Latest / Baba ji Vijay Vats / 1 Jan 25 - What is Coma? क्या होता है कोमा में? ब्रह्मरंध्र, सहस्रार का रहस्य! Astral Travelling.
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- 0:16प्रणाम बाबा जी अशविन। चटर्जी एनेस्थेसियोलॉजिस्ट
- 0:41में? डॉक्टर ऑफ़ ऐनेस्थीसिया हूँ,
- 0:48इंडियाना स्टेट यूएस में बाबा हमें सब समझा गया, लेकिन कोमा
- 1:01क्या है? यह समझ नहीं आया।
- 1:09अध्यात्म बहुत सूक्ष्म चीजों के बारे में बताता है, जैसे चक्र
- 1:17कुंडरण्य, सहसरार ब्रह्मरद्र। जिनको हम काट छांट के देखते हैं
- 1:26तो मिलता नहीं। ऐसे ही जागृत अवस्था को हम समझते
- 1:36हैं। स्वप्न को समझते हैं निद्रा को
- 1:42समझते हैं लेकिन आज तक कोमा क्या है?
- 1:51कोमा कहाँ जाता है व्यक्ति कोमा में?
- 1:58कौन सा स्थान है वो जहाँ कोमा कृष से व्यक्ति चला जाता है?
- 2:09क्या यह कोई कर्मों की परंपरा है? इसको विस्तार से समझाने का कष्ट
- 2:16करें। मैं बहुत ही शंकाग्रस्त हूँ इस
- 2:27मसले में और हम उलझन में हैं इस प्रश्न का जवाब देकर।
- 2:35आप मानवता के ऊपर बहुत बड़ा कल्याण कर सकेंगे।
- 2:43आपका आज्ञाकारी कुंभा क्या है? कहाँ जाता है व्यक्ति को मन?
- 3:07पिछले प्रवचनों में मैंने कर्म और भोग की फिलोसोफी बहुत खोल के बताई
- 3:16है। उसमें कहीं कहीं मैंने कोमा का
- 3:23जिक्र भी किया, लेकिन शायद तुम पढ़े नहीं या तुम समझे नहीं कोमा
- 3:38में व्यक्ति कहा जाता है। प्रत्येक कर्म का भुगतान व्यक्ति
- 3:43को करना पड़ता है। पहली बात तो आप ये लिख लो जो कुछ
- 3:52भी तुम करते हो कुछ भी। हमारे पंजाबी में कहावत है एक
- 4:04देना पो हिसाब तेनु पाई पाई दा नहीं हो रहा है जाणा पीछे तेल राइ
- 4:16दा ना तेल बचेगा ना राइ बचेगा पाई पाई का तुझे हिसाब चुकाना पड़ेगा।
- 4:24जो कुश्तू ने किया सारा संसार शब्दों को ठीक से समझ लेना मैंने
- 4:38शब्द प्रयोग किया संसार सारा संसार कर्मों की व्यवस्था से चलता
- 4:46है। जो कर्म करने में स्वतंत्र हैं वो
- 4:59जैसा चाहे कर सकते हैं। खैर जैसा कृष्ण कहेंगे वैसा भोगना
- 5:06पड़ेगा। करोगे तुम अपनी मर्जी से भोगोगे
- 5:11तुम। उसकी मर्जी से विराट ने जो कानून
- 5:18व्यवस्था तय की है, उसके अधीन तुम्हें भोगना पड़ेगा।
- 5:22ये सीता श सार्वभौमिक तथ्य सत्य आपको बतला दिया।
- 5:29यह नियमों का कायदा है। मूर्छित तुम जानते हो डॉक्टर हो,
- 5:43एनेस्थीसिया के डॉक्टर हो जीसको मूर्छित करना हो उसको एनेस्थीसिया
- 5:48दे देते हो। मूर्छित हो जाता है और मूर्छित
- 5:54अवस्था में जो तुम काठ स्यांट करते हो वो कैंची की अगर थोड़ी सी
- 6:02नोक भी तुम्हें चुभ जाए, साधारण अवस्था में तो तुम चेर लाओगे।
- 6:08लेकिन एनेस्थीसिया के बाद तुम अंगों को काटते हो, पीटते हो, अलग
- 6:15करते हो, रख देते हो, हार्ट की सर्जरी करते हो, बाईपास करते हो,
- 6:21हार्ट को टांग देते हो, नकली हार्ट लगा देते हो, नकली हार्ट ही
- 6:27पंपिंग करता है। लेकिन जीस व्यक्ति की सर्जरी हो
- 6:33रही है उसे दर्द नहीं होता। क्या हुआ जो सूचना तंत्र सूचनाएं
- 6:47देता है। तुमने वो लाइन तोड़ दी है,
- 6:52सूचनाएं नहीं पहुंचती जहाँ पर सूचनाएं पहुंचती हैं।
- 7:01अब तुमने वो लाइन काट दी है जैसे कोई हमारी टेलीफोन की लाइन काटता
- 7:05है। में दर्द तो है जब काटे का कोई
- 7:14सारा शरीर काट के एक तरफ रख देता है।
- 7:18दर्द तो होता है लेकिन सूचना नहीं जाती।
- 7:28उस मस्तिष्क के भाग में जो सूचनाओं को एक्सेप्ट करता है और
- 7:39प्रश्न तुमने बहुत जबरदस्त पूछा। शायद ऐसा प्रश्न कृष्ण ने नहीं
- 7:45पूछा होगा बेहोशी तुम जानते हो क्योंकि तुम बेहोश खुद कर देते हो
- 7:52रोज़ लोगों को जागृति सभी जानते हैं हम जागृत हैं, बोल रहे हैं,
- 8:00सुन रहे हैं। निद्रा भी तुम जानते हो श्री
- 8:05सुक्ती भी तुम जानते हो जहाँ जानकर जहाँ जाकर कोई आसपास की सुध
- 8:12वुध नहीं रह जाती, चेतना का थोड़ा सा अनशबल बाकी नहीं बचता।
- 8:23और तुम परम बेहोशी की अवस्था में चले जाते हो।
- 8:32ये है शुभ सुप्ति मोक्ष जागृति। स्वप्न ये चार वस्तें हो गई
- 8:45पांचवी अवस्था मैंने बताई थी दुर्यवस्था और तुमने पूछा बिलकुल
- 8:53अलग सवाल है, कोमा गया है? कोमा में व्यक्ति कई प्रकार के
- 9:06कोमा में व्यक्ति सीधा स्टेट पड़ा है, कभी आँख खोलता भी है, आँखें
- 9:17बंद भी कर लेता है, लेकिन तुम्हें नहीं पता चलता।
- 9:22कि जब वह आँखें खोलता है तो उसको तुम खड़े हुए दिखाई पड़ते हो कि
- 9:26नहीं और उस अवस्था में जब व्यक्ति कोमा में होता है, वह क्या महसूस
- 9:35करता है, क्या उसे दर्द होता है? क्या उसे तकलीफ होती है?
- 9:43क्या किसी प्रकार का उसे कष्ट होता है?
- 9:47क्या उसे घबराहट होती है? आप इसको विस्तार से समझाएंगे।
- 9:53आपको कोमा एक ऐसी अवस्था है। जो प्रकृति आपके ऊपर तब लेके
- 10:04ध्यान रखना मैंने शब्द बोला प्रकृति कोमा वो अवस्था है जब
- 10:11प्रकृति आपके ऊपर ऐसी अवस्था को लेके आती है जब आपके बहुत भारी
- 10:19कष्ट। निरंतर रूप से शुरू होने होते हैं
- 10:30और प्रकृति भलीभाँति जानती है कि अब यह व्यक्ति इन कर्मों की।
- 10:40वृहद श्रृंखला का फल भौक नहीं पाएगा।
- 10:46जागते हुए एनेस्थीसिया तुम लगा दोगे कितनी देर काम करेगा?
- 10:5724 घंटे, 12 घंटे, 6 घंटे लेकिन प्रकृति भरी भाँति जानती है
- 11:05क्योंकि ऐसा भी ज़माना था जब एनेस्थीसिया खोजा नहीं गया था,
- 11:10लेकिन प्रकृति तुम्हारे खोजों का इंतजार नहीं करती।
- 11:14प्रकृति अपनी व्यवस्थाएँ खुद बनाती है।
- 11:18बाद में तुम अवस्था बनाते जाओ या न बनाओ, कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 11:23आज तक दुनिया में करोड़ों अरबों खरबों लोग हुए और वो प्रत्येक
- 11:31अवस्था के भीतर गुजरे हैं। चाहे वो शारीरिक हो, चाहे मानसिक
- 11:35हो। और फिर तुम तो बना लोगे पशु पक्षी
- 11:41जंगल में रहने वाले जहाँ कोई डॉक्टर ही नहीं है, उनका क्या
- 11:45होगा? तो प्रकृति प्रत्येक अपराणी के
- 11:52भीतर। ऐसी व्यवस्था पैदा कर देती है जो
- 11:59कि किसी भी अव्यवस्था की स्थिति में संभाल सके।
- 12:06शरीर को जैसे आपको थोड़ा सा समझाऊं, कहीं चोट लग जाती है?
