Latest / Baba ji Vijay Vats / 8 May 26 - समस्या vs प्रश्न! "स्वयं की पहचान", "शास्त्रों की सीमा" और "सच्चे गुरु की परख"
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- 0:13कालिदास बाबजी आप कहते हैं प्रश्न तुम्हारे दुख से ऊबते हैं।
- 0:38जब तलक प्रश्न है तब तलक तुम दुखी हो और भी कई प्रश्न हैं आइए आज का
- 0:57प्रवचन। हम इन सब प्रश्नों को सौंप देते
- 1:03हैं। समस्या और प्रश्न में फर्क होता
- 1:17है। पहली बात समते समस्या वास्तु भी
- 1:26तो होती है प्रश्न आर्टिफीसियल प्रश्नों को अगर हल में भी किया
- 1:44जाए तो भी तुम अपने अस्तित्व तक पहुँच सकते हो जिससे संतो ने कहा
- 1:56रिमेम्बर यूर, सेल्फ नो दायित्, सेल्फ हू आर यू?
- 2:04अगर सारे प्रश्न अधूरे रहे जाएं, एक भी प्रश्न का सलूशन ना मिले तो
- 2:16तुम उन प्रश्नों के रहते हुए भी? अस्तित्व तक मज़े से पहुंचाओगे इस
- 2:27प्रश्न को आप इस बात को आप अंडरलाइन कर सभी समस्याओं के रहते
- 2:38हुए भी। आप अपने अस्तित्व तक पहुँच ही
- 2:47जाओ, धीरे बोल रहा हूँ ताकि तुम्हें समझा जाए।
- 2:58प्रश्न ज्यादा गहराए क्योंकि प्रश्न और समस्याएं तुम्हारे
- 3:10अस्तित्व से बहुत दूर है। किसी समस्या की ताप, किसी प्रश्न
- 3:22की उलझन तुम्हारे अस्तित्व तक नहीं पहुंचती, नहीं पहुँच सकती।
- 3:36इसलिए जो व्यक्ति मात्र प्रश्नों का जवाब पूछेगा, वह उसके दुख से
- 3:43आएगा। अगर मैं तुम्हें तुम्हारे
- 3:53प्रश्नों का जवाब देता हूँ तो मैं जानता हूँ कि तुम दुख हो।
- 4:06पर मैं ये भी जानता हूँ कि मेरे प्रश्नों के जवाब सुनने के बाद भी
- 4:16तुम रिलैक्स तो हो जाओ, हल्का महसूस करोगे।
- 4:23लेकिन जीस अमृत की रस्की मैं बात कर रहा हूँ वो नहीं पी पाओगे असल
- 4:38में मनुष्य बड़ा बेईमान हो गया है।
- 4:53क्योंकि मनुष्य अपने अस्तित्व तक पहुंचना ही नहीं चाहता, जानना
- 5:01चाहता है मात्र जिज्ञासु है। पी।
- 5:04पाशु नहीं, मो। मोक्ष नहीं।
- 5:10जिज्ञासा तो मात्र विषय का समाधान चाहती है प्रश्न का उत्तर चाहती
- 5:20है, लेकिन मुँह मूक्षा तुम्हारे दुख का हाल चाहती है।
- 5:29तुम्हारी समस्या का निदान चाहती है और तुम्हारे सारे शास्त्र
- 5:48सूचनाएँ शास्त्रों में सूचनाओं के अतिरिक्त और कुछ होता।
- 6:01जैसे यह एक किताब मैं आपको दिखा रहा हूँ ये श्रीमद्भागवत गीता है
- 6:14गोरखोर। गीता बस के कृष्ण के बोले गए शब्द
- 6:26इसमें संक्रहित है, कृष्ण के बोले गए शब्द।
- 6:35इसमें सारे लिखे हुए जैसे किसी दवाई के ऊपर उसके साल्ट का नाम
- 6:42लिखा। क्या दवाई का साल्ट तोड़कर
- 6:52तुम्हारी बिमारी को आराम आ जाता है?
