Latest / Baba ji Vijay Vats / 30 May 25 - अभी तक मुक्त क्यों नहीं हुए? अनहद नाद क्यों सुनाई नहीं देता? परमात्मा है भी कि नहीं?
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- 0:00गुरुदेव प्रणब जीवन का एक ही दुख है, जीवन में जो कष्टकारी है वो
- 0:13कष्टकारी है। परंतु सबसे बड़ा कष्ट है कि जीवन
- 0:19में अनाथ सुर नहीं हुआ। कैसी कैसी समस्याएं हैं मानव की?
- 0:37जब आपको पता नहीं था की अनहातनाब नामक कोई चीज़ होती है तो क्या
- 0:43तुम्हें दुख था क्या जब कार नहीं बनी थी, जहाज नहीं बना था?
- 0:55तो तुम्हें दुख था कि मेरे पास कार में क्या जब किच्ची झोपड़ियां
- 1:04होती थीं, बढ़िया बंगले और महल नहीं होते थे तो क्या तुम्हें दुख
- 1:10था कि मेरे पास महल नहीं है बंगला में?
- 1:23तुम चेतना को बांध लेना चाहते हो कहीं भी अब देखिए आपका सबसे बड़ा
- 1:32कष्ट है केनाथनाथ शुरू। और जब पता नहीं था आपको कैनाज
- 1:44होता है ये तो आपने वीडियो सुनी होगी किसी की भी तो आपको पता चला
- 1:54कि अनाज होता है। बड़ा मधुर होता है, वह क्यों नहीं
- 2:04चला? बस यह क्यों?
- 2:07यह क्यों आपके जीवन को दुख में बना देता है?
- 2:19तुम रोज़ कहते हो, हम दुखी हैं। जीवन में जो दुख हैं वो तो हैं
- 2:22ही, चल रहे हैं, लेकिन एक नया दुख आपने झड़ लिया अनाथनाथ।
- 2:36मेरे पास लोग आ जाते हैं। बाबा मुक्ति नहीं मिली, मैंने कहा
- 2:43वो क्या होती है? कहता मुक्ति सब दुखों से मुक्ति
- 2:50तुमको किसने कहा होती है? बुध तो कहते हैं जीवन ही दुख है।
- 2:57फिर क्या करोगे? मुक्ति के साथ चिपट गए लोग मेरे
- 3:09एक बात ध्यान से सुन लो। इच्छा कोई भी हो तुम्हारे पास
- 3:24सोने का ताज नहीं, सोने के कुंडल नहीं खड़े नहीं झाझर नहीं मकान
- 3:32नहीं, कार नहीं जहाज नहीं, कोई पद भी नहीं।
- 3:38कोई लायखत नहीं बोलना नहीं आता या कुछ भी है।
- 3:43अब आओ भाई किसी चीज़ का और तुम डिप्रेशन में आ जाते हो।
- 3:58इच्छा करते हो कि काश मेरे पास हुई हो, क्या तुम्हें पता है?
- 4:04के तुम्हारे दुख का कारण तुम्हारे पास कुछ नए होना नहीं है।
- 4:10तुम्हारे दुख का कारण अब ये अच्छी तरह से समझ लेना तुम्हारे दुख का
- 4:16कारण तुम्हारे पास कुछ नहीं है, ये नहीं है की कार नहीं है, बंगला
- 4:21नहीं है। मेरे पास कुछ पद नहीं है, मैं
- 4:26सरकारी नौकरी पे नहीं हूँ, मेरी तनख्वाह थोड़ी है, सुंदर बीवी
- 4:31नहीं, सुंदर पति नहीं बच्चे नहीं, यह कक्षें नहीं।
- 4:42तुम्हारे दुख का कारण है कि दूसरे के पास ये क्यों है?
- 4:48यहीं से होता है गड़बड़सुर मुझे लोग कैसे थे बाबा तुम में क्या
- 5:00फसीद थी? शंकर भगवान आपको दर्शन दिए हमें
- 5:04क्यों नहीं दिया? हनुमान जी ने आपको दर्शन दिए,
- 5:09हमें क्यों नहीं दर्शन देते? अब ये क्या है?
- 5:15जैसे ही कॉम्पिटिशन आया, वैसे ही दुख का आगाज़ हुआ।
- 5:21तुम चिपटे उस चीज़ के साथ अबोर नहीं, तो तुम आनंदनाथ के साथ चुप
- 5:27गए, और मुक्ति शब्द तुमने सुना मुक्ति का अर्थ न तुम्हें समझाया
- 5:37गया न तुम जानते हो मुक्ति का अर्थ है किसी भी प्रकार की इच्छा
- 5:44न रह जाए। जब थिएटर्स नहीं होते थे तो क्या
- 5:54तुम्हारे मन में इच्छा है कि मैं थिएटर में फ़िल्म देखने नहीं जाता
- 5:57हूँ? जब गाड़ी नहीं होती थी जब साइकिल
- 6:02भी नहीं होती थी आदमी के पास। तो आदमी पैदल ही चलता था, वो कभी
- 6:10दुखी हुआ ये बात सोचकर कि मेरे पास कार नहीं है, साइकिल नहीं है,
- 6:16गाड़ी नहीं है, जहाज नहीं है, तुम आज दुख होते हो, आज दुख क्यों
- 6:21होते हो? क्योंकि आज वो चीजें उपलब्ध हैं
- 6:33तुम्हारे पास क्या नहीं है ये मायने नहीं रखता।
- 6:40तुम्हारे पास क्या नहीं है उसका बंधन मायने रखता है।
- 6:50तुम तो परमात्मा के नै होने को भी दुख का कारण बना लेते हो क्या मैं
- 6:56परमात्मा क्यों नहीं दिखा? और तुम्हें ये भी नहीं पता जिनको
- 7:02परमात्मा दिखा उनको दिखा, वास्तव में दिखा।
- 7:09हो सकता है वो झूठ ही बोल रहा हो फिर क्या करोगे?
- 7:15फिर क्या करोगे ये परमात्मा नाम का भोंपू जो तुम पे चला दिया गया
- 7:26और सारी दुनिया उसमें उलझ के रह गई।
- 7:31और सारी दुनिया ने अपने अपने धर्म बना लिए परमात्मा बना लिए
- 7:34तस्वीरें बना ली कोई कहता निराकार कोई कहता साकार जीतने झगड़े
- 7:42परमात्मा के नाम पे है उतने तुम्हारी अदालतों पर नहीं चलते।
- 7:51तुम पक्का जानते हो ये अन्नधनाद होता है, मैं ये नहीं कहता
- 8:00अन्नधनाद नहीं होता बिलकुल होता है बहुत से लोगों के मेरे स्वयं
- 8:07की अन्नधनाद 16 साल की 18 साल की उम्र है।
- 8:111970 में शुरू हो गया। जैसी ही वो रेल की घटना घटी, बस
- 8:21कुछ ही दिनों में न शुरू हो गया। लेकिन मैं कहता हूँ तुम्हें यकीन
- 8:30है इस वक्त। मैं ये नहीं कहता परमात्मा नहीं,
- 8:36मैं ये कहता हूँ परमात्मा है, इस बात का तुम्हें क्या सबूत है?
- 8:43लोगों से ही सुना तुमने संतों से सुना साधों से सुना?
- 8:53आचार्यों से सुना सद्गुरुओं से सुना परमात्मा होता है, लेकिन
- 9:00क्या आपको पता है क्या बुद्ध, बुद्ध संत नहीं थे?
