Latest / Baba ji Vijay Vats / 20 Jul 25 - क्या राधे राधे करने से किडनी ठीक हो जाती है? क्या है अध्यात्म की खोजें? क्या सच क्या झूठ?
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- 0:03चौपड़ा फैमिली बाबा जी प्रेमानंद जी महाराज ने कभी ये नहीं कहा कि
- 0:16राधे राधे ने उनकी किडनी ठीक कर दी।
- 0:21ये कहते हैं कि ये तुम्हारी पापों का फल है, लेकिन राधे राधे करके
- 0:32भगवान तुम्हें ये दुख सहने की शक्ति दे देंगे।
- 0:40तुम दुख में भी सुखी रहने की कला सीख जाओगे।
- 0:48पुत्र मैं भी तो यही कह रहा हूँ राधे राधे कहने से।
- 0:58दुख को सहन करने की शक्ति भगवान नहीं देता तुम्हे और दुख में भी
- 1:05सुखी होने की यह कोई कला भी नहीं है।
- 1:11जो तुम कह रहे हो बेटा, वो ही मैं कर।
- 1:15मेरा गणित सीधा सीधा है दो और दो छः नहीं होते, किसी भी हिसाब से
- 1:21से नहीं होते राधे राधे कहने से सिर्फ़ तुम्हारा ध्यान?
- 1:35तुम्हारे दुख से परिवर्तित हो के राधे राधे में लग जाएंगे एक
- 1:46राजनीतिक प्रयास। और आजकल ऐसे प्रयास हो रहे हैं
- 1:56पिछले जन्म में तुम क्या थे ये पूछ लो, क्यों पूछ लो और पूछा हुआ
- 2:05कितना सच होगा, यह कौन बताएगा यह भी तुम्हें ही बताओगे।
- 2:20मैं भी यही कहता हूँ राधे राधे कहने से गुर्दे ठीक होने की तो
- 2:26बात ही खत्म करो, ये तो मैं भी नहीं कहता हूँ।
- 2:33राधे, राधे या कोई भी नाम? अल्लाह हो, राम हो, रहीम हो, वाहे
- 2:43गुरु हो, कोई भी नाम जपने से तुम्हारे भीतर सहन शक्ति की
- 2:49मात्रा बढ़ती है, सिर्फ तुम्हारा ज्ञान प्रवर्तित हो जाता है।
- 3:01ये राजनीति की चार है। जैसे तुम कहते हो के रोजगार तो
- 3:13तुम कहते हो मैं हगाई ज्यादा है। तुम कहते हो शिक्षा दो, बीमार
- 3:20हैं, इलाज करो और राजनीतिक कहते हैं, हाँ 2047 में कर देंगे दिल
- 3:35के बहलाने को गालिब यख्याल अच्छा। तुमने कभी भूख के बारे में तो
- 3:43पूछा नहीं के महामानव भूख तो आज लगी मिटाओगे 2000 संताली में जहाँ
- 3:58बना रहेंगे हमारे बच्चे होंगे। तुम्हारी समस्याओं को ऑल्टरनेट
- 4:18मोड पे रखा जाता है, रिफ्लेक्ट किया जाता है।
- 4:25दूसरी दिशा में सीधेसीधे समस्याओं के पास है नहीं।
- 4:34कृष्ण तुमसे कहीं ना कहते राधा राधा कचब करो सारी गीता में एक
- 4:39शब्द भी दिखला दो जो शब्द तुम निकालोगे।
- 4:48वो इतने बच्चे गाना होंगे कि उसका अर्थ तुम जानते नहीं हो।
- 4:52बस इतना ही मैंने शादी की तो बांछ और एक बार नहीं अनेकों बार बांछ
- 5:03दी उपनिषद बांछ दी, कहीं कोई शब्द ऐसा नहीं आया।
- 5:12की जाप करने से परमात्मा तुम्हे सहनशक्ति दे देगा, तुम्हारा ध्यान
- 5:22परिवर्तित हो जायेगा। तुम्हारा पांव दर्द कर रहा है।
- 5:31अभी ध्यान बार बार उतर जाता है। इतना दर्द कर रहा है जिसका हिसाब
- 5:41कोई लेकिन अचानक से तुम्हारी दाड़ में दर्द होना शुरू हो जाता है
- 5:48ध्यान से सुनना बात। पांव में दर्द है, भारी दर्द है,
- 5:56इतना भारी कि पल भर के लिए तुम वहाँ से ध्यान नहीं उठा सकते और
- 6:05अचानक से तुम्हारी अक्ल दाँड़ में दर्द होना शुरू हो गया।
- 6:11तुम देखना, पुत्र जो बड़ा फैम्ली तुम पाम दर्द को भूल जाओगे पुत्र,
- 6:30तुम दाढ़ दर्द को याद रखोगे, तुम कहोगे दाढ़ दर्द क्योंकि वो
- 6:35खतरनाक है। वो हमारे ब्रेन के रिसेप्टर्स के
- 6:41करीब पड़ता है, दाड़ पान दूर पड़ता है, छोटे दर्द को मिटाने के
- 6:53लिए बड़े दर्द उत्पन्न किये जाते हैं।
- 6:57दर्दो का इलाज नहीं किया जाता। से ही प्रेमानंद करें और क्या
- 7:05करें जीस पंच होते के शरीर को बताना चाहिए कि मैं हूँ नहीं।
- 7:16रमन ने बताया बुद्ध ने बताया महावीर ने बताया कृष्ण ने बताया।
- 7:29और उससे दो कटेंगे। इनमें से किसी ने कहा राधे राधे
- 7:39कर लिया और राम राम कर लिया काम तुम्हारे दाड़ में दर्द हो।
- 7:49तुम देखना कभी पांव का दर्द तुम भूल जाओगे तत क्षण यद्यपि पांव
- 7:55में दर्द होता है, अब पर भूल जाओगे क्योंकि बड़ा दर्द शुरू हो
- 8:04गया। तुम्हारा पर्स हो गया है और तुम
- 8:20उसे ढूंढ रहे हो विचारों के बवंडर उठ रहे हैं तूफान आ रहा है जा रहा
- 8:31है। और अचानक से कोई आ गया तुम्हारी
- 8:35शादी पे प्रस्तोल तुम पर्स को भूल जाओगे क्योंकि बड़ी आफत तक है।
- 8:53और कुछ नहीं है। आग लगी है पानी से बुझे या आग को
- 9:03बुझाने के संयंत्र प्रयोग करने होंगे।
- 9:12सीधा सीधा फॉर्मूला ये लोग आजमाते हैं।
- 9:15बताते नहीं क्यों? क्योंकि जानते नहीं ऐसे बुद्धू
- 9:21लोगों ने आध्यात्मिकता की पतवार अपने हाथ में ले रखे।
- 9:33तुमने पूछ लिया पुत्र मैंने बता दिया अन्यथा मेरे को यार आध भी न
- 9:42होता, ये शब्द भी तो गलत है तुम्हें?
