Latest / Baba ji Vijay Vats / 5 Apr 26 - भगवान बुद्ध ने 'परमात्मा नहीं है' ऐसा क्यों कहा? अविश्वास, तरक्की को कैसे रोकता है?
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- 0:12यशराज ऑस्ट्रेलिया से लिखते हैं कि क्या मैं आपसे फ़ोन पर बात कर
- 0:19सकता हूँ? 5 मिनट क्योंकि जब मैं आपसे बात
- 0:25करता हूँ तो मैं उसी तल पर चला जाता हूँ।
- 0:30जीस सतल को आप परमात्मा कहते हो आँखों से झरझर आंसू बहने लगते
- 0:35हैं। आपके पास भी तो ऐसा साधन नहीं है
- 0:42जो हम आपके पास आकर रुक सके, अध्यात्म के भी, संसार के भी।
- 0:51अभावग्रस्त लोगों के मेरे पास हजारों की मात्रा में कमेंट हो
- 0:56जाते हैं। हमारे यहाँ हमारे पड़ोस में सेठ
- 1:04मराठी लाल जी रहते थे। नगर पालिका के प्रेसिडेंट।
- 1:10बिल्कुल पड़ोस में सांझी दीवार थे।
- 1:14बॉक्सरी चुनाव जीत जाते और प्रेसिडेंट बन जाते ईमानदार
- 1:19व्यक्ति थे सीट से जल्दी मद्रास में और कई जगहों पर।
- 1:31उनके मिल्ज चलते थे, फ्लोर मिल्ज वगैरह।
- 1:38यहाँ अर्थ की दुकान भी बहुत अच्छी चलती थी और वो हर बार इलेक्शन में
- 1:46खड़े होते हैं और हम क्योंकि। उनके पड़ोसी थे हम उनका सदा ही
- 1:52साथ देते पत्थर पे वोटर लिस्ट बनाना सारा काम में बैठ के करता
- 1:58है कुदरती हमारे वर्ड का एक दूसरा व्यक्ति इलेक्शन में उनके बराबर
- 2:05खड़ा हो गया। उनका नाम था सागर चंद दवाइयों
- 2:09वाले राज़ मेडिकल स्टोर। उनको चुनाव चिन्ह मिला लालटेन का
- 2:23खूब मनादी की वार्ड होता कितना का है?
- 2:266000 1200 1500 लोग घर घर जाके। गांव के हाथर गई चाची, मामी,
- 2:34फूफी, भाभी, माँ, बेटी, पुत्र, चाचा, ताया म फूफा।
- 2:48सबके चरण स्पर्श किए सबकी मिलते कि अब के वोट हमको सब ने कहा वोट
- 2:55आपको ठीक है। इलेक्शन का दना क्या?
- 3:06वोट डले गिनती होने लगी। तो सागर जयंती दवाइयों वालों के
- 3:10तीन बोर्डें निकले तो कहने लगा मैं वहाँ से बैठी थी, थोड़ी ही
- 3:26दूरी पर कम था बेटा, एक वोट तो मेरे ही।
- 3:33मैंने कहा हाँ तऊ दूसरी वोट तेरी ताई की है, मैंने कहा हाँ तऊ ये
- 3:43तीसरी कुण है गाली ने गाली मैंने कहा ताऊ जी एक तो बेचारे ने वोट
- 3:55डाला। ऊपर से तुम गाली निकालते हो तो
- 4:03वही ये हाल है, मैंने सोचा था जो मुझे क्या पता था लोगों को।
- 4:12जो कहते हैं हमरा जानते हैं रंगे गुलस्ता घोस से देखा तो अंधे
- 4:19निकले जो कहते जानते हैं हम रंगे गुलस्ता गोस से देखा तो अंधे
- 4:29निकले। रंगों की पहचान ही नहीं होने जब
