Latest / Baba ji Vijay Vats / 20 Feb 26 - क्या परमात्मा के ऊपर भी कोई परमात्मा है? 'समझना' बनाम 'पीना': आध्यात्म कोई विषय नहीं है
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- 0:12अभिषेक बाबा जी को सादरपूर्ण आपने कहा था कि जैसे एक बूंद सागर में
- 0:29मिलकर। स्वयं सागर हो जाती है, उसी
- 0:35प्रकार संत परमात्मा का दर्शन करने के पश्चात जीव भी परमात्मा
- 0:45स्वरूप ही हो जाता है। आपने यह भी कहा कि आप जब चाहें तब
- 0:53कुर्सी ग्रहण कर सकते हैं। इसके उपरांत आपने यह भी कहा कि
- 1:03अभी विराट का आदेश प्राप्त नहीं हुआ।
- 1:08यदि आप स्वयं परमात्मा स्वरूप हैं तो क्या परमात्मा से भी ऊपर कोई
- 1:15परमात्मा होता है? जिसके आदेश की जरूरत है?
- 1:22यह बात मुझे पूरी तरह समझ में नहीं आई।
- 1:29कृपया इस विषय में मेरा मार्गदर्शन करने की कृपा करें।
- 1:36अभिषेक, देहरादून। जब मैंने नया नया चैनल शुरू किया
- 1:54और रिकॉर्डिंग करनी शुरू। किया तो।
- 2:01घंटे भर बोलता रहता। कई दिन बीत गए थे।
- 2:15कोई 10 दिन बीतने के बाद मेरी धर्मपत्नी मेरे पास आई।
- 2:24कहती और तो सब इंतजाम हो गया। गाड़ी वाले को भी कह दिया अपने
- 2:36सामने वाले के पास गाड़ी है, चल पड़ेगा, पैसे टक्के का इंतजाम भी
- 2:44हो क्या? डॉक्टर वगैरह हम पता कर लेंगे कौन
- 2:58सा अच्छा सुना है की अमृतसर ज्यादा बढ़िया है।
- 3:17मैंने रिकॉर्डिंग बंद की। मैंने कहा मतलब प्रति मतलब ये कि
- 3:26कोरोना कार्य चल रहा है, कई दिन से लगातार बड़बड़ा रहे हो आप
- 3:35अकेले। तो सारा इंतजाम मैंने कर अब
- 3:51डॉक्टर का इंतजाम आप देखो कौन करोगे?
- 4:02यानी कि दिमाग में फर्क पड़ जाता है मेरे उसके हिसाब।
- 4:10से। और बिलकुल ठीक है, मेरी धर्मपत्नी
- 4:18बिलकुल ठीक थी क्योंकि मैंने पूछा तर्क तो कहती तर्क तो साफ है कोई
- 4:27सुन्नी बड़ा होता ही नहीं। मैंने चारों खूंटों में अच्छी तरह
- 4:35से देखा कि शायद कुछ छुपा बैठा हो, सुन रहा हो आपकी बात लेकिन आप
- 4:41हो के बोले जा रहे हो और ऐसा कोई दो 4 मिनट आदमी पुड़पुड़ाया कोई
- 4:47बात नहीं घंटा डेढ़ डेढ़ घंटा लगातार पुड़पुड़ाना।
- 4:54तो फिर डॉक्टर का इंतजाम करना ही पड़ेगा ना
- 5:10देखिये, समझ में तो मर ही नहीं आया तो इसका खनाजा मैं क्यों
- 5:21भुगतूं? अब तर्क बिल्कुल ठीक है।
- 5:27मेरी धर्म पत्नी का के सुन तो कोई रहा ही नहीं।
- 5:33मैंने अच्छी तरह से देखा सब तरफ कोई नहीं सुन रहा है और तुम हो के
- 5:40घंटा घंटा डेढ़ डेढ़ घंटा यानी की बिमारी।
- 5:52सीमा पार करके तो अब तो इंतजाम कर रहे हैं पड़ेगा।
- 6:07रुद्राभिषेक, देहरादून से कोई आस पास डॉक्टर, कोई कोई हॉस्पिटल,
- 6:21समझ में तुम्हारे नहीं आया। खनाजा में भुगत और बिलकुल ठीक है।
- 6:31तर्क में ठीक है बाज सबसे पहला अक्षर।
- 6:39मैंने यही बोला कि वह बोला नहीं जा सकता।
- 6:47बिल्कुल, हमारे दिमाग में फर्क है।
- 6:49कृष्ण के दिमाग में फर्क है, कबीर के फर्क है।
- 6:53दादू और नानक के फर्क है कि जब समझ में आते है ना तो समझाने की
- 6:58चेष्टा क्यों करते हो? साफ सीधा तर्क और आपकी भी कोई
- 7:07गलती नहीं, लेकिन मैं आपसे पूछता हूँ कि आप मुझे क्यों सुन रहे हो?
- 7:20तो लड़खड़ा जाएगी बुद्धि। देखिये, कमरे के भीतर बैठा हुआ
- 7:27इंसान 14 साल से बोल रहा है और आप बड़े मज़े से सुन रहे हो अगर गागर
- 7:45में सागर समा न पाए और गागर चिल्लाने लगे?
- 7:52कि सागर मुझमें समा नहीं पा रहा तो इसमें भी सागर का कसूर है।
- 8:05इसमें कोई सागर का कसूर है तो वो गागर में समा नहीं पाता।
- 8:14ये कोई डेटा थोड़ी है। क्या आप कंप्रेस कर लो उठा लो के
- 8:17चिप में ये सोच रहा है भाई यहाँ कंप्रेस नहीं होता।
- 8:35आपने कहा कि मैं 2 मिनट भर में कुर्सी तो मिनट भर में ले सकता
- 8:46हूँ, विला छत ले सकता हूँ इसमें क्या?
- 8:52और मैं बोलेंगे शक्ति खराब करूँगा और मुझे पता है पलक जपकती है तो
- 8:58शक्ति व्यह होती है और मेरी कोई भी शक्ति व्यह मैं उसको किसी काम
- 9:07में लेता हूँ। फिर यह समस्या तुम्हारी सागर की
- 9:22समस्या नहीं गागर शिकायत नहीं करना चाहिए कि गागर मुझमें समान
- 9:30नहीं पाता। सागर।
- 9:43गीता बोल रहा हूँ मैं दर्द बढ़ता ही गया जूं जूं आध्यात्मिकता से
- 9:53रहस्य में आया रहस्य से लीला में आया।
- 9:57लीला के बाद भी आपके प्रश्न समाप्त नहीं और प्रश्न समाप्त
- 10:01होंगे बिना। क्यों?
