Latest / Baba ji Vijay Vats / 6 Aug 25 - सखी साधना क्या है? स्त्री-पुरुष और नाम जप का गूढ़तम रहस्य: सनातन की सबसे बड़ी भूल!Must watch
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- 0:01कल के प्रवचन से हम आगे चलेंगे। प्रवचन मैं कल भी।
- 0:10बोल सकता था। परंतु कल बोला नहीं।
- 0:19आज बोल रहा हूँ और जो लोग ज्यादा। समाज में उलझे है।
- 0:33ज्यादा मान्यताओं में उलझे है। कृपया इस वीडियो को।
- 0:44न सुनें, आप सुनेंगे उसकी जिम्मेदार खुद सुन लेना, कमेंट मत
- 0:57कर। बात।
- 1:01कुछ ऐसे गहरे दलों की है जहाँ तुम्हारी बुद्धि तिलमिलाएगी और
- 1:10तिलमिलाहट में तुम कुछ भी अनाप शनाप बोल सकते हो।
- 1:18इससे अच्छा होगा। क्या आप सुनें नहीं, लेकिन जो
- 1:25मेरे नीम। श्रोता में वो ऐसे।
- 1:29सुने क्या सुने? कही वो जानते हैं।
- 1:35मैं जो बोलता हूँ। कारणों से बोलता हूँ परमात्मा का
- 1:47नाम क्या है तुम जानकर बड़ी हैरानी हो।
- 1:58यह बिल्कुल प्रश्न आज मैं प्रश्न कर रहा हूँ इस्लाम ने नाम रखा।
- 2:11अल्लाह और। इस्लाम ने इस बात।
- 2:16की भी। बंदिश लगा दी किसी का नाम अल्लाह
- 2:21न हुआ तुम इस्लाम में किसी मुसलमान का नाम अल्लाह।
- 2:30नहीं पाओगे वह नाम। अरे, जर्व है परमात्मा कर।
- 2:42इसलिए तुम। अल्लाह अल्लाह कर सकते हो?
- 2:52उसी सूत्र से जीस सूत्र से मैंने आपको बताया।
- 2:59अल्लाह अल्लाह करते। अल्लाह ही हो जाओ, जहाँ जाकर तुम
- 3:06कह दो। अनर हक अल्लाह मैं ही हूँ।
- 3:11खुद खुदा। अल्लाह अल्लाह करते जाओ गहरे
- 3:19उतरते जाओ, संकल्प गहरा होगा। उस स्थल पे उतर जाओ जो सतल पे
- 3:27जाके शब्द खत्म हो जाते हैं। शब्दा।
- 3:31तीर्थ में उतर जाओ, आगे तुम्हें अल्लाह ही मिलेगा।
- 3:39अल्लाह? के साथ ईद मनाना।
- 3:44थोड़े शब्दों में। प्रोसेसर बोल रहा।
- 3:46है। ये धर्म बड़ा समयदार धर्म था।
- 3:58सिख धरम ने इस परंपरा को। समझा और कायम रखा।
- 4:04बंदिशें लगा दी। तुम कोई भी नाम रख लो, लेकिन वह
- 4:07गुरु? मत रखो।
- 4:14मूल मंत्र में मैंने। आपके कहा कि लक्षण।
- 4:17है, परमात्मा के नाम नहीं है उसका?
- 4:21मूल मंत्र जपने के लिए नहीं है। मूल मंत्र यह।
- 4:26समझने के लिए है हम जहाँ। पहुँच गए।
- 4:29क्या वह मुकाम सही? है।
- 4:31वहाँ। तुम ये लक्षण पाओगे नो लेकिन सिख
- 4:39धर्म में। वाहे गुरु नाम।
- 4:43किसी व्यक्ति का रखने से मनाही कर दी।
- 4:46तुम किसी सिख का नाम वह? गुरु नहीं पाओगे।
- 4:59इसाई तुम। किसी ईसाई का नाम।
- 5:05गॉड नहीं। गॉड होने के लिए।
- 5:16है। किसी व्यक्ति का नाम नहीं रखा जा।
- 5:22सकता ये स्ट्रिक्टली। किसी व्यक्ति का नाम तुम गॉड रख
- 5:31दो, अपने किसी व्यक्ति का नाम तुम बह गुरु।
- 5:35रख दो अपने किसी। व्यक्ति का नाम तुम।
- 5:39अल्लाह रख दो अपने। उसके गुणों को साथ।
- 5:44बांध के तुम। रख सकते हो?
- 5:51अर रहीम अर रहमान अब्दुल्लाह अकेला अल्लाह?
- 6:01तुम्हें नाम नहीं मिलेगा। रख वे नहीं हो।
- 6:03सकते ये बैन? लेकिन।
- 6:14हिंदू धर्म हिंदू धर्म में। हम जितनी ऊंचाइयों को छुए थे
- 6:23बिलंदियों को। उतने ही।
- 6:30पाताल। की गहराईयों में घर को?
- 6:35पहले तो हमने गलती की। एक को अनेक में बांटने।
- 6:45इस शब्द की आड़। में के सभी नाम उसके हैं।
- 6:53कोई अल्लाह का ईश्वर का अलग से नाम।
- 6:55नहीं होता यही हम। से खाकर।
- 7:03फिर नाम जप। किसका नाम जप?
- 7:10तो एक ही मार्ग। बचता था।
- 7:13कि क्योंकि वह अनाम है। इसलिए ध्यान में उतर।
- 7:17जाओ यही विधि बची थी। लेकिन क्योंकि हम।
- 7:24तो नाम से चिपके हुए। चिपके हुए खिलाड़ी थे।
- 7:30हमने उसके अनंत नाम भर लिए। हम भूल गए हम।
- 7:38पद्धतियों को भूल। गए।
- 7:42हम रास्तों को भूल गए, हमने नामों को पकड़ लिया।
- 7:49मन की गहराईयों में? उतर चलें, आज मन की यात्रा हो।
- 7:55मन के बाहर जाने में मन की गहराईयां समझनी पड़ती है।
- 8:02ये भी रास्ता है यहाँ से गुजरना हो।
- 8:10मिनट में कल एक शब्द को अगर पूर्ण भाव से।
- 8:15सारी धूप को इकट्ठा करके एक बिंदु पर एकत्रित कर दिया जाए तो आग लग
- 8:21जाएगी। ट्रांसफॉर्मेशन वेल हैपन अब देखिए
- 8:26ट्रांसफॉर्मेशन वेल हैपन। कैसे होगा?