- 9:56कि प्रेमानंद जी कहते हैं कि मेरी कैटरिंग से ठीक हुई, यह तो मेरे
- 9:59बाप का फल है। चलो एक बात तो मानी कि मैंने पाप
- 10:04किया तो मेरे बुर्दे फैल हो गए, वो तो कभी किया था ठीक और जो आप
- 10:12कर रहे हो वो वो दिखाई नहीं पड़ता।
- 10:17लाखों, लाखों की संख्या में लोगों को गुमराह करना पाप नहीं तो और
- 10:21क्या? और जो तुम खुद नहीं जानते उसका
- 10:29प्रसार करना पाप नहीं तो और क्या होता है दूसरों को गुमराह करना
- 10:37कुराह में डालते हैं। गलत मार्गदर्शन करना यह पाप नहीं
- 10:43है, क्या मैं भी यही कहता हूँ पुत्र क्या तुम्हें समझाने में
- 10:56असफल रहा हूँ क्या तुम समझे नहीं सकते।
- 11:04कोई तो बात है जो फासला बना रहा? बाबा जी प्रेमानंद महाराज ने कभी
- 11:29भी नहीं कहा कि राधे राधे करने से उनकी क्रिटिसिज्म ठीक हो गए।
- 11:36वो तो कहते हैं ये तो मेरे पापों का फल लेकिन अगर राधे राधे करोगे
- 11:46तो तुम्हारे पिता इम्युनिटी बढ़ जाएगी।
- 11:51सहन शक्ति बढ़ जाएगी। दुख को सहने की शक्ति बढ़ जाएगी।
- 11:58आओ इसी पर विचार कर लेते हैं किसी तरफ आओ तुम तुम्हें दुख सहने की
- 12:13शक्ति दे देंगे भगवान। तुम दुख में भी सुखी रहने की कला
- 12:20सीख जाओगे तो पुत्र तुम सीख गए पहले तो तुम इससे शुरू कर देते
- 12:30हैं। दुख में सुखी रहने की कला तुम सीख
- 12:35गए। जाके तुमने राधे राधे किया ही
- 12:38नहीं आज आध्यात्मिकता का मजाक बनाया जा रहा है अध्यात्म था
- 12:56स्वयं को खोजना। इन्होंने राधा को खोजना शुरू कर
- 13:07दिया। अध्यात्म की खोज अध्यात्म की खोज
- 13:19स्वयं की खोज है और तुम स्वयं। अपने अंत में विराजमान तत्व हो और
- 13:33जहाँ वस्तु होती है वहीं खोजने होती है।
- 13:40तुम हो भीतर। राधा है बाहर कभी हुई थी और
- 13:50शस्त्र प्रमाण तो ये भी नहीं कहते की वो हुई थी, लेकिन मैं
- 13:58शास्त्रों को पहले भट्ठी में डाल के फिर तुमसे बात किया करती हूँ।
- 14:05शास्त्र मेरे लिए किसी प्रकार का संदेह निवारण का साधन नहीं भ्रम
- 14:19को फैलाने का साधन है। अध्यात्म है स्वयं की खोज यह अगर
- 14:31पूछते कि स्वयं की खोज क्यों करें तो प्रश्न जाय था इसलिए करें कि
- 14:40दुख है, संसार में दुख है? अध्यात्म की खोज स्वयं की खोज है
- 14:55और वह क्यों जरूरी है जैसे तुम्हारी भूख के लिए भोजन जरूरी
- 15:03है। हमारी आत्मा जन्मो जन्मो से
- 15:10प्यासी है, तड़प रही है, पुकार रही है चहु और उदासी है, दुख है।
- 15:24संसार दुख है अगर तुम्हें संसार सुख लगता है तो भौंकते रहो, अगर
- 15:37तुम्हें संसार दुख लगता है। तो फिर अध्यात्म का रास्ता पकड़
- 15:42लूँ, अध्यात्म का रास्ता तुम्हें अपने पास ले जाएगा।
- 15:56यहाँ से भटकने के कारण तुम दुखी हुए।
- 16:03वस्तुतः तुम्हारे भटकने का कारण भी यही है कि बाहर के उपत्रों में
- 16:14लिप्त होकर तुमने स्वयं को भरा दिया है।
- 16:24संसार दुःख है और तुम संसार से लिप्त हो इस लिप्तता के कारण तुम
- 16:36भी दुःखी हो यह है सारा संकट तुमपे।
- 16:45तुम दुख के साथ लिपट गए हो चिपट गए हो इसलिए तुमने स्वयं को दुखी
- 16:55मान लिया है। वास्तव में तुम दुखी हो नहीं।
- 17:02ये अति सारी बेहतर की करो ना लॉजिस्ट सीधी सीधी बात थी, तुम्हे
- 17:14भूख लगी है, भोजन दे दो लेकिन तरीके ढूंढ लिए जाए।
- 17:23ब्लैकबोर्ड पे लिख दिया जाए, भोजन या रोटी तस्वीरें बना दी जाएं।
- 17:30ये 36 प्रकार के भोजन स्वादिष्ट व्यंजन प्यास लगी है।
- 17:39ब्लैकबोर्ड पे लिख दिया जाए, एच टू वो जल नीर पानी।
- 17:46क्या उससे प्यास हो जाएगी? समस्या सही है, सांसारिक लोगों की
- 18:05समस्या सही है, समस्या में कहीं कोई गड़बड़ नहीं है गड़बड़ है, इन
- 18:13दो ही व्यक्तियों के मन जरूरी नहीं कि किसी को लालच हो।
- 18:19पैसे का ध्यान रखना किसी को श्रेय लेने का भी लालच हो सकता है।
- 18:31और छोड़ो आपको जानकर हैरानी होगी दूसरों को गुमराह करने का भी।
- 18:39अपना एक मज़ा होता है। दूसरों को दुख देने का भी अपना एक
- 18:46मज़ा होता है। हिटलर को इसी में मज़ा आता था को
- 18:50इसी में मज़ा आता था तो प्रेमानन्द जी महाराज को इसी में
- 18:55मज़ा आता है। ऐसे जीतने भी गुरुजन हैं, उनको
- 19:01इसमें मज़ा आता है दूसरों को भटकाने में, क्योंकि खुद तो जानते
- 19:09नहीं, खुद जानते नहीं। तो नाक कट गई, अब दूसरे नाक को
- 19:20सही सलामत क्यों लिए फिरते हैं? इनके भी काट दो बहाना कोई भी बना
- 19:28दो ये नाक कट गई तो मुझे भगवान का दर्शन हो गया।
- 19:33बस ऐसा ही कुछ कफ़र चलता है इस तथाकथित धार्मिक गुरुभम है इस
- 19:49प्रकार के लोग। एक विशेष प्रकार की साइकोलॉजिकल
