Latest / Baba ji Vijay Vats / 30 Jan 25 - Science v/s God
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- 0:20प्यारी बाबा जी, आपकी बायोग्राफी के अनुसार।
- 0:29जिसने आपने साइंस एंड गॉड इसके बारे में भाषण दिया, उसी दिन आपके
- 0:43जीवन में क्रांतिकारी घटना घट गई। अगर आज आपको कहा जाए कि साइंस एंड
- 0:59गॉड इसके बारे में बोलिए तो आप क्या बोलेंगे?
- 1:09भान चंद। मैं कहूंगा विज्ञान।
- 1:36भगवान का दुश्मन है, चौंकी मत, अंतरिम गहराईयों पे लिया गया
- 1:51निर्णय अपने अनुभवों से विज्ञान। परमात्मा का दुश्मन है जीस
- 2:08व्यक्ति ने परमात्मा के उस प्यारे से तल को छूना है।
- 2:22वह विज्ञान के खोपड़ी से भरे हुए हैं।
- 2:31इस विषय के ऊपर कभी भी ना जाए विज्ञान संघातक है।
- 2:48परमात्मा की राह में आपको जानकर आश्चर्य भी होगा शायद।
- 3:03उस परम पिता ने यही सोचकर यह फैसला किया होगा और अगर उस दिन ये
- 3:20घटना ना घटी होते तो मैं किसी बड़े अस्पताल में छोटे अस्पताल
- 3:31में। मनुष्य के शरीर को काट पिट रहा
- 3:38होता। अगर आज मुझे बोलना पड़े तो मैं
- 3:51कहूंगा विज्ञान को उतना ही रखो। जितना तुमने समझ लिया है बस इससे
- 4:00ज्यादा नहीं। बहुत से तथा कथित समझदार,
- 4:11बुद्धिमान लोक मेरी बातों पे क्रोधित होंगे मैं खुद विज्ञान का
- 4:20खिलाड़ी। ये भाषा बोल रहा हूँ भविष्य के
- 4:30लिए वो मोक्षों के लिए मेरा ये संदेश।
- 4:46विज्ञान की तरफ बजने चाहिए विज्ञान बड़ी से बड़ी बाधा है
- 5:04क्या विज्ञान परमात्मा का प्रतिद्वंद्वी?
- 5:12बनने का भ्रम पैदा करता है और विज्ञान कवि परमात्मा बन सकता
- 5:21नहीं, कोशिश करता है परमात्मा का, शरीर बनने का।
- 5:37इसलिए जबसे जैसे जैसे विज्ञान तृक की करेगा, मनुष्य उस लुप्त से
- 5:46वंचित होता चला जायेगा। जैसे लुटफ को हजरत ने चखा।
- 5:58मुसा ने चखा, ईसा ने चखा, शंकर ने चखा।
- 6:11राम और कृष्ण ने चखा परमात्मा की राह में बड़े से बड़ा रोड़ा है,
- 6:28बुद्धि है और विज्ञान। बुद्धि के साथ तादाद में को
- 6:37बढ़ाता है। बुद्धि के बिना विज्ञान खोजा नहीं
- 6:44जाता और जितना बुद्धि से आप काम लोगे, बुद्धि के प्रति लिप्त होते
- 6:53चले जाओगे। बुद्धि से लिप्त होने की
- 6:59संस्कारीत होते जाओगे तो 1 दिन आप भूल ही जाओगे की मैं किस राह पे
- 7:07चला था, जो मज़ा चखा कबीर है। जो मज़ा चखा नानक देव ने आज कहाँ
- 7:18है वो लोग? कतारों की कतारें परमात्मा के रस
- 7:30को पीने वाली एक जमाने में सैकड़ों सैकड़ों लोग होते थे।
- 7:40क्षमा करना मुझे आज ढूंढे से मिलते हैं ना मिलते हैं तो भीतर
- 7:53फ्रॉड का जहर भरा है। कैसे लूट रहे हैं दूसरों को?