- 8:32पानी वाष्प बन जाए। तुम नाम तो सकते हो उसमें वो।
- 8:58उसमें वो आग। नहीं जलती कि।
- 9:02उभल जाए पानी? और रूपांतरित हो जाए।
- 9:05वाष्प बन जाए। देखिए हसिएगा नहीं।
- 9:13मैं साइकोलॉजी की बात कर रहा हूँ। कोई चौटिकल नहीं सुना रहा हूँ मैं
- 9:19आपको। अगर।
- 9:24फ़ोन। मन को इकट्ठा करके।
- 9:32धूप की तरह तुम एकाग्र। एक बिंदु पर कर दोगे तो मन।
- 9:36भी खो जाएगा। और मन ही दुविधा।
- 9:42है। मन ही दुख।
- 9:46का कारण है संसारण। बुध चूक गए संसार दुख का कारण है
- 9:58नहीं मानव दुख का कारण है। मान जाने एलोजन ब्रह्म।
- 10:10और बुद्ध का? इल्यूजन भी ऐसा ही।
- 10:15मिटा। जब उसने जान लिया।
- 10:19मैं वास्तव में कौन सीधी सी पद्धति है नाम जप के।
- 10:28जीस नामजप का मैं सदा। से विरोध करता रहा हूँ उसका कारण
- 10:31आज बताऊँगा। आखिर पर अध्याय समाप्त होने को
- 10:44है। ग्रंथ संपूर्ण होने को है।
- 10:49अन कहा कहना ही। पड़ेगा।
- 10:51और कोई चारा भी अल्लाह, अल्लाह। करते इतने गुम हो जाओ अल्लाह में
- 10:59कि तुम। अल्लाह ही हो जाओ, वह गुरु, वह
- 11:05गुरु। करते।
- 11:08तुम इतने गुम हो जाओ उसमें वह गुरु कहने वाला खत्म।
- 11:13हो जाए। वहीं रह जाए जीसको जब।
- 11:20रहे थे वह गुरु। ही रह जाए।
- 11:26पर ला ही रह जाए। गौर ही रह जाए, लेकिन सनातन ने
- 11:35हिंदू धर्म में क्या श्रंखला? गवाही क्या?
- 11:38ब्रांच निकाली तुमने गुड़ गोबर कर दिया।
- 11:47न खुदा ही मिला। न बसा भी शना न इधर के रहे, न उधर
- 11:54के रहे। रामकृष्णा पर मनसे इस बात को
- 12:00अच्छी तरह से जानते थे क्योंकि उन्होंने माता सिद्ध कर दी थी।
- 12:07इतने। भाव विभोर हो के वो जैसे प्रसाद
- 12:12अर्पण करते। वैसे तुम नहीं कर सकोगे जैसे वो
- 12:16नाचते। कई कई दिन तक पूजा करते तुम नहीं
- 12:20कर सको उसके पीछे उसके पीछे। कथा इंटेंसिव भा।
- 12:32कितने मगन हो जाते। वो।
- 12:35तो मग्न कौन होता है? मन मग्न होता है मग्न यानी बेलीन
- 12:45कबीरा मग्न कबीरे में। अपनी।
- 12:49खुदी। में मग्न हो गया।
- 12:50कबीर और। कबीर ही हो गया।
- 12:56कबीर? कबीरी में खुदी में।
- 12:58मग्न हो गया। कबीरा मग्न कबीरी में भीतर का
- 13:07कबीर। हो गया ये गोरख?
- 13:08कहते हैं। ऐसी मरणी मरो जिसे मरणी मर गोरख
- 13:15दीठा तुम्हारे भीतर का गोरख। बाहरक का गोरख तो काम चलाऊ है,
- 13:26लोगों की पहचान है। गोरख लेकिन भीतर का गोरख, तुम
- 13:30नहीं जानना है। और कैसे मिलेगा?
- 13:37विलीनता से मन को मगन कर दो विलीन कर दो रामकृष्णा परमहंस इस पद्धति
- 13:48को जानते थे। और इतने भावुक हो जाते।
- 13:56जो भी क्रिया करते खो। जाते मेरा।
- 14:02सही अध्याय शुरू होता। है।
- 14:06मैं क्यों रोकता हूँ? रामकृष्णा परमहंस कई साधनाओं से
- 14:13गुजरे। एक।
- 14:16साधना से वो पहुँच गए थे। फिर।
- 14:18उन्होंने कहा, दूसरी साधना? क्योंकि मोमोक्ष तो बहुत तरह के
- 14:24मेरे पास आएँगे मैं गुरु। उन्होंने एक साधना की।
- 14:36सखी सच। ध्यान से सुन ना बात को।
- 14:44सखी साधना में वो परमात्मा। की सखी हो गए।
- 14:51आज भी। यह साधना चलती गहरे अर्थों को
- 14:58समझेंगे और मौन होके सुनेंगे सखी साधना।
- 15:12राधाकृष्णन् का प्रेम इतना प्रेम कि राधा खो जाए, कृष्ण खोज रहे।
- 15:39सकरी, साधना, चैतन्य महाप्रभु, गौरी वैष्णव।
- 15:45संप्रदाय व लव संप्रदाय। निम्बार्क सम्प्रदाय राधा वल्लभ
- 15:55सम्प्रदाय वृंदावन में सारी दासा इन सब में चलती है राधा।
- 16:09कृष्ण की सेबी का हूँ मैं। सखी हूँ मैं राधा।
- 16:16कृष्ण दोनों की सेवा। करनी चाहिए ये सात जन्म करनी शुरू
- 16:23करती। है।
- 16:26अब आगे जो आएगा वो तुम्हें चौंका देगा।
- 16:32जब कोई चीज़ पूर्ण भाव। से पूर्ण संकल्प।
- 16:35से आप खो के की जाती है जैसा के किया राम।
- 16:41कृष्णा पर मनुष्य। तो तुम।
- 16:48सखी हो गए, सखी? अगर इतने भाव से होगे क्योंकि।
- 16:55राम किशन परमहंस जैसा। भाव शायद किसी में ना धरती।
- 17:00पे आय तक कोई। मानव वैसा नहीं।
- 17:04जो रामकृष्णा परम जैसा भाव ले आए। इतने मगन हो जाते।
- 17:18रस खान की भी यही रही। इतने मगन हो जाते।
- 17:22इसमें। लीन हो जाते कि वह वही हो जाते।
- 17:31तो रामकृष्णा पर मन्शन? ये आपको?