- 10:08क्योंकि प्रश्न पैदा होते हैं दुःखी मन से और दुखी मन विसर्जित
- 10:19होगा, आपके दर्शन के बाद। आपकी तमन्ना है कि दर्शन पहले हो
- 10:27जाएं, दुःख ही मन बाद में विसर्जित हो जाए, लेकिन यहाँ सत्य
- 10:36कुछ हो रहा है, दुःख ही मन पहले विसर्जित करना होगा।
- 10:42दर्शन बाद में होंगे। मैं क्या करूँगा?
- 10:50तुम्हारा प्रश्न बिलकुल ऐसा है जैसे कोई कहे के मुझे प्रशासनिक
- 10:59अधिकारी बना दो, पढ़ाई में बाद में कर दूंगा।
- 11:09मेरे पास बहुत से लोग आ जाते हैं। बाबा मुझे अमीर कर दो यंत्र मंत्र
- 11:17तंत्र टोटके जो तुम कहोगे बाद में कर लूँगा, जब समाधान ही कर दिया
- 11:29तो समस्या बचेगी कहाँ से? तर्क बिल्कुल ठीक है मेरे धर्म
- 11:42पतने का कि सुनता बुनता यहाँ कोई नहीं मैं कई दिन से देख रही हूँ,
- 11:46फर्क कुछ बढ़ता ही जाता है। पहले 3040 मिनट बोलते थे, अब डेढ़
- 11:53डेढ़ घंटा बोलना शुरू कर दिया। ये तो रोग बढ़ता ही जाएगा।
- 11:57अब किसी डॉक्टर को दिखाना ही पड़ेगा।
- 12:14मुझे ये बताओ तुमने लेना क्या है? परमात्मा के ऊपर भी कोई परमात्मा
- 12:19है, है या नहीं है? इस मामले में बुद्ध कहते है वो है
- 12:30ही नहीं। अच्छा कौन कतु कौन पिंजू?
- 12:39ये साइकोलॉजिकल इफेक्ट आ जाएगा आपके।
- 12:43और समझदार व्यक्ति था। वो कहता वो तो फैक्टरी जल के ना
- 12:52रुई के ढेर बचे ना कातनी पड़ेगी ना पीसनी पड़ेगी मुद्दा ही खत्म
- 13:00करती क्या समझदार? फिर तुम मुझे क्या सुनते हो,
- 13:16तुम्हें पता है नहीं तुम मुझे क्यों सुनते हो और असल में तुम
- 13:23मुझे क्यों सुनते हो, यही परमात्मा है।
- 13:33उस मेरे सुनने में तुम्हें मिलता क्या है भाग क्यों नहीं गया आपके
- 13:41और भाग जाते हैं लोग फिर फिर चक्कर काट के आ जाते हैं।
- 13:50मैंने कहा अब क्या हुआ, कहते हैं बाबा जो सुख छज्जू दे छुहाड़े ओह
- 14:00न बल्ख न बुखारें पता नहीं क्या है बस ये पता नहीं क्या है यही
- 14:08परमात्मा है। तुम एनालिस्टिक बनने की चेष्टा
- 14:17करते हो और पुत्र जितनी जल्दी हो सके इस चैनल को हम सब्सक्राइब कर
- 14:25दो, क्योंकि मैं कितनी देर का मेहमान?
- 14:34अगर 6 साल के बाद भी मुझे समझ नहीं आया कि तुम्हें नहीं सार का
- 14:43पता चलता तो फिर कब समझोगे तुम और कब समझूंगा मैं?
- 15:03मैं मैं समझने की चीज़ होती है आनंद और रस समझने जैसी चीज़ नहीं
- 15:20होती। उसको तो गटकना होता है, गले से
- 15:26अच्छा फिर जो आनंद आता है। उसकी महिमा कहीं नहीं जाती ताकि
- 15:47यहाँ गला कथिया ना जाए। काश पुत्र वह मेरे भी समझ में आ
- 16:03जाता। तो मैं तुम्हें समझा देता हूँ
- 16:10जर्रा भर भी साथ लेके नहीं जाऊंगा सब बाट जाऊं लेकिन मैं क्या करूँ?
- 16:17वह तो समझ में मेरे भी नहीं आया। इसी कारण से बहुत से लोग यहाँ से
- 16:33छोड़कर राजा स्वामी केंद्र में जा रहे हैं।
- 16:38के बाबा के तो खुद ही समझ में नहीं आए तो वहीं चलो जो छाती ठोक
- 16:42के कहते हैं। हमें तो समझ के आ गया।
- 16:45हमने तो देख भी लिया। और वहाँ जाके ज्योत निरंजन ओंकार
- 17:03रण अंकार सोहम सतनाम। सर तुम्हारा यही इलाज है पुत्र,
- 17:25ये ऐसा इलाज है के कारगर बस एक बांस गाड़ दिया, इस पर चढ़ते रहो
- 17:36और उतरते रहो। ज्योत निरंजन, ओमकार रणमकार, सोहम
- 18:03सतना। तो फिर ऐसा कर लो मैं ही बता सकता
- 18:15हूँ जो बात लगेगा मुझे लग जायेगा। शराब पीने की चीज़ होती है इसे
- 18:41पुत्रल समझने की चेष्टा मत। करना।
- 18:50मैं तुम्हारी दिक्कत को बहुत अच्छी तरह से समझता हूँ और ये
- 18:55मुड़ताएं मैंने भी किया। तुम सूचनाएं एकत्रित करना चाहते
- 19:10हो, बस और कोई मसला ही नहीं। तुम भाषण करता बनना चाहते हो, तुम
- 19:23प्लास्टिक का फूल बनना चाहते हो और मैं नहीं चाहता कि तुम
- 19:29प्लास्टिक के फूल बनो, मैं चाहता हूँ तुम ऐसे फूल बनो।
- 19:36धरती का गर्व बढ़क जो अंकुरित होता है बूटा उसमें फूल लगे और