- 9:05बुद्ध कहते हैं परमात्मा नहीं कौन जानें वो ठीक हूँ।
- 9:13मार्क्स कोई मामूली आदमी थे। वो कहते नहीं है, परमा नीचे कहते
- 9:18नहीं है। परमात्मा और नीचे जैसा प्रेमी
- 9:22व्यक्ति खोजना बहुत मुश्किल है। नीचे ऐसा प्रेमी व्यक्ति है।
- 9:29उसके रोये रोये से प्रेम पुलकित होता है और वह कहता है परमात्मा
- 9:34नहीं, उस मूर्ख को ये नहीं पता कि यह प्रेम तुम्हारा जो वर्ष रहा
- 9:43है, यही परमात्मा है। काश।
- 9:47उसे कोई समझाने वाला मिल गया होता।
- 9:54अब बात को समझेंगे। तुम्हारी मुक्ति का न होना
- 10:03तुम्हारी अपेक्षाओं पर निर्भर करता है।
- 10:09तुम ये नहीं देखते कि तुम्हारे पास है क्या?
- 10:14हमारे 32 दांत हैं, तुमने कभी धन्यवाद नहीं किया?
- 10:20भगवान का ये ब्रह्मास्त्र पूरे के पूरे दांत, लेकिन जब टूट जाता है
- 10:27वो दांत। तुम कहते हो हे भगवान तुमने मेरा
- 10:32ही दांत क्यों तोड़ा? अब इसमें भगवान की ज़रा भी गलती
- 10:40नहीं है। और जब तक वो था, तुमने कभी
- 10:46धन्यवाद नहीं किया तेरा शुक्रगुजार, इतने और गंज भीतर काम
- 10:50करें और इतने बारीकी से कर रहे हैं।
- 10:54तुम सोच भी नहीं सके। आज भी साइंटिस्ट हमारे शरीर की
- 10:58संपूर्ण संग रचना की पूर्ण व्यवस्था को जान नहीं पाए।
- 11:02शरीर की। ब्रह्मंड की तो क्या करेंगे वो
- 11:06अपने ही शरीर की जिसे वो मैं कहते हैं कैसे बनते हैं ये हार्मोन्स?
- 11:24और कैसे तुम उदास होते हो? कैसे तुम खुशी के माहौल में नाचते
- 11:30हो? कैसे उठती है उवासन क्या जान सके
- 11:36हैं वैज्ञानिक कैसे होता है व्यक्ति निर्वासन?
- 11:42यह जान सका है वैज्ञानिक ये शरीर का रोई, रोई का मटेरियल परमात्मा
- 11:51लेके कहाँ से आया या अगर परमात्मा को नहीं मानते तो प्रकृति यह कहाँ
- 11:57से लेके आए बहुत से? लोग कह देते हैं बुद्धि कह लार्ज
- 12:06और सुफ्फिसिएंट नियम ही पर्याप्त है, ठीक है लेकिन ये नियम ये
- 12:18पदार्थ आया कंस। कोई अंतरिम जवाब किसी के पास है
- 12:28सब झक मार रहे हैं, सब बकवास कर रहे हैं, परमात्मा का किसी को कभी
- 12:39ना पता चला है ना कभी पता चले। सब धंदे हैं, सब धंदे हैं, इतनी
- 12:59विशाल विराट सृजना को सृजन करने वाला या ये सृजना स्वयं से पैदा
- 13:07होगी? ये मटेरियल आया कहाँ?
- 13:14वासनय रुलाती है, वासनय बडकाती है वासनय जलाती है।
- 13:32इन्हीं वासनाओं ने तुम्हारा जीवन नर का बना दिया है, देखिए आज अन्न
- 13:41दनाद तुम्हारे लिए वासना हो गया है।
- 13:47किसी के लिए मुक्ति वासना है, किसी के लिए परमात्मा वासना है,
- 13:53इच्छा करना वासना है, ज़रा सोचिए आदि युग का मानव जिसके पास पेंट
- 14:05कोड शर्त नहीं होता। वह नग्न था।
- 14:15यहाँ बहाने से पत्ते बांधे उससे वक्त बीत जाता था।
- 14:26जो कुछ मिल गया वो खा लेता था घास पात कभी उसने तमन्ना की थी एक कोट
- 14:39हो, पैंट हो, सूट हो, टाई हो बूट हो।
- 14:47सोचा था नहीं सोचा क्यों नहीं सोचा, क्योंकि उसने देखा नहीं, जब
- 15:00तुम देख लेते हो तो वासना पैदा होती।
- 15:03ये तो बड़ा मज़े मैं होगा कोरी लफाजी है परमात्मा आज के युग में
- 15:12चैनल भरे पड़े हैं मैं तुमसे कहता हूँ मत देखना मैंने तुम्हे एक
- 15:19सूत्र बताया कि 7 साल तक अगर। तुम्हारे पास जीवन के साधन है तो
- 15:28एकांत कमरे में बैठ जाना जहाँ तुम्हें कोई नहीं दिखे।
- 15:35मुझे याद आती है अलेक्जैंडर वो की वो शब्द।
- 15:40लेट मी लाइव उनसीन अननोन एंड अनलाइमेंट लेट मी डार्क स्टील
- 15:46फ्रम दी वर्ड एंड नॉट ए स्टोन टेल वी आर आई एल आई मुझे ऐसे जीने दो
- 15:55कोई पहचान ना पाई। लेकिन तुम तो पहचान बनाने को आतुर
- 16:01हो, सारा संसार तुम्हें जाने और सारा संसार तुम्हें जान भी लेगा
- 16:08तो तुम ये कभी नहीं सोचते की जो संसार तुम्हें जानेगा वो आज है कल
- 16:13नहीं रहेगा और जीसको जानेगा यानी तुमको।
- 16:17तुम आज हो कल नहीं रहोगे फिर क्या करोगे इस ख्याति का तुमने कभी
- 16:29नहीं सोचा सात वर्ष तुम्हें कोई ना दिखाए बाहर की ये सब चीजें
- 16:41धीरे धीरे बंद हो जाएँगी। ना कोई फ़ोन की घंटी बजे खुद का
- 16:48खाना बना लो, घर शिनान ध्यान कर लो, बस तुम्हे कोई दिखे आराम से
- 16:56बैठ जाओ, लेट जाओ, बैठ जाओ। चल फिर लो 7 साल यू विल गोट
- 17:10एनलाइटन तुम्हें पता चल जाएगा की परमात्मा क्या है तुम कौन सात
- 17:18वर्ष? ये मैं स्वयं अनुभव से बताता हूँ।
- 17:23आपको 24 मई को मुझे पूरे 13 वर्ष हो जाएंगे, मैं घर से बाहर नहीं
- 17:31निकलूंगा, घर बदल लिया यहाँ से वहाँ आके।
- 17:39बच्चा मुझे कार में बिठा के यहाँ ले आया, यहाँ से वहाँ ले गया बस
- 17:46कभी बीमार हुआ कभी ज़िन्दगी में दो चार दफ़े तुम मुझे डॉक्टर के
- 17:54पास ले। मुझे कोई जेल नहीं हुई थी, मैं
- 18:02बंधन में नहीं था स्वतंत्रता मैं स्वेच्छा से मैं बस बैठ गया था
- 18:12किसी अज्ञात शक्ति के कहने से मैं बैठ गया था।
- 18:20और मैं नहीं जो पाया कोई किताब नहीं पड़ी, कोई शास्त्र नहीं
- 18:23पड़ा, कोई मोबाइल नहीं देखा, कोई आज की ताजा खबर नहीं देखी।
- 18:32तुम्हें पता है कितना कूड़ा फेंक देते हैं ये लोग?
