Latest / Baba ji Vijay Vats / 2 Sep 25 - कर्म का Processing Period और धैर्य का रहस्य! काम पर विजय कैसे पायें?
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- 0:08प्रभाकर सिंह परमात्मा के घर देर है अंधेर नहीं है बाबा अगर अंधेर
- 0:26नहीं है। तो फिर देर क्यों है?
- 0:36हम अक्सर ये शब्द कहते हैं। जस्टिस डे लेड, जस्टिस डे नाइट
- 0:50देर करना न्याय नहीं होता, अन्याय होता है
- 1:09तुम कहते हो कि। बीज फेंके और कोपलें उग जाएं,
- 1:23ततिक्षण पेड़ बन जाएं। ततक क्षण फल लग जाए और ततक क्षण
- 1:34मुख्यालय। प्रश्न का यही मतलब हुआ।
- 1:49देर का मतलब अधेड़ नहीं होता है। प्रत्येक काम की प्रोसेसिंग
- 2:00पीरियड होती है। हम आज गेहूं देते हैं।
- 2:08धान बहुत देते हैं। जेरी आम बहुत देते हैं, आज ही तो
- 2:17फल नहीं लगता, आज तो बोया है धीरे।
- 2:28धीरे अरे मन धीरे सब कुछ होए, माली सींचे सो घड़ा ऋतु आये फल
- 2:38होए क्या तुम यही चाहते हो? दूसरा सवाल भी इसी तरह पे है बाबा
- 2:51क्या परमात्मा ऐसा विधान नहीं बना सकता के इधर कर्म कर और उधर उसको
- 2:59तुरंत फल मिल जाए करने को वो सब कुछ कर सकता है?
- 3:11लेकिन उसका अर्थ क्या हो जाता है? अगर तुम प्रोसेसिंग खा गए, फिर
- 3:26कर्मों का अर्थ क्या हुआ? हर चीज़ सुनियोजित ढंग से होती है
- 3:40और उसमें प्रोसेसिंग अनिवार्य है। जिसने कहा जस्टिस डिलेड जस्टिस डे
- 3:48नाइट। उसका मतलब यह नहीं था कि आज ही
- 3:51तुम। मुकदमा फाइल करो और आज ही अभी
- 3:56फैसला हो जाएगा। कुछ मसले ऐसे हो सकते हैं कुछ
- 4:07मसले देरी लग आएँगे। कोई फसल चार महीने में हो जाती है
- 4:14गेहूं की। और कोई फसल कहावत है कि दादा बीजे
- 4:24पोता खाये आम वो लगाके जाना होता है अपनी पृष्ठों के लिए।
- 4:40तुमने पूछा कि अगर अंधेर नहीं है तो क्या देर अंधेर नहीं होता, न
- 4:54प्रोसेसिंग इज़ नॉट डिलेड। प्रोसेसिंग का वक्त डेयरी का वक्त
- 5:04नहीं होता, प्रोसेसिंग का वक्त प्रक्रिया के गुज़रने का वक्त
- 5:10होता है और वो प्रक्रिया लाजिम है।
- 5:19तुम चोट लग गई अभी पट्टी करके आये, अभी उतार दोगे तुमने ऑपरेट
- 5:27किया, अभी स्ट्रेचर से बाहर है और अभी भागने लग जाओगे।
- 5:38तुम्हारी सोच तो कुछ इस तरह की ही कहती है क्या बाबा ऐसा नहीं हो
- 5:46सकता? अरे भाई उसके सिस्टम में क्या
- 5:50नहीं हो सकता? लेकिन तुम ज्यादा स्यानी बनने की
- 5:56चेष्टा न करो। सैयद स्याण अपना लक हो तो एक कना
- 6:02चल लेना इसलिए तुम मुँह के बल गिरते हो, आनंद की छाया तक भी
- 6:08तुम्हें छू नहीं पाते तरसते फिरते हो तुम।
- 6:21इस तरह की खोपड़ियां लेके फिरना तो दुख भोगोगे वे सिर पैर की बात
- 6:33वे सिर, पैर के प्रश्न। अभी मैंने बीज बो दिया।
- 6:45प्रत्येक बीज का वक्त होता है, कोई जल्दी फल सकता है, कोई देरी
- 6:56से फल सकता है, फलता है कर्म का बीज ऐसा बीज नहीं होता जो फले न
- 7:05हो। बिल्कुल उपजाऊ होता है फर्टाइल
- 7:10फलेगा अवश्य। इसलिए स्नैप ने कहा आज नहीं तो
- 7:20अगले जन्म में फ़ल जाएगा बड़ा जहरे है उसमें।
- 7:24और धैर्य देखना हो तो बीच में देखना बीज से एक शिक्षा ले लेना
- 7:32धैर्य बीज गिरेगा फूटेगा दबेगा धरती में?
- 7:41धरती के गर्भ में जाएगा, पानी से सींचेगा ऊपर की खोल हल्की होगी
- 7:48फटेगी भीतर से अंकुरित फलित होगा और हल्का सा नन्हा सा पौधा
- 7:57निकलेगा। वह फलेगा और पौधा बाहर आएगा।
- 8:07धीरे धीरे धीरे धीरे छोटा वृक्ष बन जायेगा, बड़ा वृक्ष बनेगा, फिर
- 8:15फूल लगेंगे। ये प्रक्रियाएं हैं ऑल आर
- 8:21प्रोसेसिंग और प्रोसेसिंग में जो वक्त लगता है वह लगता है।
- 8:33ऐसा ही जस्टिस में भी है जस्टिस का डिलेड होना।
- 8:41अनजस्टिस जस्टिस का डिलेड होना प्रक्रिया है, प्रोसेसिंग है, आज
- 8:50जाओगे, मुकदमा दायर करोगे लिखोगे पेश करोगे?
- 8:55जब टर्न आएगी तो मैं अकेले तो बोलेंगे।
- 9:01यहाँ बड़े बेवकूफ हैं जो अपनी इमेज को बचाने के लिए न जाने क्या
- 9:12कुछ लगा देते हैं। धीरे धीरे न्याय होगा, न्यायिक
- 9:28प्रक्रिया में से गुजरना होगा। ये भी खूब रही।
- 9:40आज ऐसा ज़माना आ गया की अगर कोई पाप करे तो उसकी छानबीन मत करो।
- 9:51कुछ हवाएं, कुछ फसाएं ऐसी बदली के ज़माना बदल गया।
- 10:08वो भी वक्त था जब कोई आह भरता था तो उसकी भी तब्दीश होती थी।
- 10:21इसने आह क्यों बहे? और आज ज़माना ऐसा आ गया।
- 10:28कोई कोई कतल भी कर देता है तो मीडिया उसे दबा लेती है।
- 10:37हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदन नाम।
- 10:43वो कतल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता है।
- 10:56ईश्वर की अगर देर है, उस देर को देर नहीं कहा जा सकता।
- 11:06दैट डिले इस ओनली वे ऑफ़ प्रोसेसिंग, वह सिर्फ प्रक्रिया
- 11:14की देरी है, वह वक्त तो लगेगा। हमें कोई लाभ हो जाता है।
- 11:24पट्टी भी करते हैं, दवा भी कहते हैं, भी लेते हैं।
- 11:28नल जैसे भी लेते हैं, सब करते हैं, धीरेधीरे खुराक भी खाते हैं,
- 11:36धीरेधीरे वो घाव भर जाता है और वैसा ही हो जाता है।
- 11:39और देखिये वैसा ही नहीं होता। तुम भूल जाती।
- 11:45वह घाव अपनी चोट का निशान छोड़ ही जाता है।
- 11:51बहुत से घाव ऐसे होते हैं, बहुत सी चोटें ऐसी होती हैं जिनके
- 11:55निशान तुम ताज़ ज़िन्दगी देख सकते हो।
- 11:57मरते दम तक। घाव भर गया।
- 12:03भीतर से बाहर से खरुंड आ गया। वो खरुंड भी हट गया।
- 12:11अब उस घाव के ऊपर हाथ लगाई और दर्द भी नहीं होता।
- 12:15सब ठीक लेकिन वो घाव का निशान छोड़ गया।
- 12:24डेरी प्रोसेसिंग की है और प्रोसेसिंग की देरी होती ही है,
- 12:37उसको देरी कहना उचित न होगा। वक्त तो लगेगा ही लगेगा और जो
- 12:50तुमने ये सवाल किया मनोज ऐसा नहीं हो सकता।
- 12:56अभी व्यक्ति पाप करें, अभी दंड मिल जाए, अभी ही मिलता है दंडा
- 13:01बीज तो पड़ गया और बीज जब पड़ गया डैम प्रोसेसिंग स्टार्टेड।
- 13:13उसी वक्त प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
- 13:16आपको पता है हमारे भीतर क्षेत्र मन में कितने बीज फटे हुए हैं,
- 13:22कितने बीज अंडर प्रोसेसिंग गुजर रहे हैं, प्रक्रिया से गुजर रहे
- 13:26हैं और कितने बीज कहाँ तक गल गए हैं, फल गए हैं।
- 13:33कितने बीज कहाँ पहुँच गए हैं? अलग अलग अवस्थाएं हैं सभी बीजों
- 13:39की जैसे जैसे हमने कर्म किये और जैसे जैसे कर्मों के फलों की
- 13:45व्यवस्था है। तुम्हारे अचेतन में आज बहुत कुछ
- 13:53चल रहा है तुमने देखा नहीं इसलिए तुम अनभिज्ञ हो।
- 14:07वर्ण प्रोसेसिंग तो उसी वक़्त शुरू हो जाती है।
- 14:10इधर तुमने कर्म किया, उधर प्रोसेसिंग शुरू हो गई।
- 14:22प्रत्येक कर्म यक्सांग समय नहीं मांगता, आग में हाथ डालोगे?