- 12:14खून निकलना शुरू हो जाता है और अगर खून निकलना शुरू हो जाए और
- 12:20खून निकलता चला जाए तो कितनी देर में खून निकल जाएगा?
- 12:23आपको पता ही है ये थोड़ा सा खून होता है आदमी के भीतर ये पांच चार
- 12:31लीटर? और कोई व्यक्ति ऐसा भी हो सकता है
- 12:36और जंगलों में कोई जानवर ऐसा भी हो सकता है जिसकी कोई खोज खबर
- 12:43नहीं जीसको कोई पूछने वाला नहीं वहाँ तो वेटरनरी डॉक्टर भी नहीं
- 12:48होता। लेकिन प्रकृति की अवस्था बनाई गई,
- 13:04जब कोई घाघ हुआ, कोई सुई चुभी, कोई कांटा चुभा, खून निकलना शुरू
- 13:08हुआ। और आपको पता भी नहीं है आप बेहूशी
- 13:17के हालत में हो तो प्रकृति ने व्यवस्था की है विटामिन के वह
- 13:27जल्दी से। अपना काम करना शुरू कर देगा।
- 13:33जल्दी से उस घाव के ऊपर पुल का निर्माण कर देगा।
- 13:37आड़ा तिरछा अर्जुन के तीरों की तरह और उस घाव को ढक देगा।
- 13:47ऐसा ढक देगा जैसे मर्म पटी की हो। खो नहीं निकलेगा बाहर और अगर तुम
- 13:56कोई मर्म पटी ना भी करो तो भी वो स्वयं ही।
- 14:06आपने देखा खरोंची जम जाती है, ऊपर घाव ठीक हो जाएगा अपने आप यह
- 14:17व्यवस्था किसने की आपने की नहीं? यह व्यवस्था डॉक्टर्स ने नहीं की।
- 14:25यह व्यवस्था प्रकृति की। ऐसे ही मैं तुम्हें कहता हूँ
- 14:30मनुष्य मैं करता हूँ, इस बात के अहंकार में न रहलें मनुष्य से
- 14:38पहले परमात्मा ने प्रकृति के विधान में ऐसी चीजें बना दी हैं।
- 14:45जो स्वयं में सारा काम करते हैं। कब तुम्हें खुश करना है?
- 14:52कब तुम्हें नाराज करना है? कब तुम्हें क्रोध जगाना है?
- 14:58ये सब प्रकृति करते हैं। ये काम प्रकृति का है।
- 15:04तुम्हारे भीतर ऐसे हार्मोन का संचार करके कार्टिसेल एडरनालिन
- 15:15तुम क्रोध में आ जाओगे, तुम्हारे भीतर ऐसे हार्मोन को प्रोड्यूस
- 15:20करेगा। डोपा में सैलोटोनन तुम ठहाके
- 15:28मारने लगोगे, प्रसन्न हो जाओगे, हंसने लगोगे, मेलोटोनन जैसे सूरज
- 15:38टू। और तुम्हें पता हो चाहे न पता हो
- 15:45प्रकृति को पता है तुम्हारे शरीर के साथ बंधी है प्रकृति उसको पता
- 15:50है साँझ हो चली सूरज डूब गया तो उसने मेलाटोनिन का।
- 15:57प्रोडक्शन करना शुरू कर दिया। वह तुम्हें बेहोश करेगा।
- 16:00हल्के हल्के, हल्के, हल्के धीरे धीरे धीरे धीरे वह मैलाटोनिन
- 16:13तुम्हारे खून में मिलता जाएगा। नींद तुम्हारे पीछे पीछे आएगी,
- 16:23तुम्हें पता भी नहीं चलेगा आज। आधुनिक व्यवस्था में आकर हमने खुद
- 16:31अपनी व्यवस्था का निर्माण कर लिया।
- 16:34प्रकृति से हम दूर हट गए अन्यथा प्रकृति ने अपनी व्यवस्था कर रखी
- 16:41है। साँझ ढलते ही वो मैलाटोन सैराटोन।
- 16:47प्रोडूस करना शुरू कर देता है और आपको हल्की हल्की बेहोशी निशा
- 17:00सांझ होते ही तभी तो आपके पांव मैखानी की तरफ उठने रखते हो।
- 17:08थोड़ा सा भीतर मेलाटॉन पैदा हुआ। आप हल्के से सुरूर में आए और
- 17:17तुम्हें याद आया और तुम्हारे पग। सहसा ही उठने लगे।
- 17:26मैखानी की तरफ़ उस मूर्छित करने वाले हार्मोन ने तुम्हें याद
- 17:37कराया तुम हल्के से मूर्छित हुए और तुम्हें याद आया किस मुर्चा को
- 17:44बढ़ा लो। सांझ हो चली है, दिन भर के कामकाज
- 17:47थक गया हूँ, बहुत कुछ हुआ होगा, सारे दिन में इज्जत, बेइज्जती,
- 17:57अच्छा बुरा सुनने को मिला होगा, सब हुआ होगा, तुम थक गए हो।
- 18:04प्रकृति ने सभी चीजों की व्यवस्था पहले से कर ली है।
- 18:10तुम अपनी व्यवस्थाएँ अलग से करने में जुटे हो, तुम कर सकते हो एक
- 18:19बात का और भी ख्याल रखना। अगर तुमने आज एसी पैदा कर दिया,
- 18:27आज तुमने अगर थिएटर पैदा कर दिया और तुमने एयर कंडीशनर का आनंद
- 18:39उठाना शुरू कर दिया। हीटर का आनंद उठाना शुरू कर दिया।
- 18:44सर्दी के अंदर तुम कपने लगे सर्दी से गर्मी के अंदर तुम तप्त होने
- 18:52लगे, तो तुमने सर्कमस्टैंसेस को चेंज करने के टेस्ट कर?
- 19:00और उसकी कारण तुमने निर्माण किया एयर कंडीशनर का हीटर्स का, लेकिन
- 19:08ध्यान रखो ये तो तुमने आज उड़ना है।
- 19:13कृष्ण जैसे लोग कहाँ एयर कंडीशनर थे?
- 19:17कहाँ हीटर थे? तब तो बिजली भी नहीं थी, विद्युत
- 19:21भी नहीं थी। कहानियों कहती हैं कि रुक्मणी
- 19:24पंखा झेल रही है और कृष्ण भगवान खाना खाने बैठे हैं।
- 19:31नीचे आसन के ऊपर पहला कोर्ट उड़ा है।
- 19:38और मुख में डालने ही लगे तो सहसा वो कोर रख दिया।
- 19:46उठे दौड़े बागे द्वार की तरफ गए द्वार की तरफ गए द्वार के पास जा
- 19:55के ठिठ के। वापस मुड़े फिर वापस आये अपने आसन
- 20:02पे बैठ के खाना खाने लगे रुक्मणि पंखा झेल रही है इसका अर्थ बिजली
- 20:08नहीं तुम्हें और बता दूँ रावण के जमाने में।
- 20:15रावण इतना बड़ा वैज्ञानिक था जो तुम कहते हो पंखा उसको पवन पंखा
- 20:24झेलती है। पवन पंखा झेलती थी काल उसके पैर
- 20:33से बंधा था। ये सिर्फ अब्रीविएशन है
- 20:39सिम्बोलिकरी प्रेजेंटेशन लेकिन जैसे जैसे विज्ञान विकसित होगा
- 20:48तुम्हे समझायेगा इन सारी बातों का पवन कैसे पंखा झेलते है?