- 18:36तुम्हारे दिमाग में तुम्हें पता नहीं तो जब ये निकलेगा ना सारा
- 18:40कोड़ा तो समझायेगा वो मैंने जीवन में बहुत बड़ी गलती की भाई ये तो
- 18:49आप है ना पेट पाल रहे हैं, इनका धंधा है इन्हें टीआरपी चाहिए।
- 18:55तुम्हें क्या चाहिए? 13 वर्ष हो जाए एक स्थान पर
- 18:59बैठोगे ना अन्न खाया, सिर्फ दूध पिया।
- 19:07तुम कहोगे क्यों किया ऐसा सब कुछ उपलब्ध था मेरी मर्जी मुझे किसी
- 19:13ने दंड से नहीं किया। लेकिन मुझे किसी ने राह दिखलायी
- 19:22है कैसा? मैंने कुछ यह ट्रैन का इंसिडेंट
- 19:32हुआ लोग नहीं मानते कहते हैं हम मैंने कहा, ठीक मैं तो मानु
- 19:37तुम्हारे साथ हुआ नहीं। तुम्हें मानना भी नहीं चाहिए इन
- 19:43अचारों की गर्दन में कॉलर में हाथ डाले हैं जैसे विवेकानंद किया
- 19:49होते थे, नरेंद्रनाथ और पुसते परमात्मा है लोग कहते हाँ।
- 19:58संत कहते हाँ हैं सबके विद्वान पुरुष दुनिया में ख्याति है, उनकी
- 20:07उनसे पूछता हूँ आपने देखा है? वो कहते हैं, हाँ मैंने देखा है
- 20:15मुझे दिखा सकते हो। बोलती बंद हो जाती, बोलती बंद हो
- 20:25जाती है, लेकिन 1 दिन 13 को 23 मिल गया रामकृष्णा पर।
- 20:46परमद्म है हाँ है देखा है, हाँ देखा मुझे दिखा सकते हो, हाँ, तुम
- 20:53देखना चाहती हो हाँ, तो बैठ जाओ, आँखें बंद करके आँखें बंद करके
- 21:01बैठ गया। क्या होना है इससे सोचा?
- 21:04मन में नरेन्द्रनाथ अपनी जीवन में लिखते हैं।
- 21:09प्रथम बार किसी गुरु से मेरा संवाद हुआ और फिर मैं उसी का रह
- 21:14गया। उसी का हो के रह गया।
- 21:19गुरुदेव ने मेरे सिर के अपराध रखा।
- 21:22और मैं जाने किन गढ़ों में होता चला गया।
- 21:27आनंद तो बहुत गहरा था लेकिन वो आनंद डरावना, बहुत डर लगा और एक
- 21:34स्थान पर ऐसा लगा कि बस अब मैं ही मर जाऊंगा और जब मैं ही मर गया तो
- 21:41मैंने। परमात्मा से लेना क्या है?
- 21:46यही गुंडी तुम्हें भी तंग करती है।
- 21:50जब संत कहते हैं तुम न रहोगे तो तुम कहते हैं हमने क्या आग लगानी
- 21:54है? मुक्ति मैं ही न रहूँगा तो मैंने
- 21:58परमात्मा स्वीकार दाल गलानी। मैं ही ना बचा तो परमात्मा को
- 22:07क्या करूँगा? जाग को मारूंगा बिलकुल तारक सवाल
- 22:13है तुम्हारा? जब नरेंद्रनाथ जैसे व्यक्ति घबरा
- 22:20जाते हैं, इतने डेयरफूल रहते हैं, समझदार पढ़े लिखे वहाँ मृत्यु
- 22:29दिखाई पड़ते हैं क्योंकि उस स्तर पर जाकर।
- 22:37ट्रांसफॉर्मेशन होगा। जब तुमने अपना आपा हो ना माना था,
- 22:43वह टूटेगा, एक दम से टूटेगा और तुम्हारा रोवा रोवा सूखे पत्ते की
- 22:52तरह कांपने लग जाएगा। मैं तो गया वह चिल्लाता।
- 22:57नरेंद्र नाथ स्वामी जी मेरे माँ बाप भी हैं, भाई बहन भी हैं, मेरे
- 23:03ऊपर बड़ा उत्तरदायित्व है स्वामी रामकृष्णा का अच्छा तो फिर बाहर आ
- 23:13जाओ, हाथ उठा लिया। लेकिन तब तक उस स्थान पे जा चूके
- 23:22थे जिसे हम जंक्चर बैठ गए थे। अगर थोड़ी सी देर और रुक जाती बस
- 23:31पांच 7 मिनट। वो पांच 7 मिनट उनके लिए असहनीय
- 23:44हो गए क्योंकि मौत का तांडव नृत्य हो रहा है।
- 23:52मृत्यु शिव का रूप धर के नाच रही। वह सिर के ऊपर रखा हुआ वर्ध हस्त
- 24:01ऐसे लगता था जैसे आग में तब्दील हो गया और कंपा उसका प्राण कंपा
- 24:17फहराया मैं तो गया। कोई कहीं नहीं जाता।
- 24:31राम कृष्ण ने हाथ उठा लिया ठीक अगर तुम्हारे माँ बाप हैं तो फिर
- 24:40बाहर जाओ कल ही मुझसे किसी ने सवाल पूछा।
- 24:45वो सवाल मेरे पास अब तो नहीं है लेकिन मुझे पता है ईसा ने क्यों
- 24:57कहा अगर तुम्हारे माँ बाप हैं, भाई बहन हैं, बंधु बांधव हैं, पति
- 25:09पत्नी हैं। पुत्र पुत्री हैं और यहाँ तक कि
- 25:17तुम भी हो तो मेरे पास मत आना। तो इसका क्या अर्थ है बाबा?
- 25:36इसका अर्थ बिलकुल साफ है अगर अभी तक तुम्हारे पास शरीर है, माँ बाप
- 25:45हैं, बाल बच्चे हैं, धन दौलत है, सारी सुविधाएं हैं।
- 25:53अच्छी पजवियाँ हैं मानसन मान है अभी कुछ तुम्हारे पास सब कुछ है
- 26:00तुम मेरे पास मत आना फिर तुम्हें मेरी आवश्यकता भी क्या है?
- 26:11ये बिल्कुल द्रौपदी वाला केस है। द्रौपदी के पास सब कुछ था, पांच
- 26:17पति थे, राजघराने में ब्याह थी, विषम पदामा थे, गुरु द्रोण थे,
- 26:28धृतराष्ट्र थे। विद्युत थे, सब थे और यह उनकी
- 26:32शक्ति थी। यह उनका बल था।
- 26:38ऐसा कहते हैं अगर तुम्हारे पास सब कुछ है तो मेरे पास मत आना मेरे
- 26:45पास स्वीकृत नहीं आओगे तुम। और द्रौपदी भी स्वीकृत नहीं है।
- 26:51जब्त उसका यह भ्रम नहीं मिटा। ना तो पति काम आए, ना देवव्रत काम
- 26:59आए, ना गुरु द्रवण काम आए, ना तत्व श्री काम आए ना विद्रु काम
- 27:04आए, कोई काम नहीं है और खुद वह निर्बल है।
- 27:12ऐसा का वही शब्द याद करत ओनली दे विल एंटर इन व्हाइट और किंगडम हू
- 27:19विल बी इनोसेंट जस्ट लाइक ए चार्ज।
- 27:23इनोसेंस का मतलब सिर्फ मासूम ही नहीं होती, मासूम में तो होती ही
- 27:28होती है हेल्पलेसनेस भी। बच्चा हेल्पलेस अवस्था में उसे
- 27:40भूख लगेंगी। दूध नहीं है, उसके पास कौन
- 27:47नहलाएगा कौन खिलाएगा? कौन उसका ध्यान रखेगा?
