Latest / Baba ji Vijay Vats / 8 Feb 25 - सबकी ज़िंदगी का प्रश्न! मैं दु:खी क्यों हूँ? और यह दुःख कैसे हट जाए? A Life-changing Lesson
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- 0:26परनिष्पाल प्रणाम बाबा जी? मैं दुखी हूँ।
- 0:40इसका क्या कारण है और ये दुख हट जाए?
- 0:49इसका इलाज क्या है? तरीका क्या है?
- 0:56ऑस्ट्रेलिया से परनेष ऐसे ही प्रश्न कुछ और मुल्कों से?
- 1:13मिलते जुलते प्रश्न हैं। मैं दुखी हूँ उसका कारण क्या है
- 1:27और इससे निजाद पढ़ने का उपाय क्या है?
- 1:33मानवता का गहरे से गहरा प्रश्न ज़िन्दगी का प्रश्न आइए हम समझते
- 1:52हैं। अगर तुम दुखी हो इच्छाएं दुख का
- 2:10मूल कारण है ध्यान से समझना। इच्छाएं दुख का मूल कारण हैं।
- 2:31तुम दुखी होना नहीं चाहते, लेकिन तुम्हारी इच्छाएं तुम्हें दुखी कर
- 2:37देती हैं। तो पूछते है कई लोग कि क्या
- 2:45मर्जी? इच्छा ना करें?
- 2:55मर जाना भी एक इच्छा है। मर जाने की इच्छा भी एक इच्छा है।
- 3:05जीने की इच्छा जी वैष्णव भी एक इच्छा है, दोनों ही इच्छाएं हैं
- 3:15तुम जीने की करो या तुम मरने की करो और इच्छा।
- 3:25दुख का मूल कारण है बेसिक रूप एक एक शब्द को ध्यान से सुनते जाना
- 3:40बड़ा काम आएगा तुम्हारे जीवन में। जब भी परेशानियों में कभी गिर गए
- 3:47हो, चारों तरफ अंधकार हो, कोई सल्यूवेशन नजर ना आता हो।
- 4:01तो मेरे इस प्रवचन को सुन लेना इच्छा दुख का कारण है।
- 4:18अगर तुम दुखी होना नहीं चाहते तो इच्छाओं को त्याग दो इच्छा सुख का
- 4:29भी कारण है। और अगर तुम सुखी होना भी नहीं
- 4:37चाहते तो इच्छा करनी छोड़ दो, जीने की इच्छा हो, मरने की इच्छा
- 4:47हो दोनों इच्छाएं। दुख का मूलभूत कारण है।
- 4:58इक्षाज ने कहा है इच्छाएं बहुत हैं तो रुलाई है, तुम रोते रहोगे
- 5:12अगर घनी सी। इच्छाएं हैं तुम्हारी इच्छाएं कम
- 5:17हैं, सेंशाई है थोड़ी सी इच्छा बस, रोटी, दाल, कपड़ा, मकान छोटी
- 5:29इच्छा है तो शहंशाह है। और इच्छाएं बिल्कुल नहीं तो खुदा
- 5:37ही है। इच्छाएं को ना होना खुदा होना है
- 5:46यानी आनंदित होना है। तुम्हारे हाथ में है सब कुछ तुम
- 5:58चाहो तो दुखी हो सकते हो इतनी इच्छाएं कर लो इतनी इच्छाएं कर लो
- 6:08कि वो कभी पूरी न हो सके, तुम सदा दुखी रहोगे।
- 6:18और अगर तुम दुखी होना नहीं चाहते तो इच्छाओं को त्याग दो, चाहे सुख
- 6:30की इच्छा है, चाहे दुख की इच्छा है, तुम कहते हो, मैं दुखी हूँ।
- 6:36क्यों दुखी हो? तो क्या तुम सुखी होना चाहते हो?
- 6:49दुख इच्छाओं का परिणाम है। दुख इच्छाओं की छाया है।
- 6:58अगर तुम सुखी होना चाहते हो तो ये भी इच्छा है तो आपने मुझसे पूछा
- 7:07बाबा क्या करें, क्या मर जाए? नहीं मर जाने की इच्छा भी तो
- 7:16इच्छा है। फिर क्या करें?
