Latest / Baba ji Vijay Vats / 20 Mar 25 - क्रांतिकारी सूत्र - "तेरा तेरा तेरा" सब तेरा, मेरा कुछ नहीं! बाबा आप गप्प बहुत बोलते हैं!
Transcript
- 0:03खूब राम बाबा मैंने आपकी बागरफी पढ़ी।
- 0:15आप गप्पे बहुत बोलते हैं। थोड़ा कम बोल लिया करो।
- 0:29ये भी खूब रही। खूब राम जी ये भी खूब रही।
- 0:42मैं गप बहुत बोलता हूँ, मैं गप ही बोलता हूँ तुमने घर तो कहा
- 0:56तुम्हारी समझ वहाँ तक जाती नहीं। सच तो ये है कि मैं गप ही बोलता
- 1:06हूँ खूब राम जी सच बोला नहीं जा सकता।
- 1:20जो आज तक मैंने बोला वो सब गप था क्योंकि सच हो जो बोला ना जा सके।
- 1:43मुझसे लोग पूछ लेते हैं बाबा सत्य क्या है?
- 1:49सत्य वो है पुत्र जो आज तक में किसी वीडियो में बोल नहीं सका वो
- 1:57सत्य है जो पीछे छूट गया। अधूरा रह गया।
- 2:08बोला नहीं गया बोला जाएगा भी नहीं, अब तो हार गया, थक गया।
- 2:22बोलते बोलते बोलने में वो आता नहीं, जो बोला जाता वो गप्पे है
- 2:34खूब राम जी तुमने ठीक कहा तुम सत्य बोल रहे हो।
- 2:45जो बोला वो झूठ बोला गप बोला मैं वो शेर हूँ।
- 3:02जो सदा बोलने से परे रह जाता हूँ। तुम कुछ भी बोल दो, मैं कुछ भी
- 3:14बोल दो, मैं सदा ही अनबोला रह जाऊंगा।
- 3:24मैं कुछ भी बोल दूँ, मैं सदा ही अनबोला रह जाऊं।
- 3:34भाषा की सीमा है स्वच्छता है। क्या करें अलफाजों में अनुभवों को
- 3:47कहना होता है जो कहे नहीं जाते, अनुभव कहे नहीं जाते, जो सदा
- 3:59अनकहा रह जाता है। इसलिए मैं कहता हूँ शास्त्रों को
- 4:08आग लगाता हूँ सभी शास्त्रों को मेरे भी शास्त्रों को आग लगाता
- 4:18हूँ। मुझे बहुत सुन लिया और सुनने का
- 4:34यही मतलब होता है कि सुन सुन के तुम ये निष्कर्ष निकाल पाओ।
- 4:45कि वह सदा अनसुना रह गया। वह कभी सुना नहीं जा सकता और वह
- 4:57कभी बोला नहीं जा सकता और मैं वो श्य हूँ।
- 5:05जो सदा अनकह रह जाऊंगा खूब राम जी ध्यान रहे मैं सदा ही कहता हूँ
- 5:28मेरा बोलना। सत्य पीछे छूट जाता है और जो
- 5:39ज्यादा आक्रामक होते हैं, मैं उन्हें कह देता हूँ कि जो सत्य
- 5:44बोलता है उसके पास चले जाओ। मैं तो ना बोल पाऊंगा, दोनों हाथ
- 5:54खड़े हैं, हाथ ही नहीं खड़े मैं तो दंडवत प्रणाम करता हूँ, तुमसे
- 6:05नहीं बोला जाएगा। बहुत लोगों ने पूछा फिर क्यों
- 6:12बोलते हो? बस इसीलिए बोलता हूँ के शायद
- 6:24बोलने से कोई तुम्हें भनक लग जाए। लग जाती है।
- 6:31कभी कभी ना वो लिखने में आता ना वो बोलने में आता ना वो समझने में
- 6:40आता वो अनुभव में आता। लिखा लिखी की है नहीं देखा देखी
- 6:49बात हमारा बोलना, इशारा भर समझ लेना ये सत्य है कि बोलना।
- 7:09जिसके प्रति इशारा है वहाँ तक पहुंचता नहीं।
- 7:16मैंने आपको बहुत बार समझाया, चंद्रमा तक इशारा जाता नहीं, सूरज
- 7:28तक इशारा जाता नहीं। जब हम कहते हैं वो रहा चंद्रमा तो
- 7:37तुम यहाँ टटोलने रखते हो नहीं है बाबा नहीं है नहीं है बिना शक
- 7:46नहीं है। फिर इशारा करने की क्या जरूरत है?
