Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 Feb 26 - शरीर में देवी-देवता का आना: सच्चाई या पाखंड? देवता सिर्फ़ देता है माँगता नहीं! Must Watch
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- 0:16बाबा जीके चरणों में कोटि कोटि पूर्ण बाबा जी आपने ठीक कहा था कि
- 0:29देवी देवता भी। कृपा और साधना की अपेक्षा रखते
- 0:34हैं। पिछले तीन वर्षों से मेरी पत्नी
- 0:40पर किसी देवी अथवा किसी अन्य आत्मा के आने का अनुभव हो रहा है।
- 0:48प्रारंभ में। उसने कहा कि उसके लिए एक मंदिर
- 0:53बनवाया जाए। मैंने मंदिर बनवा दिया।
- 1:01विधिवत पूजा भी शुरू करते हैं। अब वह पुनः कह रही है कि उसके लिए
- 1:08और विशेष पूजा करवाई जाए। मैं अत्यंत असमंजस में हूँ।
- 1:15समझ नहीं पा रहा कि मुझे क्या करना चाहिए?
- 1:23ऐसा प्रतीत होता है कि मेरी पत्नी धारी।
- 1:29धारी देवी का प्रभाव उसके ऊपर बताया जा रहा है।
- 1:42मुझे क्या करना चाहिए? देहरादून से अभिषेक भूषण।
- 2:13प्रश्न सिर्फ और तुम्हारा नहीं है, उतना सारे हिंदुस्तान का
- 2:22प्रश्न जरूरी आपने पूछ लिया। पहली बात तो जो मंत्र बनवाया है
- 2:36धारी देवी के लिए। उसको ढा दो और धारी देवी के लिए
- 2:50किसी प्रकार का कोई आयोजन न करो। कोई पूजा में समय व्यर्थ न करो।
- 3:05देवता बिना मांगे देता है। अगर तुम उसके योग्य हो तो सिर्फ
- 3:18प्रार्थना ही करनी होती है। कोई द्रव्य, कोई मंदिर या कोई भेट
- 3:31वगैरह देवता नहीं मानता। अगर कोई देवता या कोई देवी तुमसे
- 3:50कोई भेंट मांगती है बकरे के बच्चे की, मैंने की किसी पशु की।
- 3:59और कोई वक्त था? जब देवता नर बली भी मांगा करते थे
- 4:12तो वह देवता है। सीधी सीधी परिभाषा सम्मेलन देवता
- 4:20का मतलब जो देता है। और किसे देता है, जो उसी चीज़ के
- 4:28योग्य है या जो उसी चीज़ की जरूरत रखता है?
- 4:38तुमने कहा, पुत्र, मैं असमंजस में हूँ बिलकुल जरूरत नहीं असमंजस में
- 4:47रहने की। बेफिकर हो जाओ, घोड़े बेच के सोया
- 4:53करो, फिर से धारी देवी को मेरे पास पहुँच दो धारी देवी को कह दो,
- 5:01बाबा ने आपको याद किया है। यह धारी देवी का मैं कड़ सीधा
- 5:15करवा दूंगा। मेरे पास अनुमान है गौडरेवाणा
- 5:25पाखंडियों के पाखंड हैं और ये प्रत्येक धर्म में शुरू है।
- 5:35प्रत्येक धर्म के लोभी लालची लोगों ने दो चीजों को अपने अस्त्र
- 5:42शस्त्र बनाया। एक तो भय और दूसरा लोग महत्त्व
- 5:58में ये दिखाते हैं। कि यह तुम्हें दंड देगा और लोग
- 6:06तुम्हें यह दिखाते हैं कि यह तुम्हें सुविधाएं देगा।
- 6:18देवी देवता, बिल्कुल। कुछ नहीं मांगता।
- 6:27पूजा प्रतिष्ठा मंदिर या भेंट बलि देवता नहीं मांगता, फिर कौन
- 6:38मांगता है? लोभी पंडित, पुरोहित या मोलवी या
- 6:50गणंथी या पश। धारी देवी का तो सर पर देखो पुत्र
- 7:11तुम्हारे पास मेरा सिक्का होगा और मैंने जनकल्याण हेतु ऐसी ही
- 7:18अवस्थाओं में। जो कि कष्टकारी क्षण होते हैं
- 7:30उनमें किसी छोटी सी जगह पर जहाँ पूजा करते हो, गायत्री मंत्र चला
- 7:37दिया करो हल्की आवाज में उसके प्रभाव से।
- 7:44तुम्हारी ये मांगने वाली शक्तियां भाग जाएंगी।
- 7:53बिना किसी प्रयोजन के बिना किसी लोभ के देने वाली शक्तियां आ
- 7:57जाएंगी। उधारी देवी जो कहती हैं मेरे लिए
- 8:03मंदिर बनवा दो। उसको मेरे पास हुआ था।
- 8:10हाँ, मैं थोड़ा सा प्रायव्ड हूँ उस मुस्लिम में ऐसा मत कर मेरे
- 8:25पास से हर धर्म के लोग आते हैं क्योंकि मैं सभी धर्मों का आदर
- 8:31करता हूँ। लेकिन ध्यान रखना, धर्मों का आदर
- 8:36करता हूँ। धर्म का अर्थ परमात्मा तक जाने का
- 8:40रास्ता धर्मों में फैली हुई मूढ़ताओं को ज़रा भी स्वीकार नहीं
- 8:48करता हूँ। उनको आड़े हाथ ही लेता हूँ।
- 8:57सभी धर्मों के लोग इसी तरह की मानसिकता से पीड़ित हैं, क्योंकि
- 9:02धर्म चलाने वाले उन लोगों ने धर्म को विकृत कर लिया है तो मेरे पास
- 9:12एक सिख परिवार आया करता था, किसानी करता था।
- 9:22उसके परिवार में कुछ गड़बड़ चल रही थी।
- 9:26किसके घर में नहीं होते? जिन्होंने शरीर धारण किया है वो
- 9:34किसी पुण्य और पाप के कारण दिया। पहले वनों, प्रारब्ध, वाच्य वनों
- 9:42शरीफ पहले तुमने कुछ पुण्य किया, पाप किया, फिर आपको शरीर धारण
- 9:49करना पड़ा उसके फल को भोगने के लिए।
- 10:01शरीरधारी किसी न किसी कर्म के फल को भोगने के लिए आता है और जब
- 10:09उसके सारे कर्मों के समाप्त हो जाते हैं, बंधन निर्झरा हो जाते
- 10:18हैं। तो वह अपने मूल स्वरूप में लूट
- 10:21जाता है। वो किसी मुसलमान फकीर के पास जाया
- 10:33करता था, फकीर का ढोंगी था, वो कहता मलेर कोटर वाला?