- 19:56डिसऑर्डर से घिरे होते हैं। इन्हें हमारी भाषा में खुद को
- 20:05सताने वाले लोग सैडिजन वो खुद को सताते।
- 20:13उनको खुद को सताने में एक तरह का मज़ा आता है।
- 20:18ध्यान रखना एक प्रकार का गंभीर रोग है साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर।
- 20:29दूसरा रोग होता है मैसचेस्ट सैडिस्ट मैसचेस्ट मैसचेस्ट होता
- 20:39है जो दूसरों को दुख देने में है। सुखा महसूस कर जैसे हिटलर मसोरन।
- 20:50जितना भी तानाशा हो, दूसरों को दुख देने में सूख आता है।
- 21:00तुम आज के धर्मगुरु भी लगा सकते हो।
- 21:06नॉन सुसाइडल सेल्फ इंजरी महसोसिस्टिक टेंडेंसीज़ जीस
- 21:21व्यक्ति में होती है दूसरे को हानि पहुंचाएगा।
- 21:28और शायद उसको खुद को ही पता न हो। अपनी बिमारी कई बार खुद को नहीं
- 21:35पता होता। ये साइकोलॉजिकल बिमारी है कुछ
- 21:40ऐसी। और जो सैडिस्ट है वो अपने आप को
- 21:48नुकसान पहुंचाएगा। तुम्हे लगेगा बीच जा रहा है लेकिन
- 21:57नहीं है। वो किसी मेन्टल डिश ऑर्डर से घिरा
- 22:00हुआ है वो अपने आप को नुकसान हो जाएगा।
- 22:07और तीसरा भी व्यक्ति होता है जिसे दोनों चीजों में सुखाता है, स्वयं
- 22:15को दुख देने में सुखाता है और दूसरों को दुख देने में भी सुखाता
- 22:19है। ये जो मज़े की बात है, लेकिन
- 22:22साइकोलॉजिकल डिश होता है। शैडो मैसचेतक बेहेवियर दोनों
- 22:30प्रकार के बेहेवियर करने से उसे सुख मिलता है।
- 22:36दूसरे को भी सताएगा, अपने आप को भी सताएगा।
- 22:43इसको त्याग में मत ले। यह कोई त्याग नहीं है, जो पूर्ण
- 22:53तरह से सवस्थ होगा और न तो दूसरों को सताएगा, न खुद को सताएगा।
- 23:01जीरो और जीने दो, डिव एंड लेट लिव खुद भी आनंदित रहेगा।
- 23:11दूसरों को भी आनंदित रखेगा, खुद भी गुमराह नहीं होगा और दूसरे को
- 23:16गुमराह नहीं करेगा। तो ये लोग साइकोलॉजिकली देश ऑर्डर
- 23:27से पीड़ित लोग हैं और इन्हें खुद भी पता नहीं दे।
- 23:31शुड बी मेंटली ट्रीटेड अब तुम समझ सकते हो कोई व्यक्ति तीर्थ स्थान
- 23:39पर रगड़ रगड़ में आ जाये। और कोई व्यक्ति कह के इसका तो
- 23:44मोक्षधाम हो गया, तुमने मोक्षधाम देखा है भाई क्या होता है तुमने
- 23:50वो स्थान देखा है जहाँ मोक्ष के बाद लोग जाते हैं तो ये क्या है?
- 24:00यह मूड़ता की अभिव्यक्ति है। वे गहरी हैं।
- 24:08ध्यान से सुनने होंगे। मैं राम जी का रोल किया करता था
- 24:16जब श्रीराम बनवा से वापस आते हैं, राजतिलक के लिए आते हैं।
- 24:22तो अयोध्या वासी पलकें बिछा ली हाथ ऐसे कर लेते हैं, छोटे छोटे
- 24:31बच्चे हैं भगवान हमारे हाथों पे पांव रखे हैं।
- 24:42जमीन पर पांव न रखें। बिल्कुल छोटे छोटे बच्चे अब मेरे
- 24:50को तरसा था, एक 2 साल का बच्चा है माँ बाप के कहने से यात्रा की कर
- 24:58दी है। ये कुजला जायेगा ये 7080 किलो का
- 25:05भार न नए बच्चों पे पड़ेगा जख्मी हो जायेगा सिर्फ भावना ही तो सब
- 25:16कुछ नहीं होते। और कई बार भावनाओं व्यक्ति को
- 25:26पागल भी कर देती हैं। तुम्हें पता है प्रेम की भावना के
- 25:30रूप में बहका हुआ व्यक्ति पत्थर मारने लग जाता है।
- 25:40ये साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर। तो मैं उन छोटे बच्चों के हाथों
- 25:45को हटा देता। पांव से जो बड़े लोग थे, जो जवान
- 25:51थे, 30 साल के 25 साल के उनके हाथों के पांव रख देता, पांव में
- 25:58फ्लीट होते थे। हम ढंग से चलते हैं, हमें पता था
- 26:04उन फ्लीटों को अच्छी तरह से देख लेते हैं, कोई कांटा न हो कोई ऐसी
- 26:09गड़बड़ सामग्री न लगी हो जो आँखों को जख्म दे दे।
- 26:16पता है हमें ये तो भावना से ग्रस्त लोग हैं, ये तो रो रहे
- 26:20हैं। भजन भी गाय है रोहीर है आज अचानक
- 26:30द्वार पे मेरे लौट आए श्री राम भजन भी चलता।
- 26:41लोग गाते, नाचते और हाथ नीचे रख लेते हैं।
- 26:48ये उनकी श्रद्धा है, श्रद्धा काम करती है, लेकिन ध्यान रखना।
- 26:58श्रद्धा बाधक भी हो सकती है। अगर श्रद्धा पागना हो जाये तो अंत
- 27:02श्रद्धा पागले करते अब समझो बात को एक विचार होता है, एक भावना
- 27:11होती है विचार बुद्धि करती है, भावना हठ में आती है।
- 27:20लेकिन आध्यात्मिकता न तो विचार में उलझती है, न भावनाओं में
- 27:24उलझती है। आध्यात्मिकता इन दोनों से पार चली
- 27:29जाती है। इन दोनों को क्रॉस कर देती है।
- 27:34वो किसी बाजार से कलिंग नहीं होती और किसी एमोशन से कलिंग नहीं
- 27:38होती। जो इन दोनों से पार हो गया वह
- 27:46मुनि मन के पार बियॉन्ड दी माइंड वह उन्मुनि दिशा में आया।
- 28:00राधे राधे करने से उन्मनी दिशा में वित्तीय आदर सिर्फ क्या होगा?
