Latest / Baba ji Vijay Vats / 25/1/26 - गहरी बातें - क्षमा, भय, और क़ुर्बानी का सच! धर्म और व्यक्ति का भेद! परमाणु खतरा
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- 0:17ओहियो की एक अदालत में एक मुकदमा चल रहा था।
- 0:30एक वृद्ध व्यक्ति के पुत्र को किसी नौजवान ने कतल कर दिया था।
- 0:47फैसले का दिन था, आज और फैसला आया किस व्यक्ति को सजा या नोट दी
- 1:00जाती है? वहाँ बैठे हुए सभी लोग थर्रा गए।
- 1:18ठीक है, सभी बोल रहे हैं खून का बदला खून से ही होना चाहिए और वह
- 1:31गुनहगार कप रहात। लेकिन दृश्य पलटा ये सत्य घटना है
- 1:53अचानक और पिता जिसका पुत्र कतल कर दिया गया था।
- 2:03वह उसे सजा ए रास्ता व्यक्ति के पास पहुंचा।
- 2:13उसने जाकर उसे रख दी। को अघोष में ले गया।
- 2:27उसके चार शब्द स्मरण नहीं है। अब इनको हृदय में बसा लेना तुमने
- 2:43मेरे पुत्र का कतल कर दिया, मेरा अंत से जानता है।
- 2:52तो वृद्ध अवस्था में किसी के पुत्र की अगर हत्या हो जाए उसके
- 2:57भीतर कितनी पीड़ा होती है? और मैं यह पीड़ा तुम्हारे पिता को
- 3:08नहीं देना चाहता हूँ, इसलिए मैं तुम्हें दोष मुक्त करता हूँ।
- 3:18और अदालत से दरखास्त करता हूँ कि इस व्यक्ति को कोई सजा ना दी जाए।
- 3:32पिता का नाम था अब्दुल फजर। और जो कतल हुआ था वह था मोहम्मद
- 3:41फजीम। ये कहानी मैंने तो सुनाई एक
- 3:55प्रश्न आया। कर्नल राजेंद्र सिंह का वॉइस
- 4:07मैसेज मेरे पास आया। उन्होंने कहा मैं इस्लाम धर्म से
- 4:18नफरत करने लगा हूँ। क्योंकि मेरे है जानवरों को कल
- 4:32में पड़ पड़ कर अल्लाह के नाम पर कुर्बान कर दिया जाता है।
- 4:38बाबा और मैंने वो कुर्बान होते हुए पशु देखे हैं।
- 4:45जीतने दर्द से कराते हैं, कलमा पढ़ लेते हैं, थोड़ी सी गर्दन काट
- 4:53देते हैं, खून बहने देते हैं, फिर कलमा पढ़ते हैं, फिर छोरी फेर
- 4:59देते हैं इतनी निर्दता से मौत मार देना।
- 5:05और सारे संसार में आज इस्लामिक फोबिया है और इस्लाम की किताब जो
- 5:18मोहम्मद नवी ने लिखी और मुसल। मान कहते हैं कि हजरत के ऊपर
- 5:30परमात्मा की बरसात है। क्या परमात्मा ऐसे ऐसे आदेश दे
- 5:40सकता है? अपने पुत्रों को, जबकि सभी उसके
- 5:45पुत्र? आइए यहाँ तक का समाधान कीजिए
- 6:02इंसान तब तक इंसान नहीं होता जब तक के उसके भीतर।
- 6:13करुणा की मात्रा बढ़ती है। सभी जीवों के प्रति करुणा की
- 6:20भावना को बढ़ जाना या कॉन्शसनेस के बढ़ जाने का प्रमाण है धर्म की
- 6:30परिभाषा। मेरे ढंग से आप समझने की चिष्टागण
- 6:39धर्म की परिभाषा की आपके भीतर आप खुद आनंद में तो हो ही हो और उस
- 6:50आनंद से। उठेगा।
- 6:53क्षमा भाग जैसे सुब्रत ने किसी दूसरे के पुत्र को क्षमा कर दिया
- 7:04कि मैं नहीं चाहता। मैं जानता हूँ किसी का जवान बेटा
- 7:09उसकी वर्धा में कतल कर दिया जाएगा उसकी पीड़ा क्या होती है सही
- 7:15प्रमाण दिया उस व्यक्ति ने और मैं तुम्हारे पिता को इस दर्दनाक।
- 7:25अवस्था में से गुजरे यह नहीं जाता।
- 7:32इसे कहते हैं इस्लाम कभी भी समूह अत्याचारी नहीं होता।
- 7:47व्यक्ति व्यक्ति से मिलकर समूह बनता है और एक व्यक्ति से सारे
- 7:54समूह का निर्णय नहीं हो सकता। गलती एक व्यक्ति करता है तो क्या
- 8:03हम सारे घरवालों को टांग देते हैं?
- 8:14और कर्नल राजेन्द्र सिंह आपने जो बात की की, अगर अल्लाह ऐसे फरमान
- 8:24करता है तो हमारा अल्लाह ऐसे फरमान हमें क्यों नहीं करता?
- 8:29हमारा वह गुरु? ऐसे फरमान क्यों नहीं करता?