- 7:56इशारा करने की यही जरूरत है शायद किसी भाग्यशाली क्षण में।
- 8:04तुम इस इशारे की खेत में स्ट्रेट लाइन में देख लो तो चंद्रमा दिख
- 8:11जायेगा, बस इतना ही मंतज्ञ है अगर तुम इसका लाभ ले लो।
- 8:24अन्यथा नहीं बोला जाता। बोला भी नहीं पहुंचता और इशारे भी
- 8:33नहीं पहुंचते, इसलिए तुम सत्य कहते हो नहीं बोला जाएगा।
- 8:43जिसने भी बोला, अगर वो कहता मैंने बोल दिया तो ध्यान रखना उसने देखा
- 8:58अन्यथा वो कभी ना कहता कि मैंने बोल दिया।
- 9:04जिसने देखा वो सदा पायेगा, कह कह के पायेगा वह सदा अनकह छूट जाता
- 9:15है पीछे कह तो जाता है। कभी कहा जाएगा भी नहीं अगर तुम
- 9:34शब्दों से ही जानना चाहते हो तो मैं आपको प्रणाम करता हूँ।
- 9:44खूब रंग। हैं।
- 9:50बहुत से लोग जो शब्दों से तुम्हें जताने की चेष्टा ही नहीं करते
- 10:01वरना स्टैम्पिंग भी करते मैं बता दूंगा तुम्हें।
- 10:10लेकिन ऐसी मोडताएं मैं नहीं किया करता, मैं आपसे क्षमा मांगता हूँ,
- 10:22ऐसा कुछ मैं कर नहीं सकता। अगर कोई कहता है मैं दिखा दूंगा,
- 10:31मैं वोट दूंगा तो उससे पूछ लाओ, उसके पास चले जाओ, यहाँ कोई जरिया
- 10:41नहीं है। अपूर्ण हाथ खड़े।
- 11:02मेरी समझ में जो बोला, जिसने बोला जीस रूप से बोला जैसे ढंग से बोला
- 11:14वह बोला नहीं हो गया और जो बोला गया और जो लिखा गया।
- 11:22जो पढ़ा गया वह झूठ था, जो पढ़ा जायेगा जो लिखा जायेगा जो बोला
- 11:30जायेगा वह झूठ होगा, गप होगा। और चाहे कोई भी अनुभव हो, इसलिए
- 11:45मैं सदा कहता शास्त्रों को आग लगा दूँ, गंगा जी में बहा दूँ, ये काम
- 11:58न पड़ेंगे। शास्त्रों में शास्त्रों से कोई
- 12:07संगीत तुम्हारे हृदय में न बच रखा कोई हृदय के तारों में।
- 12:20ध्वनि में ही पैदा होगी। कोई संगीत न निकलेगा, कोई हारमनी
- 12:27न पैदा होगी। आनंद के दो घड़ी का मोझ मिला है।
- 12:41क्योंकि शब्द भी वहीं से टकरा के आते हैं इसलिए बोलते हैं इसलिए
- 12:52बोलते हैं। उसी तल से आते हैं शब्द टकरा के
- 13:03और तुम दो घड़ी के लिए उसे पीकर मस्त हो जाते हो और इस दुःख भरी
- 13:12दुनिया में इतना ही काफी है। तुम्हारे विराट फोड़े के ऊपर
- 13:24कैंसरराइटिस के ऊपर थोड़ी सी मरहम लग जाती है।
- 13:29कुछ देर के लिए उससे थोड़ा चेन पड़ता है।
- 13:38सुक मिलता है। तुम उसी को समझ लेते हो के बाबा
- 13:50ने बोल दिया बड़ा अधिकार दिया नहीं बोला नहीं।
- 14:00मेरा हृदय उस दिन प्रसन्न होगा जीस दिन तुम खुद उतरोगे उस सरोवर
- 14:09में और नाचो क्या है? खुद उतरोगे पियोगे और अनंत करोगे,
- 14:27संगीत बजेगा और ऐसा बजेगा। कि फिर कभी बंद नहीं होगा।
- 14:36हमारे बोलने का संगीत तो दो घड़ी बाद बंद हो जाता है और तुम इसे
- 14:48इतना ही बहुत समझते हो। लेकिन हम इससे तृप्त नहीं होते
- 14:56हैं। ये आग हमारे भीतर जलती ही रहती
- 15:02है। नहीं बोल रहा क्या?
- 15:18श्रिया कुमारी बाबा गीता का एक श्लोक पत्रम पुष्पम फ़िल्म तोयम
- 15:30जो मैं भक्त्या प्रश्न। इसका गहरा अर्थ क्या है?
- 15:48पत्ते चढ़ा दो, फूल चढ़ा दो साइड चढ़ा दो, पानी चढ़ा दो।
- 16:00सोना चढ़ा दो हीरे जोहरा चढ़ा दो, कुछ भी चढ़ा दो मेरे लिए वो समान
- 16:12है। क्योंकि सब मैं हूँ, मेरे सिवा
- 16:26कुछ भी नहीं और मेरा मुझको अर्पण करते हुए।
- 16:37तुम्हारा कुछ है ही नहीं तो डगेगा क्या तेरा तुझको अर्पण क्या लागे
- 16:45मेरा मेरा मुझको अर्पण करते हुए तुम्हारा क्या लगता है?
- 17:00सोना चढ़ा दो, सोना भी मैं हूँ, पत्ते चढ़ा दो, फल चढ़ा दो, फूल
- 17:09चढ़ा दो, पानी चढ़ा दो और कुछ भी न चढ़ाओ, सिर्फ प्रणाम ही करते
- 17:18हो। लेकिन श्रद्धा से करो श्रद्धा का
- 17:30अर्थ क्या है? यह मार खा जाते हैं भक्त।
- 17:40नकली भक्त कहते हैं तेरा तुझको अरपा क्या लाके मेरा कहते हैं,
- 17:56मानते हैं मानते ये हैं। कि मेरा तुझको अर्पण तेरा तुझको
- 18:05अर्पण जीस दिन ये हो गया उस दिन 1313 मिल गई सतौरी।
- 18:20नानक को इसी 13 ने सतोरी दिला दी। 131313 अगर ये भाव प्रफुटित हो
- 18:40गया गहरा। इस भाव को गहरे उतरने दो, सब तेरा
- 18:50पत्ता भी चढ़ा दू तेरा और सच में अगर तुम देखोगे सच में अगर तुम
- 18:59देखोगे। गहन दृष्टि से अगर तुम देखोगे तो
- 19:05तुम पाओगे सब उसका है तुम्हारा यहाँ कुछ भी नहीं है तुम्हारा
- 19:15सिर्फ दावा है। और दावे कभी किसी की सत्य नहीं
- 19:22होती। 1 दिन टूट जाती है दावे शीशा हो
- 19:36या दिल हो। आखिर टूट जाता है, टूट जाता है
- 19:52टूट। जाता है।
- 19:55टूट जाता है। दावे सभी के टूट जाते हैं।
- 20:02किसका रहा है तुम रोज़ देखते हो, फिर भी मुझे बताने की आवश्यकता है
- 20:15कभी किसी का दावा यहाँ रहा है? जिसे तुम कहते हो, मेरा घर उसी घर
- 20:24से 1 दिन निकाल दिए जाते हैं तो क्या वो तुम्हारा था?