- 28:07राधे राधे राधे करते रहो यू विल बी एनर्जीलेसनेस एट 01:00 टाइम?
- 28:16एक वक़्त आएगा जब तुम्हारी वितृश शक्ति समाप्त हो जाएगी।
- 28:20राधे राधे बोलने की शक्ति नहीं रहेंगी।
- 28:22तुम कितने चल सकते हो उतने चलने के बाद तुम थक जाओगे सो जाओगे,
- 28:29कितना बोल सकते हो उतना बोलने के बाद तुम थक जाओगे, नींद आ जाएगी।
- 28:35राधे राधे थकाता है और तुम्हें चाहिए फ्रेशनेस जैसे नींद में आती
- 28:45है, नींद में तुम्हारा मन नहीं चल रहा होता।
- 28:53नीत में तुम किसी शब्द का उच्चारण नहीं कर रहे हो।
- 28:57किसी नाम का जप नहीं कर रहे हो नीत में तुम परम शांति में नीत
- 29:07में तुम विचार से परे होते हो। ध्यान से समझे नीत में तुम इमोशन
- 29:13से परे होते हो। दोनों चीजों से पार हो जाते है और
- 29:21दोनों चीजों से पार हो के तुम उस रेस्ट फल कंडीशन में पहुँच जाते
- 29:27हो सारी रात। तुम उस रेस्ट फुल कंडीशन में उस
- 29:37परम प्रेम के तत्व के संग रहते हो और सारा प्रेम तुम भी जाते हो
- 29:46सारी जात। है तुम सुबह जग जाते हो इसलिए मैं
- 29:56तुमसे कहता हूँ, देखो अगर पेट्रोल पंप पे तुमने गाड़ी लगा दी है ना
- 30:05तो टंकी को फ़ोन करा देना आदि अधूरी मत छोड़ना।
- 30:11यानी अगर सोने लगे हो ना तो ब्रह्ममूर्त में मत जागना।
- 30:16ये बकवास से भरे पड़े हैं। सारे शास्त्र ब्रह्ममूर्त की गलत
- 30:21कल्पना की गई है। ब्रह्ममूर्त ये नहीं होता जो
- 30:24तुम्हें सिखाया जाता है 3:40 में। ब्रह्ममूर्त वो वेला है जिसमें
- 30:36तुम ब्रह्म की तरह शांत हो सकते हो जहाँ कोई ऊहा पह नहीं, कोई
- 30:43दौड़ भाग नहीं, कुछ पाना नहीं, कुछ खोने का भय नहीं।
- 30:50यहाँ परम मस्ती है, आनंद है, खुमारी है, शीतलता है, संत वह
- 30:57ब्रह्म वेला ब्रह्म वेला के वक्त अक्षमाप।
- 31:07हम उस क्षण में चले जाते हो जहाँ ये सारी चीजें यकसा हो जाती हैं,
- 31:14वहाँ प्रेम भी है, कुंवारी भी है, शांति भी है, आनंद भी है और तो
- 31:18मस्ती में भी हो, बाहर आने से तो वो खो जायेगा।
- 31:31अगर भीतर बने रहोगे तो ब्रह्म वेला में तुम ब्रह्म तक पहुंचने
- 31:40की क्षमता जुटा सकते हो। ये वो वेला है जब परम शांत हो।
- 31:47कोई ट्रैफिक नहीं, कोई धूल धमास नहीं, कोई कण नहीं, कोई लवड़ तवड़
- 31:56नहीं हो रही है, कोई खटका धड़का नहीं हो रहा है तुम आराम से मग्न
- 32:00सो ज्यादा गहरी नींद इसी वक्त पे आती है।
- 32:10तो ऋषि तुम्हे समझाते थे कि इस वेला में जग न जाना और तुम्हारे
- 32:15आज के ऋषि तुम्हे समझाते हैं कि इस वेला में जग जाना बलम परमात्मा
- 32:23से समय का क्या संबंध है? परमात्मा तो समय से पार टाइम
- 32:33लेसने से जहाँ आता है वहाँ परमात्मा है।
- 32:38किसी विशेष या मुहूर्त काल में परमात्मा नहीं मिलता।
- 32:41संसारिक चीजें मिल जाती हैं, इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ।
- 32:48कोई लग्न मुहूर्त निकालना है तो संसार के लिए निकालो, परमात्मा के
- 32:52लिए मत लगाना, परमात्मा के लिए कोई लग्न, मुहूर्त काम नहीं आता,
- 33:01लग्न, मुहूर्त, झूठ सब और बगाड़े काम यह परमात्मा के लिए है।
- 33:07अगर तुम लग्न मुहूर्त सब निकलवा के परमात्मा की आगोश में बैठना
- 33:13चाहोगे तो तुम गलती कर लेना। परमात्मा शब्दातीत है वैसे ही हो
- 33:22जाओ, शब्दों से परे हो जाओ। राम राम राधे राधे मत करो
- 33:32परमात्मा काला अतीत है, समय से परे हो जाओ, घड़ियाँ मत देखो,
- 33:39अपने ही अंदर बैठे रहो। और ये स्वाभाविक है नैचुरली है।
- 33:46प्रकृति तुम्हें इस कालखंड में पहुँच जाती है।
- 33:49सुबह सुबह और तुम इसी कालखंड को चूक जाते हो।
- 33:55तुम इस कालखंड को चूक के बाहर उठ जाते हो, वो भ्रम वेला हो गया।
- 34:02हमने तो नाम जप करना है, यही भूल हुई है तुमसे जो आज तुम दर दर
- 34:08मारे फिरते हो, जब दुख हो और दर्द तुम्हें तंग करता है, परेशानी
- 34:15तुम्हें तंग करती है, उसका मूलभूत तत्व कारण यह।
- 34:22तो जीस वेला में तुमने भ्रम से मिलाप करना चाहिए था, उस वेला में
- 34:27तुम उठ गए और बाहर की आपाधापी में शोरगुल में खो गए, लाउडस्पीकर लगा
- 34:34दिए, ऊंचे ऊंचे बोलने शुरू कर दिए, कोई कोई भी हो नाम कोई फर्क
- 34:38नहीं पड़ता। नाम शब्द, नाम शोर है।
- 34:47वो आ रहे हैं, वो आ रहे हैं साँसों ज़रा अहिस्ता चलो वो आ रहे
- 35:00हैं साँसों ज़रा अहिस्ता चलो। दिल की धड़कनों से भी इबादत में
- 35:07खलल पड़ती है। वह इतना सूक्षम आयाम है।
- 35:12वह दिल की धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ जाती है।
- 35:17और तुम्हारी राधा राधा तो खलल डालेगी, तुम तो इतने ऊंचे ऊंचे
- 35:22यूनिट लगा लेते हो। तुम तो चिल्लाने लगते हो कुत्तों
- 35:28की तरह मुँह पर करके माँ माँ ऐसा करने से तुम कभी नहीं पाओगे और