- 17:35रामकृष्णा की साधनाओं में। उनके शास्त्रों में मिलेगा।
- 17:40आप कंगाल सकते हो कुछ बातें समाज। के वैसे छिपाली गई।
- 17:47बात तो राम। किशन इतना डूब गए कि मैं सखी हूँ।
- 17:55सखी हूँ या नहीं स्त्री हूँ। वो राधा हो।
- 18:02कृष्ण की। या राधा की सखी हो, उससे क्या
- 18:09फर्क पड़ता है? है तो स्त्री।
- 18:17स्त्री बन केजी। राम किशन परमहंस स्त्री।
- 18:24बन के अपना जीवन गुजारने लगे। कृष्ण के लिए जीना, कृष्ण के लिए
- 18:30मरना, कृष्ण के लिए खाना पीना सारे श्रृंगार।
- 18:35श्रृंगार भी करती मैं तुम्हें सायको का एक सिद्धांत से समझाती
- 18:39हूँ, सायकल जमान और शरीर दो नहीं हैं एक।
- 18:48तुम्हारे। मन का सीधा इफेक्ट तुम्हारे शरीर
- 18:51पर पड़ता है। तुम्हारे।
- 18:52शरीर का सीधा इफेक्ट। तुम्हारे मन पर पड़ता है अगर
- 18:54तुम्हारा शरीर बीमार हो जाए तो तुम्हारा मन भी।
- 18:57उदास हो जाएगा अगर तुम्हारा मन उदास।
- 19:01हो जाए तो तुम्हारा शरीर भी बीमार पड़ जाएगा।
- 19:04ध्यान रखना। ये एक हैं दो नहीं हैं वैसे तो
- 19:08सारा। भ्रमण्टी एक है।
- 19:11लेकिन यहाँ मैं सखी। साधना की बात कर रहा।
- 19:13हूँ आपसे? सखी साधना में राम किशन पर मंथ
- 19:20सखी हो गए यानी स्त्री हो गए। परिणाम आया कि रामकृष्णा के सदन
- 19:36बढ़ने लगे स्त्रियों की तरह। मेल।
- 19:38कॉल स्त्रियों की तरह। और ऐसा।
- 19:41कि स्त्रियों से भी। ज्यादा।
- 19:50राम किशन का सामान गायब हो गया। अब तुम समझदार।
- 19:59हो समझ लेना, राम। किशन को स्त्री का।
- 20:04सामान लग गया भावना। इतनी प्रबल है।
- 20:10तो शरीर के। सामान बदले जा सकते हैं तुम्हें
- 20:13सर्जरी करने की जरूरत नहीं है। रामकृष्णा के गुप्तांग बदल गए।
- 20:19स्त्री के से उप गए। सत्तन बढ़ गए, बहुत ही ज्यादा बढ़
- 20:23गए। पर इतना ही नहीं रामकृष्णा को
- 20:26माहवारी आने। यह रिकॉर्ड जो है।
- 20:36उनके। इतिहास में मिटा दिया हो तो मुझे
- 20:38पता नहीं, लेकिन। अगर रिकॉर्ड ओरिजिनल।
- 20:43रहे तो आपको। भूबहू लिखा मिलेगा रामकृष्णा को
- 20:48माहवारी? आनी शुरू होगी पीरियड्स?
- 20:52सामान गायब हो गया। सतन भर गए।
- 20:58वो स्त्री हो गए। उनकी चाल स्त्री जैसी।
- 21:01हो गई वैसे ही। चटकी दी मटकी दी।
- 21:06रामकृष्णा के दाढ़ी, मूंछ। बंद हो गया।
- 21:08आन? यानी भीतर का हॉर्मोनल।
- 21:13स्ट्रक्चरल ढांचा सर। ये तुम्हारी भावों पे ही डिपेंड।
- 21:17करता है तुम जब। क्रोध में होते हो।
- 21:25तो कैसे हार्मोन पैदा हो जाता है? बता।
- 21:32जब तुम करोस में तो कैसे हार्मोन। पैदा हो जाता।
- 21:42है। एड्रियन हैलिन वगैरह।
- 21:43यही तुम्हारी बी। पी को हाई कर देता है।
- 21:51जब तुम समर्पण में आओगे स्त्रण में।
- 21:53आओगे। तो ध्यान रखो सिर्फ।
- 21:56तुम्हारा मन ही स्त्रण नहीं होगा। मन और शरीर एक है तुम्हारा शरीर
- 22:02भी स्त्रण हो जाएगा। और तुम्हें मैं क्या?
- 22:15चैतन्य महाप्रभु खुद। स्त्री हो?
- 22:27जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत तनते की।
- 22:33तस। बाहर।
- 22:35भी वैसे ही दिखेगा। और।
- 22:38तुम्हारी शरीर का संरक्षण। ढांचा बदल जायेगा स्ट्रक्चर सारा
- 22:45बदल जायेगा यह। कोई चमत्कार नहीं यह।
- 22:51हुआ। राम कृष्ण के स्थान बढ़।
- 22:56गए। गुप्तंग बदल।
- 23:00गए स्त्रियों की तरह। गुप्तंग आ गए।
- 23:04और पीरियड। भी आने लगा।
- 23:11भाव अगर गहरा हो तो ब्राह्मण। भी बदल जाता।
- 23:17है आपके। ये जो एक जनम में स्त्री होती है,
- 23:22दूसरे में पुरुष। वो ही हो जाते हैं।
- 23:24ये सिर्फ भावना के कारण है। तुम्हारी भावना इतनी गहरी हो गई।
- 23:29के पिछले जन्म में तुम पुरुष से दुख पाया तुमने कहा।
- 23:31स्त्री बढ़िया है। स्त्री बन जाओगे स्त्री कहती नहीं
- 23:36स्त्री तो ये पंगा। बहुत है।
- 23:38हम तो पुरुष हो जाएंगे, अगले जन्म में, पुरुष हो जाएंगे तुम्हारी
- 23:41भावना का ही कमाल। है।
- 23:43ब्राह्मण तुम्हें वही दे देता। है।
- 23:46जो तुम भीतर से। एंटायर।
- 23:48डीपली इच्छा करते हो? उसके घर में कोई कमी?
- 23:52नहीं है स्त्री। बना देगा तो कोई।
- 23:55फर्क नहीं पड़ता पुरुष बना देगा तो कोई।
- 23:57फर्क नहीं पड़ता। ट्रस्ट सेंटर अलग सी बात है, वह
- 24:02तो एक प्रकार का दंड है। तो राम किशन स्त्री हो?