- 4:35मैंने कहा 25,00,00,000 वो कहता, 25,00,00,000 कहाँ से लेके आओगे
- 4:39तो हमारा कर्जा तुमने भरा है। तारकों का बिलकुल ठीक था लेकिन
- 4:48देखिए। वाल्मीकि सदा ही रत्नाकर नहीं
- 4:51नहीं रहा करते, वाल्मीकि कभी रत्नाकर से वाल्मीकि भी हो जाया
- 4:59करते हैं। बहुत से लोग कह देते हैं, हम आपको
- 5:07जानते हैं, नहीं जानते भाई पल में परला होय खे।
- 5:13पल में बदल जाता है आदमी कहाँ जानते हो तुम जानते होगे मुझे कल
- 5:20का कल का विजय भोत से जानते होगे मुझे शर्मा जी जानते होगे पंडित
- 5:27जी जानते होगे। वो ही इन सड़कों पर आवारा घूमता
- 5:32हुआ, वो ही ठंडी में ठिठुरता हुआ उसको जानते होगे।
- 5:42तुम बिलाशक लेकिन बीच का युग है, जो 23 वर्ष की अंतक तपस्या।
- 5:50और ये 14 वर्ष का अज्ञात वर्ष और 14 वर्ष की तप और तपस्या काफी
- 5:57जानते हो तुम मुझे तुमने देखा है मुझे कभी सड़कों पे फिरते हुए।
- 6:06नहीं, तुम नहीं जानते, आज आज नहीं जानते, तुम कल का जानते हो पर वो
- 6:11ठीक जानते हो, जो भी जानते हो ठीक जानते हो पालमा के भी डाकू थे
- 6:23बिलकुल थे। अगली माल बेटा को हत्यारा बिल्कुल
- 6:28था, लेकिन कब उसने चरना पकड़ लिया बुद्ध के और कब वो ब्राह्मण हो
- 6:35गया ये तो किसी को पता ही नहीं चला क्योंकि दो ही तो लोग थे,
- 6:39तीसरा कोई साक्षी तो था ही नहीं। अंगुली माल के रास्ते पर आने से
- 6:44सब लोग डरते थे। राहगीर कोई आता ही नहीं था।
- 6:50सब बदल गया ज़माना यह नजर ही नहीं आया।
- 7:06फिर मुझे धीरे धीरे समझाया कि अगर लोग अध्यात्म में भी तरक्की नहीं
- 7:14करते और संसार में भी तरक्की नहीं करते तो उसका एक मात्र कारण है।
- 7:24अविश्वास और यह अविश्वास है, हमारी जड़ों तक जम चुका है, इसलिए
- 7:39जिन लोगों ने परमात्मा पे अविश्वास किया।
- 7:48वो बहुत अच्छे फल पर कम से कम वो एक तरफ तो हो गए।
- 7:58उनकी शक्ति एक तरफ तो लगी वो दनाड्य तो हो गए।
- 8:02अब देखो किसी भी नास्तिक मुल्क को देख लो चाइना है।
- 8:09फिनलेंड है नॉर्वे है। बहुत से मुल्क ऐसे हैं जो नासिक
- 8:14रसिया कितनी तेजी से प्रोस्परस हुए।
- 8:25कारण दूसरी तरफ इनकी शक्ति लगी है।
- 8:32जब शक्ति राम राम में राधे राधे में खर्च होनी चाहिए सुर वो कहीं
- 8:36पहुंचाती भी नहीं। अच्छा हुआ इन्होंने बचा लिया,
- 8:41अच्छा हुआ, बुद्ध ने जन्म ले लिया।
- 8:46और जानते हुए भी के परमात्मा है। उन्होंने कहा परमात्मा नहीं है।
- 8:50आई इग्नोर गॉड क्यों एक वृहद उपकार कर दिया मानवता के?