- 20:36दावे कब किसके रहे हैं? मौत डेथ इस यूनिवर्सल ग्रोथ
- 20:49अत्यंतिक सिंचाई है। वह तुम्हें आईना दिखा देती है,
- 20:54तुम्हारा कुछ नहीं। जीस घर को तुमने बनाया सजाया
- 21:00संवारा पौधश किया संभाल के रखा रेत का कण तक नहीं जमने दिया उसी
- 21:10मेरे घर से। तुम्हें निकाल दिया जाता है।
- 21:16कथन पर वो ही लोग डरते हैं तुम्हारी ही पैदाइश तुमसे डरती है
- 21:35मत रखो। सडान तुम्हारे बदबू फैलेगी,
- 21:44बैक्टीरिया से जन्म देंगे बिमारी का भर कभी तुम्हारा दवा चला।
- 21:59तुम्हारे सभी दावे झूठे होते हैं। दावा किसी का नहीं चला तो कृष्ण
- 22:12कहते हैं पत्ता झड़ा दो फूल झड़ा दो पानी झड़ा दो फल झड़ा।
- 22:20कुछ भी चढ़ा दो, सोने के छतर चढ़ा दो सोने के मुकुटे चढ़ा दो, सोने
- 22:29के कड़ावन दे दो और शापित दे दो लेकिन अगर इस अभाव से दिए।
- 22:40कि मेरा है और तुझे अर्पण कर रहा हूँ तो वह पुण्य नहीं, वह पास है,
- 22:51वह तुम्हें दुख देगा क्यों? क्योंकि एक झूठ का हाथ था।
- 22:58झूठ मानो तुम्हें और झूठ सदा ही दुख देता है।
- 23:07था तो नहीं तुम्हारा, इसलिए तो लोग रोते हैं जब अब अलविदा कहते
- 23:15हैं संसार को तो इतने। तड़पते हैं वो तड़पन होती है
- 23:22छोड़ने की जो मेरा था, वह मेरा न रहा, वह जा रहा है हाथों से छूट
- 23:31रहा है। यह दांव इसकी नींव हिली।
- 23:41तो कृष्ण कहते हैं जिसने जीते जी ये समझ लिया कि मेरा कुछ नहीं जो
- 23:53है वो तेरा है। यह एक क्रांतिकारी कदम है।
- 24:02अगर तुम्हारी समझ में किसी दिन भी जी आ गया कि मेरा यहाँ कुछ नहीं
- 24:08बुद्ध के जब समझा जाता है वह महल अटारियों को छोड़कर चले जाते हैं।
- 24:15समझ आ गया वृद्ध ने के जो की कमर देखे, मुर्दा देखा, बीमार व्यक्ति
- 24:27देखा, चेतक से पूछा क्या मैं भी मर जाऊंगा?
- 24:39रथवान ने कहा, राजकुमार बोलने की इजाज़त तो नहीं लेकिन इतने प्यार
- 24:47से पूछा रहा भी नहीं जाता। हाँ, 1 दिन सभी मर जाने का है।
- 24:57तो क्या मैं भी मर जाऊंगा? बुद्ध ने पूछा, चेतक बोला हाँ
- 25:07महाराज, तुम भी 1 दिन मर जाओगे बस।
- 25:15हृदय में बात उतर गई। फिर मेरा क्या है?
- 25:21शरीर तक मेरा नहीं और मैं तो शरीर ही मानने बैठा हूँ, तुम भी यही
- 25:32कहते हो, तुम्हें भी यही। यही भ्रम बुद्ध को था और जीस दिन
- 25:42टूट जाता है। उस दिन प्रज्ञा का जन्म होता है।
- 25:48नानक का या भ्रम टूट गया। मेरा नहीं सब तेरा है 13131313
- 25:58करते सुरती लग गई और तेरा ही हो गया मेरा कुछ ना रहा तुम रोज़
- 26:09देखते हो? लेकिन सत्य से तुम आँखें मूँद
- 26:14लेते हो। उन हकीमों से कहो।
- 26:28ये बोलकर करते थे दावा किताबें खोलकर।
- 26:34ये दवा हरगीजनक खाली जाएगी जब तेरी डोली उठा ली जाएगी बे
- 26:41मुहूर्त के निकाली जाएगी। बड़े बड़े चक्रवर्ती सम्राट छाती
- 26:56ठोंक के दावा करते हैं। मेरे चलने से चलती है हवाएं
- 27:08मुस्कुराने से फूल खिलते हैं और उनको पता भी नहीं लगता कब वो धड़न
- 27:17से गिर जाते हैं। और वह जो दावा करता था वह हिलने
- 27:26तक की शक्ति नहीं रखता, दूसरे ही उठाते हैं उसे सत्य तो यह है बाकी
- 27:36सब झूठ है। पत्रम पुष्प फ़िल्म कुछ भी चढ़ा
- 27:47दो लेकिन इस अभाव से चढ़ा दो कि तुम्हारा कुछ नहीं।
- 27:59सब उसका है और एक दफ़े तुम्हारे भीतर ये भाव गहरा हो गया मेरा मुझ
- 28:08में कुछ नहीं तुम गाते रहो सो बस हृदय तक में नहीं उतरता इतनी ही
- 28:15कमी। जीस दिन हृदय में उतर गया उस दिन
- 28:20तुम्हारा कुछ न बचेगा उस दिन सब उसका हो जाएगा तेरा है।
- 28:35यह बात हृदय में उतर जानी चाहिए। जुबान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
- 28:43जुबान तक तो तुम सदा ही सीमित रखते हो, भजन गाते हो लेकिन भजन
- 28:51गाने से क्या होगा? जो सत्य हृदय तक ना पहुंचा, जो
- 29:02वहाँ तक रह गया, उसका कोई प्रयोजन नहीं, उसका कोई अर्थ नहीं।
- 29:13बस ये क्रांति का सूत्र है। 13।
- 29:22तुम्हे समझ आ जाए सब तेरा और ये शक्ति भी है बाकी सब झूठ।
- 29:35जिसे तुम मेरा कहते हो, वह झूठ तुम देख लेना न जाने कौन सा पल
- 29:43मौत की अमानत हो उजाले अपनी यादों के हमारे संग रहने दो।
- 29:54न जाने किस घड़ी इस ज़िन्दगी की शाम हो जाये कौन सी यादों के
- 30:00उजाले साथ रहने दो परमात्मा के, न परमात्मा को तो तुमने बड़े उजाले
- 30:08बड़ा सुमरण कर लिया बड़ी मारो। बड़े मन के घुमा लिए कुछ न मिला
- 30:21कौन सी यादों के उजाले हमारे साथ रहने दो, न जाने।
- 30:30किस घड़ी इस जिंदगी की शाम हो जाए?