- 24:10गए एक और उदाहरण भला चौक। नी में नो आँखों रंजा।
- 24:31हीरन। रांझण रांझण कर दी।
- 24:38ने मैं, आप। पे रांझण हीर अस्त्री नहीं रही थी
- 24:45हीर पुरुषों। और खुद अपनी व्यथा बता रही है।
- 24:51व्यथा नहीं है। अपनी ओरिजिनेलिटी।
- 24:53वह चाहती है पुरुषों। तिधोनेमन अखोरांझा हिलना अखे।
- 25:02कोई। रांझण रांझण कर दी गई नहीं मैं
- 25:07अबे रंजन। हुआ।
- 25:11वो रांझा। हो गई थे उसका?
- 25:13सामान बदल गया था। वो रांझा ही हो गई थी।
- 25:23सारे। गुप्तंग उसके रांझी जैसो।
- 25:28लोग कहते हैं कि ये तो मनोवस्था है तो मनोवस्था का गहरा प्रभाव
- 25:33भी। तो शरीर पर पड़ता।
- 25:34है और मैं आपको। क्या समझा रहा हूँ?
- 25:39मनोवस्था जब इतनी डीप। हो जाती।
- 25:42है। डीपेस्ट।
- 25:46उसके प्रभाव शरीर पर प्रत्यक्ष आते हैं यह।
- 25:52साइकोलॉजी में है। वैज्ञानिक ने आज खोजा।
- 25:57हिर के वक्त तो नहीं? खोजा गया था।
- 26:00रामकृष्णा। के वक्त तो खोजा।
- 26:02नहीं गया था तब तो हैरानी की थी। और सखी?
- 26:05शासन तो आज भी चलती है वैष्णव संप्रदाय?
- 26:08में नहीं चलती, वैष्णव में चलती है।
- 26:24क्योंकि। अल्लाह अल्लाह करते अल्लाह, हो
- 26:28गया ठीक। अल्लाह तो होना ही था, सही कहता
- 26:32हूँ। इन्सर्ट योरसेल्फ कंप्लीटली इन।
- 26:37नाम टोटली इन्सर्ट योरसेल्फ। क्या होगा?
- 26:46पूरी भावना एकाग्र होके तुम मग्न हो जाओगे।
- 26:49लीन इसी को लीनता। कहते हैं।
- 26:53आज इसका भावार्थ मुझे सही रूप से समझाना?
- 26:56पड़ेगा क्योंकि ये अध्याय। खत्म होने के गवार पे है।
- 27:02एक साइकोलॉजिकल व्यवस्था। है।
- 27:06तुम्हारा मन भावनाओं। को मूर्त रूप दे सकता है।
- 27:14इसलिए मैंने बहुत। बार कहा है।
- 27:15गलत चीज़ मत मांग लेना। हराम किशन पर मंच स्त्री हो गए और
- 27:35हीर राँझाव। और हीर।
- 27:39कहते हो मुझे हीर नको। मैं हीर हूँ।
- 27:43नहीं, मैं राँझाव। जब भी तुम किसी के प्रेम में
- 27:47इतने। ज्यादा इन्सर्ट।
- 27:49हो जाओगे तलीन हो। जाओगे मगन हो जाओगे।
- 27:52लीन हो जाओगे तो तुम्हारा मन ही नहीं, तुम्हारा शरीर भी बदलेगा।
- 28:03ये कहना। चाहता हूँ इसलिए मैंने राधा नाम
- 28:13का विरोध किया। ऐसा केस मेरे पास?
- 28:17आया था एक भैया आ गया मेरे पास। बाबा?
- 28:25मैं वृंदावन गया था किसी गुरु ने मुझे नाम दे दिया राधे राधे करते
- 28:29रहो मैं करते रहो भावना प्रबल थी, रामकृष्णा परमा और परम।
- 28:37भावना के साथ मैं इन्सर्ट हो गया उसमें?
- 28:44और बाबा मैं रहता है। ये तो मुझे रात को पता चला कि
- 29:00मेरा सामान कार्ड। बड़ी परेशानी में इधर उधर।
- 29:12अब बताया की। उसको शर्म आती है।
- 29:18लेकिन हीर को शर्म? नहीं आती।
- 29:22हीर बिलकुल साफ कहती। है, देखो, मैं तो हीर रांझा हो गई
- 29:26मत। कहो मुझे हीर।
- 29:28क्योंकि मेरा सारा स्ट्रक्चरल ढांचा।
- 29:31इस त्रेण के बदल के पुरुष का होता।
- 29:33है। बहुत लोग तर्क कर लेते हैं नहीं,
- 29:39नहीं ये तो मानु। स्थल पे था।
- 29:41अरे, मानु। स्थल ही तो गहरा जाके शरीर को
- 29:45बदलेगा। यही तो मैं कह रहा हूँ।
- 29:49तुम्हारे से थोड़ा आगे निकल जाता हूँ, मैं गहरे में रहता तो उसी।
- 29:53लाइन पे हूँ। मुझे तो बड़ा घबराया।
- 30:00हुआ है मेरे पसीना। क्यों आया है तेरे को हैलो बाबा
- 30:04सामान? मैंने कहा अब।
- 30:09तू उसी से मांग। जिसने कहा पूर्ण भाव से।
- 30:16राधे राधे करो राधा ही हो जाओ राधा हो गया अब मेरे से क्या लेना
- 30:24है? उसी से लो जाके।
- 30:27और तो मैं एक बात बता। दूँ, ये लोगों को कहने के लिए
- 30:31हैं। मेरे इस बात को गो से सुन लेना
- 30:35ज्यतन प्रेमानंद जी महाराज में। या।
- 30:39कोई भी व्यक्ति पूरन तलीनता के साथ मगनता।
- 30:44के साथ। राधा राधा करते करते।
- 30:50राधा ही हो गई। रांझण रांझण।
- 30:54कर दी नी मैं आपके रांझण होई। उस दिन तुम देखना सत्तन भर जाएंगे
- 31:01और सामान बदल जाएगा। यह एक साइकोलॉजिकल व्यवस्था।
- 31:09है तुम्हारी मनोवेगों। का मनो इच्छाओं का।
- 31:14सीधा सीधा संबंध तुम्हारी। शरीर पर पड़ता।
- 31:16है क्योंकि मान। और शरीर दो हैं ही।
- 31:24इसलिए मैं तुमसे। कहता हूँ देखो भाई बच पे थोड़ा
- 31:30यहाँ धोखे बहुत ये गलती कहाँ। हुई गलती हुई सनातन से।
- 31:43ना ऐसा बदला ना मूसा। बदला ना सिख?
