Latest / Baba ji Vijay Vats / 16 Jul 25 - परमात्मा किसे माफ करता है और क्यों? अल्लाह की रहमत vs न्याय! क्या प्रकृति और परमात्मा एक है?
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- 0:00इम्तियाज़ आलम क्या तुम यह नहीं चाहते की अल्लाह तुम्हे क्षमा
- 0:14करता है और अल्लाह तो क्षमा शील दयालु है।
- 0:25बावजूद 16 अन्नौर का 24 22 इसको व्याख्यात करने का कष्ट करें।
- 0:41अगर परमात्मा क्षमाशील है, फिर गुनाह करना ही अच्छा होगा,
- 0:54क्योंकि वह क्षमा तो कर ही देगा। और इन शब्दों को पकड़ लिया जाए।
- 1:03इस धरती पर अपराध ही अपराधी ही होंगे।
- 1:12पत्रधारत होगा, बलात्कार होगा। बुरे से बुरे काम हो गए।
- 1:28बहुत से भक्तों के सवाल हैं, सभी धर्मों के अगर परमात्मक क्षमा कर
- 1:40देता है, फिर वह अन्याय कर। जिसके साथ दुष्कर्म हुआ उसके साथ
- 1:56न्याय कैसे? हुआ।
- 2:06इसलिए बुद्ध, बुद्ध तो प्याकर हो गए।
- 2:12यह एक ऐसा मुकाम है जहाँ आकर व्यक्ति की।
- 2:17सांसारिक तकलीफें खत्म हो जाती है, कोई दर्द नहीं रहता, कोई दुख
- 2:23नहीं रहता, अभाव नहीं रहता, पीड़ा नहीं रहता, रोग के सब समाप्त हो
- 2:29जाते। हैं।
- 2:38जन साधारण के लिए बुद्ध का मार्ग श्रेष्ठ है, लेकिन सत्य की दृष्टि
- 2:51से बुद्ध का मार्ग अधूरा है। एक पड़ाव है, उसे आगे चलना होगा।
- 3:00मैंने बहुत बार बताया है। मैंने सुना है एक कहानी एक फकीर
- 3:11ने मन्यादी करवा दी। संग संग खुद भी था मनाली करने
- 3:19वाला भी था ढोल पीटरा कल सुबह हो अल्लाह पाक परमात्मा गॉड वह गुरु।
- 3:37धरती पे आएँगे जिसने भी दर्शन करने हो कोई मन्नत मांगनी हो वह
- 3:51फलों स्थान पे पहुँच जाए, इतने बजे आएँगे और बना दी कराने वाला
- 3:56भी कोई। गहरा गहरा नहीं था, बहुत पहुंचा
- 4:00हुआ था, बड़ी मान्यता थी, बहुत लोग जाके उसके चरणों में नमन करते
- 4:08थे। और साथ में ये भी कहती है वह उसकी
- 4:23मन्नत मानेगा जीसको वह ठीक समझेगा, ये अल्फाज़ समझ में नहीं
- 4:32आई। उसकी बात मानेगा, जीसको वह ठीक
- 4:38समझेगा, जीसको गलत समझेगा उसकी मन्नत वो नहीं मानेगा, इनकार करती
- 4:48है, अगला दिन आ गया। नीयत स्थान पर परमात्मा भी आ गया
- 4:59और उससे पहले लंबी कतारें लगी थीं।
- 5:02कतारें तो रात को ही शुरू हो जाती हैं।
- 5:10बड़ी लंबी कतारें राजा का देश छोटे पड़ गया।
- 5:19सभी बच्चे, बूढ़े, स्त्रियां, पुरुष, जवान सभी आए।
- 5:25प्रत्येक व्यक्ति के भीतर कोई न कोई मन्नत तो होती और जिसके भीतर
- 5:31कोई मन्नत न रही वह तो परमात्मा हो गया।
- 5:44ऐन वक्त पर बिल्कुल परमात्मा ने शुरू किया, हाँ, बताओ सबसे आगे
- 5:54आगे सिफारिश करके लगाओ। उस शहर का सबसे बड़ा दिल ना से
- 6:06सोने का छत्र लिया खड़ा था, बड़ी श्रद्धा से जुगा दंडवत प्रणाम
- 6:14किया। परमात्मा के चरणों में सोने का
- 6:19मुकुट चढ़ा है। स्वर्ण पादिकाएं उनके पांव में
- 6:26डालीं सोने का मुकुट उनके सिर पर रखा है और हाथ में बड़ा सा फूल दे
- 6:36दिया, वो भी सोने का। इतना कुछ रहा कि उससे प्रणाम किया
- 6:47है। मन्नत मानी लेकिन परमात्मा के लभ
- 6:55बुद्ध बताए परमात्मा के लभ मौन रहे।
- 7:05हट गया। दूसरा व्यक्ति आया किसने चांदी
- 7:12चड़ाई किसने कुछ? चड़ाया किसने कुछ चड़ाया?
- 7:17जैसे जिसकी हिम्मत ही सब ने चढ़ाई।
- 7:22और मन्नत भी मांगे और यह शर्त थी कि जीसको वो जिसकी मन्नत को वो
- 7:33ठीक समझेगा, शक्ति समझेगा उसकी ही मन्नत मानेगा।
- 7:49काफी लाइन गुजर गई। दोपहर से बाद का वक्त आ गया।
- 7:53साँझ डरने को है एक सूफी फकीर हदनंगा बस एक जोगा पहना हुआ है।
- 8:08पुराना दुराना। बरसों से धोया नहीं, ऐसा दिखता है
- 8:15अस्त व्यस्त से बाल दाढ़ी बदी हुई, वह भी आया लाइन में लग गया,
- 8:30ये परमात्मा है कोई उसे हटा तो सकता है।
- 8:35अपने परमात्मा से कोई भी अर्थात कर सकता है।
- 8:44उसके हाथ खाली थे, कुछ साथ न लेके आये थे, कोई जेब भी न थी, बस एक
- 8:51पहन रखा था में कोई जेब न थी, बैठ गया।
- 9:02हाथ ऊपर उठाए हाथ, खालिद परमात्मा की तरफ हाथ उठाए दोनों हाथ बांध
- 9:14के उठाए या हल्ला मेरे पास तुम्हें देने के लिए कुछ भी
- 9:29तुम्हें। अपराधों के सिवा या अल्लाह मुझे
- 9:38क्षमा करता। है।
- 9:50परमात्मा बोले वथ में वार बोले हे फकीर तुम्हें क्षुमक तुम्हारे
- 10:05हृदय की अंतः सुवाणी में प्रायश्चित हैं गहरा।
- 10:12तुम्हें अपने पापों का खौफ है, इसलिए फकीर तुम्हें माफ़ किया
- 10:23जाता है। तुम जाओ और महफिल बर्खास्त होती
- 10:28है सो रही ढल चूका थी। सुबह से आए थे भगवान सांझ तक सारी
- 10:40भीड़ हट गई। लोग फुस फुसाने लगे।
- 10:46बुदबुदाने लगे इसको माफ़ कर दिया भगवान ने जिसने कुछ भी तो नहीं
- 10:51छुड़ाया। यार धन्ना सेठ कहने लगा, मैंने तो
- 10:56छत्र भी से मैंने तो चरण पादुकाएं भी चिढ़ाई बड़ी श्रद्धा से नमन
- 11:10किया। और मैंने मांगा भी तो क्या मांगा?
- 11:19मांगा भी तो सिर्फ उत्तराधिकारी मांगा।
- 11:24बेटा नहीं था, उसके पर मैंने कोई जवाब नहीं दिया और माफ़ भी किया
- 11:32तो कैसे किया? जिसके पास देने को कुछ नहीं था।
- 11:40सारी धरती पर परमात्मा के इस स्वभाव को देख राष्ट्रपति जैसे पद
- 11:52का निर्माण किया। अन्यथा राष्ट्रपति की कोई जरूरत
- 11:56नहीं है, लेकिन आज हम भूल गए हैं। कानून अपने हिसाब से सभी चीजों को
- 12:12बांचेगा फैक्स देखेगा, ट्रुथ देखेगा।
- 12:19गवाह जुटाएगा, प्रत्यक्ष प्रमाणीकरण होगा और सबसे बड़ा जज
- 12:28उसे फांसी की सजा सुना देगा। लेकिन वह राष्ट्रपति के आगे गुहार
- 12:37लगा सकता। है।
- 12:42तुमने कभी सोचा भी नहीं होगा सारे संसार में यह प्रणाली ईजाद की थी
- 12:51और तुम्हें पता भी नहीं चला कि ये इस्लाम की ज।
- 13:07इस्लाम की खोज बुद्ध से आगे जाती है।
- 13:20बुद्ध कहते नियम ही पर्याप्त है। बहुत से बुद्ध के शिष्य मुझे कहते
- 13:28थे हमें मुक्ति चाहिए, निर्वाण चाहिए।
- 13:32मैंने कहा तुम निर्वाण कभी मिल नहीं सके।
- 13:34भाई क्यों बाबा क्योंकि जिसकी गृहस्थ में तुम बंधे हुए हो?