- 8:38नहीं, अल्लाह ऐसा फरमान नहीं करता, मैं तो रोज़ बोलता हूँ,
- 8:45आपने शायद मुझे सुना नहीं होगा, मैं तो रोज़ कहता हूँ।
- 8:52अल्लाह को प्यारी है कुरबानी यह कुरबानी शब्द बड़ी प्यारी है।
- 8:59तुमने इसकी दिशा को डायरेक्शनल मोड दे दिया है।
- 9:06यह कभी ना कभी सुधार आ जाएगा, लेकिन रस्सा सही है।
- 9:11कुर्बानी का रास्ता सही है। जैसे ही समर्पण का रास्ता और
- 9:16परमात्मा की रज़ा में राज्य रहने का रास्ता सही है वैसे ही इस्लाम
- 9:22का रास्ता सही है। कुरान में क्या लिखा है?
- 9:32इस बात की ज्यादा व्याख्या में मत जाइए, किताबें बनती बिगड़ती रहती
- 9:38हैं। अल्लाह का फरमान था तो अल्लाह का
- 9:47फरमान तो बाबनानक के ऊपर। जैसे ए लिखे, जिसे सर नाम जब
- 9:54फरमाए, वह फरमान जैसा करता है, वैसा वैसा मैं लिख रहा हूँ।
- 9:59उसमें बिलकुल नहीं लिखा। उन्होंने तो लिखा की वंड छको कृत
- 10:05कर नाम। तो क्या अल्लाह दो होते हैं नहीं,
- 10:15अल्लाह तो एक होता है फिर फरमान दो के हो गए नहीं कहीं ना कहीं
- 10:21फरमान को मुड़ लिया गया। सत्यता से फैलाया गुरु नानक ने।
- 10:30और हज़रत ने भी नहीं कहा। हज़रत ने नहीं कहा यह बड़ी लम्बी
- 10:36बात हो जाएगी। व्यक्ति के खुद के जीवन से देखो
- 10:43उसके ऊपर तो खुद ही शब्द बहुत हुए।
- 10:48फातिमा गर्भवती जी। उसको गर्भवती फातिमा को उसकी
- 10:56पुत्री थी। दरवाजे के भीतर मचोड़ दिया गया
- 11:12बहुत से तशरदार। हजरत मुहम्मद रमब से बहुत से
- 11:19तशित, जिन्हें हम आज मर्यादा पुरुषोत्तम कहते हैं, उन्होंने
- 11:28बिसई लेकिन क्या किसी से गलती नहीं हुई?
- 11:34कोई गलती हुई? इस शरीर में आने वाला कोई भी चेतन
- 11:45गलती किए बिना रहे नहीं हो सकता क्यों?
- 11:51क्योंकि वह जड़ पंचभौतिक शरीर जड़ के साथ महत्त्व बांटे का ही?
- 11:59और कहीं न कहीं कोई राग छूट ही जाएगा।
- 12:06रंग कितना ही मिटा लो उसकी शैडो तो रहती ही रहती है।
- 12:15आप थीम के ऊपर जाइए। आप कुरान के शब्दों में मत चले,
- 12:24हमारी धार्मिक किताबें फ्रैंचाई दच आए, मुसलमान आए, अंग्रेज आए,
- 12:33आपको पता है कि वो क्षुब्ध रह गईं?
- 12:37जबकि हम हजारों सालों का गुलाम थे।
- 12:40क्या हमारी किताबें गुलाम नहीं थीं?
- 12:44इसलिए मैं कहता हूँ किताबों को फेंक दो या इन्हें आदर पूर्व किसी
- 12:51अलमारी में रखो। एक किताब आपके भीतर है पर पर
- 13:01गड्ढे लगती है तो पर पर हुए ख्वार नानकर लिखे एक गलत बाकी चकणाचार
- 13:09एक किताब हमारे भीतर भी है। उसे नानक कहते हैं कि लिखे एक गल
- 13:18वह बस जिसने वह शास्त्र पर लिया, अपने अंतर से कहा।
- 13:23उसके लिए बाहर के सभी शास्त्र बेकार हो जाते हैं और बाहर के
- 13:28शास्त्रों को गंगा बना दो। धूप दी भारती करके अलमारी में छड़
- 13:37दो, ये तुम्हें बहकाएंगे बडकाएं तुमने जो कहा पुत्र ठीक।
- 13:52लेकिन किसी एक व्यक्ति से समाज का निर्णय नहीं किया जा सकता।
- 13:58किसी एक व्यक्ति से पूरे धर्म को निंदित नहीं किया जा सकता और पूरे
- 14:03धर्म को पुरस्कृत नहीं किया जा सकता।
- 14:08व्यक्ति व्यक्ति होता है, समूहों समूह होता है।
- 14:11और देश देश होता है, संसार संसार होता है।
- 14:15इसको इस दृष्टि से देखना चाहिए। इस्लाम का वो बनता है जिसने अपने
- 14:23ही पुत्र के कारदल को क्षमा कर दिया।
- 14:27क्या सभी कर पाएंगे नहीं? तो क्या इसी को उदाहरण बना दीजिए
- 14:32कह देना कि इस्लाम तो बहुत ही शांति भैया गर्म है यह गलत है।
- 14:37यह एक अति हो गयी। यह पेंडुलम का एक छोर हो गया जैसे
- 14:45निर्दोष मेमने का कतल यह दूसरा छोर हो गया।
- 14:50उसका तो दोष ही कृष्ण एक छोर पे पेंडुलम अति करता है।
- 14:58वहाँ निर्दोष जीवों की हत्या हो जाती है और वो अल्लाह के नाम पर
- 15:02उड़ती है। दूसरे छोर पर ओहियो की एकादाह।
- 15:11एक मुसलमान है, अपनी ही पुत्र के कातिल को क्षमा कर देता है।
- 15:17क्या इन दो घटनाओं से पूरे धर्म को व्यख्यात कर दिया जाए?