- 35:40तुम देख लो जागरण करने वाले हो ने कितरो ने पाए।
- 35:46जागरण करने वालों ने कितनो ने पाया, तुम प्रत्यक्ष को प्रमाण
- 35:51क्यों नहीं मानते? मैं तुम्हें कहता हूँ करो राजा और
- 36:00अगर मिल जाए तो मुझे परिणाम बता दे ना।
- 36:05अगर कभी किसी को शोरगुल में मिल जाए, ना मुझे जरूर बता देना
- 36:13मिलेगा। नहीं ये मैं पक्का जानता हूँ
- 36:21मिलेगा दूसरा राह या तो तुम शोरगुल मचा के।
- 36:24थक जाओ अरे जोड़ निकालो कि शोर गुल से नहीं मिलता।
- 36:32या तो यह तकनीक अपना या तो भोगने की भोगलो अच्छी तरह से भोगलो खूब
- 36:42भोगलो। और ये तंत निकाल लो के भोगने में
- 36:47नहीं है। भोगने में दुख है, जैसे तंत निकाल
- 36:51लिया बुद्ध ने फिर तुम्हारा मन गड़बड़ नहीं करता अगर कच्चे कच्चे
- 37:01किसी महफिल में से उठ जाओगे। तो हर कदम पे उन्हें मुड़ के देखा
- 37:16हर कदम पे उन्हें मुड़ के देखा, उनकी महफिल से हम उठतवाये अगर
- 37:25संसार में कच्चे कच्चे तुम उठ जाओगे।
- 37:28तो न खुदा ही मिला, न वसा ले सनम, न इधर के रहे, न उधर के रहे, फिर
- 37:33तुम किस तरह के निरहू के आज तुम्हारी दशा वहीं हो गई है तुम
- 37:42एक चैनल पे जाते हो। कुछ देर रहते हो और दूसरे चरण पे
- 37:48आ जाते हो। कुछ देर रहते होते से मेरे पास
- 37:52यहाँ 1010 गुरु बदले वाले लोग आ गए।
- 38:01मैं उन्हें कहता हूँ, भाई जाओ, यहाँ से तुम पलटू मारो और पलटू
- 38:07मारो का कभी कल्याण नहीं हुआ करता।
- 38:09दुर्गति हुआ करती है। अगर तुम में श्रद्धा होती तो काम
- 38:18तुम्हारी श्रद्धा नहीं करना। अब ये बात ध्यान से समझ रहे हो
- 38:27अल्टीमेट फॉर्मूले का जो सेंस है, रस है।
- 38:32रस यह है कि काम तुम्हारी श्रद्धा क्री गुरु तुम्हें एक मूर्ति का
- 38:39काम करेगा, उपजक्त की तरह और श्रद्धा कर परिपूर्ण हो।
- 38:52तुम अगर लीन हो जाओ किसी में भी लीन हो जाओ तो फिर सवाल नहीं,
- 39:00क्या आगे प्रेमानंद है? क्या आगे बाबा विजय भक्त से क्या
- 39:05के महात्मा बुद्ध हैं, क्या के भगवान कृष्ण हैं?
- 39:08इस चीज़ का सवाल खत्म हो जाता है। अगर तुम्हारी श्रद्धा सम्पूर्ण
- 39:12है, ये बात को ठीक से समझना तुम्हारे जीवन में क्रांति ला
- 39:18सकती है। ये बहुत से लोग कह देते हैं बाबा
- 39:27आप दीक्षा दे दो की मैं यहाँ से आ जाऊं, डेरे में बैठा हूँ, मैंने
- 39:32कहा यहीं बैठे रहो तो ज्यादा अच्छा नहीं रहेगा।
- 39:43तुम्हारे मन की आदत है। बस आदत है कि वे मरने से डरता है।
- 39:52गलने से डरता है तुम मरने से डरते हो, गलने से डरते हो।
- 40:03और वहाँ पहुंचने के लिए दोनों चीजें करनी होती हैं, मरना भी
- 40:08होता है, गलना भी होता है और अगर तुम इसके लिए तैयार नहीं हो तो ना
- 40:16तो मैं पहुंचा पाऊंगा तुम्हें, ना ही कृष्ण पहुंचा पाएंगे तुम्हें?
- 40:23पहली शर्त लगाते हैं कृष्ण अन्नन्या शंतु माँ पहली शर्त के
- 40:35पूर्ण शर्ता से 100% श्रद्धा से अन्यन्या किसी और का?
- 40:40चित्त में न हो, ख्यालात भी नहीं चल रहा है ये जन हाँ प्रियपास से
- 40:53जो मेरी शरण में आ जाता है, मेरे करीब बैठ जाता है।
- 40:57तेशाम नित्याभुक्तानाम योगक्षम। उसी को मैं योग में अरुण कर देता
- 41:06हूँ, उसी के साथ मिलन करता हूँ, सभी को छोड़ दो सर्वधर्माण प्रति
- 41:16जमा में कम नंबर सभी पार्टियां छोड़ दो, सभी धर्म छोड़ दो।
- 41:21सभी सम्प्रदाय छोड़ दो, सभी लिंग प्लिंग छोड़ दो, सब भूल जाओ अपने
- 41:31को खो दो अगर ये कला तुम्हें आती है।
- 41:38तो कोई भी गुरु काम करेगा, कोई भी मूर्ति काम करेगी और यहाँ तक कि
- 41:42पत्थर भी काम करेगा। अनगढ जैसे धन्ना भगत के लिए कर
- 41:49गया अनगढ पत्थर में भगवान प्रकट होता है, ये पत्थर का का मानना
- 41:56था। मूर्तियाँ लगी हैं मंदिर में,
- 42:04लेकिन तुम्हारे भीतर श्रद्धा कहाँ है?
- 42:08और बात तो श्रद्धा की 100% की श्रद्धा चाहिए वायिंग पैक तक।
- 42:17देन ओनली देन ट्रांसफॉर्मेशन विल हैपन एंड यू विल बी एवपोरटेड तभी
- 42:26परिवर्तन होगा तभी क्रांति होगी तभी तुम एवपोरते हो के वास्प
- 42:31बनोगे। फिर तुम तरल से वास्तु बन गए, बदल
- 42:40गए ये होती है बदला खट्ठा मुख्य ची तुम्हारे पास है।
- 42:53तल बदलते फिर रहे हो तुम कभी गुरुद्वारा जाते हो, कभी मंत्र,
- 43:00कभी मस्जिद, कभी जच स्थान बदल लेते हो, मन का तल नहीं बदलते।
- 43:10और बात तो थी मन के तल बदलेंगे मन के तल के बदलने से सब मर जाता तुम
- 43:20बदलते हो स्थान कभी तीर्थ यात्रा पे चले गए कभी आज भी करे।
- 43:32कभी गुरुद्वारा भी चले गए, कभी मंदिर मस्जिद में चले गए।
- 43:39तुम स्थान बदलते हो, तुम अपने आप का तल नहीं बदलते, बस यही कमी है
- 43:45जो तुम अटके हुए हो। दो चीजों का ध्यान रखना अपने आपको
- 43:55श्रद्धा से भरपूर रखना एक बात श्रद्धा क्या है?