- 19:49अपनी सुगंधक बिखेर। फिर तुम बांटने योग्य हो जाते हो,
- 19:57प्लास्टिक का फूल बांटने योग्य नहीं होता, वो तो बेचारा खुद ही
- 20:05सुगंधित नहीं होता, वो डेरे वालों की तरह।
- 20:27इसमें मेरा कोई कसूर नहीं है। पुत्र अगर तुम्हारी समझ में नहीं
- 20:33आता तो चैनल को अनसबस्क्राइब करता हूँ।
- 20:49भीतर से मेरा ऐसा घर है कि मैं तुम्हारा दुख दर्द देख नहीं सकता
- 21:03और उस दुख दर्द को मिटाने की राह भी चला।
- 21:11और यह वो रहा है जो मैं लगातार बोल रहा हूँ जिससे आपके दुख दर्द
- 21:15मिटेंगे, पक्का है कि राधे राधे करने से नहीं मिटेगा पुत्र।
- 21:28ये पांच नाम जपने से नहीं मिलेगा जीस तरह से आपका दुख दर्द मिट
- 21:39सकता है। मैं शुद्ध वह तरकीब आजमाता हूँ
- 21:46मैं वो शुद्ध वही तरकीब प्रयोग करता हूँ।
- 21:54मेरे खुद के दुखड़े उससे दूर हुए, पहले खुद पे आजमाया।
- 22:09और जब बिल्कुल सैटिस्फाइड होगा अब तुम पे आजमार और बहुत से लोग दुख
- 22:19और दर्द से मुक्त हो गए आई तल्क मैंने एक भी व्यक्ति नहीं देखा जो
- 22:27राधे राधे। पांच नाम का जप करता हुआ जिसने
- 22:32मुझे कहा हो के बाबा मुझे मिल गया बस वो कहते हैं बाबा किसी तरह समय
- 22:40भी दे जाता है, दिनों को धक्के दे।
- 22:52भला ये भी कोई जिंदगी है? तुम समस्या में हो पत्र और
- 23:04तुम्हारी समस्या मुझे बखूबी समझाती।
- 23:12जीसको तुम समझना चाहते हो उसको मैंने भी समझने की चिष्टा की थी,
- 23:21इसलिए मैं कह रहा हूँ समय मत गंवाओ यह पीने की चीज़ है।
- 23:28इससे पियो और जब मैं बोलता हूँ तो बस सुनना ही काफी होता है।
- 23:37तुमने मेरे अक्षर क्यों पकड़े? किसी बार मैंने कहा कि मेरे
- 23:45अक्षरों को मत पकड़ना। अक्षरों के भीतर जो लिवड़ तिवड़
- 23:51के आनंद आता है, उस रस को गटक जाना बाकी फोक होता है।
- 23:56उसे फेंक देना कोई गधा खा जाएगा। तुम उस रस को पीना जीसको मैं
- 24:15पिलाना चाहता हूँ और जीसको पीने के बाद कोई प्रश्न शेष नहीं रहता
- 24:26और फिर पीने का ही मन नहीं होता। फिर तो उससे नहाने का भी मन होता।
- 24:37दो कूट फिला दे सा किया दो कूट फिला दे सा किया।
- 24:52बाकी मेरे करोड़ों दो कुट पीला जैसा किया।
- 25:09बाकी मेरे किरो दे। और जब तुम एक बार पी लेते हो, फिर
- 25:21उसे और पीने का मन करता है मेरी इल्तजाईसा की।
- 25:28तू पेला नजर मेला के मेरी इल्तजाइसाकी तू पेला नजर मेला के
- 25:35मेरी प्यास बढ़ गई है तेरे अंजु मन में आके मेरी प्यास बढ़ गई है
- 25:44तेरे अंजु मन में आके। कतरा नहीं है।
- 25:55दरिया इसे मेरी जाने पर मोड़ दे कतरा नहीं है दरिया इसे मेरी जाने
- 26:08पर मोड़ दे दो, कोटा फैला दे सकिया।
- 26:12बाप की मेरे से उड़ता है मगर खवाई तो मैंने बहुत करल लिया है, अब
- 26:21तुम फैसला करो की तुमने समझना है या पीना है।
- 26:32समझना है तो समी तो मुझे भी नहीं आया, बिलकुल उन्हेंस्टली बोल रहा
- 26:42हूँ और मैं ही नहीं बोल रहा हूँ। समय तो किसी को भी नहीं आया बना
- 26:58शराब पी जाती है कि समझी जाती है, लेकिन क्या करें?
- 27:10तुम कहते हो फिर बोलते का यही तो हमारी गलती है।
- 27:24यही तो बदनसीब भी है हमारी। संत हृदय नवनीत, समान संत का हृदय
- 27:43माखन की तरह को मन होता है और वह नवनीत थोड़ी सी आँच लगते ही पैदल
- 27:55जाता है। जब तुम्हारे दुख से भरे हुए लटके
- 28:07हुए चेहरे अंधे और तुम्हारा कोरा ब्लैकिश तो जान जाते हैं, आनंद
- 28:20आएगा कहाँ से? तुम्हारा थोबड़ा ही बता रहा है
- 28:31तुम्हें पीने की जरूरत है, समझने की जरूरत नहीं है इसीलिए लटका हुआ
- 28:40चेहरा तुम लिए फिरते हो कि तुमने पिया नहीं।
- 28:45तुम्हें कारण बता देता हूँ मैं काश तुम इस बात को समझपाओ कारण है
- 28:55कि तुमने हर बात की खबर को दी है तुमने उसको पीना।
- 29:03नहीं। हमारी तो मजबूरी है, हमने वो रस
- 29:18भी लिया है जो बोला नहीं जाता लेकिन फिर भी बोलते हैं क्यों?