- 7:25क्या जीना काफी नहीं है? दिल धड़कता रहे, स्वास्थ्य चलती
- 7:31रहे, भोजन पछता रहे, जीवन चलता रहे।
- 7:44दुख और सुख तो धूप छाया के खेल आते जाते रहेंगे, जीवंत व्यक्ति
- 7:55को तो आते जाते रहेंगे। और जब मुर्दा हो जाओगे तुझे खुद ब
- 8:05खुद विदा हो जाएंगे, ना दुःख आएगा ना सुखाएगा।
- 8:15न खुशी होगी, न दर्द होगा। जीवन सुख और दुख की कहानी है,
- 8:30लेकिन जीवन जिएं कैसे? ये मुश्किलें जीवन जियो जीवन मिला
- 8:46है जब तक जीवन है जीवन चलता है। तुम जीने का आनंद लो क्या जीने का
- 8:59आनंद काफी नहीं क्या अच्छा भोजन खाना ही आनंद है, अच्छे वस्त्र
- 9:14डालना घूमना फिरना? बड़ी बड़ी कार्य, बंगले, बड़ी
- 9:20गद्दियाँ, मान सन्मान, धन के अम्बार ये शोखे हैं क्या इनके
- 9:30बिना जीवन काफी नहीं है? काफी है जीवन अपने आप में काफी है
- 9:47और सच पूछो तो ये सब कुछ भी हो, धन के अम्बार लगे हूँ।
- 9:55सारी दुनिया पूजा करती हो, गद्दियाँ हो, सारे सात हो, बड़ा
- 10:04सा बंगला हो, बड़ी सी कारें हो, मान प्रसिद्धि हो सब हो।
- 10:13लेकिन जीवन न हो फिर क्या करोगे? जीवन अपने हाथ में एक बूंद है,
- 10:28वरदान है बस जीना कैसे है? यह सलीका नहीं तुम्हें आता इसी का
- 10:42सलीका सीखो और जब तुमने जीने का सलीका सीख रहेगा तो बड़ा मज़ा
- 10:52आएगा जीने का। अभी तो तुम उस मज़े की नाम ही
- 11:02सुनते हो मज़ा चखा नहीं वो जीवन जब जीओगे इस तरह का तो पता लगेगा।
- 11:16जीने का मज़ा क्या होता है, जीना अपने आप में एक मज़ा है, जीने की
- 11:26इच्छा दुख है और मर जाने की इच्छा विदुख है इच्छा मात्र दुख है।
- 11:37और ज्यादा इच्छाएं हैं तो फकीर कहता है कि दुख है, इच्छाएं कम
- 11:44हैं, शहनशाही है पर थोड़ी इच्छा दाल रोटी मिल गए दो वक्त की।
- 11:53तन ढकने का वस्त्र मिल गया। जैसा भी है, खादी है, रेशम है सिर
- 12:02छुपाने को जगह मिल गई, इतना बहुत है और जीवन मिल गया।
- 12:14इतना काफी है लेकिन दुख कहाँ होता है?
- 12:22जो तुमने पूछा बाबा मैं दुखी हूँ तो हैरानी की बात है, तुम दुखी
- 12:29हो। और तुम्हें पता नहीं है कि तुम
- 12:32दुखी क्यों पूछते हो बाबा से मैं दुखी क्यों हूँ?
- 12:43और फिर इस दुख का इलाज क्या है? या इलाही या माजरा क्या है या
- 13:00इलाही या माजरा क्या है। आखिर इस दर्द की दवा क्या है?
- 13:15दर्द की दवा है। ये ऐसा रोग नहीं जिसकी कोई दवा ना
- 13:22हो। ये साध्य रोग है, असाध्य नहीं है।
- 13:35इच्छाओं को त्यागते हो, जीतने, दुख की तुम नकारते हो और सुख को
- 13:52ग्रहण करने की इच्छा रखते हो, उतने ही तुम दुखी हो।
- 14:02प्रत्येक मानव चाहता है कि दुख तो न यह और प्रत्येक मानव चाहता है
- 14:08कि सुख है, सुख ही सुख है, सुख का बड़ा इंतजार रहता है।
- 14:20सुख की बड़ी तमन्ना है, लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ तमन्ना इच्छा चाहे
- 14:34सुख की है, चाहे दुख की है। दोनों ही दुख का कारण है दोनों
- 14:51तमन्नाओं को त्याग दो, दोनों इच्छाओं को त्याग दो, फिर करें
- 14:58क्या बाबा? जीने की इच्छा न करो जब संत कहते
- 15:07हैं तो तुम पूछते हो तुम तुरंत दूसरे छोर पे आ जाते हो तो क्या
- 15:14मर जाये? संत कहता है मरने की भी इच्छा न
- 15:20करो तो फिर क्या जीने का साधन नहीं है?
- 15:28फिर क्या करें? संत कहता है जीना काफी है।
- 15:38टु बी अलाइव इस सफीशिएंट पर्याप्त है जीवन पर्याप्त है और जीवन
- 15:47पर्याप्त अगर जीवन ना हो तो सब बेकार है।
- 15:58तुम्हारी सुविधाएं तुम्हारी गद्दियाँ तुम्हारे हिमालय जीतने
- 16:05इकट्ठे किये धन के बाहर हो तुम्हारे इकट्ठे मानसून।
- 16:14द्रव्य पदार्थ सब बेमानी हो जाता है।
- 16:19अगर जीवन ना हो बस यही तुमने कभी सोचा नहीं जीवन काफी है।
- 16:32जीना काफी है। जीना बड़ा मजेदार है।
- 16:38अगर तुम इच्छाओं से रहित होके जीते हो तो बड़ा मजेदार है सुख की
- 16:47कामना लेके जीना तुम्हें वो जल करता है।
- 16:53और दुखी, दुखी जीना भी तुम्हें वो झेल करता है।
- 17:00बिना इच्छा के जीना बड़ा प्यारा है तुमने कभी ऐसा तो सीखा ही
- 17:06नहीं। बिना इच्छा के जीने का मज़ा तुमने
- 17:12कभी छखा ही नहीं? इसलिए तुम पूछते हो जब बात बड़ी
- 17:22अजीब सी लगेंगी, सरल है, कोई पेचीद की नहीं, कोई दार्शनिकता
- 17:28नहीं। कोई मनोवैज्ञानिकता नहीं है, कुछ
- 17:33भी नहीं जीना है। जीवन मिल गया, क्यों मिल गया,
- 17:40किसने दिया, कैसे दिया, क्या लक्ष्य है कोई लक्षण तुम्हें जीवन
- 17:49मिल गया। जियो इट्स सफीशियंट और जीना अपने
- 17:57आप में मजेदार है। फिर बाबा जिएंगे तो दुख भी आएगा,
- 18:10सुख भी आएगा। जैसवाल ठीक तो मर है, जीने की
- 18:17इच्छा दुख है और मरने की इच्छा दुख है, इच्छाएं दुख है, लेकिन
- 18:28अगर जीने में तुम जी रहे हो सिर्फ नरोल।
- 18:36खालस न खालस जी रहे हो सिर्फ दुःख तो फिर भी आएँगे, दर्द भी होगा,
- 18:44तकलीफ भी आएंगी, बिमारी भी होंगी, फिर क्या करें?