- 30:37मौत कब आ जाए ये तुम्हें पता है। जब कोई मर जाता है तब भी उसे
- 30:48थोड़ी देर यकीन नहीं होता। कि मैं मर गया, घर वाले रोते हैं
- 30:59पत्नी रोती बच्चे रोते हैं, प्रिय मित्रगण रोते हैं।
- 31:07और वह उन्हें दिलासा देता है, सांत्वना देता है।
- 31:11अरे नहीं, नहीं ये देखो मैं हूँ तब तक भी तुम संभल नहीं पाते थे
- 31:25और कृष्ण कहते हैं। तुम अब ही संभल जाओ, तुम तब तक भी
- 31:32नहीं संभल पाते। मरने के बाद भी तुम दूसरों को
- 31:36दिलासा देते हो, ये देखो मैं हूँ। क्यों रो रहे?
- 31:41हो, छाती क्यों बैठ रहा हो? ये आँखों से आशक क्यों बह रहे हैं
- 31:53मेरे लिए? मैं तो हूँ तुम्हें तब तक कोई पता
- 32:01नहीं चलता बड़े खुश नसीब हो के वो।
- 32:07जो इस सत्य को जान लेते हैं जीते जी मर जीवड़े हो जाते हैं क्या
- 32:15होता है मर जीवड़ा जो जीते जी जाने के 1 दिन यह जिसे मैं समझता
- 32:25हूँ। यह जिसे मेरा समिता हो, वह मर
- 32:30जाएगा। जीते जी यह बात की भनक लग गया।
- 32:36यह बात हर्दा में उतर जाएगा। बस हर्दा तक में नहीं उतरती यही
- 32:42कमी। जुबान पर तो सदा रहती है और जुबान
- 32:49पर रहने से कुछ नहीं होता। क्रांति घटित होती है जब ये बात
- 32:57यह सत्य हृदय में उतर जाए। पता नहीं अगला पर।
- 33:06अगला पल न जाने कौन सा पल मौत की अमानत हो?
- 33:15अगला पल ही मौत की अमानत हो सकता है और तुम इसे भूले भूले फिरते
- 33:23हो। वही कबीर कहते हैं भोला भोला, फिर
- 33:31जगत में कैसा नाता? रैदास कहते हैं माटी को पुतरो।
- 33:43कैसा नचत है? लेकिन तुम अपने आप को जीवंत समजते
- 33:49हो। तुम अपने आप को माटी का पुतरा
- 33:51नहीं समझे। सभी संत कहते हैं कि सत्य को हृदय
- 33:59में उतारो। सत्य को मान लो और सत्य क्या है?
- 34:13सत्य ये है कि तुम्हारा यहाँ कुछ नहीं, ये अकाट्य सत्य है।
- 34:20इसको काटा नहीं जा सकता। अनदेखा किया जा सकता है सो तुम कर
- 34:28रहे हो और सभी करते हैं अनदेखा। कृष्ण ने भी जब ये शब्द बोले सब
- 34:43मेरा है पत्रम पुष्पम परम तोयम ये माँ भक्त परिचय इस स्वभाव से जो
- 34:51भी कुछ अर्पण कर दो वो चाहे खाली हाथ हों।
- 34:59पत्ता हो, फल हो, फूल हो, पानी हो, सोना हो हीरे जोहरा धो लेकिन
- 35:08भाग्य हो कि मेरा नहीं। मेरा सिर्फ दावा है आज नहीं कल।
- 35:17यह मेरा रहेगा भी नहीं, लेकिन वस्तुएं तो रहेंगी यह पदार्थों का
- 35:25एक संगठन बिखर जाएगा स्कैटर हो जाएगा विखंडित हो जाएगा, पदार्थ
- 35:35रहेंगे। तुम नहीं रहोगे।
- 35:48बिगड़ेगी और बनेगी दुनिया, यहीं रहेंगी।
- 36:02बिगड़ेगी और बनेगी दुनिया, यहीं रहेंगी कोई न साथ देगा।
- 36:17सब कुछ यहीं रहेगा। कोई ना साथ देगा सब कुछ यही रहेगा
- 36:29होंगे यही झमेले, होंगे यही झमेले ये ज़िन्दगी के मेले।
- 36:41दुनिया में कम न होंगे अफसोस? हम न होंगे ये ज़िन्दगी के मेले
- 36:51ये। ज़िन्दगी के मेले।
- 36:56अरे ये बात सच में समझा जाए तुम्हे?
- 37:01सब रहेगा, तुम्हारे बिना भी रहेगा, तुम न रहोगे तो भी सब
- 37:12रहेगा, यही झमेले होंगे, यही दुनिया होगी, यही रंगीनियां
- 37:20होंगी। यही सुबह शाम होगी, यही हवाएँ
- 37:24चलेंगी, कोई काम नहीं रुकेगा, संसार चलता ही रहेगा, तुम्हारे
- 37:32बिना चलता रहेगा अगर ये बात जीते जी समझा जाए।
- 37:40बाबा को जीते जी समझा गई नान कहते मेरा कुछ नाम 1313 और हृदय से
- 37:49पुकार उठे। तुम भी 1313 करते हो, लेकिन वो
- 37:55पुकार गिनती की होती है हृदय से। और खोपड़ी से आती है और तुम महज
- 38:04गिनती कर रहे हो। हृदय से बात नहीं आती कि तेरा है।
- 38:16जीस दिन हृदय से ये बात उठी। फिर कृष्ण कहते हैं, जीस दिन
- 38:23तुम्हारा कुछ ना रहा। उस दिन मिट्टी और सोना बराबर हो
- 38:28जाएगा। यही रावण मांगते हैं भगवान शंकर
- 38:36से। सोने की लंका का मालिक भगवान शंकर
- 38:51से कहता है कदा नीलिम्प निर्झरी नेकुंज को डरे वसन बेमुक्त धुरमति
- 38:58सदाशरह समंजलि वाहन। लोल लोचनो ललाम भा लग्न कहा
- 39:06स्वेती मंत्र मुच्चरण कदा सुखी। वहाँ में हम तुम सोचते हो कि सोने
- 39:15की लंका हो तो खुश हो जाएंगे। पुष्पक विमान हो तो प्रसन्न हो
- 39:23जाएंगे, लेकिन रावण कहता नहीं, गंगा तीर और छोटी सी कोठिया और
- 39:35उसके किनारे। उस कुटिया में बैठा हुआ मैं सिर
- 39:43के ऊपर अंजलि बांधी, आँखों से अशरु धारा बहती हुई हे प्रभु तेरी
- 39:54याद करते हुए। मैं कब सुखी हूँ?