- 27:55उसके पास कुछ भी नहीं है तो माँ उसकी सब कुछ बन जाती है, नहलाती
- 28:06है। वस्त्र पहनती है, खिलाती है, उसके
- 28:12लिए जीती है, उसके लिए अमरती है अगर तुम भी ऐसे हो जाओ, बच्चे की
- 28:22तरह इनोसेंट असहाय। ईशा कहते हैं कि फिर तुम्हारा
- 28:31मेरे पास आना संभव है। ओनली दे विल एंटर इन माइ गॉड्स
- 28:37किम मेरे स्वर्ग के राज़ में परमात्मा के स्वर्ग के राज़ में।
- 28:43वही व्यक्ति प्रवेश करेगा जो लाचार होगा, तुम्हारी बल किसी काम
- 28:52नहीं आएगा। लेकिन गुरु जी आप कहते हैं बल
- 29:05इकट्ठा करो। दो तलों से बोली गई बातें हैं बाल
- 29:17इकट्ठा करो, क्योंकि बल की व्यर्थता तुम्हें मालूम हो?
- 29:29ऊंचे से ऊंचे राज्य के दर्जे पे पहुँच जाओ, बड़ी से बड़ी मान्यता
- 29:35सम्मान तुम्हें मिल जाए, पूर्ण बलि हो जाओ, शारीरिक, मानसिक और
- 29:46तुम्हें उसकी। व्यर्थ था पता चल जाए कि व्यर्थ
- 29:50हैं सब द्रोपदी की तरह द्रोपदी को पता चला कि सब हैं और सारे वलशाली
- 30:02लेकिन मेरे लिए व्यर्थ हैं बल था। और बल द्रोपदी ने इकट्ठा किया
- 30:15लेकिन वक्त पे आके बल की व्यर्थ सशित होगी के बल तो है लेकिन
- 30:21व्यर्थ है, असहाय होगी। सब सहारे होते हुए भी असहाय होगी।
- 30:30एक ही चीज़ को कहने के दो ढंग हो गए कि सर कहते है अगर तुम्हारे
- 30:36पास सब है तो मेरे पास मत आना यानी तुम अभी लाचार नहीं हुए, तुम
- 30:42अभी असहाय नहीं हुए, तुमने अपने आप को मेरे हाथों में सौंपा।
- 30:47बच्चे की तरह बच्चे को तो फिक्र ही नहीं होता, उसे कौन संवारेगा?
- 30:54कहा, इतनी बुद्धि डेवलप होती है उसे बस मासूम हो जाओ, बच्चों की
- 31:01तरह इनोसेंस हो जाओ। असमर्थ हो जाओ, असहाय हो जाओ
- 31:06द्रौपदी की तरह तो वह बलि तुम्हें घेर लेगा।
- 31:11चारों दोस्त आज तक जो भी कोई संत हुआ रास्ते तो दो कहते हैं, लेकिन
- 31:18है तो एक ही। जिसने संकल्प इकट्ठा किया उसको यह
- 31:26पता चल गया कि संकल्प व्यर्थ है, जब तक संकल्प इतना परिपूर्ण ना हो
- 31:34जाए कि संकल्प को संकल्प की व्यर्थता का ना पता चल जाए।
- 31:39अब ये गहरे शब्द है। थोड़े से समझ लेना।
- 31:44संकल्प को संकल्प की व्यर्थता का ना पता चल जाए तब तक वो संकल्प ही
- 31:57नहीं हो सकता। संकल्प रहित।
- 32:02समर्पित नहीं हो सकता। इतना संकल्प इकट्ठा करो कि संकल्प
- 32:09तुम्हारे लिए व्यर्थ हो जाए, इतना धन इकट्ठा करो कि धन तुम्हारे लिए
- 32:16व्यर्थ हो जाए। इतनी पदबियाँ एकिट्ठी करो कि
- 32:21पदबियों को भोग भोग कर आखिर में तुम्हें ये पता चले कि पदबियाँ घर
- 32:26थी, इतनी न्यूरोन्स को भर लो, इतनी सूचनाओं को इकट्ठा कर लो।
- 32:36कि सभी संसार की प्रत्येक चीजों को संग्रहित करने के बावजूद भी
- 32:41तुम पाओ कि यह व्यर्थ है। वो न मिला जो मुझे चाहिए।
- 32:52तुमने पूछा पुत्र और तो दुख है जमाने में?
- 33:03ये नया दुख है। ये अनंतनाग अभी शुरू नहीं हुआ और
- 33:11जिसकी शुरू हो गया उसको क्या होगा?
- 33:16मेरे पास बहुत से लोग आ जाते हैं। बाबा 35 साल हो गए, ये अनंतनाग
- 33:22शुरू हो गया। पहली बात तो यही नहीं पता कि अनाध
- 33:25नाद है कि इन टस की बिमारी है तो फिर शुरू हो गया तो हमें मिला
- 33:35क्यों नहीं आप तो कहते हो कि बिल्कुल बस शुरू हो जाना चाहिए।
- 33:48नाद तो शुरू हो गया, लेकिन तुम नाद के उदगम तक कहाँ पहुंचे?
- 33:57तुमने नाद को बहुत दूर से सुना और बहुत दूर से तुम रात के सन्नाटे
- 34:01में कोई भी सुन सकता है। तुम्हें नहीं शुरू हुआ नाद।
- 34:07तो खेतों खलिहानों में रात को चले जाओ, ये साउंड ऑफ साइलेंस इट इस
- 34:13अनाथनाथ सविन सुनी होगी खेतों की वीरानियों में निकल जाना।
- 34:24खलिहानों में किसी पेड़ के वृक्ष पे बैठ जाना और फिर इस सन्नाटे की
- 34:30आवाज़ को सुन यही तो है लेकिन दूर है दूर से आती हुई आवाज़ तुम्हें
- 34:38ऐसी सुनाई पड़ती है। ये है आनंदनाथ।
- 34:44लेकिन बड़ी दूर से सुनते सुनते यह तुम्हें सन्नाटे की आवाज जैसी
- 34:48लगेंगी। सुनता तो सबको है क्योंकि संसार
- 34:53में वही तो है एक ही है और वह अपनी मौजूदगी इसी आवाज के साथ
- 35:01प्रदर्शित करता है। बस तुम सुनने वाले होने चाहिए
- 35:06तुम्हें क्यों नहीं सुनाई पड़ा, क्योंकि अब तक तुम्हारा मन बोलता
- 35:10है, तुम उस स्थान पर नहीं आए जहाँ मन ने बोलना बंद कर दिया हो।
- 35:19बस एक क्षण के लिए तुम्हारा मन रुक गया।
- 35:23तो आनंदनाथ शुरू हो जाएगा और वो जब वो एक बार शुरू हो गया तो
- 35:28तुम्हें बोतल पता चल जाएगा। जहा जाकर मन होना होता है वो बार
- 35:35बार तुम्हारा चित्र करेगा। वही जाने का तुम्हें पता भी नहीं
- 35:38चलेगा और नाद चौबीसों घंटे चलता रहेगा।
- 35:45बाबा ने कहा कि कण कण में मैं ही हूँ, बीन ना में ना ही कोठा मेरे
- 35:54बिना कोई जगह नहीं। जेता कित्ता तेत्ता?
