Latest / Baba ji Vijay Vats / 4 Jan 26 - 0 Hertz का रहस्य : सामान्य चेतना? योग निद्रा? समाधि को छूना और परमात्मा (0) में विलीन होना!
Transcript
- 0:08जॉर्ज प्लेन्थो, न्यूयॉर्क से बाबा जी प्रणाम जब मैं आपके पास
- 0:21आया था तो आपने मुझे। तीसरी आंख पर अंगूठा रख के तट
- 0:31क्षण उस अवस्था में पहुंचा दिया जहाँ कुछ भी नहीं था।
- 0:42उससे पहले तेजी से विचार चल रहे थे।
- 0:47लेकिन धीमे धीमे होते। जैसे ही मैंने आपके आश्रम में
- 0:51प्रवेश किया, आपके पास आते आते काफी कम हो गई, अंगूठा लगाते ही
- 0:59मन जैसे शून्य हो गया। यह क्या था बाबा?
- 1:07क्या यह योग निद्रा थी? देखिए आप एक दिमाग के डॉक्टर हो,
- 1:26आप डेल्टा रेन्स को जानते हो वेब को?
- 1:31डेल्टा वेब आधे हर्ट से लेके चार हर्ट्स तक डेल्टा वेब पैदा होते
- 1:38हैं और उस डेल्टा वेब के कारण व्यक्ति योग निद्रा में चला जाता
- 1:46है। मैं यहाँ क्या करता हूँ?
- 1:53मेरे पास वेव का ट्रांसमीटर है, मैं उस ट्रांसमीटर से आग की वेव
- 2:03को चेंज कर देता हूँ। यह कौन कर सकता है जो खुद उस
- 2:11अवस्था तक पहुँच गया जहाँ हूँ के अलावा कुछ भी नहीं है हूँ याने
- 2:20अपने होने का एहसास। अपने होने का एहसास मात्र और कुछ
- 2:28नहीं। यही वो स्थिति है जिसे मैं
- 2:35व्याख्यात किया करता हूँ जो अंतिम वक्त में आती है।
- 2:44जब तुम्हारा कोई और छोर नहीं रहता जब तुम अनंत हो जाते हो तुम्हें
- 2:55अपनी लंबाई चुड़ाई उचाई का नहीं पता होता लेकिन तुम हो।
- 3:03और विराट हो ऐसा पता चलता है यानी कि तुम बेहोश तो बिल्कुल नहीं
- 3:10होते। तुम बहोश होते हो तो योग नितरा
- 3:16में ये डॉक्टर्स के लिए है। समय जाएंगे आप भी समझने की चेष्टा
- 3:22करना। किसी दिन मैं इसको विस्तार से
- 3:24समझा दूंगा। आधा हॉर्ट्स से चार हॉर्ट्स तक
- 3:32यानी एक क्षण में चार चक्कर या एक क्षण में आधा चक्कर।
- 3:41आज हार्ट से चार हार्ट्स तो मैं उस ट्रांसमीटर से न्यूरो
- 3:48ट्रांसमीटर से आपकी वेव को पॉइंट पांच से नीचे ले आता हूँ।
- 4:01पॉइंट पांच और चार के बीच में सुसुप्ति भी घटित होती है।
- 4:06मैं आपको बता दूँ थोड़ा सा पॉइंट, पांच और चार के बीचर हार्ट्स के
- 4:14भीतर सुसुप्ति भी घटित होती है। और श्री शुक्ति को आप अपनी भाषा
- 4:25में कहेंगे गहन मोन नींद गहरी अवस्था लेकिन उससे भी नीचे।
- 4:40हार्ट्स को घटा देना, साइकिल को इतना मंद कर देना कि वह बिल्कुल
- 4:46ही आराम से चले चले लेकिन बिल्कुल आराम से चले।
- 4:54जैसे प्वाइंट पांच का हुआ हिस्सा। प्वाइंट पांच का सौवां हिस्सा