- 18:55बस यहीं संत का माता है, पहले रास्ता बताने के लिए कि सिर्फ
- 19:06जियो। महाबीर कहते हैं, जियो और जीने दो
- 19:14बस कोई इच्छा की बात ही नहीं करते हो, तुम जियो और दूसरों को जीने
- 19:23दो, इट इज़ सफीशियंट। और फिर देखना सारा संसार आनंद मगर
- 19:32हो जाएगा। किसी मंत्र की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- 19:41कोई तंत्र की जरूरत नहीं पड़ेगी, कोई औपाधि की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- 19:50धन की जरूरत नहीं पड़ेगी, मान सम्मान की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- 19:55ये जरूरतें नहीं हैं भला मान सम्मान की जरूरत भी कोई जरूरत है
- 20:07भला गद्दियों की जरूरत भी कोई जरूरत है।
- 20:11ये तुम्हारी पैदा की कहीं जरूरतें हैं, जीवन इसे नहीं मांगता कि
- 20:18बड़ी गद्दी चाहिए, इच्छाएं इसे मांगता है।
- 20:23ध्यान से इस संक्रमण जीवन नहीं मांगता।
- 20:29कि मैं तो जीऊंगा जब बड़ी गद्दी मिल जाए, इच्छा मांगती है
- 20:35गद्दियों को अच्छे वस्त्र डाल जीवन नहीं मांगता जीवन कहता है तन
- 20:46ढाँपने को वस्त्र मिल जाए। बढ़िया महंगा खाना नहीं मांगता
- 20:59बुद्ध कपिल वस्तु के सम्राट राज़। छोड़कर वणों में निकल जाते है।
- 21:12घर घर मांगते है तुम डाइट चार्ट बनाते हो, ब्रेकफास्ट में ये
- 21:21लेना, सुबह टी पीना। फिर लंच में ये फिर डिन्नर में ये
- 21:30फिर सोने से पहले ये लेकिन बुध कभी चाट नहीं बनाते और बड़े मज़े
- 21:39की बात है। बुध बड़ा मजेदार जीवन जीते हैं और
- 21:4480 वर्ष तक जीते हैं। मुश्किल तब पेश आती है जब तुम
- 21:59कहते हो इच्छाओं के साथ जीना। साथी रे।
- 22:13तेरे बिना भी क्या जीना तेरे बिना भी क्या जीना वो साथी रे फूलों
- 22:32में। कलियों में, फूलों में कलियों
- 22:38में, सपनों की गलियों में तेरे बिना कुछ कहना।
- 22:52तेरे बिना भी क्या जीना हाँ तेरे बिना भी।
- 23:01क्या जीना यहाँ मुश्किल आती है? तुम कहते हो तेरे बिना भी क्या
- 23:11जीना? शर्त रख देते हो।
- 23:14जिंदगी के आगे तुम्हे जिंदगी पर्याप्त मालूम नहीं पड़ता, जबकि
- 23:24परमात्मा ने जिंदगी पर्याप्त दी है, तुम्हे जिंदगी जीने के लिए
- 23:30है। जिंदगी वस्तु में इकट्ठी करने के
- 23:35लिए बुद्ध जाते हैं, वो जो उसके बाप ने इकट्ठा किया, छोड़ चले
- 23:47जाते हैं। भूख लगती है, किसी घर से मांग
- 23:54लाते हैं, कोई डाइट चार्ट नहीं है, इतना प्रोटीन चाहिए,
- 24:00कार्बोहाइड्रेट फट चाहिए, मिनल चाहिए, साल्ट चाहिए, विटामिन
- 24:05चाहिए, कोई तमन्ना नहीं है। जो मिल गया, जो मिल गया वो खा
- 24:18लिया। जो मिल गया, उसी को मुकदर समझ
- 24:30लिया। जो मिल गया उसी को मुकदर समझ
- 24:38लिया, जो खो गया, मैं उसको भुलाता चला गया।
- 24:49जो खो गया मैं उसको बुलाता चला गया।
- 24:56हर फिक्र को धुएं में। उड़ाता चला गया।
- 25:03जो मिल गया, उसी को मुकद्दर समझ लिया।
- 25:08जो खो गया मैं उसको बुलाता चला गया।
- 25:19कहीं चली जाना, जीने का मज़ा वही व्यक्ति उठा पाएगा?