- 36:01नाम ये सारा पसारा मैं ही तुमने नाम को कुछ और रह लिया तुमने नाम
- 36:08को शब्दों में ढा लिया, वह गुरु में ढा लिया, सतनाम में ढा लिया
- 36:15नाम शब्दों में नहीं आता शब्दों की इतनी हसीर कहाँ?
- 36:20के नाम उसमें समा जाए। गागर की इतनी हसीत होती है कि
- 36:24सागर समा जाए शब्द तो तुम्हारी बना ही है वो नाद तुम्हारा बनाया
- 36:32नहीं है, जिसके शुरू होगा वो जानता है कैसी मिठी आवाज इसको भी
- 36:38छोड़ो। तुम सन्नाटे की आवाज में नहीं गए,
- 36:41रात को कभी से ऊपर चले जाया करो, रात का सन्नाटा सुना करो, ये
- 36:48तुमने बनाया किसने बनाया? ये उसके होने की तरकीब है, ये
- 36:55उसके होने का ढंग है। उसका होना एहसास दिलाता है तो मैं
- 37:02इस रूप में इस आवाज के रूप में ये उसका उदघोष है कि मैं हूँ ये
- 37:12लगातार सन्नाटा। उसके होने का प्रमाण है।
- 37:16तुम कहते हो परमात्मा कहाँ है, बताओ ये सुनो सिन्नाटिक ये
- 37:20परमात्मा ही है। जरूरी नहीं कि तुम्हें ज्ञान हो
- 37:26कि ये परमात्मा है, बस तुम्हें पता नहीं।
- 37:33ज़रा इसके संघ, संघ, होलो इसके संघ, संघ, होलो और 1 दिन तुम वहाँ
- 37:44पहुँच जाओगे जहाँ इसका उदगम स्रोत है इसका मूल है मन तो ज्योत
- 37:51स्वरूप है अपना मूल प्रश्न। यहाँ से मूल यहाँ से उठता है उदगम
- 37:56स्रोत है किसका नाक का ऊपर तलक आता है और रोमा रोमा वही है और
- 38:09रोमा रोमा वही है। ये सन्नाटे की आवाज़ तुम्हें बता
- 38:12देती है। ज़रा थोड़ी सी शांति में जाओ,
- 38:16सन्नाटा शुरू हो जाएगा। अब रात को सब ठहर जाता है, कोई
- 38:21ट्रैफिक नहीं होती, कोई आवाज नहीं होती तो तुम्हें स्पष्ट सुनना ही
- 38:28पड़ता है या दिन में भी कहीं खो नहीं जाता।
- 38:33तुम दिन में भी चले जाना, खेतों खलिहानों में तुम्हें यही सुनाई
- 38:37पड़ेगा और जैसे ही तुम वहाँ से बाजार में आ गए वजार के कोलहल में
- 38:42यह सन्नाटा खो नहीं जाएगा। बस तुमने सुनना बंद कर दिया तुमने
- 38:46उससे ऊंची आवाज शुरू कर दी तुम ऊंची आवाज में।
- 39:00अपेक्षाएं, इच्छाएं तुम्हारी कामनाएं तुम्हारी वासना ही बन
- 39:06जाती है। अब देखो और नहीं तो नया जखीरा
- 39:12कढ़ा करती है और तो दुख में है। और तो दुख हैं जमाने में बहुत से
- 39:20लेकिन और तो दुख हैं जमाने में बहुत से लेकिन ये अनंत नाद शुरू
- 39:28नहीं हुआ। ये सबसे बड़ा दुख है अब हसो मत
- 39:33भाई प्रश्न पूछा है जाए? ये किस्म किसने बता दिया?
- 39:42तुम्हें के ये होता है और अगर कल को ये न हुआ तो फिर क्या करोगे
- 39:53तुमने अपना जीवन ऐसे ही तो बताया है।
- 40:00ये आचार्य बड़ी बड़ी पदियों पर पहुँच गए वोकबुलरी बहुत है सर और
- 40:13आचार्य इनसे ज्यादा तुम्हे कोई भटका नहीं सकता।
- 40:20क्यों? क्योंकि इनकी बातें तुम्हारी
- 40:27तर्कों को काटती हैं और तुम समझ लेते हो बड़ा बड़ा विलक्षण पुरुष।
- 40:37तुम्हारी तर्क को काटने वाला विलक्षित कोष एक तो ये परिभाषा
- 40:44तुमने बना ली, संत अपनी परिभाषा अलग बताता है, संत कहता है मैं
- 40:51तर्कों को नहीं काटता हूँ। मैं तुम्हें उस आनंद में ले जाता
- 40:55हूँ जो तर्क का तीर्थ है, यहाँ काटने, बाटने का कोई सवाल नहीं है
- 41:02न कटोगे न बटोगे यहाँ काटने बाटने की कोई बात नहीं है।
- 41:13संत कहता है वो मूर्ख हैं जो तुम्हारी तर्कों को काटकर तुम्हें
- 41:19जवाब देते हैं। मैं तुम्हें वहाँ ले जाऊंगा जहाँ
- 41:25किसी चीज़ को काटना नहीं पड़ता जहाँ होना पड़ता है।
- 41:33जहाँ तुम खुद मौजूद हो वहाँ कुछ कटता नहीं वहाँ तुम शस्त्र भी जाए
- 41:40तो शस्त्र भी नहीं काट सकते वहाँ तुम्हारी कैंची और तलवार वहाँ
- 41:44नहीं जलते वहाँ तुम्हारी आग नहीं जलाती नैनम छिदंती शस्त्रणा।
- 41:51नैनम दाहती पापका मैं तुम्हारी बाड़ तुम्हें बहाती नहीं वह
- 41:56तुम्हारा तूफान तुम्हें उड़ाता है, उस स्थान पर संत ले जाता है
- 42:01तुम्हें संत तुम्हारी बातों को जवाब नहीं देता।
- 42:11और जब तक वो जवाब देते हैं वो जानता है।
- 42:18आचार्यों के पाशा के सर के पाशा के तुम्हारी बुधई का हल मिल जाता
- 42:25है, जो उलझे हुए प्रश्न। उनका जवाब मिल जाता है, लेकिन
- 42:34क्या तुम उस रस को पी पाते हो? जीस रस को पीने के बाद कोई प्रश्न
- 42:43उठता है जीस रस को पी लिया मेरा ने।
- 42:50प्रश्न नहीं उठा। नृत्य उठा जीस रस को पी लिया।
- 42:56नानक ने प्रश्न नहीं उठा, गायन उठा जीस रस को पी लिया।
- 43:06कबीर प्रश्न नहीं उठा। मतवारा बन उठा।
- 43:18कबीर कहते हैं, जब मैंने वो रस किया तो भटक ने छोड़ दिया।
- 43:27प्रश्न खत्म हो गया। कबीर बोलते हैं जिसने मानसरोवर
- 43:44में अठखेरियां खानी सीख ली, वह तालतरयों के कीचड़ में खूब
- 43:50उलझेगा। वहीं तुमने उस आनंद की एक भूँथ भी
- 43:55नहीं चुकी है। उसका स्वाद कैसा होता है ये भी
- 43:58तुमने पता है और ये बहुत दुखदायी क्षण है तुम्हारे लिए और संत
- 44:08इसलिए करुणा हृदय हो जाता है। संत हृदय।
- 44:12नवनीत समाना तुम्हारे लटके हुए चेहरे से कोई खुशी नहीं ज़रा सोचो
- 44:23कितनी देर हो गई तुम भीतर से मुस्कराए भीतर से अट्टहास नहीं
- 44:29गुजरा खुशी से। कुछ बेला याद करो वराचन समय में
- 44:39उतरो, स्मृतियों में उतर जाओ, देखो पिछली बार तुम कब हँसे थे?