- 15:23नहीं बिल्कुल फिर। कृष्ण के खुद के जीवन को देखा
- 15:32जाए, नानक के खुद के जीवन को देखा जाए।
- 15:36यहीं हम गलती कर गए जब हमने समूह के बर्ताव व्यवहार को देखा।
- 15:47तो हम गलती खा गए। शिष्य सदा ही बिगाड़ देते हैं।
- 15:55आज वह पिता ने जो ₹2030 दिए थे, भूखों का पेट भर के आ गए वापस।
- 16:05और वह लंगर आज भी चल रहा है। वो रुपए समाप्त ही नहीं हुए और
- 16:09समाप्त ही नहीं होंगे। क्या इससे सारे शेख धर्म को
- 16:21श्रेष्ठ मान लिया जाए? नहीं, मैं क्या कहना चाहती हूँ?
- 16:30वही व्यक्ति श्रेष्ठ है जिसने गुरु नानक देव की आज्ञाओं को
- 16:37शिष्य की तरह स्वीकार किया है। वह सिख है।
- 16:45उसकी कदर होनी चाहिए ना कि वह व्यक्ति जो सिर्फ केश बढ़ा लेता
- 16:51है, पगड़ी रख लेता है और कतलो करता है।
- 16:56व्यक्ति से समूहों की व्याख्या नहीं होनी चाहिए और व्यक्ति से
- 17:00धर्मों की व्याख्या भी नहीं होनी चाहिए।
- 17:07मैंने कल, परसों के वीडियो में बताया, सभी धर्मों को अलग अलग
- 17:14लेकिन समूहों को मैंने कभी नहीं बताया।
- 17:19समूहों में तो हमारे एक परिवार में पांच लोग हैं, एक गलत भी निकल
- 17:24सकता है। एक रमण भी हो सकता है, एक विभीषण
- 17:28भी हो सकता है, एक हृणकशब भी हो सकता है और उसी का बेटा प्रहलाद
- 17:33भी हो सकता है क्या? एक परिवार में जन्मे हुए सभी
- 17:39व्यक्तियों को गलत या ठीक समझ लिया जाए?
- 17:42नहीं यही गलती कर गया इंसान। इंसान ने जीवन में सबसे बड़ी गलती
- 17:50की है। शिष्य क्या करते हैं?
- 18:00उसे धर्म के आगाज करता को दो। दोषी नहीं ठहराना चाहिए।
- 18:08आगाजकर्ता ने अपनी ज़िन्दगी बड़ी संतोष से गुज़र ली, उससे जो मिल
- 18:14जाता और वह मांगता नहीं। हज़रत कभी किसी से मांगे नहीं।
- 18:22जो मिल जाता उसे खा लेते। और जो बच जाता शाम को कहते फातिमा
- 18:29इसको बाहर दिया। कोई रात भर भूखा ना रहे।
- 18:34जितना अपने पास है उतना तो देते है।
- 18:37जब भी लोगों ने दिया है अगर हम यही बात समझें कि हमारे पास आया
- 18:42हुआ धन परमात्मा ने दिया है और उसको परमात्मा के बन्दों में बांट
- 18:48दी तो धरती से एक क्षण में दुख मिट जाएगा।
- 18:56आधा दुख इस वृत्ति के कारण है कि यह मैंने कमाया है।
- 19:05अगर सारी दुनिया ये समझ ले कि यह अल्लाह की दांत है या वह गुरु की
- 19:12दांत या परमात्मा की दांत और वास्तव में तो यही है कोई समझे या
- 19:20ना समझे? मृत्यु तो समझा ही देती है कि
- 19:23तुम्हारा जहाँ कुछ नहीं तुमने क्या कमाया था, जो कमाया तुम्हारे
- 19:28संग जा रहा है तुमने क्या कमाया कॉन्शसनेस कि।
- 19:41जितना तुमने अपनी कॉन्शसनेस को बढ़ा दिया, वो तुमने कमाया और
- 19:50गँवा तो तुम सकते हो क्योंकि कॉन्शसनेस यानी चेतना एक ऐसा
- 19:56बहुमूल्य रत्न है। जिसकी आभा कभी घटती बढ़ सकती है
- 20:09तो कर्नल राजेंद्र सिंह मेरी एक बात को समझ लीजिए आप गलत मार्क पे
- 20:20चल पड़े। इस्लामी कैफोबिया सारे संसार में
- 20:27बढ़ रहा है। बिल्कुल ठीक है।
- 20:32कितने प्रवचनों में मैंने बोला कि जीस मेमने को आप बकरीद के वक्त।
- 20:40अल्लाह के नाम पे कुरबानी कर देते हो और यह शब्द बोलते हो अल्लाह को
- 20:45प्यारी है कुरबानी काश आप ने उस मेमने की निर्दोष आँखों में जगा
- 20:53होता तो वह मेमना आप से गिड़गिड़ा के कहता है।
- 20:59हिम्मत मरो मुझे काश तुमने एक बार किस की गर्दन पर कल में पड़ रहे
- 21:10हो परमात्मा के नाम पे। उसकी आँखों में झाँक लिया होता
- 21:18कितनी मासूम है मैंने अपनी ज़िन्दगी की में लिखा कि मैंने
- 21:27कोई पुण्य नहीं किया था। जीस दिन मुझे ये ट्रैन का