- 10:47ये लाला वाले पीर इसको मार लिया करो मैंने कहा काहे ये धन संपत्ति
- 10:59दे देगा? मैंने कहा इसके बाप ने पैदा किया
- 11:04है। क्रिएट करने वाला एक ही मालिक है।
- 11:10वह लालम वाला पीर है, वह मालेर कोठला वाला पीर है?
- 11:16वह अजमेर दरगाह शरीफ का मालिक नहीं, वह सबका मालिक है।
- 11:23एक को सुमरी है, नान का जो जल थल है असम आए, दूजा काहे सिमरी है जो
- 11:29जमे ते मर जाए अब कहाँ है लाला बाला फिर सिमर कहाँ है?
- 11:37बताओ दूजा काहे सिमरी है जो जमे ते मर जाए।
- 11:43जो कभी हुआ था, कभी नहीं हुआ था। मेरी इन्हीं बातों को सोने नहीं
- 11:50पाने की कटुता के कारण बहुत से लोग मेरे चैन को छोड़ देते हैं और
- 11:56मैं धन्य बागी कहलाता हूँ। व्यर्थ में जान खाते हैं।
- 12:01थोपनाएं इन्होंने थूपी हैं और उन मूर्ताओं को मेरे पास लेके आते
- 12:09व्यर्थ में समय खराब होता उन लोगों को वक्त नहीं दे पाता जिनकी
- 12:15समस्याएं सही हैं। अगर गलत मानसिकता वाले मेरे वक्त
- 12:28को खराब न करें तो निश्चित ही जो सही दुख से ग्रस्त रोग है,
- 12:37विभिन्न रोगों से ग्रस्त है, जो असाध्य रोग है।
- 12:45डॉक्टर कहते हैं हमारे पास कोई इलाज नहीं, घर ले जाओ, सेवा करो।
- 12:52कैंसराइटिस के और भी पता नहीं काहे पाया कोरोना आया, सभी ने
- 13:01वैक्सीनेशन लगवाई। मैंने किसी को वैक्सीनेशन लगने
- 13:05नहीं दी क्योंकि मैं जानता हूँ कि परमात्मा ने भीतर जो तंत्र बनाया
- 13:14वो अपनी इम्युनिटी स्वयं पहला कर लेगा।
- 13:18कोरोना छोड़कर कोरोना का भाग भी आ जाएगा।
- 13:23और किसी को कुछ नहीं होगा। जिन्होंने इंजेक्शन लगाया वो मरे
- 13:29इंजेक्शन के कारण भी मरे, लेकिन मैंने मेरे संपर्क में आने वाले
- 13:35व्यक्तियों को किसी को इंजेक्शन नहीं लगने दिया।
- 13:41मत लगाओ वैक्सीनेशन यह जो पूना वाले ने 400,00,00,000 दिया है और
- 13:50मुझ तक तो खबर पहुंची ही जाती है, यह काहे को दिया है?
- 13:58फिर क्या है यह बेईमानी? रिश्वत दे के सही चीज़ जेनेरेट कर
- 14:05सकेगा। क्यों दिया इसने ₹400,00,00,000
- 14:12गलत चीज़ को जेनेरेट करने के लिए। दारो देवी के मंदिर को गिरा दो।
- 14:24उसकी पूजा अभी से बंद कर दो, उसकी टंट फोड़ी जो रखी है सबार फेंक दो
- 14:31और दारो देवी को कह दो कि बाबा ने तुम्हें बुलाया है तुम ऐसा मत
- 14:38करो। मेरे पास से यहाँ घोटना लिए बैठा
- 14:42है, बस मैं जानू, मेरा काम जाने तो मेरा पिंडा छुपता और अगर पुत्र
- 14:56मेरे द्वारा बनाया हुआ प्राण प्रतिष्ठित किया हुआ सिक्का
- 15:00तुम्हारे पास है तो घबराने की बिलकुल जरूरत है।
- 15:06अगर लाल चंदन की माला जो हम यहाँ दीक्षा देखे, उसके बाद सभी को
- 15:14प्रदान करते हैं। और ध्यान रखें।
- 15:19यह सब व्यवस्था हमारी संस्था की तरफ से निशुल्क होती है।
- 15:27वह चार जो होती है उसके ऊपर 10,000 महामृत्युंजय।
- 15:33और 1,00,000 के करीब गायत्री वगैरह और अन्य मंत्र होते हैं।
- 15:38उनकी धुन से भरी होती है वो गलत रूही भटक भी नहीं सकते और तीसरा
- 15:47अप गायत्री मंत्र जब भी कभी देखो। के विपत्ति आन पड़ी है तो गायत्री
- 15:55मंत्र धीमेस्वर में चला दिया करो। जितनी देर तक अवश्य समझाओ, लोग तो
- 16:08चौबीसों घंटे चलाते हैं। के।
- 16:11दुख आये ही ना खैर तुम्हारी मान्यता है लेकिन मैं कहता हूँ
- 16:19तकलीफ के वक्त कोई जंजा बात आ जाये तो गायत्री मंत्र की।
- 16:29इस टनकार को लगा देना इसमें एक टनकार है, वह टनकार गलत रूहों को
- 16:38अच्छी नहीं लगती। ध्यान से समझना जैसे एक विशेष
- 16:44प्रकार की गंध किसी विशेष प्रकार की।
- 16:49जीभ को अच्छी नहीं लगती। कुछ गंदे हैं जो मच्छरों को अच्छी
- 16:54नहीं लगती। कुछ गंदे हैं जो कॉकरोच को चूहों
- 17:02को अच्छी नहीं लगती, वो दौड़ जाती है बस।
- 17:07ऐसे ही इसका अस्वीकार किया गया था।
- 17:11कुछ टंकारे हैं ऐसी जिन टंकारों को सुनना नहीं चाहती।
- 17:17गलत रोने और वो टंकार इसमें भरी पड़ी।
- 17:24यह एक साइंटिफिक प्रक्रिया है। यह कोई आध्यात्मिक प्रक्रिया नहीं
- 17:31है, साइंटिफिक प्रक्रिया है। विश्वामित्र साइंटिस्ट थे,
- 17:40उन्होंने इसकी एक टांग तोड़ दी। क्योंकि इसका उपयोग गलत होने लग
- 17:48गया था। यह तो वैसे तो एटम है, लेकिन
- 17:52लालची लोगों ने पंडितों ने पुजारियों ने इसका गलत उपयोग करना
- 17:58शुरू कर दिया। कहते हैं।
- 18:04क्या नाम था उसका? रामचंद्रन वगैरह कुछ है।
- 18:07सन्ना 33,00,000 अनुष्ठान किया उसने और गायत्री की वो टांग जुड़
- 18:15गई नहीं वो टांग नहीं जुड़ गया। अभी भी उनके शिष्य मेरे से वो