- 25:33जो मेरी इस बात के संग चलेगा बिना इच्छा के लिए संत एकांत कुटिया के
- 25:47भीतर बैठा मात्र जीता है। मात्र जीता है।
- 26:00कोई इच्छा नहीं है, ना कहीं जाना, ना कहीं आना सुफ्फिसिएंट है।
- 26:17लेकिन जब इच्छा आ जाती है जीने में तो जीना दूषित हो जाता है उस
- 26:27अमृत की तरह जिसमें विष घोल दिया जाए।
- 26:37तुमने कहा मैं दुखी हूँ, तुम नहीं सारी दुनिया दुखी है, सारी दुनिया
- 26:48दुखी है एक मैं सूखी हूँ रोज़ गए तुम।
- 26:57बड़े मज़े के मैं कहता हूँ मैं सूखी हूँ क्यों कोई इच्छा नहीं है
- 27:20सुख हाय। तो तेरी मोच दुखाये तो तेरी मोच
- 27:33जिसने जीने का यह नजरिया सीख लिया वो जिया बाकी।
- 27:41बाकियों ने दिनों को। धक्का दिया और।
- 27:49अगर तुम कोई इच्छा नहीं रखोगे अगर तुम इस फार्मूले पे चलते रहे।
- 28:03किसी इच्छा के साथ न बंधे, न जीने की इच्छा से बंधे, न मरने की
- 28:15कामना की निर इच्छा हो के मात्र जिए।
- 28:23तो तुम जल्दी ही पाओगे, तुम्हारे अंत में एक गहन शांति उतरने
- 28:30लगेंगी आज के इस वीडियो को बड़े प्रेम से सुनना कोलाहलहीन वातावरण
- 28:42में। एकांत में
- 28:55अगर तुमने बिना इच्छा के जीना सीख लिया, थोड़े ही दिनों में तुम भाग
- 29:05गए तो तुम्हारे भीतर एक अजीब सी खुमारी उतरने लगे।
- 29:16तुम्हारे भीतर एक अजीब सा ठहराव आ गया और वो स्ट्रेंज ठहराव तुम
- 29:32बड़ा मस्त कर देगा। यह मस्ती की तुमने कभी कामना भी
- 29:39नहीं की मैं रोज़ गए तुम काश तुम उस आनंद की एक बूंद को कभी भी
- 29:51लेते। तो ये भाग दौड़ ये सब समाप्त हो
- 30:03जाती है। ये क्यों है तुमने उस आनंद की एक
- 30:11बूंद का कभी आश्वासन नहीं किया। पूछा है कि उस आनंद की बूंद का
- 30:24आश्वासन आप रोज़ कहते हो किया कैसे जाए?
- 30:31हम तो हर घड़ी स्वाद लेते हैं लेकिन वो कैसा स्वाद है आनंद का
- 30:37जिसकी बूंद हमने आज तलक नहीं की, वो ही बता रहा हूँ तुमने वस्तुओं
- 30:46का स्वाद चखा टेस्ट वर्ष के द्वारा।
- 30:52तुमने इंद्रियों का स्वाद चुखा, सभी इन्द्रियों का कर्णप्रिय
- 31:02गायन, नेत्र प्रिय दृश्य। प्रिय कल्पनाएं संजून अच्छे अच्छे
- 31:15सपने देखे नहाई, बढ़िया। चंदन की साबू सोना है, खूब अच्छी
- 31:34राजसी पोशाकें डाली, राजसी भोजन किया, आराम से गद्दों पर सोया
- 31:44निकन। नहीं तो फिर भी नहीं आया, क्योंकि
- 31:51नींद प्राकृतिक है, नींद परमात्मा के दिन और अगर नींद न आए।
- 32:06तो तुम्हारे गद्देदार पिल्लोज का कोई फायदा नहीं है।
- 32:15अगर तुम बिना इच्छा के जीना सीख गए इस प्रैक्टिकल को करने।
- 32:24कोई तरंग न उठे। इच्छा एक तरंग है, उस तरंग के
- 32:36उठने से तुम्हारा जल दूषित हो जाता है।
- 32:46गच गोल हो जाता है माटी मिल जाती है उसमें गंधला हो जाता है पानी
- 32:56बिना इच्छा के जीना। ऐसे जैसे पानी ठहर गया।
- 33:07माटी नीचे बैठ गई, शुध जल उभर आ गया।
- 33:19अगर तुम ये जीने का सिलिका सीख गए, थोड़ी देर के लिए शुरू करो इस
- 33:27अभ्यास को। एक वक्त ठान लो, मैं 1 घंटे से
- 33:38शुरू करूँगा, वक्त बढ़ाता जाऊंगा एक घंटा मैंने।
- 33:47इच्छा से नहीं जीना है, मात्र जीना है मात्र जीना है।
- 33:57मैं ये भी नहीं कहता कि उसकी इच्छा में जियो।
- 34:00उसको तो तुम जानते ही नहीं हो, वो है भी कि नहीं, ये भी तो नहीं
- 34:06जानते। दूसरे कहते हैं, वो है और दूसरे
- 34:13ये भी कहते हैं की वो नहीं है तो तुम किसी की बात को भी मत मानना,
- 34:19लेकिन जीवन तो है ना जीवन है और तुम कहते हो मैं दुखी हूँ।
- 34:29सीधा सीधा स्वर और सीधा सीधा जवाब तुम दुखी हो तो फिर आओ इस सब
- 34:45प्रयोग को शुरू करो। एक घंटा भी नहीं, छ के जियो, फिर
- 34:532 घंटे वक्त बढ़ाते जाओ और यह वक्त पूरे दिन रात में तब्दील कर
- 35:01दो। कोई सुबह ब्रह्म मुहूर्त में
- 35:05उठकर। पाठ जप करने की आवश्यकता नहीं।
- 35:16जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझ लिया।
- 35:20उस वक्त में जो खो गया, मैं उसको बुलाता चला।
- 35:26गया। बिना इच्छा के जियो।
- 35:37और अगर तुमने जीने का ये सलीका सीख लिया वक्त को बढ़ाते।
- 35:45गया। काम धाम भी करो।
- 35:50कर्तव्य कर्म है निभाओ फर्जों को निभाओ।
- 35:58और जब फुर्सत के। लम् ही आए।
- 36:02तब उन फुर्सत के। लम्हों में इस प्रकार से हो जैसे
- 36:05मैंने तुम्हें बताया। इच्छा के बिना जियो वो इच्छा ना
- 36:15कुछ। पाने की इच्छा।
- 36:19ना कुछ। दान करने की इच्छा।
- 36:24हो मात्र। तुम बने रहो तुम।
- 36:28जीओ। श्वास आए।
- 36:32श्वास जाए तुम देखोगी मत। कोई ये मुश्कत न।
- 36:38करो मात्र जीओ रात को तुम सोते हो।
- 36:44साँस आया साँस। गया।
- 36:46क्या विपश्यना करते हो, जीते हो न बस?