- 44:03निर्लिप्त अवस्था श्रद्धा विश्वास स्वरूपर्ण।
- 44:12ऐसा विश्वास करके चलो कि वह है विश्वास कौन कराएगा?
- 44:20वह विश्वास वो कराएगा जिसने उसे जान लिया।
- 44:24देख लिया अपने अनुभव से। न किसी शास्त्र से न किसी की देखी
- 44:30पड़ी सुनी, जिसने खुद ही जान दिया कि वह है, वह तुम्हें बताएगा कि
- 44:40वह है, विश्वास दिलाएगा, लेकिन इतने में तुम्हें श्रद्धा नहीं हो
- 44:44जाएगी। ध्यान रखना।
- 44:47एक मार्ग पूरे का पूरा तुम्हें समझा देता हूँ।
- 44:53जीस घुरुर ने देख लिया उसकी रहनी, सहनी, खान पान चलना, बोलना सब
- 45:02तुम्हें बता देता हूँ कि इसने कुछ।
- 45:10दुरस्थ आनंद को चख लिया है, उसके पास आते हवाई बदल जाएंगी,
- 45:19तुम्हारा मन ठहरने लगेगा, तुम्हारा मन गुम होने लगेगा।
- 45:27उसके पास माहौल तब्दील होता नजर आएगा।
- 45:31ये लक्षण विश्वास से शुरू करना और विश्वास
- 45:50ऐसे व्यक्ति का मत ले लेना जिसने खुद नहीं देखा, हम रोज़ ही से ले
- 45:55गए। इसलिए भंडाफोड़ करता हूँ उन लोगों
- 45:57का क्योंकि मैं पक्का जानता हूँ, इनका वोरा बता देता है।
- 46:04मुझे ये खुद नहीं बताएंगे, कब उन्हें बताएंगे?
- 46:10खुद तो इनको नाक को करवाना पड़ेगा फिर ये बताएंगे कि इन्होंने जाना
- 46:15है कि नहीं जाना है। अब जीतने संत बने बैठे हैं, इनका
- 46:19नाक को करो, सभी का नाक को करो, पता चल जाएगा, झूठ बोल रहे हैं,
- 46:26सच बोल रहे हैं। सर, इस विश्वास उसका करना जिसने
- 46:44खुद जान लिया। कबीर कहते हैं, मैं कहता आंखन दिख
- 46:55और कबीर की वाणी। बा सहायक होता है उनकी जीवन याचन
- 47:06करने की प्रणाली सहायता देती है तो हमें विश्वास होने लगता है कि
- 47:13हाँ कुछ है। इस महान पुरुष का चाल, चलन,
- 47:18खानपान, बोल, चाल, उठना, बैठना, क्रियाकलाप बदल गया।
- 47:28इसने कुछ देखा है कुछ उस प्यार का ऐसे नजर आ गया।
- 47:35तो यहाँ से शुरू होगा ऐसा व्यक्तित्व में मार्गदर्शन करे
- 47:40अन्यथा दूसरे से मार्गदर्शन मत लेना।
- 47:45वह तुम्हें मार्गदर्शन करे और दूसरा तुम्हारी श्रद्धा काम करे।
- 47:55ये दोनों चीजों का अगर भीड़ होगा तो फिर अष्टावक्र कहते हैं कि तुम
- 48:03अभी पहुँच जाओगे। अभी इसी क्षण या तो जीवंत गुरु
- 48:13तुम्हें मार्गदर्शन दें। कबीर की तरह तुम कहते कागज़ की
- 48:21लेखी और मैं कहता आँखें दिख जब वो शब्द भूलेंगे तो उनके शब्दों में।
- 48:37एक सॉलिड ड्यूटी हो तो सत्य वो नजर आएगा उनके जीवन के जीने के
- 48:43डाँग तो मैं प्रभावित करेंगे। क्या ये झूठ है?
- 48:54क्योंकि कुछ पैमाने हैं व्यक्ति को कसने के नहीं रे लोभी होगा ऐसा
- 49:02व्यक्ति अमानित व मान की इच्छा नहीं करेगा, वो नहीं करेगा मेरे
- 49:13ही चरणों के हासिल को। तुम लगाते हो तो हमारी पहुँच
- 49:20दम्भितुम हिंसा, शांति राज़वं आचार्य उपासरम शौचम सेरम शांत
- 49:32आचार्य उपास। वह जिससे मिल गया है उसके पास
- 49:38बैठता। आचार्य उपासना शोचम शुद्ध होगा वो
- 49:47स्थैरम सित्र होगा हर्चदनी होगी उसमें आत्तम विनग्रह।
- 49:56अपने आपको जानता होगा मैं कौन तुम विनग्रह श्रम की खोज उसने पूरी कर
- 50:09ली होगी ये लक्षण। क्योंकि जिसे सब खजाना मिल गया,
- 50:17सारा संसार उसका है तो फिर वो क्यों तमन्ना करेगा?
- 50:28जोड़ेगा? क्यों?
- 50:34झूठ क्यों बोलेंगे, हिंसा क्यों करेगा, चोरी क्यों करेगा?
- 50:45ब्रह्मचर्य का खंडित क्यों करेगा? अपने शर्तों को भूल जुलूल बातों
- 50:52में खपायेगा क्या ये कुछ लक्षण है?
- 51:02ये तुम्हें बताएंगे कि जिसके पास तुम आये हो।
- 51:05वह यकीन करने योग्य है। मांगे का कुछ नहीं, तुम दे जाओ वो
- 51:18तिरस्कृत भी नहीं करेगा तुम्हें? ना तुमसे मान मानगा बहुत से लोग
- 51:30मुझे लिख देते हैं कमेंट्स में पुत्र बाबा जी विजय भत्स जीते
- 51:39रहो। मैं लिख देता हूँ पांव धोक बंचना
- 51:47गुरूजी और क्या रे पांव, धोक बंचन, मैं जानता हूँ।
- 52:03ये भी मेरे भगवान अगर इसने मुझे पुत्र कहा तो अवश्य ही उस पिता ने
- 52:12कहलवाया होगा, यह संदेश वहीं से आया होगा, अन्यथा इसमें पुत्र
- 52:20कहने की शक्ति कहाँ से आई? इस शक्ति भी तो उसी की दी हुई
- 52:26होगी तो मैं उसे लिख देता हूँ गुरूजी पांव धोखा वंजना आपके।
- 52:42पग मैं दोक मारता हूँ जी, गुरु को पहचान, उसके क्रियाकलापों, उसके
- 52:58जीवन जीने के ढंग शैली। अब ये जो लोग कहते हैं।
- 53:09संस्थाओं को मजबूत करो, दान दो। क्यों भाई संस्थाओं के लकवा मार
- 53:17गया है? क्या आफत आई संस्था को?