- 18:22अक्षर पूछने आ जाते हैं। मैं नहीं बताता क्योंकि मैं जानता
- 18:29हूँ कि तुम वही लो भी हो जिन्होंने इस मंत्र के प्रभाव से
- 18:36इस मंत्र को विश्वामित्र को प्रेरित किया कि उसकी टांग तोड़
- 18:41दें। पता है कुछ लोगों को लेकिन वो वो
- 18:52लोग हैं तो इसका गलत इस्तेमाल कभी न करेंगे।
- 19:00और सही प्रारूप में सही टंकार के साथ, यह गायत्री मंत्र चैनल के
- 19:07ऊपर प्रसारित किया गया है। इसका उपयोग कर लो सिक्के का उपयोग
- 19:17कर लो। प्राण प्रतिष्ठित करके आपको बहुत
- 19:22से सिक्के दिए हुए हैं। अगर किसी के पास नहीं है तो वह जब
- 19:30मैं कहूँ तो चार्ज कर ले, उसके बाद जब मैं यहाँ दीक्षा के लिए
- 19:35भला हूँ तो उनका सिक्का प्राण प्रतिष्ठित कर दूंगा।
- 19:40मैं जब तक हूँ तब तक आपकी सेवा में उपस्थित हूँ और कोई भी देवता
- 19:55हिंसा नहीं चाहता। ये बात अलग है कि आपके पुजारी
- 20:03पांडे जीव का स्वाद चाहते हैं, उनको चाहिए मेमने का मास किसी को
- 20:15भैंसी का। किसी को घोड़े का अलग अलग रह के
- 20:25मांसों का स्वास्थ्य और कोई वक्त न बली दी जाती थी।
- 20:32देवता के तो वो तंत्र ही नहीं होते, यंत्र ही नहीं होते।
- 20:40कहाँ होता है, देवता की नाक कहाँ होता है, देवता के दांत नहीं, ये
- 20:50सब पंडित पुजारी खा जाते हैं और तुम देख लेना।
- 20:54देवताओं को बस थोड़ी सी खुशबू लगा देते हैं, बाकी खुद खा जाते हैं
- 20:57बांट के और लड़ाईयां होती मैंने देखी हैं वो कहते रहे तू हार्ड
- 21:05हार्ड मैंने मुझे दे दिया हूँ थोड़ा सा कुछ अच्छा अच्छा।
- 21:14रस भी दे दे ऐसे झगड़े होते मैंने देखे जरूरत होती है पंडों को
- 21:35ग्रंथियों को, मौलवियों को। वो खाना चाहती हैं मेमनों के मास,
- 21:44कच्चे, कच्चे मास ये दुनिया आज दुख से त्रस्त है।
- 21:53इसमें से एक मुख्यतया कारण यही है कि तुमने निर्दोष जीवों को सताया
- 21:58काँटा। और वो भी कल में पड़ पड़ते है।
- 22:06अरे झटक देते है तो उससे प्राणी को दर्द तो कम होता है, तुम तो कल
- 22:17में पढ़ लेते हो। भगवान के नाम पर उसको कतल करते
- 22:21हो? भगवान के नाम पर दर्द और दुख देना
- 22:26क्या भगवान कहता है उसे परमिट लिया है तुमने उसकी आज्ञा मांगी
- 22:32है तुमने भगवान कहता है निर्दोषों का कतल करो।
- 22:38और वो भी मंत्र पढ़ पढ़ के करो ये काम अक्षय के भी का मंत्र है।
- 22:47इन्हें शर्म आनी चाहिए और लोग डर के कारण बोलते हैं।
- 22:59लोग भय के कारण बोलते नहीं, लोग लोभ के कारण नहीं बोलते, लेकिन
- 23:07देखिये मैं अखिल विश्व का मालिक हूँ।
- 23:14मुझे कोई लोभ नहीं और मुझे कोई भय नहीं मैं निर्लोभ अवस्था में अब
- 23:24है अवस्था में बिलकुल सत्य बोलेंगे तो मेरे पास भेज दिया
- 23:31करो, मैंने कितनी बार कहा? ये मस्टर्ड है ये निकालता है
- 23:36जिनको मैंने बहुत बार कहा अरे एक आध जिन ने मेरे पास थोड़ी सी
- 23:48खोपड़ी मैं भी ठीक कर लूँ अपनी। लेकिन मजार कभी किसी ने भेजा है।
- 24:01ये कहानियों आपको डराने के लिए बनाई गई है और पुस्त दर पुस्त ऐसा
- 24:08ही कुछ चलता है। इसलिए हमारा देश।
- 24:14वैज्ञानिक रूप से तरक्की नहीं कर पा रहा।
- 24:16आज हमारा देश इतना समृद्ध था। वैज्ञानिकता के आधार के कारण जैसी
- 24:29ही वैज्ञानिकता हमने खोई तैसी ही हम दृढ़ हो गए।
- 24:36मेरा ध्यान रखना साइंटिस्ट्स और प्रचुरता वैभव।
- 24:53जहाँ विज्ञान होगा वहाँ वैभव होगा जहाँ अज्ञान ए विज्ञान शब्द है
- 25:04सही तो है अज्ञान शब्द में से बी निकाल दिया ए विज्ञान।
- 25:14यहाँ विज्ञान नहीं है वहाँ तो भैंसों को काटना एक आमाख्या देवी
- 25:28अब ये कल मुझे कोई कह रहा था, जगन्नाथपुरी में दिल धड़कता है
- 25:32कृष्ण का। मैंने कहा भाई तुम 4 घंटे का वक्त
- 25:39मुझे दे दो, मैं वो दिल निकाल के दिखा दूंगा, तुम्हे के बाबा
- 25:44हिम्मत है, मैंने कहा हिम्मत हिम्मत तो है, उनमें हिम्मत है
- 25:51मेरी हिम्मत को मत पूछो। ये जो सुभद्रा के रथ के नीचे है
- 26:00ये जो जगन्नाथ पुरी, जो रथ निकाला जाता है, इसके रथ के नीचे कितने
- 26:08लोग आके मर जाते हैं? और जिंदगी का क्या मूल्य होता है
- 26:13तुम्हें पता है। उनसे पूछो जिनके घरों के चिराग
- 26:19बूझ गए हैं और जो घरों में चिराग रोशन करना चाहते हैं उनसे पूछो।
- 26:31तुम्हारे कर्मकांडों ने इंसानियत की बलि ले ली और आज ये कर्मकांड
- 26:40हर एक धर्म में अपना प्रभाव जमा रहा है।
- 26:43धीरे धीरे। लेकिन हम कैसे लिए कोई तो जब रात
- 27:36ईरंगी न होगी गम न कर। गम न कर बर है बादल घनेरा गम न कर
- 27:58बर है बादल घनेरा। किसके रोके रोका है सर?