- 14:28अभी जल जाओगे। पानी में हाथ डालोगे?
- 14:35अभी निकलोगे हाथ डाले ही रखोगे, डाले ही रखोगे, डाले ही रखोगे तो
- 14:42पानी गला देगा। बहुत वक्त लगेगा हर चीज़ की
- 14:50प्रोसेसिंग की। देरी है वो देरी समय की
- 14:58प्रोसेसिंग की है परमात्मा के घर के।
- 15:10तुमने पूछा कि क्या ये देरी अंधेर नहीं है?
- 15:16नहीं जो वक्त लगता है वह अंधेर कहाँ होता है, वह जरूरी भी है।
- 15:29अगर जज फाइल न देखेगा पड़ेगा नहीं एक एक शब्द को छानबीन नहीं करेगा,
- 15:38खुद के दिमाग से सोचेगा नहीं, गवाहों को न बुलाएगा।
- 15:49सारी औपचारिकताएं जरूरी जो हैं वो पूरी न करेगा तो फैसला कैसे
- 15:56सुनाएगा? उसके घर देर है अंधेर नहीं जिसने
- 16:06यह बनाया। बिल्कुल ठीक बनाया, ज़रा सी गलती
- 16:18नहीं है इसमें उसके घर अंधेर नहीं है, बस ये देख लो देर की कोई बात
- 16:28नहीं है, न्याय मिलना चाहिए। और न्याय मिलता है।
- 16:37वो लोग कान खोल के सुन लें जो पाप और पुण्य इन दोनों में संलग्न
- 16:48हैं। मत सोचें कि हमें इसका दंड नहीं
- 16:58मिलेगा या पुण्य करने वाले मत सोचें कि हमें इसका पुरस्कार नहीं
- 17:02मिलेगा। पुरस्कार भी मिलेगा, दंड भी
- 17:07मिलेगा। डेरी स्वाभाविक है डेरी बीज को
- 17:17वृक्ष बनने में और फल लगने में जो होती है उस वक्त की प्रक्रिया का
- 17:23नाम है देरी। अन्यथा देर कुछ नहीं होते।
- 17:28एकक्षण भी ज्यादा नहीं लगता। कोर्स से देखा जाए तो आदमी जन्मा
- 17:41उसी दिन मरा पक्का। जीस दिन जन्मा, लिख लेना जगह भर
- 17:53क्या बस 1 घंटे के बाद एक घंटा मर जायेगा 1 दिन के बाद 1 दिन मर
- 18:00जायेगा और साल के बाद साल और जब वक़्त पूरा हो जायेगा तो सारा मर
- 18:08जायेगा। मरने के बाद वो ही खाक हो जाता है
- 18:17जहाँ से शुरू हुआ था नहीं पुत्र एस एन उसके घर देर है, तो कारण
- 18:31से। अंधेर बिल्कुल नहीं, अंधेर तो भूल
- 18:37ही जाओ। डेरी लगना स्वाभाविक देरी लगेंगी
- 18:46तो न्याय भी मिलेगा। और न्याय मिलने तक देरी होना
- 18:52स्वाभाविक है, लेकिन तुम धैर्य बनाए रखना तुम धैर्य खो देते हो,
- 19:04धैर्य को खोना नहीं वक्त लगता है। फैसला हो जन्याय वक्त रखता है आज
- 19:30मनुष्य के दिमाग खराब करती है। कहलो मार्गदर्शकों के द्वारा या
- 19:39कहलो उसकी स्वयं की सोच के द्वारा कुछ भी कह लो, राज़ करना है राज़
- 19:57और इन्हें पता नहीं के राज़ होता कैसे है?
- 20:02टू कमांड हुकम करने को यह राज़ कहते, हुकम करना राज़ करना नहीं
- 20:12होता। आज राज़ करने की परिभाषाएं बदलती
- 20:19गईं। और उससे किसी का नुकसान नहीं है।
- 20:26हमारा ही नुकसान है। अगर हमें राज़ करने की सही भाषा आ
- 20:32जाए तो हम सच में राज़ करने लगे। अभी तो नकली नकली फूल है।
- 20:40अभी तो वो फूल हैं जो हमारी फैक्टरी में बने सुगंध नहीं देते
- 20:46हैं और नकली हैं। धरती का गर्व फाड़ के नहीं आया
- 20:54पौधा। जो कर गुलाब बनेगा।
- 21:00ये फैक्टरी की निर्मित है और यह कभी सुगंध नहीं देती।
- 21:09यह तुम्हारी ही बनाई हुई है और आनंद वो चीज़ देती है जो प्रकृति
- 21:16की बनाई हुई है। जो ईश्वर की बनाई हुई हो।
- 21:21तुम्हारे द्वारा बनाई गई चीजें बहुदा दुखद व्यक्ति सुखद चीजों का
- 21:31निर्माण कर नहीं सकता। असंभव है उसके लिए।
- 21:37मुश्किल है परमात्मा के लिए मुश्किल है।
- 21:46तुम सोचते हो तो हमारे मार्गदर्शक सोचते हैं कि अगर इस राह पे चलोगे
- 21:56तो राज़ करोगे। राज़ करने की तुम्हें परिभाषा तक
- 22:03नहीं पता, राज़ करना होता क्या है?
- 22:12सूक्ष्म से सवाल है कि राज़ करना होता क्या है?