- 9:07वो जान गए, दुविधा में दोनों गए, माया मिली नराम इनको एक तरफ़ा
- 9:13करना होगा और अध्यात्म में ये चल नहीं सकते क्योंकि अध्यात्म।
- 9:23कुर्बानी मांगता है और कुर्बानी हम मेमनों की तो दे सकते हैं,
- 9:28बकरों की तो दे सकते हैं, गउओं की दे सकते हैं, सांडों की दे सकते
- 9:34हैं, भेड़ों की दे सकते हैं, यहाँ तक कि हम आदमियों की गुलामी भी दे
- 9:39रहे हैं। क्षमा करना आदमियों की आहूति भी
- 9:45देखते रहे। कुर्बान नर बलि चढ़ती थी कभी अशोर
- 9:52में यदि यज्ञ होते थे, घोड़े की बलि दी जाती थी।
- 10:04लेकिन कुर्बानी तो देनी होती है अपने अंगार का यह तो बहुत मुश्किल
- 10:10रास्ता है। वो तो बड़े सोच समझ के काम किये।
- 10:15राजा के पुत्र थे, राजा ही थे, अकेले बारिश थे।
- 10:21कहा तो खुद स्वयं सुख भोगते और महलों के सुख में सारे जीवन
- 10:27बताते। कहा सारी धरती को सुखद वातावरण दे
- 10:32गए और सुखद से दांत दे गए। तुम एकताफी हो जाओ।
- 10:42संसार में लग जाओ राम राम करने की शक्ति को, इन्वेंशन में लगा दो
- 10:52राधे राधे करने की शक्ति ये पाठ जाप।
- 10:57ये राम चरित्र मानस का पाठ खुलवाने की बजाय ये सहज और अखंड
- 11:03पाठ खुलवाने की बजाय इन्वेंशन ही करना शुरू कर दो।
- 11:07ये तो बकवास है। ये तुम्हारी शक्ति को व्यर्थ करता
- 11:12है, मिलता कुछ है। अगर तोता रिटर्न से परमात्मा मिल
- 11:19जाता तो सबसे पहले तोता ही पहुँचता।
- 11:22परमात्मा के दरबार में वह दिन भर राम राम मिठु, मैया राम राम मिठु,
- 11:28मैया राम राम लेकिन तोता कही पहुंचता नहीं और यहाँ तो बहुत से
- 11:39तोते है। देखो, ज़रा यूट्यूब चैनल पर कितने
- 11:43तोते बैठे हैं। हर कोई तोता राम बनवा बैठा।
- 11:52बुद्ध ने बड़ा उपहार किया और सबसे बड़ा उपकार शायद आपको समझ नहीं
- 11:57आया। आज समझाएगा की वो एक तरफ कर गए।
- 12:04बेखा ऊपर से नीचे आ रहा था और नीचे से ऊपर जा रही थी सफाई
- 12:15सेविका। उसके पास गंदगी, मैले का डब्बा?
- 12:28हमने सुद्रों पर अत्याचार दबाव किया।
- 12:33पता नहीं कब भोगेंगे किए बहुत जो दबता गया उसको दबाते चले गए और
- 12:45इतना दबाया। के इम्तहाबी चीखें मारने लगीं।
- 12:52चिल्लाने लगीं सतन टैक्स्ट लगा दिया, हमने इतना ज़लील किया,
- 13:01मानवता को गुलामों की तरह लोग भी। के।
- 13:11तो बुद्ध ने बहुत अच्छा किया। बुद्ध कहता एक तरफ़ हो जाओ, एक
- 13:20तरफ़ होने का सीधा सीधा बात भी किया उसने तो बीखा नीचे आ रही
- 13:26हैं, ऊपर जा रही ही है। सफाई कर्मचारी सेबिका।
- 13:34लेकिन भीखा अपनी मस्ती में दुविधा में पड़े हैं।
- 13:38वृद्ध हो गए हैं, अब मुझे घर बार छोड़ देना चाहिए।
- 13:42पैसा बहुत है, ब्याज पर चलता है सूद पर बस बाल बच्चे पल जाएंगे अब
- 13:50हम। संन्यस्त हो जाते है लेकिन फैसला
- 13:53नहीं ले पाते। संख्या में रहते है दिन भर रात
- 14:00सोचते रहते है क्या करू घर छोड़ दू बच्चे अब थोड़े से और जवान हो
- 14:07जाए थोड़ा सा ये काम बाकी? कामक भी न होंगे पूरे तू पूरा हो
- 14:22जाएगा। सोयेगा तू?
- 14:301 दिन ऐसा कोई न तुझे जगाएगा आसमान पे।
- 14:48आसमान पे उड़ने वाले माटी में मिल जाएगा कसमे वह।
- 15:08सब बाते। हैं बातों का?