- 28:13रात भर का है महिमा अँधेरा। बस रात भर का अधुरा है, भगवान
- 28:29कृष्ण का है पितृणा ऐसा धुना में विनाश आई या दुष्कर्म इन पाखंडों
- 28:37से बचाने के लिए? उन साधु वृत्तियों को जो सत्य
- 28:44सुनना चाहते हैं, सत्य बोलना चाहते हैं, पृथ्रानाय साधु नाम
- 28:50विनाय सायच दुष्कृदम यह दुष्कृत्य हैं, भैंसे की बलि दे दी कामाख्या
- 28:58देवी मैं। पैसे की बलि दी जाती है।
- 29:01काली के मंत्र में शराब चढ़ती पीना चाहते हैं पुजारी तो घर जाकर
- 29:08पी लो दूसरों को क्यों लत लगाते हो तुम्हारा दिया हुआ प्रसाद?
- 29:19उसको एक बार मोर्चा मिल जायेगा और तनाव तो सभी व्यक्तियों में होते
- 29:30है। काली मंदिर में तुम उसको शराब का
- 29:35प्रसाद दे दोगे शराब का प्रसाद लेकर।
- 29:41वह अपना भूल खिलई थोड़ी देर के लिए आप अपने आप को रिलैक्स महसूस
- 29:47करोगे। बस लत लग गई आपको शराब की यहीं से
- 29:52तुम शराबी पैदा करते हो बहुत सी स्त्रियाँ मेरे पास रोटी।
- 30:02हमारा पुरुष से शराब पीके गाली गलौच करता है, बच्चो को मारता है,
- 30:07पीटता है, मैंने कहा मंदिर जाता है, मैंने कहा बस वहा से ही जाना
- 30:16रोक दो। लेकिन जब व्यक्ति एडिक्टेड हो
- 30:21जाता है, दो के तक कोई बात नहीं है, मंदिर नहीं जाऊंगा।
- 30:251 मिनट घर बैठ के फिरूंगा लेकिन बात तो ये है पीने के बाद तुम भाग
- 30:31के जाते हो, तुम एक लिमिटेड डोस लेके रहो।
- 30:37जो डॉक्टर्स ने अप्रूव की है। 65।
- 30:39एमरी ज़रा भी नहीं फेंकोगे। यह भी उन लोगों के लिए है जिनको
- 30:47उसकी जरूरत है। मेंटली डीप्रेस्ड हैं।
- 30:53यह कुछ अन्य कारण है। अभी मैं इसकी चर्चा नहीं करूँगा।
- 31:00तो सब दुकान पर गया है। ठेकों की जगह काली मंदिर खुलेंगे।
- 31:05मीट की दुकानों की जगह ये तुम्हारी कामाख्या देवी के मंदिर
- 31:10खुल गए। आत्महत्याओं के केंद्रों की जगह?
- 31:17ये जगन्नाथ पुरी का रस निकलने लग गया।
- 31:22तुम किस दिशा में जा रहे हो? तुम्हारी मानवता किस दिशा में जा
- 31:28रही है? चेतो ठहरों जाबो।
- 31:38बिलकुल गलत काम न करो, क्योंकि बेहोशी में शराब पीके व्यक्ति का
- 31:44बेहोश होना स्वाभाविक है और बेहोश व्यक्ति मोर्चा में काम करेगा।
- 31:54पुण्य पाप का हिसाब नहीं होगा उसे।
- 32:03मोस्टली वह पाप ही करेगा क्योंकि शराब पीने के बाद अचेतन मन खुल
- 32:11जाता है, चेतन भी खुल जाता है। अचेतन से ज्यादा पाप ही भरे पड़े
- 32:17हैं भीतर। और तुम पाप से चिप के जाओगे और
- 32:26पाप करोगे? मेरा एक मित्र हुआ करता था बहुत
- 32:33साल पहले की बात हो गई, मैं शराब पिए जा रहा था, सुबह से लगा था।
- 32:44सांज तक शराब और सिर्फ शराब मैंने कहा क्या बात है कोई गम है कहता
- 32:52है मैंने कहा फिर क्यों पिए जाता है, कहता है बेहोश होने के लिए?
- 33:03मैंने कब हो क्यों कहता है आज मैंने किसी आदमी को मारना है
- 33:10बेहोशी के बिना तुम पाप कर ही नहीं सकता सुबह से शाम तक।
- 33:19शराब भी पिए जाता है। आदमी मारना है मैंने और जागृत
- 33:24व्यक्ति आदमी नहीं मार सकता। महावीर के तल पर आकर हिंसा
- 33:30मुश्किल हो जाती है। ऐसा नहीं असंभव हो जाती है।
- 33:35बुद्ध के तल पर हिंसा। मुश्किल हो जाती है, अहिंसक हो
- 33:41जाता है, व्यक्ति असंभव हो जाती है, इसलिए संत कहते हैं कि तुम
- 33:47छोड़ो मत कुछ, तुम मुझसे तल पर चले जाओ।
- 33:57जहाँ पर जाकर तुम अहिंसक हो जाओगे, जहाँ पर जाकर तुम दानी हो
- 34:04जाओगे, जहाँ पर जाकर तुम छोड़ पाओगे सब कुछ जहाँ पर जाकर तुम
- 34:10भ्रांतियों से मुक्त हो जाती हो, तुम वहाँ चले जाओगे।
- 34:19तुम कुछ मत छोड़ो, शराब पीते हो, थोड़ी थोड़ी मात्रा घटाते रहो और
- 34:28थोड़ा थोड़ा अपने भीतर रख सकते रहो।
- 34:31बाहर से शराब की लत छूटेगी। भीतर से अपनी तत्व तक पहुंचोगे और
- 34:39उसकी मदहोशी का तो वर्णन किया ही नहीं जा सकता।
- 34:45वह तो इतनी मदहोशी देती है कि तुम्हारी दुनिया में आय तक कभी
- 34:49कोई शराब जैसी बनी नहीं। तुम्हारे स्वर्गों की शराबियां
- 34:52उसके आगे फीकी हैं। वैसे शराब न समाज बना पायेगा, न
- 35:03विज्ञान और न ही तुम्हारे स्वर्ग का इन्द्र।
- 35:10वैसे शराब तो परमात्मा ने पहले से बना रखी है।
- 35:17अभी तुमने हाल देखा? प्रेम भाई साहब ऐसा ही सबका होने
- 35:25वाला है जो मान्यताओं के बेस पर चलते हैं।
- 35:34उनका लक्ष्य आनंद नहीं। काश उनका लक्ष्य आनंद हो।