- 22:16बाबा? तुम दूसरों पे राज़ करना चाहते
- 22:27हो, डिक्टेटरशिप उससे कुछ मिलता नहीं सवाय तनाव के बेचैनी के
- 22:39रातों की नींद खराब हो जाती है दिन का चैन।
- 22:45छीन लिया जाता है। राज़ वास्तव में क्या है जो
- 22:59तुम्हें मज़ा दे। जो तुम्हें उस आलम में ले जाए
- 23:08जहाँ शांति का आभोश है। चारों तरफ़ शांति ही शांति।
- 23:22अभी तो तुम अशांत हो अभी तो चारों तरफ से गर्म लोगों के थपेड़े पड़
- 23:33रहे हैं अभी तुमने संसार ने बड़ा कष्ट दिया है।
- 23:53अभी अभी तुम जीने निकले थे और अभी अभी मृत्यु के थपेड़ों ने तुम्हें
- 24:04ढंक लिया। आज ही हमने बदले हैं कपड़े आज ही
- 24:18हम नहाए हुए हैं। आज ही हमने बदले हैं कपड़े।
- 24:35आज ही। हम न हाय हुए हैं।
- 24:43जीस दिन जन्म होता है। उसी पल से मृत को घृणा से रूखा
- 24:48देते हैं। फिर तुम्हें ठीकठीक से ये भी नहीं
- 24:54पता होता कि तुम्हें जन्म मिला कि।
- 25:05कौन है जो तुम्हें जन्मा गया? और जब तुम पूछते हो कि परमात्मा
- 25:12ने ये दुनिया क्यों बनाई या जिसने भी बनाई, क्यों बनाई?
- 25:18तो मैं समझ जाता हूँ कि तुम सुखी नहीं।
- 25:24ये ज़िन्दगी इतनी मजेदार है, इतनी रस और गरिमा से परिपूर्ण है कि
- 25:34जिसका व्याख्यान नहीं हो सकता है, लेकिन भारत ये है कि तुमने इस रस
- 25:40को पिया नहीं। जब से ज़िन्दगी मिली है, जब से
- 25:56तुमने होश संभालना तब से तुम्हें जन्म देने वाला हूँ तब को पता
- 26:07नहीं कि ये सब क्या है माजरा? ये धंधा क्या है?
- 26:14और बड़े बड़े संताये बड़े बड़े फकीराये तथाकथित फकीर भी आये
- 26:24जिन्हें बुद्धि के बल पर जिन्होंने थोड़े थोड़े अनुभवों के
- 26:28बल पर। आपको कुछ नियम पकड़ा दिया है और
- 26:37तुम उसके पीछे चले, तुम जैनी हो गए तुम बौद्दी हो गए, तुम हिंदू
- 26:43हो गए तुम से के साई हो गए पादरी हो गई हो गए पता नहीं है तुम्हें।
- 26:52ये सब है क्या? बस इस पता न होने का दुख तुम झेल
- 27:02रहे हो। अगर पता होता तो दुख न झेलते हैं।
- 27:13परम सुख से भरी हुई है। जय जंतके काश तुम्हें इसका पता चल
- 27:20जाए, तुम बड़े बड़े जज बन जाते हो।
- 27:31हाईकोर्ट के सुप्रीम कोर्ट के बड़े बड़े ताकतवर नेता होते हो।
- 27:38बड़ी बड़ी गद्दी पर गद्दी निस्सी ही हो और तुम कहते हो हम राज़ कर
- 27:43रहे है, नहीं तुम गुलाम हो, चौंकना मत, तुम गुलाम हो।
- 27:59राज़ करना जानते हैं महावीर राज़ करना जानते हैं कृष्ण राज़ करना
- 28:05जानते हैं कबीर और तुम उनके हाथों में झीनी झीनी सी चदरगिया बने हुए
- 28:13पाओगे और तुम्हें समझ नहीं आएगा। राज़ कहते कैसे कबीर का अंत से
- 28:22जानता है राज़ होता क्या है ना अनक का अंतर जानता है अंत से
- 28:29जानता है कि राज़ होता क्या है? और उनका दिल करता है कि जल्दी से
- 28:38बता दूँ। सभी को तो भाग पड़ते हैं।
- 28:44बुध बताने के लिए भाग पड़ते हैं। नानक।
- 28:52बताने के लिए राज़ कैसे होगा? लेकिन तुम कहाँ सुनते हो?
- 28:59उन्हें तुम सिर्फ उनकी पूजा शुरू कर देते हो।
- 29:04महिमा मंडन का गान करना शुरू कर देते हो, तुम्हें पता नहीं होता
- 29:08वो कह के क्या गए हैं? उन्होंने तुम्हें राज़ करने का
- 29:13ढंग बताया था और उनकी खुद की जिंदगानी को अगर बोर से देखोगे तो
- 29:24उन लक्षणों में राज़ करना मिलेगा। और मुस्कुराता हुआ अंतः वो गीत
- 29:35गाता हुआ अंतः वो नाचती हुई, मीरा की पायल वो गाता हुआ नानक का कंठ
- 29:49वो अकंठ डूबी हुई। कबीर की सुरती तुम देख नहीं पाते,
- 30:02यही राज़ है लेकिन कोई क्या करे अगर तुम गलत राह पे चल रहे है?
- 30:16तुम्हारी बुद्धि तुम्हें धोखा दे गई और तुम्हारे मार्गदर्शक
- 30:20तुम्हें धोखा दे गया राज़ करने की परिभाषा जाननी हो तो महावीर से
- 30:29जाना। महावीर को खिताब दे दिया गया।
- 30:39महावीर को ज्यादा बलशाली नहीं, शरीर इतना मसल मैन नहीं है, वो
- 30:51इतने हिस्ट पुष्ठ नहीं हैं वो। बा मुश्किल एक महीने में एक बार
- 30:57खाते हैं। समझ सकते हो कितने ताकतवर होंगे?
- 31:06एक एक खिताब मिला। महावीर का कब मिला?
- 31:15तुम सिर्फ नारा लगाना जानते हो जिंदाबाद मुर्दाबाद, महावीर का
- 31:22नाम तो वर्धमान था जानकारों ने, समझदारों ने।
- 31:33उनको खिताब दे दिया। महावीर, महावीर वो क्यों?
- 31:40क्योंकि वो राज़ करते हैं और जीस किसने राज़ करना सीख लिया वो
- 31:49महावीर हो गया। तो आओ हम सीख रहे हैं आज थोड़ा
- 31:56वक़्त बाकी है, राज़ करना होता क्या है?
- 32:04किसपे राज़ करना होता है किसी पर राज़ नहीं करना होता।
- 32:13राज़ करो, इन्द्रियों पे तुम इन्द्र हो जाओ, जो इन्द्रियों पे
- 32:23राज़ करे वह इन्द्र और जो इन्द्र हो गया वह सुरका में लिखा हो गया।
- 32:29फिर उसके प्रभाव क्षेत्र में। उसके राज़ क्षेत्र में कल्पवृक्ष
- 32:35भी आएगा, जो मांगेगा वह मिल जाएगा, अभाव नहीं रहेगा, सब
- 32:43मिलेगा। उसे पीने को शराब मिलेंगे।
- 32:47नृत्यिंगणाएं नाचिंग। ये शस्त्र बनाये आगमन है, इसलिए
- 32:54नृत्यंगणाय नाचती हैं, चाहते तो स्त्री में स्त्री मन भी चाहता
- 33:02है, के पुरुष नाचें, लेकिन क्या करें?
- 33:11स्त्री ने कोई शास्त्र निर्मित किया नहीं, सभी शास्त्र निर्मित
- 33:18किए पुरुष मान्यता इसलिए आपको स्वर्ग में अप्सराएं मिलेंगी
- 33:27बलिस्टर पुरुष नहीं मिलेंगे। हेवी वेइट लिफ्टर नहीं मिलेंगे
- 33:33स्ट्रॉन्केस्ट मैन ऑफ दी वर्ल्ड नहीं मिलेंगे सुंदर खूबसूरत सूर्य
- 33:40नहीं मिलेंगे वहाँ नहीं मिलेगा अब तो कोई नकुल।
- 33:50वह मिलेंगे आपको रम्भा मेनका और वस्य यह नृत्य कर्ता मिलेंगे और
- 33:58अधनंगी हरत में और बस तुम्हारा भीतर का मन?