- 15:13क्या कोई किसी का नहीं है? जूठे नाते हैं?
- 15:24ना तो। क्या क्या तो बुद्ध ने बड़ा पार
- 15:31किया? मानता का?
- 15:36बुद्ध ने ये नहीं कहा एक तरफ़ हो जाओ बड़े गहरे उतर गए।
- 15:40बुद्ध कहते है परमात्मा है ही नहीं।
- 15:43राँध कटे चलो अब सोचता हूँ देखता हूँ कितनी शानदार साइकिल लोग जीस
- 15:54थे, उठ काट ही दिया रफड़े को है, है ही नहीं चलो।
- 16:07और बस जानते हैं बुसी अच्छा कौन जानता है कि परमात्मा है की नहीं,
- 16:14लेकिन तुम्हारी वह होती शक्ति ठीक जगह पे लग जाए तुम कम से कम
- 16:19इन्वेंशन तो कर सको। तुम तो कहीं भी नहीं पहुंचते, ना
- 16:23खुदाई मिला ना वसाले सनम। ना इधर के रहे ना उधर के रहे, कुछ
- 16:32भी तो नहीं मिलता, आप उस में लड़ मर के कट मर जाते हो तो बुध ने
- 16:40बढ़िया काम किया। बुध कहते जब विश्वास ही नहीं
- 16:43होता। इससे पहले कितने प्रैक्टिकल हो
- 16:47चूके यागी उबल के नहीं कहा। पतंजलि ने कहा कितनों ने कहा
- 16:54किसने मान? तो फिर हम क्यों ना मुद्दा ही
- 16:59खत्म करते हैं। हम कहते हैं परमात्मा होता ही
- 17:01नहीं है ही नहीं। तो एक तरफ तो लगेंगी ना इनकी
- 17:06शक्ति और जो एक तरफ हो गया वह कुछ न कुछ पा गया और संसार पा गया तो
- 17:14वह भी काफी है। मुक्ति का द्वार तो संसार से होकर
- 17:19ही तो गुजरता है, पहले भोगो और भोग में पाओगे, दुख है।
- 17:24यही तो बुद्ध का मार्ग है, दुःख से व्रक्ति आएगी, व्रत से बहुमक्ष
- 17:30आएगी रे, मुमुक्ष से तृप्ति आएगी, यही तो सीता सा उपाय अष्टमक।
- 17:44तो बुद्ध ने राँदी काट दी। बुद्ध कथा परमात्मा होता ही नहीं
- 17:49है ही नहीं लार्ज अरे सुफ्फिसिएंट जब मैंने अपना सारा ग्रंथ पूरा कर
- 18:03लिया, अंतिम तन तक जहाँ तक बोला जा सकता है वहाँ तक मैंने बोल
- 18:10दिया। अपने प्रयास जो नहीं बोला जा सका,
- 18:18मुझसे व्याख्यायता रह गया, वह तुम्हें मजबूर था, बोल ही नहीं
- 18:23सका यह लीला है सब उसकी। और उसके ही बनाए हुए द्रव्य से वह
- 18:32खेला है। नानक भिक्षे का विचार वह अपनी ही
- 18:38लीला को देखकर प्रसन्न होता है। अपने ही बनाए हुए तुम्हारा तो
- 18:45खुशबना है ही नहीं। तुमने तो कुछ कभी बनाया है ना तुम
- 18:54जीसको बनाना कहते हो मैं है जो वो तुम स्वाद लेते हो तुम कहते हो
- 19:01हमने पुत्र बनाया, हमने पुत्रियां बनाई नहीं बनाई गलत हो तुम्हारी
- 19:06पोर उगा लूँगा तो फिर तुम्हें शर्म आएगी, मुझे भी आएगी।
- 19:12तुमने कुछ नहीं बनाया बनाया तो सब उसने जो अंधेरे में सब पनपता है
- 19:18और बच्चा और तुम तो मज़े ले रहे थे और मज़े मज़े में।
