ण उस तल पर पहुँचकर भी धर्म युद्ध में इतने
- 0:16सक्रिय हैं, लेकिन बुद्ध या महावीर?
- 0:23जैसे उस अवस्था पर जाकर अहिंसावादी हो गए।
- 0:31क्यों एक ही अवस्था में दो दो अलग अलग कार्य विधियों हैं कृपया?
- 0:42मार्गदर्शन कर पूछने वाले का नाम तो कुछ है नहीं।
- 0:50डब्ल्यू ओह डब्ल्यू वर्ल्ड 25। वैसे ये प्रश्न सभी के लिए है एक
- 1:09व्यक्ति के लिए सार्थक प्रश्न पूछा है के भूत।
- 1:18और महावीर उसी तल पर गए और अहिंसावादी हो गए।
- 1:27कृष्ण उसी तल पर गए और धर्म युद्ध में सक्रिय है।
- 1:35हिंसावादी हो गए। हे अर्जुन उठ मेरे द्वारा मारे गए
- 1:43इन प्राणियों का वध कर दे और श्रेय ले ले।
- 1:49प्रश्न बड़ा प्यारा है आइए हम इसके रसातल में चलते हैं।
- 2:00रसातल का अर्थ वह तल जहाँ इसका रस है जहाँ इसका निचोड़ है जहाँ इसका
- 2:08सार है, मोरल है, कन्क्लूजन है। जिसने प्रश्न पूछा है उसने या तो
- 2:26मेरी सारी वीडियो सुनी नहीं, सोनी है तो गुनी ने समझ नहीं आया।
- 2:36सिर के ऊपर से गुजर गया हो। बौद्ध और कृष्ण दोनों एक तल पे
- 2:49नहीं, बौद्ध कृष्ण के तल पर नहीं जा सकता।
- 2:56कृष्ण जब चाहे बुद्ध के तल पे आ सकता है, ये फर्क है और ये फर्क।
- 3:04फर्क बढ़ा विराट मैंने सुस्पष्ट कहा है कि बुद्ध जल्दबाजी कर
- 3:20करुणा के कारण। मानवता दुखी थी।
- 3:27पक्षियों के बुध को मिल गया है आत्मज्ञान और वहाँ से साफ जीना सा
- 3:37पर्दा दिखता है और उसके पीछे परमात्मा की साफ हिरद दिखाई पड़ती
- 3:43है। मैं ये तो नहीं कहूंगा कि बुद्ध
- 3:54जानते नहीं कि परमात्मा है, लेकिन व्याख्या के लिए उन्होंने
- 4:00परमात्मा की जगह शपथ दे दिया। प्रकृति ये बात कुछ अलग है।
- 4:09खुद भी नहीं पहुंचे हैं। तो पहुंचे के बिना अगर परमात्मा
- 4:13के बारे में बोलेंगे, रहस्य के बारे में बोलेंगे तो वो झूठ हो
- 4:17जाएगा। बेहतर यही है जहाँ तक पहुंचे हैं।
- 4:28उसी को कह दिया जाए। परमात्मा को नकार दिया जाए इसलिए
- 4:32अबुद्ध नास्तिक है लेकिन कृष्ण नास्तिक नहीं है।
- 4:38कृष्ण आस्तिक भी नहीं है, ये बड़े मज़ेदार बात है।
- 4:49क्योंकि आस्तिक, तुम उसे मानते हो, जो परमात्मा को मानता?
- 4:53है। कृष्ण मानते नहीं, कृष्ण तो उसका
- 4:57लुत्थक उठाते हैं, रस देते हैं। कृष्ण जानते हैं कि परमात्मा है
- 5:03और मैं ही अहम् ब्रह्मस्त्र अनल इन दो तड़ों का फर्क पहले ही समझ
- 5:16लो कृष्ण के तल में और बुद्ध के तल में समानता बिल्कुल भी नहीं,
- 5:28बुद्ध के तल से दूर। अभी यात्रा शेष है तो कृष्ण का
- 5:37तलाय का बुद्ध नहीं क्यों? कहा कि परमात्मा नहीं है?
- 5:48ये तो मैं नहीं कह सकता लेकिन ये पक्का है कि परमात्मा नहीं है।
- 5:55ये पक्का है कि उन्होंने परमात्मा तक गए नहीं हैं, वो और जब गए नहीं
- 6:01हैं तो व्याख्यान करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
- 6:05आचार्यों के। सर, लोगों की तरह ये झूठियों पर
- 6:13खंडो लोगों की तरह जो सच खंड में ले जाते हैं आपकी ऊँगली पकड़ के
- 6:17मरने। प्रश्न प्यारा है दोनों एक तल पर
- 6:35नहीं है पहला व्यक्ति का जो अंतिम तल होता है।
- 6:48बुद्धि को छोड़ने के बाद बुद्धि को छोड़ने के बाद वो आत्महत्या का
- 6:55ज्ञान होता है और बुद्ध ने वो पा लिया बुद्धि को छोड़कर के मैं कौन
- 7:05हूँ बुध जानते हैं? मैं शरीर नहीं हूँ, मन नहीं,
- 7:16विचार नहीं, भावनाओं ये इंद्रियां नहीं हैं, ये उपकरण हैं ऑपरेटर
- 7:23हैं, मैं नहीं। मैं जो हूँ वो इन सबका साक्षी हूँ
- 7:36जहाँ तक वो ता गए पर उसके आगे मुकाम है, मुकाम है वो जहाँ
- 7:45कृष्ण। बुद्ध कभी भी अशांति का संदेश
- 7:52नहीं दे सकता। है।
- 7:57और बुद्ध डरपोक भी नहीं क्योंकि बुद्ध ने जान लिया।
- 8:04वह डरेगा जो अपने आप को शरीर मानेगा, जिसने अपने आप को उस
- 8:13अविनाशी तत्व की तरह नहीं देखा, विनाशी तत्व से पार नहीं देखा।
- 8:22वह डरेगा, भय खायेगा कपरेगा उसके लिए अभी मृत्यु है इसलिए बुद्धि
- 8:34से अध्यात्म के प्रश्नों का जवाब खोजते खोजते।
- 8:43मार्कस नास्तिक हो जाएंगे, नित से नास्तिक हो जाएंगे, चरवाक नास्तिक
- 8:50हो जाएंगे और इसका अंतिम प्रणाम क्या निकलेगा?
- 8:57मार्कस कहेंगे परमात्मा नहीं है धर्म।
- 9:01अफीम का नशा नीचे कहें गए परमात्मा नहीं व्हाट इस दट बुद्धि
- 9:18से परमात्मा के बारे में कंक्लूषन निकाल लेना, निष्कर्ष निकाल लेना।
- 9:271 दिन तुम्हें पगला। जाएगा अगर तुम बुद्धि से परमात्मा
- 9:33की बातें करने लग गए। आचार्य की तरह तुम देख लेना।
- 9:38ये लोग 1 दिन पागलखाने में होंगे। वैसे तो आज ही पागलखाने में बस
- 9:46मात्र तुम्हें पता नहीं है। इनको भी पता नहीं है, लेकिन
- 9:53बुद्धि से परमात्मा तक नहीं पहुंचा जा सकता।
- 9:56बुद्धि से पागलपन तक पहुंचा जा सकता।
- 9:59है। इसलिए आज नहीं कल ये आचार्य पागल
- 10:04होने वाले हैं नी से आचार्य ही था, मार्कस आचार्य ही था, चारवां
- 10:13का आचार्य ही था और नी से अंत में 11 वर्ष पागलपन में गुजरता है।
- 10:22चारपाई से उठ उठ के भागता है निस्से का जीवन कांत बड़ा ब्याब
- 10:31है, कंपा देने वाला है और मार के से भी अपनी जिंदगी।
- 10:39बड़ी बेदर्दी में काटते है। मार्क के स्वाद की बातें करने
- 10:46वाले और तुम्हे एक बात बता दूँ, इस धरती पर कभी साम्यवाद नहीं
- 10:57आएगा। आ ही नहीं सकता, क्योंकि परमात्मा
- 11:04ने समान सृष्टि बनाई। परमात्मा ने विभिन्न सृष्टि बनाई,
- 11:12अपनी सृजना में विभिन्नता डाली तो तुम यक्षा कैसे कर सकोगे।
- 11:23धरती को यक्सा बना देने का सपना एक पागलपन है।
- 11:30ज़रा सोचिए तुम साधन तो बराबर दे सकते हो बोलता तो मैं भी लेकिन
- 11:38मैं कहता हूँ सभी को बांट दो। ऐसा न हो तुम्हारे ट्रंक भरे पड़े
- 11:44हो, गोदाम भरे पड़े हो और कोई तुम्हारे गोदामों से बाहर भूख का
- 11:49मारा दम तोड़ दे, मैं ये। बोलता हूँ मैं जानता हूँ कि इस
- 11:56सृष्टि में सृष्टि गर्म। समाजवाद, साम्यवाद नाम की चीज़
- 12:02कभी आएगी ही नहीं। इट इस इम्पॉसिबल क्यों हम कोर्स
- 12:09से सुनना बात? को।
- 12:11तुम रोटियां तो सबको। पांच पांच बांट दोगे लेकिन एक तो
- 12:18दो खायेगा। एक पांच खाके भी और मांगेगा।
- 12:26भीतर की अंदरूनी प्रक्रिया है। उसके ज्यादा ही सिट बन गया।
- 12:29भाई ज्यादा हार्मोन बन गए, ज्यादा डाइजेस्टिव सिस्टम जुइकेस बन गए।
- 12:36वो और मांगेगा कहेगा भाई वो। उसका किशोर क्या है?