- 8:03विज्ञान और धन परमात्मा के शरीक बनकर खड़े हो गए हैं।
- 8:18देखिये कैसे आज धन के प्रति लोग दीवाने।
- 8:25लोग जाते हैं आध्यात्मिक गुरुओं के पास मांगते हैं धन वैभव क्या
- 8:36ज़माना आ गया? तुम शायद सोचते होगे जब जहाज नहीं
- 8:50थे, झगड़े थे, जब गाड़ियां नहीं थी, कारें नहीं थी, हेलिकॉप्टर
- 9:07नहीं थे। तो मानव बड़ा सुखी होता, दुखी
- 9:14होता होगा। बड़ी से बड़ी गलती है, तुम नई खोज
- 9:29कर लेते हो। नाचने लग जाते हो इस बात का
- 9:38द्योतक है कि तुमने परमात्मा की शरीर को और ज्यादा बढ़ावा दे दिया
- 9:48पर मेरी बात को आज ध्यान से समझ लेना।
- 9:54क्योंकि जैसे जैसे वक्त बीतता है वैसे वैसे मैं उस अपने अंत के
- 10:08करीब आ रहा हूँ और ये सत्य है। प्रत्येक व्यक्ति आता है
- 10:28विज्ञान को तो भूल के भी मत छेड़ लेना।
- 10:38विज्ञान आनंद का नश्क है, तुम नहीं जानते।
- 10:46हम लोग ओरा को पहचानने वाले लोग तुम्हारे मुरझाये चेहरों से बखूबी
- 10:56जान लेते हैं कि तुम तो खुश भी नहीं हो, आनंद तो बहुत दूर की बात
- 11:03है। और ये हुआ सर्फ विज्ञान के कारण
- 11:11बड़ी प्यारी थी जिंदगी जब छकड़े हुआ करते थे, धीमी गति से जिंदगी
- 11:20चलती थी। और गति का न होना परमात्मा के
- 11:32करीब गति बढ़ती जाएगी। परमात्मा से दूरी और बैल गाड़ियों
- 11:41का ज़माना है। तुम नाक बहुत सिकुड़ हो गया,
- 11:51लेकिन जो शांत उस स्तर पर पहुँच गया वो उस वक्त को प्रणाम करेगा।
- 12:02आज हम जीस जमाने में हैं, अभी रोज़ रोज़ विज्ञान तरक्की करता
- 12:12जाएगा और न जाने कहाँ तक तरक्की करेगा।
- 12:19खोजेगा। उसकी बनाई हुई सर्जना के भीतर और
- 12:25बहस करेगा, बहस करेगा क्योंकि वह सब जानता है।
- 12:43और वह जो जानता है उसे आनंद की दूर दूर तक पुल काहट नहीं मिलते
- 12:51हैं। आनंद छोड़िए, सुख भी तो नहीं
- 12:56मिलता तुम्हें? आज तुम्हारे पास सब दे दिया
- 13:01विज्ञान ना सर्दी सताती है नगर में सारा बंदोबस्त है तुम्हारे
- 13:11पास हीटर हैं, एयर कंडीशन्ड हैं। लेकिन कहाँ तुम सुखी हो?
- 13:23सुखी भी तो नहीं हो? मौत का 1 दिन मोयन है, नींद क्यों
- 13:34रात भर नहीं आती? आधा अमेरिका नींद की गोलियां ले
- 13:42के सोता है, बड़ी छलांग लगा रहा था ओपेन हाइमार जीस दिन परमाणु
- 13:56विस्फोट का प्रयोग किया था। और वो शायद जानता भी नहीं था कि
- 14:10यह परमाणु का आविष्कार मानव की ज़िन्दगी में से चैन तो छीने वाले
- 14:22आनंद भी छीन लेगा। कहाँ है वो रस?
- 14:30ना तुम्हारे चेहरों से नज़र आता है ना तुम्हारे अंत से नज़र आता
- 14:37है तुम कहीं भी उस आनंद को उस रस को पीने के।
- 14:45कवायद में लगते नहीं मुझे मुझे तुम्हारे भीतर दुख और दुख और दुख
- 14:56की परतें हारे हुए जुआरी की तरह तुम्हारे लटके हुए चेहरे।
- 15:10तुमने पूछा मैं आज क्या कहूं? कहा मैं कहूंगा जहाँ तक आ गए रुक
- 15:17जाओ, तुम जो करोगे चित्रकारी करोगे।
- 15:30और तुम्हारी चित्रकारी तुम्हारे भीतर के उस प्यारे प्यारे तल को
- 15:39समाप्त कर देंगे। जीसको पीकर तुम निहाल हो जाते हो।
- 15:53मैं ये जो शब्द बोल रहा हूँ, तुम सिर्फ उसकी आहट ही देख सकते हो,
- 16:02आवाज़ नहीं, तुम सिर्फ कलयु ही पहचान सकते हो कि मैं क्या बोलना
- 16:12चाहता हूँ। लेकिन मैंने क्या पी लिया है
- 16:19जिसके कारण मैं ये बोलना चाहता हूँ वो तुम्हें कभी पता नहीं
- 16:24चलेगा। आगे आगे विज्ञान तरक्की करता
- 16:29जाएगा। और जितना विज्ञान तरीके करता
- 16:37जाएगा तुम समझ लेना, मनुष्य की बर्बादी उतनी करीब बर्बाद होना।
- 16:47मैं इन मेहरों का ढह जाना नहीं कहता।