- 13:44बुद्ध कहते हैं, नियम ही काफी लार्ज और सुफ्फिसिएंट ध्यान से
- 13:52सुनें। कानून बंधन है, कानून बांधता है,
- 14:02ऐसा नहीं। कानून खुद भी बना हुआ है जैसे
- 14:10संविधान की किताब में सब धाराएं अपराधी को बांधती हैं।
- 14:22कर्म करने से रोकती नहीं, ये बात थोड़ी बारीक है, समझ ले कभी सबसे
- 14:33बड़ा जज तुम्हे कहता है और तुम कतल मत करो कभी रोकता है?
- 14:40एक भूटिया का प्रश्न आया है, सूक्ष्म से परमात्मा रोकता क्यों
- 14:45नहीं? हम पाप करते हैं, मनुष्य को
- 14:51प्राप्त करने से रोकता क्यों नहीं?
- 14:53परमात्मा ओम इम्पोर्टेन्ट है वह रोक सकता है?
- 15:00फिर रोकता क्यों नहीं? क्या फांसी की सजा सुनाने वाला जज
- 15:16तुम्हें कतल करने से कभी रोके? क्या बलात्कार में हत्या करके
- 15:27पकड़ा गया अपराध ही? फांसी की सजा प्राप्त अपराधी उसको
- 15:35अपनी कुर्सी पे बैठा हुआ न्यायाधीश रोकता है।
- 15:41परमात्मा कतल करने से रोकता है बिलकुल वैसे ही जैसे न्यायाधीश
- 15:47प्राप्त करने से रोकता है। न्यायाधीश बलात्कार करने से नहीं
- 15:55रोकता, बलात्कार की सजा देता है। परमात्मा बलात्कार करने से रोकता
- 16:06नहीं। बलात्कार की सजा कितना है?
- 16:14परमात्मा को पैरलल कर दो। न्यायाधीश इस मामले में।
- 16:26और इससे आगे न्यायाधीश माफ़ नहीं कर सकते।
- 16:33न्यायाधीश ने फाँसी की सजा सुना दी, सभी न्यायाधीशों ने सुना दी
- 16:40इकट्ठे हो? माफ़ नहीं की, तो फिर माफ़ कौन कर
- 16:48सकता है? राष्ट्रपति माफ़ कर सकता है उसे
- 16:55क्या दिल देने पड़े मुझे रह। माफ़ क्यों रह माफ़ रह?
- 17:08ऐसा हुआ ज्ञानी जल सिंहपुर किसी व्यक्ति ने फांसी की सजा रोकने के
- 17:13लिए प्रयाग लगाई। फरियाद वापस हो गई, आज मैं हड़प
- 17:22था। उसने कहा राष्ट्रपति महोदय।
- 17:28मैंने रहम की दरख्वास्त दी थी। आपने स्वीकार नहीं की स्वीकार
- 17:39क्यों नहीं की? क्या मैं पूछ सकता हूँ अब फांसी
- 17:42की सजा प्राप्त व्यक्ति को और तुम दंड भी क्या दे सकते हो?
- 17:47इससे ज्यादा तो सजा ज्ञानी जायद सिंह दे नहीं सकते थे तो ज्ञानी
- 17:53जायद सिंह ने कहा, वैसे तो मैं तुम्हारे प्रश्न का जवाब देने को
- 17:59बाध्य नहीं, लेकिन मुझे तुम पर। वह पर्वत दिखा और मेरे में उतरन
- 18:12वह आदमी खौफ जैसा नहीं था वह वह समझता था के मर ही जाऊंगा बस ठीक
- 18:18स्वीकार कर लिया था उसने मृत्यु को।
- 18:24उसने फिर दूसरी बार जांच करा आपने कहा मुझे रहम नहीं आया, मैं पूछ
- 18:30सकता हूँ कि आपको रहम क्यों नहीं आया?
- 18:37जीस किसी को आपने माफ़ किया उस पे रहम क्यों आ गया?
- 18:42मुझपे क्यों नहीं आया? ज्ञानी जैल सिंह एक बार जरूर खेले
- 18:50होंगे। ज्ञानी जैल सिंह कहने लगे, मुझे
- 18:56रहम नहीं आया क्योंकि मुझे रहम आया, नहीं मैं क्या कहूं?
- 19:11परमात्मा से तुम जवाब सवाल नहीं कर सकते बुद्ध से आगे भी एक मुकाम
- 19:18है राष्ट्रपति का अगर वो माफ़ कर दे।
- 19:25तो अदालत उस सजा को बहाल नहीं कर सकती।
- 19:32क्या तुम यह नहीं चाहते कि परमात्मा तुम्हें क्षमा कर दे?
- 19:39कौन नहीं चाहता? परमात्मा हमें क्षमा करता?
- 19:45सुराल नूर 2422 में लिखा है और अल्लाह तो क्षमाशील है, दयालु है,
- 19:59उसका स्वभाव पता है। अब समझना यही फर्क आ जायेगा
- 20:04तुम्हे यज्ञ विल्क में, कृष्ण में, बुद्ध में, भरोषों में
- 20:10तुम्हें समझा जायेगा बुद्ध कहते हैं, नियमों के हिसाब से तुम चलो
- 20:20अब। लेकिन बुध इतना नहीं जानते कि
- 20:28तुम्हारी औकात दी क्या है? इस व्रत के सृजन में तुम अंश
- 20:33मात्र भी नहीं नेगलिजबल तुम अपने दीपक का स्वयं कैसे बन पाओगे?
- 20:43बस बुद्ध इस बात से चूक गए इसलिए बुद्ध को इस शब्द के ऊपर आकर मैं
- 20:50मूर्ख कहता हूँ। जिसने सम्पूर्णता को प्रार्थना
- 20:56किया हो वह मूड ही तो होता है। बुद्ध कहते हैं अपने दीपू खुशबू
- 21:05में तुम्हारी औकात ही क्या है तुम इस बेतरतीब?
- 21:18विराट में अपनी दिशा खुद खोज लो, तुम में इतनी समझ है नए नए आए हो
- 21:37या क्या तुम में इतनी समझ है। के अपना मार्ग तुम खुद ही तय कर
- 21:46लो अपने दीपक तुम स्वयं ही बन जाओ और बुद्ध ने अपना दीपक स्वयं बने
- 21:58कितने गुरुओं के पास जाना? कितना भटके किस किस के पास पहुँच
- 22:08गए पहुँच गए अपने पास पहुँच गए अपने पास तो कोई भी पहुँच सकता
- 22:17है। अपने घर का दरवाजा सभी को पता
- 22:23होता है। जानें जानें तुमने वो शराब पी ली
- 22:25है क्या तुम्हारी बुद्धि मूर्छित हो गई है?
- 22:31भूल गए हो तुम अपने घर पे जाना। कोई इतना ज्यादा मुश्किल मुश्किल
- 22:41तो वो। है।
- 22:44जो तुम अपने घर से आगे जाके उस विराट को देख पाओ जीस विराट ने ये
- 22:54नियम बनाए। और देखो, मुक्ति की इच्छा रखने
- 23:01वाले तुम सनाति ने बड़ा शानदार शब्द कहा है सनातन मुक्ति की बात
- 23:13कहते। बुद्ध ने शब्दी बुद्ध निर्वाण की
- 23:23बात कहते है निर्वाण निवृत्ति को कहते है निवृत्त हो गए, दुख से
- 23:32निवृत्त हो गए। पीड़ा से हो गए पूजा से हो गए,
- 23:46लेकिन मुक्त कहाँ हुए? ज़रा गौर से देखोगे तो अभी भी तुम
- 23:53नियमों में आवध हो, जो भी प्रकृति की शरण तक रहेगा।
- 24:02क्योंकि प्रकृति नियमों में अबध है, स्वयं ही जो स्वयं ही नियमों
- 24:09में अबध है, वो तुम्हे कैसे मुक्त कर देगी?
- 24:15किसी भिखारी के पास कोई चीज़ मांगने जाओगे।
- 24:20किसी भिखारी से सोने का छत्र मांगोगे कैसे देगा वो जब उसके पास
- 24:27है ही नहीं, उसको तो पेट भरने के लाले पड़े हैं, तुम उससे सोने का
- 24:34छत्र मांगोगे, क्या दे पायेगा? तो बुद्ध कहते हैं कि तुम बस
- 24:44प्रकृति से मांग लो, प्रकृति नियमों से परे कुछ है ही।
- 24:52ये है ही नहीं, ये अकेले बुद्ध नहीं।
- 24:56चार बात भी कहते हैं कोई अक्शैन रिएक्शन का सिद्धांत होता ही डाका
- 25:05मारो बस ये तो शो कर है। उन्होंने कहा कि कर्ज ले लो और घी
- 25:10पी लो, उन्होंने ये नहीं कहा कि कत्लोगार्थ करो, बलात्कार करो।
- 25:16लेकिन एक मायने में वो यही करने को उत्साहित है।
- 25:22जो बुनियादी एक नियम को ठुकरा देगा वो ये कहेगा कर्म, सिद्धांत
- 25:26वगैरह कुछ नहीं होता, फिर कर्म सिद्धांत नहीं होता तो ये जो।
- 25:32कतल कर रहे हैं, बलात्कार कर रहे हैं, ये चार आपके ही क्योंकि लेना
- 25:38देना तो यहाँ कुछ होता नहीं, परमात्मा यहाँ होता नहीं, यहाँ हम
- 25:45पकड़े नहीं जाएंगे, छुप जाएंगे किसी देश विदेश में चले जाएंगे।
- 25:51बैंकरों का पैसा लेकर भाग जाएंगे या किसी बड़े राजनेता से दोस्ती
- 25:57गाट लेंगे या किसी बड़े पार्टी के अंदर जॉइन कर लेंगे?