- 20:53ये जो पंखा चलता है उस जमाने रावण ने इजाद कर लिया था।
- 20:58रावण बहुत बड़ा वैज्ञानिक था और ये सारी चीजें हमारे वेद में
- 21:08निजित है। वहाँ से उसने एक्स्पेरमेन्ट किया।
- 21:13शब्द उठाये, फॉर्मूला वहाँ से उठाये लेकिन फॉर्मूला सब कुछ नहीं
- 21:18होता। कुछ अपना दिमाग भी लिखाना पड़ता
- 21:20है तो उसने किसी ना किसी तरह विद्युत का निर्माण कर दिया, पंखा
- 21:26बना लिया और यहाँ तक पुष्पक विमान बना लिया।
- 21:30रिमोट कंट्रोल ये जो आज दिखाई जाती है ना ऐसे हाथ की और वो
- 21:35पुष्पक मानो ऊपर उठ गया और नीचे कर दिया तो नीचे उठ गया ये सब
- 21:39रिमोट कंट्रोल और सुसीन वेद ने नाभि के भीतर अमृत कुंड डाल दिया।
- 21:52तुम कभी मरोगे नहीं, इससे एक बात साफ हो जाती है।
- 21:58वैज्ञानिक इस बात को अच्छी तरह से समझ ले।
- 22:02यह अमृत कुंड जो नाभि के भीतर रख दिया सुशीण वेद ने यह क्या था?
- 22:13जिसके कारण रावण को इतना ज्यादा अहंकार हुआ कि मैं मर तो सकता
- 22:18नहीं, इतना अहंकार हुआ उसे यहाँ तो मरने वाले लोग सबको पता होता
- 22:30है कि हमें मरना है। फिर भी हिटलर दूसरों को मारने में
- 22:37कुताई नहीं करते, दूसरों को तंग करने में दुख देने में जलाने में
- 22:41चेम्बरों में गैस चेम्बरों में बंद करके बटन ऑन कर देते हैं।
- 22:50और हजारों की संख्या में लोग वास्प बन के उठ जाते हैं और वह
- 22:58हस्ता या खिलखिलाता है, उसे आनंद आता है, कुष्ठ दुष्ट प्रवृत्ति के
- 23:04लोग होते हैं, जिन्हें दूसरों को दुख देने में आनंद आता है।
- 23:09सभी प्रकार की प्रवृत्तियाँ के लोग हैं, कुछ ऐसे भी होते हैं,
- 23:16दूसरों के ताप से खुद पिघल जाते हैं।
- 23:25कैसे संत का स्वभाव बताया। संत का स्वभाव मक्खन की तरह होता
- 23:34है जो थोड़े से तापसी विगल जाता है।
- 23:42बुद्ध जैसे लोग कैसे भी हैं, जो दूसरों के दुख से दुखित हो जाते
- 23:50हैं? और दूसरों के दुख को दूर करने के
- 23:57लिए अपनी सारी सुविधाएं छोड़कर तख्तो ताश छोड़कर।
- 24:08हीरे जौहरातों का कुंड छोड़कर खजाने छोड़कर जमीन जायदाद छोड़कर
- 24:17जनता छोड़कर अपना सम्राटत्व छोड़कर बुणों में निकल जाते हैं।
- 24:24उसकी तलाश में। कि अगर मिल गया तो मानवता की सेवा
- 24:29कर सकूंगा और वो मिल गया और बुद्ध ने मानवता की खूब सेवा की।
- 24:43बहुत प्रकृतियों के लोग हैं इस धरा पे।
- 24:50एक ऐसे हैं जो दूसरों को दुख देकर राजी हैं, उसमें उन्हें खुशी
- 24:58मिलती है। एक ऐसे हैं जो दूसरों को सुख देकर
- 25:02राजी हों, उनको इसी में खुशी मिलती है।
- 25:09ख़ुशी ख़ुशी का सवाल कोई दूसरों को तंग करके राजी होता है और
- 25:16दूसरों को सहेज करके राजी होता है।
- 25:22प्रत्येक सभा के व्यक्ति सृष्टि में आपको मिलेंगे।
- 25:30रावण के पास साइंटिफिक, बौद्धिक और मरते वक्त रावण ने कहा कि अगर
- 25:42थोड़ी देर और मैं जीवित रह लेता। तो दो तीन खोजे में कर लेता लकड़ी
- 25:53में से दुआना बंद कर देता लकड़ी जलती है तो दुआ आता है।
- 26:03सोने में सुगन्ध पैदा कर देता हम तो नहीं आते और तीसरा स्वर्ग को
- 26:12बुढ़िया लगा देता। कहने के ढंग थे इसका अर्थ था।
- 26:21कि तुम आनंद की उस उचाई तक पहुँच जाओ।
- 26:27सर को पूड़ियाँ लगाने का अर्थ नहीं था जैसे अर्थ पवन पंखा झेलती
- 26:33थी, रावण को कालपाई से बता था रावण के।
- 26:39ऐसे ही स्वर्ग को पूड़ियाँ लगा देता।
- 26:42यानी तुम अपने आप तक पहुंचने के लिए कोई ज्यादा मशक्कत करने की
- 26:47जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे साधन खोज लेता।
- 26:50वो ठीक बाद में खोजे गए। लेकिन रावण की भी इच्छा थी, सब
- 27:00कुछ था। उसके पास आत्मज्ञान नहीं था और सब
- 27:06कुछ हो तुम्हारे पास आत्मज्ञान ना हो।
- 27:16दुखों, दर्दो से कष्टों कलशों से चिंता चिंतनाओं से व्यक्ति घरा ही
- 27:22रहेगा। बस खुद का दर्शन और सब चिंता
- 27:33चिंताएं चिंतनाएं। सबकष्ट, कृष, दर्द, रोग, शोक,
- 27:43मृत्यु सब समाप्त हो जाता है एक साथ है सब श्रद्धा है एक साधनों।
- 27:54कहा तो बहुत, लेकिन उस कहने के आप अर्थ ही समझते रहे शाब्दिक अर्थ
- 28:04अभी रोज़ मेरे पास प्रश्न आ जाते हैं।
- 28:08अभी एक 2 दिन पहले ही प्रश्न आया। बाबा आपने ऐसा कहा?
- 28:13भीतर जाके ऐसा हो जाता है, बाहर ऐसा हो जाता है, ऐसा हो जाता है
- 28:19मैं इन उल्लुओं की क्या बात कर रहा हूँ?
- 28:22मैंने पूछा कि तुम बेहतर गए थे उस जंक्चर प्वाइंट पे जाके?
- 28:28तुम जाते और फिर बोलते के बाबा तुम्हारी बात गलत है, फिर
- 28:34तुम्हारा तर्क बिल्कुल ठीक होता गए तो है नहीं।
- 28:38शब्दों को मुर्गे की तरह शब्दों से लड़ा रहे हो।
- 28:44अब इसमें बोलने वाला क्या कर रहा है?
- 28:46अनुभवी व्यक्ति क्या करें? अनुभवी व्यक्ति बहुत कोशिश करता
- 28:52है। अंत को समझाने की कि सूरज कैसा
- 28:55होता है, प्रकाश कैसा होता है, लेकिन समझा पाता है नहीं, समझा
- 29:04पाता क्यों नहीं समझा पाता? क्योंकि मुख्य चीज़ नहीं है अंधे
- 29:09के पास और इतनी मगज खपाई करने की आवश्यकता नहीं होती समझाने वाले
- 29:15को अगर अंधे के पास आंखें तो बताने वाला कोशिश करता है कि किसी
- 29:26न किसी तरह उसके प्रश्नों के उत्तर भी देता है।
- 29:31लेकिन कहीं कहीं जाकर उसे पता होता है कि मेरे उत्तर देने का
- 29:36कोई फायदा नहीं है। प्रकाश कैसे होता है?
- 29:46ये सफेद होता है। दूध की तरह दूध कैसा होता है?
- 29:51देखा तो दूध बेने देखा, प्रकाश दूध होता है, सफेद तितर की तरह तो
- 30:03तितर कैसे होता है देखा दूध बेने तीर्थ, तीर्थ तीर्थ।
- 30:09तो कहते देखो, तितर ऐसा होता है ऐसा होता है तितर ऐसी चोंच होती
- 30:15है उसके तो उंदा कहता ए ऐसे ऐसे देख के ऐसे ऐसे सब देख के हाँ समझ
- 30:23गया समझ गया प्रकाश कैसा होता है। ऐसे टेढ़ा मेढ़ा होता है, तुम
- 30:33चोंच को देखे हो, महसूस किए हो, ये तितर की चोंच है ये तितर की
- 30:42गर्दन है पतली सी और आगे तितर के पार आ गए।
- 30:47और बड़ा, मुलायम, मुलायम सा है और तुमने पूरा हाथ उसके शरीर के ऊपर
- 30:53से फेरा और देखा? उसकी टांगें भी हैं।
- 30:56हाँ, मैं समझ गया प्रकाश कैसा होता है?
- 30:59ऐसी टांगियां भी होती हैं उसकी पतली, पतली।
- 31:02प्रकाश के और ऐसे फर्क भी होते हैं थोड़े कोमल कोमल से और ऐसे
- 31:07थोड़ी सी गर्दन टेढ़ी मेढ़ी होती है और ऐसे उसकी चोंच होती है
- 31:13प्रकाश की तुमने क्या खाक समझा, क्या समझा तुमने?
