Latest / Baba ji Vijay Vats / 25 Dec 25 - मैं वो शय हूँ जो कायनात की खबर रखता हूँ! आपने कभी सन्देह वाले व्यक्तियों की छानबीन की है? Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:11प्रणाम प्रभु गुजरात से ही किसी ने पूछा नाम
- 0:28अज्ञात है बाबा आपकी बातों को मैं बड़ी गहराई से सुनता हूँ।
- 0:41यह हमारे गुजरात में आपकी वीडियो सुनने वाले पक्के भक्त बहुत हैं।
- 0:55आपने कई बार कहा मन के तल, चेतन अचेतन।
- 1:06सामूहिक अभिचेतन सामूहिक अचेतन समझलो और सामूहिक चेतन कॉन्शस
- 1:17फ्रेंड कैनसा सबकॉन्शस अनकॉन्शस। कलेक्टिव अनकॉन्शियस एंड कलेक्टिव
- 1:24कॉन्शॅस यह पांच तल बताया आपने और आपने कहा कि मैं इन सभी तलों के
- 1:38भीतर जाके। स्वयं के कोलेक्टिव अनकॉन्शियस
- 1:45में जाके अपने पिछले जन्मों का सब कुछ देख सकता हूँ और दूसरों का भी
- 1:49देख सकता हूँ क्या बापू आपने कभी कष्ट किया?
- 2:04अपने भीतर जाकर जिसकी तरफ संदेह की सोई उठती है और जिनकी बातों
- 2:16में जिससे व्यक्तियों की तरफ संदेह जाता है।
- 2:21क्या आपने उनकी कभी छानबीन की है? पुत्र अगर मैंने छानबीन न की होती
- 2:37तो मैं अपने आनंद के प्रवचनों को छोड़कर।
- 2:45कुछ लम्हे कुछ पर राजनीति में नहीं बताता था।
- 2:54देखा है मैंने अपने कोलेक्टिव अनकॉनशस में जाकर।
- 3:03और उन लोगों के कोलेक्टिव अनकॉन्शस में जाके और इसके
- 3:10अतिरिक्त मैंने बाबा से भी पूछा है तो मैं तो बिलकुल आश्वस्त हूँ।
- 3:21मेरे भीतर शक की कोई गुंजाइश नहीं।
- 3:25इसलिए बेखौफ़ बहुत मैं जानता हूँ दोषी कौन किस मसले में दोषी कौन?
- 3:47एक छोटी सी कहानी का इमरजेंसी का दौर चल रहा था।
- 4:05मेरी कहानी में कुछ तारीखों का विवरण सूख सकता है।
- 4:14क्योंकि स्मृति बहुत पुरानी हो गई।
- 4:211975 की शिवरात्री जो शायद जो मुझे याद है 11 मार्च 1975 को
- 4:31पढ़ती थी। उस दिन शिवरात्रि?
- 4:36महाशिवरात्री के दिन मैं छत के ऊपर किसी दुकान पे बैठा था, प्रथम
- 4:49बार वहाँ भोलेनाथ शिव प्रकट हुए। मेरा कोई मंत्र ना था।
- 4:59मेरा कोई घर न था, किसी व्यक्ति की दुकान थी और वह दुकान कराए हुए
- 5:06थी। उसके पास एक हिसाब से वो दुकान
- 5:16धन्य हो गए जहाँ भगवान शिव प्रगटित हो गए।
- 5:23प्रथम बार उससे पहले मैंने ये दृश्य कभी नहीं देखा था।
- 5:32बस कुछ कठिनाई है जो मैंने आपको बोली, मेरे भाई सुरेशकांत मरने के
- 5:39उपरांत। हनुमान जी का गाड़ी में मिलना
- 5:471970 की ट्रेन की वो इंसिडेंट जब किसी ने मुझे ट्रेन के भीतर भटक
- 5:55दिया प्लेटफार्म ये सब कुछ ऐसे रहस्य हैं।
- 6:01जो मुझे समझ नहीं आई तो अचानक प्रकट हुए अब उनकी शिक्षा भी को
- 6:14देखकर नीलकंठ इतना प्यारा चेहरा। इतनी सुंदर केस सिर पर चमकता हुआ
- 6:36कुछ ऐसा जो चंद्रमा की तरह लग रहा था।
- 6:46मृगाम पर लपेटें हुए जब प्रकट हुए तो मुझे कुछ नहीं सोच रहा था।
- 7:02मैंने मात्र प्रणाम किया। और भोले शिव ने कहा मांगो क्या
- 7:09मांगता हूँ? हालांकि मैंने कभी तप नहीं किया
- 7:12था। मज़े की बात मैंने एक बार ओम नमः
- 7:17शिवाय भी नहीं कहा था। मैं समंदर जाया करता था, कुछ नहीं
- 7:28करता था। शिव मंदिर में ऐसा स्थान था जहाँ
- 7:35मैं कॉर्नर में बैठ सकता था, आराम से वहाँ बिना कुछ किए बैठ जाया
- 7:41करता था। सैर करने के लिए मैं गौशाला,
- 7:47मंदिर में जाता था। वहाँ का वातावरण बड़ा प्यारा था,
- 7:51शोभनीय था दिल का शिने आ रहा था बहती हुई छोटी सी धारा नहर की लगे
- 7:59हुए वृक्ष पेड़ मुझे मोहित करती है सदा सी प्रकृति।
- 8:09शेयर करने के लिए जाता था और रोजे जाता था कोई ना किया था, कोई
- 8:22आइंस्टाइन ना किया था। प्रकट हुए और मुझे बोले मांगो
- 8:33क्या मांगते है, बात तो हैरानी है ना कही कोई महामृत्युंजय या कोई
- 8:46रुद्रभिशेक कुछ भी अनुष्ठान मैंने नहीं किया था।
- 8:54ये शंकर भगवान के बड़े अनुष्ठान बताए जाते हैं।
- 8:58रुद्रभिशेक महामृत्युंजय ये मैंने कभी नहीं किये थे।
- 9:03फिर अचानक ऐसे प्रकट हो जाना बिन कुछ किये हैरानी की बात ही है।
- 9:16तू मुझे बाद में समझा आई कि कुदरत ने मुझे किस कर्म के कारण इस
- 9:27पुरस्कार से नवाजा, जो मैं अंतिम कड़ी तक पहुँच पाया?