- 5:05यानी आधा सर्कल कंप्लीट करें। आधा साइकिल कंप्लीट करें वो
- 5:12सोमवार में जब तुम एक सर्कट कंप्लीट करते हो।
- 5:19इतने धीमे से मैं तुम्हें ले आता हूँ, उससे क्या होता है उससे तुम
- 5:26ठहर जाते हो अनंत अति रेखा आनंद की प्राप्ति होती है, बिशर्ते के
- 5:32तुम रिसेप्टर होने चाहिए। इसलिए मैं श्रद्धा पर इतना
- 5:38विश्वास करता हूँ, दिलाना चाहता हूँ आपको अगर आपकी श्रद्धा नहीं
- 5:46है श्रद्धा का मतलब यू अरे नॉट एक्सेप्टर्स।
- 5:53तुम उसको स्वीकार नहीं किए हो। जब जो मैं रिलीज किया हूँ वो तुम
- 6:00उसको स्वीकार नहीं किए हो। अब जैसे अभी जालंधर के सुखबीर
- 6:09सिंह का मैसेज आया। के अंगूठे को मासिक रखने से क्या
- 6:15होता है? तो मैं प्रशिक्षण समझता हूँ कि
- 6:19एक्सेप्टेड नहीं है और जो व्यक्ति एक्सेप्टेड नहीं होगा वह मेरे पास
- 6:24ना आए क्योंकि मेरी विधि ही नहीं, समस्त।
- 6:31अध्यात्म की मूल भावना ये है यू मस्ट बी एक्सेप्टेड कभी घटना घटित
- 6:40होगी अन्यथा नहीं होगी अगर तुम अटैक कर रहे हो।
- 6:47किसी को अहिंसा और अहिंसा महावीर परम अहिंसक है।
- 6:52महावीर इस बात को समझेंगे क्या? महावीर तो यहाँ चले ही जाते हैं,
- 6:58यहाँ जीने की इच्छा भी समाप्त हो जाती है अटैक करना और एक्सेप्ट
- 7:08करना। इसलिए मैं कहता हूँ कि स्त्री
- 7:11जल्दी पहुँच सकती है लेकिन दिगंबरों ने कुछ मूर्खता के कारण
- 7:20ये कह दिया कि स्त्री पहुँच ही नहीं सकती जबकि स्त्री जितनी
- 7:25जल्दी पहुँच सकती है, इतनी जल्दी तो पुरुष कभी भी नहीं पहुँच सकता।
- 7:32तो परमात्मा ने स्त्री को एक्सेप्टर मन दिया लेकिन साथ ही
- 7:39शरीर में एक मासिक चक्र की व्याधि उत्पन्न कर दी।
- 7:45एक वरदान था तो एक आभिक्षा भी था। अभिशाप अभिशाप ध्यान के लिए लेकिन
- 7:54जरूरी भी है क्योंकि प्रोडक्शन आदमी इस चीज़ से वंचित है,
- 8:02एक्सेप्ट करना उससे बड़ा मुश्किल होता है।
- 8:07वो कहेगा 25,00,00,000 कहाँ से आएँगे?
- 8:10हंसेगा ताली मारेगा, लेकिन एक्सेप्टर मन स्वीकार करेगा?
- 8:20हाँ, बिल्कुल आ सकते हैं आएँगे। शरीर तुम्हारा आदमी का है या
- 8:30स्त्री का है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।
- 8:35अगर मैं कहता हूँ और सत्य कहता हूँ या झूठ कहता हूँ।
- 8:43यह व्यक्ति के जीवन जीने की ढंग से आप जान सकते हो के यह व्यक्ति
- 8:51का जीना कैसा है तो उसे आप माप सकते हो।
- 8:56क्या इसमें हवश है, हवश हवश में सारी चीजें आ जाती हैं।
- 9:03भाग दौड़ कुछ इकट्ठा करना, कुछ पाना, कुछ योजना बनाना, कहीं
- 9:12घूमने की इच्छा, कहीं आने जाने की इच्छा, कहीं बातचीत करने की