- 26:03सो तरीके हैं, कौन पकड़ेगा? ये बात तुम नहीं जानते।
- 26:10ये चारवाक से चलती है। चारवाक ओरिजिनेटेड पॉइंट मूल तत्व
- 26:21है। चारवाक रूट यहाँ से चलती है जो कह
- 26:27देते है, होता नहीं। नहीं होता, कर्म सिद्धांत नहीं
- 26:35होता परमात्मा चरवात निक, मार्कस निक मर गया है परमात्मा, नित्य
- 26:43निक ये नहीं होता। इन्होंने बहुत बिगाड़ा है धरती का
- 26:53अंधे लोगों ने जो बिगाड़ा उतना कोई नहीं पकड़ पाया क्योंकि अंधों
- 27:02को दिखता नहीं, रंग नहीं नजर आता। पर वो जितना विनाश कर सकते हैं,
- 27:14दूसरा कोई विनाश नहीं कर सकता। वो अंधा आँखों का हो या अंधा धीमा
- 27:20का हो या बुद्धि का हो, विवेक का हो।
- 27:24अंधों ने जितना नुकसान किया, उतना किसी ने।
- 27:31वह क्षमाशील है, क्या तुम नहीं चाहते के परमात्मा तुम्हे क्षमा
- 27:39कर दे कौन नहीं चाहता? सभी चाहते हैं।
- 27:47स्वाब तो हम करें, ऋण ले लें, वापस ना करें।
- 27:52कौन नहीं चाहता? लेकिन नियम नियम हमें करने नहीं
- 28:00देता है। कौन नहीं चाहता मैं कत लोग आरोप
- 28:04करूँ, बलात्कार करूँ। और पकड़ा न जाऊं, भाग जाऊं, दंड न
- 28:11मिले, दंड भोगना कौन चाहता है? सुबह से शाम तक मेरे पास यहाँ
- 28:16कमेंट्स करते है। मैसेजस आते है बाबा इसके लिए दुआ
- 28:21कर दो। बाबा इसके लिए दुआ कर दो।
- 28:24मैं अच्छी तरह से संमेता। ये कर्मोई का तो विराम है।
- 28:33हॉस्पिटल में त्राहि त्राहि हो रही है।
- 28:35चीत कर्मचारी और मज़े से बोल रहे हैं चारबाग ऋण कृतमा कृतम।
- 28:45युद्धा जी वे सुखी जीवित वसुंबुता से देहस्य हुनर आगमनम कुतह बड़ा
- 28:51सुंदर तर्क दिया है, लेकिन सत्य के आगे सभी तर्क विहार हो जाते
- 28:56हैं जिससे तुम मुक्ति मांगने चले हो।
- 29:02वह प्रकृति है बुद्ध के हिसाब से। और प्रकृति तो स्वयं ही आवध है और
- 29:11जो स्वयं ही आवध है, स्वयं ही बेड़ियों में जकड़ा हुआ है, वो
- 29:15तुम्हें मुक्त कैसे करेगा? मुख्य तो तुम्हें वही करेगा।
- 29:18तुम बेड़ियों में जकड़े हो, मुक्त वो ही करेगा जिसके हाथ पांव खुले
- 29:24हों। जीस प्रकृति से तुम मुक्ति की
- 29:29कामना करते हो वह स्वयं ही अपने नींवों में आवध है अन्यथा लव
- 29:37ग्रैविटेशन कब का तोड़ क्या होती है वह प्रकृति जो स्वयं ही?
- 29:44वध है, गुलाम है, वह तुम्हें कैसे गुलामी से मुक्त कर देगी?
- 29:50किस्से मांग रहे हो तुम मुक्ति जो खुद ही गुलाम है एक मजेदार बात
- 29:59बताओ मुझे अक्सर लोग कहते हैं बाबा।
- 30:03गाँधी जी ने भगत सिंह के माफी क्यों नहीं कर रहे?
- 30:18मैं कहा पगला दे हो, क्या गाँधी जी स्वयं हैं, गुलाम थे ये भूल
- 30:22जाते हो। गांधीजी मुक्त थे।
- 30:29क्या गांधीजी प्रभावशाली थे? लेकिन उनका लक्ष्य सारे देश को
- 30:37आजाद कराना था। उन्होंने कोशिश की लेकिन ध्यान
- 30:43रखना वो मालिक नहीं थे, वो गलत थे।
- 30:47जब खुद ही गुलाम हो व्यक्ति तो दूसरे को आज़ादी की याचना कर सकता
- 30:54है। याचना मन की वो कम तो नहीं दे
- 30:56सकता तो चुप हो जाते हैं, समझ जाते हैं।
- 31:07उसका हृदय होया तू मेरे देश का एक नौजवान बच्चा कोई गुनाह नहीं
- 31:16किया। तुमने इतने बड़े कांड कर दिए
- 31:20जलियाँ वाला वक्त कर दिया खून किसका नहीं खोलता जवान था, उम्र
- 31:27ही ऐसी थी घरा दिया होगा बाप कर दी होगी हत्या सांड के लेकिन
- 31:35तुमने कौन सा काम हत्याएं? लेकिन ये प्रश्न पूछना कि गाँधी
- 31:44जी ने भगत सिंह की फांसी क्यों नहीं रोकी?
- 31:51क्योंकि वो खुद ही गुलाम है गुलाम गुलाम की?
- 32:01जीवन की जांच न तो कर सकते हैं, हुकम नहीं कर सकते और हाकिम
- 32:08अंग्रेज थे, गाँधी थे, वो तो प्रभावशाली थे, बस उनका प्रभाव
- 32:14जहाँ चला वो चला लेते चलाया भी उन्होंने।
- 32:19लेकिन नहीं चले उन्हें से खुद ही 1942 में 9 अगस्त को जब उन्होंने
- 32:27अंग्रेजों भारत छोड़ो क्विट इंडिया उनको पकड़ के ताड़ दिया
- 32:35गया सभी कांग्रेसेस को। स्वतंत्रता सेनानी कुछ लोग चरणों
- 32:45में जाके बैठ के बस उन्हें नहीं यही आता था और कुछ आता भी नहीं
- 32:54था। आज भी उनके चिड़े परिंदे यहाँ पर
- 32:56हैं। वे उसी के वंशज हैं, वही डीएनए और
- 33:06गाँधी के भी वंशज हैं। अच्छा डीएनए कभी मरते हैं।
- 33:21तुम चाहते हो आजादी और जाते हो प्रकृति की शरण में प्रकृति से
- 33:32मुक्ति मांगने वालों थोड़ी सी इस सच्चाई को देख लो।
- 33:38प्रकृति तुम्हें मुक्त कर पाएगी ज़रा प्रकृति से प्रार्थना करके
- 33:43देखो समझा जाएगा प्रकृति से कहो है माँ प्रकृति हमें ग्रैविटेशन
- 33:51फोर्स से जाति। और कितनी कहेंगी?
- 34:02मैं तो खुद ही बुलाऊंगा तो मैं क्या आज कल करता हूँ?