- 6:59तुम्हें दर्द हो रहा है, पेट का तुम्हें किसी ने दवाई दे दी, बस
- 7:08को पैंट तुमने देखा उसका 60 का हैश ने भरवा एक।
- 7:18क्या इस साल्ट को देख कर मात्र बढ़ने से तुम्हारा पेट दर्द ठीक
- 7:23हो जाएगा? तुम्हारे इन्फेक्शन है सुईरे
- 7:32इन्फेक्शन है तुम्हें किसी ने एंटीबायोटिक।
- 7:40उस दवा के पत्ते के ऊपर उस साल्ट का नाम पढ़ के यह ब्रॉड
- 7:47स्पेक्ट्रम है। यह सिंपल सैफिक सिम है।
- 7:55या सिप्रोफ्लक्सासिन या कोई भी क्या तुम्हारी बैक्टीरियल
- 8:02इन्फेक्शन ठीक हो जाएगा मात्र उस साल्ट को नहीं, तुम कहो के नहीं
- 8:12होगा। तो फिर इस शास्त्र को पढ़ने से
- 8:19तुम उस तल पर कैसे चले जाओगे? जीस तल से यह शास्त्र बोला गया आज
- 8:31बहुधा। आचार्य तथा कथित संबोधित युक्त
- 8:45पुरुष इन्हीं ट्रिक्स का इस्तेमाल करें।
- 8:56गीता को पाठ कर सत्यनारायण की कथा करवा माँ गंगा की आरती कर और तुम
- 9:16देखना शाम को हरिद्वार हो काशी काजलों की भीड़।
- 9:25देसी घी की जो घंटों घंटों खराब कर देता है और एक से एक ज्यादा
- 9:38ऊंचे स्वर में जैसे परमात्मा बहरा।
- 9:47जो यह जीवा बोल रही है उसके भीतर भी वही विद्यमान है क्योंकि झरे
- 9:54झरे में वो फिर उसका नाम बोलने से यह पवित्र कैसे होगी, यह तो पहले
- 10:01से पवित्र है बिकॉज़ ही इस ओनली प्रेसेंट।
- 10:17ज़िन्दगी रह गई दर्द बनते है दर्द दिल में छुपाये छुपाये आज सोचा तो
- 10:30आंसू भर आए मुद्दतें हो गई मुस्कुराए।
- 10:39तुम्हारे सारे समाधान बेवकूफना हरकतों से भरा है।
- 10:50एक व्यक्ति मर रहा है, तड़प रहा है तुम उसको गीता का 18 वां
- 10:55अध्यायी सुनाना शुरू कर देते हो। सारी ज़िन्दगी उसने की तपड़ी एक
- 11:09प्रथा आती है। लामा में मरते हुए आदमी को उसे
- 11:17भारत दो कहते हैं बहुत दो कह लो। वो मरते हुए आदमी को जांच कराते
- 11:28हैं। ध्यान रखो सावधानी से मरो, चेतनता
- 11:33से मरो, शरीर छूट रहा है बिलकुल उसी तरह।
- 11:40जैसे तुम वस्त्रों को उतारते हो तो ध्यान से देखो यह जो छूट रहा
- 11:47है यह तुम्हारे शरीर के वस्त्र मात्र है, तुम इससे अलग हो
- 11:57वासांशी ऋणनीयता ब्याहाय। नवानी घृणा कि नरोपराण जीरणा
- 12:05अनन्याणि सयाती नमाने ले तथा श्री रानी व्यापार।
- 12:24जिसने ज़िन्दगी में कभी आत्मा परमात्मा की खोज नहीं दी, उसे तुम
- 12:32मरते हुए गीता का पाठ सुना। जिसने जीवन भर याद किया, प्रवचन
- 12:45सुने तुम शरीर नहीं हो, मन नहीं हो, विचार नहीं, उसको याद कराने
- 12:53की आवश्यकता है। याद करो इस मृत्यु के क्षण तुम
- 12:59विचलित हो जाओ। क्योंकि सारी उम्र इस देह के साथ
- 13:04तुमने नाता जोड़े रखा। अब नाता टूट रहा है तो घबराने की
- 13:11कोई आवश्यकता नहीं, बस जाग के मरो इसे मर्जीवड़ा कहते हैं।
- 13:23जाग के मरने की कला जानों की कौन मर रहा है और तुम पाओगे वह मृत्यु
- 13:35को देखने वाला साक्षी सदा विद्यमान रहता है।
- 13:41मरने वाला मर जाता है, पंचभौतिक तत्व का शरीर मर जाता है जैसे
- 13:50तुमने शरीर के वस्त्र त्याग दिए जैसे सांप ने कीच ली को त्याग
- 13:54दिया। वह चीखता चलाता नहीं, वह आराम से
- 14:01अपनी खींचली को छोड़ देता है। इतनी समझ तो साँपों में भी होती
- 14:07है। वह जानता है कि मैं कैंचली को
- 14:14छोड़ रहा हूँ और कैंचली मैं नहीं। तुमने मनुष्य की गरमा को खो दिया
- 14:23है। उस दिन मनुष्य की तुम सर्वोच्च
- 14:30ऊंचाइयों को खाओगे, जिससे शरीर छूटे और तुम हाहा करने करोगे।
- 14:44शरीर तड़पेगा और तुम जानोगे कि तड़प रहा है शरीर कोई बिमारी से
- 14:52मरेगा, कोई घाव से मरेगा, कोई बैक्टीरियल इन्फेक्शन से मरेगा।
- 14:59कोई अक्सीडेंटल डेथ होगी, किसी के को भी गोली मार जाएगा, वह पिन
- 15:12देखेगा, महसूस करेगा और जानेगा यह दर्द मेरे नहीं हो रहा है मुझसे
- 15:18दूर हो रहा है, मैं इसका साक्षी अभी भी।
- 15:26जीस दिन तुम्हें यह स्थिति प्राप्त हो गई उस दिन तुम्हारी
- 15:34चेतना करीब करीब पूर्ण विकास की तरफ बढ़ गई।
- 15:43तुम मात्र धन का विकास करने में लग जाते हो, मान सम्मान का विकास
- 15:48करने में लग जाते हो। ओह दो का डिग्री का रुतबे का
- 15:54सूचनाओं का विकास करने में लग जाते हो।
- 16:00स्वयं की चेतना का विकास कभी नहीं किया था, इसलिए जैसे आय वैसे ही
- 16:10चले जाते हो। मैं क्यों कहता हूँ कि प्रश्न
- 16:21तुम्हारे दुख से आदेश जैसे उलझन तुम्हारी समस्या से आती है,
- 16:30उन्हें कोई समस्या है, तो तुम्हारा दिमाग उलझ गया,
- 16:36संशयात्मक हो गया। कैसे इसका हल करूँ?