- 36:51सुमात्र जीते हो ऐसे ही दिन में? करो जैसे रात सोये थे।
- 37:03ऐसे ही दिन को। जागते।
- 37:05में करो और अगर तुमने जीन का यह सिलिका सीख लिया तो तुम पाओगे,
- 37:25जीवन ही पर्याप्त है। ये जो परमात्मा ने।
- 37:32जीवन रोपी धंत में दिया है यह पर्याप्त और अगर जीवन न हो।
- 37:44तो सारी सृष्टी है। देखिये कितनी तारीख?
- 37:50कितें आकाश। गंगाई यूनिवर्स ब्लैक होल्स।
- 37:57क्या करेंगे इनका मुर्दे के लिए सब?
- 38:00बेकार जीवन बड़ी चीज़ है। बस तुम्हें जीने का।
- 38:09सिलिकन? तो जीने का तरीका।
- 38:14मैं तुम्हें आज बताता हूँ। नर इच्छा हो के।
- 38:20जी। कोई लहर न उठे और अगर उठे तो?
- 38:29उठे। ओह, सहज।
- 38:32हवाएं चले मौन झील में तरंग उठे उठे।
- 38:39तुम्हें कोई मतलब नहीं ना चले हम आये और मौन झील में।
- 38:47तरंग न उठे तो न उठे। और अगर हम आई।
- 38:52चले और मान झील में तरंगे उठें तो उठें।
- 38:58उठने दो। और अगर तूफान आई, महत तूफान आई,
- 39:06वृहद तूफान आई। तो वृहद उठा।
- 39:11पटक हो। तो हो लेकिन तुम।
- 39:19मात्र जियो। मेरी एक।
- 39:23एक बात को गहरे ध्यान से सुनना। ये बात।
- 39:31तुम्हारे जीवन को बहुत ताजगी देगी, वो आनंद देगी जो तुमने जीवन
- 39:42में आज तक पाया न था। इसको फकीरी कहते।
- 39:51हैं। निर इच्छा हो कि।
- 39:58जीना फकीरी, भूख लगे खाल। जैसा मिले खाल नखरा मत करो।
- 40:13फिर वो ही मूंग की दाल। फिर वो ही नमक।
- 40:20कम। फिर वो ही मिर्च।
- 40:22जाता। जो नीती तुम्हें?
- 40:33दे वो खा लो। 1 घंटे के लिए।
- 40:39प्रयोग कराओ। फिर 1 दिन में तब्दील।
- 40:43कर दो। जो मिलता है उसे।
- 40:50खा लो। जैसा मिलता है, खा लो।
- 40:54नमक ज्यादा है तो। कोई बात नहीं।
- 40:57मिर्च कम है, तो। कोई बात नहीं।
- 41:02ध्यान से जब। मैं कहता हूँ।
- 41:05और मत डालो। नमक और मत डालो मिर्च।
- 41:14कोई उपाय ना। करो।
- 41:17जो जैसा मिले। वैसा खा लो।
- 41:21नीर इच्छा हो के। जियो मैंने जो कहा उस बात को
- 41:25ध्यान से समझना। जब तुमने ऊपर से।
- 41:31नमक डाल लिया तो फिर ये इच्छा हो गयी।
- 41:36जब तुमने ऊपर से। मिर्ची डाली तो फिर ये इच्छा हो
- 41:40गयी। चीनी कम तुमने और।
- 41:43डाल लिया और चीनी नहीं है, तो तुमने डाल ली।
- 41:50और ज्यादा है तो। बड़बड़ाने लग गए।
- 41:56मैंने कहा, निर। इच्छा हो के जियो, जियो मात्र
- 42:02जियो। अगर रूखी।
- 42:07सूखी खा के भी जी ना। तो तुम्हारे 36 पकवान बेकार हो
- 42:16जाते हैं। देख बराई झोंपड़ी मत ललचावय जी
- 42:23बड़े प्यारे शब्द है। दूसरों की झोपड़ी।
- 42:28को देख कर तू जियो को मत लल जा, रूखी सूखी खाय कर।
- 42:37ठंडा पानी पी जैसी रूखी, सूखी। है खला।
- 42:48वो ठंडा पानी पी। ले बहुत दिन पहले।
- 42:58मैं देख रहा था एक गरीब व्यक्ति। जैसे तैसे उसने तन ढका हुआ था।
- 43:08जो वस्त्र डाले थे। कहीं से फटे कटे भी थे।
- 43:14आज तो तुम महंगी। जीन्स ले आते हो, जान के फाड़
- 43:18देते हो? और उसके ऊपर।
- 43:23दूसरी टाकी लगा लेते हो। गज़ब हो।
- 43:29गया वो साबुत जीन सस्ती और फटी जीन व्यंग।
- 43:39बस उसने ऐसे ही। कपड़े डाल रखे थे, लेकिन थे सहज
- 43:43फटे हुए कारीगरी नहीं की थी। डाल रखे थे थोड़े।
- 43:50मैले भी थे। दाढ़ी भी बड़ी हुई।
- 43:54थी। बिखरी हुई भी थी।
- 43:58कुछ रेत भी था। हाथ में उसके।
- 44:01टुकड़ा और मैं देख। रहा हूँ उसे।
- 44:08स्क्रीन पे। वो आया उसने।
- 44:12नल खोला शायद उसके। हाथ का।
- 44:17टुकड़ा। 2 दिन बादशाह।
- 44:20होगा सूख गया, नल खोला, उसने रोटी भगोई अच्छी तरह नल बंद किया।
- 44:38प्रणाम किया, नलके। को प्रणाम किया रोटी को और धीरे
- 44:44धीरे खा गया, बैठ गया। मेरे पास बैठा व्यक्ति।
- 44:53कहने लगा। ऐसे भी गरीब हैं।
- 44:57लोग। और राजसी खाने।
- 45:02वाले लोग भी हैं। मैंने कहा फिर कौन?