- 16:55बर्बाद होना कहता हूँ मैं जो तुमसे तुम्हारा आनंद छीन ले तो
- 17:01तुम बर्बाद हो गया मनुष्य के जीवन की चरम उचाई, विज्ञान तुमसे छीन
- 17:10लेता है। आज मीडिया ही मीडिया है।
- 17:20आज प्रचार ही प्रचार है। फुहार नहीं है।
- 17:26आनंद के सुख का आरंभ कहीं नजर आता है।
- 17:38दो घड़ी तुम आराम से नींद ले लेते थे, वो भी आज गुम हो गई है और तुम
- 17:49इसे उन्नति कह रहे हो। यह तरक्की ईश्वर न देता तो ज्यादा
- 18:03अच्छा था। साइंस एंड गॉड का सीधा सा मोरल
- 18:15अगर तुम उससे पूछोगे। तो निहिसंकोच 1% का लाख मा हिस्सा
- 18:31भी मेरे भीतर किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं विज्ञान घातक है।
- 18:43विज्ञान विनाशक है। विज्ञान तुम्हारे ईगो को बढ़ाता
- 18:51है और ईगो तुम्हारे आनंद को नष्ट करता है।
- 19:05छोड़ो आनंद की बातें विज्ञान तुमसे सुख तक खींच लिया है
- 19:14तुम्हारा सुख भी समाप्त कर दिया विज्ञान ने।
- 19:23ठीक तुम कहोगे एटोमिक पावर प्लांट लगा दिया, हम जो नहीं कर सकते थे
- 19:32वो कर रहे हैं। अगला मिशन होगा तुम्हारा मंगल भर
- 19:38जाने का। चंद्रमा के तुमने पाम रख लिया है
- 19:46और मंगल के बाद न जाने तुम कहाँ जाओगे और जहाँ भी जाओगे वह बहुत
- 19:58दूर है। उपनिषद का ये वाक्य याद रखना
- 20:05साइंस अगर नहीं है तो वह बड़ा करीब है, करीब से करीब है।
- 20:13अगर साइंस आ जाती है तो वह बड़ा दूर है।
- 20:17उसके कोई और चोर नहीं तुम ढूंढ भी न पाओगे।
- 20:22तुम्हारी जेम्स वेब टेलीस्कोप से ज्यादा 1000 गुणा पावरफुल अगर और
- 20:26भी बन जाए तो तुम उसका अंतिम छोर न पा सको, चेस्ट छाएं चलती
- 20:36रहेंगी। तुम नई नई खोजें करते रहोगे।
- 20:43एआई का ज़माना आ गया। सब काम रोबोट कर लेंगे, लेकिन
- 20:53तुमने तो तुम्हारा चैन भी खो दिया।
- 20:58उस रस की बात को तुम कल्पना भी नहीं कर सकते ध्यान रखना जो लोग
- 21:06कहते हैं एनलाइटनमेंट नहीं होता वह अप्रत्यक्ष रूप से कहते हैं कि
- 21:12रस नहीं है आनंद नहीं है। सुख है, लेकिन सुख भी कहाँ है?
- 21:22खोपड़ी के दलीलों में तर्कों में सुख ढूंढ़ते हो तुम कैसा ज़माना आ
- 21:32गया। कैसे कैसे लोग हमारे उपदेशक बन
- 21:40गए? तुम कहते हो दुनिया का अंत आ
- 21:49जाएगा मेरी दृष्टि में दुनिया बहुत पहले खत्म हो चुकी है।
- 21:58जीस दिन विज्ञान ने एटम की खोज कर ली थी ओपेन हैमर ने उसका अमेरिका
- 22:08के मरुस्थल में परीक्षण कर लिया था।
- 22:13उस दिन रस का अंतिम दिन था। बस रस उस दिन खत्म हो गया।
- 22:24अब रस को ढूंढने वाले नहीं बचेंगे।
- 22:29रस को ढूंढने की पहनने की क्षमता भीतर हिलोरें मारेंगी।
- 22:38लेकिन तुम बिलकुल असहाय हो जाओगे, विज्ञान ने तुम्हारे हाथ और पांव
- 22:45बेड़ियों से झगड़ दिए? विज्ञान ने ऐसे ऐसे आस्वीकार कर
- 22:51दिए। चकाचौंध में तुम खो जाओगे और
- 22:59चकाचौंध ज्यादा हो तो बुरी होती है जैसे सूरज तुम आँखों से बड़े
- 23:09मनोहारी दृश्यों को देखते हो। लेकिन अगर सूरज को खुली आँख से
- 23:15देखते रहोगे तो ध्यान रखना अंधे हो जाओगे।
- 23:20ज्यादा चकाचौंध भी भरी होती है। बस आज विज्ञान ने वो चकाचौंध पैदा
- 23:26करते है, राश खो जाएगा? मेरा शक हो जाएगा और मुझे अफसोस
- 23:34है इस बात का जिन्होंने पाठशाला का मुखड़ा नहीं देखा।
- 23:50पोस बेहतरी अंतरिम तल्पे। जाकर बैठ गए और बड़ा आनंद पिया।
- 24:00उन्होंने भर भर के रसपिया अनोखी खोज होते हैं ये कहने कि जुर्रत
- 24:20करूँगा। और ये जूरत सही है, रस्तों को ही
- 24:28दिया तुमने बिना शक तुमने सुर्खवे को दिया और आगे आगे तुम देखोगे।
- 24:41हर वक्त हम बैठे नहीं रहेंगे और हर वक्त तुम भी बैठे नहीं रहोगे।