- 9:36क्या किया था ऐसा मैंने जो कुदरत की बख्शिश इनायत मुझ पर बरसी,
- 9:51मैंने आपको बहुत बार बताया। पिछले जन्म में गाँधी होना, देश
- 9:59की जंजीरों को काटने में अपना योगदान योगदान नेतृत्व सिर्फ।
- 10:18सभी देश के ऊपर कुर्बान हुए लोगों को मैं नमन करता हूँ।
- 10:28जो लोग ये भ्रम फैला रहे हैं, अकेले गाँधी ने आजादी ले दी।
- 10:36वो चाहे कांग्रेस के हो, चाहे भारतीय जनता पार्टी के हो, चाहे
- 10:44किसी और इदारी से हो, वो ठीक नहीं कह रहे थे।
- 10:52सत्य से बहुत दूर है ये बात। अकेला गाँधी कुछ नहीं कर सकता
- 11:01अकेला चना बाढ़ नहीं फोड़ सकता। अकेला व्यक्ति सिर्फ अपना गुणगान
- 11:08कर सकता है गलत। थोथ चना बाजे गना मैंने गलती से
- 11:27एक छोटी उम्र थी 23 वर्ष की उम्र थी 7511 मार्च।
- 11:3723 वर्ष की उम्र समझो 52 का जन्म है मेरा निश्चित रूप से जवान काया
- 11:47खानपान जबरदस्त और व्यायाम पूरा 6677 किलोमीटर की दौड़।
- 11:571500 दंड बैठक तीन तीन किलो दूध, मलाई, घी और सामने फलकी मंडी थी।
- 12:16सब्जी, फल, माँ से जू चाहे खा लिया उसके बलबूते पर कठिन श्रम,
- 12:27आठवीं क्लास में 21 किलो का दूध का ड्रम क्या मेरा बड़ा भाई जो ये
- 12:33काम करता था वो अभी बीमार हो गया? राजी यक्ष्मा से पीड़ित हो गया
- 12:42बाकी भाई पढ़ रहे थे सारी जिम्मेदारी मेरे कंधों पे आ गई दो
- 12:48जगह से दूध ले के आता और मेरे पास साइकिल था लेकिन यहाँ गांव से।
- 12:55गिद्दड़वाहक गांव से लाइनों के परे मैं पैदल दूध लेके आता हूँ 21
- 13:01किलो का ड्राम मुझे याद है सिर पे रख लेता दोनों तरफ उसके गुंडे लगे
- 13:08हुए थे और हाथ में 10 शेर की बाल्टी निरंतर।
- 13:14दो तीन किलोमीटर दूर दुकान पड़ती थी वहाँ से लेके आया था तो मेरे
- 13:19डोले थे, मजबूर हो गए थे रस्सी बांध देते चार गुना करके और मैं
- 13:25काट देता उसको सिर्फ डोलो को फुला कर यह कोई करामात नहीं थी।
- 13:34मैंने कोई मसल बिल्डिंग नहीं की थी।
- 13:38यह मेहनत का परिश्रम का प्रणब था। कठिन परिश्रम, कठिनतम परिश्रम
- 13:47इसलिए मैंने आपसे कहा कड़ी मेहनत है ऑनेस्ट।
- 13:54और प्रतिभा, प्रतिभा, कठिन मेहनत, ईमानदारी ये तीन चीजें अगर आप में
- 14:08होंगी तो आपको। हमें हम अपने प्रतिनिधि की तरह
- 14:13सुनने गए। रिप्रेजेंटेटिव इन तीन बातों को
- 14:19ध्यान में रखना तो मैंने जवान उमर से।
- 14:37लड़की को मांग लिया सारी कहानी मेरे बायोग्राफी में है मांग लिया
- 14:45क्षण भर की बात जैसे आप पछताते हो, प्रत्येक कहानी।
- 14:55काम वासना के बाद पछताते हैं कि मैंने क्यों किया?
- 14:59निर्बल हो जाता है, नींद आ जाती है सो जाता है।
- 15:06कुछ लोग इस देश में और विदेशों में भी मेरी वीडियो का इस्तेमाल।
- 15:15हिप्नोटिक ड्रग की तरह करने लग गए।
- 15:17नींद नहीं आती तो बाबा के वीडियो चला रहा हूँ, नींद आ जाएगी।
- 15:27मेरा बड़ा भाई यही काम किया करता था, लेकिन 21 में उनकी मृत्यु हो
- 15:32गई। करो ना काल पश्चात हुआ।
- 15:43बाबा ने कहा ठीक तुम्हारा तप बहुत है, मैंने तो कोई ऐसा तप इस जीवन
- 15:51में किया भी, मैं सत्यवादी हूँ, झूठ नहीं बोलता, कुछ नहीं किया था
- 15:57मैंने। तो ये कहाँ से आ रहा था?
- 16:04यह था पिछले जन्म का कर्म जो व्यक्ति मरते मरते भी राम का नाम
- 16:14ले गया। और शास्त्रों में ये विख्याति है
- 16:19अंत मति सो गती लिखा है ये प्रश्न तो बहुत लोगों ने मुझसे पूछा
- 16:27लेकिन इसका उत्तर आज आया आपको कि बाबा अंत मति सो गती?