- 31:55बदल गया हिंदू? इसलिए सभी के आपको एक।
- 32:01परमात्मा में। एक को सुमरी।
- 32:04है नान का? जो जल थ लहरे।
- 32:06असमय दूजा काहे सुमरी है जो जमे। थे।
- 32:10मर्चा सभी। धर्मों का परमात्म एक।
- 32:19हिंदू धर्म का परमात्म। 33,00,00,000 तो।
- 32:26है ही है बाकी। रोज़ नए पैदा हो।
- 32:33जाते है ऐसी पागलपन। तुमने की है।
- 32:43कोई हर्ष न था अल्लाह कहने में अल्लाह होने में भी कोई अर्थ नहीं
- 32:47है, लेकिन अब जब राधा हो गए सामान चला गया, अब क्यों रोते हो?
- 32:59अभी तो नीचे गए ही नहीं। तो मैंने कहा सुन इसका हाल तो
- 33:09मेरे पास है। लेकिन अभी बताऊँगा अगर।
- 33:14किसी के साथ ये। घटना घट जाए।
- 33:16तो मैं उसको एक कांत। मैं बता।
- 33:21सकता हूँ कि इसका? ये इतिहास।
- 33:35की कहानियों नहीं। ये सत्य की कहानियों हैं।
- 33:39क्षीर राँझा हो जाती हैं और सखी। साधना में रामकृष्णा पर मंच।
- 33:47सखी हो जाते हैं, स्त्री हो जाती है।
- 33:50तुम भी अगर पूर्ण भाव। से पूर्ण भाव से तुम्हारे।
- 33:57पुरुषत्व नष्ट हो जाए। तो तुम।
- 34:00स्त्री हो जाओगे। निश्चित रूप से स्त्री हो जाओगे।
- 34:03क्योंकि मनोभावों का? गहरे से डीपेस्ट इमोशन्स का
- 34:08प्रभाव शरीर को बदल। देता है।
- 34:18सर, मैं तुमसे कहता हूँ देखो, भाई।
- 34:21अगर सामान गंवाना है। तो तुम्हारी इच्छा मैं रोकता मुझे
- 34:28बोलना ही पड़ा ना घर में। ये गहरा मैं थोड़ा है।
- 34:36बने रहो जैसी आये हो तुमने अपने होने।
- 34:42तक जाना है। जहा कोई लिंग, लिंग, लिंग नहीं या
- 34:46ना कोई। पुरुष है ना कोई मिश्र है तुमने
- 34:49भाना जाना है। क्यों पचड़े में?
- 34:56लेकिन जब व्यक्ति अपनी असली मंजिल को तय नहीं किया होता नकली नकली
- 35:00बड़ा होता है नकली नकली सुना होता है।
- 35:03उनके गुरु आगे नकली होते हैं। तो फिर वह बिखेरेंगे।
- 35:09क्या ऐसा? ही दुष्प्रचार करेगा।
- 35:13दीप गहन अर्थ का इन्हें पता नहीं। कौन बता पायेगा?
- 35:21जो मन के भीतर उतरा जो मुनि हो गया।
- 35:28जो मुनि हो गया। जो उन मुनि।
- 35:30भाव में हो गया। जो मन के पार हो।
- 35:34गया मन के पार कौन होगा जो मन की यात्रा करेगा मन के भीतर तुम उतरे
- 35:41नहीं ना मार का सूत्र आचार वाक उतरा उसे क्या पता?
- 35:48कि हर कर्म का प्रभाव होता है। हाँ, नींद से उतरा है, इसलिए
- 35:56पागल। हो के मरा हम बच्चे से घड़ी होती
- 36:00घड़ी खराब हो जाती। हम उसको खोल।
- 36:04के बैठ जाते हैं। इससे बहुत बड़े मैकेनिक हैं।
- 36:08घड़ी के भीतर क्या है? वो घूमता हुआ नजर।
- 36:11आता है चक्कर हमने? बाकी।
- 36:13ठीक कर लेंगे इसका। क्या है कभी वो कस दिया कभी?
- 36:16वो कस दिया आखिर में क्या होता है सभी परजे सजा के?
- 36:24तो घरवाले। आते हैं, देखते हैं क्या है।
- 36:30अरे, ठीक कर ले। चला तो मैं।
- 36:32फिर भी कर गया। तुमने भी कभी ऐसा किया?
- 36:38मन के साथ पंगा मत ले लेना यह। बड़ा जटिल यात्रा।
- 36:42है। इतना जटिल यंत्र।
- 36:48मेरे पास जीतने मनोरोगी आते हैं वैसे अगर देखा जाए।
- 36:52तो सारा। हिंदुस्तान मनोरोगी हो चुका।
- 36:54है। कुछ एक बचे हैं बरले।
- 36:57सुर्ले बाकी तो मनोरोगी। हो चूके हैं।
- 37:04इतने बरसों की। गलत अभयासिनी, गलत संस्कारों।
- 37:15ने तुमने इतना गलत व्यक्तित्व पैदा।
- 37:18कर लिया कि तुम। खंड खंड विखंड।
- 37:25हो के रह गए और। तुम ऐसा मत समझो, मैंने बाबा से
- 37:31कहा। बाबा?
- 37:32इनके लिए पागलखाना क्यों न बना देते बाबा कहते?
- 37:35हैं, अब पागलखाना अलग से। है बनाने की।
- 37:39अब तो पागल खाने वाले लोग भी मुक्त कर दिए जाएं तो बीच।
- 37:43में ही रल मिल। जाएंगे वो क्योंकि बाहर।
- 37:48के लोग भी पागल। हैं भीतर के भी पागल हैं और सच
- 37:51पूछो। तो भीतर के थोड़े।
- 37:52कम पागल हैं। वो हल्ला गुल्ला तो नहीं करते
- 37:57हैं। वह झंडा डंडा तो नहीं उठाते।
- 38:02तुम तो ऐसे ऐसे। काम भी करने।
- 38:03लग गए हो मन? के यंत्र से पंगा मत लेना।
- 38:11मन के यंत्र को तभी छेड़ना जब तुम मन के अंत में उतर।
- 38:17जाओ। अंत में।
- 38:20उतरते उतरते मन के चहुं तरफ़ देखोगे तुम।
- 38:26इतने गहरे जाओगे। मन में मन की हर चीज़।
- 38:31तुम्हें समझा जाएगा। फिर हुए तुम महान फिर हुए, तुम
- 38:43जानकार। फिर हुए तुम मुनि।
- 38:50मन के पांव। छक्के वो कल आता है।
- 38:57जहाँ इतना भी। शोर नहीं होता।
- 39:01जितना स्वास्थ। का शोर होता है वो आ रहे हैं
- 39:08साँसों ज़रा अहिस्ता से दिल के। धड़कने से।
- 39:15भी इबादत में कर। इसलिए नाम जप का मैं विरोध।
- 39:29करता हूँ क्योंकि। नाम गलत हैं तुम्हारे।
- 39:41बाबा? कहते हैं, जीता कित्ता?