- 34:13इस अर्ध नंगी को उखाड़ गिरना चाहता है ये कल होली का त्यौहार
- 34:21था मेरे पास कुछ ममुक्षु आ गए हैं कल दीक्षा के लिए बुलाये थे।
- 34:36बा भाई होली का मतलब क्या होता है इनका कैथोसेस सारे साल तुम हो
- 34:47हल्ला नहीं मचा सकते और सनातन्य अद्भुत परंपरा खोजें।
- 34:54तुम सड़ते रहते हो? भीतर भाभी चाहती है देवर को कैसे
- 35:02पिटूं खेलूं उसके साथ? लेकिन लोक लोकलाज है समाज।
- 35:12भाभी कैसे आगोश में ले ले? देवर को चाहती हैं तो सनातन बड़ा
- 35:20समझदार है और देवर भी चाहता है कैसे लिपटु भाभी के साथ ऐसा मत
- 35:29करो। कौन देवर नहीं छोड़ता अभी कवारा
- 35:39है, यह तुम्हारे मन की हालत है। और तुम्हारे मन में न जाने क्या
- 35:50क्या दबा हुआ है। मैंने समुद्र मंथन की चर्चा की।
- 35:54अभी शुरू है तो समुद्र मंथन कहता है सबसे पहले तो भय आएगा भय किसी
- 36:05भी चीज़ को, किसी भी चीज़। के छिन जाने का भय भय होता है छिन
- 36:12ना जाए ये शरीर ना छीन जाए ये माल जो मैंने कमाया है ये ना छीन जाए
- 36:18गद्दी ना छीन जाए मुझे जो शोहरत मिली वो कोई दूसरा ना छीन जाए।
- 36:30मेरे महल अटारिया मेरे सैर करने के जहाज घूमने फिरने की गाड़ियां
- 36:42कोई दूसरा न छीन ले, ये डर बह आएगा।
- 36:47सभी प्रकार के भय आएँगे और सभी प्रकार के इतने भय हैं कि मैं
- 36:54तुम्हें गिन आ नहीं सकता। बस छिन जाने का भय तो कुछ भी होता
- 37:01है। और सारा साल तुम निकाल नहीं सकते
- 37:10इनको समाज के मापदंड ऐसे हैं बड़े कठिन सारा साल तुम दबाते हो, दबे
- 37:25रहो 1 दिन आएगा ऐसा। तो सनातन बड़ा समझदार उसने 1 दिन
- 37:32खुला दे दिया। जाओ आज निकाल लो यह होली पे कैथर
- 37:38से होता है सर मैं राम जी का रोल करता था।
- 37:42मुझे पता था। सबसे ज्यादा रस स्वरूप ना खनक
- 37:47होगा क्योंकि उस दिन होता है कैथर से स्त्रियों का भी बरसों का है
- 37:54कुछ गर्म गर्म मसाला तैयार किया जाता है एक्ट्रेस के द्वारा और हम
- 37:58कहते हैं थोड़ा तड़का और लगाते हैं।
- 38:05तो सर केथर से सो जाता है एक नाइट में फिर रोते चलाते रहो, राम रोता
- 38:12रहता है, चलाता रहता है, रावण ठहाके मारता रहता है, खूब अंहकार
- 38:22निकलते। लेकिन एक नाइट होती है का नाइट वो
- 38:29मुझे पता है। उस दिन कैथल सेस होते हैं।
- 38:32सबसे ज्यादा उस दिन होता है वो नाइट अलबेली होती है, सारा
- 38:39स्टीडियम भरा होता है। सारी सीढ़ियाँ भरी होती है और ऊपर
- 38:43तक लोग छत के ऊपर बैठे होते हैं। ये क्या है?
- 38:52समाज के दरिंद के समाज ने मौका नहीं दिया, समाज ने दबाया।
- 39:02और राज़ करना तुम्हें पता नहीं फंस गए कसूर कैथोर्सेस करने नहीं
- 39:10देता समाज राज़ करना तुम्हें नहीं आता अब असली है।
- 39:17तो चलो राज़ करना सीखा। दो इंद्रियों पर राज़ करना है,
- 39:26दूसरों को हुकुम करके राज़ नहीं करना है।
- 39:28डिक्टेटर नहीं बनना है, उससे उसका कोई फायदा नहीं है, वो तो तुम पाप
- 39:33करोगे। दुश्मनों की लाशियां बिछाओगे
- 39:39प्रेमों को आसमान छुआओगे लेकिन तुम्हारा छुआना कुछ नहीं करेगा।
- 39:48ये तिस ना डरना वहीं तबाद ना पूछेंगे।
- 39:55चंगा नाव रखई के जस कीरत जगले जे तिस नजर ना आवै, त बात न पूछे क
- 40:06अगर उसकी नजर में तुम्हारी खुशहाली नहीं लिखी।
- 40:11वही सृजन करता है तो तुम उसकी चाहत के बिना अपना स्वर्ग भी
- 40:21निर्मित कर लो तो वह दुख ही देगा। तुम्हारे द्वारा जो निर्मित होता
- 40:28है वह नरक ही होता है। और उसके द्वारा जो निर्मित है वह
- 40:33स्वर्ग ही होता है। इसलिए बाबा तुमसे कहते हैं उसकी
- 40:37रजा में चल उसकी रजा में राजी रहना, जो जो समझदार थे और पलटू
- 40:43हुए और मेरे तो यही हरजी कर वही जो तेरी मर्ज है।
- 40:54राज़ करना चाहिए इंद्रियों पे राज़ करो इंद्रियों पे राज़ करने
- 41:03का सलेका न आया दुनिया पे राज़ करने का बहाना।
- 41:09बनाया। तुम अपने क्रोध तक को नहीं जीत
- 41:12पाते और राज़ करने चल पड़ते हो। तुम जिसे राज़ कहते हो, वह तो दुख
- 41:22का कारण है, आज नहीं कल पता चल जायेगा।
- 41:28यह तो आग थी, जिससे हमने खलवाड़ किया।
- 41:33यह तो आग थी, यह कुर्सी जो न्यायाधीश की कुर्सी थी उस वक्त
- 41:40नहीं पता होता। बाद में जब परिणाम भुगतता है,
- 41:44आदमी तो पता चलता है। मैंने कितने गलत कहे, रातों जागा,
- 41:51कॉम्पिटिशन लड़े, इतनी जखाई मार्ग में चोटियाँ बांध कर रात को पढ़ता
- 42:01था लेकिन उस महामेह को? मेरा इस तरह राज़ करना पसंद न है।
- 42:12उसने मुझे सही राज़ करने का तरीका सीखा दिया।
- 42:19ये तिस नजर न आवे, तब बात न पूछेंगे, उसकी नजर में आ जाओ।
- 42:27इन्द्रियां विकार खाती हैं। तुम कामवासना से ग्रसित हो जाते
- 42:34हो करो तुम्हें तुम तुम्हारी मुठियाँ बिछने लग जाती हैं।
- 42:38दाते, पीसने लग जाते हो तुम कान लाल हो जाते हैं तुम्हारे।
- 42:44ओट फट फटाने लगते हैं और तुम क्रोध के भाव में बह जाते हो।
- 42:53एक पल का गुस्सा फिर तुम्हें पूरी ज़िन्दगी सीखो के पीछे।
- 43:03लोहे की सीखो के पीछे बतानी पड़ती।
- 43:07पूछो इन तथाकथित संतों से जो गुरु बनने के इतने शौकीन थे।
- 43:16बेड़ों की भीड़ तो कहीं इकट्ठे कर लो।
- 43:23अपने भीतर की भीड़ को नियंत्रण करना बड़ा मुश्किल है।
- 43:28इसलिए महावीर महावीर कहलाये उन्होंने इन्द्रियों के बेकारों
- 43:33के ऊपर राज़ किया। काम, क्रोध, लोभ आज के जैन
- 43:43मुनियों की तरफ वो नहीं थे कि पैसों को हाथ नहीं लगाएंगे नहीं,
- 43:51भीतर से लोभ न हो तो बाहर साम्राज्य में चाहे हीरे बिखरे
- 43:56पड़े। क्या फर्क पड़ता है हीरे कोई
- 44:02बिच्छू है, जो तुम्हें डसने के साँप है, कोई विषय धार है, बाहर
- 44:10पड़े रहें तुम्हारे क्या रहते हैं जब तुम सो जाते हो?