- 24:48कोई नहीं रहा और कोई नहीं रहेगा। लेकिन ये शब्द जलते ही चले
- 24:56जाएंगे। तुम दीन दुखी, दरिद्र होते ही चले
- 25:04जाओगे, तुम ये कह सकते हो, हम दरिद्र नहीं होंगे, हम खुशहाल
- 25:12होंगे। लेकिन जो व्यक्ति भीतर से फटे हाल
- 25:16होता है जीसको भीतर से रस पीने को नहीं मिला वह सबसे बड़ा कंगाल
- 25:27उससे बड़ा कोई कंगाल बाहर हीरे मोती रतन।
- 25:34जड़ित उषा को पहनते रहो, सोने की जूतियां पहनते रहो, सिर पर मुकचस
- 25:44सजाते रहो, हीरे जोहरात मणियों से जड़ित।
- 25:53लेकिन अगर भीतर खोखा तो खुद के साथ धोखा विज्ञान ने तुम्हें खुद
- 26:04से धोखा देना सीखा दिया। यह देन है विज्ञान के।
- 26:11आज अगर मैं बोलेंगे तो वो नहीं बोलेंगे जो उस दिन बोला था।
- 26:18उस दिन मैं परमात्मा को नहीं जानता था, परमात्मा के बारे में
- 26:25छोड़ो, परमात्मा को नहीं जानता था।
- 26:31आज मैं परमात्मा के बारे में भी जानता हूँ और परमात्मा को भी
- 26:37मैंने पी लिया है तो आज मैं ऑथेंटिसिटी से बोलता हूँ, मेरा
- 26:45प्रतीक शब्द एक एक शब्द अनुभव। कि प्रमाणिकता से आएगा, न किसी
- 26:53किताब से आएगा, न किसी शास्त्र से आएगा, न किसी गुरु मुख से आएगा।
- 27:03एक एक शब्द अनुभव से आएगा। विज्ञान परमात्मा का शरीर
- 27:14कंप्यूटर मुकाबले में खड़ा है और उसने भ्रम पैदा कर दिया है।
- 27:25अगर विज्ञान अपनी सर्वोच्च ऊंचाइयों पे होगा तो हम परमात्मा
- 27:29को हरा देंगे, जीत लेंगे। तुम भूल गए एक एक कण जो तुम
- 27:40विज्ञान के भीतर प्रयोग करते हो? उसके हाथों से सजा है ये भूल जाते
- 27:48हो तुम इसलिए तो हमारे मार्कर्स कहते हैं, वह है ना धर्म शीम का
- 28:00एक नशा है और आज उसके बाद साकार। क्योंकि जब प्रचार कैसे हो जाएं
- 28:16जो रावण से बातें करने लगे, फ़ोन लगा के जो कवारी किशोरियां सुहाग
- 28:25के शेर सजाने की बातें करने लगे। और सुनने वालों को मूर्ख समझने
- 28:33लगे कि जो सुन रहे हैं वो मूर्ख तो समझ लेना विनाश शुरू हो गया अब
- 28:46ये कहाँ रुकेगा? ये तो मैं नहीं जानता लेकिन मैं
- 28:52इतना जानता हूँ कि तुम्हारी बर्बादी का आलम मानवता की बर्बादी
- 28:57का आलम शुरू हो गया। अल्बर्ट आइंस्टीन से किसी ने पूछा
- 29:06था। मिस्टर एल्बर्ट हौ दी थर्ड वर्ल्ड
- 29:19वॉर विल रिक्वायर्ड तीसरा विश्व युद्ध कैसे लड़ा जाएगा?
- 29:31आइंस्टीन ने बढ़ी सहज मुद्रा में गंभीर स्वर में हल्की सी
- 29:38मुस्कराहट लिया। जवाब दिया आई डॉन ऑल दी थर्ड
- 29:47वर्ल्ड वॉर विल बी क्वायर्ड। बट आई नो दैट दी फोर्थ वर्ल्ड वॉर
- 29:54विल बी क्वाइट बाय दी स्टोन्स। मैं नहीं जानता कि तीसरा विषय
- 30:03युद्ध कैसे लड़ा जाएगा? लेकिन मैं यह जानता हूँ।
- 30:10कि चौथ विश्व शुद्ध पत्थरों से लड़ा जायेगा।
- 30:17निस्संदेह इस बात में कोई गलती नहीं है।
- 30:21दुरुस्त है यह बात तुम्हारा चैन तुम्हारा कराह।
- 30:33वो मस्तानी ज़िन्दगी और बच्चों की खलखलाहट वो नाच भीतर से उठता हुआ
- 30:45विज्ञान ने छीन लिया। कला छीन ली।
- 30:49विज्ञान ने तुम्हारी खोपड़ियाँ बढ़ा दी, तुम्हारी सूचनाएं बढ़ा
- 31:00दी, नॉलेज बढ़ा दी। और धिक्कार है ऐसी सूचनाओं पर
- 31:13जिनकी कीमत पर तुमने ये सूचनाएं उपलब्ध की और बड़ी भारी कीमत चुका
- 31:23दी तुमने। विज्ञान ने हमसे बहुत भारी कीमत
- 31:30वसूल कर लिया। तुम्हें अभी पता नहीं है तुमने
- 31:38क्या खो दिया। लेकिन जिन्होंने जाना उस स्थल को
- 31:48उन्होंने ये भी जाना कि तुमने क्या खो दिया।
- 31:53अभी तो तुमने जाना ही नहीं, सच पूछो तो अभी तो तुमने उस दिशा में
- 31:59मुखड़ा भी नहीं किया, अभी तो उधर पीठ के खड़े हो।