- 44:51तुम पाओगे बहुत देर हो गयी। ह सो च त आ सु भ र ये सो च।
- 45:22तो आंसू भराएं मुदतें हो गई मुस्कुराए।
- 45:41आंसू चा तो आंसू बरा। कोई सांत तुम्हे याद करत है, इन
- 45:54आंसू से भरे भी कोई दुनिया है आज प्रत्येक व्यक्ति के दिमाग पे
- 46:00इतना बोझ है। इसकी नब्ज़ इतनी कसी जा चुकी है
- 46:08कि थोड़ा सा झटका और ब्रेन हेमरेज हो जाता है।
- 46:14मानवता किस कगार पर पहुँच गई है इसलिए मैं कहता हूँ मानवता आज
- 46:18पागलपन के कगार पर पहुँच चुकी है। दिल की नाजुकुर हैं, दिल की
- 46:39नाजुकुर हैं। टूटती हैं।
- 46:49कोई इतना भी ना याद आए। तो आंसू।
- 47:12जीस घड़ी तुम रुक गए और जीस घड़ी पे तुमने रुक के सोचा तुम पिछली
- 47:21बार कब मुस्कराए थे। तो तुम पाओगे बरसों बरसों
- 47:34मुस्कराये हुए बड़े दुख के मुकाम पे है आज मानवता।
- 47:43तुम कहाँ अटक गए हो? इन्हीं वासनाओं के चक्कर में पता
- 47:52बता तुमको कुछ नहीं है और पता बता उनको भी कुछ नहीं है, मैं तुम्हें
- 47:58कहता हूँ, इन आचार्यों के कॉलर में हाथ डालूंगा, देखा
- 48:02ब्रह्मात्मा। इनका कराओ, नार्को बिलकुल बोलेंगे
- 48:12सच मेरा भी करो, नार्को परमात्मा है तुमने देखा?
- 48:26दूध का दूध भर पानी का पानी हो जाएगा।
- 48:29तुम ज्यादा जेहमत में क्यों पढ़ो बराबर ले डालो सभी को।
- 48:43क्या मजाक बनाने का है कोई किस दिन वह टोपी, कोई मेकअप करके बैठा
- 49:00है भीतर धोत है। भीतर दूसरे को लूटने की तमन्ना और
- 49:10दिखावा ये करते हैं कि हम तुम्हारे आंसू पोंछने हैं।
- 49:18दुनिया कहाँ पहुँच गई है आज? तुम किसके चंगुल में फंस गए हो?
- 49:25आज वैसे तो और भी बड़े दुख है जमाने में लेकिन ये दुःख सबसे
- 49:34बड़ा भारी है के अना जनार अभी शुरू नहीं हुए।
- 49:41तुम्हें तो परमात्मा भी नहीं मिला, मुक्ति भी नहीं मिली कितनी
- 49:45भारी दुख की बात है पूछना इनसे परमात्मा होता है तुमने देखा है?
- 49:55अगर ये सत्यवादी होंगे तो ये कहेंगे बिलकुल नहीं देखा हमने वी
- 50:03अरे ओनली टु एक्सप्लेन। हम सिर्फ व्याख्या कर रहे हैं,
- 50:08व्याख्या भी कर रहे हैं शास्त्रों की वह उपनिश्चित हों, षष्टावक्र
- 50:12हों वो कृष्ण गीता। पता पता हमें कुछ नहीं न तो हम उस
- 50:19खुशी को देखा न हमने उस स्थल को छुआ न हम जानते हैं जहाँ हँसी की
- 50:26फुलकारियां फूटती हैं, जहाँ वो अलबेले गुलशन खेलते हैं।
- 50:34जिसकी बहार की खुशबू तुमने आज तक छूई न थी, फिजाएं लहरा जाती हैं
- 50:41वहाँ जाकर झरने बरस पड़ते हैं क्या तुमने वो छुआ तुमने देखा?
- 50:54कोई शंथ कहेगा हाँ, मैंने देखा आई ऑथेंटिफाई मैं मोहर लगाता हूँ,
- 51:05तुम शास्त्रों की बात को व्याख्या करते हो एक्सप्लेन करते हो और मैं
- 51:12कहता हूँ आंखन देखी? तुम कहते कागज़ की लिखी बस यही
- 51:17फैसला हो जाता है, फिर क्यों मगज खपाई करें और थोड़ी है और कम है
- 51:23दुख है जमाने में ये नया बखीरा तुमने छेड़ लिया अन्नत नादिनी
- 51:30शुरू हुआ। लोग मुझे कह देते हैं 100 में से
- 51:3999 प्रश्न बाबा व्यर्थ आते हैं। मैंने कहा गलत 100 के 100 प्रश्न
- 51:48व्यर्थ होते हैं, फिर हम बोलते क्यों हैं?
- 51:52बस यही तो मुसीबत है, हम बोलते हैं लेकिन बोलने के फौरन बात हमें
- 52:01बड़ा प्रायश्चित होता है। काश न बोले तो क्योंकि बात तो चुप
- 52:09क्यों करनी थी? बात तो परमों की करनी थी और बात
- 52:16कर गए हम बातों की शब्दों की। ये कहाँ की बात हुई?
- 52:27बात तो करनी थी उस परमों की जहाँ जाके सब कहना चाहता है।
- 52:34यहाँ दिल की धड़कनों की आवाज भी अवादत में खल्लर डालती है।
- 52:39वो आ रहे हैं सांसों ज़रा अहिस्ता चलो वो आ रहे हैं सांसों ज़रा
- 52:47अहिस्ता चलो। दिल की धड़कनों से भी इबादत में
- 52:51खलल पड़ती है। दिल धड़कता है तो इबादत में खलल
- 52:56पड़ती है। पहुंचना तो वहाँ है।
- 53:08तार्किक दृष्टि से हम परमात्मा व्याख्या करें।
- 53:16अगर सत्य कुछ तो परमात्मा ना आज तक कभी किसी ने देखा, ना कृष्ण
- 53:24ने, ना कबीर ने ना किसी फकीर। किसी ने भी परमात्मा को देखा
- 53:39परमात्मा को देखने के मसले में सब अधीन और अगर कोई कहे कि मैंने
- 53:46परमात्मा को देखा तो जूती ने गा लिया।
- 53:51तो मैं सत्य बता रहा हूँ। परमात्मा को चिखा जा सकता है जैसे
- 54:06नाक देख नहीं सकता, आँखें सूंघ नहीं सकतीं, काँ बोल नहीं सकते।
- 54:14वैसे ही परमात्मा देखा नहीं जा सकता।
- 54:20परमात्मा का स्वाद चखा जा सकता है, वो भी कैसे परमात्मा के करीब
- 54:30जाके उसकी महक को। तुम जब प्रथम बार सुंग हो गए तो
- 54:38तुम कहोगे वाह क्या मजेदार, ये तो बड़ी शानदार, सुगंधी और तुम उसकी
- 54:47तरफ खींचते चले जाओगे जैसे परवाना।
- 54:55किसी क्षमा ने कभी किसी परमाने को खींचा नहीं, ध्यान रखना किसी
- 55:03क्षमा ने किसी परमाने को कभी नहीं खींचा।
- 55:12लेकिन परवाना खुद ही खिसा जाता है।
- 55:14क्षमा के कारण ये अजीब मसला है ना?