- 39:43तेजपाल उसका पसारा, उसका नाम? बिन ना में नाहीं।
- 39:50कोठा सभी जगह पर विद्यमान है, वो कोई?
- 39:55ठोव वैसी नहीं जहाँ वो नहीं। तो क्या नाम?
- 39:58दोगे उसको? लेकिन धर्मों ने फिर भी जो।
- 40:03बनाया वो काम का था। तुम इसको प्रयोग में ला।
- 40:13सकते हो बैगुरु कर लो बैगुरु हो जाओ।
- 40:20खुद की तलाश में चले। और खुद ही को पा के देखा।
- 40:30और खुदा हो गए। खुद की।
- 40:33तलाश में चले और खुद को पा के देखा और खुदा हो गए।
- 40:43पहले तुम शरीर थे। वहाँ से चले।
- 40:47खुद ही को। पाया आत्मबोध को पाया।
- 40:49और उससे आगे निकले। कृष्ण के तल पे।
- 40:52पहुंचे याग्रवल के तल। पे पहुंचे।
- 40:55और तुम खुदा हो गए। ये है पूर्ण यात्रा।
- 41:00सरल। शब्दों में तुम्हे समझाने की
- 41:02चेष्टा? कर रहा।
- 41:03हूँ ऐसे ही। उतरने कोई बहुत।
- 41:05मुश्किल मार्ग नहीं है। लेकिन घड़ी को खोल मत।
- 41:09लेना मन करेगा ये खोल लो क्या? बात है, अपूर्ण जानता ही है,
- 41:16लेकिन अपूर्ण जानता। ही है तुम्हें?
- 41:18पता नहीं ये बड़ा कबाड़ा करेगा आज जितना।
- 41:25नुकसान ये। मूड लोग, धार्मिक लोग धरती को दे
- 41:30रहे। हैं।
- 41:31इतना कोई नहीं दे रहा। समयदार।
- 41:38लोग तो वो होते हैं जो किसी को दुख देते हैं, जियो।
- 41:44और जीने दो। और अगर कोई गलत।
- 41:47राह पे है तो उसे बताओ दो बस। यू अरे ऑन मिस्टेक यू अरे ऑन
- 41:54रॉंग। पाथ बताने का तुम्हारा कर्तव्य है
- 41:58तुम्हारे। पास आंखें हैं।
- 42:00और अगर नहीं बताओगे तो तुम स्वयं को दोषी पाओगे।
- 42:05एक तरस सा बहुत। बड़ा।
- 42:09बड़ी नहर सी गहरी नहर सी। नहर के किनारे बैठा रहता जब कोई
- 42:18व्यक्ति डूब जाता। गिर जाता या डूब जाता।
- 42:23या डूबने का प्रयास करता सुसाइड? करने का प्रयास करता और निकाल
- 42:26लेता। उसने कम से कम 20,000 लोग निकाले
- 42:34मृत्यु को। और किसी हृदय ने उसको पूछ लिया।
- 42:43किसी ने तुम यह क्यों करते हो? तो उसने जवाब दिया जो जवाब दिया
- 42:53तुम्हें चौंका देगा। उसने जवाब दिया कि मैं इसको
- 43:02निकाल। सकता था।
- 43:04अगर मैं इसको ना। निकालता तो रात।
- 43:08को मेरी आत्मा मुझे सोने न देती और रात को नहीं, सारी जिंदगी में
- 43:12बेचैन रहता कि मैं इसे बचा सकता था।
- 43:18मैंने बचाया। मेरी आत्मा।
- 43:24मुझे रात को सोने नहीं। देती।
- 43:28इसीलिए मैं बचाता हूँ। अपनी आत्मा की।
- 43:30शांति के लिए बजाता हूँ, उस व्यक्ति के जीवन के।
- 43:34लिए नहीं बचाता। ऐसी ही भावना।
- 43:39हो जब। तुम कोई पुण्य कर्म करो।
- 43:44तुम पुण्य कर्म करो के पुण्य कर्म करने से तुम्हारा।
- 43:47मन शीतल हो जाएगा। तुम पुण्य कर्म करते हो, इसलिए के
- 43:54पुण्य कर्म करने से। स्वर्ग में हमें 10 गुना मिलेगा।
- 43:59फिर तो तुमने। लार्ज खा लिया 10।
- 44:02गुना के लालच में जैसे एक कहावत। है देह।
- 44:07दुनिया। 70 आखिर 10।
- 44:11गुना तो इस धरती। पर मिल जाए व 70 गुना ऊपर के धरती
- 44:14पर मिल जाए। यह है लाल यह।
- 44:17पंडितों की खोज है। तुम से ज्यादा से ज्यादा।
- 44:23बिना डाका मारा खोज। लेना।
- 44:27छीन लेना कोई 10 गुना यहाँ नहीं मिलता कोई 70 गुना ऊपर नहीं मिलता
- 44:32ऊपर। कुछ नहीं।
- 44:37और आज। पूछा है किसने?
- 44:40मैं क्यों ना पूछूं? के।
- 44:44आखिर में गुरु आएगा मेरा हाथ। पकड़ के ले जाएगा।
- 44:48हम तो मूर्छित होंगे। हमें क्या पता लगेगा?
- 44:52तो मैंने उससे पूछा, भटिया, तुम? दीक्षित कैसे हो?
- 44:56खैर, मैंने। पढ़ा नहीं उसका जवाब।
- 44:58क्या है बस? इतने में ही मैं रिकॉर्डिंग करनी
- 45:01शुरू कर दी। तो मैं उस।
- 45:05भटिया से यही कहना चाहता हूँ, मैंने तो कभी ऐसा नहीं कहा।
- 45:12कि मैं। अंतिम वेला में आऊंगा।
- 45:15और तुम मुर्छित होगे, मैं तुम्हारी ऊँगली पकडूंगा और सच्च
- 45:17खंड में ले जाऊंगा। सच्च खंड नाम की चीज़ कोई है ही
- 45:20नहीं। क्यों पागल बनाये हो ये तो?