- 12:44ज़रा सोच के बताना जिसकी दो रोटी से तीन रोटी से भूख नहीं मटे और
- 12:54प्रकृति ने जूस बनाया है, उसने खुद तो बनाया है।
- 12:59हमारे भीतर एक बड़ी शानदार फैक्टरी लगाई परमात्मा ने।
- 13:03लिवर, टैंकरियास, बॉयल, स्टमक ये सब भी अपने अपने जुइसेस क्रिएट
- 13:12करते हैं। अब ज़रा देखो रामलाल का लिवर और
- 13:22श्यामलाल का लिवर रामलाल का लिवर तीन रोटी मांगता है।
- 13:28इतना जूस कहता और श्यामलाल का लिवर 10 रोटी मांगता है।
- 13:35इतना जूस पैदा करता। है।
- 13:39तो रामलाल तो तीन रोटी से संतुष्ट हो जाएगा।
- 13:43श्याम लाल कैसे होगा? यह तो परमात्मा की देन है।
- 13:49भाई तुम्हें नहीं भूख लगी तो इसमें?
- 13:55उसका क्या कसूर जीसको भूख लग गई यहाँ भी समाजवाद लेके आओगे रोटी
- 14:02तो तीन मिलेंगे नहीं नहीं तुम समाजवाद नहीं लेके आ सकते धन का
- 14:10तुम दुबारा कर सकते हो। साधनों का बंटवारा कर सकते हो।
- 14:15प्राकृतिक चीजों का बंटवारा नहीं कर सकते।
- 14:18कोई 3 घंटे सोकर सारी रात बैठ के बिताता।
- 14:23है और कोई सुबह 10:00 बजे किसी को उठाना पड़ता।
- 14:29है। महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन
- 14:38सुबह 9:00 बजे उठते थे। 10 घंटे की नींद लेके 11।
- 14:49बजे सो और सुबह 9:00 बजे उठ और अपने घर को एक सेवक रखते थे।
- 15:02उनका सेवक महीने दो महीने से ज्यादा काटता नहीं है।
- 15:05उनके पास क्यों? क्योंकि रात को सोते तो कहते देखो
- 15:11बात ये है तमख्वा से। ₹1020 ज्यादा ले लेना उस वक्त
- 15:19बहुत होता था, लेकिन सुबह मैं उठूंगा नहीं।
- 15:23मेरी आदत तो बुरी है, तुमने मेरे को उठाना है।
- 15:28किसी तरह उठा दो अल्बर्ट आइंस्टीन ने सिद्धांत दिया इस इक्वल टु एम
- 15:39सी एस का। तो उसके पास कोई नौकर नहीं काटता
- 15:49क्योंकि सुबह वो आराम से कहता, आइस क्रीम की उठ जाओ, घूँ कुमार
- 15:58या बुराड़े मार। थोड़ा सहलाता, डरता और बज गए।
- 16:0511 कहता तुमने मुझे उठाया क्यों नहीं कहता जी, मैंने तो बहुत
- 16:12उठाया, अब जागे नहीं भाई तुम कुछ भी किया करो, उठाया करो।
- 16:22और थोड़े से तानाशाही रवैया अपनाना शुरू कर दिया।
- 16:30थोड़ा सा पानी फेंक देता नहीं जगता, करवट बदल लेता।
- 16:381 दिन तो हद हो गई थपड़ों थपड़ी हो गई और रामू ने कहा कि इसको ऐसी
- 16:47नहीं बात करनी चांटा हमारा, जोश खिंचा के जब कह रखा था तेरे को तू
- 16:54जगा दे ना बस मेरे। एक बार समझना जो कम सोता है,
- 17:02बुद्धिहीन होता है और जो रात को 1:30 बजे लोगों को दर्शनों के लिए
- 17:10उठाता है, वह लोगों को बुद्धिहीन बना रहा है बहुत बड़ा पाप।
- 17:16हिंदुस्तान में चल जाएगा, बाहर के देशों में नहीं चलेगा, अमेरिका
- 17:21में नहीं चलेगा। अमेरिका की तो नींद वैसे ही खत्म
- 17:26हो गई। है वहाँ तो गोलियां ले के सोना
- 17:30पड़ता है। तो सेवक उसके चांटा मारे पानी की
- 17:40पूरी बाल्टी करा दे उसे कोई फर्क नहीं एक बार थपड़ों थपड़े हो गए,
- 17:55उसने कालर खीच लिया, भूमि पर पटक दिया तगड़ा था।
- 18:04खूब लड़ाई झगड़ा हुआ। आखिर मैं आइस क्रीम के लगा भाई
- 18:11देखो मुझे 15 मिनट और सो जा हाँ, फिर मैं उससे।
- 18:22ऐसा था उठा। फिर भी
- 18:35बौद्ध जीस स्थल पे गए हैं और कृष्ण जीस स्थल पे गए हैं बड़ा
- 18:41फर्क है। बुद्ध ने अपने आप को पहचाना।
- 18:47बुद्ध कभी हिंसा करें क्योंकि बुद्ध अब ये शब्दों को ध्यान से
- 18:58हाँ इनको सर्कल में दिलो क्योंकि बुद्ध स्वयं के तल में ही सीमित
- 19:04है, मैं कौन हूँ? उसे आगे का एक दल और भी है।
- 19:11वह कौन है उसको नहीं जानते। मैं कौन हूँ हू एमआइ यह वो जानते
- 19:21हू, इस ही यह वो नहीं जानते। यह जानते हैं कृष्ण?
- 19:32इसलिए बुद्ध कभी हिंसावादी नहीं हो सकता है।
- 19:36अब एक पैमा ना ले लो, जिसने अपने आप को जान लिया, उसका लक्षण है,
- 19:42वह झूठ नहीं बोलेंगे। और जो झूठ बोलता है, झूठ ही बोलता
- 19:52है। उसने अपने आप को जाना तो नहीं,
- 19:59लेकिन सिद्ध करने की कोशिश करेगा कि मैं अवतार इन फर्क को समझ
- 20:06लेना। बुद्ध ने जान लिया कि मैं।
- 20:14मैं कौन हूँ? मैं शरीर नहीं हूँ तो बड़े प्यारे
- 20:18हो गए हैं। उनके वितृश्य करुणा।
- 20:23उपजी है। करुणा उपजी।
- 20:32क्यों तंग हो रहे? हैं ये विचार?
- 20:35व्यर्थ का बोझ सर पे लाते हुए हैं खुद को मैं समझे बैठें शरीर का
- 20:47बोझ, मन का बोझ, विचारों का बोझ, विकारों का बोझ, विषुओं का बोझ
- 20:52कितना बोझ सर के ऊपर ले के चलते हैं।
- 20:55और खोजते हैं कुछ। जबकि तुम ही।
- 21:01हो न तुम शरीर, न तुम विचार, न तुम भावना तुम ही हो, जिसे कहते
- 21:12हू एमआइ। यहाँ तक बुद्धा है, करुणा जैविक
- 21:22है, इसलिए बुद्ध बड़े करुणावान होते हैं, जादू होते हैं, प्यार
- 21:31से बोलेंगे नहीं समझेगा उसे फिर समझाएगा।
- 21:38मरते वक्त उन्होंने इंतजार किया। एक भक्त का वह आया नहीं, उसका
- 21:44प्रश्न न रह जाए तो ओके मेरे जाने के बाद जवाब कौन देगा?
- 21:53बुद्ध अच्छी तरह से जानते हैं। हजारों साल नरगिस अपनी बेनौरी पे
- 21:59रोती है बड़ी मुश्किल से होता है जब मन में दीद और पैदा मैं चला
- 22:08जाऊंगा फिर कौन कब आए कौन जान। तो इंतजार किया।
- 22:18आखिर में वह व्यक्ति आया तो बुद्ध ने प्राण छोड़ दिया।
- 22:29बुद्धों का अंतिम प्रयास होता है कि हम प्रत्येक व्यक्ति की शंकर
- 22:33ने व्रत करके जाएं। कौन जानें?