- 31:21समझाने वाला, कब तक समझाएगा, समझाने वाला आखिर तुमसे क्षमा
- 31:26मांगेगा क्या? नहीं समझेगा ओके।
- 31:30आखिर में हमें यही कहना पड़ता है ही इज़ नॉट नॉन एबल।
- 31:45इज़ नॉट ओनली अन्नोन अन्नोन बट ऑल्सो अननोनोअबल आई?
- 31:52स्किन ने ये बात कही वह सिर्फ अज्ञात नहीं है इस नॉट ओनली अननोन
- 32:01बट ऑल्सो अननोनोअबल। वह अज्ञेव ही है, कभी जाना नहीं
- 32:06जा सकेगा। तुम अज्ञानी हो, अज्ञानी अंधा
- 32:16होता है और अंधे का कोई कसूर नहीं होता है।
- 32:23अंधे की कमी होती है कसूर नहीं होता कोई?
- 32:27अंधे की कमी है कि उसकी आँखें नहीं अंधे का दोष भी कोई नहीं
- 32:31होता। यहाँ हमने कुछ अंधे मंडलेश्वर बना
- 32:41के रखे हुए हैं। उनको पता तो कुछ है नहीं।
- 32:46मन आई बात बोलते रहते हैं, ये अव्वल सिर के पागल हैं।
- 32:54इनको घर बैठ जाना चाहिए क्योंकि इनकी सिर्फ आँखें ही अंधी नहीं
- 33:06हैं। इनकी बुद्धि भी अंधी है।
- 33:08इनका ज्ञान भी अंधा है। ये सिर्फ आँखों से ही अंधे नहीं
- 33:14हैं। ये ज्ञान से भी अंधे हैं।
- 33:15ये अज्ञानी भी हैं तो ऐसे व्यक्ति को सुनकर क्या करोगे?
- 33:22खा पीकर मुस्तन्ड हो जाते हैं। ऊपर से तुम महामंडलेश्वर की
- 33:28डिग्री दे जाते हो, आता जाता इन्हें कुछ नहीं।
- 33:35मैं कहूंगा अगर संसार में आध्यात्मिकता का बड़ा गर्क किया
- 33:39है तो ऐसे लोगों ने किया है और मैं तुम्हें एक बात कहा करता हूँ।
- 33:47बाबा मुझे कहा करते हैं, पिछले जन्म का अति दरिंदा बहुत कतल करने
- 33:55वाला व्यक्ति लोगों को व्यथित करने वाला व्यक्ति जैसे हिटलर ने
- 34:00किया। ऐसा व्यक्ति अगले जन्म में अंधा
- 34:04होता है। परमात्मा के पास इससे ज्यादा
- 34:08छीनने को और कुछ भी नहीं दांत गए, स्वाद गया, आँखें गई जहान गया।
- 34:27और ये लोग हमें उपदेश देते हैं। अंधे लोग आंख वालों को उपदेश देते
- 34:33हैं। हाथों की सफाई, गटर, मटर करके ये
- 34:40लोग। लाखों लोगों को बेवकूफ बना रहे
- 34:43हैं। इसका दोष कैसे लगेगा?
- 34:47पूछा है मुझसे ये पाप नहीं कर रहे हैं, कर रहे हैं तो करने दो तुमको
- 34:53फिकरमंद हो तुमको फिकरमंद हो मिस्टर विवेक।
- 35:04तुम्हें तो नहीं भुगतना पड़ेगा ये गुमराह करते हैं तो यही भोकेंगे
- 35:10तुम चिंता मत करो, तुम सिर्फ अपनी यात्रा शुरू करो, वह ऐसा क्यों
- 35:18करता है? क्यों लोगों को गुमराह करता है
- 35:22करने? दो गुमराह होना चाहते हैं लोग
- 35:28संतो ने बहुत कोशिश कर ली कि लोग गुमराह ना हो लेकिन गुमराह होने
- 35:34से कोई बचा। ये अंधपंथी कतहरें इनमें कोई कमी
- 35:41आई रोज़ बढ़ोतरी हो जाती है। ये नाम दान देने वाले रोज़ बढ़ते
- 35:48जाते हैं। मुझे बहुत बार प्रश्न आ जाते हैं।
- 35:53कल प्रश्न आया कि हमारे स्वामी सिहागजी हैं।
- 35:57और नाम दान देते हैं, वो ऐसा कर देते हैं।
- 35:59मैंने कहा तुम मेरे ही चैनल पे क्यों आये हो?
- 36:03उल्लू के पत्थर मैंने तो तुम्हें बुलाया था तो भाग जाते इनको ऐसे
- 36:11ही जवाबें दरकार। बहुत सहजता से बड़े मीठे स्वरम
- 36:20में प्यार से मैंने बोल के देख लिया तो फिर जब प्यार से नहीं
- 36:26समझता तो क्रोध की एक्टिंग करनी पड़ती है।
- 36:37ये भाग जाएं ये रो कहते हैं तुम बाबा ब्लॉक कर देते हो।
- 36:48देखिये वो भी इनके फायदे के लिए। ये मग्ज खपाई करना चाहते हैं और
- 36:53मैं भलीभाँति जानता हूँ मग्ज खपाई करने से कभी कोई वहाँ पहुंचा नहीं
- 37:00वहाँ पहुंचता है सिर्फ व्यक्ति दर्शन से संदेह मिटते हैं दर्शन
- 37:05से तुम ये पंथ वाले। ये जो हरे रामा कृष्णा पंथ है
- 37:14डोलकी उठा लेते हैं। कुछ अंग्रेज वैसे ही पागल होते
- 37:18हैं। आपको पता ही है क्योंकि नए नए
- 37:25आध्यात्मिकता का स्वाद चखा। तो सड़क पे निकल जाते हैं।
- 37:30हरे रामा हरे कृष्ण नाचते हैं, मेरे भाई बताया करते हैं मुझे
- 37:34अमेरिका में रहते हैं, बताते हैं के रिकॉर्डर लगा लेते हैं वहाँ
- 37:41आरती का ओम जय जगदीश हरे और खूब नाचते हैं।
- 37:46उन्हें पता तो लगता नहीं क्या बोल रहे हैं?
- 37:51और आरती के ऊपर नच थे, मैंने कहा ठीक किया, बढ़िया है शब्दों में
- 37:58रखा क्या है तेरी आँखें। खो।
- 38:11के सिवा दुनिया में रखा क्या है तेरी आँखों के सिवा दुनिया में?
- 38:29रखा क्या है ये उठे सुहा, चले ये झुकें शां ढले तेरा जीना।
- 38:49मेरा मरना इन्हीं पलकों के तले तेरी आँखों के सिवा दुनिया में
- 39:08रखा। क्या है ये उठें सोहा, चले ये
- 39:19झुकें शाम ढले। मेरा जीना मेरा मरना इन पलकों के
- 39:34तले तेरी आँखों के शिवा दुनिया में।
- 39:45रखा क्या है? आनंद आना चाहिए।
- 39:54शब्दों की ज्यादा फिक्र मत किया करो जब तुम शब्दों की ज्यादा
- 40:00फिक्र करते हो। तो मुझे ऐसे अलफाज़ प्रयोग करने
- 40:07पड़ते हैं और मैं तुम्हें कहता हूँ, शब्दों में वो आता नहीं
- 40:13शब्दा तीत है। अखरा नालों वखर जेड़ा शब्दा तीत
- 40:20है वो अक्सरों से परे हैं वो। दूर है, अक्षरों से अक्षरों में
- 40:25आता नहीं और तुम अक्षरों से समझने की चेष्टा करते हो।
- 40:34सभी संत कहते हैं, नहीं बताया जा सकता है अक्षरों से।
- 40:44मात्र इशारे करने का प्रयास भर करते हैं और प्रयास अल्टीमेट
- 40:59डायरेक्शन नहीं है। प्रयास प्रयास है कामयाब हो जाए,
- 41:07हो जाए, किसी किसी को हो जाता है, न हो तो न हो।
- 41:11आम तौर पर मानकर चलते हैं कि नहीं होगा, लेकिन भीतर की करुणा शायद
- 41:20करोड़ों में से। एक व्यक्ति के दिल में यह तीर उतर
- 41:27जाए इसलिए बोलते हैं और तुम ये समझ लेते हो।
- 41:37ये जो संत बोलते हैं तो वह बोलने से मिल जाता होगा।
- 41:42बस यही गलतफहमी का शिकार हुए हुए तुम प्राण त्याग देते हो।
- 41:50संत कहते हैं के शब्दों में वो आता नहीं शब्दातीत है वो।
- 42:02लेकिन अगर तुम्हें चुप करना हो, मौन हो जाओ, कहना हो, चुप हो के
- 42:13बैठ जाओ, ये कहने के लिए भी तो शब्दों का इशारों का इस्तेमाल
- 42:20करना होता है, ऐसे तुम समझ नहीं पाओगे।
- 42:27तुम्हें मौन कराना है, संत का उद्देश्य है तुम्हें कैसे मौन
- 42:34कराते है? मौन कराने के उद्देश्य से वो
- 42:41शब्दों का इस्तेमाल करता है और तुम शब्दों को पकड़ लेते हो।
- 42:48तो क्या करें संत संत के पास और कोई राह बचती है?