- 16:40क्या मिलेगा हल तुम्हें? इसका पहले प्रश्न और समस्या का
- 16:49फर्क समझ लीजिए। प्रश्न कुछ जानना चाहता है।
- 17:00समस्या कुछ हल करवाना चाहती है या बुनियादी फर्क है?
- 17:08प्रश्न कुछ जानना चाहता है तो मगर पूछोगे।
- 17:16यह क्या है? मैं कहूंगा ये रिमोट है तुम्हारे
- 17:21प्रश्न का तुम आगे प्रश्न करोगे, ये कैसे काम करता है?
- 17:28मैं तुम्हें ऐसे काम करके दिखा दूंगा।
- 17:30ऐसे करता है लेकिन यह समस्या नहीं है।
- 17:35इट्स मिर ए क्वेश्चन यह है सिर्फ़ सवाल एक होती है समस्या समस्या है
- 17:45कि तुम व्यवहार हो बखार में दर्द ठीक नहीं हो रहा है बड़ा रूप हो
- 17:53गया। कैंसराइटस वगैरह वगैरह।
- 17:59जिससे तुम तंग आ गए, वह समस्या ठीक नहीं हो रही।
- 18:07डॉक्टर कहते हैं देखो हमारी दुश्मन से बाहर।
- 18:11मेरे पास बहुत से ऐसे रोगी आ जाते हैं।
- 18:16मैं कहता हूँ डॉक्टर के पास जाओ। वो कहते हैं डॉक्टरों के पास जाकर
- 18:22ही है। डॉक्टर कहते हैं हमारी समझ में
- 18:26नहीं आती जैसे अनाथनाथ। डॉक्टर कहते हैं इट इस स्टे नी टस
- 18:37वो कहते है ठीक है, दवाई दे दो, डॉक्टर दवाई देता है, लेकिन यहाँ
- 18:42कान में जिंगुर की आवाज खत्म नहीं होती।
- 18:45फिर डॉक्टर आखिर मैं कह देता है नहीं, अब मुझे नहीं पता क्या?
- 18:51फिर उसकी समस्या का हल वह करता है जिसे अनाथनाथ शुरू हो गया।
- 18:57वह कहेगा यह तो परमात्मा की आवाज है, मूल स्रोत से उत्पन्न होती
- 19:02है, यह मिटेगी नहीं। कोई दवा इसको मिटाएगी नहीं।
- 19:09या तो तुम सो जाओ तो यह महसूस नहीं होगी बस तुम भी जब सो जाते
- 19:16हो कहा सुना ही पड़ता है सुनने वाला सुब्त हो गया।
- 19:25सुनने वाला बेहोश हो गया। तो ध्यान में भी पता नहीं चलता
- 19:32क्योंकि सुनने वाला जाग गया और मोर्चा में भी पता नहीं लगता
- 19:38क्योंकि सुनने वाला मोर्चे तो हो गया अचेतन हो गया।
- 19:47एक प्रश्न होता है, उसका हल कोई भी कर सकता है।
- 19:53एक समस्या होती है, उसका हल कोई भी नहीं कर सकता, कोई विशेषज्ञ कर
- 19:58सकता है। लेकिन ध्यान रखना जो संत बात कहता
- 20:10है वह न तो प्रश्न है, न समस्या है, वह बुनियादी तकलीफ है।
- 20:18तुम्हारी बुनियादी तकलीफ क्या है? उस रस को पीने की इच्छा उस परम रस
- 20:37को पीने की इच्छा जब तुम इलाय का बड़ा करते हो, ठेके पर जाकर शराब
- 20:46पी लेते हो। लेकिन वह तुम्हें मूर्छित करती
- 20:54है। मोर्चा में रस तो नहीं होता,
- 21:00मोर्चा में तो नींद होती है। तुम्हारा अंतः हर वक्त एक पीड़ा
- 21:08से गुजर रहा है। बस सिर्फ तुम्हें पता नहीं होता,
- 21:15तुम्हारी बुद्धि एक राजनीतिज्ञ है, तुम्हारी बुद्धि राजनीतिज्ञों
- 21:22की तरह है उस भीतर के दर्द को। और और तरीकों से बांटती रहती है
- 21:35धन कमालो सूचनाएं इकट्ठी कर पदवी कमालो मान सम्मान।
- 21:48श्रेय ले लो मानतों में वटकाता है तुम्हारी असल दुखड़े के कारण
- 22:01तुम्हारा असल दुखड़ा क्या है? मैं रोज़ बताता हूँ तुम्हारा
- 22:06अंतः। प्यासा और वह अंत प्यासा अंत उस
- 22:19प्रेम रस की पुकार करता है। वह प्रेम रस तुम्हें जहाँ से मिल
- 22:30जाता है, तुम बाहर ठहर जाते हो और प्रेम रस को पिलाने के कई तरीके
- 22:41नहीं होते, सिर्फ एक ही तरीके होता है।
- 22:45तुम्हें तुम्हारे भीतर भेज देना एक ही तरीका है एक ही रास्ता है,
- 22:53बाकी रस्ते मन के बहलावे हैं मन के छलावें तो मैं एक उदाहरण देता
- 23:04हूँ। आज का प्रवचन थोड़ा कठिन भी है।