- 45:10अच्छा। मेरी तरफ गौर से देखने लगा कौन
- 45:17अच्छा? ये तो कोई प्रश्न नहीं।
- 45:21है। अच्छा तो वही यही तो गलती है।
- 45:31तुम्हारे सोचने में यह अच्छा रूखी, सूखी खाई के ठंडा पानी पी।
- 45:41देख बराई। झोंपड़ी मत लग जावे छू।
- 45:52शायद बहुत से सरोता मेरी बात से सहमत।
- 45:58न भी हूँ तो न भी हूँ। मैं बाध्य ही नहीं।
- 46:04करता। चीनी का सलीका।
- 46:09बताता हूँ। मान के देखो फिर तुम कभी 36।
- 46:19पकवानों की इच्छा नहीं करोगे? जो सुख छज्जु दे।
- 46:27चुहारे ना बल्क ना बुखार। ऐसे जीके देखो मैं नहीं कहता सुखी
- 46:35रोटी खो अगर चौपड़ी मिलती हो तो। फिर वो भी इच्छा।
- 46:43हो जाएगी। वो भी दिखावा हो जाएगा तो?
- 46:47फिर चौपड़ी खा लो। चार।
- 46:50सब्जियों से। मिलती है तो चार से खा लो।
- 46:54बिना सब्जी के मिलती। है तो बिना सब्जी के खा लो।
- 46:59नहीं मिलती है तो। फाका लो।
- 47:06जस्ट घड़ी तुम इस। तरह जीना सीख गए।
- 47:16बस घड़ी तुम भूल। जाओगे, राज़ सी गद्दियाँ को यही
- 47:21तो मज़ा है। तुमने जी कर नहीं।
- 47:26देखा कभी जब से जीवन मिला है। तब से जीवन को।
- 47:33जीया। इच्छाओं के सहारे हैं।
- 47:37माँ बाप। बचपन में ये कूड़ा फेंक देते हैं
- 47:42बच्चों के जीवन में। सब थोप देते।
- 47:49हैं। यह बनना है यह।
- 47:54नहीं बनना है। यह खाना है?
- 47:58यह नहीं खाना है। इस धर्म पे चलना।
- 48:02है इस धर्म पे नहीं चलना है। कुछ नास्तिक कहते।
- 48:12हैं, परमात्मा नहीं हैं। कुछ आस्तिक कहते।
- 48:16हैं, परमात्मा हैं। नास्तिकों की बात।
- 48:21बिल्कुल ऐसा जैसे एक बंद कमरे में हीरे मोती मढ़िया पड़ी हूँ।
- 48:29और कोई व्यक्ति बिना उसको खंगाले कह दे नहीं है।
- 48:33हीरे मोतीमणि कमरा है खाली कुछ नहीं।
- 48:42उससे कोई पूछे तुमने? खंगाला?
- 48:46वो कहेगा नहीं खंगाला। तुने?
- 48:50फिर कैसे पता लगा किस कमरे में मोती?
- 48:55मणिया, हीरे, जेवरात नहीं हैं। सोने चांदी के।
- 49:01जेवरात नहीं हैं। तुम्हें कैसे पता लगा जब खोल के
- 49:06नहीं देखा। खोल के तो नहीं?
- 49:10देखा, लेकिन नहीं है परमात्मा। और जो कहता है।
- 49:16परमात्मा है। वो ऐसे कमरे की।
- 49:20भाँति है जो खाली हो, जिसमें कुछ ना हो।
- 49:24बिल्कुल खाली। अल्फ़ खली वो कहता परमात्मा है।
- 49:36इसमें परमात्मा। है।
- 49:41हिंदू मूर्ति लगा। देते हैं।
- 49:47इस्लाम कुछ भी नहीं। लगाता खाली।
- 49:56आस्तिक कहता है कि। इसमें मोती मड़िया हैं, हीरे
- 49:59जोहरात। सोने चांदी के।
- 50:05जेवरात? उससे कोई पूछे के।
- 50:11तुमने खोल के देखा। मोती मणियाँ हीरे।
- 50:16जो है रात सोने शांति के गहने नहीं खोल के तो नहीं देखा।
- 50:26तो फिर तुम्हें कैसे पता चला? किस कमरे में हीरे?
- 50:31मोती मणिय माणिक है। सोने।
- 50:37की गहने गट्टे हैं चांदी के सिक्के हैं।
- 50:45तो मैं कैसे पता चला देखा तो नहीं ना खोजा उसने जो कहता नहीं है ना
- 51:00देखा उसने जो कहता है। दोनों संभावनाओं की बात करते हैं।
- 51:13दोनों अंदाजा। लगा रहे हैं और अंदाजा जरूरी नहीं
- 51:19है कि सच हो। हम दादा का गलत।
- 51:23भी हो सकता है। पूछा मैं दुखी हूँ।
- 51:29परनिष्ण। मैं दुखी क्यों हूँ?
- 51:36ठीक जगह। आ गया पुत्र मुझसे ही पूछना बनता
- 51:41था। और कैसे ये दुःख ना?
- 51:45रहे हैं। तुम दुखी हो।
- 51:51तुम इच्छाओं से जीते रहो। एक प्रयोग करना जो।
- 51:57मैंने तुम्हें बताया आज। ऐसे जीना दो घड़ी मेरे पास।
- 52:11बैठ जा। देख ना मैं कैसे?