- 40:01बिलोल लोल लोच नोल लां भा लग्न कहा श्वेति मंत्रमुच्चरण कदा सुखी
- 40:08वहाँ व्यहम तुम तो अभी यह सोचते हो कि सोने की लंका कब हमारी हो
- 40:15जाएगी? अभी तो इन्हीं सपनों में तुम जी
- 40:22रहे हो, लेकिन जिनकी सोने की लंका हो गई वह न हुए।
- 40:38वो कहता है कि मैं गंगा तीर पे बैठा गंगा के किनारे एक छोटी सी
- 40:44कोठियाँ हो कदा नीलम पंडर झरी नुकुंज को टरे वसन विमुक्त धुरमति
- 40:52सदाशरह समंजलि वाहन। और मैं सभी मान्यताओं को त्याग कर
- 41:01विमुक्त दुर्मती सदा सबसे बुरी मत क्या है यह सब मेरा है।
- 41:13यह धुरमति है और रावण कहते हैं कि इससे मैं कब मुक्त होऊंगा।
- 41:20कब 1313 हो जाएगा मेरा मेरा न रहेगा?
- 41:26विमुक्त धुरमति सदा श्रेयस्तमंजदि वाहन।
- 41:31और सिर के ऊपर अंजलि बनती होगी, बिलो ले लो चन्नू प्यार के आगोश
- 41:40में मेरी आँखें आंसुओं से भरेंगी हृदय रोयेगा तेरी याद में।
- 41:54वेला कब आएगा ले लाम भाल लगन कहें श्वेति मंत्र मूत्रण कदा सुखी।
- 42:03वहाँ हम तेरी याद आएगी और तड़ पाएगी।
- 42:11और कब मैं तेरी याद में उन्मत्त तड़पता हुआ गंगा किनारे बैठा उस
- 42:22कुटिया में निहारूंगा अश्रु पुरूष आँखों से।
- 42:32दुर्मती है, क्या यह मेरा है? जीस दिन तुम्हारी खोपड़ी से यह
- 42:44बात निकल गई। तुम कहते हो बाबा दुखी हैं, मैं
- 42:52जानता हूँ पर ये भी जानता हूँ कि तुम दुखी क्यों हो?
- 42:59तुम कहते हो, सुखी होना चाहते हो? बिलकुल ठीक है, मैं ये भी जानता
- 43:05हूँ कि सुखी तुम कैसे हो जाओगे? और मैं रोज़ कहता हूँ, लेकिन बस
- 43:15तुम सुन नहीं पाते, कान भी हैं, मैं भी बोलता हूँ, लेकिन तुम बहरे
- 43:22हो जाते। तो कृष्ण भी कहते हैं, जीस दिन
- 43:31तेरा कुछ न रहा, फिर तू चाहे पत्ता चढ़ा देना, चाहे सोने का
- 43:39छत्तर चढ़ा देना, मुक्कुर चढ़ा देना तेरा कुछ है नहीं, कुछ भी
- 43:44चढ़ा दे। सब मेरा लेकिन ये भाव खत्म हो जाए
- 43:52तेरे भीतर ये दोरोमति समाप्त हो जाए के लंका मेरी सोने की लंका
- 44:01मेरी है, यही मांगता है रावण। और रावण शिव भक्त रावण कहता प्रभु
- 44:13इस मती को हार ले मैं कब इस दुर्मति से मुक्त हो जाऊंगा वे
- 44:19मुक्त दुर्मती सदा इस दुर्मती यह दुर्मति है सुमति ने।
- 44:27इससे मैं कब मुक्त होऊंगा कि मेरा है सोने के लंका मेरे तुम तो अभी
- 44:35पाना चाहते हो। जिसके पास है वो इस समिति को
- 44:42त्याग नहीं चाहता है। यह मति कष्टकारी है, यह मति दुख
- 44:48देती है कि मेरा इसलिए मरते हुए व्यक्ति को देखना उसकी
- 45:01आकांक्षाएं। 1000 दिशाओं में दौड़ेंगे, कभी
- 45:07सोचा न था कि मरना भी होगा यही देखा था बस और मरेंगे, मैं न
- 45:19मरूँ, मरे सिन स्वरा। सारा संसार मर जाएगा मैं नंबर यही
- 45:27दुर्मती है और रावण कहते कि हे शिव, हे भगवान इस दुर्मती से मैं
- 45:40कब मुक्त होऊंगा? ये झूठ से मैं कब मुक्त होऊंगा कब
- 45:46मैं सत्य का उपवासक हो जाऊंगा। सत्य क्या है तुम्हारा है कुछ
- 45:52नहीं, ये सत्य है, आज नहीं जानते, लेकिन मौत तुम्हें जना देती है
- 46:00तुम्हारा कुछ। तुम्हारे अपने जो तुमने पाल पोस
- 46:15के बड़े किये है उन कंधों पे तुम्हारे मृत शरीर को डोते।
- 46:28तेरा अपना खून ही आखिर तुझको आग लगाएगा आसमान पे।
- 46:53आसमान पे उड़ने वाले माटी में मिल जाएगा।
- 47:07कसमें वाध प्यार व। पाशा बातें।
- 47:13हैं बातों का क्या? कोई किसी का नहीं है, झूठे नाते
- 47:24हैं। नातों का क्या?
- 47:31कोई किसी का नहीं है। झूठे नाते हैं नातों का क्या पहले
- 47:36तो अपना शरीर ही अपना नहीं, फिर तुम जो कहते हो कि ये मेरा है?