- 53:28अभी और प्रचार करना बाकी है, लेकिन मन है कि मानता है मन कहते
- 53:37प्रसिद्धि थोड़ी सी और हो जाये। देखो अभी बहुत से राजनेता दूसरे
- 53:45मुल्कों में प्रसिद्धि को। बड़े से बड़े नागरिक के सम्मानों
- 53:52को इकट्ठे करते फिर रहे इकट्ठा कर लो इतना हो सकता है क्योंकि बाद
- 54:02में कौन जाने ये तख्तो ताज। दूसरों के हाथों की अमानत है,
- 54:09दूसरे न बैठने दे फिर क्या करेंगे?
- 54:13और आजकल दुनिया कुछ मौसम भी बेमान न बिठाएं दे फिर क्या करेंगे तो
- 54:21नागरिक के सम्मान सर्वोच्च सम्मान पा ही लो।
- 54:25चाहे आबादी 20,00,000 लोगों की हो, ये नहीं देखेंगे कि
- 54:30150,00,00,000 लोग तुम्हें सम्मान दे रहे हैं।
- 54:33ये कह काम तो 20,00,000 लोगों को और सम्मान दे के फिर क्या फर्क
- 54:37पड़ जाएगा? लेकिन ये नहीं है।
- 54:46यह भी तो होना चाहिए, बस इकट्ठा करने की प्रियग्रह की आदत पुरानी
- 54:54आदत है। सैर सपाटे की आदत है तो मन के
- 55:02पीछे लग जाते हो। मन से चिपट जाते हो तो मन ही हो
- 55:09जाते हो, भूल जाते हो तुम कौन यही तुम्हारे दुख का मूलभूत काल तो
- 55:17मैं कहता हूँ रात को जब तुम जाते हो उस 70 में जाते हो।
- 55:24तो टंकी भरा के आना पूरे और तुम्हें क्या पता लगेगा?
- 55:28टंकी भर गयी जब टंकी भर जाएगी तो तुम्हारी आंख पट से खुल जाएगी
- 55:34स्वत खुल जाएगी तुम्हें कोई जगा आएगा नहीं अपने आप में खुल जाएगी
- 55:39तो टंकी भर गयी। तुम पूर्ण फ्रेश हो, रात को सोए
- 55:46सोए ऐसे ही मत उठ जाना, अलार्म मत लगाना।
- 55:49अगर कोई काम हो तो उसको छोड़ के वैसे ही अलार्म मत लगाना कि
- 55:57ब्रह्ममूर्त में जगना है, कुछ नहीं मिलेगा, जो ब्रह्ममूर्त में
- 56:00जग है, उनसे पूछ लो। क्या कुछ मिला, कभी कुछ नहीं
- 56:05मिला, सुबह की हवाएं थी, ऑक्सीजनेटेड प्रचुर था, ठंडा
- 56:15वातावरण था, कोई खड़का धड़का नहीं था।
- 56:22और कुछ नहीं था जब खलल तो तुम अपने भीतर चले जाओ पूर्ण रूप से
- 56:29मट जाएगी, बाहर की खलल चलती रही, तो भी मट जाएगी भीतर की खलल।
- 56:37बस तुम्हें सूत्र रहना चाहिए कि कैसे मटेगी और सूत्र ही तुमने
- 56:43सीखा नहीं और सूत्र ही तुमको सिखाया नहीं जा तुमको तुम तुमको
- 56:49मिले हैं हरामी शोर सिखाने वाले वो शोर चाहे कोई मचालो।
- 56:57अल्लाह का मचालो, राधे का मचालो, किसी का मचालो शोर शोर है, मन मन
- 57:04है, दुखी होना है तो शोर में चले जाओ, सुखी होना है तो शोर में आ
- 57:12जाओ। मालिक तुम हो फैसला तुम्हारे हाथ
- 57:17में देण आयक तुम हो तुमने शोर चुनना है, दुख चुनना है यह तुमने
- 57:28शांति चुननी है, मौन चुनना है। तुमने कहा कभी नहीं सिखाते।
- 57:37प्रेमानंद कभी नहीं कहते, ठीक है नहीं कहते मैंने कब कहा कि राधे
- 57:44राधे करने से कहने से बाछने से कोई शांति हो जाती है।
- 57:52ये गुर्दे ठीक हो जाते हैं, कुछ नहीं।
- 57:53ठीक होता। क्या सिखाते हैं कि तुम्हारे दुख
- 58:03सहने की क्षमता बढ़ जाएगी? मैं कहता हूँ यह भी तो नहीं
- 58:07बढ़ेगी, दुख सहने की क्षमता नहीं बढ़ेगी, तुम्हारा ध्यान परिवर्तित
- 58:15कर लिया जाएगा। ये जो लोग तुम पूछते हो कि देखो
- 58:21महंगाई, बेरोजगारी तो राजनीति के लोग कहते है देखो हमने वो एम जो
- 58:26बना दिए 20 वो स्मार्ट सिटी बना दी, 100 फैक्ट चेक करोगे बना एक?
- 58:38मैं इसकी बात करता हूँ। डी।
- 58:43फैक्ट्स में मत ले जाना, फैक्ट्स में आना, देखना, राधे राधे करने
- 58:50से शांति मिली या के एनर्जी लैस हुए?