- 9:17इच्छा। मोन को बार बार तोड़ता है, तो मैं
- 9:28तुम्हें आधे हार्ट से नीचे ले जाता हूँ, आपको आपकी भाषा में
- 9:33समझा रहा हूँ आधे हार्ट से ले जाके।
- 9:39शून्य के बिल्कुल करीब ले जाता हूँ तो इसे आप योग निद्रा से बहुत
- 9:46निजी स्थिति समझ सकते हो। आत्मा के बिल्कुल साथ चिपके जाना
- 9:54यही होता है समाधि में। और आत्मा के साथ चिपक जाना वहाँ
- 10:03आपको मैं ले जाता हूँ तो जो मैंने कहा कि मर्ज ही हो जाना, वह तो
- 10:11आत्मा के भीतर प्रवेश हो जाना होता है कॉन्शस के भीतर अपने आप
- 10:17को। इन सर्च कर देना डिसोलवे कर देना
- 10:21नहीं मर्ज कर देना जब आप अपनी को बिंग को।
- 10:35उस प्रज्ञा में बेहतर स्थित प्रज्ञा में इन्सर्ट करके मर्ज कर
- 10:42देते हो। वह जीरो हर्ट्स होता है।
- 10:48आपको आपकी भाषा में समझा रहा हूँ जीरो हर्ट्स।
- 10:54बस वहाँ ठहर जाता है, सब कोई गतिविधि नहीं, कोई गतिविधि नहीं
- 11:05पर मौन जी से कहते हैं कुछ तन का भी नहीं हिलता वहाँ पिन ड्रॉप।
- 11:14जैसी आवाज़ भी नहीं होती। बिफोर प्रिंट्रॉप से भी पहले की
- 11:22आवाज़ यहाँ सब गहरा मून छाया रहता है।
- 11:29तो आपके सवाल में अगर मैं साइंटिफिक रूप से इसका जवाब दूँ,
- 11:36तो मैं डेल्टा रेंज आपकी सबसे धीमी रेंज है।
- 11:42डेल्टा रेंज को चार डिग्री तक तुम सशक्ति में ले जाते हो और पॉइंट
- 11:49पांच से शुरू करते हो पॉइंट पांच में।
- 11:53गहरी शु शुक्ति होती है गहरी शुक्ति तो वह जो कृष्ण ने कहा जब
- 12:02तुम्हारा योगी जागता है, जब मेरा योगी जागता है तब तुम्हारा संसार
- 12:12सोता है। तो योगी प्वाइंट फाइव हार्ट्स में
- 12:20भी सुसुक्ति परम सुसुक्ति में होते हुए भी याद का है।
- 12:31और पॉइंट पांच से नीचे आ गए। पॉइंट चार पॉइंट 3.2 पॉइंट 1.1 से
- 12:39भी नीचे शून्य घटते घटते घटते शून्य के बिलकुल करीबा जाना चर्च
- 12:46कर जाना। और उसके बीच में बीच में मर्ज हो
- 12:56जाना वो होता है परमात्मा हो जाना शून्य के साथ चिपके जाना बहुत ही।
- 13:09और शून्य के भीतर प्रवेश कर जाना वो होता है परमात्मा होना तो
- 13:15बुद्ध समाधि तक पहुँच गए, शून्य को टॅच कर लिया उन्होंने, लेकिन
- 13:23शून्य के भीतर प्रवेश कर जाना, उसके भीतर मर्ज हो जाना।
- 13:32योग निद्रा पॉइंट पांच तक आने की जो स्थिति है वो योग निद्रा में आ
- 13:38जाती है। आधा सायकल एक क्षण में।
- 13:47एक सेकंड में आधा साइकिल आधे से आप और कम करोगे पांच चार करोगे
- 13:55321 फिर और कम होते जाओगे वहाँ जाके बहुत गति धीमी हो जाती है और
- 14:02वहाँ जैसे जैसे ध्यान रखना। जैसे जैसे यह साइकिल कटेगा,