- 34:10ये ग्रैविटेशन फोर्स मैंने नहीं बनाया है।
- 34:14जिसने बनाया उसको मैं भी तो नहीं जानती।
- 34:16प्रकृति नहीं जानती, परमात्मा को ध्यान रखना, ये दूर की बात है,
- 34:28इसे कोई वरला शंख पाएगा। प्रकृति खुद ही नहीं जानती उसको
- 34:36किसने बनाया? तुम फिर याद करो की हे प्रकृति
- 34:43माँ हमें ग्रैविटेशन फोर्सेज अजादी दिला दो हम उड़ सके आसमान
- 34:47में प्रकृति बोल नहीं सकती तुम्हें कोई जवाब नहीं देती लेकिन
- 34:53जानती। अगर बोलना जानती होती तो कहती
- 34:57नहीं पुत्र मुझे तो खुद ही नहीं पता।
- 35:00मैं तो खुद ही बंधी हुई हूँ, जो खुद ही बंदा हो, दूसरे को मुक्त
- 35:06कैसे कर पाएगा? और बुद्ध प्रकृति पर रख सकती है।
- 35:15अच्छा है। सभी को यहाँ पर रुकना पड़ता है,
- 35:19लेकिन इस आश्रय फसल को मुकाम मत बना लेना, पक्का पक्के घर मत डाल
- 35:29लेना, यहाँ कोई दुख नहीं है। यहाँ सुख है कोई कष्ट नहीं, कोई
- 35:37पीड़ा नहीं, कोई तनाव नहीं, कोई चिंता नहीं, चिंता नहीं, कुछ नहीं
- 35:43यहाँ खुशहाल है सब लेकिन फिर भी तुम देख लेना ईश्वर करे तुम इस
- 35:52स्थान पे पहुँच जाओ। हम इंतजार करेंगे।
- 36:11हम इंतजार करेंगे कयामत तक खुदा करें कि कयामत हो और तू।
- 36:30आए खुदा करे की कयामत हो और तू आए ईश्वर करे की क्या मत हो, ईश्वर
- 36:45करे की तुम बुद्ध के उस स्थान पर पहुँच जाओ।
- 36:50बड़ा भारी आनंद है, पहले भी बहुत बार पता है, लेकिन फिर भी थोड़ी
- 36:59सी थोड़ी सी ब्रह की आग तुम्हे जलाएगी वह ब्रह की आग परमात्मा की
- 37:07आग। तो मैं भी मैं कई बार हड्डी की
- 37:11बात बताया करता हूँ। असहाय वेदना होती थी।
- 37:16ऐसे ही असहाय वेदना मेरा को भी होता है।
- 37:22मेरा उस मुकाम पे पहुँच गई जहाँ आनंद है, इसीलिए तो नाच रही है।
- 37:28चैतन्य नाच रहे हैं, लेकिन बिरहा भी है ये बिरहा किस चीज़ का है
- 37:37बता पाओगे मुझे बिरहा है प्रकृति के आखिरी मुकाम तक तुम पहुँच सके।
- 37:48और बिरहा के आखिरी मुकाम पे जाकर सब दुख मिट जाते हैं।
- 37:55कोई कष्ट नहीं रहता, कोई पीड़ा नहीं, कोई आग नहीं, कुछ नहीं
- 37:59रहता, तुम बहुत सुखी हो जाते हो, ध्यान रखना।
- 38:06फिर भी कोई कमी रहे तो आपकी तकलीफ को दूर करेंगे।
- 38:15कृष्ण और कृष्ण के शब्द बुद्ध से बिल्कुल अलग होंगे, इसलिए बुद्ध
- 38:21की बातों को ऋषियों ने। गलत कह और भगा दिया उसे निकलो
- 38:26यहाँ से और बुद्ध हुई भाग गए, ठीक भाग गए।
- 38:30उन्होंने देख लिया कि यहाँ पहले से ज्यादा पहुंचे हुए लोग बैठे
- 38:36हैं, यहाँ से खिसकना ही अच्छा होगा।
- 38:40तो हिंदुस्तान में हिंदुस्तान से जन्मे हुए बुद्ध हिंदुस्तान से
- 38:46भागना पड़ेगा। कारण ये नहीं था कि यहाँ के लोगों
- 38:50ने डरा दिया। लोगों ने नहीं डराया यहाँ के
- 38:54प्रबुद्ध प्रबुद्धता से वो भाग गए।
- 38:57यहाँ तो पहले ही भाग बैठे हैं, ऋषि बैठे हैं।
- 39:022500 साल पहले की बात ये वो दौर था।
- 39:08इस दौर में समस्त विश्व ने अपने अपने विश्व के कोनों में महान
- 39:14विद्वान, चरित्रवान, महान, गहरे तलों पे जाने वाले व्यक्ति पैदा
- 39:20किए। आप ज़रा उस इतिहास को करो।
- 39:23जीस काल में महावीर रोट हुए 36 वर्ष का फर्क था सर उस काल को
- 39:31खंगालना। ये काल खंगालना बड़ा अवश्य है
- 39:34अचानक क्या हुआ? मैं कई बार हैरान हो जाती हूँ ये
- 39:38अचानक तब क्या हुआ? ईसा से 600 साल पहले ये क्या हुआ
- 39:47है सर? सारी दुनिया में यह कसम एकदम से
- 39:58क्या ऊपरी तलों पे क्या गहरे तलों पे।
- 40:05आसमान को छूने लगे और यहाँ पाताल को छूने लगे ऐसा क्या?
- 40:10तो उससे भी ये तो परमात्मा ही जाने क्या था इतने बड़े महान
- 40:21पुरुष? अद्वितीय लोगों ने जन्म लिया इस
- 40:24कार्य में जहाँ देख लो आप सोक्रेटिस देख लो अरस्तू देख लो
- 40:31प्लेटों देख लो उधर देख लो। बिल्कुल बराबर के लोग लाउजी देख
- 40:45लो चंगससि देखो कोई ऐसा स्थान कोना नहीं था धरती का जीस पर
- 40:54बुलंदियों को ना छुआ हो। वो बुलंदियां चाहे बौद्धिक थीं।
- 41:01चाहे आध्यात्मिक थीं ये दो तल बुद्धि के तल पर बुद्ध उतर जाते
- 41:09हैं नीचे जो कहते हैं अपने दीपक के संबंध और कृष्ण के शब्द बुद्ध
- 41:18से बिल्कुल विपरीत। जाट के शब्द बुद्ध से मेल नहीं
- 41:26करते। कृष्ण से मेल खाते कृष्ण नहीं
- 41:32कहेंगे, अपने दीपक से कृष्ण कहेंगे तुम कुछ नहीं कर सकोगे
- 41:36तुम्हारी औकात क्या? तुम ज़रा भी तो नहीं हो, क्या
- 41:44पागलपन की बात करते हो? कृष्ण तो यही है।
- 41:49अगर कृष्ण के वक्त में बुद्ध हो गए होते तो कृष्ण ने उनकी काठ
- 41:55शर्ट कर दिए होते। क्योंकि बुध ने कहना था दीपो भवः
- 42:03और बुध ने मा कृष्ण ने कहना था सर्वधर्माणपत्रजमा में कमर्शर्म
- 42:08मेरी शरण में आज तू अपना दीपक बन कैसे सकेगा तेरे पास अपना है तो
- 42:13कुछ है ही नहीं। ना दिया है, ना ईंधन है, ना वाती
- 42:20है, ना आग जलाने को माचिस है, तेरे पास कुछ भी तो नहीं है, कहाँ
- 42:25से लेके आएगा तू अब दीपो भव। यह वास्तव में देखा जाए।
- 42:35तो एक मोड संदेश है, मुझे तुम मुझे पागल कह सकते हो, कृष्ण को
- 42:48भी पागल कर सकते हो, यज्ञ बलको को भी पागल कर सकते हो कह सकते हो।
- 42:55उपनिषद भी बेकार कह सकते हो और कहे ही बुद्ध ने तो कह दिया वैध
- 43:00उपनिषद सब बेकार है। अगर ना कहते तो फिर उस अज्ञात
- 43:06तत्व को मानना पड़ता जिसने सृजना की जिसने सृष्टि बनाई।
- 43:13लेकिन सिर्फ अल्फाज़ के सिद्ध करने पे सत्य सिद्ध नहीं हुआ
- 43:20करता। नियमों से ऊपर एक चीज़ है जो
- 43:32तुम्हारे किए हुए गुनाहों को माफ़ कर देती है वो है परमात्मा।
- 43:36फिर सवाल उठेगा। फिर सभी को कह दूंगा साफ असर में
- 43:42पूछेगा घर खुदा लाखों गुनाह किए तेरी रहमत के सुर में ये भी एक
- 43:52पागल। क्योंकि शायर की शायरी से निकले
- 43:57हुए कलम से लिखे हुए अलफाज़ ये समझदार व्यक्ति की बात नहीं है।
- 44:04ये शेयर किसी समझदार व्यक्ति ने नहीं लिखा।
- 44:09अगर एक अति पे बुद्ध चले। गए तो दूसरे अति पे यह व्यक्ति
- 44:13चला गया। यह कहता है कि मैंने लाखों।
- 44:20गुनाह किए लेकिन तेरे ज़ोर पे ही है क्यों?
- 44:23क्योंकि तू क्षमाशील है तो माफ़ कर देगा।
- 44:27अब थोड़ा सा हम दूसरे सूरा पे आ जाए क्या तुम यह नहीं चाहते कि
- 44:34अल्लाह तुम्हे क्षमा कर दे और अल्लाह तो क्षमा शील दयालु है ठीक
- 44:39है, अब हम अगले सूरा पर चलते हैं। वह 2422 था, यह 2082 है।
- 44:48सोरहतरह अब तुम्हारे दिमाग में सारी बात साफ हो जाएगी।
- 44:56एक शब्द को पढ़कर किसी किताब को इंकार या स्वीकार नहीं करना
- 45:03चाहिए। पूरी किताब को।
- 45:09ये शब्द देखो क्या लिखे हैं निस्संदेह मैं क्षमाशील हूँ, आपने
- 45:18देखा कभी कभी मैं बोलता हूँ अचानक से टोन बदल जाते हैं।
- 45:25मैं बोलता बोलता बोलता। बोलता मैं उस स्तर पे बोलना शुरू
- 45:29कर देता हूँ, जीस स्तर से परमात्मा बोलता है बस।
- 45:35उसी स्तर से ये। कुरान की आयत बोली है कुरान भी
- 45:39ऐसी है किसी किसी तल पे। मैं ऐसा बोलता हूँ जैसे मैं बोल
- 45:45रहा हूँ किसी किसी तल पे मैं ऐसा बोलता हूँ जैसे ब्रह्मात्मा बोल
- 45:50रहा है, बिल्कुल यही अंदाज है कुरान का।
- 45:55कुरान के 20। 82 इसमें।
- 45:59लिखा हुआ है। निस्संदेह मैं बहुत।
- 46:04क्षमाशील हूँ इसमें। कोई संदेश मैं माफ़ कर सकता हूँ।
- 46:15मेरा स्वभाव माफ़ करना ही है। राष्ट्रपति का स्वभाव माफ़ करना।
- 46:21ही होता है। ध्यान से सोचना, कभी दंड देना तो
- 46:30न्यायिक व्यवस्था का काम जजेस का काम है, दंड देना।
- 46:35राष्ट्रपति ने कभी दंड दिया है, राष्ट्रपति का मतलब ही क्षमाशील
- 46:41होना है। क्षमा करना उसका।
- 46:44अधिकार भी है, उसका स्वभाव भी है। निस्संदेह मैं क्षमाशील हूँ, उस
- 46:52पर किस पर उस पर जो तौबा करें ईमान लाये?