- 19:28सब हो जाता है, आइंस्टीन जन्म ले लेते हैं, न्यूट्रिन जन्म ले लेते
- 19:36हैं और मज़े मज़े में मंद बुद्धि भी जन्म ले लेते हैं।
- 19:42ये सब मज़े की करावत है। सबके रहत लगता है।
- 19:54ऐसे सबके रहत लगता है ऐसे। कोई नहीं है मेरा कोई नहीं है
- 20:18मैं। सूरज को छूने निकला था आया हाथ
- 20:37अंधेरा। कोई नहीं है।
- 20:48मेरा कोई नहीं है मेरा। कोई नहीं है मेरे।
- 21:11ये सिर्फ एक अहंकार की मान्यता थी।
- 21:19मैं सब कुछ कर सकता हूँ, लेकिन पता चला लगते हैं सब भूख हैं,
- 21:30सबके होते लगता है ऐसे सब मेरे हैं ऐसा लगता है।
- 21:39सब भूखे हैं, ऐसा लगा सब में कोई ना कोई अभाव है।
- 21:43ऐसा लगा लेकिन जब। पास गया सूरज को छूने निकला था,
- 21:54हाँ या हाथ? अंधेरा कोई नहीं है।
- 22:08मेरा कोई नहीं है मेरा। है विश्वास तुम्हें कहीं भी तो
- 22:21पूछी नहीं देता। सबसे बड़ी बात है ना खुदा ही मिला
- 22:29ना बसा ले सनम मुख्य कारण क्या? ना इधर के रहे ना उधर के रहे।
- 22:35मुख्य कारण क्या है? विश्वास और विश्वास हो भी कैसे है
- 22:46और विश्वास इतने व्यक्तियों को दिलाया भी कैसे जा सकता है?
- 22:53आठ अरब आदमी हैं, रोज़ बढ़ते ही जाते हैं और कीर्तों को विश्वास
- 23:02दिलाया। वो लोग जिनके सामने साफ चमत्कार
- 23:09दिखाए क्या वो आज पहुँच गए? नहीं पहुंचे, कहीं नहीं पहुंचे
- 23:17वरना मैं जानता हूँ उससे ज्यादा अहमकारी हो गए।
- 23:25फिर। उन्होंने परमात्मा के व्यख्या ही
- 23:28और कर ली। हमने तो 10 अरब जाप कर लिए।
- 23:34हमारे पास होगा तुम्हारे पास 10 अरब रुपए हमारे पास तो 10 अरब नाम
- 23:40का खजाना और वहाँ में चौक हो गया बस क्या मेरे?
- 23:49प्रत्यक्ष प्रमाणीकरण का यही नतीजा ना था।
- 23:54इन्होंने जाप को दान में कन्वर्ट कर लिया।
- 24:01तुम संतों को ठीक से समय नहीं सके जो रामधन मीरा ने कहा।
- 24:09बस तुम उस राम के तल को नहीं पहचान सके धन तो तुम्हें पता है
- 24:14क्या होता है। अयो जी मैंने राम रथन धन पायो।
- 24:28पायो जी मैंने राम रतन धन पा। और ऊपर से भीखा उतरे हैं नीचे से
- 24:45सफाई सेविका कहती हैं, भीखा एक तरफ होजा पौड़ियों का मार्ग
- 24:52संगीत। और भीखा भीखे से स्पर्श भी नहीं
- 25:00हो सकेगा, क्योंकि सुद्र का तो सपर सीखा, उसकी तो छाया भी लग जाए
- 25:05तो ना हो, ऐसा वातावरण था। ये मूडताएँ आज भी हैं और पता नहीं
- 25:18क्यों तुम इनको मानते चले जाते हो?
- 25:22तोड़ने वालों ने कोई कसरखोर बाकी नहीं छोड़ी, तुम ही तो नहीं माने?
- 25:36बड़े शोक से सुन रहा था ज़माना हमीं सो गए दास्तां कहते कहते
- 25:43शुद्रों के लिए कितने उपाय किए गए हैं?