- 14:06तुम्हारा वैसे वैसे टाइमलेसनेस आएगा और तुम्हें समय का नहीं पता
- 14:12लगेगा, टाइमलेसनेस आएगा जैसे जैसे तुम शून्य के करीब आओगे, वह शून्य
- 14:21क्या है? वह प्रज्ञा है।
- 14:23जिसे भगवान कृष्ण श्रुति प्रज्ञा कहते हैं प्रज्ञा जीरो है, समझलो
- 14:32शून्य है शून्य के साथ या की चिपक जाना यह है समाधि बुद्धि यहाँ तक
- 14:40आ गए थे। तो हमारी साइंटिफिक भाषा में बरन
- 14:45कर तो जीरो को टॅच कर लिया उसने बस उससे आगे फिर वो व्यक्ति वापस
- 14:54नहीं आता जिसने जीरो को टॅच कर लिया, शून्य को टॅच कर लिया, वह
- 14:59वापस पुणे नहीं आएगा। तुम अगर कहो कि चार से ऊपर उठ
- 15:04जाए, वो फिर से व्यापार करने लगे नहीं करेगा।
- 15:09इसीलिए तो जब बुद्ध जाते हैं वापस उसके पिता कहते हैं संभाल ले अपना
- 15:19राज़, मुझे पता था तू आएगा। वो कहते हैं कि नहीं मुझे वो राज़
- 15:30मिल गया। जीस राज़ को पाने के बाद व्यक्ति
- 15:35सिंघासुओं की चाहत भी छोड़ देता है।
- 15:41अब मुझे पर्व सिंहासन मिल गया तो जो उस शून्य को टॅच कर लेगा वह
- 15:48बुध हो जाएगा और दट। इस पॉइंट ऑफ़ नो रिटर्न को टॅच
- 15:53करना अब यहाँ ध्यान से समझ लेना, शून्य को टॅच कर लेने का मतलब।
- 16:00पॉइंट ऑफ़ नौ रिटर्न को टॅच कर लेना और शून्य में प्रवेश करने का
- 16:08मतलब पॉइंट ऑफ़ नौ रिटर्न में मर्ज हो जाना पॉइंट ऑफ़ नौ रिटर्न
- 16:17में मर्ज होने के बाद। तो फिर तुम्हारे भीतर हर वक्त हर
- 16:29वक्त ऐसी मिस्त्री सी बोलेंगे कि ज़रा भी उत्पाद नहीं होगा।
- 16:38घंटों तक तुम बिना आँख मूंदे आनंद के उस स्रोत को पीते हुए बैठे रह
- 16:45सकते हो। व्यक्ति तुम्हें देखता देखता थक
- 16:50जाएगा तुम्हारी आँख नहीं चप गई तुम्हारी पलकें नहीं उठेंगे।
- 16:58तुम उस अवस्था में पहुँच गए जीस अवस्था में वापस आया जा ही नहीं
- 17:04सकता पॉइंट ऑफ़ नो रिटर्न यह जीते जी भी घटित होती है, थोड़ा सा
- 17:13अमेंडमेंट कर दो। यह जीते जी ही घटित होती है।
- 17:21आज मुड़ता के ज़माना आस्था के नाम पर पागलपन।
- 17:34किया जा रहा है। आस्था के नाम पर पागलपन किया जा
- 17:39रहा है, आस्था के नाम पर पाखंड किया जा रहा है।
- 17:48पांच नाम दिए जा रहे हैं पर मोन में जाने के लिए।
- 17:54पांच नाम सिखाए जा रहे हैं। राधे राधे सिखाए जा रहा है।
- 18:03ठहरने के लिए से कोना सिखाया जा रहा है।
- 18:08इस शब्द को फिर समझना, ठहरने के लिए से कोना।
- 18:14सिखाया जा रहा है सीक हो जाओ हिरो जुलु ठहर जाओगे, नो इट इस
- 18:21इम्पॉसिबल यह गलत रास्ता है तो आपके ढंग से मैं समझाऊं?