- 58:55तुम पाओगे, तुम एनर्जी रह सके, मैं तुम्हें एक बात बताऊँ, कभी
- 59:02धरती पे जाप करने वाला व्यक्ति ज्यादा जाप करने वाला व्यक्ति खोज
- 59:09नहीं कर सके क्योंकि खोज। उस मन में उतरती है जो मन ठहरा
- 59:18हुआ होता है, जो मन मौन होता है, मौन में खोज उतरा करती है, तुम
- 59:27जानते हो अल्बर्ट आइंस्टीन 10 घंटे तो पर पर सोते ही थे।
- 59:34और घंटे भर की नींद वो दिन में झपकी लगा के भी ले लेते थे।
- 59:42इतनी फ्रेशनेस चाहिए, फिर उतरती है वो ऊपर से इन्वेंशन्स।
- 59:53ऐसे नहीं आते। बाबा नानक ऐसे जब जी रहे, बोले 3
- 59:58दिन तक मौन रहना पड़ा, उन्हें ध्यान रखना।
- 1:00:023 दिन तक मौन रहना पड़ा, किसी को पता नहीं कहाँ है, लोग ढूंढ रहे
- 1:00:07हैं। के नदी में डूब गए।
- 1:00:10कुछ जानवर खा गया कहाँ गए? लेकिन 3 दिन बाद अचानक आ जाते हैं
- 1:00:16और बोलते हैं एकों का ये मौन से निकले हुए शब्द थे।
- 1:00:23शोर से निकले हुए शब्द थे। तुम्हारा ओंकार शोर से निकलता है।
- 1:00:32बाबा का ओंकार 3 दिन की मौन के बाद उतरता है और सारी जप, जी का
- 1:00:39मूल मंत्र और जप जी उन मौन के क्षण में यज्ञ से बोली गई।
- 1:00:46एक बार की जे 38 कौड़ियाँ एक बार की मैं बोली गई ऐसा नहीं कि एक आज
- 1:00:53बोलती है कल बोलती है लगातार बोली गई किसी भी वैज्ञानिक से जिसने
- 1:00:59कोई खोज की हो। कोई कविता का निर्वाण किया हो,
- 1:01:03किसी मूर्ति का निर्माण किया हो जिसने कंस्ट्रक्शन की हो
- 1:01:08डिस्ट्रक्शन ने की हो उससे पूछना कभी ये कविता तुमने कहाँ से ली?
- 1:01:21ये कविता कैसे बनी, उसका जवाब होगा, मैं तुम्हें बता देता हूँ,
- 1:01:29वो कहेगा कि नहीं? अज्ञात क्षणों में मैं मौन बैठा
- 1:01:32था पर ये ऊपर से उतर गई। मैंने नहीं बनाया जब फरमाए तिब
- 1:01:46तिब अप्पा जीस ए लिखे तिसरना जो लिख रहा है वो नहीं लिख रहा है जो
- 1:01:58बैठा बैठा वो कम कर रहा है। फरमान कर रहा है वो लिखवा रहा है
- 1:02:04जे वो फरमाए, तेब तेब पा मैं तो वैसे वैसे लिख रहा हूँ जैसे जैसे
- 1:02:11वो फरमान जारी कर रहा है। मैं तो सिर्फ लिखने वाला हूँ उसके
- 1:02:17हाथ की कठपुतली। गीत उसके मैं पोंगरी मैं बनसुरिया
- 1:02:30ओह ठूसके धुन बहुत निकालता है मैं खाली हूँ बस।
- 1:02:38मेरी यही महानता है और यही बहुत बड़ी महानता है।
- 1:02:42आपने बंद सिरी देखी कब नहीं देखे तो देखना वो भीतर से खाली होती
- 1:02:50है, थोती होती है, उसके भीतर खाली होता है, सब पोंगरी होती है।
- 1:03:00ऊपर स्वर निकलने के लिए स्थान बने होते हैं।
- 1:03:03सारी खड़ी होती है जश्न तुम बांसुरी की तरह थौथे न हो जाओगे
- 1:03:12भीतर खाली न हो जाओगे भरे नियों। वो जो बांस था, ये है बांस की
- 1:03:19वंसरी वो जो बांस था वो निकाल दिया गया।
- 1:03:24ऐसे ही तुम भी ये जो अचेतन में कूड़ा है ये तुम्हारे लिए बांस
- 1:03:29है, ये तुम्हें पोकरी नहीं बनने देता।
- 1:03:38ये जो फँसा हुआ है, बाँस के भीतर मलबा ये निकाल दो तुम बंसरी बन
- 1:03:44जाओगे और बंसरी भगवान के होंठों पे लगती है भगवान के होंठों पे लग
- 1:03:53के भगवान के गीत गुण बनाया करते हैं।
- 1:04:05या तो किसी गुरु से सीख लेना जिन्होंने देखा है पर मैं किसी के
- 1:04:15ऊपर डिक्टेटर नहीं हूँ। ये सवाल क्यों उठा तुम्हारे?
- 1:04:27तुम स्वतंत्र हो, तुम चाहो राधे राधे कर सकते हो, मैं रोकूंगा
- 1:04:32तुम्हें याद या अपने रस को पीऊंगा।
- 1:04:36बैठ के कौन इतनी मूड तय करता है कि अपने रस को पीने को छोड़कर मैं
- 1:04:44तुम्हें रोकने आऊंगा कि राधे राधे मत करो।
- 1:04:47अरे नहीं भाई ये तो थोड़ा सा वक्त रखा होता है तुम्हारे लिये रखा है
- 1:04:55तुम्हारे ही प्रश्नों के जवाब अनीता अगर तुम राधे राधे करोगे जो
- 1:05:02राधे राधे करते हैं। मैं उन्हें जाके रोकता हूँ, मैं
- 1:05:05तो घर से भी बाहर नहीं निकलता हूँ, तुम चाहो तो रात रात भी कर
- 1:05:11सकते हो, दिन भर रात कर सकते हो, महीनों सालों तक इकट्ठे कर सकते
- 1:05:15हो, मैं नहीं रोकूंगा। जो रोकेगा वह शांत नहीं होगा, वह
- 1:05:22डिक्टेटर होगा। डिक्टेटर रोका करते हैं, डिक्टेटर
- 1:05:28नियम बनाते हैं, संत तुम्हें उन्मुक्त छोड़ देता है, सत्य बतला
- 1:05:34के उन्मुक्त छोड़ देता है सत्य तो ये है बेटा, कर लो जो मर्जी।
- 1:05:42तुम्हें बांधना मैं तुम्हें यही करता है बा मुश्किल यह जीवन मिला
- 1:05:56यह वक्त मिला इस पहलू में आए। इन उदास गलियों में से तुम निकले,
- 1:06:10सिर झुकाया सब कुछ लेके भेजो जब भी उदासी के पल तुम्हें घेर लें।
- 1:06:20ज़िन्दगी बोझल मालूम पड़ने लगे तो अपने भीतर उधर जाना, वहीं
- 1:06:31तुम्हारी मंजिल है, वहीं तुम बहुत सुकून मिलेगा।
- 1:06:45ज़िन्दगी ने कर दिया जब भी उदास ज़िन्दगी ने कर दिया।
- 1:07:04जब भी उदासा गए घबरा के हम मंजिल के पास।
- 1:07:22सर झुकाया, सर झुकाकर रो लिए आप के पहलुओं में आकर।
- 1:07:42रो ली दास्ताने गम सुना कर रो लिए आप?
- 1:08:00पहलू में आक रो ली, धन्यवाद।