- 25:48कितने लोग बोले ब्राह्मण भी बोले, संत भी बोले सब बोले लेकिन।
- 25:54हम ही सो गए दास्तां कहते कहते तुमने तो स्वीकार कर ली ये
- 26:01दास्तां, यह दासत्व तुमने ही तो स्वीकार कर लिया अन्यथा तुम्हें
- 26:10वंदन देने वाला कौन था? कोई भी नहीं लोकतंत्र को पैदा
- 26:19करने वाले पैदा करके चले गए। लेकिन बचाना तो अब तुम्हारा
- 26:23कर्तव्य है ना, फिर तुम 10,000 में क्यों बिक जाते हो?
- 26:33कि 10,00,000 सिरों की कुर्बानी का मूल्य मात्र ₹10,000 है और
- 26:46जीतने वाला जानता है कि तुम धन से बिक जाओगे।
- 26:54सब खरीद लिया गया धन के फल। तबूतने का परमात्मा ही नहीं है
- 27:06सफाई सेवका ने कहा, एक तरफ हो जा, भीखा और भीखा समझ गया।
- 27:14भीखा ने सफाई सेवका के चरण छुए बिका कहता, हे देवी तू मेरे लिए
- 27:26कृपा प्रसाद ले के आई तुने मुझे मार्गदर्शन कर दिया मैं एक तरफ़
- 27:31हो गया मेरी दुविधा मिट्टी। श सह मिट गया मेरा अर्जुन कहता है
- 27:52समृद्ध लब्ध हो नष्टो माह हो मेरा मोह नष्टम और मेरी स्मृति वापस
- 28:01पुनः वापस आई। हू एमआइ मैकॉन तो बीका कहता, तू
- 28:10देवी मेरे गुरु, मेरा शृंखमिता मैं दो चित्र से शिरस्यमुक्त हुआ।
- 28:24तो मेरी गुरु हो गई आज से वो तो कंपनी उसने भी देखा होगा बेखा की
- 28:34तरफ कहीं आँखों में झाँका होगा कहीं ऐसा तो नहीं है अमृतसर।
- 28:42लुधियाना, बरेली लेकिन नहीं वह भीतर से परिवर्तित हो गया और वही
- 28:52भीखा संत। भीखा वात अगम की कहन सुनन की न
- 29:02भीखा, वात अगम की कहन सुनन की न ना कही जाती, ना सुनी जाती जो
- 29:10जाने सो कहे, नहीं कहे सो जाने ना।
- 29:16अब कर लो क्या भाषण करेंगे अगम की बात कही सुनी जाती है आती नहीं
- 29:28कहने सुनने में जो जानता है वह कहता नहीं और जो कहता है वह जानता
- 29:35नहीं। ये देखिए बिका के भजन कितने
- 29:38प्यारे हैं बात बिल्कुल ठीक है नहीं आती कहने में लेकिन छलक छलक
- 29:45जाती है गागरिया भर जाती है ऊपर से छलकन लगातार आती है अमृत की
- 29:52फिर क्या करेगा अगर मैं दुश्मन नहीं हो सकता?
- 29:55वह बिखर जाती है। भीखा बात अगम की कहन सुनन की न जो
- 30:03जाने सो कह नहीं कहे, सो जाने न कहनी पड़ती है।
- 30:08भाई कहनी नहीं पड़ती, ऊपर से छलकता है।
- 30:12गगरिया भरी है, खंड जाती है, बिखर जाती है, आसपास के लोग पी रहते
- 30:17हैं, उससे इसलिए साधु की संगत सुखदायी होती है।
- 30:23संघ तो। साध शरण सुखदा।
- 30:33संतोष साध शरण, सुख, दान। वह जो छलकता हुआ अमृत आसपास
- 30:47बिखरता है कटता है वो आसपास के। साथ चलने वाले संगीत साथी पी लेते
- 30:53हैं। इसलिए संघ संत का संघ कभी तुम
- 31:00त्याग नहीं सकोगे। बार बार याद आएगी तुम्हें वो
- 31:07मुकाम याद आएगा। जब तुम संत के सांनिध्य में गए थे
- 31:27और बड़े आनंद के रस में डूबे थे, वह पल तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेगा
- 31:32सार्युमन कितने मस्त हो गए थे तुम?