- 45:24लोगों का धंधा। है।
- 45:27ये धंधा है। मेरा धंधा ही नहीं।
- 45:31है मैं कभी किसी को सच्च। कंठ के सपने नहीं सखाता।
- 45:35सच्च कंठ के सपने बहुत। खाये जो इकट्ठा।
- 45:40करने का लोभ रखते हैं जिन्होंने अपनी गद्दियाँ।
- 45:43आगे आगे आगे आगे। करनी है।
- 45:46ऐसे मेरी कोई मंशा नहीं है। सच खंड वगैरह, पहली बात तो समझता
- 45:56हूँ। जैसे स्वर्ग नहीं होता।
- 45:58नरक नहीं। होता इट्स ए मेंटल।
- 45:59स्ट्रीट। तुम जब दुखी होते हो तो नरक में
- 46:03होते हो, जब सुखी होते हो तो स्वर्ग में होते हो ऐसे जब तुम
- 46:08परम सुख में होते हो, आनंद में होते हो जो।
- 46:11कृष्ण की स्टेज में आ गया वह है सत्य खंड सत्य खंड।
- 46:16कोई ऊपर नहीं है ये पंडितों की तरकीब।
- 46:19है तुम्हें? लूटने की या बाबाओं की या
- 46:23डेरेधारियों की? अरे, वही सच कह रहा होता ही नहीं
- 46:28मैं कहाँ से तुम्हारी ऊँगली पकड़ूंगा और ले के।
- 46:30जाऊंगा और मैं तुम्हारे। बाप को बोलाऊंगी।
- 46:32आप। इतनी मशक्कत में व्यर्थ की कर्तन।
- 46:39तुम करो, मुझे कोई लोक नहीं है। कोई पानी की इच्छा नहीं, कोई खोने
- 46:48का भय नहीं। मैं क्यों तुम्हें मूर्ख बनाऊं?
- 46:52और। क्यों पाप का बागी?
- 46:53बनूँ क्यों अपने भीतर? इस पाप का बीज बाऊं जो कद को जा
- 46:59के फली। भूत और वट वृक्ष बन जाए और मुझे
- 47:01इसका फल भोगना पड़े, ऐसा काम मैं करता हूँ।
- 47:11खैर कैसी? बिटिया का क्वेश्चन।
- 47:13मुझे पता नहीं वो क्या। जवाब देगी, लेकिन जवाब मैं पहले
- 47:16ही। दे रहा हूँ उसका?
- 47:26मनुष्य की तीव्र प्रवृत्तियाँ। का?
- 47:29शरीर के ऊपर सीधा सीधा इफेक्ट पड़ता है देखो जब।
- 47:32तुम क्रोध। में हो तो तुम कपड़े रह जाते हो।
- 47:35क्या हुआ? शरीर संबंधित है मन।
- 47:40के साथ। मन को क्रोध आया।
- 47:43तुम्हारी गालें भड़कने लग जाती हैं।
- 47:45तुम्हारे दांत कड़कने लग। जाते हैं तुम्हारी।
- 47:49मुठिया बिछी जाती हैं। और तुम लाल हो जाते हो,
- 47:53हीमोग्लोबिन चाहे चाह रही हो तुम्हारे।
- 47:58क्या हुआ? मन का प्रभाव शरीर पर सीधा पड़ता
- 48:05है। इसलिए ये बड़े।
- 48:09हरामी हो गए। ये कहते है पास जब तक गहरे मत
- 48:14उतरना। लेकिन अगर कोई इतना बड़ा।
- 48:17भक्त आ गया कोई? हो सकता है भाई।
- 48:19कोई पता नहीं कौन। किस कोने में बैठा?
- 48:23है। किस कुछे में बैठा?
- 48:27कभी किसी मूर्ख। के पास चला जाए।
- 48:29वो कोई इरादे इरादे करते रहो। और सामान गंवा बैठे, फिर ये
- 48:38जिम्मेदारी लेती है कि सामान वापस कर देंगे।
- 48:40उससे और यह है। कोई ना तो हंसने की बात।
- 48:51ना कोई चोट कर रहा है। यह है सत्य।
- 48:55मनोविज्ञान। और इसी मनोविज्ञान को लेकर बीके
- 49:01चढ़ाई कर रहा। है।
- 49:03ऐसा हो जाएगा वैसा हो जाएगा। मात्रकल्पना है और कुछ नहीं।
- 49:09कुछ नहीं होगा। इनके घरों में क्लेश।
- 49:11होते, मैंने खुद देखे। हैं।
- 49:15बेलन जलते हैं, चिमटे जलते हैं, लट्ठ उठा लिए जाते हैं, क्रैश
- 49:21होते हैं, लेकिन बाहर आते हैं रंग पोछ पोछ के सफेद।
- 49:24गाड़ी पाके चले जाते हैं। अब क्या कहा जाए?
- 49:35रोज़ नए धर्म पैदा। हो रहा है ये?
- 49:42गहरी बात है, बहुत गहरी बात है अगर।
- 49:48कुछ ले के आना। तो मानसिक।
- 49:52तर्प पे ना लगे। अपने गहरे में उतरना।
- 49:59तुम्हें प्रेम में से गुजरना होगा और।
- 50:01तुम्हारे हृदय। के तर से।
- 50:03तुम्हें प्रेम मिलना शुरू हो जायेगा।
- 50:05बुद्धि के तर से प्रेम नहीं मिलेगा।
- 50:07बुद्धि तो तर्कवादी है। वह तो काटती।
- 50:09है, सेंसर करती है। तुम्हें मिलेगा हृदय का खर्च।
- 50:15प्रेम वहाँ। से तुम प्रेम।
- 50:18को पाओगे और बढ़ाते चले जाओ। बढ़ाते चले जाओ जंक्चर।
- 50:22पांडा आएगा वहाँ। कुछ ना मांगो।
- 50:27कबीर कहते हैं मत। क्योंकि बिन माँगे?