- 29:31क्योंकि। हृदय पिघलता है।
- 29:35आपके दुख दर्द को देखकर तो बोलते हैं, यह जो दुखी है वो तुम नहीं।
- 29:50नो दाय सर्फ रिमेम्बर, यू आर सर्फ हू आर यू इसे जान लो मिट जायेगा
- 30:00सब द्वंद। जिसके कारण यह कालिख है।
- 30:10लेकिन तुम हो के मानते नहीं, इसलिए मैंने कल कहा था कि गुरु
- 30:14हथौड़ा उठा लेता है नहीं बात करते फिर गाण उठा लेता है, लेकिन तुम
- 30:22खाने को भी तैयार हो तब। मनसा, वाचा तो बिल्कुल तुम तैयार
- 30:32हो तुम कहते हो हम तैयार हैं, मारो घण वो तैयार तो विवेकानंद भी
- 30:39थे, लेकिन जब रामकृष्णा ने सिर के ऊपर हाथ रखा।
- 30:49तो वह महाबली कहलाने वाला वह तेजस्वी पुरुष चला गया।
- 31:04गुरुदेव मेरे माँ बाप ही हैं, परिवार भी हैं और राम किशन परमहंस
- 31:16तो पहले से ही जानते हैं। मेरे पास सुबह से शाम तक सैकड़ों
- 31:22लोगों की होती है। बाबा आप हमारे सिर पर हाथ रख कर
- 31:26मुझे तेजाब रख लेते हो। मैंने कहा पुत्र मुझे पता है जब
- 31:40तुम योग्य हो जाओगे, आम के बीज मेरे पास है, फल के बीज मेरे पास
- 31:52है, मैं तुम्हारी धरा के ऊपर बकैरता हूँ।
- 31:55और वो अंकुरित हो जाएंगे। अभी मुझे दिखता है यह जमीन
- 32:01अंकुरित होने योग्य नहीं है। ये तो पात्र है और पाथरों पे बीज
- 32:09फेंकने का कोई अर्थ नहीं होता। और न तो उगते हैं, न अंकरे तो
- 32:20होते हैं, न उनपे फूल लगते हैं, न फल लगते हैं।
- 32:27वृथ में बीज ही खराब करने होते हैं।
- 32:40तुम समझने की चेष्टा मत करो, मैं कितनी बार कॉल तुम कहते हो नहीं
- 32:45बताओ हमें समझ लेंगे बाबा यानी मेरी ही समझ में नहीं आया आप समझ
- 32:55लोगे ऐसा है। जब मैं कहता हूँ वह है पीने की
- 33:02चीज़ तुम समझना क्यों चाहते हो समझने की चेष्टा में तो सारी उम्र
- 33:09गवा दोगे सर धुन धुन के प्रस्ताव? सर बन जाओगे, आई एस की कुर्सी ले
- 33:24लोगे, सीएमपीएम बन जाओगे, कोई बड़ा सा रुतबा ले लोगे लेकिन क्या
- 33:33वो मिलेगा जिसके मिलने से रोमा रोमा तृप तो हो जाता है?
- 33:43नहीं, मेरे पास रोज़ ऐसे लोग आते हैं और जब स्वयं की समझ काम न
- 33:54करें तो दूसरों के अनुभव से मार्गदर्शन ले लेना चाहिए।
- 34:08कोई सुप्रीम कोर्ट का जज होता है, कोई सुप्रीम कोर्ट का वकील होता
- 34:16है, कोई होशों पर बैठे हुए ओहदेदार होते हैं, जिनको तुम
- 34:29मंत्री कह देते हो? हालांकि ऐसे लोगों का मेरे पास
- 34:35कोई काम नहीं है, जो सत्ता की जगह चौंध में सत्ता का नशा भी है।
- 34:51हैरानी की बात है कि उसके ह्रदय में मेरी बात उतरेगी भी तो उतरेगी
- 34:56कैसे? लेकिन किसी किसी के उतर जाती है
- 35:03इसलिए सत्ता के नशे में चूर व्यक्ति।
- 35:08मेरी बात को समझना पड़ेगा वो मेरी किताब को कहेंगे तू ले जा बस हमें
- 35:21तो गद्दियों में मज़ा आता है पलकों की गलियों में।
- 35:28चेहरे बहारो के हँसते हुए। पलकों की गलियों में चहरे।
- 35:39बहारों के हँसे हुए हैं मेरे ख्वाबों के क्या क्या नगर इनमें
- 35:49बस्ते हुए? ये जो कुर्सी हैं ना, जो
- 35:56पार्लियामेंट हाउस में लगी हैं वो सेम प्ले हाउस में लगी हैं बस यही
- 36:03मेरी जान, यही मेरी ज़िन्दगी यही मेरा अरमान।
- 36:10पलकों की गलियों में। चेहरे बहारों के हँसते हुए हैं
- 36:21मेरे। ख्वाबों के क्या क्या?
- 36:29अगर इसमें बसते हुए मेरे ख्वाबों के हसीन सपने इन्हीं कुर्सियों
- 36:41में दफन मुझे भी लेने दे। ये उठे ये सुबह आ चले ये झुके शाम
- 37:00ढले। ये उठे सुबह हो चले ये झुके शाम
- 37:12ढले मेरा जीना मेरा मरना इन्हें पल।
- 37:22ओह, के तल तेरी आँखों के शिवादों ने यहाँ रखा क्या है?
- 37:36इन गद्दियों के सिवा दुनिया में रखा क्या है?
- 37:47ये उठें सुबह चल ये झुकें सांडले मेरा जीना मेरा मरना।
- 38:05ही नहीं फल को के तले तेरी। आँखों।
- 38:15के। सिवा ने यहाँ में रखा क्या है?
- 38:26मत उलझा मुझे संसार पर इनको पक्का पता है कि संसार में कुछ नहीं है,
- 38:33परमात्मा में कुछ नहीं है ये जानते हैं मेरे पास आके लोग
- 38:39प्रश्न कर लेते हैं। प्रश्न नहीं कमेंट कर देते हैं।
- 38:47मैं कहता हूँ अरे तू तो पहले से ही पहुंचा हुआ है।
- 38:53आज कल बेरोजगारी का मौसम है, अपना चैनल खोल ले, बढ़िया चलेगा।
- 39:02तेरा तो कमेंट ही लाजवाब है तू बाबा बन जा बाबा बनने में कुछ
- 39:13नहीं लगता बस चोंगा पहन ले माना मैं दे दूंगा तुझे।
- 39:26तुम समझना चाहते हो पुत्र, लेकिन साफ साफ बात ये है समझ तो मैं भी
- 39:34नहीं पाया तो फिर मैंने पी। और जैसे ही मैंने एक भून पी, वैसे
- 39:48ही मैं दीवाना। हूँ।
- 39:56बस फिर मैं पीता ही चला गया, पीता ही चला गया।
- 40:07और पीते ही पीते इस संसार से जुदा हो गया और पीता ही पीता इस संसार
- 40:16से विदा हो जाऊंगा। मैं ये सोच कर।
- 40:26उसके डर से उठा था कि वो रोक लेगी, मना लेगी मुझको हवाओं में
- 40:43लहरा था। आता था दामन कदामन पकड़ के बिठा
- 40:56लेगी मुझको कदम में से अंदाज से। उठ रहे थे की हवा जो देखकर बुला
- 41:15लेंगे मुझको मगर उसने रोका। ये कुर्सियां तुम्हें रोकेंगे ना?