- 52:14जीता हूँ तेरे पासा के। मेरा वह तू गुजर जाता है।
- 52:31तेरे। पाशा के मेरा वह तू गुजर जाता है।
- 52:41दो घड़ी के लिए गम जाने किधर जाता है दो घड़ी।
- 52:54के लिए। गम जाने किधर जाता है।
- 53:02तेरे पाशा के मेरा वह तू गुजर जाता है।
- 53:13दो घड़ी के लिए। गम जाने किधर जाता है।
- 53:18तेरे पास आके मेरा वक्त गुजर जाता है।
- 53:27इस तरह जियो। मेरे इच्छा हो, के जियो।
- 53:32ना मरने की तमन्ना। हो ना, जीने की तमन्ना हो?
- 53:37तमन्ना ही ना हो। जीना ही हो सिर्फ।
- 53:41जैसे रात को सोए सोए तुम सिर्फ जी रहे यंत्र है, चले फेफड़े जल
- 53:50धड़का, फेफड़ों ने सांस भरा छोड़ा।
- 53:55खून सब हुआ। भोजन पचा।
- 54:00टिशूज़ दे रिपेयर। हुए तुम सोये मज़े से सोये, ऐसे
- 54:07दिन में सोना निर इच्छा के इच्छा के बिना।
- 54:23जीने का मज़ा तुमने। चखना।
- 54:27मैं। जानता हूँ क्योंकि तुम्हारे अनुभव
- 54:34बताते हैं। कि तुम दुखी हो।
- 54:40तो निश्चित ही। इच्छाओं से जी रहे हो।
- 54:44निर इच्छा होके कभी नहीं जी रहे हो।
- 54:48अगर डाका मारने की? तमन्ना छोड़ दी।
- 54:53तो दान देने की। तमन्ना आ गई।
- 54:57अगर दान देने की। तमन्ना छोड़ दी।
- 55:00तो डाका मारने की तमन्ना करी, लेकिन तमन्ना ही रहीं।
- 55:08ये सूत्र तुम्हें पता। है।
- 55:14तमन्नाओं के। बिना भी जीवन होता है भूल गए तुम?
- 55:21तुम भूल गए हैं तमन्नाओं के बिना। भी जीवन होता है और तमन्नाएं
- 55:34तुम्हारी एजाद हैं। जीवन।
- 55:39परमात्मा की दांत है, इच्छाएं तुम्हारी इज़ाद हैं।
- 55:49तुम्हारी इज़ाद के। बिना।
- 55:52उसके दांत के साथ। जीना सीखो।
- 55:58मात्र जियो। 1 घंटे से शुरू।
- 56:02करो आज से शुरू करो। जब दफ्तर से आ।
- 56:08जाओ। काम धाम निपटा के।
- 56:11बैठ जाओ। कोई इच्छा न करो।
- 56:16मन भटके रहो। क्योंकि मन को संस्कार पड़ गए
- 56:21हैं। इच्छा ओके?
- 56:24मन कहेगा क्या करते? हो बैठे चलो थोड़ा सा उस दोस्त को
- 56:30मिलाओ हाल चाल पूछो। कोई गप कपोड़ कर।
- 56:36लेंगे। कुछ सुन लेंगे, कुछ कह देंगे।
- 56:41तुम ऐसे कभी जिए। नहीं मात्र जिए नहीं, रात के सिवा
- 56:47वो तो तुम्हें प्रकृति ले जाती है।
- 56:50और प्रकृति का बड़ा। भारी उपकार है तुम्हारे।
- 56:57लेकिन जीवन तुम खुद की तरकीब से कभी नहीं जिए।
- 57:06तो आज से तुम। खुद की तरकीब से जियो।
- 57:12तुम्हें बता दिया। मैंने दफ्तर से आओ।
- 57:18खाली वक्त जब भी। हो?
- 57:21शाम को खाना पकाना। है या खाना खाना है या कोई और काम
- 57:27धाम है? जब फुर्सत के लम्हे।
- 57:31हों। तो बैठ जाओ, बस मात्र जियो,
- 57:36सिर्फ़ जियो। न कोई भी प्रश्न।
- 57:40न कोई अन्ना पान कुछ नहीं। तुम और नहीं तो तुम।
- 57:46खाली बैठते हो? तुम कहते हो अन्ना पान ही करो।
- 57:52क्यों कर रहे? हैं।
- 57:56कुछ मिलेगा, सुख मिलेगा अपने भीतर उतरेंगे ये भी तमन्ना है।
- 58:09ना कोई ना पान। ना कोई विभशण कुछ।
- 58:14नहीं करना। सिर्फ बैठना मात्र जीना जैसे रात
- 58:19को सोये थे। वैसे दिन में।
- 58:22जागते जागते बैठो। आएँगे।
- 58:28विचार। तूफ़ान विचारों के तूफ़ान इच्छाओं
- 58:34की बाड़ भी लगेंगी। मनुष्य में सब आएगा।
- 58:40सकरीन में दुश्मन भी आएगा, दोस्त भी आएगा।
- 58:45प्रेमी भी आएगा। प्रेमिका भी आएगी।
- 58:49सब आएँगे। लेकिन आने दे ना जाने दे ना तुम
- 58:55बैठो मात्र जी ना इच्छाएं आएंगी क्योंकि ये तुम्हारा संस्कार है।
- 59:08और संस्कार? जब तक तुम इसके साथ चलोगे, ये
- 59:13दृढ़ होते रहेंगे रोज़ दृढ़ करते रहे हो तुम।
- 59:18अब बारी है। इनको क्षीण करने की, संकल्पों को
- 59:23क्षीण करना सीखो। एकांत में बैठ जाओ।