- 16:35इसका अर्थ समझाइये। अगर आप मरते वक़्त कहोगे हाय मैं
- 16:42क्या मैं गया मुझे बचा लो तो इसका मतलब आप अभी तक दे हो, लेकिन
- 16:51गाँधी जी की मौत का। साक्षी आज भी लोग होंगे और वो
- 17:07प्रत्यक्ष गवाह होंगे के हाँ, मरते हुए गाँधी जी ने इतिहास तो
- 17:13बोलता ही है, लेकिन मैं प्रत्यक्ष।
- 17:16गोहा को कह रहा हूँ। उन्होंने मरते हुए भी कहा राम हे
- 17:23राम तीन बार अन्त मति अन्त मति यथि उनके सौगति तो गति वैसे ही हो
- 17:34गए। मैं भी राम भक्त हूँ, लेकिन वहाँ
- 17:40तक जहाँ तक राम कष्ट भोग रहे हैं, त्याग कर रहे हैं, वहाँ आकर राम
- 17:51की बातें मुझे अच्छी नहीं लगतीं। जहाँ वो अपनी ही स्त्री को जिसे
- 17:56बड़े शोक से ब्याह के लेके आए थे, अब देखिए सीतानु तो कहानी सीता ने
- 18:04तो पैगाम नहीं भेजा के, राम जी आओ और शिव धनुष को तोड़ दो।
- 18:13यह तो उसके पिता जनक ने स्वयं भर रचाए थे और बहुत से राजा आए थे और
- 18:22श्री राम और रक्षण भी गए थे। श्री राम को देखकर सीता के मन में
- 18:32उथल पुथल हुए। इतना सुडौल कमल, नय श्यामल वर्ण,
- 18:43मंद गति, मुस्कुराहट और हंस की चाल कभी देखी ही ना थी।
- 18:52सुन्दर बाल केस राम के केस से आपको बताता हूँ राम की जो फोटो आप
- 19:00दिखाते थे उसका तो मुझे पता नहीं क्या हिसाब है लेकिन राम केस
- 19:04तारित। बड़े सुंदर बाल थे।
- 19:14राम के भी बुद्ध के भी लक्ष्मण के भी इनके सभी के केस थे और आपको
- 19:22जानकर हैरानी होगी दशरथ के भी केस थे।
- 19:30क्योंकि इनको केशों की महिमा का पता था, ऋषियों से सीखा था खैर
- 19:38सुशोभित यह रूंड मुंड नहीं राम भक्तों की तरह भारी किश्त थे।
- 19:54और जब केशों पर ये मोतिया की फूलों की लड़ी लगा लेते थे तो फिर
- 20:00मोतिया की खुशबू नहीं इनके देह से आता हुआ रोम रोम खुशबू को बिखेरता
- 20:06था। ऐसा था उनका चरित्र और ऐसा था
- 20:14उनका देह चाल ढाल शारीरिक बनावट अति सुंदर थी।
- 20:26तो जब देखा राम को सीता ने तो मोहित हो गई।
- 20:32मोहित हो गई तो पर्वती से माँ पर्वती से और शंकर से प्रार्थना
- 20:42की। उन दिनों रवाज था, आज तो खो गया।
- 20:55विवाह से पहले फेरे होने से पहले वर चुनने से पहले जो कुंवारी
- 21:03कन्या है, वह हो जाती थी। पार्वती पूजा के लिए शक्ति पूजा
- 21:15के लिए सामर्थ्य मांगती थी उससे कि अब मैं गृहस्थी में चली बाप के
- 21:21घर तो बड़े मज़े में थे बाप अपनी बेटी को।
- 21:28बड़े प्यार से पालता है क्यों उसे पता होता है कुछ दिनों की मेहमान
- 21:33है फिर ये अपने घर चली जाएगी। पुत्र को वो इतना प्यार नहीं
- 21:39करता, उसे पता होता है सारी उम्र भर मेरे पास ही है कहाँ जाएगा?
- 21:48लेकिन पुत्री को बड़े प्यार से पालता है।
- 21:50कारणों से पता होता है कुछ दिनों की मेहमान है।
- 21:55ये मेहमान की तरह इसका सत्कार करता है।
- 21:58अतिथि की तरह वो थोड़ी देर के लिए आया।
- 22:05इसलिए स्वभाविक रूप से माँ बाप को पुत्री के साथ प्यार ज्यादा होता
- 22:11है। 1 दिन उसने चले जाना है तो बाप के
- 22:20घर तो ऐसी थी। कोई टंग हाली न थी, राजा की
- 22:26पुत्री थी, सब कुछ हाजिर था, उसके लिए दास दासियाँ थी, सेविकाएँ थी।
- 22:35बालों को गुथने वाली श्रृंगार करने वाली अलग दासियाँ थी।
- 22:43नहलाने वाली अलग दासियां थी, खेलाने वाली अलग दासियां थी और
- 22:50राजपुत्रे थी वो और अप्रथम सौंदर्य की मूर्ति।
- 23:00लेकिन जब सीता ने। श्रीराम को चखा, मोहित हो गए सीता
- 23:11ने माँ से प्रार्थना की हे माँ अगर मैंने जीवन में कभी भी कोई।
- 23:27सुकृत्य किया है तो मुझे वर के रूप में श्रीराम ही मिले।
- 23:47और माँ ने उसकी इच्छा पूरी की। शिव धनुष तोड़ सकते थे, राम तोड़
- 23:56दिया बाकियों से नहीं टूटा हिला गए हम।
- 24:12असम का जिला एवं सत्र न्यायाधीश उपेन्द्र नाथ राजखोवा इमरजेंसी के
- 24:25दिन चल रहे थे। इंदिरा गाँधी की सत्ता थी।
- 24:32विपक्ष करीब करीब जेल में था। ये भारत का इतिहास का काला दिन
- 24:43था। जब किसी स्त्री ने तानाशाही का
- 24:50चरम लांघ दिया था, उससे गलती से मनोज कोकर नाम के एक व्यक्ति की
- 25:09हत्या हो गया। अगर ठीक से कहूं तो उसकी उससे
- 25:17प्राणी दुश्मनी थी। राजखोवा अपने दुश्मन को मारने के
- 25:27लिए बहुत सालों से वो साजिश कर रहा था।
- 25:34पहले वकालत की पढ़ाई की और धीरे धीरे करता करता वो जज बन गया।
- 25:39जिला एवं सत्र न्यायाधीश सेशन एंड अवाम डिस्ट्रिक्ट जज।