- 44:16जीस पलंग पर तुम सोए वह पलंग लकड़ी का है या सोने का पता चलता
- 44:22है, बस ऐसा ही ध्यान में नहीं पता चलता।
- 44:30तुम जमीन पर पड़े हो या तुम सोने के।
- 44:36बेड पर पड़े हो, पलंग पे पड़े हो नहीं पता चलता और जैसी हालात नींद
- 44:45में होती है, तुम्हारी वैसी ही हालात होती है जब तुम प्रबुद्ध हो
- 44:51जाती हो। कधा नीलम पण्डर झरी निकुंजकोटरे
- 44:57वसन वे मुक्त दुर्मती सदाश्रय समंजलि वाहन वे लो रे लो लो च नू
- 45:04ले लां भ लगन कह श्वेति मंत्र मूचरण कथा सुखी वहाँ में हम।
- 45:16प्रजा महि महेन्द्रयो संप्रवृत्त कहकदाशुदा शिवम् बाजा में दृषित
- 45:35विचित्र तप योर जंग मुक्ति कसर यो।
- 45:39रकृष्ट रत्न लोकसेव सहृदय पक्ष पक्ष त्रिनार विंध्य चक्षु शो
- 45:45प्रजा महि महिन्द्रा सम परवर्तकय कथा सदा सुखी वाम म्यां।
- 46:00सोने की लंका का मालिक गरावन कहता है मैं कब सुखी होऊंगा अभी तो तुम
- 46:09चाहते हो कि सोने की लंका मेरे पास हो, मंदोदरी जैसी धर्मपत्नी
- 46:14मेरे हो सुंदर थम। स्त्रियों में से मंदोदरी थे।
- 46:22मैं राजा हूँ, विशाल सेना का मालिक हूँ, मन मर्जी करो, एकदम
- 46:30चाहता हूँ और इसी को तुम राज़ करना कहते हो।
- 46:37लेकिन रावण तो कुछ और कह रहे हैं। उसके पास सब है, पुष्पक विमान है,
- 46:46सब हैं उसके पास वह भगवान से कहता है।
- 46:54और भगवान से गलत नहीं कहा जाता। जो नहीं होता वही मांगा जाता हैं।
- 47:00कदा सुखी वहाँ में हम अभी नफरत का बीज हैं।
- 47:05मेरे को हे शिवा अभी नफरत का बीज हैं।
- 47:15तृषित विचित्र तर्पिओ और बजंगम मुक्ति कसर जो मोती और साँप के
- 47:24भीतर हर कर विश्व में अगिस्टरतन लोफ्स्टिओ सो हद पक्षियों।
- 47:31रत्नों का ढेर और माटी का ढेर लोष्ठ इन दोनों में फर्क है
- 47:41त्रिनार विंध्य चक्रशु पर जा महि महेंद्र अभी प्रजा और रजा इसमें
- 47:46फर्क है। अभी मित्रों और शत्रु में फर्क
- 47:53है। अभी वेद बुद्धि है।
- 48:01इस वेद बुद्धि ने बड़े मारे और आज तुम्हें एक मैं मंत्र देती हूँ।
- 48:13कोई भी मोटो जो तुम्हें भेद सखाएं वह तुम्हें दुख देगा लिख लेना कोई
- 48:23भी मोटो तुम्हें बड़े से बड़ा रेसिपी क्यों न दे दे जो तुम्हें
- 48:29भेद में धकेल दे। भेद तुम्हें दुख देगा।
- 48:34आखिर वह ऋषि नहीं है, वह कोई भेदवादी राजनेता है।
- 48:51इस महत्त्व को याद रखना आज सारी दुनिया दुखी है।
- 49:00सुखी कोई नहीं और पता नहीं कि दुखी हैं क्यों?
- 49:05बस यही कारण है भेद बुद्धि के कारण।
- 49:12कहीं ना कहीं तुम भेद कर रहे हो यही दुक्का जो संत।
- 49:29एकांत कुटिया में बैठा निकुंज कोटरे वसन।
- 49:36वह अगर दुखी है तो कुछ न कुछ भेद पाडे हैं भीतर इसलिए दुखी है।
- 49:45प्रसंग लंबा हो जाएगा। अगर तुम कहोगे तो फिर व्याख्या
- 49:49इसके गहरे कर दूंगा। दुख का मूल कारण है भेद भेद चाहे
- 49:57किसी भी प्रकार कहो। राज़ एक गुरुवाणी में तो कहती है,
- 50:13राज़ करेगा खालसा? आखिर है ना कोई खालस प्योर शुद्ध
- 50:24वह राज़ करेगा? जिसके मन में इम्प्यूरिटी होगी।
- 50:32इम्प्यूरिटी का मतलब राजनीति सीधा सीधा, ज्यादा अच्छा होगा, क्योंकि
- 50:39आजकल लोग शब्दों में ज्यादा और लिखते हैं।
- 50:45जिसके भीतर इम्प्यूरिटी है, राजनीति है वह सुखी नींव का पक्का
- 50:51लिखा रूम वह सुखी अपने आप को दिखाने की चिष्टा करेगा।
- 51:02वह सुखी कैसा होगा? मैं मंत्र बता देता हूँ राज़ करने
- 51:09की तुम्हें अभी सलेका लहंगा है तुम राज़ करते हो लोगों पर?