- 32:05जीस दिन वहाँ उस तरफ मकड़ा कर लोगे और उसके थोड़ा सा करीब
- 32:13पहुंचोगे तो समझ आएगा कि विज्ञान ने कितनी बड़ी गलती कर दी।
- 32:23सुविधाओं के कारण हमने आत्मा बेचते हैं और ये दुखद है।
- 32:38मानवता के लिए एक बड़ी त्रासदी है ये तो मेरी इस बात को मानवता याद
- 32:51रखें, रुकेगा तो कोई कोई किसी के कहने से कभी रोका नहीं।
- 33:02और कोई रुकेगा नहीं, विज्ञान और वैज्ञानिक के चलते ही रहेंगे,
- 33:11लेकिन आज नतीजा तुम भुगत रहे हो, देख रहे हो, लेकिन आँखें बंद हैं।
- 33:19क्या हो रहा है? तुमने तरक्की कर ली है दुनिया में
- 33:3122 जगह पर इस वक्त जंग झेल रही है और यह तो बाहर का आंकड़ा है,
- 33:45लेकिन अगर तुम सही पूछोगे। तो हर घर में जंग चढ़ रही है।
- 33:54रोज़ नए नए खिलाड़ी उत्पन्न होते हैं वो कुंभ जिसमें आनंद का रस
- 34:02मूसलाधार बारिश की तरह वर्षा करता था।
- 34:07आज आइआइटी के मूर्ख लोगों से भड़क रहा है।
- 34:18जहाँ पूछा जाता था उसका रास्ता वो कुंभ जो 12 वर्ष के बाद आता था
- 34:27त्रिवेणी संगम पर। और वहाँ उनके संतों से पूछा जाता
- 34:37था रास्ता वहाँ जाने का और सुगम रास्ता बहुत अफसोस की बात है वहाँ
- 34:56मूर्खों ने गर्व कर लिया है। अभी कल ही मुझे फ़ोन आया बाबा आप
- 35:054 दिन हमारे साथ रहे, बड़ा आनंद आया मैं कहीं गया नहीं, मैं यहीं
- 35:14बैठा हूँ। वर्षों से मददों से।
- 35:20मैं कमरे में आराम कर रहा हूँ और वो मुझे कहते हैं कि बाबा अब 4
- 35:29दिन हमारे साथ रहे। अब ये नई नई व्यवस्था को जन्म
- 35:34देंगे। रोक।
- 35:41ना तो मैं गया हूँ ना मैं हिला हूँ।
- 35:44मैं यहीं का हूँ, ना ही मैंने किसी सिद्धि का प्रयोग करके वहाँ
- 35:51गमन किया है। मैं ऐसी दुष्ट जगह पे जाना ही
- 35:57नहीं चाहता। मैं जानता हूँ आज क्या हो के रह
- 36:01गया है। वहाँ जो गए हैं बखूबी पता चल गया
- 36:08कि इन थोड़े से सालों में कितना बदल गया इंसान।
- 36:18आज वहाँ परमात्मा का रस पीने वाले कितने लोग मुश्किल से दो चार हैं
- 36:27मेरी नजर में लेकिन वो बोलते कुछ नहीं है, चुपचाप चले जाएंगे।
- 36:39आज नहीं कल चले जाएंगे और भीड़ बोलती रह जाएगी।
- 36:54भीड़ इंटरव्यू देती रह जाएगी। और यह मास्टर रस के चुपचाप खिसक
- 37:03जाएंगे और तुम इन्हें पहचान भी न सकोगे क्योंकि इन्होंने सुनहरी
- 37:10वस्त्र नहीं पहने। ये चीथड़ों में है, तुम इन्हें
- 37:17नहीं पहचान पाओगे। तुम उन्हें पहचान पाओगे जो चिल्मो
- 37:25का धुंआ भीतर लेके जाते हैं और बाहर फेंक देते हैं।
- 37:29तुम उन्हें संत कहते हो। विज्ञान ने बहुत तरक्की कर दिया
- 37:37है। जीस वातावरण में ऑक्सीजन की भरमार
- 37:47होती थी राजस्थानिक प्रदूषण फैला पड़ा है।
- 37:56रोज़ रशिया विस्फोट कर देता है। रोज़ इजराइल विस्फोट कर देता है,
- 38:02हमास कर देता है और ये सब शरारत है अमेरिका की तुम्हें पता नहीं।
- 38:21अमेरिका अमीर क्या हो गया? लोगों का विनाश निश्चित करने पे
- 38:31तुल गया और मैंने कल परसों भी एक बात कही थी यह जो मूर्ख है ना अब
- 38:41ट्रंप। मैं कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं
- 38:45हूँ, लेकिन मैं मेरी प्रज्ञा से बोलने वाला व्यक्ति हूँ।
- 38:56मैं बॉडी लैंग्वेज को बखूबी समझता हूँ और उसको भी छोड़ो।
- 39:02ओरा को बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ, इस मूर्ख व्यक्ति का ओरा
- 39:09बर्बाद कर देगा। तुम्हें अमेरिका वालों ने विश्व
- 39:17की बर्बादी को चुन लिया है। मैं मजाक नहीं कर रहा था।
- 39:29जीस दिन पहले दिन इसकी फोटो मुझे दिखाई गई ही इस गोइंग टु बी
- 39:36प्रेसिडेंट ऑफ़ अमेरिका। मैंने कहा, ये तो ऐसा लगता है