- 31:39कुछ देर के लिए वक्त भूल गए थे। कुछ देर के लिए अपना होना भूल गए
- 31:44थे। सब झंझट, सब कष्ट, सब तकलीफ में
- 31:48सब दर्द तुम्हें बार बार याद आएगा।
- 32:01बहुत से लोगों ने पूछा है। दोनों तरफ का दर्द और मैंने कहा
- 32:09कल्पना सत्य तक नहीं पहुंचाती। मैंने भी चाँद और तारों की तमन्ना
- 32:15की थी। मुझको रातों की स्याही के सिवा
- 32:26कुछ ना मिला। है।
- 32:29नीचा दो और सितारों की तमन्ना के थे।
- 32:43मैं निचा दोर सितारों। की।
- 32:48तमन्ना के थे मुझको रातों की सयाही के सिवा कुछ ना मिला।
- 33:04कुछ ना मिला मैंने चांदोर सितारों की तमन्ना की तेरी जुल्फों से।
- 33:25तेरी जुल्फों से जुदाई तो नहीं मांगी थी तेरी?
- 33:37जुल्फों से। जुदाई।
- 33:41तो नहीं मांगी? थी।
- 33:46कैद मांगी थी कैद मांगी थी रिहाई तो नहीं मांगी थी।
- 34:01कैद मांगी थी। रिहाई तो नहीं मांगी थी तेरी
- 34:11जुल्फों से। किसी अविश्वास ने?
- 34:17जमीं खा गई आसमान कैसे कैसे जमा नहीं ना मारे जमा कैसे कैसे यह है
- 34:28अविश्वास की अग्नि बहुत से जवानों को निगल गई जमीं खा।
- 34:35गई। आसमान कैसे कैसे जमाने में मारे,
- 34:51जमा कैसे के? जमी खा गई आसमान कैसे कैसे?
- 35:09यह अविश्वास। धन्य हैं बेलोक जिनको कहीं तो
- 35:20विश्वास हुआ और मैं रोज़ कहता हूँ एक अपासा पूरा कर।
- 35:29लो। विश्वास को श्रद्धा में बदल लो,
- 35:33फिर दूसरे पासे की तरफ आ जाए। परमात्मा नहीं है तुम एक तरफ पूरे
- 35:39हो के संसार में पूरे हो जाओ परमात्मा की तरफ जागो ही मत वह है
- 35:45के नहीं है ये बाद में निपटेंगे तो बुद्ध ने बड़ा शानदार सा करो
- 35:53जीस। उसने कहा है ही नहीं।
- 35:56परमा और बुद्ध के जीवन की तरफ देखेंगे तो यकीन पड़ेगा।
- 36:03लक्षण सही आ रहे हैं, जो गद्दी को लाज मार के आ जाता है, वो ठीक
- 36:09गद्ध नहीं बोलता होगा, झूठ नहीं बोलता होगा।
- 36:15जो गदियों को लात मार के आ गया वो झूठ नहीं बोलेंगे और फिर भी उसके
- 36:23लिए ऑपर्च्युनिटी तो बनी ही हुई थी।
- 36:26आफ्टर एनलाइटनमेंट वह तर्क से संभाल सकता था उसके।
- 36:33अब तू आ गया है, मुझे पता था तू आएगा भिक्षा कितने दिन मांगेगा?