- 51:24डिक्टेटर बनता है और महावीर कहते हैं कि आनंद तब आता है जब तुम
- 51:32राज़ करते हो अपने अंदर पर अपने विकारो पर तुम जब चाहो काम का
- 51:39इस्तेमाल करो। जब चाहे क्रोध का इस्तेमाल करो,
- 51:42ऐसा नहीं कि क्रोध नहीं करता है, लेकिन जब चाहे करता है क्रोध जब
- 51:50चाहे उसे नचोवा नहीं पाता, वह जब चाहे क्रोध को नचोवाता है कि नाचो
- 51:56अवक्रोध की आवश्यकता है। परशुराम ऐसा ही करते हैं।
- 52:03क्रोधि हैं महाक्रोधी 21 बार क्षत्रुओं का वध कर देते हैं, ऐसी
- 52:12बात का प्रमाण है और परशुराम अवतार कहलाते हैं।
- 52:20उन्होंने क्रोध का इस्तेमाल किया और तुम्हें जानकर हैरानी होगी इस
- 52:25सनातन की गहराई को देखकर के प्रत्येक अवतार।
- 52:38एक स्पेशल्टी लिए हुए हैं किस चीज़ की बेकारों पर विजय किया राम
- 52:53ने राम मर्यादा शाद के बेकारों पर विचार करते हैं, जब चाहते हैं
- 53:02बेकार उन पर। 14 साल वनवास काट लेती हैं, बेकार
- 53:07नहीं आता। ऐसा नहीं कि मन में नहीं आता, मन
- 53:11में तो आएगा पुरुष ऐसा नहीं कि स्त्री में विकार नहीं आता।
- 53:17विकार तो आएगा चाहे सीता है चाहे सत्य सावित्री।
- 53:23ढकने की चेष्टा मत करो, मूर्ख मत बनो या फिर नपुंसक होगा।
- 53:31व्यर्थ की उल जरूर बातें करने का कोई अर्थ न कब तक छुपाओगे लेकिन
- 53:39सलीका है महावीर से सीखो। महावीर कहते हैं, पुरुष हैं या
- 53:47स्त्री हो? विकार आएगा, सभी विकार आएँगे, काम
- 53:53आएगा, क्रोध आएगा, लोह मोह अहंकार सब आएगा, अहंकार भी आएगा क्योंकि
- 53:58है अभी तुम स्वयं को शरीर मानते हो।
- 54:02तो अहंकार तो आएगा, मन मानते हो तो अहंकार तो आएगा लेकिन इन
- 54:12विचारों को इन विचारों से तुम काम लो, ये विकार तुमसे काम ले।
- 54:22बस रेप करने वाले में और अपने घर के बेड के ऊपर अंतरंगकक्षणों में
- 54:32जाने वाले में यही फर्क है। रेप करने वाले पर काम अभी हो गया,
- 54:39काम ने उसे नचाया। और अपने घर के आसन पर वो ही काम
- 54:52करने वाला गृहस्थ कहलाता है। उसे कोई दंड नहीं करता।
- 55:03जितना है काम तो आएगा, क्रोध भी आएगा, सारे विकार सब में आते हैं।
- 55:10भूल मत जाना तुम किसी को विकार रहित जानकर क्योंकि तुम बंदर हो
- 55:19नकल। राम में बुद्ध में तुम सीमित हो,
- 55:26विकार नहीं आते? बिल्कुल आते हैं और कृष्ण दूसरा
- 55:33स्वरूप है। कृष्ण के इतने विकार आए लेकिन
- 55:35विकारों का मालिक में। जब चाहें राह सर चाहते हैं
- 55:45गोपियों के भीतर और ज़रा कोई भी कारण नहीं आता, मैं तुम्हें जानकर
- 55:49बड़ा हैरानी हूँ। जवान अवस्था है निधि वन में
- 55:57गोपियों के साथ अकेले अकेले पुरुष बेकार नहीं आता, उस चेतना में उतर
- 56:08जाते हैं और चेतना में उतरा हुआ व्यक्ति पुरुष।
- 56:15राधा के साथ शक्ति के साथ रास रचाता है।
- 56:21यह रास पुरुष और शक्ति का मिलन है उसे रास कहते हैं बड़ा आनंद आता
- 56:29है रस से बना रास। वही कृष्ण हैं जो निधिवन में राधा
- 56:38और उसके अंतरंग सखियों के साथ रास रचाते हैं।
- 56:43तुम्हें क्या सिखाते हैं तुम्हें सिखाते हैं कि मैं मेरे वेकारों
- 56:50का मालिक हूँ? राधा भी तुम्हें यही सिखाती है
- 56:56राधे राधे करना नहीं, राधा भी तुम्हें यही सिखाती है अपने
- 57:01विचारों पर विजय कैसे प्राप्त करनी तुम राधे राधे जागते हो?
- 57:11और वो ही कुकर्म करते हो? अपने कमरे में जा के पर क्या फर्क
- 57:16हो गया? अक्सर लोग तो तब राधे राधे करना
- 57:22कहने लगते हैं जब वो अनेबल हो जाते हैं।
- 57:27संभोग करने का कोई बिमारी हो जाती है, कोई अंग फैल हो जाते हैं,
- 57:34बनता ही नहीं स्पर्म बहस सिखाते हैं ब्रह्मचर्य का उपदेश तुम हसा
- 57:44मत करो। यह तो नपुंसकता है, पैदा ही नहीं
- 57:51हुआ, बेकार उठेगा कैसे? शक्ति ही नहीं मुर्दा क्रोध नहीं
- 58:01करता। मुर्दा अहंकार नहीं करता तुम
- 58:04ठुड्डे मारते रहो, तुम आग में भी डाल देते हो मुर्दा कहाँ उठ के
- 58:07गुस्सा होता है क्योंकि इसमें शक्ति नहीं है।
- 58:12क्षति रहते हुए विचारों को विज़िट करो वह है ब्रह्मचर्य।
- 58:21शक्ति हो अगाध प्रगाढ़ तो कृष्ण कहते हैं प्रबल शक्ति का मालिक
- 58:29खूब माखन खाया, खूब मिस्टर खाया और देखो मैं रास रचा रहा हूँ और
- 58:35अनछुआ हूँ। और राधा भी कहती है मैं अनछुई
- 58:44हूँ, चेतनों शक्ति हूँ क्या होता है रस वहाँ रस बरसता है, रस का
- 58:58नाम सुना है तुमने पिया का काश? तुम कभी पीरो एक मूत, तो तुम्हें
- 59:05ऐसी लत लगेंगी जैसे शराबी को सांझ ढलते ही सूरज ढलते ही पंछी अपने
- 59:14घोसलों पर लौटना शुरू हो जाते हैं और शराबी?
- 59:19मैं खाने की तरफ काम दौड़ाता है। जल्दी से गटक लूँ।
- 59:25सांझ हो चले एक बार तुम्हें लत लग जाए।
- 59:35मेरे पांव में घुंघरू बांधा दे तो फिर मेरी चाल देख ले, फिर तुम्हें
- 59:41पता चलेगा मीरा नाची क्यों थी? मीरा ने लोकलाज क्यों खोदी थी?
- 59:49मीरा ने सुध ही खोदी थी। वह सांवरिया सुद को हार के ले गया
- 59:58था। तुम्हारे भीतर एक ऐसा तत्व है जो
- 1:00:02तुम्हारी सुद्धि बुद्धि को खो देता है, उसके करीब आवोजा रहा है,
- 1:00:09यह तो बड़ा अँधेरा है। थोड़ा मेरे करीब आओ।
- 1:00:16चिराग दिल के जलाओ बहुत ने। चिराग दिल के जला बहुत अधेरा है।
- 1:00:50कहीं से लौट के आओ बहुत अँधेरा है रस तुमने पिया नहीं एक बूंद पी लो
- 1:01:00कभी तो फिर तुम पाओगे लग तर के। साज हुई, सूर्य टला और तुम्हारे
- 1:01:13पांव उठने लगेंगे मैखाने की तरफ राम तुम्हें सिखाती है पुरुष होते
- 1:01:27हुए सीता तुम्हें सिखाती है पुरुष स्त्री होते हुए।
- 1:01:37काम पर कैसे विजय प्राप्त की जाये और 14 वर्ष कम नहीं होते।
- 1:01:48यह राम की मर्यादा है। बस बात तो सिर्फ़ एक है।
- 1:01:53यह इन्द्र हो गए हैं, राम भी इन्द्र हो गए हैं, कृष्ण भी
- 1:01:57इन्द्र हो गए हैं। तुम जानकर बड़े हैरान हो गए।
- 1:02:02कृष्ण ज्याग के इस्तेमाल करते हैं।
- 1:02:05वासन का वासन उन्हें नहीं नचाती, वो नचाते हैं।
- 1:02:10वासन को खूब खुल के नचाते हैं। जैसे होली के दिन तुम रंग खेलते
- 1:02:17हो रास नचाते हो। कृष्ण अपने ढंग से तुम्हें लीला
- 1:02:26दिखाते हैं, यह देखो ऐसे भी लीला खेली जाती है, लेकिन उनका अंतर से
- 1:02:33जानता है। मैं अंछुवा रह।
- 1:02:40अनछुआ रह गया मैं दुर्वासा कहते हैं, मैं अनछुआ रह गया, इस क्रोध
- 1:02:49से शराब देता हूँ, लेकिन मैं अनछुआ तो प्रश्न पूछा था, साधारण
- 1:02:56छोटा सा जवाब दे दिया मैंने। सखियां कहने लगीं तुम्हारा गुरू
- 1:03:03आया हमें दर्शन कर ले तो तुम आजा गुरू, खूब हँसी कैसा होगा?