- 39:39जैसे जेल के जेल से भाग के आया हो।
- 39:45या कोई क्राइम करके आये हो या कोई क्राइम करने वाला हो और मैं सत्य
- 39:50बोलता हूँ। मुझे किसी का डर है नहीं, निश्चित
- 39:58रूप से ये पागल है। ये भीतर से पागल है।
- 40:05ही शुड बी एक्ज़ामिन्ड एंटायरली तुमने बैठा दिया प्रेसिडेंट।
- 40:22तुम्हारी बड़ी से बड़ी मशीनें एमआरआइ या इससे भी बड़ी मशीनें
- 40:30भीतर के औरगंज को तस्वीरों में खेंच चलाएंगे।
- 40:37लेकिन हमारे पास बड़ी पारदर्शी नजर है।
- 40:42हम तो तुम्हारी आत्मा को खींच लाते हैं बार यह विश्व के लिए कोई
- 40:51शुभ सन्देश नहीं है। पहले ही बहुत मुल्कों में बहुत
- 40:58मुल्कों में पागल लोग राज़ कर रहे हैं।
- 41:05ये एक नया पागल आ गया। विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली,
- 41:15लेकिन तुम्हारे सुख ने कितनी तरक्की की, तुम्हारे आनंद ने
- 41:22कितनी ऊंचाइयों को छूआ। आज मैं मानवता को देय ही नहीं,
- 41:34भीतर की दरद्रता कंगाल सा से युक्त विपन्नता के दरवाजे पर खड़ा
- 41:43हुआ देखता हूँ। ज़रा भी संपत्ति नहीं है उसके पास
- 41:53वो संपत्ति जिसके पाने से लोग प्रसुर होते आनंद में आ जाते हैं।
- 42:04वो स्वाद जो पाया हजरत ने जो इसमें।
- 42:13और ध्यान रखना वो कि सैकड़ों सालों की उम्र से नहीं मिला करता।
- 42:22तुम चुंकना भी मत और हैरान भी मत होना।
- 42:29वह कुछ कंपनों की बात होती है, बस इतनी सी जिंदगी बहुत है उसको पीने
- 42:36के लिए और अगर मैं आज उस रस को न पिया होता।
- 42:49तो मैं आज परमात्मा से यही कहता कि मुझे बस वो उतने ही लंबे दे दे
- 42:57जिसमें तू बरसात था, बस फिर जीवन समाप्त करता, हाथ में तो उसके ही
- 43:09हैं। वो जब बरसता है तो निहाल कर देता
- 43:19है, बस बरस जा और हटा ले मुझको इस संसार से हटा ले एक बार उतना बरस
- 43:34जा। लेकिन अब तो वो बरस चुका है
- 43:38तुम्हारे लिए अपराध करता हूँ के प्यार की वो घड़ियां जब वो बरसता
- 43:48है तो हमारी जिंदगी को बाहर भीतर से नहला जाते हैं।
- 43:59वो थोड़े से पर तुम्हारी जिंदगी की सही अमानत है, सही संपत्ति है
- 44:13तुम्हारे। लंबी लंबी उमरिया को छोड़ो ये भी।
- 44:33तो मूर्खताओं के कारण मूर्खताओं के कारण लंबी उम्र मांगते हो वरना
- 44:38करना क्या होता है? प्रेम का वो पुजारी 33 साल जिया
- 44:46जी सब्स्क्राइब्ड कोई बहुत ज्यादा उम्रें इन्होंने भोगी नहीं शंकर
- 44:56के दिन थे 33 वर्ष। हज़रत कितने थे?
- 45:0161 6200 नानक कितने थे? यही स्तर महावीर 72 मोर दैन
- 45:13सुफ्फिसिएंट इतनी उम्र बहुत होती है।
- 45:25ज़िन्दगी। की न टूटे लड़ी प्यार कर लें घड़ी
- 45:38दो घड़ी हो। लंबी लंबी उमरिया को छोड़ो, लंबी
- 45:54लंबी उमरिया को छोड़ो। प्यार की एक।
- 46:07घड़ी है बड़ी प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी।
- 46:20जीए बहुत जीव और तुम उन लोगों को सत्कार देते हो जो है नहीं, तुम
- 46:29कहते हो आज बाबा महाभारत 4000 साल की बैठक कोई महा अवतार बाबा नहीं।
- 46:39वो थोड़ी सी उम्र भौंक के चला गया और ज्यादा उम्र कोई क्वालिफिकेशन
- 46:44नहीं है। क्वालिफिकेशन है ज्यादा रस में
- 46:49होना फूल बड़ा कितना भी हो अगर सुगन्ती ना हो।
- 46:58तो फिर महज कुछ केमिकल जी होते हैं रासायनिक लेकिन फूल अगर छोटा
- 47:07भी हो और सुगंध से भरा हो उसके क्रीम ही जाकर तुम्हें।
- 47:18नशा पूटों को आनंद मिलता है, जीवन का रोवा रोवा तुम्हारा खिल जाता
- 47:24है और बड़े फूल के वास्ते तुम खड़े निहारते रहोगे कुछ भी ना
- 47:31मिलेगा जिसमें सुगंध न हो। उसके बड़े होने की औकात क्या है?