- 42:56शब्दों से वो नहीं मिलता और तुम इन्हीं शब्दों को पकड़ लेते हो।
- 43:06पर संत का कर रहा इस नॉट ओनली अननोन बट ऑल्सो अननोन एबल।
- 43:17वह अज्ञात ही नहीं है बल्कि अज्ञे है, जाना नहीं जा सकेगा।
- 43:22लेकिन तुम कहते हो समझाया नहीं बाबा।
- 43:25थोड़ा सा और समझा दो क्या खा के समझा दो हाँ जब वो समझ में आता
- 43:36नहीं है। सभी संत बोल बोल के थक गए और यहाँ
- 43:42तक कि अब तो वैज्ञानिक भी बोल बोल के थक गए।
- 43:46इस नॉट ओनली अननोन बट ऑल्सो अननोन एबल नहीं जाना जा सकेगा।
- 43:52वो दोनों पक्षों से एक ही बात आ रही है।
- 44:02नहीं जाना जाता वो और तुम फिर भी कहते हो बाबा।
- 44:08समझ में आया नहीं, थोड़ा समझा दो ना और साफ कर दो तो क्या करेंगे?
- 44:17संत संत थोड़ी सी और मगजगबाई करेंगे और कोई राह बनता ही नहीं।
- 44:27संत तुम्हें कहते हैं मौन हो जाओ मौन एक की मियाँ मौन से महाशक्ति
- 44:37पैदा होती है तुम्हारे भीतर उस महाशक्ति को संचारित करो, उसको
- 44:43एकाग्र करो इकट्ठा करो। मौन की अवस्था में तुम्हारे भीतर
- 44:52वृहद शक्ति जुड़ती है, बोलने से वृहद शक्ति का नुकसान होता है,
- 45:02खोती है। तुम एनर्जी लेस्सनेस में आ जाती
- 45:05हो। सारे दिन झकाई बुकाई मार के रात
- 45:09को सो जाते हो क्यों? क्योंकि मौन हो जाए मौन हो जाए तो
- 45:14रात को तुम जोड़ोगे उस शक्ति को जिससे फिर सुबह बुकाई झकाई।
- 45:22क्या जिंदगी इसी को कहते हैं? नहीं, जिंदगी ऐसी है तो नहीं,
- 45:36लेकिन अगर तुम बहक गए हो तो कोई क्या करे?
- 45:47कोमा के भीतर व्यक्ति उस संबंध में उतर जाता है।
- 45:53उसके भीतर किसी प्रकार का कुछ हो हल्ला नहीं चलता।
- 46:02उसका मन शोर नहीं मचाता। उसका मन बिल्कुल संत की तरह ठहरा
- 46:08होता है। काश कोमा के भीतर गया हुआ व्यक्ति
- 46:17होशपूर्ण कोमा में चला जाए और होश पूर्ण कोमा में चले जाने को समाधि
- 46:22करता है। तुम्हारी सारी समस्याओं का समाधान
- 46:33भी हो जाए और तुम हो भी अवेयर। तुम हो भी होश में उसे ही कहते
- 46:39हैं समाधि सारे प्रश्न गिर गए। या यूं कह तो के सारे प्रश्नों का
- 46:51जवाब मिल गया। जब गिर ही गए तो जवाब मिल गया।
- 46:56शब्द कोई भी प्रयोग कर लो, शब्द नहीं रहते, बस एक बात सही है,
- 47:04समस्याएं गिर जाती हैं। क्योंकि समस्याएं पैदा करने वाला
- 47:09व्यक्ति ये राजनीतिक होते हैं ना ये समस्याएं पैदा करते हैं पहले
- 47:18आग लगाओ फिर अपने ही आदमियों को भेज देते हैं।
- 47:22डंडे बरसाओ वाटर केनाल अभी कर रही बच्चों के ऊपर वाटर कैनन का
- 47:30इस्तेमाल किया गया। बिहार में बच्चों को लाठी चार्ज
- 47:35किया गया, लाठी मारी गई। इस शीत लहर के भीतर व्यक्ति को
- 47:43वैसे ही नमोनिया हो सकता है। अगर वस्त्र उतारते तो आज अमेनिटी
- 47:48कितनी बची है? वो व्यक्त गए जब कृष्ण और राम
- 47:55वस्त्र ही नहीं पहनते थे। आपने देखा होगा कृष्ण की राम की
- 48:00प्राणी, मूर्तियां, छाती पर वस्त्र नहीं होते थे उनके।
- 48:05क्यों ठंड नहीं पड़ती थी थी गर्मी नहीं पड़ती थी, बिल्कुल पड़ती थी,
- 48:13पंखा था नहीं, एसी था नहीं हीटर था बिल्कुल नहीं और क्या था
- 48:19इम्युनिटी थी बेहतर। तुम्हारे ऐसी पंखे हीटर का इजाद
- 48:27करने के बाद तुम्हारा शरीर लेज़ी हो गया तुम्हारा शरीर आराम तलवी
- 48:37का शौकीन हो गया। तलब हो गई।
- 48:41उसे आराम तलबी की और जैसे जैसे तुम आराम तलब होते हो तुम्हारे
- 48:47भीतर की इम्युनिटी घट जाती है। आपका मूलभूत प्रश्न के कॉमा में
- 48:58व्यक्ति कहाँ होता है? कुमा है क्या तीन स्टेजेज़ होती
- 49:05हैं इनको आप गोर से समझ लो। एक तो स्टेज होती है की जब हम
- 49:14नींद की अवस्था में होते हैं। दूसरी अवस्था होती है समाधि की और
- 49:25तीसरी अवस्था होती है कोमा के बोर से समझना।
- 49:32ये बड़े महत्वपूर्ण उपाय थे। जो व्यक्ति कोमा में है उसकी
- 49:43चेतना का जो जोड़ का प्वाइंट है, जहाँ से वो जुड़ता है, एनर्जी के
- 49:53साथ वो नाभि के पास है। आप उसे ऐसे कह सकते हैं कि जो
- 50:00व्यक्ति कोमा में है, उसकी चेतना नाभि के पास केंद्रत है।
- 50:08ऐसा सरल हो जाएगा। समझना आपको जो व्यक्ति कोमा में
- 50:13है, उसकी चेतना नाभि के पास है। कुंडलनी के पास जो व्यक्ति समाधि
- 50:25में है, उसकी चेतना सहस्रार में है, ब्रहमद्र में है, गौर से समते
- 50:35जना बड़े सेंस्टिव उपहार हैं। जो व्यक्ति कोमा में है, उसकी
- 50:44चेतना नाभि के पास है। जो व्यक्ति समाधि में है, उसकी
- 50:51चेतना सेत्रार में है। ब्रह्मरंद्र में है वह जो 1000
- 50:59पंखुड़ियों वाला चक्र क्रम चक्र जिसे कहते थे उसकी चेतना वहाँ है
- 51:10और जो व्यक्ति निद्रा में है शशक्ति में है, उसकी चेतना हृदय
- 51:14स्थल में है। अनाथ चक्र में बहुत विस्तार से
- 51:22सरल शब्दों में कई तरह से आपको समझाने की चेष्टा कर रहा हूँ
- 51:27क्योंकि ये पॉइंट आपको कहीं मिलेगा नहीं।
- 51:31मैंने कंगाल लिए सारे शस्त्र। ये अवस्थाएँ मुझे मिली नहीं,
- 51:39अनंतनाथ की भी व्यवस्था मुझे कहीं नहीं मिली।
- 51:42सारे उपनिषद सारे वेद खगाद लिए मैंने भगवान कृष्ण तक ने अनहदनाथ
- 51:51का जिक्र नहीं किया। खैर अब इसको आप गौर से समझ लेना
- 51:58क्योंकि इसको बोलने वाला शायद पहला व्यक्ति मुझे ही पाओगे।
- 52:07कोमा में आपकी चेतना। नाभी के पास कुंडनी शक्ति से के
- 52:15करीब होती है चेतना शब्द को यहाँ कनेक्टिव पॉइंट ले लेना आपको अभी
- 52:23समझ नहीं आएगी, लेकिन कोई समझदार आ जाता है।
- 52:28अनुभवी। जब मैं चेतना शब्द कहता हूँ तो
- 52:34कनेक्टिव पॉइंट से ले लेना कि उसकी चेतना की कनेक्टिविटी कहाँ
- 52:41से आती है? जहाँ पर कुंडलिनी शक्ति है।
- 52:51वहाँ से जुड़ा हुआ है वो वहाँ पर ठहर गया।
- 52:54वो और जो व्यक्ति शिवशक्ति में हैं, वह हृदयस्थल पे अनाथ चक्र पे
- 53:02खड़ा है। और जो समाधि में है वो ब्रह्मद्र
- 53:12में ये आप समझ गए। तीनों ही स्थितियों के तीनों ही
- 53:20लोकेशन्स मैंने बता दिया। अब एक चौथी लोकेशन भी होती है।
- 53:29वो क्या होती है? कोमा हो?