- 35:43अगर आनंद का लक्ष्य लेकर तुम कुछ कहते हो तो वह होती है सार्थक
- 35:51कथा। उसमें रस भी होता है और उसमें
- 35:58सत्य भी होता है। लेकिन आज कथावाचक धन कमाने के लिए
- 36:07कथाएँ कर रहे है। देखो ना ये जया कसूरी।
- 36:11अभी ये प्रेम भाई शाह की बात सामने आ गई।
- 36:14अभी ये सारे देवकी नंदन वगैरह सब अज्ञानी और तो कुछ आता नहीं, अपने
- 36:26भीतर जाकर इन्मेंट नहीं कर सकते। तो फिर शास्त्रों में पढ़ लो और
- 36:32कथा कर लो। यह नकल मारने जैसा है जैसे तुम
- 36:36किताब पढ़ते हो, कोई प्राइम मिनिस्टर लिखा हुआ भाषण पढ़ता है,
- 36:42वो कागज़ पे लिखा हो, ये टेलीप्रॉम्प्टर पर इसका फर्क नहीं
- 36:46पड़ता? जो से ही ज्ञानी व्यक्ति है,
- 36:49निर्बाध रूप से बोलता है और कुछ नहीं देखता, उसके भीतर से आता है
- 36:55सहारा मटेरियल। वह न किताब पढ़ता है, ना ही
- 37:05टेलीप्रम्प्टर देखता है। उसके अंतर से आता है ज्ञान और वह
- 37:15ज्ञान, उसकी इन्वेंशन होता है। तो जब भी तुम नकल मरोगे,
- 37:21शास्त्रों में पढ़ के बोलोगे, वह शास्त्रों का प्रचार प्रसार
- 37:25करोगे। तो ऐसी ही दुर्घटनाएं होती
- 37:29रहेंगी। बाहरी जब कथा करोगे तो मेकअप करके
- 37:35इसीलिए तो आना पड़ता है अन्यथा सुंदर स्त्री को कभी मेकअप करने
- 37:41की जरूरत होती है। मैं सदा ही सीता की बात सुनाया
- 37:47करता हूँ, सीता का अपहरण हो गया। सीता पुष्पक विमान पे जाती जाती
- 37:58अपनी गहने फेंक गई। हे हवाओं हे पक्षियों हे थपेड़ों?
- 38:07हे नदियों हे तालाबों बता देना। मेरे स्वामी मुझे ढूंढ़ते हुए
- 38:11आएँगे और इन जेवरातों को देखकर पहचान जाएंगे कि मैं किस दिशा में
- 38:20गई। तो कोई हार मिल जाता है।
- 38:28करण फूल मिल जाता है, कोई बोरला मिल जाता है तो राम पूछते हैं
- 38:37लक्षण से भईया देखना यह है करण फूल या हार?
- 38:45तुम्हारी भाभी का है लक्ष्मण देखते हैं भैया आँखों में आंसू आ
- 38:53जाते हैं भैया मैं तो इसे नहीं पहचान सकता हूँ।
- 39:01आखिर में उसने पाये गए पहचान लिया।
- 39:06कहते भैया मैं ये पहचानता हूँ जब मैं सुबह उठ के प्रांत है, सिमरण
- 39:13करता था और माता के पांव मेरा सिर में होता था, तब ये फायदे मुझे
- 39:21दिखती थी। क्या होते हैं रिश्ते?
- 39:31रिश्तों में बहकना नहीं होता, यही सिखाया राम ने रिश्तों में
- 39:37मर्यादर्क नहीं होती और इसीलिए। पुरुष मनुष्य को बुद्धि दी गई है
- 39:46कि तुम पाश्विक ना हो जाओ पशु के पास बुद्धि नहीं पशु को पता नहीं
- 39:56ये मेरी बहन है, ये मेरी माता है, ये मेरी कौन है?
- 40:02लेकिन तुम्हें बुद्धि इसीलिए दी गई तुम्हें विवेक इसीलिए दिया गया
- 40:08कि तुम पाश्विक वृत्तियों से ऊपर उठ के मर्यादा साध सको और फिर भी
- 40:14अगर तुमने नहीं नहीं नाम रखा? लिबरल सेक्स का प्रचार कर रहा है
- 40:25तो फिर तुम्हारा राम ही रखा है, फिर तुम्हें पता नहीं।
- 40:36हमारे ऋषियों ने सदा ही मर्यादा को साधना सिखाया।
- 40:41हमने मर्यादा को सदा ही आदर्श माना।
- 40:47आज मर्यादाएँ टूट रही हैं, क्यों? वैसे मर्यादाएं इसलिए टूट रही है।
- 40:54आप लोगों को सिखाते हैं, शराब बंद कर दो, निश्चित ही घर जाके आप
- 40:58पीते होगे, आप लोगों को कहते हो मांस मत खाओ, निश्चित ही आप घर
- 41:04जाके मांस कहते होगे अन्यथा इतना पागलपन समझदार व्यक्ति तो करता
- 41:11नहीं। यह अपने ही शिक्षकों के साथ यौन
- 41:19संबंध प्रत्यापित कर लेना, यह वायुविक वृत्ति नहीं तो और क्या
- 41:26है वह तुम्हारी बेटी है। वह तुम्हारी माता है, तुम्हारी
- 41:36बहन है यही सिखाया था राम ने क्या तुम खाक सीखे रामायण तो सारी पढ़
- 41:45ली तुमने सीखे क्या तुम? मनुष्य को बुद्धि इसीलिए दे गई थी
- 41:58वह विछेद कर सके हर्ष किस को पशु न हो जाए वाश्विकता न अपना दे
- 42:06वाश्विकता अपना देगा तो गुरु और शिक्षा का संबंध।
- 42:13बाप और बेटी का संबंध नहीं रह जाएगा और अपनी भीतर उतरो, ये
- 42:25दोहरा मापदंड है तल का बाहर से मर्यादा सा दोगे?
- 42:30भीतर से अपने अन्तः में उतरोगे और 1 दिन हमें बाहर की मर्यादा साधने
- 42:35की आवश्यकता भी नहीं रह जाएगी। क्यों?
- 42:40क्योंकि जैसे ही तुम उससे तल पर जाओगे जो आपका अंतः स्थल का
- 42:45अंतर्तम तल है। वहाँ इतनी खुमारी और आनंद है कि
- 42:54तुम भोगना ही नहीं चाहोगे, कौन मूर्ख हुआ है?