- 47:48छोटा सा फूल हो, लेकिन सुगंध प्रगाढ़ हो वो होता है जीवन जब
- 47:59खुद भी। सुगंधमान होता है और दूसरों को भी
- 48:03पुलकित करता है। जो राह से गुजर जाता है, उस मस्ती
- 48:09को पी के जाता है और तुम्हें धन्यवाद दे के जाता है तो आज तो
- 48:17मैं यही कहूंगा। क्योंकि आज वो भक्त नहीं है।
- 48:24बड़ा ज़माना बीत गया, गंगा का बहुत पानी गुजर गया, समुद्र में
- 48:31गिर गया और समुद्र का बहुत पानी वाश्व बनकर फिर गंगा में समा गया।
- 48:40वो ज़माना गया आज जो ज़माना मेरे लिए तो बड़ा खुशहाल है तुम्हारे
- 48:49लिए उस परम से प्रार्थना करता हूँ।
- 48:55कि काश तुम्हें भी पल दो पल के लिए वो घड़ियाँ नसीब हो जाएं।
- 49:02बस इतना सा ही चाहता हूँ क्योंकि मेरे से ज्यादा अच्छी तरह कौन
- 49:11जानता है। अगर तुमने एक पल के लिए भी वो पी
- 49:16लिया फिर तुम बदोगे नहीं। फिर कुंभ तुम्हारे लिए फीके पड़
- 49:24जाएंगे फिर धर्मस्थल तुम्हारे लिए फीके पड़ जाएंगे।
- 49:30लड़ाई झगड़े, धर्मस्थलों के लिए तुम्हारे लिए फीके पड़ जाएंगे।
- 49:36फिर तुम उसी आनंद की खोज में वही मांगोगे वही वही मांगोगे फिर फिर
- 49:44मांगोगे फिर उठेगी आवाज भी। और ज़रा सीधे जैसा की और।
- 49:58ज़रा सी और और। ज़रा सीधे जैसा की और ज़रा सी और।
- 50:12कैसे रहूं चुप के? मैंने पी ही क्या है?
- 50:19होशवि तक है वाकि जब तक होश रहता है तब तक हमारी सम्पूर्ण नहीं
- 50:28होती हमारी तो वो। जो तुम परमहूष में भीतर से रहो और
- 50:39परम खुमार में बाहर से रहो बुद्धि तुम्हारी कुम्हारी से ढक जाए, और
- 50:48चेतना तुम्हारी। चेतनता से खिल जाए, अपनी अंतरिम
- 51:00क्वांटिटी में मात्रा में बस उतनी दे।
- 51:09बाहर कुछ याद ना रहे और भीतर कुछ भूल ना पाए।
- 51:16ये अद्भुत सूत्र हैं लेकिन काश तुम इस सूत्र तक पहुँच सको भीतर
- 51:23कुछ भूल ना पाए और बाहर कुछ याद करने ना कहो।
- 51:29तुम उस स्थिति में आ जाओ और मांगोगे अगर दो पल के लिए मिल गई
- 51:37तो अभी तो होश बाकी है और ज़रा सी दे दे साखी।
- 51:47और ज़रा सी और पिलाने वाला तो वो है तीर्थनामा जेतसपाव है बीन पानी
- 51:56की नाई करें अगर वो नहीं चाहता तो तुम्हे गंगा के जल में संगम की
- 52:04भीतर डुबकी लगानी पड़ेगी जो बेकार।
- 52:09उसका तीर्थ तो बड़ा प्यारा है, बड़ा सुरूर से भरा है और जो घर
- 52:17बैठे पी लेते हैं, उन्हें संगमो पे जाने की आवश्यकता नहीं होती
- 52:25कहाँ पड़ती है? जो संगमों पे जाते हैं यह बताते
- 52:32हैं कि उन्होंने पी नहीं घर पे मिली नहीं रास्ते में और कोई
- 52:42जंक्शन नहीं था जहाँ रुक के वो पी लेता।
- 52:46इसलिए संगम में जाना पड़ा। कैसे रहूं चुप के मैंने पी ही
- 52:58क्या है होश अभी तक है बाप के और ज़रा सी और ज़रा सी और।
- 53:09साइंस बढ़ती जाएगी। रस तो खत्म ही हो गया है।
- 53:15मेरे हिसाब से जिधर देखता हूँ उधर व्यापार ही व्यापार नज़र आता है।
- 53:27लेबर लगे हैं। अध्यात्म तक भीतर कचरा ही कचरा
- 53:33है, कूड़ा ही कूड़ा है, गंदगी ही गंदगी भरी पड़ी है और क्या कहूं
- 53:38तुमसे कि तुम बैठे कहाँ हो गंदगी के ढेर पे बैठे हो तुम?