- 55:19जब तुमने प्रथम बार एक बार उसकी करीबी महसूस कर रही हो तो वह
- 55:27करीबी तुम्हे ले डूबेगी। बार बार से तुम चाहोगे की हम उसके
- 55:34करीब पर जाएं। उसकी करीबी का एहसास बुध को क्या
- 55:41हुआ ये होता है एहसास। अच्छे भले बैठे थे किसी दोस्त के
- 55:54यहाँ पर आ गया कोई फंक्शन तो जाना था प्रथम बार जाना था और सड़क पे
- 56:04निकल रहे थे अपने रथ के ऊपर बैठ के।
- 56:08वह पिता बैठे बैठे घबराए जा रहे थे।
- 56:11प्रथम बार बच्चा जा रहा है। संतों ने बताया कि जन्मपत्री
- 56:15देखकर यह या तो संत बनेगा। चक्रवर्ती या बनेगा।
- 56:21चक्रवर्ती समर संत तो मैं बनाना नहीं चाहता।
- 56:25कौन बाप चाहता है मेरा बच्चा संत हो जाए कोई नहीं सर कौन बच्चा
- 56:32चाहता है कौन माँ बाप चाहता है मेरा बच्चा भगत सिंह बन जाए मेरा
- 56:40बच्चा उद्यम सिंह बन जाए, कोई नहीं चाहता।
- 56:46सभी चाहते हैं भगत सिंह तो पैदा हुए उधम सिंह तो पैदा हुए और हो
- 56:53भी हमारे शहर में, हम कहने वाले हो गए के गीदड़ बहा में जनमत।
- 57:04लेकिन हो पड़ोसियों के पैसे अपने ही बच्चों को फांसी पर लटकते हुए
- 57:13कौन माँ स्वीकार करेगी? तुम दूसरों की कुर्बानियों पर
- 57:25तारीफ बजाते हो और आज तो जैसी दशा हो गई है तो मैं दूसरे चैनल पे
- 57:34बोलूँगा ये चैनल तो आपके आनंद के लिए है?
- 57:42वो चैनल आपकी शरीर की समस्याओं के लिए है।
- 57:47ये दोनों अलग अलग बातें हैं। यद्यपि वो प्रथम है ऊके भजन न होए
- 57:52गोपाल ये लो अपनी कंठी। वहाँ से होती है शुरुआत और ये लोग
- 58:01शुरुआत को समझते हैं। इसलिए मुझे वो चैनल शुरू करना
- 58:12पड़ा। उसमें मेरा योगदान सब हुक्म है।
- 58:23हुक्म है अंदर सबको बाहर हुक्म ना कोई।
- 58:27हुक्मय अंदर सब को मुझसे ये मत पूछना कि तुमने क्या किया बाबा
- 58:33मैंने कुछ नहीं किया, मैंने तो ये बनने के लिए भी कुछ नहीं किया।
- 58:39ये भी तो उसने खुद ही करवा दिया और ट्रेन का इंसिडेंट मैं करवा
- 58:44सकता था। मेरे हाथ पर ले कुछ नहीं सब उसका
- 58:50है और सब उसके हाथ पर ले हुक्म में अंदर सबको बाहर हुक्म ना खो
- 58:58नानक हुक्म जे बुजे तह मैं कहे ना कोई जिसने उसको बूझ लिया।
- 59:08खोपड़ी झिल जाती है वहाँ जाके यह किसने कराया?
- 59:15किसने इस 70 किलो की लॉस को चौथे पायदान से गाड़ी के अंदर भटक
- 59:21दिया? उठा के।
- 59:23इतना लाजार और क्षण भर बाद गाड़ी प्लेटफार्म के बीच में आ जाती है
- 59:34और तुम्हारे बाबा जी टाइम टाइम फिर उसी की हेतु अनुकम्पा है।
- 59:42कितनी बार मृत्यु के मुख से बचा अभी भी साक्षी है उस घटना की तो
- 59:50अभी साक्षी है क्या? मैं खुद की होशियारी से बचा।
- 1:00:00से सयानप लक्खों होवे तो एक का न चलेगा तुम 1000 सयानपों से युक्त
- 1:00:07हो तुम लाख सयानपों से युक्त हो तुम्हारी एक भी सयानप उस परमात्मा
- 1:00:12के लिए काम नहीं करती, सेंसार में काम कर जाती हो सेंसार में इतना
- 1:00:16ही काम करती की तुम इस जेब में से निकाल के।
- 1:00:19खीस से वाली जेब में डाल लेते हो चोर जेब में डाल लेते हो ये तो
- 1:00:23तुम कुछ कर सकते हो और तुम यही कुछ करते हो यहाँ उससे छीना
- 1:00:32तुम्हारे पास आया तुमसे किसने छीना उसके पास गया लेकिन राहत पर।
- 1:00:39दाने दाने पे स्टेम पे है परमात्मा, ना यहाँ तुम्हारा कुछ
- 1:00:45हो सकता है ना तुम्हारा, कभी यहाँ कुछ हुआ है बस मन को खुश करने की
- 1:00:51बातें हैं थोड़ी देर के लिए कुछ कर लिया करो।
- 1:00:57कोई हर्जा भी तो नहीं और खुशी तो मिली नहीं तो चलो इसी से ही काम
- 1:01:05दिला रहे हो। नानक हुक्म जे बुजह जिसने बूझ
- 1:01:22लिया उसका हुक्म जिसने उसको बूझ लिया, उसके दृश्य हाथों को देख
- 1:01:30लिया कि वह न जा रहा है कठपुतली, हम नाच रहे हैं।
- 1:01:37हम खुद खुद नहीं नाच रहे हैं, हमें निचा रहा है होम में कहे न
- 1:01:43कोई यह जिसने जहाँ दिया वो ये नहीं कहता कि मैं नाच रहा हूँ तो
- 1:01:51जो कहती हैं मैं नाच रहा हूँ, वो गलत नहीं है, बस अज्ञानी है।
- 1:02:00जो कहते हैं मैं नहीं नाच रहा, वह नाचा रहा है, वो ज्ञानी है किसने
- 1:02:11जान लिया? अज्ञात हाथों की कठपुतली हैं हम?