- 43:00अगर कोई भोगना चाहता है तो इसका सीधा सार्थ है।
- 43:04कि उसने उस महा आनंद को अभी पिया नहीं, इसको मेरी मेरी इन बातों को
- 43:11आप डायरी पे लिख के रख लो, भूल जाते हो हृदय के भीतरी कोनों में
- 43:18लिख लो जो बाहर से अभी स्वाद झकना चाहता है।
- 43:24सीधा सीधा अर्थ है कि उसने अपने भीतरी अमृत तत्व के समुद्र में
- 43:30छलांग लगाई है। तीरथनामा यतिशबावे फिर अप्पाणी की
- 43:39नाई करी। उसकी कृपा होती है तो तुम उस भीतर
- 43:49के अमृत समुद्र में गोता लगाते हो।
- 43:56बाहर से थोड़ी थोड़ी वृत्ति को कम करना है।
- 44:03एक दम से मत छोड़ देना हमे यहाँ हमारे पड़ोस में कोई व्यक्ति
- 44:09ज्यादा पीता था, एक बोतल और ज्यादा चिढ़ जाती थी।
- 44:16ज्यादा चढ़ जाती तो वह काली की मूर्ति को कहता बोतल दिखा के जैसे
- 44:23कुत्ते को बुलाते न पूछ पूछ करके ऐसे मूर्ति को दिखाता हूँ, कहता
- 44:29ले पी ले तुम से पी ले तो हमने कहा यार तो ज्यादा छिड़ गई इसको।
- 44:37तो उनके घरवालों ने उसकी सुराग सुराग दी एकदम से और अगले ही दिन
- 44:50उसको अदरंग हो गया। आधा से में रखा उसका।
- 44:55नशा भी छोड़ना है या कसा मत छोड़ो क्योंकि वो भी तुम्हारे शरीर का
- 45:03एक अंग बन गया है। धीरे धीरे छोड़ो, बाहर से थोड़ी
- 45:10थोड़ी संख्या घटाओ और अपने भीतर उतरना शुरू करो।
- 45:15ये साइमल्टेनीअस नहीं होनी चाहिए। प्रपोर्शनेटली थोड़ा थोड़ा बाहर
- 45:20से -2 थोड़ा थोड़ा भीतर जाना शुरू कर दो, बढ़ा, दो और 1 दिन आएगा तो
- 45:28तुम भीतर में छलांग लगा दोगे तो अमृत कुंड में चला गया।
- 45:34फिर तो उसको जरूरत ही नहीं है। बाहर की जरूरत खत्म हो जाएगी।
- 45:45ऐसे प्रैक्टिकल करके देखो अपने घरों को बर्बाद करना मत।
- 45:53इन पाखंडियों ने तो तुम्हें सिखा दिया।
- 45:58काली के मंदिर में शराब भेंट चढ़ती है।
- 46:01नहीं कोई पत्थर की मूर्ति, ना शराब मांगती है, ना मीठा भोजन
- 46:07मांगती है, ना खीर प्रसाद कड़ा मांगती है ये सब तुम्हारे पण्डे
- 46:12पुजारी मांगते हैं। इसलिए तुमने अपने स्वादों को
- 46:18पूर्ण करने के लिए अलग अलग त्यौहार बना लिए श्राद्ध बना लिए
- 46:24इस श्राद्ध में स्वर्ग के दरवाजे खुले होते हैं और तुम्हारे पूर्वज
- 46:31तो सभी स्वर्गवासी। वो उतर के ही नीचे आ जाते हैं
- 46:36तुम्हे आशीर्वाद देने के लिए, तो फिर तुम उनको भोजन खिलाएं।
- 46:42को भोजन क्या है जो इनको अच्छा लगता है माल पुणे बनाया करो देसी
- 46:51के। खीर खिलाया करो, छीरस्य बना
- 46:55ब्राह्मणम भोजनम खीर ब्राह्मणों को बड़ा प्यारा लगता है खीर
- 47:05बढ़िया सब्जी बनाया करो। मैं श्राद्ध खाने जाता नहीं, एक
- 47:15मेरा मित्र आज भी है। वह अपनी माता का श्राद्ध किया
- 47:20करता था, अपने पिता का श्राद्ध किया करता था।
- 47:26उसने कहा भैया बात यह है मेरे से 4 साल बड़ा हुआ है।
- 47:33आज मेरे पिता का श्राद्ध है। देखो पंडित जी को तो मैं अलग
- 47:38खिलाऊंगा। वैसे तो आप भी पंडित जी हो और आप
- 47:45तो ऐसे पंडित जी हो कि आपको अकेले को खिलाकर ही सारे भ्रमण को
- 47:49संतुष्ट कर सकता हूँ? मैं जानता हूँ।
- 47:52लेकिन फिर भी एक परंपरा को निर्वहण करने के लिए मैंने
- 47:58ब्राह्मण को बुला लिया है। मैंने कहा ठीक आ जाऊंगा तो जब मैं
- 48:07गया तो पंडित जी खाना खा रहे थे। शराब की बोतल रखी थी और वो मैक
- 48:15डबल पीया करते थे, मैक डबल का बोतल रखा था, खारा सोडा रखा था और
- 48:23सामान रखा था, साथ में लेग पीस वगैरह।
- 48:30मुझे सीखा रहा था ब्राह्मण मैं भी चला गया, मैंने कहा भैया क्या कर
- 48:34रहे हो कहता हमारे पिताजी यही कुछ खाया करते थे उसने तो स्पेशल उस
- 48:44ब्राह्मण को। न्योता दिया था जो शराब भी पीता
- 48:50था, जो मांस भी खाता था। खैर उसका नाम नहीं लूँगा मैं आज
- 48:53वो चला गया चांस और मज़े से वो डाल रहा था बैग मज़े से वो लेग
- 49:00पीस खा रहा था चुन चुन के खा रहा था।
- 49:06मुझे कहता है भईया दूसरी टेबल पे आप बैठ जाओ वैसे ही मैकडॉवेल की
- 49:13शराब की बोतल रखती है, सारा कुछ सामान रखती है।
- 49:17मैंने कहा वो रोटी कहता है वो बाद में आएगा।
- 49:23मैंने कहा ये ले जाओ, ये मेरे लिए बेकार है।
- 49:25अरे भैया शराब थोड़ा सा शरीर टोन में आ जाता है।
- 49:33मैंने कहा मैं पहले ही टोन में हूँ, मैंने इतनी शराब पी ली है कि
- 49:37तुम्हारी ये शराबें मेरे लिए बेकार हो गयी।
- 49:45फिर ये थोड़ा सा लेग पीस खारो मैंने कहा, जीस स्तर पर मैं पहुँच