- 53:33समाधि हो या सुसुक्ति हो, उसमें आपका देय शरीर सूक्ष्म शरीर सतूल
- 53:45के भीतर होता है। मैं फिर कह रहा हूँ बड़े आराम से
- 53:50ध्यान से सुनना इसको सूक्ष्म शरीर जिसे मैंने दे ही कहा और भगवान
- 53:57कृष्ण ने भी दे ही कहा वह सतुल के भीतर उतरे कौन कौन से पार्ट में?
- 54:06कौन कौन सी अवस्था में एक तो जब व्यक्ति समाधि में होता है तो
- 54:12शरीर के भीतर होता है। स्थूल में एक जब व्यक्ति कोमा में
- 54:17होता है तो भी संतुल के भीतर होता है और जब व्यक्ति शुक्ति में
- 54:22निद्रा में होता है तो भी शरीर के भीतर होता है।
- 54:26एक चौथी अवस्था जब व्यक्ति मृत भी नहीं होता और इन तीनों सेंटरों पर
- 54:34नहीं होता, लेकिन ना भी के साथ जुड़ा हुआ पर सतल शरीर में नहीं
- 54:43होता सूक्ष्म शरीर उसका। सूक्ष्म शरीर उसका सतूल शरीर में
- 54:49नहीं होता। उन तीनों अवस्थाओं में सूक्ष्म
- 54:55शरीर सतूल के भीतर होता है। वो कोमा हो या समाधि हो या सू
- 55:03शुक्ति हो। एक चौथी अवस्था होती है वो होती
- 55:07है एस्ट्रल ट्रैवलिंग। उस अवस्था में काम होता है उस
- 55:15अवस्था में आपका जो कनेक्टिंग पॉइंट है वो शरीर से बाहर होता
- 55:23है। जुड़ा होता है नाभि के साथ रजत
- 55:28तरज्जू के साथ जिसे हम सिल्वर कोड कह देते हैं लेकिन डे ही शरीर से
- 55:36बाहर होता है, सतौल में नहीं होता, सारे कलपुर्जे वैसे ही काम
- 55:42करते हैं। और वह अनंत की यात्रा पर होता है।
- 55:48अब अगर ऐसा कुछ हो जाए जो व्यक्ति समाधि में है उसको जगाना है तो आप
- 55:56क्या करो समाधिष्ट व्यक्ति को जगाने के लिए?
- 56:02उसके तीसरे नृत्य को टॅच करता हूँ, क्योंकि तीसरे नृत्य का टॅच
- 56:07करना सहस्त्रार्थ के बिल्कुल करीब पड़ता है।
- 56:12वह व्यक्ति आँखें खोल लेगा जो समाधि में है उसके तीसरे नृत्य पर
- 56:18छू देने से। यहाँ पर अगर तीसरा नेत्र आपको
- 56:22नहीं पहचान में आता तो यहाँ दोनों बहों के बीच में जहाँ तिलक लगाते
- 56:27हैं औरतें बिंदी लगाती हैं वहाँ पर लगा देना, छू देना बार बार वो
- 56:33बाहर आ जाएगा, आँखें खोल लेगा ये तो समाधि वाले की बात हो गई।
- 56:39जो सुशप्ति में है निद्रा में, उसको वैसे ही आप टच कर देना कहीं
- 56:44से पांव को टच कर देना हाथों को टच कर देना लगा के खोद लेगा जो
- 56:56व्यक्ति कोमा में है। उसको तो हाथ से, पैर से तीसरे
- 57:04नेत्र से, चेसरा से किसी भी सेंटर से आप लाते जाओ, वो जागेगा नहीं,
- 57:12क्योंकि उसकी चेतना कुंडली के पास जाकर जम गई।
- 57:20और आपको एक और बात बता दूँ। यहाँ का सीधा संबंध अचेतन मन के
- 57:26साथ है, कुंओं में जाता क्यों है? व्यक्ति?
- 57:33मैंने आपको पहले भी समझाया। जब ईश्वर देखता है, ईश्वर की
- 57:39प्रकृति देखती है कि इतने भारी कष्टयुक्त कर्म आ रहे हैं।
- 57:47जीसको यह भुक्त न पाएगा। आपने देखा जब दर्द भयंकर होता है
- 57:53तो आदमी। प्रकृति उसे बेहोश कर देती है।
- 57:56ऐन सीसिया भीतर से ही उत्पादित करती है, जब भयंकर कष्टों का
- 58:05भुगतान कराना होता है। एक एक शब्द को गौर कर लेना, बहुत
- 58:10से व्यक्ति कोमा में बैठे हैं। बेहोश बेसुध पड़े।
- 58:19जब प्रकृति ने बहुत महत्त्व कर्मों का भुगतान करना है।
- 58:24जैसे मैंने कहा अब जब भी कभी हिटलर जन्म लेगा वह गुमा में
- 58:30जाएगा। क्योंकि इतने लाखों करोड़ों लोगों
- 58:34को जिंदा जला देना है। इसका पाप इतने भारी भरकम पाप
- 58:40होंगे कि जब सृष्टि उसे भुगतान करवाएगी।
- 58:45सृष्टि बखूबी जानती है। तुम्हारे बाहर भीतर की बातों को
- 58:49तो सृष्टि तुम्हारा इंतजाम कर देगी।
- 58:53अच्छा बड़ा आदमी चलता फिरा एकदम से घर जाएगा और कोमा में चला
- 58:58जाएगा उसकी चेतना नावी के पास आके स्थित हो जाएगी वो भयंकर।
- 59:14कर्मों का जंजाल शुरू होने वाला है।
- 59:16भुगतान तो उस व्यक्ति को महसूस नहीं होगा।
- 59:22यह कृपा है उसके इसीलिए उसको दयालू कहते हैं।
- 59:30वह चिर निद्रा में चला जाएगा, उसको पता नहीं चलेगा।
- 59:35भयंकर दर्द होगा भयंकर लेकिन कनेक्टिंग पॉइंट टूट जाएगा।
- 59:44किस्से जो इस चीज़ को अनुभव करता है।
- 59:51कोमा में वही व्यक्ति जाएगा। घोर पुण्य करने वाला कभी भी कोमा
- 59:56नहीं चाहता। पहली बात आपको समझाता हूँ, घोर
- 1:00:00पुण्य करने वाला कभी कोमा में नहीं जाता।
- 1:00:06घोर पाप करने वाला व्यक्ति इतने पाप करने वाला के सामान्यतः वह
- 1:00:14दर्द को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं कर सकता।
- 1:00:18आप चाहे उसको अनेस्थीसिया भी क्यों न देते हैं इतना कष्ट?