- 25:56बचपन का मित्र भी था। उसका किसी बात पे रंजिश हुई थी,
- 26:04उसने उसकी हत्या कर दी और वो हत्या सिर्फ गलती से।
- 26:18शराब पीते हुए पीने के दौरान उसने अपनी स्त्री को बता दिया,
- 26:27धर्मपत्नी धर्ब मंत्री और उसकी बड़ी बेटी उसकी तीन बेटियां थी।
- 26:36तीनों बेटियों को यह बात पता चल गई, लेकिन उपेन्द्रनाथ राजखोवा
- 26:52जैसे ही रिटायर हुए। पकड़ लिए गए, वो किया हुआ करण
- 27:03कहाँ छुपता है? बड़ी कोशिश की उसने बच जाने की
- 27:11लेकिन मैंने पहले भी कहा इश्क और मुश्क छुपाये से छुपता नहीं मैं
- 27:17बाहर आ गया। तो वह जानता था कि यह राज़ मेरी
- 27:26स्त्री को पता है। मेरी तीनों बच्चियों को पता है और
- 27:34उसने अपनी धर्मपत्नी का कतल कर दिया।
- 27:38और तीनों बच्चियों का कतल करके उसी घर में जो सरकारी बंगला मिला
- 27:47था, उसे जज कहा उसमें दफन कर दिया दो लाशें की जगह पे बड़ी बेटी और
- 27:56धर्मपत्नी दो लाशें का जवाब। उससे छोटी बेटी हूँ।
- 28:02चार कतल करने के बाद वो व्यक्ति बिना दिमाग के बोझ रखे घूम रहा
- 28:06है, यह समझते हुए कि किसी को पता नहीं चलेगा, मैं जज हूँ।
- 28:17उन्होंने कोई गुनाह नहीं किया था। उनका गुनाह सिर्फ ये था।
- 28:22उसने खुद ही शराब के नशे में यह राज़ अपने धर्मपत्नी को उगल दिया
- 28:29था। जब बोझिल हो जाता है चित्त।
- 28:39तो किसी न किसी के लिए राजदार को उगल देता है और फिर वो राजदार का
- 28:45सदा के लिए कर्जदार हो जाता है, राजदार का कर्जदार हो जाता है सदा
- 28:50के लिए, लेकिन इसलिए मैं कहता हूँ शराब मत पीना।
- 29:02राधा सा में डेरा वाले कहते हैं आदमी क्राइम करता है, बोलता है,
- 29:07लेकिन ईसा मसीह बिल्कुल उलटी बात कहते हैं।
- 29:11ईसा मसीह कहते हैं कि मुक्त हो जाओ, तुम्हारा राजदार कोई होना
- 29:15चाहिए, अगर कर्म करते हो तो उसको भोगने का भी।
- 29:23छाती चाहिए, छाती सिर्फ 56 इंच की नहीं चाहिए और छाती कर्मों को फल
- 29:32भोगने की भी चाहिए। कर्म कर देता है, इंसान फिर भोग
- 29:42नहीं सकता। भौंकते वक्त उसके हाथ पांव
- 29:47कांपते, फिर वह तरह तरह के तरकीबे लड़वाता है।
- 29:52इसी तरह उसे जज ने भी तरकीबे लड़वाई लेकिन अंत में वह पकड़ा
- 29:57गया। मेरे ख्याल में शायद 1970 में वो
- 30:04रिटायर हुआ, जहाँ तक मेरी स्मृति काम करती है, चलते चलते चलते चलते
- 30:14उसने सोचा जब खाली होता है मन। जब मन खाली होता है अब इस बात को
- 30:25ध्यान से सुनना ये आध्यात्मिक बात है जब मन खाली होता है या मन
- 30:35ऑक्सीजनेटेड हो जाता है। फुल बॉडी।
- 30:40तो वह भीतर का अचेतन चेतन में आना शुरू हो जाता है और तुम्हें दिखता
- 30:47है इसलिए मैं सबसे पहले कहता हूँ क्रिया योग करो, ऑक्सीजन दृढ़ हो
- 30:54जाओ, प्राण वायु है। यह तुम्हारे शरीर के लिए जीवन के
- 30:59लिए अत्यंत जरूरी है उपयोगी नहीं है जरूरी है उपयोगी और जरूरी में
- 31:07बड़ा फर्क होता है जरूरी तो उसके बिना तुम मर जाओगे, उपयोगी के
- 31:13बिना तुम रोने जीते तो रहोगे? लेकिन दुखी दुखी से जियोगे 70 में
- 31:20उन्होंने कतल किया शायद और 76 में कानूनी कार्रवाई हुई।
- 31:41कानून ने पूछा न नुक्कर करता रहा पहले, लेकिन आखिर में समर्पण कर
- 31:49दिया। समर्पण करना ही पड़ता है।
- 31:59जब सत्य परखने वाले यकमुश्त खड़े हो जाएं तो समर्पण करना ही पड़ता
- 32:10है। उसने भी समर्पण कर दिया, लेकिन एक
- 32:14मज़े की बात है जो मैंने जाके बाद में खंगाली।
- 32:20मैंने कहा, ब्रह्मण्ड में आपकी सब बातें रिकॉर्ड हैं और इस विद्या
- 32:25को जानने वाला ब्रह्मण्ड में किस वक्त लाखों हजारों सालों में किस
- 32:33वक्त। क्या घटना हुई और उस वक्त के शब्द
- 32:37आप प्रसंग्रहित कर सकते हो तो मैंने आपसे कहा सीता ने धारिणी
- 32:45माता में समाने से पहले क्या बोला?
- 32:47राम को उसके पति को और क्या बोला लव और खुश को?
- 32:54ये जो फिल्मों में दिखाते हैं, ये तो बातें अलग हैं, इनको भूल जाओ
- 32:59क्योंकि ऐसा कोई व्यक्ति वहाँ पर जाकर उन स्मृतियों को खंगाल के
- 33:05ब्रमंड से पूछ नहीं पाया। मैं तुम्हे बिलकुल एक एक धागा खोल
- 33:10के बताऊँगा हूबहू शब्द लेके आऊंगा।
- 33:14जैसे गीता के शब्द लेकर आया उनका अर्थ क्या है?
- 33:21मैंने कई तरह से खंगाले, अपने भीतर से पूछे भ्रमण में रिकॉर्ड
- 33:26जाकर देखा क्या वो ही शब्द है? बिल्कुल वो ही बिगाड़ तो नहीं गए?