- 47:46वो तुम्हारा कैसे होगा, जो कहता है मेरा मकान, मेरे पुत्र पोत्रा,
- 47:57मेरा परिवार, मेरे मित्र, मेरे दुश्मन और तुम्हारे कहाँ।
- 48:06जिसके हैं शरीर के वो ही तुम्हारा नहीं और 1 दिन मौत सच तुम्हारे
- 48:17सामने खड़ा कर देती है ये ले। तो बाबा कहते हैं जो चीज़ तू मर
- 48:26के भी ना जान पाएगा वो जीते जी जान ले।
- 48:34कबीर कहते हैं मर जीबड़ा हो जा गौरख कहते हैं तू मर जा।
- 48:42मरो मरो हे जोगी मरो मरो मरण हे मीठा सत्य को स्वीकार करना सदा
- 48:49मीठा होता है। अभी तुम झूठ को स्वीकार किया और
- 48:59कितना ही कोई बोल ले? ये बोलने वाले उपदेशक खुद झूठे
- 49:07हैं, इन्हें खुद ही बताना ये तो सिर्फ आपको क्या क्या रोएंगे
- 49:15आँखों से आंसू निकलेंगे। और 20 50,00,000 लेके हेलिकॉप्टर
- 49:21में बैठ के उड़ के चले जाएंगे कितने मोड़ हैं ये लोग?
- 49:32रावण कहता सोने की लंका, ये दुरमति कब खत्म होगी?
- 49:39कब गंगा तीर के किनारे कुटिया में बैठा हुआ मैं सर पर अंजलि बांधे
- 49:47आँखों में अश्क लिए रोता हुआ कब तुझे याद कर याद करना है।
- 49:59तो मौत को याद कर लेना, वो सत्य है, परमात्मा का तो कोई भरोसा
- 50:07नहीं, वो है कि नहीं राम राधे का मत करना, जाप करना तो मौत का कर
- 50:15लेना। वह सत्य है।
- 50:20वह तुमने देखी है न तुमने राधा देखी, न तुमने राम देखी, न तुमने
- 50:27कृष्ण मान्यताएँ हैं। मान्यताओं का क्या?
- 50:34मान्यताएँ 1 दिन टूट जाती हैं। 1 दिन सत्य तुम्हारे सामने होगा
- 50:39मृत्यु के रूप में उसको स्वीकार कर ले जीते जी वो आएगी और आएगी
- 50:50कबीर से वो जीते जी स्वीकार कर लेते है एक भिक्षुक ने।
- 50:58द्वार पे दस्तक दी, माँ लोई निकली पुत्र क्या बात है कबीर जी का घर
- 51:06यही है हाँ पुत्र क्या कहता है मेरे कबीर जीके दर्शन करने मेरे
- 51:13गुरुवन भेजा। कबीर जी इस वक्त शिव भूमि में
- 51:19मिलेंगे। पड़ोस में कोई मर गया है।
- 51:25शिव भूमि कहाँ है? माँ रोई ने बता दिया वह चला गया।
- 51:33जाकर देखा लोग खड़े संस्कार हो रहा आग लग गई थी ऊंची ऊंची लपटें
- 51:44तो माँ लोई से पूछने लगा माता मैं पहचानूंगा कैसे?
- 51:49इससे पहले तो मैंने कबीर को कभी देखा नहीं।
- 51:57माँ कहने लगी पुत्र एक ही पहचान है, उसके सर पर बड़ा ऊंचा मुकुट
- 52:05होगा, बस यही पहचान है। चला शिवभूम में सभी खड़े तब तो
- 52:17मौत सभी को याद आती है। इसलिए हमारे संतों ने सनातन में
- 52:22यही कहा कि तुम रोज़ मुर्दे के पीछे पीछे जाना।
- 52:32वैसे तो तुम्हें मौत नहीं याद आएगी।
- 52:37मन की कोलाहल में मृत्यु का सच छुप जाएगा, लेकिन शिवभूमि में तुम
- 52:47मृत्यु का सच न छुपा सकोगे। वह तो मर गया है, वह तो कर्तक
- 52:53कहता था मैं हूँ करके दिखाएंगे कहते हो और आज मिट गया आज आग लग
- 53:04रही है, ये सत्य है। बाकी सपना था, कल्पना थी कुछ भी
- 53:17कहो, कल्पना थी सब सब कल्पना मैंने ये मुकाम पाया।
- 53:29इतने साल की तप के बाद पाया कहाँ पाया मेरे पास अभी सर से लोग आ
- 53:37जाते हैं बड़ी मुश्किल से मिला है किनारा मैंने कब मिल गया तृप्त
- 53:46हुए? बाबा उसी के लिए आया, फिर कहाँ
- 53:54मुकाम मिल गया फिर मेहनत बेकार गई।
- 53:59पुत्र तुम तो कह दो बड़ी मुश्किल से 20 साल हो गए।
- 54:07मुकाम पाया। 20 साल की जद्दोजहद के बाद बड़ी
- 54:17मुसीबतें झेलें, बड़े ही प्रयास किए, लोगों को भी कहा तुम प्रयास
- 54:23करो चरै व्याती। चरही बैठे न चलोगे तो मर जाओगे,
- 54:31मुर्दा नहीं चला करता, जीते जी तो चला ही जाता है, मैं कहता हूँ
- 54:40इतने साल की मशक्कत के बाद। तुम कहते हो मुकाम हासिल किया तो
- 54:48मुकाम हासिल किया तो यहाँ क्यों है बाबा गलती हो गई, मुकाम हासिल
- 54:58हुआ। सोचा था हासिल हो जाएगा, आयास बन
- 55:08जाऊंगा, फिर सोचा था संत बन जाऊंगा, करोड़ों फॉलोवर जाऊंगा
- 55:19फिर मुकाम मिल जाएगा। लेकिन मौत तो कभी याद नहीं आई।
- 55:26मुकाम तो यही हुआ करता है असली मुकाम तुम कभी याद नहीं करते।
- 55:37असली मुकाम यही है जो सत्य है, जीसको झुठलाया नहीं जा सकता।
- 55:46झूठों को तो तुम झूठ ला दोगे सत्य को कैसे झूठ लाओगे?