- 18:31आपने पूछा बाबा? क्या यह योग निद्रा से योग निद्रा
- 18:40से आगे की अवस्था थी क्योंकि मैं जानता था तुम योग निद्रा तक बड़े
- 18:46आराम से आ जाओगी। लेकिन जब मैंने देखा कि योग
- 18:49निद्रा तक तुम बड़े आराम से पहुँच गए।
- 18:53तो मैंने कहा कोई हर्ष नहीं है। ट्राई कर लेना अच्छा है।
- 18:57अगर तुम इसे झेल गए तो पॉइंट पांच हर्ट से भी नीचे आ सकते हो और
- 19:06पॉइंट पांच हर्ट से नीचे आ गए तो मैं चार तक ले गया लेकिन तुमने वो
- 19:11भी पी लिया। फिर तीन तक ले गया, तुम वहाँ भी
- 19:15पी गए, लेकिन तीन और दो के बीच में आके अटक गए फिर ढ़ाई तक
- 19:20पहुंचे थे वहाँ तुम लुढ़क गए तो मैं समझ गया कि यह व्यक्ति पहुँच
- 19:31तो जाएगा। क्योंकि तीन और दो के बीच में है
- 19:37तुमने जाना है शून्य और शून्य के बीच में मिल जाना है, तो फासला
- 19:42बहुत कम रह गया है, मैक्सिमम यू विल बी अवार्ड इन टू और थ्री
- 19:49मंथ्स। ऐसे ही अगर तुम ध्यान साधना को
- 19:56बनाए गए तो बस तीन महीने से ज्यादा लगने को है नहीं, बड़े
- 20:04आराम से बताया जा सकता है। इसलिए मैं कहता हूँ अगर तुम मेरी
- 20:08बात को ठीक से इम्प्लिमेंट करना शुरू कर दो।
- 20:15तो 6 साल तक आप चाहे 100 हर्ट्स में हो, चाहे 100 हर्ट्स में हो,
- 20:26तुम लेते हो चेतना का सतर्क। 30 से 100 वर्ष तक नहीं, 30 से
- 20:36100 वर्ष तक तुम परम चेतना का माप लेते हो, बाहर के क्रिया उससे
- 20:48मस्ती आती है, बिलकुल आती है। जैसे काम के पीक स्तर पर तुम्हे
- 20:55मस्ती आती है, लेकिन मैं गिनता हूँ, निर उतेजना में तुम गिनते हो
- 21:03उतेजना में तुम जाँचते हो मापते हो स्टिमुलेशन में?
- 21:10मैं जांचता हूँ, मापता हूँ, नॉन स्टिमुलेशन तुम सुख से मापते हो?
- 21:17मैं आनंद से मापता हूँ, सुख उतेजना है, आनंद निर्उतेजना है
- 21:28पॉइंट फाइव तक सुख रहता। तुम्हारी भाषा में बोल रहा हूँ
- 21:34ध्यान से समझ लेना और भी बहुत से लोग दिमाग के विशेषज्ञों के पॉइंट
- 21:41फाइव तक सुख होता है। महान सुख और वो ही।
- 21:49क्षण होता है। जब तुम श्रुति के गहरे से गहरे
- 21:53तल्प हो तो तुम सुबह कहोगे बड़े मज़े की निगाह।
- 22:00यू वर इन दी क्लोसेस्ट न्यू अरेस्ट।
- 22:12फ्रॉम 00 इनर्शिया युगेंद्र यह है इनर्शिया बड़ा प्यारा शब्द है
- 22:21इनर्शिया को तुम कुछ और ही समझ रहे हो इनर्शिया है जीरो इनर्शिया
- 22:26है शून्य कुछ शून्य के करीब पहुँच जाना।
- 22:32बिल्कुल साथ में लग जाना जैसे हम गले मिल जाते हैं, ईद के वक्त
- 22:39चिपक जाते हैं एक दूसरे से प्रेम के क्षणों में, लेकिन फिर भी
- 22:45इच्छा अधूरी रह जाती है तो हमारा कोई भीतर का कोना कहता है।
- 22:50कि चिपक तो गया लेकिन दो बना रहा। कहीं ऐसा भी हो सकता है कि हम
- 22:58चिपक जाएं और एक ही हो जाएं। यही अंत कक्षा है आदमी की अंतः।
- 23:10तुम इसको बाहर की स्थितियों से बनाना चाहते हो?