- 21:34इंसिडेंट हुआ और सारा जीवन बदल गया शिन्न भिन्न हो गया सब उस दिन
- 21:42मैं खरगोश काट के आ रहा था, मेडिकल का स्टूडेंट था खरगोश काट
- 21:49के आ रहा था क्या यह पुन है? बिल्कुल नहीं और मैंने देखा उस
- 21:55दिन परमात्मा सब चीजों को पहले शैडो के रूप में बता देता है।
- 22:03पहली दफ़े उस दिन मैंने खरगोश की आँखों में चका बड़ी प्यारी थी
- 22:07निर्दोष थी मेरा मन तो नहीं हुआ कि इसे काट दे।
- 22:15लेकिन क्या करें? हमारे तो सिलेबस के भीतर लिखा ही
- 22:21है, इसको काटो और मैं नहीं काटा और सब देखा हृदय कैसे धड़क रहा है
- 22:28लाखे रंग का है। सारी अंतड़ियाँ सारा भीतरी
- 22:32स्ट्रक्चर, लेकिन आँखों में जैसे ही झाँका था, मैंने एक मासूमियत
- 22:41निर्दोष आत्मा की पुकार थी कि मुझे मत मारो उससे थोड़ी देर पहले
- 22:47वो कुदड़ के मार रहा था। ऊंची ऊंची छाले मार रहा है।
- 22:54खरगोश बड़ा तेज दौड़ता है, परमात्मा की रजम में रहना है,
- 23:02बाबा नन्द ने सगाया उसके जीवन से देखो, आज के ग्रंथों को मत देखो।
- 23:08उनको तो मैं जानता हूँ जो मिल गया, जो मिल गया, खुशी को मुखर तर
- 23:27समझ लिया। जो मिल गया उसी को मकदर समझ लिया,
- 23:40जो खो गया, मैं उसको बुलाता चला गया।
- 23:47वो खो गया, मैं उसको बुलाता चला गया।
- 23:54चौहानी हो गई और मेरा था ही जो लाभ हो गया वह उसकी रहम दिली से
- 24:06आया। और सत्य यही है अंत में तुम यही
- 24:11पाओगे इस राह पे चलने वाले बासिन्दो अंत में तुम यही पाओगे
- 24:20कि न तो मैं हूँ और न मेरा कुछ है यह अंत।
- 24:27उससे पहले अगर कोई कहता है कि रंग नहीं होते तो समझ लेना कि उसकी
- 24:35आंख नहीं है। तुम सत्य सत्य रूप से सत्य को
- 24:41जानने पहचानने की चेष्टा करो। अगर कोई कहता रंग नहीं होते हैं,
- 24:45परमात्मा नहीं होता तो समझ लेना कि उसकी आँखें में आँखों के बिना
- 24:53रंग दिखाई कैसे पड़ेगा? अगर कोई कहते सुगंध नहीं होती है
- 24:59तो समझ लेना इसकी नासिक ठीक से कम नहीं।
- 25:04अगर कोई कहता कोई गायन नहीं होता, कोई सुन्दर गीत नहीं होता तो समझ
- 25:12लेना उसके श्रवण यन्त्र ठीक से काम नहीं कर रहे।
- 25:20ये खराबी श्रवण यन्त्रों की है। आँखों की है, नासिक का पोटों की
- 25:28है। कोई कहता कि किसी चीज़ में कोई
- 25:31स्वाद नहीं होता तो समझ लो उसके जीभ के टेस्ट समर्थ नहीं है उसके
- 25:35पास फिर उसको इलाज कराना चाहिए। इसलिए मैं कहता हूँ मारकस कैसे?
- 25:43लोगों को इलाज की जरूरत है। चारवाक जैसे लोगों को इलाज की
- 25:51जरूरत है। विद्यार्थी तो मैं भी संस्कार था,
- 25:57परमात्मा नहीं होता, ऐसा तो मैंने भी सुना।
- 26:03लेकिन फिर पाया कि होता है, लेकिन पाया बहुत बाद में पाया 1985 का
- 26:10वो रात 28 अक्तूबर की वो रात शरद पूर्ण फिर कैसे भला करूँगा मैं जो
- 26:20मैंने देखा? क्या वह ब्रह्मथा हैलो सेनेशन
- 26:31थीं? क्या मेरी मान्यताएँ थीं और फिर
- 26:37वह लगातार होता? चला गया।
- 26:41क्या मैं वास्तव में पूरा पागल हो गया हूँ?
- 26:51नहीं पागल विक्षिप्त होता है, लेकिन उसकी खबर रखने वाला आनंदित
- 26:59होता है, बस यह फर्क को आप नोट कर लेना।
- 27:05अगर तुममे भ्रम हो कि कहीं मुझे भ्रम तो नहीं हो गया?
- 27:08ऍम नॉट इन ऍम नॉट इन हैलोसिनेशन, तो फिर फिर से वो चीज़ दोहराई
- 27:18जाएगी अपने आप और तुम्हे 1 दिन यकीन हो जाएगा न?
- 27:28यह सत्य है, यह मैंने कुछ तो पा नहीं, यह सत्य से गठित होता है।
- 27:36बाला प्रेम आप भी करते हो ओह प्रेम लैला मजनू और हीरा जा भी
- 27:41करता है। क्या दोनों के प्रेम में बराबरी
- 27:44है? नहीं?