- 53:49लब लगा है आध्यात्मिकता का बखूबी जानता हूँ मैं आनंद की वो पोल तो
- 53:58तुम्हारे भीतर जगे न जीस दिन वो जग जाए।
- 54:06उस दिन मेरी बातों का सत्य और तथ्य तुम्हें पता चलेगा।
- 54:15उससे पहले ये कोरे शब्द हैं भावना में लिपटे हुए हैं सत्य में लिपटे
- 54:25हुए न? काश तुम्हें वो पल नसीब हूँ।
- 54:35विज्ञान जहाँ तक पहुँच गया वहाँ तक पहुंचना नहीं चाहिए था, लेकिन
- 54:41इसने अपनी रफ्तार कम नहीं की है। जो चंद्रमा में पहुँच गया और
- 54:51तुमने वो रस पी लिया वही मंगल पे जा के पीरोगे मंगल पे कोई नया रस
- 54:59थोड़ी धरा पड़ा है। बात तो ये है कि रस बाहर है रस
- 55:08तुम्हारे भीतर है, तुम हो रस तुम तुम तुम रसो वैसा स शब्द को काट
- 55:22दो। तुम ही रस हो, वह रस नहीं है।
- 55:31इस पड़ाव पर तो तुम ही आओगे तब जब पहले जानोगे रसो बैसा, वह रसो है।
- 55:41यह अंतिम छोर है। उस सत्य का जहा तुम पहुंचते हो के
- 55:46मैं ही रसू हूँ जिसे भगवान कृष्ण कहते हैं अनन्या चिंतन तो माँ ये
- 55:52जनाह परू वास्त्य तेशाम नित्यागुप्ता नाम योग श्यवं बहाम।
- 56:03धन्यवाद हाँ, वो चार थे, वो चार चले गए जैसे प्राण निकल गया हो,
- 56:17मृत शरीर पड़ा है। अब तुम्हारे कर्मकांड बचे हैं,
- 56:23निभाते रहो अब ये फिरेंगे हाथ में डंडे लिए और इन मूर्खों के
- 56:32इंटरव्यू करते हुए आज ये होने लग गया हैं और शर्मसार हूँ।
- 56:44इन परिस्थितियों पे तुम कहते हो वाह वाह 4 दिन मैं था झूठ मत बोलो
- 56:51और मुझे बोलने के लिए बेबश्यना करो, मैं इन चीजों का शौकीन नहीं
- 56:57हूँ। कि हाँ, मैं कह दूँ कि मैं
- 57:01तुम्हारे साथ था और तुम मेरी पूजा करो, यहाँ आओगे तो मैं तुम्हें
- 57:06मिलूंगा नहीं, मुझे ब्रह्मानी की चिष्टा न करो, सबकी मजबूरी है।
- 57:21ये डंडे हाथ में उठाए करते हैं। बापी पेट का सवाल है, मैं बखूबी
- 57:29जानता हूँ, इनके विचारों की मजबूरी है क्या करें?
- 57:36शोक बढ़ गए। महंगाई बढ़ गई।
- 57:40कमाई घट गई है। नहीं दुष्टों ने संदूक भर लिया
- 57:51ऐसा ही चलेगा, तुम्हारा विज्ञान खोजता रहेगा।
- 57:58एक छोटे से बच्चे की बात खत्म फिर से बोलना शुरू किया है बस 2 मिनट
- 58:05और हैं फिर अंतिम भजन गाके समाप्ति प्रेम का।
- 58:18बाबा चूर्ण लेके आना है, जाओ बेटा ले आओ।
- 58:22एक पुड़िया ले आए छोटा बच्चा जब उस पुड़िया को खोला तो खाली खाली
- 58:33पुड़िया। बाबा इसमें है तो कुछ है नहीं, ₹2
- 58:38ले लिए है तो है नहीं कुछ इसमें मैंने कहा ₹2 ले लिए, इसमें है
- 58:46कुछ है नहीं लाओ, दिखाओ मुझे तो मैंने उस पुड़िया को अच्छी तरह
- 58:53से। देखा, उसके भीतर तो कुछ नहीं था
- 59:00मेरी बात पे हसना मत, ये तुम्हारी जिंदगी की बात कह रहा हूँ।
- 59:05कुदरती इस बात से भिड़ गई। तो मैंने उसके भीतर पैकेट के भीतर
- 59:13हाथ मारा, कुछ नहीं और बच्चा कहता है ₹2 ले रही है, भीतर तो कुछ है
- 59:19नहीं। मैंने बाहर देखा लिखा था ढूंढ़ते
- 59:25रह जाओगे। मैंने कहा बेटा बस ठीक है।
- 59:29सही लिखा है। ये बड़ा ईमानदार है।
- 59:34श्री। कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 59:44हे नाथ नारायण वासुदेव? श्री कृष्ण।
- 59:54गोविंद हरे हैं। मुरारी।
- 1:00:01हे नाथ नारायण, वासुदेव, श्रीकृष्ण, गोविंद, आरे मुरारी,
- 1:00:14हे नाथ नारायण, वासुदेव। पितमात स्वामी सखा हमारे पितमात
- 1:00:29स्वामी सखा हमारे। हे नाथ नारायण वासुदेव पित्र मात
- 1:00:43स्वामी सकमारे हे नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:00:55पितुमात स्वामी सखा हमारे हे नाथ नारायण वासुदेव यदा यदा।
- 1:01:12ही धर्मश्य। गला निर्भक्ति भारत अभ्युतानम।
- 1:01:26अधर्म। तथमानम श्रीजमण।
- 1:02:08संभव में जुगे जुगे पितमात स्वामी सखामार।
- 1:02:27हिन्नाथ नारा जन वासुदेव पितुमात स्वामी सखा हमारे।
- 1:02:42नाथ नारायण, वसुदेव व। श्री कृष्ण गोविंद श्री।
- 1:02:52कृष्ण गोविंद हरे मुरारी। हे नाथ नारायण वासुदेव?
- 1:03:15व हो।