- 23:07गहराव है इसीलिए तुम बड़े संतोष से शांति और धैर्य से सुन तुम
- 23:17किसी डॉक्टर के पास से हो। तुम कहते हो डॉक्टर साहब दर्द
- 23:30बहुत हो रहा है, सिर में डॉक्टर तुम्हे एनर्जेसिक दे देता है और
- 23:42कहता है आराम करके जा के। तुम सो जाते हो और जब उठते हो तो
- 23:52दर्द गायब होता है। यह इलाज असली है।
- 24:06एक डॉक्टर ऐसा भी हो सकता है जो तुम्हे एनल जैसे करना दे, जो
- 24:13तुम्हे बार्बेजोरेट्स दे दे और ज्यादा मात्रा में दे दे।
- 24:18और उस ज्यादा मात्रा की बार बछू रेत से तुम्हारा शरीर ही मर जाए
- 24:30दर्द तो फिर भी खत्म हो समझ। नीम हकीम खतराई का दर्द सच्चे
- 24:42डॉक्टर ने भी समाप्त किया तुम्हें ऐनल जैसे का इंजेक्शन दे के दर्द
- 24:52नीम हकीम खतराई जान ने भी किया। तुम्हें गलत उपाय बता कर उसे दर्द
- 25:03का कारण नहीं मटेगा शरीर ही खत्म हो गया।
- 25:10तुम्हारा अंतः व्यासा है। और इस प्यास को बुझाने के लिए
- 25:19असली संत की आवश्यकता होती है। जिसके पास शुद्ध पानी होता है।
- 25:27फिर मल जल मनू जन सोई मौही। निर्मल मन जन सोई मोई हाँ वा मोहि
- 25:43का पट जल छेत्रना भा व। डॉक्टर ने सही इलाज किया तुम्हारे
- 25:59सिरदर्द का और नीम हकीम कतराए जान ने जिसमें दर्द हो रहा था, उसे ही
- 26:12समाप्त कर दिया। दर्द दोनों ही दशाओं में समाप्त
- 26:16हो गया, लेकिन तुम ज़रा सोचना कि सही इलाज किसने किया?
- 26:29बिलकुल तुम्हारे पास इतनी बुद्धि है, तुम कहोगे।
- 26:33सही इलाज उस डॉक्टर ने किया जिसने हमारे सर का दर्द ठीक कर दिया।
- 26:39ने के जिसमें दर्द हो रहा था उसे ही खत्म कर दिया, शरीर को ही मार
- 26:46दिया चेन तो तुम चाहते हो। सच्चा गुरु भी तुम्हें चैन में ले
- 26:56जाता है और मूर्ख गुरु तुम्हें श्मशान घाट तक पहुंचा देता है।
- 27:05चैन वहाँ भी बड़ा है। तुम चिर निद्रा में समा जाते हो।
- 27:13दर्द की छटपटाहट खत्म हुई। डॉक्टर सही तरीके से करता है।
- 27:21नीम हकीम खतरा ये जान गलत तरीके से करता है और वह हर कोई हल भी
- 27:26नहीं। इसलिए मैं इन डेरों में बैठे हुए
- 27:32डेरा पंक्तियों को नामधारियों को श्मशान घाट कहा करता हूँ।
- 27:37ये श्मशान घाट है शांति तो ये भी देते हैं लेकिन तुम्हारी शक्ति
- 27:45को। खत्म करके एनर्जीलेसनेस जीस शक्ति
- 27:52से तुम जीवित हो उस शक्ति को इस तरफ लगा दो एनर्जीलेसनेस में चले
- 27:59जाओ शक्ति विहीनता में चले जाओ एंड यूर ड।
- 28:06रात गई बात गई समस्या यह भी हल करते हैं समस्या डॉक्टर ने भी हल
- 28:16किया और तुम कभी उसके पास नहीं जाते, तुम कहते हो यह वही है
- 28:24देखना कहीं। तुम उसकी दुकान के आगे से भी नहीं
- 28:34गुजरते। तुम कहते हो वही है राधे राधे जो
- 28:41यमुना जी में मोक्ष हो गए सर? दो तरीके तरीका तो एक ही है लेकिन
- 28:57दो तरीके मैं ये कह रहा हूँ एक ट्रू एक वर्ड्स सच्चा गुरु
- 29:06क्योंकि पहुंचा होता है पढ़ा होता है उसने किताबों में।
- 29:14और नकली गुल को कुछ नहीं पता होता।
- 29:16वह गुरुओं से, गुरुओं की गुरुओं से, बाबाओं से हजूरों तक हजूरों
- 29:23से बाबाओं तक ऐसे ही ट्रांसफर होता रहता है।
- 29:27ज्ञान। उन्होंने कभी गहरा ज्ञान देखा
- 29:30नहीं, वो कभी अपने भीतर उतरे नहीं।
- 29:33वो नीम हकीम कतराईजा नहीं है इसलिए मैं उनको शमशान घाट कहा
- 29:40करता हूँ, वो मुर्दघाट है। वो तुम्हें कहेंगे ये लो पांच ये
- 29:52लो राते राते करते रहो 8,00,00,000 बार अरे मर ही जाओगे
- 29:56पक्का 8,00,00,000 बार इसलिए हिंदुस्तान?