- 27:47फर्क है बहुत फर्क है। लैला मजनू शीरी फरयाद सोहनी
- 27:54माहीवाल हीर राँजा को प्रेम होता है तुम प्रेम करते हो तुम्हारा
- 28:01प्रेम आपसी। एक प्रकार का सेट्लमेंट है,
- 28:07समझौता कर लेते हैं लेकिन हीर रंझा हीर को तो रांझे में
- 28:14परमात्मा दिखाई पड़ता है। मजन को लैला में परमात्मा दिखाई
- 28:20पड़ता है। वह काली कलूटी नए न नहीं नक्ष
- 28:36आज ये सारी दुनिया में लोग कहते हैं।
- 28:40साइंस ने बड़ी तरक्की कर ली। मैं कहता हूँ साइंस ने बड़ा विनाश
- 28:44कर दिया, क्यों साइंस ने तो तरक्की कर ली?
- 28:52मोहम्मद तो ठीक कह गए, नानक तो ठीक कह गए और कैसी?
- 28:56शो ने क्या किया? एटोमिक पावर प्लांट भरने चाहिए
- 29:01थे, एटम बम क्यों बना लिया? क्या दूसरों को डराने के लिए बस
- 29:09यहीं गड़बड़ी हो जाती है? खोज करता इन वेंटर और बाद में जो
- 29:18उसका उपयोग करते हैं, उनमें यही फर्क होता है।
- 29:22बाबा नानक जो कह गए वह उसके शिष्य केस रखते हैं।
- 29:34पूरे दिए हुए उपदिशयों पर चलते हैं गुरूगण साहब को पवित्र गुरगण
- 29:39साहब को सर पर रखते हैं, पूरा मान सम्मान देते हैं, लेकिन फिर भी
- 29:46क्या बात? उस सतल जिसे आनंद कहते हैं, वहाँ
- 29:51पहुंचते क्यों नहीं? कहीं कोई गड़बड़ तो है ना आँखें
- 29:56हैं और दिखाई ही नहीं पड़ता फिर मतलब क्या है आँखों में कनखा पड़
- 30:00गया है बतलाने वाले से ही बतला गया हूँ इसलिए मैं कहता हूँ गुरु
- 30:09ही सत्य होता है सिर्फ। शिष्य उस सत्य को विकृत कर देते
- 30:14हैं इसलिए दो धर्म बड़े शानदार तरीके अपनाये तो धर्म में एक जैन
- 30:24धर्म में 24 तीर्थंकर लगातार एक विद्या लगातार चलती रहे।
- 30:3024 लोग। तीर्थंकरों तक का और सिख दर्श
- 30:38गुरु लगातार आते हैं। वह बात बदली ही नहीं, तेरा पाना
- 30:44मीठा लग है। उन्होंने मौका ही नहीं दिया,
- 30:54लेकिन दर्शनों के बाद क्या हुआ? कर्नल राजेन्द्र सिंह क्या हुआ,
- 31:04इस्लामिक होबिया तो हो गया ये तो मैं मानता हूँ क्या इनको समाप्त
- 31:10कर देना चाहिए? फिर तो तुमने भी वही काम किया जो
- 31:21ये लोग मेमने के साथ कर रहे हैं। नहीं जो मैंने प्रथम में उदाहरण
- 31:28दिया था वो ही सर्वोच्च शानदार। तरीका है तुम ही बदल जाओ ना हिंदू
- 31:42बनेगा ना मुसलमान है, इंसान बनेगा ना हिंदू बनेगा, ना मुसलमान
- 32:03बनेगा, इंसान की औलाद है। इंसान बनेगा नहीं, वो बनेगा क्या?
- 32:16इंसान काफी नहीं है। परमात्मा, हिंदू, मुस्लिम, सिख,
- 32:20ईसाई, यहूदी, पारसी को जन्म देता है।
- 32:24परमात्मा पैदा करता है इंसान। क्या इंसान ही रहना काफी नहीं है?
- 32:32व्यक्ति भटक गया है, संसार में भी भटक गया है, परमात्मा के अंतर
- 32:39स्थल में भी भटक गया है और उसको दंड नहीं देना होगा।
- 32:44उसको प्यार से सही दिशा में लाना होगा और यही चेतना का विस्तार यही
- 32:58चेतना का विस्तार फैला। कि तुम हर झर्रे में उसका दर्शन
- 33:06कर लो और वह दर्शन तब तक न हो सकेगा जब तक आँखें नहीं होंगी।
- 33:12इसलिए मैं कहता हूँ हिंदू धर्म कभी नहीं पहुंचेगा क्योंकि दर्शन
- 33:16नहीं करता, कल्पना करता है और स्वपन कभी सत्य नहीं होते।
- 33:24तुम सपन तो रोज़ देखते हो कोई कोइंकिडेंटली सत्य हो जाता होगा,
- 33:35लेकिन सपन सत्य नहीं होती कल्पनाएँ भी सत्य नहीं होती तुमने
- 33:40कितनी कल्पनाएँ बना दी 33,00,00,000 देवता तुमने सर के
- 33:43ऊपर बैठा लिया। सभी धर्मों का यही हाल है।
- 33:51कर्नल राजेंद्र सिंह जी भटकी हुई चेतना को वापस मोरू उस स्थान पर
- 34:03लाना होगा। चेतना बिगड़ गई, कोई हिंदू हो
- 34:10गया, मुसलमान हो गया, कोई पारसी, सिख, ईसाई, यहूदी हो गया, ये
- 34:17तोड़नी हुके बंधन सिर्फ इस्लाम हो गया।
- 34:21इसको समाप्त नहीं करना होगा। सभी फोबिया को खत्म करना होगा।
- 34:28क्या इंसान काफी नहीं है? भगवान ने जो बनाया उसमें तुम्हारा
- 34:36कुछ हाथ है। क्या उसकी सृजना में तुमने कुछ
- 34:42हाथ बताया था? फिर उसने सब बनाया तो ढंग से ही
- 34:47बनाया होगा ना? तुम्हे अमेंडमेंट करने की जरूरत
- 34:51क्या है? तो मैंने कहा साइंस ने खोज लिया
- 34:56और तुम कहते हो कि साइंस ने बहुत आलीशान ज़िन्दगी बना दी, क्या खाक
- 35:01आलीशान बना दी? हर वक्त व्यक्ति जो मज़े से रात
- 35:11को सोता था, आज उसका सोना मुश्किल हो गया और उसे पता भी नहीं है की
- 35:17मुझे नींद क्यों नहीं आती क्योंकि अचेतन में बैठा है वो डर।
- 35:24वो चेतन में आता ही नहीं, वो बहुत गहरे चेतन में चला गया है।
- 35:28अब सुनो, आज मानवता को नींद क्यों नहीं आती?