- 22:43फिर बुध कब आएँगे? ठोकर मारकर सिंघासुओं को हिरे
- 22:50जवाहरातों के सिंघासियों को वणों में मांगकर खाएंगे।
- 22:58कौन जाने वो कब आएँगे? इसलिए बुद्ध जाते जाते सभी के
- 23:16सवालों का मुश्किलों का तकलीफों का गांठों का हल कर जाना चाहते
- 23:23हैं। क्योंकि बुद्ध जानते हैं एक ही हल
- 23:28टु नो दाय सर हूँ एमआइए जान लो, तुम्हारे सभी क्लेश, कष्ट, विकार,
- 23:38दुख, दर्द सब विधा। तुम्हारी सारी तकलीफ है तुम्हारी
- 23:52इस समान्यता से पैदा होती है कि तुम शरीर हो, तुम विचार हो तुम
- 23:58भावनाओं तुम्हारी भावनाओं को कुछ ठुकरा देता है।
- 24:02तुम अदालत में जाकर चैलेंज करते हो, जबकि भावनाओं तुमने ही बनाई
- 24:05होती है। अभी एक 2 दिन पहले की बात है।
- 24:12विष्णु के बारे में कुछ हमारी चीज़ बवाल मच गया है।
- 24:22अब ये बवाल किसने मचाया मूर्खों क्योंकि समझाने वाले आज भी समझा
- 24:30रहे हैं के नाम देवकी माता को ठाकुर जी ने गर्भवती किया।
- 24:36जबकि ठाकुर तो स्टील के हैं या पत्र के हैं।
- 24:39उनमें तो जान है रे जिसके भीतर जान नहीं उसके भीतर परम कैसे पैदा
- 24:45होगा? नामदेव के मानने वाले कोई ऐतराज
- 24:53ही नहीं करते इस बात का। अब कुंती के साथ किसने संबंध
- 25:02बनाया यह उजागर न हो जाए क्योंकि राजघराने की है तो फिर कह दिया
- 25:08सूर्य देव आए। ज़रा सोचो तो।
- 25:15जिसका ऊपरी सतही तापमान 5000 डिग्री सेल्सियस है और धरती पे
- 25:21उतर के कुंती के साथ सहवास करेगा तो कुंती भस्म न हो जाएगी।
- 25:28कुंती बचत वो क्षेत्र बचेगा, ये धरती बचेगी और आंख हो जाएगी जल
- 25:38से। समुद्र उबल जाएगा, सभी प्राणी मर
- 25:44जाएंगे, सूरज धरती पर उतरेगा। लेकिन बात छुपाना है और अंधभक्त
- 26:04कुछ भी मानने को तैयार बैठा है। कुछ भी कह अच्छे दिन आएँगे आएँगे।
- 26:19पेट्रोल तेज हो रहा था, उससे पूछा क्या धवक्ष बड़ी अजीब सी दलीलें
- 26:26देते हैं? ये लोग पेट्रोल महंगा हो गया है।
- 26:34वह उत्तर देता है, मारा मारा सा हड्डियों ही हैं।
- 26:41और कितना? फिर तुम कारों का इस्तेमाल क्यों
- 26:43करते हो? सैकल पे आया करो बढ़जी शुरू हो
- 26:46जाएगी एक पंत, दो कॉल शरीर भी चुस्त दुरुस्त रहेगा, भूख भी
- 26:52अच्छी लगेंगी। नींद भी बढ़िया आएगी।
- 26:53थक जाओ एक बार में कितने काम सिद्ध हो गए?
- 26:58एक तीर से कितने से कारों के तुम कारों पे जाते हो?
- 27:03अरे भाई जिसने 100 किलोमीटर जाना है वो सैकल पे जाएगा क्यों तुम
- 27:10परेशान युग में ले के जाते हो बंदे को?
- 27:15और फिर कहते अगर ये तो 500 भी हो जाए तो मैं तो लूँगा और सब?
- 27:21क्या करूँ अब सिंहासन पर बैठा कोई और है?
- 27:26सिंहासन पर मैं होता तो मैं दो लाइनें लगा लेता हूँ एक के ऊपर
- 27:32लिखा होता भक्तों के लिए। एक के ऊपर लिखा होता, साधारण जाने
- 27:41के लिए भाग्य तो है तो ₹500 वाला डलवा दो सरकार के खाते में चला
- 27:50जाएगा। साधारण है जो आज का भाव है उस
- 27:56खड़ी खिड़की पे चले जाओ तो तुम देखते भक्तों वाली खिड़की के ऊपर
- 28:03कोई भी नहीं होता, बस कहने की बात है, इनकी जबान ज्यादा चलती है।
- 28:21विष्णु के बारे में गवई तो मैं तो बेचारे इनका काम नहीं है धर्म का,
- 28:32इन्होंने तो बौद्ध धर्म अपना लिया बस धर्म के बारे में कोई ज्यादा
- 28:35ज्ञान नहीं है मेरे को। किताबी ज्ञान है और किताबी ज्ञान
- 28:39तो त्रुटिकल होता है। प्रैक्टिकल ज्ञान इनमें नहीं,
- 28:45लेकिन मैं जवाब देता हूँ, इन भक्तों को विष्णु है मुझे मेरे इस
- 28:51बात को विष्णु है, लक्ष्मी है। अगर किसी ने विष्णु देखा हो तो
- 29:02मेरे। पास आ जाये।
- 29:08किसी ने ब्रह्मा देखा हो, शंकर देखा हो तो मेरे पास आ जाये,
- 29:14हनुमान देखा हो? दुर्गा देखी हो कोई देखा हो काली
- 29:18देखी हो मेरे पास आज तुम्हारी मन की कल्पनाएं प्रतीकात्मक चिन्ह
- 29:32सिम्बोलिक रेप्रेसेंटेशन्स। तुमने मान लिया है बस जैसे
- 29:40अलजेब्रा में हम मानते है मान लो सुपोज़ ए इक्वल टु सेवेन बस यही
- 29:47कहानी यहाँ है। लेकिन ठीक कहा उसने तुमने
- 29:53मूर्तियों से क्या लेना है? अंडे लेनी है, तुम्हें विष्णु
- 29:58होते हैं, क्यों? व्रत की बातों पे वक्त खराब करे?
- 30:06इसलिए हिंदुस्तान के भीतर रिसर्चर पैदा नहीं हो पाए।
- 30:11इन्वेंटर पे तुम बात करते हो इधर तुम बात करते हो।
- 30:19जापान की जापान एक नास्तिक मुल्क है।
- 30:25तुम बात करते हो चाइना की चाइना नास्तिक मुल्क है।
- 30:33तुम कहोगे वो तो बोध आती है बोध खुद नास्तिक है बोध कहते हैं
- 30:39परमात्मा है नहीं। तुम विष्णु के ऊपर इतना विवाद
- 30:53किये हो, कोई व्यक्ति सिद्ध कर सकता है।
- 30:59क्या विष्णु सिद्ध छोड़ो देखा है? ये वो ही लोग हैं जो सदा
- 31:10मस्ज़िदों के भीतर मंत्र तलाशते रहते हैं।
- 31:14ये इन्वेंशन होती है। देखो वहाँ तलाश लिया वहाँ तलाश
- 31:19लिया। सारी उम्र यही करते रहेंगे और धाम
- 31:23से अगरपक मर जाएंगे। ना खुदा ही मिला ना वसाले सनम, ना
- 31:31इधर के रहे ना उधर के रहे। राम नाम सत्य है, एक बंदा करते
- 31:36है। कोई भी क्षण अंधभक्ति मैंने
- 31:49स्त्री नाग करपनाओं का मूड जाल चाहिए।
- 31:57इन्हें दिल के बहलाने को गालिब ये ख्याल।
- 32:07मात्र ख्यालों को तुमने सत्य मान। लिया है।
- 32:13मैंने बड़ा तराशा, उस डिश में कहीं नहीं मिला क्योंकि मेरे पास
- 32:19कुबेर आ गए थे। कुबेर कहते बाबा देखो जब शादी की
- 32:26इसने लक्ष्मी के साथ पहले जन्म में तो इसके पास पीसी नहीं थे तो
- 32:37देवताओं का कोश अध्यक्ष में हूँ। मेरे पास कोश पड़ा था।
- 32:45मैंने कहा भाई जिम्मेवारी दे तेरे ऊपर तो कोई सुधार नहीं जैसे तैसे
- 32:51करके बोले क्या पीछे कमोडता नहीं वापसी नहीं करते बाबा एक बंदे तुम
- 32:59ही हो जो जला सकते हो। तो मेरे पैसे दिलवा दो ना इसे
- 33:09मैंने कहा मैं ढूँढता हूँ इसको आज तक नहीं मिला मुझे अगर तुम्हें
- 33:15मालूम हो तो मुझे बता दो ज़रा। जा के पहले चुटकी करके अपने पैसे
- 33:29इसे कौन चकाएगा भाई कहानी है? एक बार भगवान विष्णु और माता
- 33:37लक्ष्मी के बीच में कलह हो गया। विवाद ज्यादा बढ़ गया।
- 33:44लक्ष्मी खीर सागर छोड़कर चली गई। विष्णु ने बहुत ढूंढा लेकिन
- 33:53लक्ष्मी मिली नहीं। नहीं मिली।
- 33:59लक्ष्मी तो आकर व्यक्तेंद्र पर्वत तिरुपति जी आंध्र प्रदेश में
- 34:11वेंगटेश्वर में रहने लगे। क्या करें विचार शीर सागर छोड़
- 34:17दिया। बाकी तो उनको क्षीरसागर में तलाश
- 34:22रहे हैं, वो यहाँ वैंकटेश्वर में बैठे हैं क्या हुआ कि लक्ष्मी जी
- 34:36फिर से पैदा हुए हैं? इंतजार बहुत किया विष्णु जी ने।
- 34:44लेकिन लक्ष्मी नहीं लौटी तो यहाँ के रहने लगते वेंकटेश्वरश बड़ी
- 34:56मजेदार कहानी है कि पद्मावती देवी के रूप में जन्म लिया।
- 35:01लक्ष्मी और विष्णु जी मोहित हो गए।
- 35:09विवाह का प्रस्ताव रख दिया। पद्मा पद्मावती दे भी बड़ी अमीर
- 35:18थी। वो कहती ठीक है, लेकिन भव्य।
- 35:22विवाह होना चाहिए सारे देवलोक को बुलाया जाए, सभी को बुलाया जाए
- 35:30देवलोक का नाम सुनकर वेंकटेश में रहने वाले विष्णु तो बुआ बुआ करने
- 35:38लगे। बुआ, बुआ, बुआ क्यों?
- 35:43पैसे कुबेर के पहले ही देने थे और कुबेर को कैसे नमक न दें?