- 47:05और अच्छे कर्म करें। अल्लाह कहते हैं परमात्मा कहते
- 47:12हैं मैं क्षमाशील लेकिन। किस पर उस?
- 47:18पर जो तौबा करे ईमान लाये। पर अच्छे कर्म कर उस पर क्षमा
- 47:30मेरा सवाल है, समझा के उसको क्षमा करता हूँ मुझसे कृष्ण ने प्रश्न
- 47:42पूछा है हाँ। पूछो आज पूछ लो जो पूछो बिलकुल ये
- 47:51शब्द उसके लिए है जो गलतफहमी में कोई पाप कर रहा है।
- 47:56ऐसा भी तो होता है। बहुत बार तुमने पाप।
- 48:01किया होगा गलती से हो गया। अब देखिए एक प्रश्न जो वर्षों से
- 48:11पड़ा था अनछुआ अनछुआ वर्षों से पड़ा था, क्योंकि जब वक्त आता है
- 48:20तो मैं उसका जवाब देता हूँ। तभी आपको समझ में आएगा, बिलकुल।
- 48:26वक्त आने पर ऐन। मोका ए वारदात पे?
- 48:29मैं तुम्हें उसका जवाब दूंगा। तुम रसोई पकाते हो, कितनी
- 48:36कीड़ियाँ मर जाती हैं क्योंकि आटा होता है।
- 48:41वहाँ पर। चिड़िया भी आएंगी मुखिया?
- 48:43भी आएंगी जानवर और भी आएँगे मर जाएंगे।
- 48:47और मेरे पास रोज़ प्रश्न आते हैं बाबा।
- 48:50फिर अब इसका क्या करें, इसका जवाब इसने किया है सुराहताह में।
- 49:012082 में। निस्संदेह मैं।
- 49:07क्षमाशील हूँ साफ बिलकुल साफ परमात्मा बोल रही हूँ उस पर
- 49:18क्षमाशील हूँ। जो तौबा करे।
- 49:26ईमान लाये और अच्छे कर्म करे तुमने देखा।
- 49:35जजमेंट ने किसी को भी शल। की सजा कर दी।
- 49:40और कई बार तुम उसको पहले। रिहा कर देते हो और कारण क्या
- 49:43देते हो? इसके अच्छे व्यवहार के कारण इसकी
- 49:47बाकी की सजा मात की जाती है। यही शब्द इसमें अगर तुम किसी कर्म
- 49:55का भ्रष्ट कर लो। वो गलती से हो गया और गलती से
- 50:02बहुत काम हो जाते हैं। हमसे बात गलती से कीड़े मकोड़े
- 50:12मच्छर मर जाते हैं। गलती से मर जाते हैं और ध्यान रखो
- 50:19या कोई जैन मुनियों जैन मुनियों का नहीं है ग्रंथ।
- 50:25तुम चल रहे हो तुम्हारे। पांव के नीचे किस किस को बचाओगे
- 50:29तुम तुम्हारी दृष्टि और वृद्ध हो चले?
- 50:36तुम्हारी दृष्टि ठीक से काम नहीं। करती तुम्हारे पांव के नीचे कौन
- 50:43मुझसे कृष्ण ने पूछ लिया कि फिर ये जो हम बस के ऊपर चढ़ के जाते?
- 50:52और उस बस के पहियों के नीचे भजन तो बहुत होता है, उसमें टनों टनों
- 50:56में भजन होता है। उसके नीचे जो लोग मर जाते हैं वह
- 51:00जो बाप है उन सभी सवारियों के अंदर बराबर बराबर बढ़ जाता है।
- 51:05सवाल तो बड़ा सुन्दर है लेकिन खोपड़ी का सवाल है बात तो ठीक है।
- 51:11पैदल चलेंगे तो पाम के नीचे जीव जंतु छोटे मोटे आएँगे।
- 51:18अब मैं बोल रहा हूँ। तो जीवा पर्वत का काम।
- 51:24करती है बहुत से सूक्ष्म कटानु बहुत।
- 51:29बोलने के कारण। लाखों करोड़ों जी मर जाते हैं।
- 51:34और तुम छोड़ो अगर तुम्हारी। इम्युनिटी तेज है तो तुम्हारी
- 51:40इम्युनिटी भीतर से महाभारत चल रहा है।
- 51:43कितने जंतु मर रहे हैं? कितने बाहर के बैक्टीरिया मर रहे
- 51:47हैं, भीतर प्रवेश नहीं करने देते? हमारे व्हाइट ब्रेड का शर्ट्स
- 51:53युद्ध करते हैं, उनके साथ तो कौन जिम्मेदार है जी, इस सुरहतहा में
- 52:06जवाब मिल जाएगा आपको सब चीजों में।
- 52:09रसोई में मरते। हैं।
- 52:12आप पैदल चलते हो, पांव के नीचे मर जाते हैं, गलती से मर जाते हैं।
- 52:21आपके जीवन में सभी के जीवन में कुछ काम ऐसे हुए होंगे जो।
- 52:27गलती से हो गए। ओके?
- 52:34मैं अगर देखता हूँ तो भगवान। कृष्ण ने एक बहुत बड़ा अपराध कर
- 52:37दिया जिसका दंड मेरा अश्वत क्या अपराध कर दिया?
- 52:45अश्वत? मैंने पांच पांडवों के बच्चों का
- 52:48वध करता। पाण्च्य, पांडव, युधिष्ठिर, भीम,
- 52:56अर्जुन, नकुल, सहदेव, जीत। चूके थे और जीत।
- 53:00की खुशी मना रहे थे। दुर्योधन का अंत हो चुका था।
- 53:06सो के सो। गौरव मारे जा चूके थे जश्न।
- 53:11मनाने चले हैं। भगवान कृष्ण साथ में अश्वथम
- 53:18द्रोणाचार्य का पुत्र उसके बाप का भी झूठ बोलकर कत्र किया था।
- 53:28झूठ हो रहा किसने? सत्यवादी।
- 53:34ज्योतिष्ठण। हतो अश्वत्था माँ गजो कि वह नैरो।
- 53:47इसी कारण से उसने शस्त्र। छोड़ दिए, नीचे बैठ गए, उनके
- 53:52सुधबुध मारी गई इन्फिनिटी कॉम्प्लेक्स में आ गई।
- 53:57अब मेरा कुछ नहीं बचा। उस वक्त उन्हें याद नहीं।
- 54:02रहा कि मैंने मेरे पुत्र को अमृता का वरदान दिया है।
- 54:06भूल गए नरो की माँ कुंज ये थोड़ा सा धीमे में बोल दिया, लेकिन पाप
- 54:19था ना इस बात में अगर। पाप न होता तो उतनी।
- 54:23ही ऊंची आवाज़ में बोलते और पास जा के बोलते दूर।
- 54:27से बोल दिया। सब षड्यंत्र था और जब षड्यंत्र था
- 54:32तो प्री ब्लेंड था तो? प्री ब्लेंड था तो पाप हो।
- 54:37गया। अगर गौर से देखा जाए।
- 54:42तो जीतने पाप करवाए, कृष्ण ने करवाए।
- 54:48कृष्ण? करण का मनोबल करा देते हैं।
- 54:52क्या कहते हैं कि तुम कुंती पूछो मनोबल आधा रह के दुर्वोधन जा रहे
- 55:02थे गांधारी पट्टी खोलने वाली थीं इतने साल का तप।
- 55:08मैंने आपसे कहा अगर कोई व्यक्ति 12 वर्ष तक एक स्थान।
- 55:12पर बैठ जाए। 12 वर्ष तक शुद्ध पौष्टिक भोजन
- 55:19हल्का से लेता है। जान बचाने के लिए वह जो कह देगा,
- 55:24जो सोच लेगा वह हो जाएगा। इसलिए ऐसे।
- 55:34संत को छुप। जाना पड़ता है।
- 55:39ऐसे संत को एकांत में रहना पड़ता है अगर वह भीड़ भड़के में गए।
- 55:50तो पहली शर्तें खत्म हो के एकांत में कहाँ रहे?