- 41:29इनमें ज़िन्दगी नहीं है ये मुर्दा कुर्सियां तुम्हें बुलाएंगे नहीं।
- 41:38इनमें जीवन चेतना नहीं है, तुम ही जाते हो इनकी तरफ ये तुम्हें नहीं
- 41:43बुलाते। मगर उस ने रोका ना वापस बुलाया ना
- 41:57दामन ही पकड़ा। ना मुझको बिठाया, नवाज ही दी ना
- 42:10वापस बुलाया मैं आहिस्ता। बढ़ तहाई आया यहाँ तक कि उससे
- 42:29जुदा हो गया, जुदा हो गया मैं। जुदा हो गया मैं।
- 42:43काश काश तुम इस बात से कुछ समझ सको संसार में खींचता नहीं संसार
- 42:54में बलता नहीं हूँ संसार में उलझता।
- 43:00तुम ही खींचे जाते हो तुम ही स्वयं जाते हो तुम ही इन गददियों
- 43:06को चाहा इन गददियों ने कभी नहीं चाहा इसलिए रोज़ मालिक बदले कल इस
- 43:15गद्दी पर कोई। आज कोई और कल कोई और होगा।
- 43:23ये गद्दियाँ तुम्हें बुलाती कहाँ है?
- 43:28ये तो बेज़ुबान है। यह अचेतन है।
- 43:35इनमें पुकारने की क्षमता भी नहीं, इनके भीतर पुकारने के यंत्र भी
- 43:42नहीं। तुम ही तो खींचे चले जाते हो इसकी
- 43:45तरफ और तुम भ्रम में हो। तुम भ्रम में हो कि शायद कदियाँ
- 43:53हमें भला रहे हैं। कभी माँ गंगा किसी को बुलाती है
- 43:57तुम पागल हो गए हो तुम ही जाते हो अगर स्नान करना, मैल धोना तो जाओ
- 44:08अन्यथा किसने किसको पुकारा? तुम्हें लगता है कि संसार तुम्हें
- 44:22बनाता है? तुम्हें लगता है कि शायद इस संसार
- 44:27को तुम्हारी जरूरत है? ये धोखा मत खा जा, यह गलती मत खा
- 44:34जा। संसार तुम्हें कभी नहीं बुलाता और
- 44:37संसार किसी को कभी नहीं बुलाता। संसार तो बस है और वो मेरी
- 44:45क्रियेशन लाजवाब क्रियेशन तुम ही उसकी तरफ खींचे चले जाते।
- 44:57तो फिर किशोर इसका किशोर तुम्हारा जो चीज़ ये समझ में आती नहीं उसको
- 45:14छोड़ देना ही अच्छा। है।
- 45:26जो रस्में जो रिवाज़ प्यार में बाधा बने उनको छोड़ देना बेहतर
- 45:37है। तुमको संसार के सर लोगों ने
- 45:43सिखाया कि वह समझ में आ जाता है, लेकिन भूल मत जाना।
- 45:47वो सब्जेक्ट होता है जो समझ में आ जाए, विषय समझे जा सकते हैं, रस
- 45:56समझा नहीं जा सकता। रस नाम ही ये है कि वो पीना होता
- 46:01है। तुम्हारे सर लोगों ने सिखाया कि
- 46:09समझो समझने से ही तुम्हे गद्दियाँ मिलेंगी।
- 46:14समझने से ही तुम आया बनोगे, कॉम्पिटिशन पास कर पाओगे, तुम
- 46:21क्या समझते हो ये? आई एस का एग्जाम पास करने वाले यु
- 46:26पीएससी वगैरह ये समझदार लोग होते हैं महामूर्ख होते हैं क्योंकि
- 46:32उन्होंने न्यूरॉन को भर लिया है। दे नो एवरीथिंग लेकिन काश।
- 46:43जानकारियां ही परमात्मा के पास पहुंचा देती नहीं, यह रास है यह
- 46:52जानना नहीं होता। यह बिना होता है और यह बिल्कुल
- 46:56अलग प्रभाषा लगेंगी तुम्हें लेकिन मैं क्या करूँ?
- 47:01समझ में तो मेरे भी नहीं आया। समझाया तो मुझे भी लोगों ने था,
- 47:14लेकिन वह समझ में आता बाद में पता चला।
- 47:22जब उत्कंठा इतनी गहरी हो गई उसने उसने पता नहीं कौन था वो मेरे
- 47:32लबों पे आकर मैं का जाम रख दिया और मैं गटा गट भी गया।
- 47:40तारूफ रोग हो जाए तो उसको हो भूलना बेहतर हारुफ।
- 47:58रोग हो जाए तो उसको बोलना बेहतर ताल्लुक बोझ बन जाए।
- 48:14तो उसको छोड़ना अच्छा वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन।
- 48:35उसे एक। खूब सूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा
- 48:47चलो एक बार फिर से। अज न भी।
- 48:54बन जाए हम दोनों चलो एक बार फिर से अज न भी बन जाए हम दोनों।
- 49:12कहो इन सूचनाओं से के जो रोग हो गयी है तुम्हारे लिए बोझ हो गयी
- 49:24है चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाये हम।
- 49:31तुम अपने घर चलो, हम अपने घर चलते हैं और तुम्हारा घर यह खोपड़ी में
- 49:37इनको यहीं पर पड़े रहने दो, तुम अपने घर की ओर रुख कर लो।
- 49:50रुख से ज़रा नकाब उठा दो मेरे हजूम।
- 50:05रुख से ज़रा नकाब उठा दो मेरे हजूम चेहरा चेहरा।
- 50:24फिर एक बार दिखा तू मेरे हजूर। ये जीना जीना सफलता जो तुम्हारे
- 50:39और पिया के बीच में है। यह नकाब को हटा दो रुख से ज़रा
- 50:50नकाब हटा दो मेरे हज़ूर पर्दा अटक।
- 51:03चेहरा फिर एक बार दिखा दो मेरे हजूर मैं तुम से अलग हो गया था,
- 51:11मैं तुम से अलग हो गई थी लेकिन फिर से मैंने तेरा द्वार आज
- 51:22खटखटाए। अब कृपा करो अब इसे नकाब को हटा
- 51:29दो, एक बार चेहरा देख लो उसका उस रस्ते पे चलो एक खोपड़ी के भीतर
- 51:44पड़ी हुई सूचनाओं को अलविदा कह दो।
- 51:51इनको बाहर नहीं फेंकना है। इनसे दूर निकल जाना है।
- 51:58दू इनको छोड़ कर तुमने रास्ता मोड़ लो अपना।
- 52:04मुख्य दूसरी ओर ले पलट लो अपनी दिशा को और तुम इससे दूर निकलते
- 52:15चले जाओगे, दूर निकलते चले जाओगे, दूर निकलते चले जाओगे तो 1 दिन
- 52:20इससे जुदा हो जाओगे तुम। जहाँ तक के उससे जुदा हो गया,
- 52:38जुदा हो गया। मैं जुदा हो गया।
- 52:48इन सूचनाओं से अलग हो जाओ, ठीक भरी होगी तुमने किसी कारण, लेकिन
- 52:56अब कुर्सी मिल गई, कुर्सी को भोग लिया, पदार्थ इकट्ठे कर लिए, बैंक
- 53:00बैलेंस हो गया, जमीन जायदाद कमा ली कम ने।
- 53:06तब थोड़ा सा रुख को मोड़ लो, रुख को अपने घर की ओर मोड़ लो, जीस घर
- 53:14को छोड़कर कभी तुम याद करो याद करो।
- 53:24तुमने जब वो घर छोड़ा था अपने और तुम छोड़ तो आये, लेकिन एक पल भी
- 53:32उसकी याद के बिना तुम जी नहीं सके यही तुम्हारा दर्द है, तुम जीसको
- 53:38दुख कहते हो। तुम्हें सब मिल जाता है संसार में
- 53:43लेकिन तृप्त तुम फिर भी नहीं होते कमी क्या है?