- 33:30नहीं बिगड़े। उपनिषद बचे रह गए।
- 33:34वेद इन्होंने खराब कर दिए। अंग्रेजों ने क्योंकि वेदों की ही
- 33:37महमद है उपनिषद बचे रह गए, एक आध उपनिषद इन्होंने खराब किया है,
- 33:48लेकिन गीता समूची बच गई। पिता से ही है तो जब हम गुलाम
- 33:56होते हैं तो हमारा इतिहास हमारा शास्त्र भी गुलाम हो जाता है।
- 34:03राजा जीस भी शास्त्र को चाहे बदला सकता है आज ऐसा ही काम हो रहा है।
- 34:12शायद किसी दिन ऐसा न हो जाए कि महात्मा गाँधी ने बेचारी नाथूराम
- 34:19गोकसे पर भगवान का भजन करते हुए राम राम कर रहा था, निर्दोष था,
- 34:25उसको गोली मार दी और मार दिया और गाँधी को।
- 34:31न्यायिक प्रक्रिया में से गुजरना पड़ा और गाँधी जी को फांसी चढ़ा
- 34:35दिया गया। इतिहास किसी दिन अगर ये रहे तो
- 34:40बदल दिया जाएगा और ये कहानी बिल्कुल उलट हो जाएगी।
- 34:46इनको मिलेगा कुछ नहीं। सत्य को सत्य ही रहने दिया जाए तो
- 34:52ज्यादा बढ़िया होता है, लेकिन सत्य को असत्य में बदलने की
- 34:58चेष्टा करता है। दुष्ट जिसने दुष्ट ताकीदी कर दी
- 35:04हो कमी वह इतिहास को बदलेगा। वह जो भाग गए, भगोड़े उनको वीर की
- 35:13उपाधि दे देगा, बस ये रोज़ के शब्द हैं मेरे आपके भी कान पक गए
- 35:19होंगे तो उपेन्द्र नाथ ने बहुत चेष्टा की।
- 35:30लेकिन छुपा ना सका और छुपा ना सका तो बताया भी नहीं उसने कि मैं
- 35:36इनको मारा क्यों उसका मैंने आपको बता दिया कि अपने बचपन के मित्र
- 35:43की उसने हत्या कर दी थी किसी कारण से।
- 35:49उसको उससे रंजिश थी, उसी कारण ही वो वकील बना।
- 35:53उसी कारण ही वो जज्बाना और उसी कारण ही उसने अपना मंतव्य मोटो
- 35:58पूरा कर लिया। बस इसीलिए लोग इतनी मेहनत करते
- 36:02हैं देखो अगर परमात्मा के लिए। तुम इतनी इससे 1000 गुणा कम मेहनत
- 36:12कर लो। यही तो तुलसी दास की घरवाली
- 36:15रत्नावली ने कहा हे प्रिया जितना प्रेम तुम मुझसे करते हो, इस
- 36:24चमड़ी से करते हो, गोरी चमड़ी से करते हो।
- 36:29अगर तुम उसे आधा प्रेम भी श्री राम से करो तो श्री राम तुम्हें
- 36:34मिल जाएंगे। लेकिन मंद बुद्धियों को तो ये बात
- 36:43जो भी। तुम खैर घटनाओं को अन्य ढंग से
- 36:50प्रसारित करते हो खुद ही लिख रहा है और आप कहते हैं कितना महान है
- 36:56कहते हैं, मतिमानंद तुलसीदास हूँ पता है उसे इतनी मति नहीं है मेरे
- 37:03पास। लेकिन तुम और ढंग से व्याख्याय
- 37:08करने में समर्थ हो, वह मतीमंद है, उसे पता है देखा देखा, मैंने कुछ
- 37:18नहीं खोपड़ी में। जो भीतर से आ रहा है वह प्रकाशित
- 37:27कर रहा हूँ, प्रसारित कर रहा हूँ, बाबा नानक को भी कहते हैं ये जो
- 37:32मैंने लिखे वो ईमानदार है, ये जो मैंने लिखे ये मेरे शब्द नहीं
- 37:39हैं। ये ऊपर से उतरे हुए गगन मंडल से
- 37:45आए हुए बरसे हुए जिसने सृजना की संसार की, यह वह बरसा रहा है।
- 38:00जीस सिर लिखे जिसे सिर ना जिब फरमाए थे पापा जो ये लिख रहा है
- 38:10सिर उसकी खुद की क्रिएशन नहीं है। यह तो जैसे जैसे फरमान आया उसका।
- 38:18वैसे वैसे यह शरीर लिख रहा है तुम इसका मान मुझे मत देना क्योंकि ये
- 38:30मेरे अपने नहीं हैं। ये तो जैसा गगन मंडल से प्रसारित
- 38:35किया सृजन हार ने। वैसा मैंने लिख दिया जब वो फरमाए
- 38:40थे वैसे पापा ये माँ के कभी कहीं गए हैं।
- 38:48हालांकि इनकी खोपड़ी में परमात्मा ने कभी घुसेड़ दी।
- 38:52बात और जो भी कीमती चीजें हैं। वो चाहे गाना हो, वो चाहे कविता
- 39:04हो, चाहे ऋषि की कुछ बातें हो, ऐसी चाहे सत्य का कुछ प्रगटीकरण
- 39:11हो चाहे साइंटिफिक। कुछ इन्वेंशन्स वो हमेशा आती हैं
- 39:20फुर्सत के लम्हों में जब तुम आराम से बैठ जाते हो बिना कुछ किया एक
- 39:26घड़ी ऐसी आती है जब तुम कतई कुछ नहीं करते टोटली नॉन में होते हो
- 39:34तुम? कंप्लीट्ली यू अरे इन नॉन बिज़नेस
- 39:39बीज़ी नहीं होते तुम ज़रा उस पल में वो उतरता है तुम्हें सारी बात
- 39:46बता दी मैंने दो अक्षरों में जैसे घड़ी तुम नॉन बिज़िनेस में होते
- 39:51हो तुम्हारा दिमाग कुछ नहीं कर रहा होता।
- 39:56उस घड़ी को उतरता है। अगर कोई व्यक्ति अन्नह धनाद को
- 40:03जैसा वो चलता है वैसा चलने दे और सिर्फ सुने तो खाली रमा एक वक्त
- 40:12खुद ही पैदा हो जाएगा। और खुद ही जहाँ से उदगम सतल है
- 40:18इसका ओंकार का नाग, उसमें तुम दम से गड़बडोगे जाके इन प्रक्रियाओं
- 40:24को बड़े ध्यान से सुना करो। यह राजनीति नहीं है।
- 40:29ये बड़े गंभीर विषय है। आपको बीच बीच में से मैं।
- 40:33इनको कारण बना के आपको सत्य समझाया करता हूँ जब भी तुम कभी
- 40:42बेलजदबी मिली है फर सांप बेल के क्षणों में फुर्सत के लम्हों में।
- 40:51नॉनबिजीनस की अवस्था में बेलजदवी मिली है।
- 40:57फर्जा तुम तेरे मुखदीक दाब ले बैठा मेनू तेरा शबाब ले बैठा तो
- 41:05उस घड़ी में वो उतरता है, उसकी एक ही शर्त है।
- 41:11नॉन बिज़नेस तुम व्यस्त नहीं होनी चाहिए लेकिन तुम तो सदा ही व्यस्त
- 41:18रहते हो और नहीं तो राम राम करने में ही व्यस्त रहते हो।
- 41:23क्या? तो बड़ा ये तो वो नाम है और जीवा
- 41:27के ऊपर आने से जीवा पित्र हो जाती है।
- 41:31राधे राधे करने से जीव आप भी भीतर हो जाती है?