- 55:55एक स्थान पे बैठ जाएं। बाहर की आसानी लासानी तरंगें उनके
- 56:00ऊपर कोई काम ना करें बाहर की। दूसरी तरंगें कोई।
- 56:04काम ना करें दो धमास उनके ऊपर ना करें।
- 56:08अपने कमरे में शुद्ध और स्वच्छता से अपनी करणों में बैठे रहे।
- 56:15मौन हो जाए। अकेले से थोड़ी कोई गोला करता है
- 56:19अकेले में तो पागल बुरा करता है। मौन हो जाए।
- 56:25मौन होता होता। पर मौन में चला जाएगा।
- 56:28जैसे तुम रात को सोते सोते परम शुद्ध अवस्था में चले जाते हो,
- 56:32ऐसे मौन होते होते तुम वर मौन में खो जाओ सीधा सा रास्ता।
- 56:40है। ऐसा व्यक्ति है अगर 12।
- 56:42अगस्त तक। एक जगह बैठा भी है और सब कुछ खाता
- 56:52पीता है। ठीक से अन्न वगैरह सब कुछ खाता
- 56:54पीता। है।
- 56:58वह जो कह देगा जो सोच। लेगा।
- 57:00ठीक हो जायेगा क्यों? क्योंकि वह उसे जंग से और वहाँ पे
- 57:05पहुंचा है। मैं कारण साथ साथ बताता रहता हूँ।
- 57:10और अगर वह बिलकुल पौष्टिक। आहार लेगा।
- 57:15दूध वगैरह हल्का होता है। पर एक बच्चा मेरे से प्रश्न पूछ
- 57:19रहा था जद कर रहा था 1819 साल का। इतने साल के बच्चे।
- 57:25बुद्धि तो होती नहीं, विवेक नहीं होता।
- 57:30मेरे को तो बताओ मैं तो पूछुंगा। दूध पीना चाहिए की नहीं?
- 57:35ओशो कहते दूध पीना अपराध है। मैंने कहा तो उन्होंने दूध कभी
- 57:40नहीं किया। ओशो ने कभी दूध नहीं पिया, तुम
- 57:50पहले उसी व्यक्ति से पूछ लिया करो ना, जो कहते हैं, हम पीएलआर करते
- 57:55हैं, उससे पूछो तुम कौन थे? तुम जानती हो अपने आप सबसे।
- 57:59पहला सवाल उनसे होना। चाहिए।
- 58:02ओशो कहते हैं दूध पीना। जैसे अपनी स्त्रियों का जो तुम
- 58:07पशुओं को पीला दो बिलकुल पीला सकती है स्त्री अगर पशु इस हालत
- 58:13में है कोई मेमना, कोई खरगोश का बच्चा बिलकुल पीला सकती है।
- 58:17ये दया की बातें है, करुणा की बातें है, तरक्की बातें नहीं।
- 58:25तो जिद पड़ गए, मैं तो पूछ के रहूँ।
- 58:28मैंने कहा बेटे मैं तेरे को, मैं तो पूछ के रहूँगा मैंने उसे।
- 58:37क्योंकि मैं श्रद्धा कहता हूँ प्रश्न।
- 58:39श्रद्धा को पूछना, जिससे तुम्हारी जिंदगी खुशहाल हो जाए और दूध पीऊ
- 58:44के न पीऊ मांस कहूं के न कहूं इनका कोई मतलब आध्यात्मिकता से
- 58:48नहीं और अगर ओशो इतनी बात पे नहीं जानते।
- 58:54कि दूध पीना क्या खाना क्या नहीं खाना क्या करना क्या नहीं करना।
- 58:59इससे अध्यात्मिकता का कोई संबंध होता मानते हैं।
- 59:05ये ओशो तो ओशो मूरख हैं, मूड हैं। इस व्यक्ति को इतना ही नहीं।
- 59:13पता। के खाने पीने का।
- 59:17संबंध शरीर से है और हम शरीर रहे नहीं।
- 59:23वह खाने पीने की जिद्द क्यों? करेगा?
- 59:30जीसको इतना पता नहीं। यह शरीर के विषय।
- 59:36वह उन विषयों के ऊपर बहस। क्यों करेगा?
- 59:39सीधी सीधी बात उसकी क्यों नहीं करेगा, जो आनंद है?
- 59:44वह सीधी, सीधी परमात्मा। के गुणों का वर्णन क्यों नहीं
- 59:47करेगा? वह गीत क्यों नहीं गायेगा वह
- 59:54संकीर्तन क्यों नहीं करेगा? वह वही बात करेगा जो तुम हो नहीं
- 1:00:00वह इन पचड़ों में क्या उलझेगा और अगर उलझेगा तो बताने के लिए
- 1:00:06बताएगा। वह बहस की मुद्रा नहीं।
- 1:00:10छेड़ेगा। लेकिन बच्चा रुका नहीं हुआ।
- 1:00:15पहले वो दीक्षा लेने के लिए कह रहा था, मैंने कहा नहीं दीक्षा।
- 1:00:21तुम पहले पढ़ाई करो अपने पांव। पे स्टैंड हो जाओ अपना करियर बना
- 1:00:27लो अपना परिवार बाल पोषण पता नहीं तुम्हारे माँ बाप तुमसे क्या
- 1:00:33अपेक्षा रख के बचेंगे? उनकी सेवा करने के जोगोजो।
- 1:00:39उसके बाद इस तरफ आना 25 साल के बाद फिर गृहस्थ गृहस्थ के बाद सही
- 1:00:45बिल्कुल सही सनातन ने किया। 75 के बाद की उम्र होती है।
- 1:00:5175 के बाद व्यक्ति को गद्दी छोड़ देनी चाहिए।
- 1:00:57देखो भाई तुमने बहुत कुछ कर। लिया 75 साल तक अच्छा भी किया,
- 1:01:02बुरा भी किया, जो भी किया ठीक अब तुम छोड़ दो अब तुम वाणप्रस्थ
- 1:01:09नहीं रहे, अब तुम सन्नस्त हो जाओ। बस छोड़ छोड़ दो केदारनाथ।
- 1:01:14चले जाओ। बद्रीधाम चले जाओ, जहाँ तुम्हारा
- 1:01:17मन लगता है वहाँ चले जाओ बहुत संसार घूम लिए तो ये हो रहा था
- 1:01:33नहीं संदेह में बड़ा क्षमाशील हूँ।
- 1:01:39परमात्मा की सीधी सीधी। वाणी।
- 1:01:43मैं इस शब्द का प्रयोग। जहाँ भी हुआ वो कृष्ण ने किया
- 1:01:51हजरत सल लाहु अले हव सल्लम। में किया।
- 1:01:58सीधी उसके द्वारा। परमात्मा के द्वारा बोली गई आवाज़
- 1:02:03है इस इन्स्ट्रुमेंट के द्वारा। बस ये सिर्फ इन्स्ट्रुमेंट है।
- 1:02:09और इन्स्ट्रुमेंट भी बडापे की तरह होना चाहिए।
- 1:02:13ऐसे ही तो गंदे नालों से। तो वो बोला भी नहीं करता, बड़ा
- 1:02:18अशुद्ध बुद्ध आचरण चाहिए। इन बातों का जवाब मैं बात नहीं
- 1:02:24दूंगा। कहते फिर 6 साल की लड़की से शादी
- 1:02:30क्यों की? मैं दूंगा जवाब।
- 1:02:33फिर सुनने के लिए तैयार हो जाना तैयार।
- 1:02:36हो के आना फिर सुनना। फिर।
- 1:02:40इसमें बोला है सुरहतह। में निसंदेह में बहुत क्षमा शील।
- 1:02:52माफ़ कर देता हूँ, लेकिन। किसको माफ़ कर देता हूँ उस पर
- 1:02:57मेहरबान हूँ जो तौबा करे, तौबा करे का?
- 1:03:01मतलब वो गलती से। हो गया पता नहीं लगा अज्ञान बस हो
- 1:03:06गया अज्ञान बस हो गया। मुझे नहीं पता लगा।
- 1:03:10ऐसे कर्म बहुत से तुमसे हो जाते हैं।
- 1:03:14और तुम्हारा मन दुखी भी होता है। ओहो, मैंने ये क्या कर दिया?
- 1:03:21अगर सच पूछो एक हिसाब से कसूर तो था, दहशत का कसूर ये था कि शिकार
- 1:03:28करना पाप। लेकिन उसने श्रवण कुमार।
- 1:03:34को जानबूझकर नहीं मारा। अगर उसे पता होता कि ये मृग नहीं
- 1:03:39है, श्रवण कुमार है तो वह कभी भी शब्द वेदी बाण नहीं चलाता।
- 1:03:45यह पाप हो गया अज्ञात। इसीलिए दशरथ को उसका परम धाम तो
- 1:03:52मिला लेकिन जिनका पुत्र मारा गया अंधों का उन्होंने शराब दे दिया,
- 1:04:04जानबूझकर नहीं किया। कर्म का फल नहीं मिला उन्हें
- 1:04:12उन्हें मिला शराब का फल वो बा करें, ईमान लाये सुधर जाए।
- 1:04:21कानों के हाथ लगा के फिर। से नहीं करूँगा।
- 1:04:23देखो गलतियाँ तो फिर भी होंगी। लेकिन गलती करके।
- 1:04:29पश्चाताप राम राम नहीं करना है, इससे नहीं खत्म हो जाएगा
- 1:04:34प्रायश्चित भीतर की आत्मा अग्नि जल जाए ओह मैंने ये क्या किया?