- 23:17तुम स्त्री पुरुष से चिपक जाते हो और उन क्षणों में तुम आधे आठ तक आ
- 23:24सकते हो काम वासना में ऐसी स्थिति आ जाती है।
- 23:29यानी आधे हार्ट्स तक का अनुभव हो जाता है।
- 23:32तुम्हें होती उतेजिना है वो पर उसके भीतर पॉइंट जीरो तक जाने के
- 23:42लिए आपका मन करता है कि हम जीरो तक पहुँच जाए।
- 23:48जहाँ शून्य हो जाएं या शून्य के आगे भी मर्ज हो जाएं, बस वही हो
- 23:55जाएं तो इसलिए मैं कहता हूँ के काम की आंतरिक अनुभूति यह तंत्र
- 24:06ने सिखाया था। आए तो तंत्र के नाम पर पाखंड हो
- 24:11रहे हैं। आए तो तंत्र के नाम पर बच्चियों
- 24:20की यौन अंगों पर पांव रखे जा रहे हैं।
- 24:24सद्पुरु के द्वारा। जबकि तंत्र का वो काखा का भी नहीं
- 24:29जानते, अगर भीतर का वो रस किया हुआ तो जाने के तंत्र ऐसे थोड़ी
- 24:37जाता है तुमने गुप्तंग पर पांव रख लिया, टच कर दिया उसे तंत्र का
- 24:43क्या समझ है तुम्हारी? अपूर्ति तवासनाओं की पूर्ति हो
- 24:47जाती है तुम्हारी अपूर्ति तवासना तुम्हारी घरवाली तुमने पता नहीं
- 24:54मार दी कि मर गई तुमने बड़े बड़े दावे किए लेकिन हम तो जानते हैं।
- 25:01भीतर जाकर देखा सब जगह खंगाला। तुम्हारे ही गहरे अचेतन में
- 25:09कलेक्टिव अचेतन में उतरे और जा के देख रहे सब बकवास।
- 25:16लेकिन ये साहब बड़ी बड़ी घोषणाएं करते हैं।
- 25:25विधि महासमाधि ले गई। क्या खाक महासमधि ले गई तो ऐसे
- 25:33असीदा भी होते हैं तंत्र का जिन लोगों को पता ही नहीं और तंत्र की
- 25:40बातें करते हैं। तंत्र का अर्थ था।
- 25:44इस जीरो हार्ट्स के भीतर प्रवेश कर जाना, जीरो हार्ट्स से टच करना
- 25:51पहले तुम यूनिक को टच करते हो पाम से तुमने हर चीज़ की नकल बना ली
- 25:58है। और नकल को तुम कल्पना में
- 26:05वास्तविक मान बैठो, इसे ही मैं पागलपन कहता हूँ।
- 26:09अब देखिए आशुतोष की बात मैंने कितनी बार कही अगर मस्तिष्क को 12
- 26:18मिनट तक ऑक्सीजन ना मिले। हमारे मस्तिष्क को इस यंत्र को 12
- 26:25मिनट तक 12 मिनट सिर्फ ऑक्सीजन ना मिले और ऑक्सीजन ना मिलती कैसे
- 26:35थ्रू ब्लड सर्क्युलेशन। 12 मिनट तक ब्लड सर्क्युलेट ना
- 26:41हो, ब्रेन में ब्रेन में ब्लड सर्क्युलेट करता है, ऑक्सीजन को
- 26:48थ्रो हीमोग्लोबिन, हीमोग्लोबिन इज़ ए करियर ऑफ ऑक्सीजन,
- 26:55हीमोग्लोबिन, फेफड़े। से लेता है।
- 26:59ऑक्सीजन को जहाँ शुद्ध होता है, हमारा रक्त और उसको प्रचार करता,
- 27:07प्रसार करता है। सारे शरीर में और शरीर तो जीवंत
- 27:10रहता है अन्यथा शरीर मर जाए। तो बाकी के अंग 1012 मिनट तक कोई
- 27:17बात नहीं चल जाता है। आधे घंटे तक भी चल जाता है लेकिन
- 27:22ब्रेन के नुरॉन्स को अगर 12 मिनट तक ऑक्सीजन ना मिले, लास्ट टाइम
- 27:28पीरियड बता रहा हूँ मैं साइंटिस्ट तो 4 मिनट घंटे हैं।
- 27:324-6 मिनट लेकिन मैं डबल टाइम दे रहा हूँ।
- 27:37आपको 1212 मिनट तक अगर ऑक्सीजन ना मिले हमारे न्यूरॉन्स को तो रह