- 53:46कमी है जीसको छोड़कर आए थे वहीं जाना होगा।
- 54:00वहीं है। तृप्ति कबीर कहते हैं, जब आवे
- 54:10संतोष धन सब धन, दूध समान तुम्हारी सब।
- 54:19इकट्ठे की हुई सूचनाएं, कमाए हुए धन, पद्वियाँ, मान सम्मान सब
- 54:25व्यर्थ हो जाता है। जहाँ तृप्ति है वह गो धन, गज, धन
- 54:35वाज धन और रत्न, धन कौन? इशारे धन तुम्हारे पास हो, गो धन
- 54:43गज धन वाज धन और रत्न धन खान जब आ गए संतोख धन पहले सभी धनों से
- 54:54संतोष नहीं मिलता। गो धन गज धन वाज धन और रतन धन खान
- 55:03रत्नों की खान भी हो, जब आवह संतोख, धन सब धना दोढ़ा समाज तो
- 55:14तृप्ति कहाँ है? बस वह तृपती ही तुम्हें रोज़
- 55:18बुलाती है, हर पल तुम्हें बुलाती है वो अनाथ जो चौबीसों घंटे
- 55:24तुम्हारे भीतर चलता है, तुम्हें पता ही नहीं के यह तुम्हें क्या
- 55:28संदेश दे रहा है, वह तुम्हें कहता है।
- 55:37आ? लोट के आजा मेरे मी आ लोट के आजा
- 55:49मेरे मी। तुम्हे मेरे की बुलाते हैं, मेरा
- 55:59सोना पड़ा रे संगीत मेरा सोना पड़ा रे संगीत तुझे।
- 56:10मेरे भी बुलाते हैं आ लौट के आजा। मेरे में।
- 56:31वह मीत तुम्हें बुलाता है और तुम्हारा सारा दुख तुम सोचते हो
- 56:39गद्दी नहीं है इसलिए तुम सोचते हो कि शायद गद्दी नस्मी हो जाए।
- 56:49और तुम गलती मत खा जाना कि देखो ये बार बार गद्दियाँ मांगते हैं,
- 56:56क्यों मांगते हैं? इसमें बहुत रस होगा, तुम गलती खा
- 56:59जाते हो, रस नहीं गद्दी पर बैठे हुए व्यक्ति जो दुष्कर्म कर देता
- 57:05है, फिर वो उगड़ेंगे। तो इनके किरला फंस जाएगा।
- 57:11बस इसके लिए डरते हैं इसलिए गद्दी छोड़ नहीं सकते।
- 57:19यह मजबूरी है इनकी देख तो लिया इन्होंने गद्दी का स्वाद, लेकिन
- 57:25अब। जो गद्दी के नशे में हमने पाप
- 57:27किये थे, उनका हिसाब भी तो देना होगा।
- 57:31वह जो गुल्ला फंसेगा उसका क्या करेंगे?
- 57:42उससे डर लगता है। अगर ये सूचनाएं अगर यह तुम्हारी
- 57:58समझ जिसे कहते हो समझ आई नहीं समझ वादा है रस को पीने इन शब्दों को
- 58:08गोलाकार कर लो सर्कल। समझ वादा है रस को पीला या तो समझ
- 58:16लो या रस को पी लो हमारी जानकारियां ये तुम्हारी सूचनाएं
- 58:29तुम्हारी जी का जंजाल बन के और तुम्हें इनको छोड़ना आता है।
- 58:37बड़ी मुश्किल बात है तुम इन्हें सूचनाओं को एकत्रित तो कर लोगे
- 58:43नूरों में, लेकिन फिर इनसे पीछा छुड़ाना मुश्किल हो जाएगा।
- 58:48कैसे भूलोगे सर लोगों की ये ही तकलीफ है।
- 58:53मेरे पास बहुत से लोग आ जाते हैं। बाबा पीएचडी हाँ एमएससी हाँ,
- 59:02लेकिन अब इन सूचनाओं से पीछा कैसे छुड़ाए, यह मुश्किल हो जाता है।
- 59:11तुम्हें रास्ता पता नहीं होता जोड़ तो तुमने नहीं?
- 59:17जैसे धन जोड़ लिया लेकिन इसको छोड़ना बड़ा मुश्किल हो जाता है।
- 59:23तारुफ रोग हो जाए तो उसको बोलना बेहतर।
- 59:37तालुक बो ओझ बन जाए। तालुक चपका हटे क्लिंगिंगनेस ये
- 59:50बोझ बन गई तुम्हारे पे है भी बोझ। ताल्लुक बोझ बन जाए तो उसको भूलना
- 1:00:07बेहतर। वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न
- 1:00:19हो हो मुमकिन। ऐसा गीत जिसे अंत न दिया जा सके।
- 1:00:30रुक गया। कहीं बीच में आके और सभी अफसाने
- 1:00:34रुक जाते हैं। कभी किसी ने पूरा अफसाना लिखा है
- 1:00:38हम गलती में कभी किसी ने पूरा अफसाना लिखा वो लिखा जाता नहीं।
- 1:00:47लिखा लिखी की है। नहीं देखा देखी बात दूला दुल्हन
- 1:00:52मिल गए तो फीकी पड़ी। बात हो।
- 1:01:00अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन।
- 1:01:11उसे एक खूब सूरत मोड देकर छोड़ना। अच्छा, बस उसे छोड़ दो एक खूबसूरत
- 1:01:27मोड देकर छोड़ दो। ये पूरा तो नहीं हो सकेगा?