- 35:34आज विश्व के पास 13,079 7980 ही समझलो।
- 35:4413,079 परमाणु हथियार हैं। विश्व के पास कुल नौ देशों के पास
- 35:54परमाणु हथियार हैं। कितने मैगटन हैं?
- 36:03अब सोचिए ज़रा जो नागासाकी और हिरोशिमा के ऊपर नुक्लेअर बम
- 36:11वगैरह उसकी पावर्टी जीरो पॉइंट? 015 मेगाटन 0.015 मेगाटन और यह है
- 36:30जो 13,079 परमाणु हथियार है। इनकी कुल पावर कितनी है?
- 36:3910,00,000 मेगा टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा छोड़ सकते हैं
- 36:4610,00,000 मेगा टन तैर गई आँखें आपकी आप तो फौज में रहे हो आपको
- 36:53तो खत्म हो गया इस चीज़ का। 10,00,000 मेगा टन टीएनटी और जो
- 37:04हिरोशिमा, नगा सकी पर उसको तो ट्राई कहते हैं एक खिलौना था वो
- 37:12तो वो गिराया गया था और पल भर में।
- 37:16लाखों लोग मर गए थे, पलक सब करते थे।
- 37:24वह एक मेगा टन का छीमां हिस्सा था।
- 37:320.015। एक मेगा टन भी नहीं था।
- 37:37वो एक मेगा टन का छह वा हिस्सा था और हमारे पास 10,00,000 मेगा टन
- 37:44टीएनटी के बराबर। तुम बात तो करते हो पेड़ लगाओ वो
- 37:51लगाओ ये करो वो करो पानी ठीक करो वो करो तो ठीक, लेकिन हम ऐसे
- 38:00बारूद के मायने पे बैठे हैं, कोई पता नहीं अगले क्षण।
- 38:09सब स्वाहा हो जाए, क्षण नहीं लगेगा।
- 38:15ये है असली कारण भय और किसी को पता नहीं मज़े की बात है जब मैं
- 38:25अपनी कोलेक्टिव अनकॉन्शस में गया। तो मुझे ये राज़ पता चला कि आदमी
- 38:31को नींद क्यों नहीं आती? मौत का 1 दिन मयन है नींद क्यों
- 38:36रात भर नहीं आती? मौत तो मरना तो है ही।
- 38:401 दिन और मृत्यु से ही तो डर मृत्यु का?
- 38:46खौफ दिखाने के लिए तो 10,00,000 मेगा टन टीएनटी के बराबर हमने ये
- 38:511000 बना लिया। आदमी की सोच बदल गई है, मैं कहता
- 39:02हूँ। न्यूक्लियर पावर किसके पास से
- 39:08ज्यादा है? मेरी दृष्टि में या परमात्मा की
- 39:14दृष्टि में वह पावरफुल नहीं है। पावरफुल कौन है?
- 39:22जिसकी कॉन्शसनेस इतनी ग्रो कर गई कि वह अपने पुत्र के कातिल को भी
- 39:29क्षमा कर सकता है। सजा मिलने के बाद ही शुड बी
- 39:34हैंग्ड टिलटे। यह क्या है?
- 39:43विस्तार है, फैलाव है चेतना का और उसका प्रभाव आता है क्षमा।
- 39:53इसीलिए हमारे संस्कृत में श्लोक आता है क्षमा वीरस्यभूषण।
- 39:59वीरों की परिभाषा या लक्षण क्या है?