- 27:49जाएगा। और ध्यान रखना, मेरी बात को मैंने
- 27:54उस दिन भी कहा था। 12 मिनट तक ऑक्सीजन न मिलने के
- 28:00बाद ब्रेन डेड और ब्रेन डेड व्यक्ति को आज तक धरती पर कभी कोई
- 28:06जीवद नहीं कर सका है। क्योंकि जब न्यूरोन से डट हो गया
- 28:14यह ऐसा जाल है जो 12 मिनट के बाद तहस नहस हो जाता है।
- 28:21फिर न तो ये रिपेर हो सकता है ना ये फिर से जोड़ा जा सकता है।
- 28:28यह ऐसा महीन जाल है। जो उसे रचनाकार ने बना दिया जो है
- 28:33नहीं। हाँ हँसा मत करो, उस रचनाकार ने
- 28:38बना दिया जो है नहीं तो यह ब्रेन डेड होने के बाद।
- 28:50संसार का कोई भी व्यक्ति इस बात का दावा कर दे और मेरा चैलेंज है
- 28:56मेरी गर्दन काट लेक बस शर्ते कि वह योगी न हो मैं योग करता था,
- 29:04मेरी कैपेसिटी थी 13-19 मिनट। मैं जिंदा रहा पानी में लेकिन अगर
- 29:14शरीर का नुरोंज डेड हो जाता मेरा अगर 19 मिनट तक मुझे बाहर न
- 29:20निकाला जाता बस बिलकुल पीक पॉइंट में आके बाबा ने रस्सी बची।
- 29:28जब देखा मेरा पुत्र मेरे शिष्य नहीं कूद रहे है, बिना रस्सी के
- 29:36उनका ब्रेन सोच रहा है। आज जैसे आशुतोष जैसे भक्त तो थे
- 29:43ही नहीं। आशुतोष?
- 29:46के भगत तो बहुत बढ़िया है, वो तो इस बात को ख्याल नहीं करते की भाई
- 29:52इसकी साइंस क्या है? इसको तो 10 वर्ष से भी ज्यादा 12
- 29:59साल भी हो गए। मेरे ख्याल में मरे को।
- 30:03और तुम इसके जीने की संभावना। अब तो शरीर की व्यवस्था ही ऐसी हो
- 30:07गई है। अगर खुद यह खुद लौटना चाहे लूटना
- 30:11तो चाहता है, लेकिन लौटना चाहे तो भी नहीं लौट सके, क्योंकि ब्रेन
- 30:17के तंतु खत्म हो गए हैं। और जो व्यक्ति देखिए कोमा वाला
- 30:23व्यक्ति वापस आ जाएगा, मूर्छित व्यक्ति वापस आ जाएगा।
- 30:31जीसको मिर्गी का दौरा पड़ता है वो वापस आ जाएगा।
- 30:36सुसुक्ति वाला तो रोज़ वापस आता ही है।
- 30:40पॉइंट पांच से वापस आ गए, लेकिन जो किनी निकली डेड हो गया ब्रेन
- 30:47वह धरती पर कोई भी व्यक्ति आकर जीवित कर दे और मेरा सिर काट दे
- 30:52मेरा ओपेन चैलेंज कोई। कुह तंत्र मंत्र यंत्र कुश अजमल
- 31:09ब्रेन डेड ब्रेन डेड। ये कहते हैं कि 10 साल बाद वापस आ
- 31:17जायेगा, 12 साल बाद वापस आ जायेगा, मैं कहता हूँ छः महीने तक
- 31:21भी वापस आ जा के देख ले तो आपको होगी शंकराचार्य शंकराचार्य को
- 31:29जैसे जीवित रखा वो कुछ मेथड और था।
- 31:34उसको तो पहली बात तो वह विज्ञान खो गया।
- 31:39वह मात्र 1012 व्यक्तियों के पास था।
- 31:44शंकर जानते थे उसको और 1012 व्यक्ति भी खो गए और शंकर भी खो
- 31:48गए। आज वह विज्ञान नहीं है, आज वह
- 31:52विज्ञान। कोई नहीं जानता।
- 31:56शिव के सवा वह विज्ञान पुनर्जीवित हो सकता है, लेकिन उसको
- 32:03पुनर्जीवित करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि जो चीज़ शंकर ने।
- 32:13भोगी शरीर में जाके वह अपनी ही स्मृतियों से कंगाली जा सकती है।