- 55:52मृत्यु पर हम सत्य इसका अर्थ ये नहीं कि तुम काम करना बंद कर दो।
- 56:00बस इसका अर्थ ही यही है कि तुम खुद भी समझलो और जो तुम्हारे पीछे
- 56:08लगे पूछ पकड़ के उनको भी समझा दो कि बस जितना जरूरत है उतना ही
- 56:15इकट्ठा करना अपग्रह। और संतुष्ट रह जाना और और ये मत
- 56:25करना, काम करना, परिश्रम करना, मेहनत करना और सदा याद रखना मुकाम
- 56:38बाकी है। कुछ भी बन जाना सदा याद रखना
- 56:46मुकाम बाकी है मुकाम क्या है मुकाम ये है कि तुम्हारा यहाँ
- 56:53तुम्हारा शरीर भी। तुम जुठला सकते हो, सारी उम्र
- 56:59व्यक्ति जुठलाता है, इस सत्य को जुठलाता है कृष्ण कहते हैं
- 57:05तुम्हारा कुछ नहीं, तू पत्ता दे, तू फल दे तू फूल दे तू पानी दे।
- 57:16सब मेरा है, बस इस नीयत से यह भाव होना चाहिए कि तेरा नहीं है कुछ
- 57:23मेरा मुझको अर्पण कर रहा है। अगर यह भाव ना आया तो फिर कुछ भी
- 57:29ना आया क्या ख़ाक आया। फिर चाहे तो सोने की छत चिढ़ाते
- 57:41यह तो सत्यम या ये भी झूठ है सच्चा वह।
- 57:56जो खुद भी जान ले मेरा यहाँ कुछ नहीं और जो तुम्हारे पीछे पूछ
- 58:04पकड़ के लगे उन्हें भी समझा दे तुम्हारा यहाँ कुछ नहीं ये शक्ति
- 58:11जान लो। फिर परिश्रम करो यही सत्य है
- 58:21अपरिग्रह जोड़ो मत जिसने जोड़ा किसके साथ ग्रह किसी के साथ ग्रह
- 58:31सभी का यहीं पड़ा। सभी ने दावे किए।
- 58:35यह धरती मेरी यह धरती मेरी किसके साथ गई?
- 58:40बताओ तो कबीर कहते हैं इस दावे को छोड़ते हैं।
- 58:54कृष्ण कहते हैं इस दावे को छोड़ दे, सब मेरा है और तू चाहे कुछ भी
- 59:01खाली हाथ अर्पण कर दे, ये हवाएं भी मैं हूँ, ये भी मेरी है।
- 59:09तेरा कुछ भी सुना है, अगर इस भाव से तू कुछ भी चढ़ा देगा, वह सच्ची
- 59:19संपत्ति होगी, सन्मति होगी। अन्यथा तू कुछ भी चढ़ाते।
- 59:28कुछ काम न पड़ेगा, सब दुख देने वाले होंगे, पाप लगेगा।
- 59:35तू सोने की छत्र भी चढ़ा दे तो पाप लगेगा।
- 59:38खुद भी दंडवत हो जा तो पाप लगेगा। अगर तुझे ये है कि शरीर में हूँ,
- 59:44मेरा है। तो कबीर कहते बाकी तो बात छोड़ तो
- 59:51बाकी तो कल्पनाओं की बात है, तुम झुठला भी सकते हो, लेकिन मौत को
- 59:57तो कभी नहीं झुठला सकते हैं। कल तक छाती पीटते थे ये मेरा शरीर
- 1:00:06मेरा। महल मेरे ये चमचमाती करें मेरे ये
- 1:00:13जमीन का टुकड़ा मेरा आज कहाँ है आज चार तेरे बच्चे।
- 1:00:26तेरे पड़ोसी तुझे कांधों में उठा के आग लगा देता है ये भिक्षुक
- 1:00:37चला, क्या देखा शतर तो सब के सिर पे थे, अब कबीर कौन?
- 1:00:49इसने कहा कि रोज़ जाना वहाँ है मंदिर जाओ न जाओ मंदिर तुम मत
- 1:00:54जाना, मंदिर जाने से कोई हल नहीं होता, मंदिर जाने से तो वासनाएँ
- 1:01:00भड़केगी तुम कुछ मांगोगे रोज़ तुम मांगते हो।
- 1:01:07मैं कहता हूँ मंदिर जाना छोड़ देना, शमशान जाना, मत छोड़ना,
- 1:01:17मुर्दे के पीछे जाना, मत छोड़ देना, जरूर जाना क्योंकि।
- 1:01:24जीवन की वास्तविकता वहीं नजर आती है।
- 1:01:28बुद्ध को भी वहीं नजर आई। सबको वहाँ नजर आती है, नानक को भी
- 1:01:36तेरा मेरा कृष्ण कृष्ण भी कहते हैं कुछ भी अर्पण कर।
- 1:01:43तेरा है नहीं, कुछ यह समझ के अर्पण कर और कबीर भी कहते हैं यह
- 1:01:53शरीर भी तेरा है मौत को सदा याद रख वह सत्य है याद रखना तो राम और
- 1:02:00सीता को याद मत रख। राधे और श्याम को याद मत रख याद
- 1:02:05रख तो मौत को याद रख वो 1 दिन आएगी, दबे पांव आएगी और तेरा गला
- 1:02:11गवा देगी, तू लाख हाथ पांव मारना और तेरा गला ना छोड़ेगी।
- 1:02:28जिसने इस सत्य को देख लिया वह फिर जगह जगह भटकता है जिसने तुम्हें
- 1:02:39याद कर दिया कि बाकी असत्य कल्पना, स्वप्न सत्य एक।
- 1:02:50मृत्यु सत्य वहीं गुरु जिसने कह दिया नहीं हम सत्य हैं, हमारे
- 1:02:59पांव पकड़ लो वह झूठा, वह पापी, वह निर्दयी, लोभी, लालची।
- 1:03:09कुछ चाहता होगा तुमसे सच्चा गुरुत्व में कहेगा मृत्यु सत्य है
- 1:03:18मैं भी 1 दिन चला जाऊंगा, मेरे भी पांव से मत चिपट।
- 1:03:27मेरा भी नाम सिमरण मत कर, स्मरण कर उसका जो सत्य है और सत्य है,
- 1:03:37मृत्यु उल्टा नाम जपेथे जानो बालमीक भय ब्रह्म समानु।
- 1:03:46और देखिए अगर वाल्मीकि राम राम करते तो कभी न पहुंचते, ये बात
- 1:03:51तुम्हें हिलाएगी ज़ोर वाल्मीकि अगर राम राम करते तो कभी न
- 1:03:58पहुंचते। वाल्मीकि ने उल्टा नाम जबा तो
- 1:04:03पहुंचा। मरा मरा मृत्यु ज्यादा है और जो
- 1:04:09मृत्यु को याद करेगा मैं पहुँच ही जायेंगे पक्का जो राम को याद
- 1:04:14करेगा कभी नहीं पहुंचेगा पक्का मृत्यु सत्य।
- 1:04:26किसकी नहीं होती और किसकी नहीं हुई, यह बता दो।
- 1:04:33वाल्मीकि ने सत्य को याद किया, सत्य को हृदय में उतारा, मृत्यु
- 1:04:39सत्य है पहुँच गया। तुम भी ज्येष्ठ, न मृत्यु को सत्य
- 1:04:46जान के हृदय के अनुसार लोगे और जो गुरु तुम्हें मृत्यु समझा दे वह
- 1:04:53गुरु शिव जहर पी लेते हैं। तुम्हें समझ नहीं आता जो जहर पी
- 1:05:04ले वो ही गुरु जो अमर पी ले वो कैसा गुरु?