- 50:33मिल जाता है आगे जाओगे यहाँ। जो मिलेगा तुम्हें मांगने।
- 50:39से। वह तो व्यर्थ है।
- 50:44वह तो 1 दिन छूट जाएगा। बिन मांगे मोती मिले।
- 50:49तुम्हें वो मिल जाएगा अगर मांगोगे।
- 50:51नहीं जिनकी कोई कीमत। नहीं।
- 50:54मांगें मिले ना भीख, मांगन से मरना भला।
- 50:59ये सतगुरु की शेख। मांगने से।
- 51:03अच्छा है कि तुम अपने आप को फनाह। कर दो।
- 51:07उस। कल्प पे मिट जाओ।
- 51:09वहाँ। तुम्हारे पास दो ऑप्शन।
- 51:11होंगे या तपवाओ या। गंवाओ तो तुम गंवा।
- 51:15देना पाना मत। मुझे ये मिल जाए, मुझे वो मिल
- 51:20जाए। ये मत करना तुम गंवा देना, मांगन
- 51:24से मरण। भला?
- 51:28तुम मर जाना, तुम अपनी हस्ती को फनाह कर देना, अपनी हस्ती को तुम
- 51:33बसम करना तो तुम्हें वो मिल जाएगा।
- 51:36जिसकी जुगों जुगों से। जन्मो, जन्मो से, तुम।
- 51:39प्यास लगे हैं तुम ढूंढ रहे हो जीस।
- 51:51इससे पहले से ग्रंथ सम्पूर्ण हो। सारे टेढ़े?
- 51:57मसलों का निवारण करना। मेरा दायित्व भी है पर मैं चाहता
- 52:04हूँ। कुछ ना बचे।
- 52:08जिसमें तुम दोगलेपंथी पुल जाओ। पश्चिम पे बात छोड़िए, पश्चिम के
- 52:15बात तो सिर्फ। सैकड़ों जगह तक ही।
- 52:17सीमित रहेंगी, लेकिन। वहाँ क्या होगा जहाँ हिंदुस्तान?
- 52:21जैसे मुल्क में। साइकोलॉजी से मनुष्य पार भी।
- 52:25जाया जाता है। जिसे स्पर्चुअलिस्म कहते हैं।
- 52:29और स्पर्चुअलिस्म का मतलब है रह से ये तुम्हारे जीतने भी।
- 52:37सर लोग हैं अचार हैं ये बात। करते हैं मनुष्य?
- 52:41तर्क तर्क तर्क। बुद्धि से आए।
- 52:49ज्यादा से ज्यादा तुम्हारे संत लोग बात।
- 52:52करेंगे वो तुम्हारे हृदय को छुए। ये दो तल तुम्हारे छुए जाते हैं।
- 53:00या तो कोई तुम्हारी बुद्धि को। छुएगा तट से या कोई तुम्हारे?
- 53:05हृदय को। छुएगा भावनात्मक कहानियों कह।
- 53:09के लेकिन तुम इनकी चालों में मत आना।
- 53:15ओके तुम्हारा गंतव्य इससे? आगे।
- 53:19है। दोनों के पार है।
- 53:21बुद्धि के भी पार है। और भावनाओं के भी।
- 53:26पार है बिलो थॉट्स। एंड बिलो इमोशन्स नीचे।
- 53:34उतरा हुआ है, दूर चले जाओ। क्रॉस कर जाओ इनको।
- 53:42लांघ जाओ इनको। न बुद्धि में।
- 53:45अटको न विचारों में अटको न तर्को में।
- 53:48अटको न तर्को को। इकट्ठा करो।
- 53:50न भावनाओं में अटको भावनाएँ थोड़ी ज्यादा गहरी हैं।
- 53:57ज़रा एक। बात समझे ना कोई व्यक्ति कितना ही
- 54:00कहे कि मुझे ये दुखड़ा मुझे ये दुखड़ा शब्दों से कहे।
- 54:09वर्ष भर चिल्लाता रहे। शब्दों का तुम्हारे।
- 54:13ऊपर कोई फैक्ट नहीं होगा। और।
- 54:14वो ही व्यक्ति अगर आके तुम्हारे सामने कुछ न बोले ध्यान से सुन
- 54:19मेरी बात को। मात्र।
- 54:22फूट फूट के रोना शुरू कर दे, सच में।
- 54:28तो तुम जो साल। भर से वर्ष भर से उसकी बात नहीं
- 54:31सुन रहे थे तुम फ़ोन उसको। पूछोगे, क्या बात है?
- 54:37विचार गहरे नहीं हैं, भाव नहीं ज्यादा गहरे हैं और इस।
- 54:41स्त्री के पास यही। है क्या कुछ लाख?
- 54:46अपने पुरुषत्व को जीत ले सारी दुनिया को इस स्त्री के आंसुओं पर
- 54:52नहीं जीत सकते। स्त्री के आंसुओं से हरा देता।
- 54:57है। दुनिया जीत।
- 55:03सकता है बल से। स्त्री के आंसुओं का बल नहीं जीत
- 55:12सकता। लेकिन हमने उससे पार जाना है।
- 55:21पूर्व ने यही खोज निराली की। जो पश्चिम में।
- 55:27हुआ नहीं सर। और आज।
- 55:30पश्चिम पूर्व को हुक्म दे रहा है। गलत तुमने।
- 55:38अपनी संस्कृति खो दी दूसरों की संस्कृति पूरी से तुम अपना नहीं
- 55:45सकते क्योंकि तुम्हारे पास साधन नहीं है।
- 55:49और तुम बीच में धोबी के कुत्ते की तरह उज गए।
- 55:54ना? खुदा ही मिला ना बसा रे सनम ना।
- 55:58इधर के रहे। ना उधर के रहे इसलिए मैं तुमसे
- 56:05नहीं कहूँगा। किरादे राधे ना?
- 56:09करते। मैं।
- 56:15तो एक बोर्ड लगा। रखा है।
- 56:17सवारी अपने सामान की। जिम्मेदार खुद होगी कोई।
- 56:27गुम हो जाए कि चोर हो जाए तो? हम कोई जिम्मेदारी नहीं, भाई
- 56:31देखो, सवारी। अपने सामान की जिम्मेदार खुद
- 56:34होगी। श्री?
- 56:38कृष्ण गोविंद हर मुराद। सखा हमार पितु मात्र स्वाम में
- 57:31सखा हमार। श्री कृष्ण।
- 57:53गोविंद हाँ रे मुरारी केनाथ नारायण।
- 58:16वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हेनाथ, नारायण, वासुदेव।
- 58:36पितुवात स्वामी सखा। हमारे पितुमात स्वामी सखा हमारे।
- 59:09देवा के कृष्ण गोविंद हरे मुरारी केनाथ नारायण।
- 59:23वासुदेव व।