- 1:01:33कोई अफसवना कभी किसी का पूरा हुआ नहीं।
- 1:01:39तुम सोचते हो कि पूरा हो गया, लेकिन कहाँ पूरा होता है?
- 1:01:50कमर झुक जाती है वृद्ध हो जाते हो एक लकड़ हरा लकड़ियां लेने जाता
- 1:01:57था, कमर झुक गई, व्रत हो गया, बाहर उठाया नहीं जाता था 1 दिन
- 1:02:03गट्ठर बांध लिया मजबूरी क्या करें?
- 1:02:09पुराने जमाने की बात तो सोचा ये भार अब ढोया नहीं जाता, अब तो मर
- 1:02:23ही जाऊं तो अच्छा हे परमात्मा तू मुझे मोत दे दे।
- 1:02:29और परमात्मा तो तुम्हें पता है ऐसे कामों के लिए क्षण भर लगाता
- 1:02:33है तो परमात्मा तो आ गया हाँ बच्चा बोल वो तो थर्रा है।
- 1:02:43अरे तू आ गई क्या? बोलो आदमी बड़ा होशियार है, कमर
- 1:02:56झुक गई है बाहर उठाया नहीं जाता। मौत मांगने से मौत सामने आ गई।
- 1:03:11तो कहता है प्रभु क्षमा करना आपको तंग किया, वृद्ध हूँ, कमर झुक गई
- 1:03:17है, थोड़ा सा गठड सिर पे रख दो, हाथ लगा के मरना तुम फिर भी नहीं
- 1:03:25चाहते। और जब तक मरना से तुम चिपक न
- 1:03:36जाओगे लड़ मरने को तुम गृहस्थ में न लेके आओगे तुम ईद न मनाओगे तुम
- 1:03:45गल से न लगोगे। मरने के गल से न लगोगे, तब तक वह
- 1:03:51नहीं मिलेगा जो मरने से पार मरो है।
- 1:03:58जो की मरो मरो, मरण है मीठा ऐसी मरने मरो जीस मरने मर गोरे।
- 1:04:10ये मरना बड़े काम का है, लेकिन काश तुमने सही मरना सीख लिया
- 1:04:15होता, तुम मरते भी हो तो गलत मरते हो, तुम कांपते हुए मरते हो।
- 1:04:25सारे जीवन भर की कमाई हुई चीजें तुम्हें छोड़नी पड़ती हैं और तुम
- 1:04:30गलती कर बैठते हो कि तुम इनको अपना मान बैठते हो, जबकि तुम्हारे
- 1:04:36सगे जाती हैं। तुमने सोचा था कि शायद प्रिया
- 1:04:41मेरे साथ चल। मेरे पुत्र, पुत्रियां मेरे साथ
- 1:04:47जाएंगी, मेरे रिश्तेदार, सगे संबंधी मित्र मेरे साथ ही जाएंगी,
- 1:04:52लेकिन कोई नहीं जाता। आजकल तो कंधा भी कौन देता है?
- 1:04:58आजकल तो एंबुलेंस ले जाती है। इतना भी कष्ट कोई नहीं करता है।
- 1:05:10अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना हो नमकीन उसे एक खूबसूरत मूड देखकर
- 1:05:17छोड़ना अच्छा। चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं,
- 1:05:24हम दोनों कहो सूचनाओं से कहो, समझ से इसे समझना चाहते हो तुम पुत्र
- 1:05:33बुशर कहो इससे के चलो आज फिर? हम एक दूसरे के प्रति अजन्म भी हो
- 1:05:41जाते हैं। तुम्हारी उलझन दोतर है।
- 1:05:53एक उलझन तो ये है कि ये सूचनाएं तो मैं खसती हूँ।
- 1:06:00और प्रत्येक पल तुम्हारे भीतर से यह उठता है कि मैं और जोड़ लूँ,
- 1:06:05मैं और जोड़ लूँ, तुम जोड़ना चाहते हो, और संत कहते हैं अप्रिय
- 1:06:09ग्रह जोड़े मत, वह धन हो चाहे सूचनाएं।
- 1:06:16क्योंकि वो जानते है कि ये बाद में छोड़नी मुश्किल हो जाएगी।
- 1:06:23लेकिन करे क्या? बेरोजगारी है भाई बाल बच्चे पैदा
- 1:06:29कर लिए। पढ़ाने लिखाने यमन यापन करने के
- 1:06:36लिए और खुद भी तो इतने समझदार नहीं और उधर से वो खींचता है जहाँ
- 1:06:46से अलग हो के आये थे चल हंसा उस देश समुद्र जहाँ होती है वह भी
- 1:06:52खींचता है तुम्हें। असल में रोग ये है तुम्हें असल तो
- 1:07:00रोग ही ये है कि वह खींचता है जहाँ से अलग हो के आए थे और हर
- 1:07:07ऊपर खींचता है। जीस पिता से पुत्र अलग हो के जाता
- 1:07:14है वह पिता आपकी बात में होता है, हर वक्त कब लौटोगे।
- 1:07:27बरसे गगन मेरे, बरसे नयन देखो तरसे है मन?