- 40:03क्षमा कर देना हमने अर्थ बदल लिया है।
- 40:13हमने कहा जो क्षमा मांग लेता है वह वीर वीर सावरकर।
- 40:20जब के वीर वो जो क्षमा करते महावीर, वर्धमान, सही प्रभाषय जब
- 40:29शब्दों के मतलब बदल लिए जाते हैं तो अराजकताएं पैदा होती हैं।
- 40:41तो जब मैं अपनी कलेक्टिव अनकॉन्शियस माइंड में गया, पहले
- 40:50चेतना आता है समझ ले ज़रा फिर दोहरा लो।
- 40:55फिर अब चेतना आता है सब कॉन्शस, फिर अचेतना आता है, अनकॉन्शस फिर
- 41:01कलेक्टिव अनकॉन्शस आता है सामूहिक अचेतन फिर कलेक्टिव कॉन्शसनेस
- 41:10हमने कलेक्टिव कॉन्शसनेस में जाना है।
- 41:13यह है हमारा है अंतिम लक्ष्य और उससे बिल्कुल पहले आता है
- 41:20कोलेक्टिव अनकॉन्शियस तो जैसे ही मैं वहाँ पहुंचा तो मैंने देखा
- 41:26हूँ सारी धरती का अंत कहाँ पर है। ये धरती पर ही पागल बना है ग्रह
- 41:38तो मैंने और भी बड़े बड़े देखे है 1010 गुणों का, जिसके ऊपर कोई
- 41:44राजा नहीं होता। वहाँ पर एक सामूहिक नेतृत्व
- 41:55सिनेरिटी वाइज समझदार लोगों का एक पूरा का पूरा जमावड़ा मैंने एक
- 42:03ग्रह का अक्षर ही जिक्र किया है आपसे वहाँ पर।
- 42:0930 से लेकर 300 लोगों तक का एक व्यवस्थापक मंत्रालय कोई ऊंचा
- 42:22नहीं, कोई नहीं जा नहीं, वह सिर्फ देखता है कहाँ क्या गलत हुआ कहाँ
- 42:30क्या ठीक करना होगा बस? कौन सा चुनाव जीतना है ये नहीं
- 42:36अगला चुनाव जीतना है, उससे आगे अगला चुनाव जीतना है सामान्य 100
- 42:46बरस का पल की खबर में। यह तो तुम्हारे मनेजमेंट से ही
- 42:58गलत है। 100 बरस का सामान इकट्ठा कर लेते
- 43:02हो पल की खबर नहीं होती। यह है असली मूर्त।
- 43:12सत्य यह है कि मृत्यु कहती है, मेरा कोई पता नहीं है, मैं अगले
- 43:16कृष्ण आ जाऊं और तुम मृत्यु से हर वक़्त से लड़ते रहते हो।
- 43:21तुम कहते हो ऐसे कैसे आ जाओगे हम जीके दिखाएं के और हम अमर हो के
- 43:26दिखाएं तो अमर तो भाई अमीबा बहुत देर से मोटर ले।
- 43:35लेकिन उसने तो कोई विस्तार किया नहीं।
- 43:37कौन सी इसने उसका तो मैंने पाया सारी मानव जाति।
- 43:49ब्रेन को पता नहीं जैसे मैं बोल रहा हूँ अब तुम कब होगे और ये घर
- 43:54घर बात फैलानी चाहिए। घर घर तिरंगा यह छोड़ के घर घर यह
- 44:00बात फैलानी चाहिए। कि हम 13,079 बम के ऊपर बैठे हैं
- 44:06और जिनकी क्षमता 10,00,000 मेगा टन के बराबर है और एक लीटल तो आए
- 44:17पॉइंट 01.15। पॉइंट 015 मैगटन यह बम कराया गया
- 44:31हिरोशिमा नागासाकी पे पलक के झपकते हिला तो क्या होगा उस धरती
- 44:40का? यह है वास्तविक कारण जो हमारे
- 44:44अचेतनों में बैठा हुआ है। अब यह सामूहिक अचेतन में है।
- 44:51थोड़ी सी प्रभाषा में यहाँ साफ कर लें।
- 44:55अचेतन का मतलब सबके मन में गहरे से है।
- 44:58आखिरी छोर पर पड़ा है। लेकिन यह आखिरी छोर पर पड़ा हुआ
- 45:04सामूहिक विश्व को प्रभावित करता है।
- 45:09सब भीतर से कपे हुए हैं और पता नहीं है उनको कि आखिरकारण क्या है
- 45:16हमारे कंपनी का। हमारे कंपनी का कारण यह है हमारे
- 45:21अनकॉन्शियस के भीतर यह मृत्यु का भयप रहा है कि हम बारूद के ढेर के
- 45:29ऊपर बैठे हैं, इसीलिए मृत्यु जीसको सुबह फांसी होनी होती है।
- 45:38क्या वह रात को चेन भर सो पाता है?
- 45:46नहीं सो पाता जीसको दंड दे दिया के सुबह सुबह सूर्य निकलने से
- 45:53पहले तुम्हें फांसी दे दी जाएगी। क्या वह रात में घोड़े बेच के
- 45:58सोयेगा नहीं सो पायेगा? मानवता इस महाने पे खड़ी है
- 46:0910,00,000 मैगटन बारूद के ऊपर सारी मानवता बैठी है।
- 46:19और हर वक्त बैठी है और कोई व्यक्ति पीछे हटने को तैयार है।
- 46:24कोई देश पीछे हटने को तैयार नहीं है।
- 46:26वरुण नए नए देश कहते हैं कि तुम काहे रूप जमाए हो?
- 46:31इसीलिए कि तुम्हारे पास एटोमिक पावर है, इसीलिए मैं कहा करता
- 46:39हूँ। मैं आपको सूची दे देता हूँ मेरे
- 46:42पास सूची है कुछ 1000 व्यक्तियों के और आठ अरब लोग उनका गलत बात है
- 46:51विश्व में शांति से वो है कारण असली तुम्हारे कंपन के।
- 47:02एक ट्रंप सारी दुनिया को सोने नहीं देता।
- 47:05क्या है? उसके पास?
- 47:09एक पुत्र ने सारी दुनिया को सोने नहीं देते।
- 47:12क्या है उसके पास? इजरायल की शातिराना खोजें सारी
- 47:23दुनिया के लिए दुख का कारण पैदा करती हैं।
- 47:28वह खोज क्या जो आदमी की ज़िन्दगी को आनंद से ना करते खोज हमेशा इसे
- 47:34दिए ऋषियों को हमने प्रणाम किया। वैज्ञानिक को हम कभी प्रण करते
- 47:39हैं वैज्ञानिक की पूजा करते हैं, नहीं ऋषियों की पूजा क्योंकि
- 47:45उन्होंने शांति का अंतिम छोर खोज लिया और पूजने के युग से कृष्ण
- 47:50पूजने के योग्य हैं। राम पूजने के युग हैं।
- 48:00लेकिन क्या ओपन हाइमर भी पूछने का शौक है?