- 35:54उन्होंने कहा, कोई बात नहीं, अपूर्ण बुला लेंगे।
- 36:01चलो तुम शादी के लिए हाँ। करो।
- 36:03पद्मावती देवी ने हाँ ठीक है वेंकटेश महाराज वेंकटेश का विवाह
- 36:17निश्चित हो गया। कुबेर भी आये।
- 36:24आमंत्रित किया तो मैंने ही कह दिया वहाँ बैठे कुबेर वहाँ चले
- 36:37गए। देखते ही विष्णु एकादको बोलना
- 36:43नहीं। तेरे पैसे चुका दो ना बाबा
- 36:47जिम्मेवार है, उनपे तो इतवार है ना कहता हूँ, उनपे इतवार तो है
- 36:52लेकिन क्या करूँ तू गया कहाँ था? शादी धूमधाम से हो जाने दे,
- 36:59बढ़िया पार्टी हुई है, उल्लू की सवारी है।
- 37:12तो शादी धूमधाम से क्या होनी थी? तभी लेना था ऋण कर्जा ज्यादा
- 37:18धूमधाम से होनी थी तो कहते फिर ऐसा करो, तुम देने तो पहले भी हैं
- 37:24कई बार ले के मुकर। तो अब तुम थोड़ी सी धनराशि ज्यादा
- 37:31दे दो, इकट्ठे मोड़ दूंगा, देखो बड़ी असामी है इससे ही भाग लूँगा
- 37:38सारी धन दौलते उसके पास ही होती है और समझा के उसने और पीसी से दी
- 37:45है। कुबेर से कहने लगे कि देखो कलयुग
- 37:56के अंत में वेंकटेश प्रसाद अब जान से सुनने वाली बात है जो चिढ़ावा
- 38:02आएगा ना भक्तजनों का, उनमें से तेरा ऋण चुकता कर।
- 38:07दूंगा। कलयुग कभी आ गया, वेंकटेश्वर।
- 38:12के पास सबसे ज्यादा पीसे हैं। सबसे ज्यादा चढ़ावा आता है और
- 38:19कुबेर मुझे तनकरता और विष्णु जी पता नहीं कहाँ पे है अब ये बात की
- 38:29जान उस बेचारे शरीफ व्यक्ति के। ऊंट पटांग बोल रही है, लेकिन मैं
- 38:42कहता हूँ तुम विष्णु को देखा है तो मेरे पास लेके आओ, पहले तो मैं
- 38:48बुलाऊंगा। कुबेर को मेरी जिम्मेवारी तो
- 38:51उतरे। तुम ज्यादा मत कर सक सनातन से
- 39:05हिंदू जब से हुआ है तब से अंधभक्त पैदा हुए जा रहा है।
- 39:16इतने गबोट शंख इन्होंने लिख दी है और फिर गबोट शंखों को इसने सही भी
- 39:22मान लिया। यही तो लायकात है यही तो इनके
- 39:30भीतर की प्रज्ञा। है।
- 39:33क्वालिफिकेशन। कि हर एक गप को ये ठीक मान लेते
- 39:37हैं। इनसे कह दो वो देखो हम जब बना हुआ
- 39:41ये कहेंगे बिलकुल ये तो चार मंजिला है, होगा कुछ भी नहीं।
- 39:55बुध आत्म क्या नहीं बुध ने जान लिया कि मैं कौन लेकिन उससे आगे
- 40:06कर सकता है। वह कौन है वो इस?
- 40:18वह रस रूप जिसका उपनिश्चितों में वर्णन है रसोवैसा वह कौन अगर बुध
- 40:30थोड़ा सा आगे चलते। उस रस को जाएंगे, वहाँ जाकर
- 40:38तमन्नाएँ समाप्त हो जाती। है।
- 40:41जीने तक की तमन्ना समाप्त हो जाती है।
- 40:46महावीर भी उसी स्थान पर पहुँच गए। तुम बहुत दो बार महावीर को यक
- 40:51सहमत ही ना करो। महावीर कृष्ण के बराबर के हैं
- 40:58विपरीत छोर। पर।
- 41:02कृष्ण बात करते हैं समर्पण। की महावीर बात करते हैं संगत।
- 41:13लेकिन दोनों एक छोर पे बुद्ध अलग है।
- 41:17थोड़ा बुद्ध आगे चले नहीं, महावीर आगे चले इसलिए 12.5 साल लग गए बुध
- 41:24को 6.25 साल में। इसलिए बुद्ध और कृष्ण को एक ही तल
- 41:34पर मत समझा। जो बात बुद्ध कहेंगे वो कृष्ण की
- 41:42बात में। बोद्ध अहिंसा ही बता सकते हैं,
- 41:46अहिंसा नहीं बता सकते तो क्या कृष्ण हिंसावादी हैं?
- 41:57कृष्ण परिस्थितिवादी हैं। जहाँ शांति की जरूरत है वो शांति
- 42:05द्रोत भी बन के जाते हैं। गए भी थे दुर्योधन की सभो में और
- 42:14जहाँ अशांति की जरूरत है, युद्ध की जरूरत है, वहाँ पांच ही जन से
- 42:18बिगुल भी बजा देते हैं। और दुर्योधन ने जब कहा कि इस
- 42:22ग्वाले को कैद कर लो? तो वहाँ शक्ति प्रदर्शन की भी
- 42:28जरूरत होती है। किसी एक धारा पर चलने वाले कृष्ण
- 42:35नहीं हैं बहु आयामी हैं, लेकिन बुद्ध एक आयामी हैं वन डायमेंशन
- 42:41यही फर्क है दोनों में। बुद्ध अहिंसा की ही बात करें
- 42:52कृष्ण मल्टी डायमेंशन वो सब समेट लेते हैं भगवान राम भी 12 कला 14
- 43:03कला सम्पूर्ण बताते हैं। लेकिन कृष्ण 16 का लश्कर जितनी
- 43:10कलाएं होती हैं उतनी ही कलाएं से वह झूठ भी बोल लेते हैं।
- 43:16वह हिंसा भी करेंगे। वक्त पे जीस चीज़ की जरूरत होगी
- 43:23वही करेंगे। तो मैं थोड़ा सा वहाँ एक चीज़
- 43:29छोड़ दिया था समाजवाद कभी नहीं आएगा, साम्यवाद कभी नहीं आएगा एक
- 43:36तीन रोटी खायेगा सारी उम्र पर 110 रोटी खायेगा सारी उम्र समाजवाद
- 43:40कहाँ से? एक चल भी ना सकेगा एक दौड़ सकेगा
- 43:48मैराथन की एक कुश्ती लड़ेगा, जीत जायेगा वार्ड चैंपन होगा एक
- 43:58बेचारा कुश्ती लड़ने के योग्य नहीं होगा।
- 44:01जन्मजाति ही पोलियो से ग्रस्त होगा।
- 44:04समाजवाद तो तुम कभी ले के आये ही नहीं सकते क्योंकि तुम संसार में
- 44:08सिर्फ बराबर बांट सकते हो, जो परमात्मा ने तुम्हें पदार्थ दिए
- 44:14हैं, उनको बराबर बांट सकते हो लेकिन परमात्मा के विधान को कैसे
- 44:18बांटोगे? बुद्ध अहिंसावादी हैं मात्र बहू
- 44:32प्रकृति को सब कुछ समझते हैं। एव्री एक्शन दट।
- 44:35इस इक्वल एंड अपोज़िट एक्शन कर्म का फलाएक।
- 44:44लेकिन कृष्ण कहेंगे कर्म का फल आएगा, लेकिन मैं तुझे माफ़ भी कर
- 44:50दूंगा और यही बात जब कुरान में बोली गई तो तुमने भाभी लफड़ा कर।
- 44:59कृष्ण कहेंगे बिलकुल तुम मेरी सड़ में आ जाओ हैं तुम सर्वो पाप्य
- 45:03देव मोक्ष मैं तुझे माफ़ भी कर दूंगा, लेकिन माफी के बात बहुत के
- 45:13आगे नहीं छोड़ते। बहुत कहेगा अप दीपो भव।
- 45:18लेकिन कृष्ण कहेंगे नहीं, नहीं तुम कुछ तुम अपना रास्ता बन ही
- 45:22नहीं सकते हो शिष्य अपना गुरु कैसे बन सकता है?
- 45:27तुम मेरी शरण में आजा मैं तेरे गुरु बन के तेरे मार्ग का
- 45:33प्रज्वलित करूँगा और तुझे मार्ग के दर्शन करूँगा, तू पहुँच ही
- 45:36जायेगा। तेरे सभी पापों को हरण कर दूंगा।
- 45:40बुद्ध और कृष्ण में बड़ा फर्क है। तुमने एक तल पर कैसे कर लिया?
- 45:45बुद्ध बुद्ध का लेवल कृष्ण के लेवल से
- 45:59बड़ा बेहेन है। अगर सही सही अक्षर में उपयोग करूँ
- 46:04तो बुद्ध का लेवल। कृष्ण के लेवल से बड़ा लेकिन तुम
- 46:11पहले बुद्ध के लेवल तक तो आओ, ये सवाल तुमको पूछता है।
- 46:17अभी तुम खोपड़ी के ऊपर बैठे बैठे। अभी तुम सब कुछ जानना चाहते हो
- 46:27सूचनाओं के माध्यम से चलना नहीं चाहते, तुम सिर्फ थ्योरी चाहते हो
- 46:38प्रयोग नहीं करना चाहते एक्स्पेरमेन्ट नहीं करना चाहते।
- 46:45यही तुम्हारी देवता है, बिना चले मंजिल करीब आएगी कैसे?