- 41:35अब मूर्खों को कोई क्या कहे? खैर, इसने बड़ी चेष्टा की।
- 41:471976 की बात है यह। उस वक्त मैं अखबार का भी शौकीन
- 41:53था, रोज़ अखबार पड़ता था और अखबारों में सुर्खियों की तरह यह
- 41:59गूंजता था। मामला के जज को फांसी की हुई और
- 42:03उसने क्यों की यह हरकत? सब कुछ था मज़े में था।
- 42:10जज था, नाम था, प्रशंसा थी, सब कुछ था लेकिन ये किया बंगला थी।
- 42:21सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन भी मिलती।
- 42:30फिर क्यों किया ये चार कतल? लेकिन उसे एक कतल को छुपाने के
- 42:39लिए चार कतल करने पड़े। हालांकि वो अपने ही बच्चियों के
- 42:43थे। तो जब जुनून छा जाता है दिमाग पर।
- 42:49आँखों में जब लाली उतर जाती है, मुड़ता की क्रूरता घेर लेती है,
- 42:57तुम्हारे दिमागों को वह न मंदबुद्धि होती है, न अंधबुद्धि
- 43:05होती है, वह तो दुष्ट बुद्धि होती है।
- 43:14उस वक्त तो मुझे भी कुछ नहीं पता था।
- 43:1770 में तो अभी मैं भी मेरे साथ वाक्य तू जो बिगड़ा हुआ था।
- 43:241970 में ट्रैन का इंसिडेंट मैं जगह जगह भटकता तो रहा था, 73 में
- 43:32घर भी छोड़ दिया, वापस भेज दिया गया।
- 43:40इस सर्च में था कि कोई मुझे मिल जाए, उस राज़ को खोल दे।
- 43:46लेकिन कौन खोले? वहाँ जाने के लिए एक शर्त है और
- 43:50छोटी सी शर्त है लगती बहुत भारी है शर्त है कि तुम झूठ वोर न छोड़
- 43:55दो, लेकिन बात तो ये है कि हम झूठ वोर न छोड़ते नहीं झूठ मानना नहीं
- 44:02छोड़ते झूठ। मानना नहीं छोड़ते।
- 44:08बाकी तो छोड़ो वो झूठ बोलना नहीं छोड़ते, छोटी सी कीमत चुकानी होती
- 44:13है वो है अहंकार जो है ही नहीं। जो तुम्हारा इल्यूश़न है, जो
- 44:19तुम्हारा भ्रम है, उसको हम छोड़ते हैं।
- 44:25हम कहते हैं हमने किया ये नहीं बताएंगे हाँ किया।
- 44:31मैंने तो जज ने स्वीकार किया, उपेन्द्रनाथ ने कि मैंने किया
- 44:40कैसे किया सब बता दिया। कहाँ हैं?
- 44:45लाशें बता दिया, एक रसोई के पिछले बार एक इधर बगीचे में है।
- 44:54जगहों को उखाड़ लिया गया, लाशें बरामद हो गईं और देखिए जब तक
- 44:59प्रत्यक्ष वह अगर नय हो लेकिन मुजरिम।
- 45:04सारे सबूत दे दे। लाशों का लाशेंजे पड़ी तो फिर
- 45:11अन्य गवाह की जरूरत नहीं रहती। यह मामला दबाया जा सकता था, लेकिन
- 45:20अपराधी कुछ न कुछ पीछे छोड़ जाता है।
- 45:26पहले झूठ बोलता रहा। अब कौन जाने गोधरा कांड कैसे
- 45:32होगा? तुम कैसे हो?
- 45:39मैंने खंगाला नहीं होगा अगर मैं भीतर गया हूँ।
- 45:46और मेरे पास तीन तीन ऑप्शन्ज़ है बाबा से पूछ लूँ अपने भीतर जाके
- 45:52कलेक्टिव अनकॉन्शस को खंगाल हूँ मैं प्रत्येक के कलेक्टिव
- 45:56अनकॉन्शस में जा सकता हूँ दूसरा और तीसरा ब्रमाण्ड के भीतर चला
- 46:02जाऊं तीन तीन ऑप्शन्ज़ है मेरे पास।
- 46:07तो क्या ख्याल है? मैंने खोजा नहीं होगा ये छोटी
- 46:10छोटी चीजों के लिए तो मैं खोजूं भी क्यों?
- 46:13मुझे लोग कह देते हैं बाबा इसका जवाब बाबा से पूछ के दे देना कि
- 46:18मैं ठीक हो जाऊंगा, मेरे कैंसर है, अब बताओ कैंसर किसके नहीं है
- 46:23बताओ? तुम कैंसर होता क्यों है?
- 46:27उसका कारण तो खत्म नहीं करते, ना बुरे कर्म छोड़ते हो, ना बाहर का
- 46:33जलवायु ठीक करते हो, दूषित नदियों का जल मछलियों को मार देता है और
- 46:38तुम्हारे कोई फर्क नहीं पड़ता, तुम वृक्षों को काटे चले जा रहे
- 46:42हो। अंबानी अडानी को बेच रहे हो,
- 46:47क्यों काट रहे हो भाई? प्रकृति बैलेंस रखना चाहती है,
- 46:52तुम नॉन बैलेंस कर देते हो। हर चीज़ को तो प्रकृति का फिर
- 46:56क्रॉप भी झेलने के लिए तैयार रहो। फिर हिंदू हृदय सम्राट।
- 47:06कहीं ऐसा तो नहीं थोड़े से इशारे दे रहा हूँ समय जाना कहीं ऐसा तो
- 47:20नहीं की शक्तिमान ही गंगाधरता? पंडित गंगाधर विद्याधर मायाधर
- 47:34ओंकारनाथ शास्त्री ऐसा तो नहीं है कभी मैं क्यों कहता हूँ पूछा है
- 47:44प्रश्नों को जवाब देता हूँ सब? इनको भागने मत देना, एयर पॉड्स
- 47:53सीस कर देना सी पॉड्स सीस कर देना जाने न पाए देखो भाई जब तक ये
- 48:01सत्ता में हैं तो हमसे पूछ के चले जाए क्या राजा?
- 48:09जा सकते हैं, लेकिन भेद सिर्फ बाबा को ही नहीं पता है।
- 48:15ध्यान रखना बाबा तो तुम्हें मात्र अध्यात्म का वो आंतरिक पहलू भी
- 48:22गिनाते हैं। तो वो यद्यपि गिणाया नहीं जा
- 48:27सकता, वहाँ तो मजबूरी है यहाँ मजबूरी कोई नहीं इसलिए शब्दों से
- 48:35इशारों में वर्णित करता हूँ वह क्या वह मेरी लैंगुएज की मजबूरी
- 48:41है भाषावली इतनी कमजोर है। दृद्र है, शुद्र है।
- 48:47उसके पास इतनी काबिलियत नहीं है कि वो उसको प्रगति के कारण कर सके
- 48:52तो उसकी तो मजबूरी है लेकिन मेरी ज़रा भी मजबूरी नहीं है।
- 48:56मेरी मजबूरी सिर्फ ये है। कि जब उस जज को पूछा गया जज की
- 49:04कहानी मैंने क्यों बताई, तुमने क्यों मारा?