- 48:05ओपेन हाइमर जो बम करवा देते हैं। हिरोशिमा के ऊपर नागासाकी को
- 48:15जापान में और क्षण भर में सामूहिक विनाश होता है और ओपेन हैमर स्वयं
- 48:24बोलता है ओह मैं कॉल हूँ। भगवान शंकर का वो शक्ति आता है
- 48:35मैं काल हूँ मैं शाश्वत काल हूँ क्या तुम इस व्यक्तियों की कभी
- 48:42किसी ने पूजा की, इस व्यक्ति की नहीं?
- 48:46जो मृत्यु का भेद खाता है उसको कभी पूजा नहीं जाता।
- 48:50हिटलर की कोई पूजा करता मिलेगा, नहीं मिलेगा।
- 48:57जिसने इंसानियत को खंप का हट दी, भेद खाया, जिसने भेद खाकर राज़
- 49:08किया वह भेद। तुम्हारे दिमागों पर तो कर लेगा
- 49:14राज़ लेकिन तुम्हारे हर्जों पे नहीं करेगा राज़ असली वो होता है
- 49:22जीस कृष्ण ने तुम्हारे हर्जों पे राज़ किया उसके आनंद की वासली।
- 49:29आज भी प्रत्येक हृदय में सनातन के प्रत्येक हृदय में गूंज रही है
- 49:35उसकी मदर मदर आवाज़ तो कृष्ण ने हमने हमें यही सिखाया कि राज़
- 49:46करना है तो हर्जों पे करो। नाचो चेतना के संग राधा के संग और
- 49:54हमने तो राधे करना शुरू किया कृष्ण कहते हैं चेतना के संग नाचो
- 50:04इन्क्रीज़ युअर कॉन्शसनेस एंड। एंड एन्जॉय तुम्हारी चेतना की
- 50:12प्रगाढ़ता को भराओ उच्चतम सीमा तक ले जाओ और नाचो मेरा नाचती है
- 50:21चैतन्य नाचते हैं क्यों नाचते हैं?
- 50:27चैतन्य के शिखर तक पहुँच चुका है। हमारे ऋषियों ने हमें यही सिखाया
- 50:39इसलिए उनकी पूजा होती है आज। वैज्ञानिक की कभी किसी ने पूजा की
- 50:48अल्बर्ट इंस्टिन सरायज़क न्यूटन रदरफोर किसने पूजा की नहीं वो
- 51:04तुम्हारी सिर्फ दिमाग के ऊपर छा जाता।
- 51:09उनका राज़ है तुम्हारे दिमागों पे।
- 51:11इसी तरह तानाशाहों का राज़ होता है तो तुम्हारे दिमागों पे लेकिन
- 51:16कृष्ण बात दूसरी करते हैं। वो कहते दिमागों पे राज़ हो कोई
- 51:20भी कर सकता है वैद का के तो राज़ कोई भी कर सकता है, जिसकी लाठी
- 51:24उसी की भैस। बा है छोड़ा है जात हो निर्बल जान
- 51:31के मो। ह्रदय से हो जाओ तो मर्द का हूँ
- 51:36मैं तुम मेरे हृदय से जा के दिखाओ सूर्यदास कहते हैं।
- 51:43बाल कृष्ण को बाह छुडाए जात हो। मेरे पहले जान के अम्मू मैं अंदा
- 51:51हूँ, मैं तुम्हें पकड़ नहीं पाती और तुम बाह छुड़ा के चले जाते हो
- 51:56हृदय से जो जाओ तो मर्द को हो मैं तो।
- 52:02मेरे हृदय से निकल के दिखाब था, राज़ होता है और वही लोग श्रद्धा
- 52:12के लिए राज़ अमर हो जाते हैं। राज़ करते हैं हृदयों पे जो प्रेम
- 52:18को बांटते हैं। दिमागों पर राज़ करने वाले आएं
- 52:24चले गए। चंगेज चले गए हिटलर मोसुलनी
- 52:28स्टालिन चले गए लेकिन उन्होंने दिमागों पर राज़ किया जब तक वो
- 52:35जिए, लोगों के दिमागों पर राज़ किया राज़ का मतलब।
- 52:40भय पैदा किया। दो तरह के राज़ हो सकते हैं एक
- 52:49कृष्ण दिल पे राज़ करते हैं वो श्रद्धा के लिए अमर हो जाएंगे, वो
- 52:56तुम्हारे घर जाकर राज़ करेंगे। यह शाश्वत है।
- 53:01यह कभी मरता नहीं है। यह है सनातन जीस, सनातन की तुम
- 53:06बात करते हो कि सनातन का अपमान नहीं सहेंगे ह्रदय पर आज कल
- 53:14व्यक्ति की चेतना का अंतः इन 10,00,000।
- 53:21मेगा टन बारूद के ऊपर बैठा है। यह कंपकपाहट ही तुम्हें सोने नहीं
- 53:30देती सुवानी चांदनी रातें। हमें सोने नहीं देते सुहाने
- 53:49चाँदनी राते हमें सोने। नहीं देची तुम्हारे तुम्हारे
- 54:09प्यार की बातें हमें। नहीं देती सोहानी चांदे निराते
- 54:27हमें सोने नहीं दे।