- 46:51तुम वहीं खड़े खड़े रास्ते का सारा मैप खंगाल लोगे।
- 46:56ऐसा ऐसा रास्ता होगा ऐसा ऐसा कुछ आएगा माइलिस्टों में आएगा।
- 47:01ये नजारे होंगे लेकिन चलोगे है? नहीं तो एक कदम भी मंजिल करीब
- 47:07नहीं आएगा। बस यही है तुम्हारे।
- 47:14हालत आशा है दोनों एक ही तल पर हैं, एक अहिंसावादी है और एक
- 47:23अहिंसावादी है। ये कहते हैं तुम ही अपने रस्ते के
- 47:29पथ प्रदर्शक बनो। दूसरा कहते हैं तुम तो नहीं बन
- 47:32सकते तुम कैसे बनोगे मेरी क्षण में आ जाओ मैं तुम्हारा रास्ता
- 47:39प्रजर्वित करूँगा बताऊँगा मैं खुद ही ले जाऊंगा।
- 47:44मरने के बाद नहीं जीते जी लेके जाऊं क्वेश्चन कहते हैं मरने के
- 47:48बाद नहीं मैं तुम्हें जीते जी लेके जाऊं ऊँगली पकड़ के, उन
- 47:56रस्तों पे हूँ तुम मेरे साथ। होगे।
- 48:00मैं तुम्हे जीतेगी, सच घंटा लेके जाऊंगा।
- 48:09आज पाखंडियों से दुनिया बड़ी बड़ी है।
- 48:14मजबूरी उनकी है। मैं जानता हूँ मजबूरी है कि उनकी
- 48:20इच्छाएं बहुत हैं। अब सुनिए मजबूरी।
- 48:26इच्छाएं बहुत हैं, जरूरतें बहुत हैं वा सुनाएं बहुत हैं, कल्पनाएं
- 48:37बहुत हैं, स्मृतियां हैं, किसी से बदला लेना है, किसी ने गाली निकाल
- 48:42दी थी। 40 वर्ष से पहले कोई घरेलू झगड़ा
- 48:47है, अभी तक दिमाग में घुसाए हुए हैं, वो उनका बदला लेना है, तुम
- 48:59बुद्धि से ही काम लेते हो। और अगर तुम बुद्धि से परमात्मा को
- 49:06भी खंगालने की चेष्टा करोगे तो याद रखो बुद्धि से परमात्मा मिलता
- 49:11है। फिर पागल होने के सिवा और कोई
- 49:18चारा ही नहीं है। रास्ता ही नहीं है तुम पागले
- 49:22क्यों जाओगे? नीच से मरा?
- 49:27बुरी हालत में भरा और चार बाकों का तो अंत ही कोई ऋणम कृतवा गंतम
- 49:37पे चार बाकों को तो तुम पैसा उधार दे तो वो वापस नहीं करेंगे।
- 49:45चार बाकों की बड़ी बेइज्जती हुई, उन्हें उधार मिलना बंद और इस थाने
- 49:52घड़िसलिया और कचहरियों में लगे वो कहते हैं कि हमने लेने हैं तो फिर
- 50:01इंटरनेशनल मंच के ऊपर उनकी बेइज्जती होगी ना यही तो हो?
- 50:09गाँधी उपवास पर बैठ गए ₹55,00,00,000 दो भाई पाकिस्तान
- 50:13को जब वायदा हुआ तुमने जमीन ज़्यादा ले ली ₹55,00,00,000 दो
- 50:23तुम्हारे पास संसाधन जल्द हैं। तो एक देशभक्त ने आकर गोली मार दी
- 50:36जैसे उससे बड़ा देशभक्त कोई। है ही नहीं।
- 50:55मेरे पास बहुत से वाकित आते हैं बाबा घर में झगड़ा रहता, घर बाजू
- 51:01के साथ मैं कहा तुम चिंता मत किया करो जब विष्णु जी और लक्ष्मी जी
- 51:10में झगड़ा हो जाता है। तुम तो आम इंसान हो, थोड़ा सा
- 51:17उनसे शिक्षा ग्रहण किया करो। झगड़ा तो।
- 51:21उनके भी होता है। ये झगड़े चलते ही रहते हैं।
- 51:28जहाँ भी कमिटमेंट होगी वहाँ झगड़े होंगे।
- 51:37और पंडित जी अच्छी तरह से सभी देवताओं को बुला के आता कोई मंत्र
- 51:42पढ़ते हैं, सभी देवताओं को बुला के सात वचन ले लेते हैं और पंडित
- 51:50जी को खुद अगले जन्म का नहीं पता, लेकिन इनको सात जन्मों में बांध
- 51:54देते हैं। यानी पंडित जी बंधन के कारक हुए।
- 52:06ये लोग मुक्ति कैसे देंगे? फेरो करने वाले?
- 52:13बंधन में बांधने वाले हैं मुक्त कैसे करेंगे मुक्त कोई शांति नहीं
- 52:18करेगा पंडित मुक्त प्रश्न पौराणिक है, तुम्हारी मान्यता है।
- 52:37मान्यताओं के ऊपर आधारित है। न तुम्हे बुद्ध का कुछ पता, न
- 52:45तुम्हे कृष्ण का कुछ पता, लेकिन संक्षेप में बता दूँ कि बुद्ध
- 52:51प्रकृति पे भरोसा करते हैं नियम के भीतर से।
- 52:57जैसा करो तो वैसा भरो कृष्ण कहते हैं जैसा करोगे वैसा भरोगे अगर
- 53:07तुम प्रकृति तक सीमित रह गए, ध्यान से सुन लेना।
- 53:13कृष्ण की बात ये मोरल है। अगर तुम प्रकृति तक ही सीमित रह
- 53:22गए तो जैसा करोगे वैसा भरोगे यानी अगर तुमने कर्म कर्ता भाव से किया
- 53:31तो भोगना भी तुम्हें ही पड़ेगा अगर तुमने अकर्त भाव से किया यानी
- 53:41तुमने। मुझको समर्पण करके कर्म किया, फिर
- 53:46तुम्हें नहीं भोगना पड़ेगा। कृष्ण कहते हैं, मैं नियमों से
- 53:56पार और हैं, बस यही फर्क है। कृष्ण का बुद्ध नियमों के भीतर
- 54:06रहते हैं। और कृष्ण नियमों से पार चले जाओ।
- 54:14कृष्ण कहते हैं, मुझे कोई नियम बांधता नहीं, मैं आजाद हूँ, मैं
- 54:17मुक्त हूँ वो तो तुम्हें नहीं कह सकते ना मेरी शरण में आजा मैं
- 54:28तुम्हें मुक्त। वो तो तुम्हें कहेंगे भाई अपना
- 54:33देखा बड़ा विचार अपने पाथों पर दर्शक बनो, अपना दिया खुद जलाओ
- 54:43कृष्ण कहेंगे नहीं तुम्हारा दिया मैप।
- 54:56मैं बनूंगी पिया, मैं बनूंगी पिया, तेरे पथ का दिया दिया पथ के
- 55:10जलाने दे। साथ ही ना समझ कोई बात नहीं मुझे
- 55:24साथ तो आने दे जीस पथ पे चला। दोनों एक फर्क है।
- 55:39बुध कहेंगे आप दीपो भवा कृष्ण कहेंगे अपनी बागडोर मेरे हाथों पे
- 55:45छोड़ते हैं। अपना दीपक खुद मत बन मेरे हाथों
- 55:52में सौंप दे अपने जीवन की कमान मैं तेरे पथ का दिया बनकर तेरा
- 55:58मार्ग प्रजावित करूँगा मैं तुम्हें बताऊँगा कैसे मैं तुम्हें
- 56:02चलाऊंगा मैं तुम्हें नाचाऊंगा जैसा नाचाऊंगा वैसे न चले।
- 56:11अगर अंतिम बात कहूं तुमसे सत्य तू ही रह पहले बुद्ध के मार्ग पे आना
- 56:25पड़ता है फिर बुद्ध का मार्ग छोड़ना पड़ता।
- 56:321 दिन खुद के मार्ग से तुम थक जाओगे, लेकिन एक मार्ग ऐसा है
- 56:41जहाँ तुम कभी नहीं थकोगे वो मार्ग है कृष्ण।
- 56:51बुध बच जाते हैं। मैं हो के बच जाते हैं, मैं शरीर
- 56:56नहीं हूँ, मैं भावना नहीं हूँ, मैं विचार नहीं हूँ, लेकिन मैं
- 57:01हूँ साक्षी हो के बच जाते हैं वो लेकिन कृष्ण साक्षी हो के।
- 57:12कृष्ण कहते हैं बस मैं ही मैं मैं ही मैं हूँ, मेरे सिवा कुछ दूजा
- 57:19नहीं तो बुध नियमों में चलेंगे। बुध कहेंगे नियमों से पार तुम चल
- 57:27ही नहीं सकते, चलना भी मत। कृष्ण कहेंगे तुम नियमों को
- 57:33छोड़ो, मेरी शरण में आ जाओ। कृष्ण कहेंगे तुम पापी हो तुम
- 57:44पन्यात्मा हो। तुम समर्थ हो, तुम असमर्थ हो, तुम
- 57:52असहाय हो, लेकिन बात तो ये है कि तुम मेरी क्षण।
- 58:02नियमों से पार की बात है जो कभी आचार्य तुने नहीं सुना।
- 58:08आचार्य बात करेंगे बस बुद्ध के तन तक ज्यादा से ज्यादा खुद का आपका
- 58:15उन्होंने देखा नहीं होगा। अंधों की तरह बुद्ध की बातों तक
- 58:19ही आएँगे। और कृष्ण की बातें भी अगर बताएंगे
- 58:23तो सावधिक रूप से बताएंगे। अनुभव के रूप से नहीं बताएंगे
- 58:31अनुभव तो उन्हें कुछ। भी नहीं है दोनों एक तल्पे में।
- 58:42बुद्ध के मार्ग से तुम 1 दिन थक जाओगे और तुम देखो इसलिए तो बुद्ध
- 58:46तो खत्म हो गया, बहुत ही खत्म हो गया।
- 59:01बड़ी प्यारी कहानी है के बुद्ध के पास ही स्त्रियाँ हैं।
- 59:08कहानी मजेदार है, लेकिन इसका अर्थ नहीं तुम्हे पता?