- 49:07उसने बताया लेकिन उसको फांसी दे दी गई तो मैंने आपको एक उपाय
- 49:19बताया वो कारगर है। वो नहीं फेल होगा मत जाने देना जब
- 49:29चिंगारी शोला बन जा है। आग बन के फैले लगे तो फिर एक
- 49:45टेस्ट आता है नार्को, उसमें सभी साहब सभी साहब खुद बता देंगे,
- 49:55तुम्हे कोई मशक्कत करने की जरूरत नहीं है।
- 50:00यू नीड नॉट टु सर्च एनिथिंग? बहुत सी बातें हैं जो स्वामी जी
- 50:20को भी पता है अन्यथा किसी देश का कोई व्यक्ति ट्रम्प जैसा गुर रहा
- 50:28है। और बार बार कहे कि हमने युद्ध
- 50:34रखवा दिया और जीसको हम हिंदू हृदय सम्राट कहते हैं, हम उसको ही और
- 50:46मान्यता देते चले जाएं। तो ये मान्यताएँ इतनी बढ़ जाएँगी,
- 50:49तोड़नी पड़ी मुश्किल हो जाएंगी लेकिन शक्ति के लिए तोड़ना कुछ भी
- 50:55असंभव नहीं होता। वो तो चट्टानों को हिमालय को
- 50:59समयरूओं को घरा सकता है। ये कोई आंधी थोड़ी है, तूफान
- 51:05थोड़ी है। यह तो एटोमिक विस्फोट है, एटोमिक
- 51:11एक्सप्लोजन है? माना हिमालय को सुमेरु को कोई
- 51:20हवा, कोई तूफ़ान नहीं करा सकती, हिला भी नहीं सकती टस्से मसबी
- 51:24नहीं कर सकती। लेकिन एटोमिक एक्सप्लोजन विल
- 51:27डिस्ट्रॉयड स्केटरिट ज़रा भी पता नहीं चलेगा पूछा कि जब बाबा।
- 51:43आपके पास इतना ऑप्शन है कि आप कलेक्टिव अनकॉन्शियस में जा सकते
- 51:47हो और आपने कहा कि मैं किसी के भी कलेक्टिव अनकॉन्शियस में जा सकता
- 51:54हूँ। देखिये मैं इन बातों के लिए तो
- 51:56कलेक्टिव अनकॉन्शस में नहीं चाहूंगा कि उसने मुक्ति कितनी बार
- 52:00की ये तो मुझे कोई। ये एपिस्टन कांड वगैरह मुझे कुछ
- 52:06लेना देना नहीं होता इनसे ये तो तुम्हारे बनाए हुए उस समाज के
- 52:12चेहरे मोरे हैं। मुझे इनसे कुछ भी लेना देना नहीं
- 52:15है। वो जेफरी एपिस्टन हो या कोई और
- 52:21कांड हो। हाँ उसकी हत्या कैसी हुई ये मैं
- 52:25बता सकता हूँ दैट अब उसमें साहब का नाम आ जाए या ना आ जाए।
- 52:44ये तो ऐसी ही है जैसे मूर्ति कितने बार की है नहीं, मैं इन
- 52:49राज्यों को उस राजदार से पूछता नहीं, मैं तो बहुत आखिरी बात है,
- 52:56राजदार से पूछता हूँ और वो मैंने पूछी हैं मेरे पास?
- 53:03कल मैंने एक वीडियो निकाला कि जो बीजेपी के लोग धंधा करते हैं कोई
- 53:10कपड़ा विस्ता, कोई करयाना विस्ता, कोई रेडी भी लगता फल फ्रूट के तो
- 53:16तुम ये पूछना कि भाई वोट किसको देते हो, किस पर श्रद्धा है?
- 53:22अगर वो कहे भाजपा तो कुछ प्रतिकार मत करना, कुछ गलत शब्द मत बोलना,
- 53:28चुपके से आगे निकल जाना रेडियां और भी हैं फसल की राहत के सिवा
- 53:34राहतें और भी हैं और भी दुख हैं जमाने में मोहब्बत के सिवा और भी
- 53:40लोग हैं रेड़ियों वाले और भी। दुकानदार बैठे हैं।
- 53:44उनको कुछ मत कहना, लड़ाई झगड़ा मत करना और डिस्कॅशन तो बिलकुल मत
- 53:49करना। मंद बुद्धियों से डिस्कॅशन करने
- 53:53वाला खुद मंद बुद्धि हो जाएगा। इसलिए मैं जवाब नहीं देता।
- 53:59मैं सिर्फ ब्लॉक कर देता हूँ। जब समझा दी हीरो पायो गांठ घटाओ
- 54:09बार बार बाप को क्यों खोला मन मस्त हुआ फिर क्यों बोला?
- 54:21कहीं ऐसा तो नहीं कि हिंदू हृदय सम्राट ही गंगा सर निकली?
- 54:31ऐसा ही है भाई अब इससे साथ में और क्या कहूं तुम्हें?
- 54:38फिर तो ऐसा है कि फिर तो नर्क हो। तो मैं कुछ भी कह दू अदालत सबूत
- 54:44मानता है। अदालत ने सबूत उससे भी न के अदालत
- 54:52ने कहा कैसे किया अभी तो बस कर दिया।
- 54:59हाँ मैंने मारा। पत्नी को भी मारा, तीनों बेटियों
- 55:03को भी मारा क्यों मारा ये नहीं बताये, लेकिन मैंने आपसे पहले भी
- 55:14कहा सच्चाई 156 पाड़ के बाहर आ जाते हैं।
- 55:22और हमारे पास तो ढंग है ध्यान रखना।
- 55:26अगर मैं मार दिया जाऊं तो मेरे कातिलों को सजा तो मत देना
- 55:35क्योंकि मैं अहिंसावादी हूँ। और मैंने कल भी बोला अगर कहीं मैं
- 55:42जीवित रह जाता गोडसे के वादे से तो मैं कह देता इससे क्षमा करता
- 55:48हूँ ताकि दूसरी बार ये फिर आ सके। हाँ, इतनी ही अहिंसा बाधित होनी
- 55:58चाहिए। उस आखिरी पड़ाव पे पहुँचकर तुम
- 56:01इतने ही हिंसावती हो जाओगे अहिंसा वहाँ का लक्षण इसलिए भगवान कृष्ण?