- 36:39दुत्कारेंगे लोग गालियां निकालेंगे फटकारेंगे लोग और तू
- 36:44त्राहि त्राहि करता यहाँ पर आ जाएगा देख के भूतने का पिता श्री।
- 36:52क्षमा करो, मुझे तो बहुत बड़ा साम्राज्य मिल गया है।
- 37:00वह अज्ञात साम्राज्य जिसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी, अब मैं इस
- 37:09शुद्र साम्राज्य पे बैठ न सकूंगा। वजह क्षमा करो, फिर भी बैठ सकता
- 37:16था, लेकिन नहीं बैठ बुध इस धरती को ऐसा शानदार तोहफा दे गया के
- 37:29पास ही तो दो हैं। लेकिन इकट्ठे इकट्ठे तय मत करो,
- 37:39परमात्मा नहीं है, पहले संसार में जाओ, संसार बेस है अगर नींव ही न
- 37:46चुनी तुमने तो 10 मंजली इमारत 100 मंजली इमारत 1000 मजली इमारत कैसे
- 37:54उसार पाओ। फाउंडेशन स्ट्रोंगेस्ट शुड बी
- 38:01स्ट्रोंगेस्ट फिर झगड़ा ही खत्म कर दिया।
- 38:11कहते है ही नहीं परमत और एक दम मुझे समझाया कि ठीक सही कहा।
- 38:21पहले एक तरफ तो निपटा लो, दो तरफ तो चला भी नहीं जा सकता और यहाँ
- 38:32तुम दो डाके मारे आ जाते हो, आनंद लेने के लिए हम उस आनंद में जाना
- 38:42चाहते हैं। संसार हमारा भी सेट नहीं हुआ तो
- 38:46ऐसा ही सोचा था मैंने संसार में सेट कर दूंगा परमात्मा तक जाने का
- 38:53आसान और सर्वतम रास्ता मुझे पता है तो सारा संसार सुख से झूमेगा।
- 39:00आनंद से रश पिएगा। और नाचेगा कूदेगा, जश्न मनाएगा ये
- 39:07धरती पर ही स्वर्ग और सच खंड आ जायेगा और ये लोभी, लालची, पाखंडी
- 39:18लोग विदा हो जाएंगे। जब धरती ही सच खंड बन गई।
- 39:22तो फिर मरने के बाद कौन से जखण्ड में लेने आएगा?
- 39:25कभी कोई आया भी तो नहीं है, कोई स्वर्ग है भी तो नहीं है, यह अपने
- 39:36आप ही ठीक हो जाएगा। सब तय हो जाएगा, लेकिन।
- 39:41मुझको रातों की स्याही के सिवा कुछ न मिला।
- 39:46मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी।
- 39:54यह बड़ा कॉम्प्लिकेटेड मामला है। देखने में बड़ा आसान लगता है
- 40:02चुटकी। मैं हल कर।
- 40:03दूंगा कौन जाने चुटकी क्या तुम तो सारा बल भी लगा दोगे तो मात्र
- 40:1310,000 लोगों ने ₹25,00,00,000 लेना स्वीकार किया वो भी पता नहीं
- 40:18कहें नहीं सुनने से। मुख बात यह नहीं कि 25,00,00,000
- 40:26तुम लेना नहीं चाहते, यह बिल्कुल भी नहीं है।
- 40:29मैं जानता हूँ अच्छी तरह से तुम्हारे खाते में 25,00,00,000
- 40:35डाल दिया जाए। कौन इंकार करेगा?
- 40:40मुझे लोगों ने कहा तुम ऐसे करो, सरकार को दे दो।
- 40:45मैंने कहा तुम्हारा समझ तो सही काम करता है, फिर सरकार अडानी को
- 40:51दे देगी। यही तो कर रही है अगर सारा कुछ।
- 40:582,50,000 टन सोना सरकार को दे दूँ तो वे अडानी को दे देगा, हमारे
- 41:05कोष में थोड़ी जायेगा क्योंकि ये अडानी का सोबिया है।
- 41:16कहीं कोई बात बनी। खैद मांगी थी, रिहाई तो नहीं
- 41:31मांगी थी। तेरी जुल्फों से जुदाई तो नहीं
- 41:41मांगी थी? कैद मांगी थी, रिहाई तो नहीं
- 41:51मांगी थी? क्या किया जाए?
- 41:56सबके कष्ट मिटाने वाले सबके कष्ट। मिटाने।
- 42:14वाला कष्ट उठाते हैं। सबके कष्ट मिटाने।
- 42:31वाले? कष्ट उठाते हैं जन जन के प्रिय
- 42:45राम लखन सिया बन को। जाते हैं।
- 42:54हो वेदना तेरे लेख निराले वेदना तेरे।
- 43:09लेख निराले समझ न आते हैं। धन्यवाद।