- 59:33आराम से बैठ जाओ, कोई रीढ़ की हड्डी।
- 59:38को सीधा करके कुंडलनी नहीं जगानी है, क्योंकि कुंडलनी जगानी है, तो
- 59:44फिर कुछ छपाना है। कुछ पाना है तो फिर इच्छा है।
- 59:51ना कुछ पाना है। ना कुछ खोना है।
- 59:53सरहने लगा लो चारों तरफ सुख आसन से बैठ जाओ, लेटना है, लेट जाओ।
- 1:00:01तुम्हारी मर्जी है। लेकिन जियो।
- 1:00:06सिर्फ जियो, फिर सुनो सिर्फ जियो, बिना इच्छा के जियो।
- 1:00:18और इस वक्त फेंको। पढ़ाते रहो।
- 1:00:231 घंटे से शुरू। करो।
- 1:00:28फिर दो 3 घंटे। भर जाओ।
- 1:00:32और कुछ दिनों में। तुम पाओगे एक नशा सा उतरने लगा
- 1:00:38छाने लगा। मस्ती सी आने।
- 1:00:42लगी। पता नहीं कहाँ से।
- 1:00:47लेकिन तुम सिर्फ जीनो बड़ा आसान सूत्र।
- 1:00:53है। शायद।
- 1:00:57पता नहीं किसी ने बताया कि नहीं बताया।
- 1:01:01लेकिन आज बता। देता हूँ।
- 1:01:04मात्र जियो। मेरी इच्छा में जियो।
- 1:01:09ना कुछ खोना है। ना कुछ पाना है, कुछ खो जाए तो खो
- 1:01:14जाए, कुछ पा जाए तो पा जाए। तुम मात्र बैठे हो और तुम मात्र
- 1:01:20जियो। जीना परमात्मा की।
- 1:01:24न्यामत है उसकी वख्शिश है उसकी वख्शिश में जियो लुत्फ भी मत उठो,
- 1:01:35ध्यान रखना जीने का लुत्फ मत उठो लुत्फ आएगा।
- 1:01:43इतनी सी तमन्ना? देश मात्र भी तमन्ना तुम्हें
- 1:01:47विकृत कर जाएगी। लुत्फ भी मत।
- 1:01:52उठाने की चेष्टा करो। जीना तुम्हें।
- 1:01:57लुत्फ दे ही जाएगा। जो मिल गया उसी।
- 1:02:03को मुकद्दर समझ लिया। अगर लुत्फ मिल गया।
- 1:02:08तो मुकद्दर यही था। जो खो गया मैं।
- 1:02:13उसको बुलाता जला गया। हर फिक्र को धुएं में।
- 1:02:20उड़ाता चला गया। मैं जिंदगी।
- 1:02:26का साथ निभाता चला। गया बस जिंदगी।
- 1:02:32का साथ निभाओ। अभी तक तो नहीं।
- 1:02:36निभाया तुमने। तुम।
- 1:02:38पूछते हो मैं दुखी? हूँ क्यों दुखी हूँ?
- 1:02:42और कैसे दुख से। निवृत्ति हूँ बस ये सूत्र मैंने
- 1:02:46तुम्हें बता दिया। इसे आज मरो मात्र जियो बिना
- 1:02:52इच्छाओं के जियो। 1 घंटे से शुरू।
- 1:02:56करो। और फिर पूरे।
- 1:02:59दिन रात में तब्दील कर दो और तुम कुछ ही दिनों में पाओगे परिणाम
- 1:03:05आने लगे। फिर परिणाम तुम्हे।
- 1:03:11खुद ही करवा देंगे फिर कोई चिंता नहीं।
- 1:03:16फिर तो तुम चाहो। ना चाहो तुम्हें बैठना ही पड़ेगा।
- 1:03:22इतना। मजेदार वो आएगा कुछ भीतर से।
- 1:03:28उमड़ घुमड़ के आएँगे। बादल तुम्हें चारों तरफ़ से घेर
- 1:03:31लेंगे। आनंद की बारिश होगी, अमृत बरसेगा
- 1:03:34छलकेगा वो सुगन्धों से तुम नासा पुट भर लेना।
- 1:03:45आजमा के देखो जिन्होंने इसे। आजमाया?
- 1:03:55उन्होंने वो चैन। पाया।
- 1:03:59जिसे संत कहते। हैं आनंद श्री कृष्ण गोविंद हरे
- 1:04:10मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे
- 1:04:29नाथ नारायण वसुदेव। पितुमात।
- 1:04:37स्वामी सखा हमार पितुमात स्वामी। सखा हमार हे नाथ नारायण वासुदेव,
- 1:04:56श्री कृष्ण गोविंद आरे मुरारी हे नाथ नारायण?
- 1:05:07वासुदेव, श्रीकृष्ण, गोविंद, हरे मुरारी हे।
- 1:05:17नाथ? नारायण वासुदेव।
- 1:05:24कृष्णा कृष्णा, हरे हरे कृष्णा। कृष्णा कृष्णा हरे हरे श्री
- 1:05:59कृष्ण। गोविंद।
- 1:06:02हरे मुरारी हे नाथ नारायण वसुदेव श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:06:18हे नाथ नारायण वसुदेव वितुमात स्वामी।
- 1:06:30सखा? हमारे।
- 1:06:36पितुमात। स्वामी सखा हमारे हेनाथ नारायण
- 1:06:46वासुदेव, श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी।
- 1:06:55हे नाथ नारा यन वासुदेव। ओह, धन्यवाद।