- 49:52गया हूँ। वहाँ जीवों को दुख देने की वृत्ति
- 49:56खत्म हो गई। अब दोनों मेरे लिए बेकार है।
- 50:05तुमने जीवों को दुख दे के क्या उनकी हत्या करके उनको मार के ये
- 50:13बकाया है? ये मेरे लिए व्यर्थ है।
- 50:16और ये तुम्हारा नशा भी मेरे लिए व्यर्थ है, मैं सदा ही बहन के उस
- 50:21मदहोशी के आलम में रहता हूँ। मेरे लिए दोनों बेकार हैं, इसलिए
- 50:27नहीं कि मैंने त्याग कर दिया है, नहीं, मैंने त्याग नहीं किया।
- 50:33मैं इनसे ज्यादा बढ़िया स्थिति में पहुँच गया हूँ।
- 50:36इनको बिना पिए मेरी बात को ध्यान से सुन लो पुत्र ये तुम्हारे सभी
- 50:52मंदिर जो भी गुरुद्वारा वगैरह। सभी मानसिक भीतर की वासनाओं को
- 51:08तृप्त करने के उपाय अगर कहीं भैंसा अर्पित होता है।
- 51:14तो उस पुजारी को या वहाँ आने वाले भक्तों को भैंसे का मांस चाहिए,
- 51:21घोड़े का मांस चाहिए, मेमने का मांस चाहिए।
- 51:31मैं इन सब मंत्रों को मैंने कब ही एक प्रवचन किया था।
- 51:35अगर आपको पीएम बना दिया जाए तो? मैंने कहा मैं सब धार्मिक स्थलों
- 51:42को समाप्त करती हूँ क्योंकि ये तुम्हारी वासनाओं को पूर्ण करने
- 51:49के हेतु है। हमें पता है जब ये बनी थी।
- 51:56ऐंठे थी, गारा था, सीमेंट था, लोहा था, बजरी थी, रेता था।
- 52:08ये भगवान का घर नहीं था और आज भी ये घर नहीं है।
- 52:12बस तुमने इन्हें मान लिया है और मानने से कभी कोई चीज़ भगवान का
- 52:17गर्व नहीं हो जाया करता, जानने से होता है, मानने से कुछ नहीं होता।
- 52:35अगर तुम सेब को आज बैंगण कहना शुरू कर दो क्या सेब बैंगण हो
- 52:39जाएगा सभी नाम तुम्हारे दिए हुए हैं अल्लाह हो के राम हो, राधे हो
- 52:50के पांच नाम हो सभी तुम्हारे दिए हो।
- 52:53और मेन मेड नाम परमात्मा तक नहीं पहुंचा सकता।
- 52:57यह सीढ़ी बन ही नहीं सकता। मेन मेड नाम हैं, जीतने भी आपको
- 53:07दिए जाते हैं। कनाबत्ती खुर तू चेला ते मंगुर
- 53:13तरजा माल ते करनोतुर। ये सब हो रहा है, वो मंत्र है,
- 53:22मस्जिद है, आश्रम है, गुरुद्वारा है या कोई डेरा है, सभी जगह यह
- 53:32कुछ हो रहा है और मैं इन्हें भलीभाँति जानता हूँ।
- 53:42क्योंकि सब जगह मौजूद है एम प्रेसेंट और ऑग्निसिएंट ऑनेपसेंट
- 53:51ऑनेपोटेंट कौन सा ज़रा ऐसा जहाँ मैं नहीं अच्छी तरह से चलता।
- 54:04और मुझे किसी चीज़ की आवश्यकता नहीं तो मेरे पास आके देखो 24
- 54:10घंटे का 24 दिन मेरे पास बैठो, देखो मुझे किसी चीज़ की जरूरत
- 54:15पड़ती है बिना किसी जरूरत के। सिर्फ शरीर को जलाने योग्य मुझे
- 54:23आहार चाहिए बड़ा सूक्ष्म आहार बस और कुछ
- 54:38जिंदगी के साथ बहता हूँ जो मेरे उस अनंत तल को मंजूर है।
- 54:48वह मुझे पहले से ही स्वीकारता है। जिंदगी का साथ निभाता चला गया।
- 55:02मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया।
- 55:10हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया मैं जिंदगी का साथ।
- 55:20निभाता चला गया। बर्बादियों का शो मना न फजूल था
- 55:34अगर तुम्हारा कुछ हो जाये। तो मैंने पिछले प्रवचनों में
- 55:39बताया कि तुम्हारा है नहीं, यहाँ कुछ शोक मत करना।
- 55:45बर्बादियों का शो मनाना फिजूल था, मनाना फिजूल था।
- 56:00बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया।
- 56:07अच्छा हुआ भलो भयो, हरी भी सरो सर से टली भरा।
- 56:16अच्छा हुआ एक अमानत को की चौकीदारी करने से हम मुक्त हुए
- 56:28अरबातियों का जश्न मनाता चला गया। हर फिक्र को धुएं वातावरण में
- 56:39उड़ाते जाओ, उड़ाता चला गया जो मिल गया उसी।
- 56:51खोमो का दर समझ लिया, बस यही नसीब में था जो मिल गया सी खोमो का दर
- 57:07समझ लिया। बस यही मुकदमे था जो खो गया।
- 57:15मैं उसको बुलाता चला गया, जो खो गया, जो गुम हो गया उसको बुलाता
- 57:26चला गया क्योंकि वह मेरा था ही नहीं।
- 57:30मिल भी गया तो भी मेरा नहीं आज खो गया स्वतः भलो भयो, हरी भी करो,
- 57:40अच्छा हो गया फिर आखिर में भी तो छोड़ के जाऊंगा इसको चलो आज ही खो
- 57:47गया अच्छा हुआ। जो मिल गया उसी को मुकदरी समझ
- 58:01लिया, जो खो गया, मैं उसको बुलाता चला गया।
- 58:09गम और खुशी में फर्क न महासू हो जहाँ असल में यह गाना गाना नहीं,
- 58:28यह एक साथ ना। तुम बिलकुल इस गाने के हिसाब से
- 58:32चलते चले जाओ। किसी अन्य साधना को करने की
- 58:36आवश्यकता नहीं है। हम और खुशी में फर्क न में है।
- 58:48सू सू हो जां। गम और खुशी में फरक न महसूस हो