- 30:06अविष्कारक का देश नहीं बन सका, क्योंकि पांच नामों से पीसा छूटे
- 30:14तो वक्त मिले फुर्सत के रमाइ के पैदा नहीं होने देते।
- 30:23और खोज हुआ करती है। फुर्सत के लम्हों में ये तुम्हारी
- 30:29उस शक्ति को क्षीण कर देते हैं। जीस शक्ति ने इन्वेंशन करने थे।
- 30:38नाम कोई भी हो बात शक्ति विहीनता की।
- 30:44इसलिए संतों ने कहा ब्रह्मचर्य शक्ति को छोड़ो, शक्ति को जोड़ो।
- 31:04उन्होंने वो सभी चीजें समाप्त कर दीं।
- 31:08जिनसे तुम्हारी शक्ति वह होती थी व्यर्थ में सत्य अहिंसा अस्तय
- 31:14ब्रह्मचर्य अपरि काहा, शोच संतोष तप स्वाध्याय ईश्वर प्राणीनाथ यह
- 31:221010 फॉर्मूलेशन दिया। सत्य में इसे ही 10 महाविध्यालय
- 31:27कहते हैं। अगर तुमने इन 10 महाविद्याओं को
- 31:36देवीयों के नाम से ऊपर करना शुरू कर दिया तो इसमें पतंगुली का कसूर
- 31:42है। इसमें महावीर का बुद्ध का क्या
- 31:47कुछ होता है? 10 महाविध्यालय को सिद्ध करने
- 31:53वाले व्यक्तियों को मैं पूछुंगा तुम्हें कभी कुछ मिला?
- 32:03ईमानदारी से वो कहेंगे फिर क्यों वक्त खराब करे?
- 32:11ये कहेंगे हम हमारी थोड़ी सी समस्याएं हैलो भाई बस ये भूल जाते
- 32:22हैं। हल करने वाली ये 10 महाविध्यालय
- 32:27यह तो तुम्हारे बनाए हुए वही देवीय स्वरूप थे जैसे तुमने
- 32:33दुर्गा बना के काले बना दी यह कोई सच में नहीं है।
- 32:39दीज़ अरे ओनली सिंबल्स ये प्रतीक है।
- 32:47कश्तियां सबके किनारे पे लग ही जाती हैं न खुदा जिनका नहीं उनका
- 32:56खुदा होता है, संत जनता है। कि तुम राम राम करो ना करो, वह
- 33:08कोई रिश्वत थोड़ी मांगता है सच्चा दाता तिल न तुम आया उसके भीतर तिल
- 33:16के बराबर भी लोभ नहीं होता कि तुम उसका नाम लो।
- 33:20लेकिन मनुष्य की यह प्रवृत्ति मनुष्य कहता नहीं, तुम ऐसा कर रहा
- 33:25हूँ, तुम उनको रिश्वत दे ही आना, काम जल्दी कर देना अपनी मानवेग
- 33:32प्रवृत्तियाँ को तुम परमात्मा के दरबार में भी लेकर पहुँच जाते हो,
- 33:37इसलिए मैं तुम्हें उल्लू कह। तुम्हें पता ही नहीं होता वह इतने
- 33:43ब्रम्हंड का मालिक वह इतना विराट है अपनी ही बनाई हुई चीजों को
- 33:50तुमसे रिश्वत में मांग लेगा, सभा मणि कर दूंगा, चुन्नी चढ़ा दूंगी।
- 33:59उसके ही दिए हुए पांव से चल के जाओ, उसकी दी हुई शक्ति का
- 34:04इस्तेमाल करो, उसी की चुन्नी को उसी के ऊपर चढ़ा दो।
- 34:09तुम्हारा क्या है? बताओ तुम तुम अपना क्या चिढ़ा के
- 34:12आये वहाँ? मज़ा तो तब था जो तुम अपना कुछ
- 34:24चिढ़ा के आते हो, ये तो सब परमात्मा का है।
- 34:29तुम सवा मणि करो, तुम 50.25 मणि करो है तो उसकी वह वृहद वह विराट,
- 34:37वह। चल सब उसका
- 34:50तुम्हारी शाबाशी तो तब है जब तुम जो तुम्हारा है, उसको चिढ़ाते हो
- 34:59तुम्हारा क्या तुम्हारा है इल्ल्यूज़न भ्रम?