- 1:03:14उसने कहा देखा होगा क्या? वो यमुना पार बैठे हैं।
- 1:03:21कुटिया तो गोपियों ने खूब बढ़िया पकवान बनाए मिष्ठ और चल दीं,
- 1:03:31लेकिन यमुना उफान पे। राह नहीं देख रही।
- 1:03:36पुल के ऊपर से पानी बह रहा पुल दिख नहीं रहा।
- 1:03:44कृष्ण के पास हुई सखे यह जमुना बड़ी उफान पर है।
- 1:03:50रास्ते का पता नहीं चलने देती कम है।
- 1:03:55तो कृष्ण कहने लगे अच्छा तुम ऐसे करो प्रिय तुम यमुना से बोल दो
- 1:04:01माता अगर हमारे प्रेमी कृष्ण बाल ब्रह्मचारी हैं तो रास्ता दे दे
- 1:04:12तो उफान को घटा ले। कुछ दिखा दे कहाँ है हम चले जाएं
- 1:04:21कृष्ण के गुरु से मिलने जाना है। हमारे प्रिया के गुरु से मिलने
- 1:04:26जाना है। दांतों में साड़ी दबाएँ, खो हँसी
- 1:04:43चलो ये भी कह देते हैं पता है परिणाम क्या होगा?
- 1:04:52लेकिन परिणाम उठा हुआ है। जाकर कहा माँ यमना अगर हमारे पीठ
- 1:05:01कृष्ण बाल ब्रह्मचारी हैं, उन्होंने कभी छेड़छाड़ नहीं की तो
- 1:05:09रास्ता दे दे उफान को कम करता है। और माँ यमुना ने रास्ता दे दिया।
- 1:05:19हैरानी तो बहुत हुई सभी के पास थल सुंदर सुंदर पकवान, मीठे कचोडी
- 1:05:27पूड़ी तरह तरह के व्यंजन। जाकर खिलाये, प्रणाम किया, प्रभु
- 1:05:42थोड़ा सा भोग लगा लो। उन्होंने कहा थोड़ा सा भोग लगा
- 1:05:47लेंगे, बाकी छोड़ देंगे, हम घर जा के खा लेंगे।
- 1:05:50वो तो सारा रप गया बक्ष्म बक्ष्म बक्ष्म बक्स गया।
- 1:05:58सारे अब योजनाएं धरे की धरे रहती है।
- 1:06:09लेकिन वापस जाना यमुना फिर उफान पर हो गए।
- 1:06:17कहा गुरुदेव हमने वापस जाना आते हुए तो हम आ गए थे, अब जाते हुए
- 1:06:24कैसे जाए? तो दुर्भाषा बोले।
- 1:06:29पुत्रे तुम माँ यमुना से बोल देना अगर दुर्भाषा निरहारी है कभी कुछ
- 1:06:36खाया नहीं तो गोपी है, लेकिन फिर हमें खा जा अगर अभी तुमने कुछ
- 1:06:46खाया नहीं। तो हमे खा जा फिर खा जाएगा, फिर
- 1:06:52पेट भर जाएगा तो मजाक करते करते वापस आ गए तो माँ रास्ता दे दे
- 1:07:01यमुना के पास आके प्रार्थना के हे माँ।
- 1:07:07अगर कृष्ण के गुरु दुर्वासा निरहारी हैं, कभी कुछ नहीं खाया
- 1:07:16इसे तुम चमत्कार कहोगे लेकिन चमत्कार नहीं यह सत्य है जानोगे
- 1:07:21तो पाओगे कि सत्य हैं अन्यथा चमत्कार तुम मजाक उड़ाओगे
- 1:07:26मार्कर्स की तरह। देखा यमुना उफान पे थी हाथ जोड़
- 1:07:32के खड़ी हो गई हे माँ यमुना अगर कृष्ण के गुरुदेव दूर्वास ऋषि
- 1:07:42मेरा हारी है कभी कुछ नहीं कहा। देखिए शास्त्रों में लिखा है
- 1:07:49पवनाहारी है लेकिन पवन पे नहीं खाते वो उसको पवन की जरूरत नहीं
- 1:07:54होती, किसी पदार्थ की आवश्यकता नहीं होती।
- 1:07:57ये शास्त्रों की थोड़ी सी गलती में निकाल दी अगर दुर्भाषा
- 1:08:02पवनाहारी है तो माँ हमें। रास्ता दे दे, लेकिन वह तत्त्व
- 1:08:07पवनाहारी भी नहीं है। उसे जीवन के लिए पवन की आवश्यकता
- 1:08:11नहीं होती। वह से पं।
- 1:08:13है। वह खुद के प्रकाश से प्रकाशित है।
- 1:08:17खुद के जीवन से जीवंत है हिमा? अगर धुर्वाषा ऋषि ने कभी कुछ नहीं
- 1:08:27खाया, कभी कुछ नहीं खाया तो हमें रास्ता दे दे।
- 1:08:34उफान कम कर ताकि हमें पुल लग जाए। प्रार्थना की और जमुना ने उफान कम
- 1:08:44कर लिया। अब ये बात तो हैरान है की तुम्हें
- 1:08:50भी हराने लगी। निधि वन में कैसे रहा और कैसे 14
- 1:09:00वर्ष? ब्रह्मचर्य से गुजारे सीतान और
- 1:09:05राम और लक्ष्मण ने और उर्मिल ने और मिल की कथा सदा मुझे दुख देती
- 1:09:15है कभी फिर सुनूंगा। तो माँ रस्ता दे और माँ ने उफान
- 1:09:25कम कर लिया। सखियां लाँग गईं।
- 1:09:31कृष्ण के चरण पकड़ लिए। ये क्या चमत्कार है प्रभु?
- 1:09:42बस यही सीखाना चाहते हैं। तुम्हें अवतार है?