- 1:00:26अब डॉक्टर्स हिसाब लगा सकते हैं कि प्रकृति उस व्यक्ति को कोमा
- 1:00:30में लेकर क्यों जाती है? इतना भनक दर्द होता है वहाँ के
- 1:00:39व्यक्ति की चेतना उसको बर्दाश्त नहीं कर पाती, इसलिए परमात्मा
- 1:00:43दयालु है। यहीं से ये बात कही जाती है कि वह
- 1:00:47दयालु है। वह आपकी सारी व्यवस्था करता है।
- 1:00:50चोट लगी, आपको पता नहीं खून रिसना शुरू हो गया।
- 1:00:54वह दयालु है। विटामिन के ने आसपास छतरियाँ
- 1:00:57बिछानी शुरू कर दीं तो उसने खून को बाहर जाना शुरू कर दिया।
- 1:01:02पूरी कोशिश करती है। आपके शरीर की प्रकृति के आपके आया
- 1:01:06हुआ शरीर के ऊपर कष्ट से निवृत्ति कैसे हो जाए, ये सब विधान पहले ही
- 1:01:14प्रकृति ने रच दिए हैं। अपने भीतर कोमाता क्यों आप समझ गए
- 1:01:20होंगे। भयंकर कष्ट जब सहन नहीं हो पाता,
- 1:01:24आप सहन नहीं कर सकोगे और प्रकृति जानती है प्रकृति आपको उठाकर कोमा
- 1:01:30में पटक देती है। चलो अब क्या होगा कोमा में से
- 1:01:39व्यक्ति कब बाहर आएगा? कुछ पक्का नहीं होता।
- 1:01:47एक फार्मूला है, लेकिन वो आप नहीं कर सको भाई, वह सिर्फ वह संत कर
- 1:01:55सकता है। जिसकी चेतना सहस्राल में सिद्ध हो
- 1:02:01जाती है, वह देखकर बता देगा कि यह व्यक्ति कितनी देर उसको टॅच करके
- 1:02:08बता देगा कि यह व्यक्ति कितनी देर कोमा में रहेगा?
- 1:02:16यह एक अलग से फार्मूलेशन है। देखिए।
- 1:02:19हर चीज़ के फॉर्मूलेशन में दांतों के डॉक्टर अलग है।
- 1:02:22ईएनटी अलग है, है ना? हाथ का अलग है, फेफड़ों का अलग है
- 1:02:29तो ये सभी की अलग अलग धाराएं हैं। जो था, मैंने बताया कि जो व्यक्ति
- 1:02:37सूक्ष्म शरीर को साथ लेकर एस्ट्रल ट्रैवडिंग घूमने के लिए चला गया
- 1:02:42है, सिर्फ वो ही शरीर के भीतर नहीं होगा।
- 1:02:47बाकी तीनों अवस्थाओं वाले शरीर के भीतर होंगे।
- 1:02:50उनकी देह ही सूक्ष्म शरीर की बात करता हूँ या मैं?
- 1:02:59समाधित हो गया तो भी सूक्ष्म शरीर सहस्रार के पास निद्रा में हो गया
- 1:03:05तो भी सूक्ष्म शरीर सदृस्थ हो गया और अगर निद्रा में आ गया तो भी
- 1:03:12सूक्ष्म शरीर कोमा में आ गया तो भी सूक्ष्म शरीर।
- 1:03:18नग। लेकिन जब व्यक्ति बाहर जाएगा तो
- 1:03:26शरीर के भीतर उसका सूक्ष्म शरीर नहीं रहेगा ही विल बी कनेक्टेड।
- 1:03:37थ्रू सिल्वर कोर्ट रजत रज्जु के साथ वो बंधा रहेगा।
- 1:03:43इस शरीर के साथ मरेगा नहीं लेकिन शरीर के भीतर नहीं होगा।
- 1:03:53वह अपने सारे कर्मों को साथ लेकर दे ही को साथ लेकर एस्टरट अब अगर
- 1:04:00ऐसा हो जाए कोई व्यक्ति श्रेक को छोड़ दे, शरीर से बाहर चला जाए।
- 1:04:10तो वह जाएगा तो ना भी से। पहली बात मैंने आशुतोष के बात में
- 1:04:17प्रसंग में आपको बदल दिया था। जो व्यक्ति गलती से ब्रह्म अंतर
- 1:04:22से निकल गया, निकाला जा सकता है जो थोड़ा सा भी योग अभ्यास को
- 1:04:27जानता है। वह अपने प्राणों को केंद्रित करके
- 1:04:31ब्रह्मरुद्र से निकल सकता है, लेकिन गलती से भी जो व्यक्ति
- 1:04:36ब्रह्मरुद्र से बाहर निकल गया, वह शरीर में लौट नहीं सकता।
- 1:04:41अब आशु तरस की बात हुई। आज से 2 साल पहले भी मैंने बनाई,
- 1:04:45मैंने कहा वो कभी शरीर में नहीं आएगा।
- 1:04:48भक्तजन आज भी प्रतीक्षा करते हैं, करते रहे हम इंतजार करेंगे कयामत
- 1:04:53तक खुदरा करें कि कयामत हो और तू आए ना कयामत होगी और ना वो आएगा,
- 1:05:02वो कईयों की ओर की बलि ले सकता है।
- 1:05:05एक की तो ले ली बली उसने। जो व्यक्ति गलती से भ्रम बरंद से
- 1:05:11निकल गया, वह वापस नहीं आएगा। यह ऋषियों का प्राण त्याग का
- 1:05:17तरीका था, एक अद्भुत तरीका था। जीस व्यक्ति ने ऐस्ट्रल ट्रैवलिंग
- 1:05:28के लिए शरीर को छोड़ा। वो भलीभाँति जानता है क्योंकि
- 1:05:32गुरु भी समझा देगा उसको। गुरु मुर्ख तो है गुरु समझा देगा
- 1:05:36की भूल के भी तुम। कभी भी नाभि चक्कर के अलावा किसी
- 1:05:42और चक्कर से शरीर को त्यागना की चेष्टा मत करना।
- 1:05:46तेरा सूक्ष्म शरीर निकले तो सिर्फ नाभि से निकले।
- 1:05:55वो अगर वापस नहीं आया। देखिये सूक्ष्म शरीर के बिना सतुर
- 1:06:05शरीर के जीने की अवधि, मैं पहले भी आपको बताया था अगर ऐसा कुछ हो
- 1:06:11जाता है क्योंकि सूक्ष्म के शरीर के साथ भी कोई दुर्घटना।
- 1:06:17घटित हो सकती है। जैसे मेरे साथ हो गयी थी।
- 1:06:21मैं जब ब्लैक होल के भीतर गया, वहाँ कोई वायलेट रंग की चीज़ मेरे
- 1:06:26से टकराई। ये तो मेरे साथ एक मस्त था, वो
- 1:06:32सेफ ले आया वापस। लेकिन अगर मैं अकेला होता तो
- 1:06:36मुश्किल हो जाता। संयोग से बहुत से व्यक्ति वहाँ
- 1:06:45फिरते होते हैं जो मस्त होते हैं वो देख लेते हैं कि यह व्यक्ति
- 1:06:52गलत हो गया, फंस गया। वह अपनी विद्या का इस्तेमाल करके
- 1:06:57उन्हें सहायता करते हैं। खैर, ऐसा कुछ भी हो सकता है।
- 1:07:01किसी के साथ भी हो सकता है सूक्ष्म शरीर को बाहर लेकर जाओ और
- 1:07:07आप बोले जाओ आमतौर से सूक्ष्म शरीर को जब बाहर।
- 1:07:13एस्थल ट्रेमिंग पे ले जाया जाता है तो वहाँ एक संकल्प लिया जाता
- 1:07:18है छलांग लगाने से ते वक्त कि मैं 6 घंटे में वापस आ जाऊं, बस
- 1:07:26संकल्प भी लेना होता है। मेरा सूक्ष्म शरीर मैं मैं ही
- 1:07:32होता हूँ। सूक्ष्म शरीर ही मैं है।
- 1:07:36आपको बता दूँ तो ये संकल्प लेना होता है कि मैं 8 घंटे में 6 घंटे
- 1:07:43में जो भी आपने वक्त नियत किया उस घंटे उस घंटों के बाद मैं शरीर
- 1:07:49में आ जाऊंगा। आपके पास कोई घड़ी नहीं, कोई
- 1:07:54हिसाब नहीं लेकिन वो कुदरत इतनी महीन संरचना है कि वो आपको सही 6
- 1:08:01घंटे बाद पटक से आपके शरीर के भीतर प्रवेश कर जो व्यक्ति भूल
- 1:08:08गया है। कई बार भूल हो सकती है।
- 1:08:10होती तो नहीं, लेकिन कुछ कई बार भूल हो सकती है।
- 1:08:15बड़ो बोलो से भूल हो जाती है। आखिर तैराक ही तो डूबते हैं,
- 1:08:20घुड़सवार ही तो गिरते हैं, मैदान ए जंग में तो कभी भूल हो जाती है
- 1:08:27नहीं संकल्प लेना जाता। सीधा ही छलांग लगा देते हैं और
- 1:08:32संकल्प नहीं लिया तो फंस गए क्योंकि छलांग लगाते हुए शरीर से
- 1:08:41संकल्प अगर नहीं लिया की मैं इतने घंटे में वापस आ जाऊ शरीर में।
- 1:08:47तो आप कितनी देर बाहर रुकोगे कोई पता नहीं उस वक्त आपने क्या करना
- 1:08:55है। मैंने आपको बताया तो बहुत बार है
- 1:09:00अगर कोई औरत स्त्री शरीर को छोड़ गई है, शरीर से बाहर हो गई है।
- 1:09:08तो कोई पुरुष अपने इन दोनों भाई देखो जिससे हम लिखते हैं हैं?