- 35:05ईगो अहंकार उसे चुन्नियों की आवश्यकता नहीं, कहानी है परमात्मा
- 35:18को किसी ने पूछा कि तुम क्या खाते हो?
- 35:25हम तो भोजन करते हैं, कोई चीज़ खा लेते हैं।
- 35:30लेकिन आप क्या खाते हैं? तो भगवान ने कहा मैं अहंकार को
- 35:35खाता हूँ, अहंकार को खाना और मैं तृप्त हो जाता हूँ, तुम उसका खैया
- 35:46उसे क्यों नहीं देते? उसका मनोवांछित आहार है तुम्हारा
- 35:57अहंकार। तुम इससे तो बचाए रखते हो, यज्ञ
- 36:01कर लेते हो, हवन सामग्रियों को आहुत कर देते हो, कभी किसी ने
- 36:08स्वयं का अहंकार आहूत किया। वो तो बचा ही रखते हो, मंदिरों
- 36:17में जाते हो, मशितों में जाते हो जाओ, गर्दन को नमन कर देते हो,
- 36:26दंडवत लेट जाते हो। लेकिन अहंकार को बचा के आ जाते
- 36:32हैं। नमाज़ पढ़ते हो जो कि जाते हो
- 36:37लेकिन अहंकारता रहता है यह तुम्हारी गर्दन में गुल्ला फंसा
- 36:43ही रहता है और बात इसी की है सारी।
- 36:48क्योंकि यही तुम्हारा कमाया हुआ है।
- 36:50बाकी तो सब परमात्मा का है। तुम साहसी और तुम वीर तब होते अगर
- 37:03तुम अपना अहंकार उसकी भेंट कर देते।
- 37:07महावीर ने अपना अहंकार उसे भेंट कर दिया।
- 37:12नाम तो उनका वर्धमान था तुमने महावीर की किताब में ली तुम सबसे
- 37:20बड़े वीर हो और वह सबसे बड़ा वीर होता है जो अपने अहंकार को उसके
- 37:26चरणों में सुपुर्द कर देता है। यही तो भगवान कृष्ण ने मांगा
- 37:37सर्वधर्माण प्रति जमानकम श्रवण वृक्ष अहं पापों का मोल क्या है?
- 37:48अहंकार अहंकार मेरी भेंट कर दे। तू छोड़ धरम भरम के चक्कर को
- 37:54पुण्य पाप को छोड़ दे तू पुण्य पाप का आगाज करता अहंकार उसको
- 38:00मुझे चढ़ा दे और तुम्हारा कुछ है भी नहीं पत्रम पुष्पम फ़िल्म तोयम
- 38:06यह सब मेरे हैं मेरा मुझको क्या अर्पण करेगा?
- 38:13तू जो तेरा है उसको अर्पण कर और तुमने मात्र आज तक अगर कुछ कमाया
- 38:20है तो अहंकार कमाया है अहंकार अहंकार है ये भ्रम।
- 38:29यह गलत मान्यता कि तुम सरी रहो, तुम विचार हो, यह है विचार मेरा
- 38:35है, लोग तो कॉपी राइट करवा लेते और झगड़ते हैं और दाल तो में जाके
- 38:48यह है मेरा है। अरे भाई तुम्हारे में प्रस्फुटित
- 38:52हुआ है उस ईश्वर ने प्रस्फुटित किया है तुम्हारा कहाँ से आ गया
- 39:01भाई ये तो सर आज तक ने देख लिया की सेब गिरता है दुए टु ब्लॉक
- 39:06क्रोबेटेशन अगर कोई और देख लेता। और वह पेटेंट करवा लेता, फिर क्या
- 39:15उसका हो जाता? नहीं गया तो परमात्मा की कुदरत
- 39:18है, बनाया तो परमात्मा ने क्या तुम क्रिएट कर सकते हो?
- 39:23ग्रैविटेशन फोर्स को संक्षेप में कहूं?
- 39:31तो तुम्हारे गुरु मार्गदर्शक बिल्कुल ऐसे नीम हकीम खतराई जान
- 39:40हैं राजनीतिज्ञों की तरह तुम्हारे मूल?
- 39:47समस्याओं को हल करने में उनकी कोई रुचि नहीं है।
- 39:55वो तो अपने भ्रम को दूर करना चाहते हैं।
- 39:58धन कमालो पद्वी कमालो यश कमालो कीर्ति कमालो नाम कमालो।
- 40:05और उस मुर्ख को ऐसा भी नहीं पता कि सभी चीजें वक्त के गुबार में
- 40:15धूल की तरह उड़ जाएं। कभी किसी का नाम रहा है?