- 1:09:46महाक्रोधी होते हुए भी परशुराम 21 बार क्षेत्रों का वध करते, सारी
- 1:09:54धरती खाली कर देते क्षत्रिय से और हैं अवतार है।
- 1:10:01हैं। बड़े शांत हैं ब्राह्मण ब्रह्म के
- 1:10:09अनु हैं, बड़े शांत हैं, बड़े गंभीर हैं, वध कर देते हैं सारे
- 1:10:17क्षेत्रों का एक। बस यही सिखाते हैं परशुराम के
- 1:10:24क्रोध को कैसे नाचाओ क्रोध के हाथों में नाचू क्रोध को तुम
- 1:10:32नाचाओ कृष्ण कहते हैं काम को तुम नाचाओ।
- 1:10:37वो करके दिखाते हैं, भोग के दिखाते हैं और राम और बुद्ध,
- 1:10:43बुद्ध को भी अवतार मानना पड़ा। सनातन को नवम अवतार वो सिखाते हैं
- 1:10:51कि तुम? कैसे काम को कंट्रोल में रखो, राम
- 1:10:59कंट्रोल करते हैं, बुद्ध कंट्रोल करते हैं, कृष्ण भोग करते हैं,
- 1:11:12दरवाजा भोग करते हैं। और भोग करते हैं परशुराम क्रोध का
- 1:11:27लेकिन क्रोध को नहीं चाहते हैं काम को नहीं चाहते हैं कृष्ण
- 1:11:33क्रोध को निचते हैं परशुराम भूख को निचते हैं दरवसा और कंट्रोल
- 1:11:43में करते हैं राम काम को और बुध काम को।
- 1:11:50इसलिए राम को 12 कला सम्पूर्ण कहा गया।
- 1:11:53चार कलाएं कम हैं। क्योंकि कंट्रोल करने आया सिर्फ
- 1:12:02भोगने में साक्षी रहना नहीं आया। भोग के वक्त बिगड़ जाएंगे।
- 1:12:10जीने का असली का थोड़ा कम है। कृष्ण से ज्यादा नहीं है।
- 1:12:20कृष्ण पूर्ण अवतार है, उसमें थोड़ी कमी है, चार कलाएं कम है,
- 1:12:25राम में हैं बड़े प्यारे दो खब होकते हैं इतने कष्ट लेकिन चार
- 1:12:32कलाएं फिर भी कम है। कृष्ण मज़े लेते हैं फिर भी 16
- 1:12:37करना संपूर्ण हैं। शरद पूर्णिमा की वो रात निधि वन
- 1:12:46में कृष्ण महाराष्ट्र चाहते हैं गोपियों के संग।
- 1:12:52और देखिए उस वक्त का समाज कोई नहीं रोकता अपनी स्त्रियों को आज
- 1:12:59तुम्हारा समाज कहाँ है? चोरी छुपे जाना पड़ता है लाइन
- 1:13:03संकल्प में बत्ती गुल करनी पड़ती है।
- 1:13:08फिर जपियां डालनी पड़ती। तुम असम करो और उस वक्त के समाज
- 1:13:21ने यह खुला छोड़ रखा था। वक्त वक्त पे समाजों ने कुछ बंधन
- 1:13:26बनाए, कुछ खोल दिए गए यह आँख मिचोने का खेल है चलता रहा है
- 1:13:34चलता रहेगा। किसी व्यक्ति को ऐसा मत कहा करो
- 1:13:40कि तुम ऐसे थे नहीं, गलत हो जाओगे तुम क्योंकि व्यक्ति सदा बदलता
- 1:13:47है, रोज़ बदलता है। अगर तुम वाल्मीकि को कहोगे कि हम
- 1:13:52जानते हैं तुम वही डाकू हो जो डाके मारते थे, रत्ना करके रोते।
- 1:13:58लेकिन गलत हो तुम गंगा का वो पानी निकल लिया और समुद्र में मिल लिया
- 1:14:07जिसे तुमने देखा। आज गंगा का पानी नया है।
- 1:14:13आज वाल्मीकि नए हैं, बदल गए हैं, ट्रांसफर्मेशन हो गया है।
- 1:14:20किसी व्यक्ति को उसके अतीत से मत पहचानो।
- 1:14:23वर्तमान से ही पहचानना सीखो। मैं अक्सर लोगों को कहते और सुनता
- 1:14:31हूँ, मैं जानता हूँ तुम्हें। तुम कौन हो नहीं तुम नहीं जानते।
- 1:14:361 अप्रैल में बंटाधार हो जाता है। 1 अप्रैल में वो घटना घट जाती है
- 1:14:41जिसे तुम कहते हो संबोधित और घट गए।
- 1:14:46रत्नाकर में हो गया वाल्मीकि उल्टा नाम जपे ते जाना बालमीक भैय
- 1:14:51ब्रह्म सवाना। और वही अगली माल जो 999 उंगलियाँ
- 1:14:59सिर काट के अपने गले में डाल देता।
- 1:15:011000 में अंकल पूरे नहीं कर पाया बदल जाता है और ब्राह्मण हो जाता
- 1:15:07है तुम अगर कहो मैं तुम्हें जानता हूँ तुम कैसे हो भ्रम।
- 1:15:14तुम तो दुष्ट हो, तुम तो हत्यारे हो हाँ थे लेकिन वो गंगा गई गंगा
- 1:15:20का पानी समद्र में गया। अब ये नई गंगा है, तरो ताजा पानी
- 1:15:25है। किसी व्यक्ति को उसके अतीत से मत
- 1:15:34पहचानो। अतीत गया तो उसका स्वभाव भी गया।
- 1:15:38समझो कभी भी बदल सकता है। कोई भी बदल सकता है।
- 1:15:43तुम अपने भीतर अतुल संपदा लिए चल रहे हो।
- 1:15:46हर वक्त तुम आनंद का सागर हो। न जाने किस दिन पहचान में आ जाए,
- 1:15:54किस घड़ी पहचान में आ जाए, किस सबल पहचान में आ जाए?
- 1:15:58उसी वक्त तुम बदल जाओगे, भिखारों को भोग कर जीतो फिर तुम राज़
- 1:16:10करोगे। और विकारों को कंट्रोल करके जीतो
- 1:16:14तो अभी तुम राज़ करोगे लेकिन पहला तरीका बड़ा बढ़िया है, शुभ है।
- 1:16:23वह कृष्ण करते हैं व दुर्वाशा करते हैं।
- 1:16:26इसलिए दुर्वाशा कृष्ण के गुरु? ऐसे ही कृष्ण किसी एरे गहरे को
- 1:16:34नहीं बनाते, वह भोगते हैं और भोगते हैं।
- 1:16:41कृष्ण से बढ़िया भोगते हैं। दरभाषा जितना अहंकार करते हैं,
- 1:16:50शायद कोई नहीं करता। कृष्ण के बच्चों तक को श्राप दे
- 1:16:54दिया। उसने अहंकार को जीता है, क्रोध को
- 1:17:04जीता है, काम को जीता है, लोह को जीता है।
- 1:17:16रावण ने लोग को जीत लिया। एक प्रकार से एक कथा बड़ी गहरी
- 1:17:21है, फिर सुनाऊंगा आपको कभी वक़्त आएगा तो वीडियो बड़ी लम्बी हो
- 1:17:27जाती है। अब डेढ़ घंटे की बड़ी ओके भोग के
- 1:17:34जीतो। यह कंट्रोल करके जीतो।
- 1:17:46बात एक ही है निष्कर्ष यह कि बेकार तुम हो नहीं बेकारों को तुम
- 1:17:54देखने वाले हो। बस तत्व यह है जीस दिन तुम्हें
- 1:18:03पता चल गया यह बेकार मैं नहीं हूँ और तुम्हें पता चलता है काम आया
- 1:18:09तुम्हें पता चल जाता है एक क्षण दो क्षण 10 क्षण पहले।
- 1:18:14मूलाधार से उठनी शुरू होती हैं तरंगें और समझदार व्यक्ति तभी समझ
- 1:18:19जाता है क्रोध उठता है, तुम्हें पता चल जाता है बस ये कला सीखनी
- 1:18:28होगी। आउट कंट्रोल राज़ कैसे करना है?
- 1:18:31और जो व्यक्ति इन पर राज़ करता है वो महावीर कहलाता है, इसलिए
- 1:18:37महावीर का खिताब मिला। वर्धमान को यह खिताब था।
- 1:18:42उन्हें सभी विचारों को जीत लिया। भूख तप को जीत लिया।
- 1:18:55शक्ति को बाहर मत फेंको और अगर शक्ति बाहर फेंक जाए तो तुम जानो
- 1:19:06यह शक्ति शरीर की थी। साहब साहब दिखे तुम्हें कृष्ण देख
- 1:19:15पाते हैं, राम फेंकते ही नहीं अपनी अपनी कलाएं पर सुर हम फेंक
- 1:19:27देते हैं। लेकिन देखते हैं जानते हैं क्रोध
- 1:19:30मैंने खा जाते हैं सब कुछ दरभा सा, लेकिन जानते हैं भूख मुझे
- 1:19:37नहीं लगी भूख शरीर को लगी है जीस दिन तुम ये जान के उस दिन तुम।
- 1:19:46उपलब्ध हो जाओगे संबोधित। राधे रात शाम मिला दे राधे रात।
- 1:20:04राधे श्याम मिला दे गोविंदा गोपाल हर राधे राधे श्याम मिला दे
- 1:20:19गोविंदा गोपाल हर। मेरी नैय्या पार लगा दे गोविंदा
- 1:20:32गोपाल हरे राधे राधे शाम मिला दे राधे राधे।
- 1:20:43श्याम। मिला दे गोविंदा गोपाल हरे, राधे
- 1:20:51रात श्याम मिला दे गोविंदा गोपाल हरे।
- 1:21:06ओह, धन्यवाद।