- 1:05:121 दिन तो इस शरीर ने तो जहर पी ले मृत्यु का जहर।
- 1:05:19और मृत्यु के पीछे मृत्यु छिपा पड़ा वह तो सदा से वहाँ तो मौत
- 1:05:26पहुंचती भी नहीं, उसकी फिक्र छोड़ दो मृत्यु के पार है वो जो कभी
- 1:05:36मरता नहीं। लेकिन उसकी फिक्र छोड़ दो क्योंकि
- 1:05:40कभी मरता नहीं, उसकी काफी फिक्र करते हो, तुम दरबदर की खाक छानते
- 1:05:50हो। अगर तुमने मृत्यु को सत्य करके
- 1:05:57नहीं समझा तो फिर सब तुम्हारा है, फिर तुम ताल तलैया में ढोलते
- 1:06:03रहोगे। त हंसपयो मानसरोर हंसपयो मानसरोर।
- 1:06:32ताल तलैया क्यों डोले मन मस्त हुआ फिर क्या बोले मन मस्त हुआ।
- 1:06:49फिर क्यों बोला मस्त हुआ, फिर क्यों बोला मस्त हुआ मस्त हुआ?
- 1:07:09फिर क्यों बोले मन मस्त हुआ हाँ फिर क्यों बोला?
- 1:07:23जो मस्त हो जाता है, वह क्यों बोले?
- 1:07:34हीरा पायो कांट गाठिया हीरा पायो। ये जान लो की तुम हो कौन तुम कौन
- 1:07:51हो लेकिन समझाएगी। सत्य को स्वीकार कर के मृत्यु को
- 1:07:58स्वीकार करने के बाद इसलिए मृत्यु पे संतों ने इतना ज़ोर दिया ओह
- 1:08:04गोरखु वो गंभीर हूँ ओह नानक ओह। कृष्ण हीरो पायो।
- 1:08:14गांठ गठियायो बार बार बा को। क्यों?
- 1:08:22खोले। मन मस्त हुआ फिर क्यों बोल मन
- 1:08:31मस्त हुआ? फिर क्यों बोला?
- 1:08:36फिर बोलने की जरूरत नहीं रह जाती। बोलता है तब तक आदमी जब तक हीरान
- 1:08:44नहीं हो पाया, जिसने पा लिया वह मन हो गया।
- 1:08:52यही पहचान है। हृदयमौन हो गया उसका लबों से चाहे
- 1:09:07बोलते रहे हृदय खमौश है जिसने सत्य जान ली।
- 1:09:17देखा सभी के मुकुट कबीर का पता नहीं आग लगा दी गई बहार धीरे धीरे
- 1:09:27सभी के मुकुट हट नहीं रहा। देखता रहा भिक्षु।
- 1:09:36सब के गाय मुंगी का के भाव भाई उड़द की आ रही है।
- 1:09:43सोन्य के भाव रहेगा इन्हीं बातों में और जाते हैं।
- 1:09:55लेकिन कबीर के सिर से ताज नहीं हटा और लोई ने कहा था कबीर के सिर
- 1:10:04पर ताज यही पहचान कबीर सदा याद रखते हैं हम को तुम तो कहते हो
- 1:10:10कबीर बनना चाहते हो बनोगे कैसे? ए ताज मृत्यु को याद रखने का ताज
- 1:10:20जीसको याद करके वाल्मीकि पहुँच जाते हैं जीसको याद करके अंगुली
- 1:10:25माल पहुँच जाते हैं वह मृत्यु तुम्हारा यहाँ कुछ नहीं तुम गए
- 1:10:33मरे। बुद्ध ने देखा, मृत व्यक्ति के
- 1:10:37लाश को गया, बुध गया, विदा हो गया मृत्यु बड़ी अल्केमी है, रसायन
- 1:10:45है, कमियां छिपी है इसमें, लेकिन काश।
- 1:10:53तुम इस सत्य को हृदय में उतार सकते गहरा जीस दिन उतार लोगे फिर
- 1:11:01ताल। में डोलोगे।
- 1:11:12मानसरोवरु हंस पायो पायो हंस पायो।
- 1:11:30मानसरोवरु ताल तलैया क्यों डोले? क्यों डोलेगा वह धन इकट्ठा करेगा,
- 1:11:45शोहरत इकट्ठी करेगा। पदार्थ इकट्ठा करेगा, डिग्रीज़
- 1:11:54इकट्ठा करेगा क्यों चाहेगा? वो मेरे फलाओ से हो, तुम क्यों
- 1:12:03चाहेगा वो घना सा धन हो, बड़ी सी पूंजी हो?
- 1:12:09बड़ा। सा साम्राज्य हो मेरा।
- 1:12:12तार तलैया क्यों डोल मन मस्त हुआ फिर?
- 1:12:20क्यों बोले मन मस्त? हुआ फिर क्यों वो?
- 1:12:32धन्यवाद।