- 59:11सुन्नी होगी। बहुत बार स्त्रियां गई।
- 59:14कहती हैं हमें भी बिछु नहीं बना लो, हमने क्या बिगाड़ा है?
- 59:23उस दिन पहले टालमटोल किया लेकिन स्त्रियाँ नहीं मालूम।
- 59:32अब गौतमी आ गई गौतमी। कान जिसने बुद्ध को पारा था
- 59:43महामाया की बहन जिसने पारा था बुद्ध को, वो तो सात दिनों में
- 59:50स्वर्गवास हो गई थी। बुद्ध की मत पारा था।
- 59:55गोतमी ने गोतमी कहने की प्रभु ऐसे न।
- 1:00:01तुमने वो दर्द देख लिया है, हमें भी अपने शरण में लेना, गौतमी की
- 1:00:09बात को ठुकरा न सके, वो तो कहते ठीक।
- 1:00:17मैं इन स्त्रियों को दीक्षा दे देता हूँ, लेकिन मेरी बात गौर से
- 1:00:21सुन लेना मेरा धर्म 500 वर्ष से ज्यादा रहता है क्योंकि बुद्धि
- 1:00:31जानते हैं मेरा मार्ग संकल्प का मार्ग स्त्री का मार्ग समर्पण का
- 1:00:39मार्ग है। समर्पण का मार्ग संकल्प में मिल
- 1:00:45जाएगा तो खिचड़ी बन जाएगा, समर्पण संकल्प को बिगाड़ देगा, खिचड़ी हो
- 1:00:55जाएगी, अन्नकूट बन जाएगा और मेरा धर्म हो जाएगा, शुद्ध नहीं हो
- 1:01:00जाएगा। आज वही हुआ है।
- 1:01:07ना व्यक्ति संकल्प में पूरा है, ना व्यक्ति समर्पण में पूरा है।
- 1:01:11तुम कहीं भी तो पूरा नहीं हो इसलिए बीच में अटके हो, लटके हो,
- 1:01:19पेंडुलम के तरह। बुद्ध कर्मों का फल प्रकृति पर
- 1:01:33छोड़ते हैं। अब ये गौर से सुन लेना बुद्ध
- 1:01:38कर्मों का फल प्रकृति पर छोड़ देते हैं।
- 1:01:41न्यूटन की तरह अब रिएक्शन दर्ज करेंट अपोज़िट ट्रक कर्म विधान के
- 1:01:48अनुसार छोड़ देते हैं लेकिन कृष्ण कहते हैं कि कर्मों के फल को मैं
- 1:01:59बनाता हूँ। इन शब्दों को तुमने सुना भी बहुत
- 1:02:06होगा, दोहराया भी बहुत होगा, लेकिन इन अर्थों को नहीं, तुमने
- 1:02:09जाना होगा। वे शब्द सुनिए, कृष्ण का कर्मण्य
- 1:02:16बात का रस्ते माँ फले सुक पहला शब्द बुद्ध काव्य अपने दीपक स्वयं
- 1:02:28बनो अपदीपो भावा कर्मण्य व अधिकारसते तू कर्म कर तू कर अपना
- 1:02:36पथ प्रदर्शन कर दूसरे को अपने जीवन में मत आने दे।
- 1:02:44तू खुद स्वतंत्र हो के करमकर अपने कृष्ण जो अगला सवाल बोलते हैं,
- 1:02:50बात बोलते हैं उसका अर्थ तुने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा, ना
- 1:02:58ही किसी शास्त्र में लिखा होगा। न ही किसी गुरु ने तथाकथित
- 1:03:05पहुंचने वाले ने बताया माँ फले शु कदा चुना।
- 1:03:10मतलब प्रकृति की बात ही नहीं करते, वो मैं की बात करते हो।
- 1:03:18मा फलेशु कदाचन। फल तो मैं दूंगा फिर यानी कृष्ण
- 1:03:31ये भी कह सकते हैं क्या फल तो पर करते, क्या अक्शॅन का रिएक्शन
- 1:03:37आएगा? प्रकृति के हिसाब से आएगा और उतना
- 1:03:42ही आएगा जीतने वेग से तुमने गेंद फेंकी, दीवार पे उतने ही वेग से
- 1:03:48आएगा, उसी अनुपात में आएगा, लेकिन कृष्ण का यह मतलब?
- 1:03:54तुम समझे नहीं सकता है? कृष्ण का थोड़ा थोड़ा मतलब बाइबल
- 1:04:00ने समझा क्षमा करना कुरान ने समझा, मुझसे पूछा गया बाबा आपके
- 1:04:13लिए अर्ध चंद्रमा बनता है कि शीर्षक है तो मैं बता दूँ बताना
- 1:04:18नहीं चाहता था। लेकिन कल रमेश ने पूछ लिया तो
- 1:04:23मैंने बता दिया, मैंने कहा एक को बता दिया तो सभी को बता दिया आपका
- 1:04:32माथा दो चिन्हों को प्रकट करता है सूर्यवंशी और चंद्रवंशी हमने देखा
- 1:04:42भगवान राम के यहाँ। सूर्य का जन्म होता है सूर्यवंश
- 1:04:48और कृष्ण के यहाँ माथे पर चंद्रपंश ये हमने डाली है आज,
- 1:04:57लेकिन एक्चुअल में ये सत्य में होते हैं।
- 1:05:02जो मर्यादित भाव से चलता है उसके माथे के ऊपर सूर्य का चिन्ह होगा।
- 1:05:09गोल अवकाश जो शांत भाव से चलता है, कृष्ण की तरह जीवन जीता है।
- 1:05:22वह सूर्यवंशी चंद्रवंशी हो गया तो उसके यहाँ चंद्र का निशान हो
- 1:05:27जाएगा। माथा बहुत कुछ बदला देता है, हाथ
- 1:05:31भी बहुत कुछ बदला देता है। देखने वाले कहाँ रह गए?
- 1:05:35माथा भी बहुत कुछ बदला देता है। तुम्हारी चलने की चाल ढाल बॉडी
- 1:05:42लैंगुएज बहुत कुछ उतरा देती है, लेकिन देखने वाले हैं।
- 1:05:48खत्म हो गए। किस नक्षत्र में जन्मे, नक्षत्र
- 1:05:56के किस पाठ में जन्मे? किसी चरण में जन्मे आपकी जिंदगी
- 1:06:01का बहुत कुछ पता चल जाएगा। यह है मात्र ढकोसले यह सत्य था,
- 1:06:12विज्ञान है विज्ञान की तरह सत्य। जैसे आज यहाँ से रिमोट कंट्रोल के
- 1:06:18द्वारा दिशा बदली जा सकती है। चंद्रयान तीन की चंद्रयान दो की
- 1:06:28अपोलो की वो रेंज तुम्हें दिखती भी नहीं।
- 1:06:37बस ऐसा ही है ये देखता तुमने भी देखा होगा शिव चंद्रवंशी बस गलती
- 1:06:50खा गए शिव को। जूड़े के ऊपर इन्होंने चंद्रमा
- 1:06:55दिखा दिया। जब कोई चाहिए था माथे के ऊपर
- 1:07:11शब्द आता है ललाम भाल लगन का माथे पर विशेष चिन्ह है चंद्रमा का।
- 1:07:24यह है अर्धचंद्र तीज का चंद्र जोड़े के ऊपर ललम भाल भाल।
- 1:07:45शिवाय की मंत्र मच्छर और गदाश की बहा में हाथ संकेत बताते हैं जैसे
- 1:07:57बॉडी लिंक से बताते हैं माथा बहुत कुछ बताता है, हाथ बहुत कुछ होता
- 1:08:02है लेकिन देखने वाले आज हो गए। देखने वाले खो गए तो पाखंडी।
- 1:08:07पैदा हो गए। परमात्मा तक उस तल पर पहुँचने
- 1:08:12वाले खो गए तो आज राधे राधे का प्रचार करने वाले खड़े हैं।
- 1:08:18चलो अपने ही कुछ कमा लेते हैं। मान यश सम्मान नाम बना रहेगा नाम।
- 1:08:28किसका बना रहेगा? राधा के बहाने खुद का नाम बढ़िया
- 1:08:36तंत्र भारी। है।
- 1:08:47कर्मण्यवाद कारसते मा फलेशु कदाचन आविष्कार, समझे आखिरी शब्द है तू
- 1:08:59कर्म कर अंतः। और।
- 1:09:07जैसे से कहता तो मुझसे दीक्षा लेगा।
- 1:09:11समझ नहीं आता तुम अंगूठा लगा दो क्या मुक्त कैसे हो जाए?
- 1:09:15भीतर नहीं हो सकती क्योंकि तुम्हारी बुद्धि चलती है नियमों
- 1:09:23से हिसाब किताब से। और ये सृष्टि सृष्टि के पार
- 1:09:28नियंता सर्जन हारा नियमों में नहीं चलता यद्यपि जो बनाता है वो
- 1:09:36नियमों में बनाता है खुद नियमों से पार।
- 1:09:44कृष्ण कहते हैं कि फल तो मैं दूंगा, इसका अर्थ क्या है?
- 1:09:49तुम समझी कभी गौर किया नहीं तो वह भी वह भी बुद्ध की तरह कह सकता था
- 1:10:00के कर्म ही अपना फल देंगे। उसने क्यों कहा कि कर्मों का
- 1:10:09अधिकार तू मुझफ्फर छोड़ दे, तू सिर्फ कर्म का कर्म बनने वाली का
- 1:10:14रास्ते आप देखिए इसको सुन के जाना।
- 1:10:23तो सिर्फ कर्मकर। यही अधिकार है तेरा, इससे ज्यादा
- 1:10:32तेरा अधिकार भी तो नहीं है फल के ऊपर तेरा कोई अधिकार नहीं है फल
- 1:10:36मैं तुम्हे पर क्या फल दूंगा क्या?