- 1:09:16येस? इन दोनों को दोनों अंगूठों के साथ
- 1:09:21लगा दो। दोनों अंगूठों के साथ अलग अलग।
- 1:09:28तो वह व्यक्ति तुरंत वापस आ जाएगा।
- 1:09:32स्त्री गई है तो पुरुष लगाए उसके पांव पे अंगूठों के लगाने हैं,
- 1:09:37सिर्फ अंगूठों के और अगर पुरुष गया है शरीर से बाहर आम तौर से
- 1:09:43पुरुष भी जाते हैं। तो फिर कोई स्त्री उसके दोनों
- 1:09:56अंगूठों को एम् चमटी की तरह ऐसे लगाते लगाते ही वो तुरंत वापस आ
- 1:10:05जाएगा। ये नेगेटिव पॉज़िटिव का एक संबंध
- 1:10:08है। जो व्यक्ति टाइम बैंड करके नहीं
- 1:10:13गया है, भूल गया किसी कारण से नहीं गया है।
- 1:10:18कई बार भूल हो जाती है तो फिर उसका ये उपाय किया जाए कि स्त्री
- 1:10:25हो तो पुरुष पुरुष हो तो स्त्री। मैं बहुत खोल के समझा रहा हूँ
- 1:10:30इसलिए समझा रहा हूँ कि किसी और शास्त्र में आपको ये बात मिलेंगे
- 1:10:35नहीं। इसलिए बहुत आयामों से कई कई दफ़े
- 1:10:40आपको रिपीट करके आप शायद आपके सिर में दर्द हो गया होगा, लेकिन ये
- 1:10:46बड़े काम की बातें हैं। और कहीं मेरे को नहीं और किसी के
- 1:10:52साथ ये घटना हो सकती है। आप सहज रूप से भी शरीर से बाहर हो
- 1:10:57सकते हो। गलती मत कर जा, सहज रूप से भी
- 1:11:01शरीर से कभी बाहर हो सकते हो गलती से।
- 1:11:06तो फिर क्या करे? फिर ये फॉर्मूला जो मैंने आपको
- 1:11:10बताया एवरग्रीन फॉर्मूला है। स्त्री पुरुष के और पुरुष स्त्री
- 1:11:15के अंगूठों को टॅच करे, वह व्यक्ति फ़रना जाएगा।
- 1:11:25यही कारण था कि मुर्दा व्यक्ति के पांवों को अंगूठों को हम बांध
- 1:11:31दिया करते थे। आपको शायद पता नहीं वेरी
- 1:11:34साइंटिफिकल रीसन बिहाइंड इट आपने देखा होगा मुर्दा व्यक्ति लाश को
- 1:11:41हम पांवों से बाँध देते हैं, दो अंगूठे बाँध देते हैं।
- 1:11:45और आपको पता भी नहीं है ये क्यों मानते हैं?
- 1:11:48लेकिन हमारे ऋषियों ने ये परम्परा बनाई थी वो बनाई थी इसलिए के उस
- 1:11:54व्यक्ति को श्रद्धांजलि देने के लिए अंत बेला पे सभी लोग आएँगे।
- 1:12:00सभी लोगों को बुलाया भी तो जाता था।
- 1:12:04शायद कोई दुर्घटना घट गई, उनमें स्त्रियाँ भी होती थी, फुर्स भी
- 1:12:09होते थे। अगर कोई फुर्स चला गया है तो
- 1:12:13स्त्री जब उसके अंगूठों को हाथ लगाएगी तो दोनों अंगूठे इकट्ठे हो
- 1:12:17गए। दोनों अंगूठे इकट्ठे हो गए।
- 1:12:21और स्त्री दोनों अंगूठों को नहीं टच करेगी, एक हाथ से करेगी तो
- 1:12:26अंगूठे को इकट्ठे हैं। अब समझे मेरी बात को दोनों
- 1:12:34अंगूठों को दोनों आदतों से टच करना है।
- 1:12:38समझ लो अच्छी तरह से। लेकिन जो मुर्दा व्यक्ति है, उसको
- 1:12:44जो स्त्री उसके पांव को छूएगी तो उसके एक अंगूठे को ही दोनों
- 1:12:52अंगूठे बंधे होंगे तो वो इकट्ठे ही छू देगी उसको।
- 1:12:58अगर वो व्यक्ति बाहर गया होगा तो फिर न जाएगा।
- 1:13:02अंगूठे बांधने का मतलब ये था क्योंकि ये वैज्ञानिक प्रक्रिया
- 1:13:08किसी को पता तो है नहीं, वो तो श्रद्धा के कारण उसके पांव को हाथ
- 1:13:12लगाएंगे और पांव को हाथ लगाते ही। नेटिव पोस्टेड बढ़ गया यक्त सा
- 1:13:22अगर हमने दोनों पांव को अलग रखे तो कोई स्त्री आके किसी पांव को
- 1:13:28छू सकती है, मत्था टेक सकती है। बस खत्म हो गया काम लेकिन दोनों
- 1:13:33पांव को इकट्ठे लाने का यही कारण था।
- 1:13:37क्योंकि दोनों पांवों को छूना जरूरी है।
- 1:13:40इसलिए हमने अंगूठे बांध दिए और कोई दांगे नहीं था इसका कि जब भी
- 1:13:47कोई आके माथा टेके, अंगूठों के ऊपर ही प्रणाम करेगा तो दोनों
- 1:13:52अंगूठे टच हो गए। अगर हम अंगूठों को न बांधते।
- 1:13:56तो उसने प्रणाम कर देना था। कोई एक पांव छू लेना था और उस
- 1:14:01व्यक्ति ने वापस नहीं आना था। ये कारण था मुर्दे की अंगूठों को
- 1:14:06बांधने का अगर स्त्री गई है तो पुरुष भी हाथ लुकाएंगे किसी की
- 1:14:13माता भी हो सकती है, किसी की बड़ी भी हो सकती है।
- 1:14:16कोई बहू भी हो सकती है। उसकी ये के साइंटिफिक अरेजन था तो
- 1:14:25अब आपको समझ आ गई होगी, जो कोमा कोमा की बात मैंने आपको बताई,
- 1:14:30कुंडलिनी के पास चेतना का उसका निवास हो जाता है।
- 1:14:35चेतना शरीर के भीतर ही रहती है और इसकी पहचान ये है कि कोमा में
- 1:14:41उसको हिलाओगे डुलाओगे चुटकी भरोगे कोई फर्क नहीं, क्योंकि सेंसेशन
- 1:14:47डेट इसको महसूस ही नहीं हो रहा। कुछ क्यों?
- 1:14:52प्रकृति ने व्यवस्था ऐसी कर दी भयंकर दुःख भी न पता चले जो
- 1:14:57रिसेप्टर्स रहे हैं हमारे ब्रेन के न्यूरॉन उनको पता ही न चले तो
- 1:15:05प्रकृति ने पहले ही ऐसे घोल लगा दिए बैनर्स।
- 1:15:13कि यहाँ तक इसके पहुंचे ही नहीं। ये प्रकृति की दयालुता है और नींद
- 1:15:26में हम हृदय में होते हैं। समाधि में हम ब्राह्मणद्र में
- 1:15:31होते हैं। ये तीनों लोकेशन आपको बता दें।
- 1:15:35चौथी लोकेशन जो है वो अलग से आपको तो बताई कि वो प्रसंग वश है, आपने
- 1:15:40पूछा तो नहीं? जरूरत भी नहीं थी उसकी, लेकिन
- 1:15:43मैंने चौथा क्योंकि प्रसंग वश आ गया था, चौथा कभी ऐसा हो जाता है
- 1:15:49तो फिर आप उसको दोनों अंगूठों को टच कर देना।
- 1:15:55ये आपकी बात का जवाब है। शायद मैंने कोमा के हिसाब से सारी
- 1:16:00बात जो बतानी थी वो बदला दी है श्रीकृष्ण गोविंद।
- 1:16:12हरे मुरारी हिनाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविन्द।
- 1:16:33हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:16:51हरे मुरारी हेनाथ नारायण वसुदेव। पितुमात स्वामी सखा हमारे पितुमात
- 1:17:26स्वामी। सखा हमारे सखा, हमारे हम।
- 1:17:49हे पितुमात स्वामी सखा हमारे हेनाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण
- 1:18:05गोविंद। हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव
- 1:18:21धन्यवाद।