- 1:04:42तुम इतने दुखी तो हो जाओ भीतर। से कि ये तो पाप हो गया है नर्त
- 1:04:47हो गया। वह भीतर से उठी हुई।
- 1:04:52ज्वाला प्रायश्चित की ज्वाला होती है तुम्हारा।
- 1:04:57बुद्धि का कि वह। प्रायश्चित प्रायश्चित नहीं होती
- 1:05:01तुम? देखना कभी।
- 1:05:03कभी ऐसा पाप हुआ हो? जिसके बाद तुमने खुद ही पश्चात्प
- 1:05:07किया है। वह पश्चात्प की अग्नि जलायेगी
- 1:05:10तुम्हारे कर्मों की बुद्धि से किया हुआ नहीं कि जाके गायत्री
- 1:05:14मंत्र का जाप कर लो, हवन कर लो आहूतियाँ दे दो।
- 1:05:17इससे कुछ नहीं होने वाला, ये तो कर्मकांड है।
- 1:05:23तौबा करें। अपने कर्मों को ठीक करें और आगे
- 1:05:32से सुधार करें। सुधार यही है कि तुम जागृत होके
- 1:05:36कर्म करो और कोई सुधार हो भी नहीं सकता।
- 1:05:39गलतियाँ तो फिर भी होंगी। पांव तले कटाणु।
- 1:05:44आएँगे, मरेंगे तुम कितना बुछालोगे।
- 1:05:50लेकिन बचाने की चेष्टा? होनी चाहिए।
- 1:05:54कितना बचा सकते और अज्ञात में अज्ञान में तो तुमसे मरेंगे,
- 1:06:01बिलाशक। रसोई में मरते हैं तुमने प्रयासित
- 1:06:04किया जो तुमने पूछ लिया। बहुत से लोग पूछते हैं।
- 1:06:08तुमने पूछ लिया कि इनसे। फिर क्या करें?
- 1:06:11देखो प्रयासित तुम्हारे हृदय में आ गया, तुम्हारे हृदय बहुत रोया
- 1:06:16रोज़। पापा हो जाता है क्या करें?
- 1:06:21यह प्रायश्चित की। अग्नि तुम्हारे पापों को भस्म
- 1:06:25करती थी। ये कुत्ते को या गाय?
- 1:06:31को जो तुम रोज़ रोटी देते हो, ये एक्स्ट्रा पुण्य लगता है।
- 1:06:38इससे पाप नहीं कटते। पाप करते हैं जो।
- 1:06:43तुमने अज्ञान में उन कीड़ियों का, उन मकोड़ों का उन जीवों का हत्या
- 1:06:50कर दिया। गलती से हो गया यह गलती से हो गया
- 1:06:56की अग्नि। उन पापों को नष्ट करते हुए नरझरा
- 1:07:01हो गए। सुरह अल बकरा।
- 1:07:05में 2/286 में लिखा है क्रान बड़ी शानदार कथा बड़े मज़े की बात है।
- 1:07:18और उसमें मेरे पास कुरान पड़ी नहीं थी, कुरान को जानते नहीं थे।
- 1:07:28लेकिन बचने का उपाय। ढूंढ लिया।
- 1:07:32नित्य कुरान इतनी पुरानी? है कि इसने इसमें वक्त के अनुसार
- 1:07:36तरमीम नहीं हुआ। यह पुरानी है।
- 1:07:39यद्यपि हीरे हैं इसमें ये बचने की कवायद है।
- 1:07:44सिर्फ मैं कहता हूँ कुरान ऐसी किताब है, जिसमें अमेंडमेंट की
- 1:07:54गुंजाइश ही नहीं। वक्त के अनुसार।
- 1:07:59उसमें गुंजाइश की जरूरत नहीं। क्योंकि ये कोई सिद्धांत थोड़ी
- 1:08:05है। ये बिलकुल ऐसा ही शब्द है उस होगा
- 1:08:09जैसे तुम कहो। कि तुम्हारे अंत स्थल।
- 1:08:14का वो तत्व जिसे कृष्ण कहते हैं न छिद्दता न जलता, न कलता, न सूखता,
- 1:08:24न मरता, न झड़ता। उस तत्व को समय के।
- 1:08:30अनुसार तरमीम की आवश्यकता है। ये शब्द बिल्कुल ऐसे ही हैं उसको
- 1:08:35के। वह तल सदा वैसा।
- 1:08:40ही रहेगा, उसमें तरमीम की जरूरत ही नहीं है।
- 1:08:46कुरान ऐसी शानदार। किताब है।
- 1:08:51वक्त के हिसाब से। सही वहाँ के सही मोहम्मद ने फैसला
- 1:08:57किया कि इसमें कोई तरमीम नहीं करना।
- 1:09:00अगर मैं ये शब्द लिख दूँ ही इस ऑफनिपटेंट।
- 1:09:06ही इस ऑम्निश ही इस ऑम्नी प्रेसेंट और इसमें तरनीम न हो तो
- 1:09:12ये गलत है तो ठीक है क्योंकि इसमें बदलाव हो ही नहीं सकती, वह
- 1:09:19सर्वव्यापक है, वह सर्वशक्तिमान है।
- 1:09:26भैस और भक्के है। इसमें तरमीन क्या खक करोगे?
- 1:09:32ओशो का ये वक्तव्य मुझे पढ़ाया गया।
- 1:09:35मैंने कहा मैंने। तुम्हे पहले ही कहा था।
- 1:09:37ये उल्लू है इस मसल में जो मन में आता है वो उल रहता है।
- 1:09:43इसको ये नहीं पता। कि जो अल्टीमेट चीजें हैं, उनमें
- 1:09:49बदराट की जरूरत नहीं होती। कैसे बदलोगे?
- 1:09:54आप ईशा वासमीदम सर्वम यज्ञ की जगत याम जगत इसको कैसे बदलोगे?
- 1:10:01बताओ? कोई तरमीम?
- 1:10:03कर पाओगे। क्योंकि दीज़ आर अल्टीमेट वर्ड्स
- 1:10:07को नहीं सुधा। इसमें तरमीम की जरूरत कब?
- 1:10:13पड़ेगी क्यों पड़ेगी, बिल्कुल वैसी ही किताब है।
- 1:10:25कुरान इसमें तरमिज की कोई आवश्यकता ही नहीं है।
- 1:10:33यह बिल्कुल वैसे अल्टीमेट वर्ड्स हैं, जिनमें समय के साथ सुधार
- 1:10:40करने की कोई जरूरत नहीं। यह कोई नियम नहीं है।
- 1:10:43नियम बदले। जा सकते हैं।
- 1:10:45बदले जाने चाहिए। लेकिन कुरान कोई नियम।
- 1:10:50नहीं है। यह तो उसकी आवाज़ है, उसकी आवाज़
- 1:10:56को कैसे बदलो। अब ये आवाज दे रहे।
- 1:11:01हैं कि मैं क्षमा शील हूँ निस्संदेह, लेकिन साथ में बताता
- 1:11:06है परमात्मा खुदा कि तुम्हारी तौबा वही होना चाहिए तुम तौबा
- 1:11:20करो। संदेह मैं बहुत।
- 1:11:24अक्षमाशील हूँ, उस पर अक्षमाशील हूँ जो तौबा करे, ईमान लाये और
- 1:11:31अच्छे कर्म करे। इसमें कैसे बदलाव करोगे?
- 1:11:36बताओ। बताओ ओशो जी?
- 1:11:42ओशो के भक्तों तुम बताओ ये अनगढ गिरा है तो अनगढ गिरा है इसको काट
- 1:11:51छांट करोगे तो बेकार हो जाएगी सारी कुरान।
- 1:11:56कुरान का एक शब्द। भी तमीम नहीं किया जा सकता।
- 1:11:59यह कोई नियम नहीं है। कि कल कोई और था, आज कोई
- 1:12:03ट्रांसपोर्ट का कोई कानून है, कल को कोई और हो जाएगा या कुछ नहीं
- 1:12:07चलेगा कुरान इस दी अल्टीमेट बुक इट कैनट बी चेंज्ड।
- 1:12:15इट शुड नॉट बी चेंज्ड इट। जो इसको चेंज करने की हिमादत
- 1:12:19करेगा वो गलती करेगा। कभी से आगे आ जाए।
- 1:12:26बुद्ध से आगे चले बुद्ध नियमों में आवद हैं, इसलिए बुद्ध अब तक
- 1:12:30भटकते हुए आपने कभी सुना कृष्ण भटकते हुए कभी सुन आपने ये सदा
- 1:12:39सुना होगा। के बुद्ध भटकते भर रहे हैं।
- 1:12:42मैत्रेय का जन्म लेने में क्यों भटकते भर रहे हैं तुम्हें इस बात
- 1:12:47का पता नहीं तुम्हें कौन बताएगा तुम्हें वही बताएगा जो जानेगा तो
- 1:12:51हम जानते हैं इस बात को बुध ने एकतल अभी पार करना बाकी बड़ा है।
- 1:13:00आत्मा से परमात्मा होने। का बोतल, आत्माबोध से परमात्मा
- 1:13:04बोध का बोतल और मैं सदा है क्या यही?