- 1:10:40प्रकृति का दर्द होगा? नहीं, ये बड़ा टेढ़ा मसला है,
- 1:10:48गड़बड़ाओ बुद्धि गिर जायेगी, भूकंप आएगा बुद्धि में।
- 1:11:06मैं चाहूं, तुझे प्रकृति के हिसाब से दंड दे दूं, जो विधान में दर्ज
- 1:11:11है और मैं चाहूं तो तुझे माफ़ कर, ये गलत से नीचे नहीं है।
- 1:11:23यही अर्थ है इसका। तुमने सारी उम्र गीता को न सोच
- 1:11:29सकते हो, न तुम्हारी बुद्धि इस बात को अपना सकती है, ये वही बात
- 1:11:35भीतर नहीं उतरता, लेकिन सत्य? यही है जब वो करता है।
- 1:11:45वही फल भी देता है और फिर तुम्हारी बुद्धि बड़ी हो।
- 1:11:49हवाला मचाते ये कैसे हो सकता है? ये तो अन्याय हो गया, मैं अंतिम
- 1:11:57बात बताओ तुम? अपनी ही सृष्टि के साथ वो खेल रहा
- 1:12:04है, किसी को बिगाड़े किसी को बनाई तुम उसमें खलल नहीं डाल सकते।
- 1:12:13क्या दासी पूछ सकती है मुझे दासी को बनाया रानी क्यों नहीं बनाया?
- 1:12:25दास ही पूछ सकती है क्या सेवक पूछ सकते है मुझे?
- 1:12:30सेवक क्यों बनाया दास क्यों बनाया?
- 1:12:32मुझे राजा क्यों नहीं बनाया? बड़े सवाल है, जो उठेंगे और बड़े
- 1:12:37सवाल है जो उनसोलवेद रह जाएंगे। मिस्ट्री उनसोलवेद मिस्ट्री वो
- 1:12:44यही सवाल है तुम जैसे तैसे जोड़ तोड़ के जवाब दे दोगे तुम्हारे
- 1:12:50ब्राह्मणों ने यही तो किया देखा कुछ है जिन्होंने देखा वो जाना।
- 1:13:01अब पे खेल खेल खिलौड़ी अब पे खेलण हारा हो, बिगड़ेगा उसी का
- 1:13:11बिगड़ेगा, वह दंड नहीं देगा तो खुद को नहीं देगा।
- 1:13:18बड़ा उलट मसला है घबरा जाओ, तुम्हारे सारे मापदंड टूट जाए
- 1:13:25अंतिम बात है। सर कहते मेरे समर्पित हो जाओ,
- 1:13:33वैसा नहीं है अगर तुम उसके समर्पित होगे।
- 1:13:39तो फिर कोई रिश्वत हो गई नहीं। जब सब उसका ही है तो वह पुरस्कार
- 1:13:48देगा तो अपने को ही देगा। अंधा बांटे रेवड़ियाँ मुड़ मुड़
- 1:13:52अपने को ही दे। और कोई है ही नहीं।
- 1:13:56दूसरा अब तुम इतनी गहरी बात को समझ न सकोगे।
- 1:14:05लेकिन बात तो ये सब तुम्हारी बुद्धि हो हल्ला में जाएगी
- 1:14:11तुम्हारी बुद्धि नियमों का हवाला देगी बाबा।
- 1:14:15कैसे हो सकता है? हम कैसे मान लें मत मानो भाई
- 1:14:22मैंने तो आपसे नहीं कहा, मैंने तो आप सी जे कहा कि सत्य है,
- 1:14:28तुम्हारा मानना आवश्यक नहीं है और तुम्हारे मानने से वह बदल नहीं
- 1:14:33जाएगा। करता तो वही है जो चाहता है तुम
- 1:14:41अच्छा करो, तुम बुरा करो फल। तो मैं ही दूंगा, तुम्हें
- 1:14:55तुम्हारी बुद्धि बड़ा शोर मचाएगी। और बुद्धि शोर मचाएगी, इसलिए संत
- 1:15:03कहते हैं इस बुद्धि को शोर मचाएगी, जहाँ जूती उतारो, वहाँ
- 1:15:09बुद्धि को रख दो, क्योंकि शोर मचाएगी।
- 1:15:12सत्य को देखकर बुद्धि शोर मचाती है।
- 1:15:16उसका काम ही शोर मचाने विपक्ष की तरह।
- 1:15:24लकन कृष्ण कहें घर नहीं। यारजुन तो उठ क्यों मार दिया
- 1:15:32कृष्ण ने दूसरों को? तुम्हारे पास कोई जवाब नहीं होगा
- 1:15:39इस बात का क्यों बचा लिया उसकी इच्छा तेरा पुणा मीठा ला?
- 1:15:53जिन्होंने सत्य के दर्शन किए वह शोभ में और अशोभ में समान रहता
- 1:16:02है। क्यों?
- 1:16:06क्योंकि वो है ही नहीं। इसलिए कल के प्रवचन में मैंने
- 1:16:12बोला कि बाबा कहते हैं वारिया ना जा मैं एक बार जो तुध बाबा साईं
- 1:16:20पलिका इसका अर्थ था बाबा कहते हैं मैं तो एक बार भी वारा नहीं जा
- 1:16:27सकता, तेरे पे क्यों? क्योंकि मैं हूँ ही नहीं।
- 1:16:34जब से देखा है मैंने अपनी सच्चाई को पाया है।
- 1:16:41कि मैं नाम की कोई चीज़। नहीं है।
- 1:16:43मैं हूँ ही। फिर वारा कौन जायेगा?
- 1:16:48समर्पित होने के लिए भी तो कुछ तो चाहिए?
- 1:16:53तुम थोड़े से तो बचो लेकिन बाबा कहते हैं वारा न जामा एक बार।
- 1:17:02मैं तो इतना भी नहीं हूँ की मैं आपके ऊपर ज़रा भी नहीं हूँ, ज़रा
- 1:17:06भी नहीं हूँ जो आपके ऊपर वारा जाऊं जो समर्पित हो जाऊं मैं तो
- 1:17:13हूँ ही नहीं उतना। जो तो दुपा है।
- 1:17:20बहुत अंत तक पहुँचने वालों में बाबनान और कृष्ण कहते हैं तू मेरी
- 1:17:31शरण में आ जाओ और लव से कहते हैं, वह जो करता ठीक करता और भले के
- 1:17:38लिए। क्या घर से गया तुम्हारा क्या खोद
- 1:17:43दिया तुमने बस सिर्फ दावे ही टूट गए तुम लूटे, तुम पिटे, लेकिन सच
- 1:17:54में लूटे, सच में पिटे। था तुम्हारा कुछ तुम्हारा कुछ
- 1:18:06तुमने एक ज़रा रेत का बनाया अभी खाली मैंने कहा श्याम मानव कहते
- 1:18:14₹30,00,000 में। तुम्हारे रेत का एक कजर्रा को ही
- 1:18:18बना के दिखा दे 30,00,00,000 में बना के दिखा दे सारी धरती का सब
- 1:18:24दे दूंगा एक कजर्रा रेत का बना के दिखा दे हवा का एक कण बना के दिखा
- 1:18:31दे पानी का एक बिंदु बना के दिखा दे तुम 30,00,000 की बात।
- 1:18:38किसकी बात कर रहे हो? तुम मुफ्त में ढूंढना चाहते हो उस
- 1:18:42पर 30,00,000 फ्री ऑफ़ कॉस्ट कितना माजना है?
- 1:18:5030,00,000 का तुम्हारी मान्यताओं में माजना होगा सिर्फ।
- 1:18:56सत्य में इसका कोई माजना नहीं है। परमात्मा के लिए कोई माजना है
- 1:18:59क्या? जिसने बनाया सर्वसृजना को बस
- 1:19:04सिर्फ आखिर क्या होता है? आखिर तुम हार जाता तुम्हारी
- 1:19:09बुद्धि सोचना बंद कर देती है और तुम क्या कहते हो छोड़ पड़े वो है
- 1:19:13ही नहीं। नास्तिक बनने का और कोई कारण नहीं
- 1:19:21है। तुम वहाँ तक पहुँच नहीं सकते, तुम
- 1:19:25खो नहीं सकते अपने आपको पूरे का पूरा और आखिर में तुम तुम्हारी
- 1:19:30बुद्धि क्या निष्कर्ष निकालती है निचोड़ निकालती है कब हुई।
- 1:19:35बचे रहोगे, लेकिन कहाँ बचे रहोगे? दुखी दर्द, पीड़ा, रोग, कष्ट,
- 1:19:47क्लेश इनसे ग्रसित हो के जीना भी कोई जीना होता है।
- 1:19:53अभी कल ही मैं एक वीडियो सुन रहा था।
- 1:19:57ये तीन देशों के जो चीफ हैं हम केम उन उत्तर कोर।
- 1:20:12पता है और ट्रंप तीन कोशिश करते हैं कैसे हम अब आदमी 75 साल जीता
- 1:20:26है 150 साल तक जी मैंने कहा कोई मुश्किल नहीं।
- 1:20:37बस सिर्फ टिश्यूज की संरचना की ज्योतिरा होते हैं, ऊपर उनके ऊपर
- 1:20:44काम करना है, हमारे टिश्यूज के ऊपर होते हैं, क्रमश उनके ऊपर काम
- 1:20:54करना है, उनको घसने से बचा देना है।
- 1:20:58उनके ऊपर कोई तरकीब खोजनी है। तुम 75 साल से 150 साल कर सकते
- 1:21:03हो, 1500 साल भी कर सकते हो। भगवान राम ने 10,000 साल तक राज़
- 1:21:08किया, यह बात सत्य भी हो सकती। लाखों सालों तक किसी ने तप किया,
- 1:21:17यह बात सत्य भी हो सकती है। आज बुद्धि नहीं मानती छोड़ो लेकिन
- 1:21:25ये बात नहीं है। मैं कहता हूँ तुम सारी उम्र जिंदा
- 1:21:31ही रहो, मरो न कभी? लेकिन अमृत का घूँट एक बार भी ना
- 1:21:38पियो तो क्या वो जिंदगी है? वो जिंदगी को तुम जिंदगी समझती
- 1:21:49हो? लोगों के पर रौब जमा लिया।
- 1:21:52तानाशाह बन के उपम चला दिया। ये ज़िन्दगी है इसको तुम ज़िन्दगी
- 1:21:59समझते हो काश काश तुम संतों के उस स्थल पर एक दफ़े पंहुच।
- 1:22:20बुद्ध ने एक झलकी देखी थी। सिर्फ मृत व्यक्ति के भीतर कहीं
- 1:22:25कुछ दिख गया था। उसे ऐसे ही इतना बड़ा साम्राज्य
- 1:22:30नहीं छोड़ा जाता। त्याग नहीं किया था, कुछ बड़ा पा
- 1:22:34लिया था। कुछ बड़े की झलक पाली थी।
- 1:22:39पक्की पक्की के वो है और वो कौन है?