- 40:25तुम जानते हो ये जो मिट्टी है कभी कहीं घटती नहीं तुम जीस जमीन पर
- 40:30चल रहे हो कौन जाने उस जमीन का रेत सिकंदर के शरीर पे लगा हो
- 40:37किसी से तुम्हारे अपने ही किसी पिछली जन्मों का शरीर का माटी हो।
- 40:44जिसके ऊपर तुम तुम रौंदते चले जाते हो, तुम्हें इतना पता नहीं
- 40:49होता, बस तुम तो अपने गुरूर में चले जाते हो, जो राजनीतिज्ञों की
- 41:02तरह तुम्हारे ध्यान को तुम्हारी मूलभूत ऑथेंटिक समस्याओं से
- 41:07तुम्हारा ध्यान हटवा दे। वह नीम हकीम खतरा नाम मैं
- 41:16तुम्हारी जान के लिए खतरा मैं भी ऐसी ही व्यादी से उलझ गया था।
- 41:26प्री मेडिकल में पढ़ता था। डीएवी कॉलेज में लोड वापस आ रहा
- 41:31था। डेक्लमेशन कॉन्टेस्ट में मुझे
- 41:35इनाम मिला, ट्रेन इंसिडेंट हुआ और किसी शक्ति ने मुझे उठाकर ट्रेन
- 41:42के प्लेटफार्म के भीतर पकड़ दिया। बस।
- 41:46सब उथल पुथल हो गया। तूफान आके ज़िन्दगी में यह कौन
- 41:54कृतज्ञ भी हुआ उस अदृश्य शक्ति के भती तुमने मेरी जान को बचा लिया
- 42:04तब तुझे जान मेरी थी ना? उसके बाद उसकी हो गई।
- 42:08तब ये जान मेरी थी तो मैं कृतज्ञ भी हुआ।
- 42:14हाथ पांव भी जोड़े उस अदृश्य शक्ति को और प्रार्थना हुई थी कि
- 42:18जिसने मुझे बताया बचाया कृपा करके मुझे दर्शन।
- 42:29इसी खोज में मेरी बायोग्राफी बड़े हो गए जो सुन रहे हरिद्वार गया
- 42:37कहाँ कहाँ? भूल ढूँढा मैं मथुरा ढूंढ कोई
- 43:20भो कला अंक बा। उस अज्ञात की खोज में, मैं भी
- 43:33बहुत भटका हूँ और जो भटका है वही तो बचा सकता है कि यह भटकन थी।
- 43:46यह सही रास्ता है उससे ज्यादा सही तरह से कौन जानता है, जिसने सही
- 43:56मंजिल पाई नहीं वह तुम्हें कैसे व्यख्यायित करेगा सही मार्ग को वह
- 44:03तो तुम्हें। भटका देगा।
- 44:09मुझे भी किसी ने कह दिया तुम इतने करोड़ जाप कर लो।
- 44:15दिन भर रात में चकड़ी कमाती। 1000 की माला आती थी पशुओं की,
- 44:21मैं वो ले आया। दिन भर रात वर्षों तक में
- 44:318,00,00,000 के अभी पूरे हो गए। चरखड़ी घूमा दी, लेकिन वह तो न
- 44:37मिला। जो लोग कहते हैं 8,00,00,000 जप
- 44:45कर दो। इन्होंने खुद किए नहीं, मैं जानता
- 44:48हूँ क्योंकि मैं प्रत्येक व्यक्ति की असलियत को उसके भीतर जाकर
- 44:56संभाल सकता हूँ। और वह रास्ता मेरे भीतर से आता
- 45:00है। मैं अपने ही चेतन अवचेतन अचेतन
- 45:04सामूहिक अचेतन में उतर जाता हूँ और उस सामूहिक अचेतन में उतर के
- 45:12उस व्यक्ति विशेष के अचेतन में उतर के जान लेता हूँ।
- 45:15सच्चाई क्या है? मोदी की सिंचाई क्या है?
- 45:20क्या सिंचाई है एनएसए की? मैं जानता हूँ क्या सिंचाई है
- 45:29हमारे गृह मंत्रालय की, अमित तेशा जी की सबकी।
- 45:37लेकिन ये सिर्फ जका जक है। बुद्धि की किस किस को उगाडूंगा पर
- 45:50मुझे पता है मैं किसी को उगाड़ नहीं सकता क्योंकि सबके भीतर।
- 45:58एक ही तत्व मौजूद है जिसे उगाडूंगा वह तो व्यर्थ की मवाद
- 46:03है, वह तो फोड़ा है। कैंसर का किसको उगाडूंगा और सभी
- 46:09भरे पड़े हैं? कैंसर के फोड़े से कौन बचा है?