- 1:02:21वह ज्ञानी हुआ जिसने नहीं जाना के अज्ञात हाथों की कठपुतली हैं।
- 1:02:27हम वह कहेगा हम करते हैं बल इकट्ठा करो, करके दिखाएं तुम क्या
- 1:02:33करते हो? दिखाओगे एक दम धड़म से।
- 1:02:39माटी में मिल के माटी हो जाओगे ये सब जमेरी चलते रहेंगे।
- 1:02:51पानी में मिल के पानी। अंजाम एक पानी में मिल के पानी
- 1:03:07अंजाम एक पानी बिगड़ेगी और बनेगी। दुनिया।
- 1:03:17यहीं रहेंगी, बिगड़ेगी और बनेगी। कभी तेरे पास चला गया, कभी मेरे
- 1:03:26पास चला गया, कभी पैसा उसका हो गया, कभी उसका हो गया।
- 1:03:30धरती पे लकीरें खींची गईं। कभी पड़ोसी का हो गया, कभी दूसरे
- 1:03:37पड़ोसी का हो। गया, बिगड़ेगी और बनेगी।
- 1:03:45दुनिया नहीं रहेंगी तो मालिक तो मर जाओगे।
- 1:03:54बिगड़े की ओर बनेगी। दुनिया यहीं रहेंगी धरती तो यहीं
- 1:04:02रहेंगी तुम ये पाग लोगे भ्रम की ये लकीरें मेरी।
- 1:04:12पटवारी की जमाबंदी में नाम तुम्हारा कहोगे हाँ मेरी है।
- 1:04:23बिगड़ेगी और बनेगी दुनिया यहीं। रहेंगी।
- 1:04:31होंगे यही झमेले होंगे यही झमेले ये ज़िन्दगी के मेले दुनिया में
- 1:04:45कम रहेंगे अफसोस। हम न होंगे अफसोस हम न होंगे ये
- 1:04:56ज़िन्दगी। के मेले ये ज़िन्दगी के।
- 1:05:01मेले ये बिगड़ेगी और बनेगी, लेकिन याद रखना तुम्हारे संग नहीं
- 1:05:08जाएगी। तुम गोजी में डाल कर इसको कहीं ले
- 1:05:12जा नहीं सकता। ये जिसकी है वो मालिक है सच्चा
- 1:05:18मालिक उसे तुम नकड़ी नकड़ी के मालिक हो, तुमने स्टेम्प लगा दी
- 1:05:24अपनी थोड़ी देर के लिए और थोड़ी देर में हवाएं।
- 1:05:29आंधियां तूफान आएँगे और तुम्हारी इस लकीर को मीटर जाएंगे।
- 1:05:34ये छोड़ो जमीनों को छोड़ो, तुम्हारे शरीर की जमीन धरती तक
- 1:05:39नहीं बचेगा। ज़रा उड़ जान प्राण तेरे।
- 1:05:48फिर क्यों नहीं बोल दा होमे वाली कुंजिया तू फिर क्यों?
- 1:05:59नहीं। खोल दा होमे वाली कुंजिया।
- 1:06:08तू फिर क्यों नहीं खोलता उड़ जान प्राण तेरे फिर क्यों नी बोल दा?
- 1:06:25होमे वाली कुंजिया तुम। फिर क्यों नहीं खोल दा?
- 1:06:34किथे तेरी आंकड़ा कहाँ गई तेरी आँखें।
- 1:06:40किथे अभिमानोए। पर दा परोसा कोई ना ऐसी तेरी जान,
- 1:06:50ओय मिट्टी दे आ। अरे, मिट्टी के पुतले तू किसका मन
- 1:07:01करता है? 1 दिन धर्म से गिर पड़ेगा किसी
- 1:07:09माटी के ऊपर, जैसे कहता है कि ये मेरी फिर ये माटी भी तेरी ना
- 1:07:15रहेंगी और ये शरीर के माटी भी तेरी ना रहेंगी, इस माटी के भीतर
- 1:07:20ही दफन हो जायेगा। तुमने सोचा क्या है, तुम्हारा ऐसा
- 1:07:33क्या होगा? तुम सोचते हो तो फिर क्या करें?
- 1:07:41काम तो करना होता है, रोटी का जुगाड़ तो फिर भी नहीं होता।
- 1:07:49हो जाएगा वो भी हो जाएगा बस तुम पंखे लेना छोड़ देना, रोटी का
- 1:08:01जुगाड़ भी हो जाएगा, वस्त्र का जुगाड़ भी हो जाएगा।
- 1:08:08सामान का जुगाड़ भी हो जाएगा, मकान का जुगाड़ भी हो जाएगा, सब
- 1:08:12हो जाएगा, लेकिन तुम पंगे लेने, बंद कर देना, पंगे, पंगे यही।
- 1:08:24धर्म जाति पाति एक नूरते हैं सब जगहों पर है ये तुम्हारी जो
- 1:08:34शरारती है ना, इन्होंने हिंदुस्तान का बेड़ा गर्क कर
- 1:08:39दिया। इन शरारतों से बाज तुम यहाँ से
- 1:08:49कुछ नहीं लेके जाओ जो तुम्हारा था और जो तुम हो वो तुम्हारा और तुम
- 1:09:04कबर के भीतर घाट दिए जाओगे। यही तुम्हारा काल बनेगी धरती जो
- 1:09:10तुम तुम्हारी कहते थे उसी के भीतर होगी तुम्हारी खबर का तुम्हारी
- 1:09:21ठगी यहाँ से लेगी इतना मटेरियल कहाँ से ले के आया बड़ा?
- 1:09:33तुम्हारी 1000 लाख सैणप नहीं चलेगी से से सैणप लक होवे तो एक
- 1:09:40कने चले है श्याने। अपने भीतरो कोई एक तरीका नहीं है।
- 1:09:55परमात्मा तक पहुंचने का की जरूरी ही अनाध न शुरू हो जाए तो ही तुम
- 1:10:00परमात्मा के पास पहुँच सकते हो। केंद्र तक पहुंचने के लिए सिफियर
- 1:10:06से लाखों रास्ते जाते हैं। तुम्हारे लिए कोई और बना होगा।
- 1:10:11तुम क्यों घबराते हो, गुरु से पूछ लो गुरु तुम्हें रास्ता बताती रहा
- 1:10:17और बताती तुम घबराओ मत और तुम इस चीज़ के साथ चिपटो मत।
- 1:10:26क्योंकि चिपटोगे तो तुम अंधविश्वासी हो जाओगे।
- 1:10:29इन्हें ही अंधभक्त कहते हैं, तुम्हें पता नहीं है कि परमात्मा
- 1:10:33है कि नहीं, लेकिन तुम झंडा झंडा आत्मा कह रखते हो, यही तुम्हारी
- 1:10:45मुसीबत है। ये फिर तुम कहते हो, हम तो बाबा
- 1:10:48दुखी हैं, दुखी तुम सच्चो ये दुख तुमने खुद ही पादा है और कोई
- 1:11:02रास्ता मिल जाएगा नहीं शुरू हुआ नहीं शुरू हुआ और बहुत रास्ते हैं
- 1:11:09उस केंद्र तक पहुंचने से। परिधि से केंद्र तक जाने के
- 1:11:17अनगणित रास्ते होते हैं। कोई और मिल जाएगा तो हमारे लिए
- 1:11:20कुछ और रास्ता चुना होगा उसने। तुम उसी का अंश हो और उसी का अंश
- 1:11:37उसको मिलने के लिए छटपटा रहा है। आओ तुम्हें मैं उसके पास ले चलो।
- 1:11:50हे दिल दीवानी हे दिल दीवानी खेल है क्या?
- 1:12:08जाने दर्द भरा ये गीत कहाँ से इन होंठों पे आए?
- 1:12:29दूर कहीं ले जाए भूल गया क्या? भूल के भी हैं।
- 1:12:49मुझको याद ज़रा सा भूल गया क्या भूलके?
- 1:13:07भी है मुझको याद ज़रा सा फिर भी मेरा मन प्यार सा।
- 1:13:26मेरे नैन सावन बा दूँ फिर भी मेरा मन प्यासा फिर भी मेरा।
- 1:13:46मन प्यासा मेरे राम श्रीराम।
- 1:14:10श्रीराम, श्री कृष्ण गोविंद, हरे मुरारी।
- 1:14:25हे नाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मोरारी हे नाथ
- 1:14:35नारायण वासुदेव हितमात स्वामी। इतमात स्वामी सखा हमार हेनाथ
- 1:14:50नारायण वासुदेव। श्री कृष्ण।
- 1:14:56गोविंद हरे मुरारी हेनाथ नारायण वासु।
- 1:15:04देवा धन्यवाद।