- 1:07:34अब तो आ जा बरसे गगन मेरे बरसे नयन देखो तरसे है मन अब तो आजा
- 1:07:49शीतल पवन ये। लगाये आंगन ओह सजन अब तो मुखड़ा
- 1:07:59दिखा जा, तुने भली रहने भाई प्री। बड़ा अच्छा किया था।
- 1:08:10बड़ी प्रीतन भाई का? तुने भली रे निभाई पर तुझे मेरे
- 1:08:19गीत बुलाते। मेरा सुना पड़ा रे संगीत मेरा
- 1:08:36सुनना पड़ा रे संगीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं।
- 1:08:46आलो के आजा मेरे में। तो इन सूचनाओं से जहाँ से पकड़
- 1:08:58तुमने बना ली है, इनसे पीछा छुड़ा लो बड़े शोक से।
- 1:09:10इसको लेके आये थे तुम सूचनाओं को एकत्रित किया था।
- 1:09:15कितने चैनल खंगाली ढूंढा, कितनी शक्ति वैकी बड़ी मुश्किल से
- 1:09:23सूचनाएं जुटाई थीं। लेकिन आज छोड़ने पड़ी है बिना
- 1:09:31छोड़े वह उधर से पुकार रहा है वह उलाने दे रहा है।
- 1:09:42तुने बड़ी रे निभाई? प्रे बड़ी अच्छी प्रीत न भाई
- 1:09:49तुने। इक पल है रोना इक पल है हसना कैसा
- 1:09:59है जीवन का खेल? एक पल है हसना एक पल है रोना कैसा
- 1:10:12है जीवन का खेलना एक पल है मिलना। एक पर बिछड़ना दुनिया है 2 दिन का
- 1:10:27मेला दुनिया है 2 दिन का मेला ये घड़ी।
- 1:10:39ना जाए भी। देखिए सभी कुछ है, सीन तैयार,
- 1:10:50दुनिया है 2 दिन का मेला। एक बीत गया एक बाकी उमरे दराज
- 1:11:10मानकर लाए थे चार रोज़ उमरे दराज मानकर लाए थे चार रोज़।
- 1:11:20दो आरजू में कट गए दो इंतजार में। ये घड़ी न जाए।
- 1:11:36अब बड़ा माहौल है इस माहौल को गवां मत देना।
- 1:11:47तुझे मेरे में बुलाते हैं, मेरा सुना पड़ा रे संगीत।
- 1:12:00मेरा सुना पड़ा रे संगीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं, आ लौट के
- 1:12:13आजा मेरे में। इन सूचनाओं से कलिंग न छोड़ो।
- 1:12:32भ्रम बहुत तुमने तोड़ दिए। यह कागज की मूर्तियां जिन्हें
- 1:12:38भगवान की तरह माना था, यह कागज के फूल निकले।
- 1:12:44यह ब्रश केक के फूल हैं। इनके भीतर से खुशबू आती है।
- 1:12:50तुमने हर चीज़ नकली नकली तैयार कर ली गद्दियाँ राज़ तुमने नकली नकली
- 1:12:56तैयार कर दिया जबकि राज़ तो भीतर है तुम्हारे।
- 1:13:02जहाँ जाकर तुम्हारा रोवा रोवा के जाता है आनंद करस पीते हो तुम
- 1:13:08बदहूशी के आलम में खो जाते हो तुम वो घड़ी राज़ की होरी होती।
- 1:13:15है। तब करते हो तुम राज़ यहाँ हुक्म
- 1:13:18देना राज़ नहीं होता। जहाँ राज़ होता है।
- 1:13:21हुक्म है अंदर सबको बाहर हुक्म न कोई यह सत्य है और तुम सत्य के
- 1:13:29विपरीत हाकम। बनके बैठ जाते हो?
- 1:13:31इसलिए दब पाते हो? हुक्म।
- 1:13:36में अंदर सबको बाहर हुक्म है, न को न।
- 1:13:40न को हुक्म है। जे बुझे ता हूँ मैं कहे न को फिर
- 1:13:45मैं मैं हूँ तो मुमकिन है यह कोई नहीं कहेगा।
- 1:13:51काश तुमने उस हक्म को देखा होगा जो असली है।
- 1:13:56तुमने नकली हाकम देखा है? नकली हाकम, चाहे परमात्मा के रूप
- 1:14:05में देखा हो। चाहे गुरू के रूप में देखा हो,
- 1:14:10गुरू। भी नकली हाकम है।
- 1:14:15या ढेरों के गद्दी नशीं जिनको तुम परमात्मा मानते हो लेकिन काश वो
- 1:14:24परमात्मा होते हैं वो तो मूर्ख हैं, अव्वल दर्जे के मूर्ख हैं।
- 1:14:34असली परमात्मा को देखो जो तुम्हारे भीतर।
- 1:14:37बसता है तुम। नकली नकली चीजें बना लिए हों।
- 1:14:44हर चीज़ तुमने नकली बना ली है, राज़ गद्दियाँ तुमने बाहर नकली
- 1:14:49बना ली जब भी है, तो भी कर। सुख तुमने बाहर सुख के साधन
- 1:14:55बढ़िया। पिल्लोज बना के बाहर।
- 1:14:56बना लिए, जबकि असली सुख का स्वाद तो भीतर है वह आनंद का।
- 1:15:06रस तो तुम्हारे भीतर है। समझने की चेष्टा मत करो, पुत्र।
- 1:15:16अगर तुम समझना। ही जाते हो।
- 1:15:20तो फिर तुम समझने की चेष्टा करने के लिए कोई और गुरु तलाश लो
- 1:15:25पुत्र। मैं तो तुम्हें नहीं समझा पाऊंगा।
- 1:15:29बिलकुल ईमानदार हूँ। मेरे में ज़रा भी त्रुटि नहीं है
- 1:15:33बेबानी नहीं समझ तो मेरे भी नहीं आएगा और मैंने समझने की।
- 1:15:42चेछा भी नहीं की। और मैंने जरूरत भी नहीं समझी।
- 1:15:51आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक कौन जीता।
- 1:15:55है। त्रिजुल्फ के सर होने तक मैंने तो
- 1:16:00उसे गटा गटा बोल लिया। कौन मूर्ख उसे समझने की चेष्टा
- 1:16:05करेगा? जो समझने की चेष्टा प्रब।
- 1:16:09सबडा मुर्ग कोई है? वह पीने।
- 1:16:15की चीज़ है वह। गटकने की चीज़ है।
- 1:16:20उसका लुत्फ उठाओ। वह लुत्फ लेने की चीज़ है।
- 1:16:24वह लज्ज़त लेने की चीज़ है, उसकी लज्ज़त उठाओ।
- 1:16:35ये घड़ी न जाए। भी ये घड़ी।
- 1:16:44न जाए भी। तुम्हें।
- 1:16:49मेरे गीत बुलाते हैं मेरा सुना फड़ा रे संगीत मेरा सुना।
- 1:17:02फड़ा रे संगीत। तो मैं मेरे गीत।
- 1:17:08बुलाते हैं हालों के आजा। मेरे।
- 1:17:15में धन्यवाद।