- 58:55जाऊं मैं दिल को उस मुकाम पे लाता चला गया मैं रोज़ बोलता हूँ जहाँ
- 59:09दैत मट जाए। तुम्हें फर्क महसूस न हो, तुम्हें
- 59:18साधना न पड़े, बैलेंस बिठाना न पड़े, स्वत से बैलेंस हो जाओ, हाँ
- 59:26और खुशी में फर्क न महसूस। हो जहाँ महसूस हो जहाँ मैं दिल को
- 59:38उस मुकाम पे लता चला गया जैसे ही तुम अपने भीतर उतरते जाओगे, रोज़
- 59:46स्वीकार करोगे। गम आये तो भी ठीक खुशी आये तो भी
- 59:52ठीक कुछ मिल जाये तो भी ठीक कुछ खो जाये तो भी ठीक बर्बादी हो तो
- 1:00:01भी ठीक और आबादी हो तो भी ठीक। अगर तुम इस तरह चलते रहे तो ये
- 1:00:12साधना है। याने कद भी कहा और वैज्ञानिक ढंग
- 1:00:22से नहीं, तार्किक ढंग से नहीं। सत्य का ढंग सत्य है कि तुम नहीं
- 1:00:29हो, यह सत्य है कि तुम नहीं हो, यह सत्य है कि तुम ही नहीं हो तो
- 1:00:37तुम्हारा क्या खाक होगा? आखिर में उस स्थल पर उतर जाना है,
- 1:00:51गम और खुशी में फर्क का नाम है सो सो जहाँ यहाँ बैलेंस ड्यूटी में
- 1:01:03यहाँ संतुलन हो जाए। ना तुम गम से गफरो ना तुम खुशी
- 1:01:13में उछलाँगे मारो दोनों यकसा हो जाये कुछ भी मिल जाता।
- 1:01:25तेरा पाना मीठा लक है जो तुध पा वे सोइप अली कह मेरी तो यही मर्जी
- 1:01:34मेरी तो यही अर्ज कर वो ही जो तेरी मर्जी।
- 1:01:45अभिषेक भूषण पूछते हैं, देहरादून से प्रभु मुझे इस स्थिति में क्या
- 1:01:51करना चाहिए? यही पूछा था अर्जुन ने कृष्ण से
- 1:01:57कार्पण ने दोषो पर सभा पर छमत्वम धर्म सम्मुख चेता।
- 1:02:03यक्षरी है सयानी स्थित रोहतन में शीर्षस्थ अहम शाद इमाम तम पर
- 1:02:08पन्नामा तुम भी मैं कहूँगा बेटे इस दारी जोगी को तुम मेरे पास भेज
- 1:02:17दो मेरे पास यहाँ करडे हाथों वाला बैठा है।
- 1:02:23और नहीं भी होगा तो मैं बुला लूँगा तो मैं अच्छे से सेवा
- 1:02:29करूँगा। इसकी काली हो, पीली हो या सेरम
- 1:02:36वाली हो या गिद्दड़ों वाली हो। सबका इलाज मेरे पास है, इनको मेरे
- 1:02:40पास भेज दिया करो, मुझे पता है यह तुम्हारी कृत्रिम बनावट है।
- 1:02:46काक जी शेर हैं ये कभी किसी को खाते नहीं हैं तुमको मुझे सुनते
- 1:02:55हुए कितनी देर हो गए? क्या अब भी तुम इन कल्पनाओं से
- 1:02:59ग्रस्त हो? ये धारी देवी का इलाज मेरे पास
- 1:03:07है। इन सब काली पीढ़ियों का इलाज मेरे
- 1:03:11पास ये तुम्हारे विष्णु ब्रह्मा का सब का इलाज मेरे पास।
- 1:03:20जिसका दिमाग ठिकानी ना हो वो मेरे पास भेज दिया करो मैं दिमाग
- 1:03:24ठिकाने करता हूँ अहम तुम सिर्फ पाप विभव मोक्ष श्याम माँ सोचा
- 1:03:32मैं सबका जवाब ठीक कर देता हूँ। इसलिए पुत्र तुमने मुझसे पूछा मैं
- 1:03:39तुम्हें कहता हूँ सब छोड़ दो मंदिर ढा दो मस्जिद ढा दो, ढा दो
- 1:03:45जो कुछ ही ढेंदा पर सीधा दिल ना ढाओ इस दिल से दिलबर रह दा।
- 1:03:54बस किसी के प्रेम को मत ठुकरा देना ए दारु देवी से मैं निपटूँगा
- 1:04:01प्रेमिका का हृदय मत सताओ और अगर कहीं तुम्हारी स्त्री किसी बात के
- 1:04:15लिए उसे अच्छी तरह से पूछो मठाके। मेरे पास ले आओ यहाँ मैं पूछ
- 1:04:20लूँगा कई बार कुछ अज्ञात ढूंढिया स्त्रियाँ या आदमी जिनके ऊपर भी
- 1:04:31देवी देवता आते हैं बस इन्हीं प्रताड़नाओं के शिकार होते हैं।
- 1:04:37फिर वो प्रारूप धारण कर लेते हैं। हनुमान आगो यह दुर्गा आ गई या
- 1:04:45काली आ गई यह पीली आ गई ये सब तुम्हारी मानसिक विक्षिप्तताओं के
- 1:04:52स्वरूप में। ऐसा कोई कुछ होता नहीं, तुम मंदिर
- 1:04:59बनाओ, तुम मस्जिद बना लो, तुम कुछ भी बना लो, तुमने तो परमात्मा ही
- 1:05:03अनेक खड़े कर दिए, तुमने तो आज अपनी एयाशी के कारण मस्जिदों के
- 1:05:09नीचे मंधक ढूंढना शुरू कर दिया। बस ये सिर्फ तुम ऐयाशी का सबूत दे
- 1:05:15रहे हो अपना लेकिन ध्यान रखना इस ऐयाशी का ढंग गलत है।
- 1:05:20यह मार्ग है ऐसे ऐश नहीं होती, ऐश हम से पूछो कैसे होती है हम
- 1:05:25बताएंगे, हम बताएंगे तुम्हें ऐश कैसे होती?
- 1:05:33जो ऐश ले रहा है चौबीसों घंटे सदा दिवाली, सादगी और आठ ऊन बह रहा
- 1:05:39आनंद वो ही तो बता पाएगा, जो खुद दुखी है वो तुम्हें क्या राह
- 1:05:44दिखाएगा? बर्बादियों का शो बर्बादियों का
- 1:05:57शो मनाना फिजूलता यहाँ कभी किसी की बर्बादी नहीं होती, सब उसका
- 1:06:06उसका ही रहता है, उसका ही है। और उसका ही रहता है बर्बादियों का
- 1:06:15जश्न मनाता चला गया बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया हर।
- 1:06:27को धुमें में उड़ाता चला गया। धन्यवाद।