- 56:16शिशु पाल को पहली गाली पे दंड नहीं देते, तुम तो पहली गाली पे
- 56:20ही गले पकड़ लेते हो कालर पकड़ के नीचे खींच लेते हो वो इतने
- 56:27स्वभाविक है सहनशीलता रखते हैं वो कहते देखो 100 गाली के पास।
- 56:34और जब 100 गोल गालियां निकाल लेता है और कहने के बावजूद अलर्ट करने
- 56:39के बावजूद गिनते हैं 708090 कान में 92 और बिल्कुल आखिरी गली पे
- 56:48कहते हैं शिशु बाल अब से आगे गाली मत निकालना, देखिए कितनी बार बार
- 56:52निकले। लेकिन अगर कोई इतना कुछ होता हुआ
- 57:01भी फिर भी गाली निकालता ही चला जाए तो वह रुकेगा नहीं, पक्का है।
- 57:10फिर उसका क्या करना उसका वध ही करना पड़ेगा।
- 57:14ये ही कृष्ण ने कहा अर्जुन ने पूछा फिर मैं क्या करूँ?
- 57:19प्रभु ये मेरे पिता है, पिता मैं है, दादा है।
- 57:27ये मेरे गुरु हैं जिनसे मैंने धर्न्द्र विद्या सीखी है और ये
- 57:31मेरे सामने खड़े हैं। कृष्ण कहते हैं, जब तुम्हें मारने
- 57:35के लिए खड़े हैं फिर गुरु कहाँ रह गए?
- 57:38गुरु तो सींचता है, मारता थोड़ी है माँ बाप तो सींचता है।
- 57:45भटकने के लिए थोड़ी छोड़ देता है कि जाओ बाग बरीचों में सो जाओ
- 57:51साँपों की छत्र छाया में और कोई फ़ोन न आए तुम कहाँ हो, कैसे हो?
- 57:57वो माँ बाप थोड़ी हो गए। फिर उनमें और कातिलों में फर्क
- 58:03क्या है? तुमने बड़ी स्पर्शता से बच्चे का
- 58:09कतल कर दिया अगर तुम ऐसे हो तो कृष्ण कहते हैं जब ये मारने के
- 58:15लिए खड़े हैं, ये तुम्हें पता से बांटने के लिए खड़े हैं क्या नहीं
- 58:22शस्त्र है न हूँ है। जानते हैं ना आप बिलकुल जानते हैं
- 58:26देवव्रत से ज्यादा कौन जानता है, जो एक ही बाण से सबके मुख तो उड़ा
- 58:34देता है। देवव्रत जो बाद में विषयों पितामह
- 58:37बना उससे अच्छी धनुर्विद्या और कौन जानता है?
- 58:43जे द्रोणाचार्य ये तो मेरे गुरुदेव हैं, सब कुछ ही जानते हैं
- 58:51तो फिर जानते हैं तो तुम्हें मारने के लिए ही खड़े हैं और
- 58:58तुम्हें पताशी कहलाने के खड़े हैं।
- 59:01जब ये तुम्हें मारने आए हैं तो तुम इस वक्त गांडिब धनुष को फेंक
- 59:09के भागना चाहते हो तो ध्यान से सुन लो अर्जुन, हे पार्थ ये
- 59:14तुम्हें भागने भी नहीं देंगे ये। पीठ के पीछे से मार देंगे क्योंकि
- 59:24इनका नेतृत्व मूर्ख व्यक्ति कर रहा है।
- 59:28यह फौज के सिपा सालार हैं और दुर्योधन मूर्ख बुद्धि है।
- 59:39कमांड उसके हाथ में है, राजा हुआ है, असली राजा अंधा है, उसका
- 59:47वारिस मूर्ख है, दुष्ट है और ये उसकी प्रजा है, जो कह देगा
- 59:54दुर्योधन वैसा ही करेगा तो फिर इनका उपाय क्या है?
- 59:56पार्थ पर पूछने लगा कृष्ण? तो कृष्ण कहते हैं सिर्फ एक ही
- 1:00:01उपाय है इनका वध करते हैं जैसे इन्होंने कर्म किये वध तो मैं कर
- 1:00:08चुका इनका कर्मों का फल तो तुम्हारे भीतर तुम्हारे कर्म ही
- 1:00:15तुम्हे दे देते हैं। यद्यपि तुम्हें उस सुपर सेसिटिव
- 1:00:18कंप्यूटर का पता नहीं बस इतनी सी बात है, लेकिन कर्म का फल तो ततक
- 1:00:25क्षण निर्धारित होना शुरू हो जाता है प्रोसेसिंग शुरू हो जाता है।
- 1:00:32जब वृक्ष हरा भरा हो जाता है, फल फूल जाता है, फल लग जाते हैं तब
- 1:00:37खाने पड़ते हैं, फल आपको खट्टे हैं, मीठे हैं, नुकेले हैं, बबूल
- 1:00:42हैं, सेब हैं, आम हैं, लेकिन कर्म करते ही प्रोसेसिंग शुरू हो जाती
- 1:00:50है। फल के।
- 1:00:54उस तरह अर्जुन फिर मैं क्या करूँ? प्रभु कृष्ण कहते हैं शस्त्र उठा
- 1:01:02ले और इन्हें मर्द है। स्वयं का रूप दिखा चुका था।
- 1:01:10तुम कौन हो और मैं कौन हूँ? ये दोनों दिखा चूके थे।
- 1:01:15कृष्ण ऐसे ही बात नहीं करते। लफजी से एक भी बातें हर होती हैं
- 1:01:20नाम बदलने से कुछ होता हैं फिर तो आप गरीबी का नाम अमीरी रख दो,
- 1:01:25अमीरी का नाम गरीबी रख दो। तो फिर गरीब जो है वो कितने के रह
- 1:01:30जाएंगे? पांच 7% गरीब रह जाएंगे, अगर नाम
- 1:01:35बदल दो तो बाकी सब अमीर ही अमीर हो जाएंगे।
- 1:01:39नाम बदलने से अगर सब कुछ हल होता तो नाम बदलना तो बड़ा आसान होता
- 1:01:45है। कहा, मैं अक्सर गया करता हूँ शिव
- 1:01:52भट्टालवे ने कहा। मेरे गीत भी लोग सुनि दे ने ते
- 1:02:17का? फिर?
- 1:02:22आंख सदी देने मेरे गीत विलोंग सुणी देने ते का फिर खुला।
- 1:02:42देखा फिर आंख सधी ने, मैं दर्द नू, काबा के बैठा मैंने दर्द का
- 1:02:58नाम काबा रख दिया। मैं दर्द नु काबा कह बैठा, रब ना
- 1:03:10रख देता पीड़ा दा की पूछ देओ हाल। फकीरांदा साडे नदियों बिछड़े
- 1:03:26नीरांदा में दर्द नो काबा के बैठा रब ना रख देता।