- 1:22:42बस इस तलाश में निकला था वो जान तो गया था कि वो है तुम करोड़ साल
- 1:22:53जियो। क्या आपत्ति?
- 1:22:59लेकिन अगर ऐसे ही बने रहे तुम अपने आप को सुख ही समझते हो किम
- 1:23:11उन ये ट्रिम तुम अपने आप को सुख। नहीं, संत से पूछेगा तो संत कहेगा
- 1:23:28इनसे बड़ा दुखी हुई है। तुम सारे देश का भार उठाने वाले
- 1:23:39गधे हो, जो भार धोता है वो गधा ही धोता है खच्चर हो जायेगा जी पुतन
- 1:23:50अपने देश का वार ट्रम्प अपने देश का वार।
- 1:23:56किम ऑन अपने देश खबर 1000 तरह की तुम्हें चिंताएं रहती हैं, कभी
- 1:24:02कोई देश को पार न कर जाए, ये किम ऑन तो बिल्कुल नहीं सोता होगा,
- 1:24:06नींद की गोलियां भी इसको सुला न पाती होंगी।
- 1:24:11कौन किस वक्त वफादार बेवफा निकल जाए?
- 1:24:17इसको नींद भी आती होगी तो उस संत की तरह नहीं आती होगी जो घोड़े
- 1:24:22बेच के सोता है। नानक घोड़े बेच के सोते हैं, उनके
- 1:24:27पास कुछ नहीं। नानक कहते हैं, मेरे पास इतना भी
- 1:24:31नहीं है कि मैं एक बार बलिहार हो जाऊं तेरे पे।
- 1:24:35इतना भी तो नहीं है मैं कण भी तो नहीं हूँ समर्पण होगा क्या मेरे
- 1:24:40परले है क्या? मैं हूँ या नहीं, यही तो मैं कहता
- 1:24:44हूँ आखिर में व्यक्ति यही बात है इसलिए बोलती बंद हो जाती है तो
- 1:24:51मैं हूँ। आज तक जो माना था वह मेरी कल्पना
- 1:24:56थी, मेरे सपने थे, मेरे ख्वाब थे, ख्वाबों के सिवा कुछ न था, आज दिख
- 1:25:06गया नंगी आँखों से कि मैं नहीं हूँ और यह जब दिख गया।
- 1:25:12तो अनुभव के इस परम कगार पर ये शब्द निकलते हैं वह न जावा एक बार
- 1:25:19नहीं हूँ, मैं इतना भी नहीं हूँ मैं रेत के एक कण के बराबर भी तो
- 1:25:27नहीं हूँ। तुम खोज सकते हो इनमें एटम है
- 1:25:33मॉलीक्यूल्स है मॉलीक्यूल्स में एटम है एटम में इलेक्ट्रान प्रोटन
- 1:25:37न्यूट्रान है। तुम ये खोज सकते हो कि सूरज से
- 1:25:41फोटॉन निकलता है और 8.25 मिनट लगते हैं वहाँ से आने में धरती?
- 1:25:49इतनी दूर है ये तो खोज सकते। हो लेकिन क्या तुम दूरी को घटावटा
- 1:25:54सकते हो? ये तुम्हारे पसंद है, तुम कुछ
- 1:26:03नहीं कर सकते हो, तुम बेबस हो। यू अरे हेल्पलेस तुम लाचार हो?
- 1:26:13ये पागलपन की बातें छोड़ो 30,00,002 के 30,00,00,000 तो
- 1:26:17मूर्खों के लिए तो ये ठीक है। ये नाव की टोपी पहने वीरेन्द्र
- 1:26:23शास्त्री के लिए तो। ये ठीक है।
- 1:26:26ये गप बोलता है ये झूठ। बोलता है।
- 1:26:31ये प्रेमानंद के लिए तो सही है। राधे राधे।
- 1:26:34कहने से नहीं। मिलता, उस समय शोर ज्यादा हो जाता
- 1:26:38है। सर ये इन मूडो के लिए तो सही है।
- 1:26:43लेकिन क्या करोगे? नानक का क्या करोगे?
- 1:26:47क्या करोगे जो वास्तव में वहाँ पहुँच गए जो सच है आचार्य का कुछ
- 1:26:54कर सकता हूँ सर, लोगों का कर सकता हूँ?
- 1:27:00क्योंकि वो बुद्धिवादी है। सब बातें बुद्धि से सोच के
- 1:27:03बताएंगे तोड़ तोड़ के एनालायसिस करके टुकड़ों में बांटेंगे बुद्धि
- 1:27:09टुकड़ों में बांटती है और अस्तित्व टुकड़ों को जोड़ता है
- 1:27:17अस्तित्व योग। कर्मशु योग कौशल योग तुम्हें
- 1:27:28जोड़ता है पर बुद्धि युक्त चीज़ को तोड़ती है खंडों में विभाजित
- 1:27:37करती है। ये शब्द है अब तुम्हारी खोपड़ी
- 1:27:43अवश्य हिलाए, लेकिन जिन्होंने समर्पण करने का आनंद पाया है, वो
- 1:27:52कह के भरो भरो, हरी भी सरो बहुत बढ़िया।
- 1:27:58सर से टली बला तुम कहते हो कबीर कहते हैं ये तो शुभ घड़ी आ गई के
- 1:28:10हरि बिसर गया। बस भी माला हाथ से गिर गई भलो
- 1:28:15भयो, हरी भी सरो सर से टली भला जैसे थे तैसे भयो तुमने नकली नकली
- 1:28:23बना लिया था जैसे थे वैसे तो आज देखा पहली बार जा के कैसे थे और
- 1:28:30बना कैसे दिए तुमने? तुम क्या से क्या हो गए भर्म?
- 1:28:39टूट जाता है। वहाँ जाके टूटता है, खोपड़ी में
- 1:28:44बैठे बैठे भर्म नहीं टूटता आचार्य लोग खोपड़ी में बैठे बैठे भर्म
- 1:28:49तोड़ देते हैं। चलो सुहाना वरम तो तोता जाना के
- 1:29:04भूषण क्या है? चलो सुहाना भ्रम तो टूटा जाना के
- 1:29:19उसने। क्या?
- 1:29:21है। कहते हैं इसको।
- 1:29:27प्यार दुनिया क्या चीज़ जो क्या बोला है दिल ने क्या क्या सहा?
- 1:29:45बेवफा तेरे प्यार में क्या से क्या हो गया?
- 1:30:06बेवफा ये बेवफा ये ठगनी, ये माया, ये बेवफा है तुम्हें ठग लेती है
- 1:30:21क्या से क्या बना देती? है।
- 1:30:26अलग अलग रूप से सिद्धांत और शब्द तुम्हें सौंप देती है और तुम्हें
- 1:30:33लूट लेती है और भ्रम टूटता है वहाँ जहाँ तुम देख लेते हो नगन
- 1:30:43आँखों से सत्य हो। और क्या देखते हो मैं नहीं पहले
- 1:30:53मुकाम पर दो मुकाम आते हैं पहले मुकाम पर तुम देखते हो कि मैं सरी
- 1:30:58नहीं विचार नहीं हूँ भावनाओं नहीं हूँ विषय नहीं हूँ।
- 1:31:06ये पहला पड़ाव बुद्ध उससे अगला पड़ाव।
- 1:31:11मैं ही नहीं बात खत्म। आखरी पड़ा, कृष्ण का पड़ा।
- 1:31:26मैं ही नहीं हूँ। बाबा नानक का पड़ा, कबीर का पड़ा
- 1:31:33अरे दास का पड़ा। मैं ही नहीं तुम कम जाओगे, लेकिन
- 1:31:45जिन्होंने स्वाद जाना। मिटने के बाद, फना होने के बाद,
- 1:31:53जिन्होंने जीस परवाने ने क्षमा के भीतर क्षमा के बस में भूत होने का
- 1:31:59आनंद जाना, वही जानता है वही जानता।
- 1:32:04है। कि क्या खोया क्या फायदा धन्यवाद।