- 32:20दूसरा मेथड है तुम अपने पिछले जन्मों में जाओ तुमने सब कुछ किया
- 32:24हुआ है डाके तुमने मारे अमीर तुम हो सम्राट तुम हो गद्दे गद्दे
- 32:30तुमने जरी गरीबी तुम हो। कतल तुम हुए कतल तुमने किए सब कुछ
- 32:37किया तुमने सब तुम घंगाल सकते हो, ऐसा कोई अनुभव नहीं होगा जो तुमने
- 32:44किया नहीं तो यह प्रथा आज लुप्त प्रायः हो गई है।
- 32:51हो भी जाना चाहिए था। इसकी कोई इतनी आवश्यकता भी नहीं।
- 32:56मुझे दिखाई पड़ती है कि शरीर को छोड़ के छह महीने तक बाहर रहा
- 33:02जाए। मुझे कोई उसकी उपयोगिता लगी नहीं,
- 33:07लेकिन हाँ ये मेथड है। तो 8 घंटे तक हम सिल्वर कॉर्न को
- 33:14बाहर ले जाके घूम सकते हैं, 72 घंटे तक घूम सकते हैं 72 घंटे तक
- 33:21वी विल हॅव टु रे रिटर्न तो मैंने अपनी बायॉग्रफी में आपको।
- 33:29ये एस्ट्रल ट्रैवलिंग की बात लिखी है।
- 33:3372 घंटे तक हम शरीर से बाहर रह सकते हैं, सिल्वर कॉर्ड जुड़ी
- 33:42रहनी चाहिए, हमारी नाभी के साथ तो हम बाहर रह सकते हैं।
- 33:47इसलिए 72 घंटे तक अगर कोई वापस न लौटे फिर ज्यादा से ज्यादा उसको 1
- 33:56दिन और इंतजार करना अगर 96 घंटे हो गए और व्यक्ति नहीं वापस आया
- 34:02तो उसको जला देना। यादा फ़ोन करते बस वो गया।
- 34:07अगर योग के द्वारा भी कोई व्यक्ति जैसे हम एस्ट्रल ट्रैवलिंग करते
- 34:13थे, करते हैं अब तो नहीं क्योंकि उससे करीब छह महीने की आयु बढ़
- 34:18जाती है। एक बार के एस्ट्रल ट्रैवलिंग सारा
- 34:22भीतर का परमात्मा का व्यस्त। व्यवस्था किया हुआ ढांचा को हिला
- 34:28देना परमात्मा के प्रावधान में एक शरारत है, शरारत है, उस शरारत का
- 34:40फल भोगना भी पड़ता है। छह महीने तक की आयु बढ़ती है।
- 34:45शरीर के बाहर जाकर ट्रैवलिंग करने में तो हमने देखा तो बहुत लेकिन
- 34:51उस देखने में उम्र कम कर दी जो कि हमारे लिए कोई खास बात पे नहीं
- 34:58थी। उम्र का कम होना तो शरीर का कम
- 35:01होना है। हमारी उम्र तो कभी कम होती नहीं,
- 35:03ना ही बढ़ाई जा सकती। हम तो अजर अमर भी हैं, कभी मरते
- 35:09भी नहीं और कभी मरते भी नहीं तो उम्र को बढ़ाया भी नहीं जा सकता।
- 35:16जब मरते ही नहीं, कभी ये मोटल हैं तो फिर उम्र को क्या पढ़ाओगे तुम?
- 35:23तो आपने पूछा कि वो क्या था? वो आप डाई हॉट्स पे आ गए थे
- 35:31इसीलिए लुढ़क गया नहीं तो फिर मैंने आपको विशेष पद्धति के
- 35:40द्वारा से बाहर निकाल के पॉइंट फाइव से ऊपर उठा के फिर मैंने उस
- 35:50अवस्था तक ले आया जहाँ तक आप 1010 हार्ट्स तो ये सारी व्यवस्थाएँ
- 35:58हैं। और इस अंगूठे से होते हैं सारे यह
- 36:02मज़े की बात है इस अंगूठे में छुपा है सब कुछ यह व्यवस्था पुत्र
- 36:13या तुम तो अच्छे से समझ गए होंगे लेकिन सुनने वाले इस गहनतम तथ्य
- 36:19को थोड़ा समझे होंगे और बहुत कुछ नहीं समझे होंगे, लेकिन यह
- 36:27रिकॉर्ड में रह जाए, इसलिए मैंने बोला है आपके लिए धन्यवाद।