- 46:14कोई उखड़ गया है, किसी ने छिपा दिया है, कामयाब हो गया है वरन
- 46:22कैंसर का फूड़ा तो सेबी के भीतर है।
- 46:26यह अहंकार कैंसर का फूड़ा तो है जो चस चस करता है शायद तुम्हारे।
- 46:37जिसके चस चसाहट से तुम दुखी होकर मेरे पास आते हो, बाबा चैन नहीं
- 46:42आते, मैं पूछता नहीं, लेकिन वो कह देते हैं सब है बाबा।
- 46:52सब है बुद्ध के पास जो था क्यों भागे बुद्ध चोरों की तरह संपत्ति
- 47:00को छोड़कर कोई भागा करता है? विपत्ति को छोड़कर भागा करते हैं।
- 47:09लोग विपत्ति को छोड़कर वाका करते हैं, घरवाली को छोड़ दिया वह
- 47:15विपत्ति है कौन कंजरखाना मोरे कल को बच्चे होंगे कौन पाली कौन
- 47:23कत्तू कौन पिंजू? तो सरल फॉर्मूला है, भगोड़े हो
- 47:29जाओ और उन भगोड़ों की हम पूजा करने में बड़े दक्ष हैं।
- 47:36हम तो उनके चरणों को धोकर पीते हैं और वह भी इच्छुक हैं कि हमें
- 47:44किसी तरह घोषित कर दो। अवतार अरे भाई घोषित करने के बाद
- 47:52भी तुम चैन और सुकून से नहीं रह पाओगे, तुम्हें पता नहीं यह भीतर
- 48:00की कैंसर आईटिस की जब तक चस चस खत्म नहीं होती।
- 48:06लोग तुम्हें परमात्मा भी घोषित कर दें तो भी तुम्हारी जच्चज हाथ
- 48:14खत्म नहीं होगी, क्योंकि मूल ओरिजिनेशन प्वाइंट मौजूद है।
- 48:21उसकी सर्जरी करनी ही होगी। वह अहंकार जो तुम छपाते फिरते हो
- 48:29झूठों का कफरों का कतरों, गारतों का जिससे तुम बचना चाहते हो बस
- 48:37वही मैं मांगता हूँ वही देखता हूँ मुझे।
- 48:44ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर यही तुम देते ना?
- 48:55और यही यही मुझे चाहिए यही मेरी खुराक तुम तो मेरा ही मुझे अर्पित
- 49:03कर देते हो। तुमने दृश्य महाविद्याओं का हवन,
- 49:09पाठ, यज्ञ सब कुछ किया। इसी घी को किसी गरीब को पीला के
- 49:15देख इसी सामग्री पर जो पैसा खर्च किया तुमने।
- 49:23वो गरीबों में बांट के देखो नानक से समझदार और ज्यादा कौन है?
- 49:28इस धरती पे कोई नहीं। नानक ने जो ₹30 व्यापार के लिए ले
- 49:34गया था, उसने भूखों को भोजन करा दिया।
- 49:39बिलकुल सही जगह पे पैसे लगाए उससे ज्यादा समझदार और कौन?
- 49:46और वह लंगर का पैसा आज तक खत्म नहीं हुआ।
- 49:49बढ़ता ही जाता है, कम नहीं। तुम कहते हो हमारी व्यादी मिट गई
- 49:58थी। जहाँ भागवत पुराण की कथा कही गई
- 50:03वहाँ की व्याधियां खत्म हो गई थीं।
- 50:05अरे भाई, व्याधियां तो परमात्मा जो सबका संरक्षक है, वह नहीं है
- 50:12क्या? वह सबकी व्याधियां बराबर उसकी
- 50:16निगाह में रहती हैं। वह ही खत्म कर देगा।
- 50:22तुम्हें अलग से हवन पाठ ये जे करने की क्या आवश्यकता है?
- 50:26अगर तुमने अपनी तकलीफों को, व्याधियों को अभावों को ही खत्म
- 50:30करना है? कस्तियां सबके किनारे पे लग ही
- 50:34जाया करती हैं। ना खुदा जिनका कोई नहीं, उनका
- 50:38खुदा होता है, तुम कुछ भी न करोगे तो क्या वह तुम्हें मुक्त नहीं
- 50:44करेगा? वह तो फिर भी मुक्त करेगा।
- 50:46वह तो करता है उसकी जिम्मेदारी है।
- 50:51जीस सम्मान ने जाम दिया। वह तुम्हें दूध नहीं देगी।
- 50:55क्या जीस पिता ने तुम्हें जन्म दिया?
- 51:00वह तुम्हारी परवरिश नहीं करेगा क्या?
- 51:04यहाँ तो ऐसे लोग हैं जो कहते हैं कि तीन बच्चे हैं जन्म और अगर
- 51:08कहीं ऐसा हो कि तुम बच्चों को जन्म न दे पाओ?
- 51:12तो पड़ोस में हम बैठे हैं हमारी सहायता ले ऐसे ऐसे लोग हम इनके
- 51:29पांव पूछते हैं लेकिन मैं क्यों संतुष्ट हूँ?
- 51:37मैं संतुष्टि से लिया हूँ कि जो जिसे इन्होंने एरा समझा संस्था को
- 51:46यह महल जो बारे तुम्हारे अखड़ी किस बात की प्यारे?
- 52:15अकड़ किस बात की प्यार?