- 1:13:09असली तल है। रस्का।
- 1:13:14और न बुध गए यहाँ और। नाउश हो गए यहाँ और दोनों को ही
- 1:13:19तल? अभी ये पहुंचना है।
- 1:13:22कभी कोई नहीं कहेगा कि कृष्ण भटकते फिर रहे, कबीर भटकते फिर
- 1:13:28रहे नानक भटकते फिर रहे नहीं, वो तो बूंद सामान्य ही समुद्र में,
- 1:13:32वो तो गए समुद्र में एक आकार हो गए।
- 1:13:37लेकिन तुम? सदा ही पाओगे सभी।
- 1:13:38शास्त्रों में पाओगे हालांकि 2500 सालों के।
- 1:13:43तो भटकते क्यों फिर रहे हैं। यात्रा से इस है भाई तो बुद्ध के
- 1:13:50पीछे जो लगेगा वह सुकून पाए, आनंद पाए।
- 1:13:59बेलासक, उसकी पीड़ाएं। भी समाप्त होंगी, उसकी समस्याएं
- 1:14:04भी समाप्त होंगी। वह स्वयं को जान लेगा और स्वयं को
- 1:14:08जान लेगा। कोई भी किसी भी मार्ग से उसकी सभी
- 1:14:13पीड़ाएँ समाप्त हो जाएंगी। सभी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी।
- 1:14:17समाधान हो जाएंगे दुखों। के पीड़ाओं।
- 1:14:22के कष्टों के कलशों के कोई आग तुम्हें सता ना सके।
- 1:14:30लेकिन इससे आगे भी मुकाम है। उसे।
- 1:14:35आगे का मुकाम। कुरान बताती है कृष्ण।
- 1:14:39बताती है वह जो फकीर आकर हाथ। उसने किया अल्लाह।
- 1:14:50मैं आपको क्या कह। सकता हूँ?
- 1:14:56यह सही व्यक्ति है यह। सच्चा है।
- 1:14:58इसको पता है कि मेरा यहाँ कुछ नहीं है इसको ये भी पता है को मैं
- 1:15:04ही नहीं हूँ यहाँ मेरे ऊपर। भी जो मटेरियल लगा।
- 1:15:08तेरा ही तो है। तो बैग चढ़ाएगा क्या?
- 1:15:13शत्र क्या चढ़ाएगा ये तुमने चोरी किया होगा, लोगों की जेबों से
- 1:15:17डाका मारा होगा। तो उसका छत्र बना लिया।
- 1:15:21भगवान के चरणों में वह कोई रिश्वत खोर, थोड़ी वह कोई रिश्वत खोर,
- 1:15:27थोड़ी कोई पटवारी थोड़ी। हे, हमारे रब हमें क्षमा कर हमारे
- 1:15:49पापों को ढांप ले और हम पर दया कर मांगने का अनोखा।
- 1:16:00हमारे पापों को ढांकते व्यथित दुखित हृदय से की हुई पुकार
- 1:16:08स्वीकार हो जाती है। उसके दरगाह में इससे आगे का मुकाम
- 1:16:17है, उससे आगे का। और बुद्ध से आगे का मकान बड़ा
- 1:16:26इसलिए मैं। तुमसे सदा कहता।
- 1:16:28हूँ। जिसने वो प्यारा सा मुकाम।
- 1:16:32छुआ नहीं। जिसने उन।
- 1:16:39गदम गदम गधेलों पे पांव रखें उस यात्रा को क्या जानें?
- 1:16:51खुद ने एक कदम भी आगे नहीं गए। बुध भाग खड़े।
- 1:16:56महावीर समझदार थे। महावीर निकालने जब मैं देखता।
- 1:17:00हूँ आगे रास्ता। है।
- 1:17:02मैं क्यों उठूं बराबर? बराबर के थे।
- 1:17:0529। साल के बुद्ध थे, 29 साल के
- 1:17:07महावीर थे जब घर छोड़। लेकिन पहुंचे बुद्ध पहले।
- 1:17:14ही। करीब 12.5 वर्ष में।
- 1:17:19वहाँ भी पहुंचे और करीब छः वर्ष में दुगना वक्त लग गया कोई।
- 1:17:24चाल धीमी ही नहीं। छः वर्ष में दोनों वहीं आ गए थे
- 1:17:29लेकिन बुद्ध को पता था आगे मुकाम। क्योंकि जो वहाँ तक पहुँच गया
- 1:17:36आगे। के मकान देख लेगा वो सांप वर्ग का
- 1:17:39नजर आता है। पीछे के हिल झूल सब पता चलता है,
- 1:17:43लेकिन। महावीर कहते हैं, आप आ?
- 1:17:45ही रहे हैं। हमारे इससे पहले।
- 1:17:49जमात होने का यही फायदा होता है। गुरु का यही फायदा होता है।
- 1:17:5323 तिल थंकर पहले हो चूके हैं। और सभी ने वो मुकाम।
- 1:18:01छुए कैबरली के तो हम क्यों रह जाएं?
- 1:18:07लेकिन बुद्ध? की कोई जमात?
- 1:18:09नहीं है ध्यान रखना। बुद्ध अकेले हैं, अकेले ही चलें
- 1:18:21और आपको भी शिक्षा दे गए। अब दीपो भवा।
- 1:18:27सुख मिलेगा, शांति मिलेगा। सुकून मिलेगा।
- 1:18:30जीवन का ढंग यहाँ तक भी सीख जाओ। तो बड़े मज़े से जिंदगी कट जाएगी,
- 1:18:34लेकिन राहतें और भी हैं वसल की राहत के सिवा और?
- 1:18:41भी गम हैं जमाने में। मोहब्बत के सिवा।
- 1:18:46इससे आगे का मुकाम। व्याख्यात नहीं किया जा सकता।
- 1:18:51इसलिए यहाँ मैं चुप हो जाऊंगा। विराम दूंगा क्योंकि उसके आगे का
- 1:18:57मकान बस तुम्हें क्या पता है, अवर्ण नहीं है परम आनंद परम परम
- 1:19:08परम आनंद। कुछ नहीं बोला जा सकता, लेकिन
- 1:19:12आपसे कहूंगा यहाँ आकर। तुम शांत हो।
- 1:19:15जाओगे पीढ़ाओं से मुक्त हो जाओगे, यहाँ तक तो आ जाओ।
- 1:19:22मैं प्रार्थना करता हूँ। और सब महाबली से नियम अपने आप
- 1:19:26नहीं बना सकते। समझे?
- 1:19:30नियम अपने आप नहीं बना करते तुम प्रश्न तो पूछ लेते हो बिल्कुल
- 1:19:36ठीक है नियमों को। बनाने वाला कोई।
- 1:19:39है बिल्कुल आप। प्रश्न पूछ लोगे?
- 1:19:42फिर उसको बनाने वाला कौन है? उसको बनाने वाला कोई नहीं, बस
- 1:19:46सैफ, हम है। आप प्रकृति पे सहभम ले आते हो।
- 1:19:52तुम कहोगे, फिर हम प्रकृति को। ही सहभम मान लेते हैं तो मान लो
- 1:19:58लेकिन। प्रकृति को सहभम।
- 1:19:59मानने वालों बुद्ध के मुकाम तक पहुँच जाओगे, लेकिन मुकाम तो अभी
- 1:20:05और है। तो जिन्होंने।
- 1:20:07परमात्मा। को शैभम माना स्वयं के प्रकाश से
- 1:20:10प्रकाशित और समीदार लोग थे क्योंकि।
- 1:20:14परमात्मा तक। पहुंचने के बाद अनंत विस्तार तक
- 1:20:18पहुंचने के बाद और फिर कहाँ जाओगे?
- 1:20:23भूत के पास पहुंचने के बाद तो। विस्तार होना बाकी पड़ा है।
- 1:20:28साफ पता चलता है कि विस्तार। है।
- 1:20:31और निकल पड़ते हैं महावीर। बिल्कुल बराबर के हैं महज।
- 1:20:3636 साल का फर्क? है।
- 1:20:40महावीर बड़े हैं, बहुत छोटे। बुध तक पहुँचने के बाद।
- 1:20:46सब मिल जाता है वो जो तुम्हें जरूरत है बस तुम वहाँ जाके शांत
- 1:20:50हो जाओ, लेकिन अभी रस भी ना बाकी है और जिसने वो रस नहीं पिया वो
- 1:21:00नीरस ही रह गया। फिर सिर्फ वो ई की तरह।
- 1:21:06होगा, जिसकी लम्बाई तो बहुत ऊंची हो सकती है, लेकिन उसमें मिठास न
- 1:21:11होगा उससे आगे शुरू होता है। उससे आगे शुरू होता है परमात्मा
- 1:21:16का मुकाम और तुम कहोगे उसकी बातें बोलो, ताकि गलना कथिया ना जाए।
- 1:21:25जे को कह पाछे। पछिताय अगर कोई कहने की चेष्टा
- 1:21:29करेगा और पछताना पड़ेगा। क्योंकि।
- 1:21:32उसकी बातें बोली नहीं जा सकतीं, वो इतना आनंद से भरा हुआ है, बस
- 1:21:39आप अंदाजा ही लगा सकते हो। सथरचंडी पठ खेड़ियां दे रे।
- 1:25:01सोल सुराही, खंजरे, पेयाल, सोल, सुराही, खंजरे, पेयाल।
- 1:25:18विंघ कसाएँ दे सैणा।