Latest / Baba ji Vijay Vats / 17 Oct 25 - अच्छा-बुरा पैड़ा क्या है? क्या गुरु के सामने Confession करने से पाप मुक्त हुआ जा सकता है?
Transcript
- 0:03बाबा जी प्रणब क्या हम आपके पास आकर कुछ दिन साधना कर सकते हैं?
- 0:25आपने कहा कि जब तुम मेरे पास आओगे तो रूपांतरित हो जाओगे, दुखम का
- 0:40अंत होगा, सुखम का आभास होगा, कष्ट मिटेंगे।
- 0:55अच्छे दिन आएँगे। कुछ हमारी भी मजबूरी है, कुछ
- 1:23तुम्हारी भी मजबूरी है, कुछ हमारी मजबूरी है, ये हम बता नहीं सकते।
- 1:38क्योंकि जो जो तुम पाओगे वह शब्दों में आता नहीं, कुछ
- 1:47तुम्हारी भी मजबूरी है क्योंकि जो इशारे हम कर रहे हैं वो तुम्हारी
- 1:56बुद्धि पकड़ से नहीं पढ़ते। तुम्हारी बुद्धि महज अल्फाज को
- 2:01पकड़ती है, इसलिए इतने झूठे गुरु आज बनते हैं।
- 2:15तुमने पूछा पुत्र मेरे पास यहाँ साधना करने के लिए कोई जगह नहीं
- 2:20है। लेकिन मैं जीस दल से बोला उसको
- 2:27तुम चूक। है।
- 2:34मेरे पास आना भी आवश्यक है ताकि मन में शक न रह जाए।
- 2:44कि ताजमहल है मन में शक न रह जाए वह परम मस्ती के आलम में कोई दूर
- 2:59दराज तुम्हारे शोर पुल से पर। अपनी मस्ती के सबर के घूँट भर।
- 3:08रहा है। आना भी जरूरी।
- 3:14है और भीतर जाना भी जरूरी है। क्योंकि अगर मैं सबर और सबरी में
- 3:26हूँ तो उसे तल पर जाकर तुम्हें परमात्मा तो नहीं देखा?
- 3:42एक नेक झलक मिल जाए झरोंखा तुम्हारे पास से गुजर जाएगा कि
- 3:49हाँ, कुछ तो है। बस ये कुछ तो है कबारी का धागा
- 4:06तुम्हे दसवीं बार तक ले जाएगा श्रद्धा के बिना तुम चल लो पाओगे।
- 4:18श्रद्धा तुम्हें पंख देती है, फिर तुम जमीन पर रेगने वाले उठने लग
- 4:29जाते हो। और फिर अगर तुम मेरे पास आओगे तो
- 4:45ध्यान रखना, तुम्हें भी थोड़ी सी महोक्षा की भावना होनी चाहिए अगर
- 4:55तुम कुछ। और इच्छा लेकर आए तो तुम गलती में
- 5:06हो, इच्छाएं तो तुम्हारी पूरी हो जाएगी, लेकिन वो न पा सकोगे जो
- 5:19मैंने पाया। मेरे पास एक शिक्षा आया करता था।
- 5:26बीते जमाने के बाद जब मेरे से बहुत कम लोग परिचित थे, उन आराम
- 5:36की बेला में खाली कर दो, मेरे पास आता और मैं सब कुछ ढेल दिया।
- 5:53अगर मृत व्यक्ति में जान पड़ जाए और वह उठकर कुकृत्य करने लगे तो
- 6:10उसका दोष भी जान डालने वाले में होता है।
- 6:20मैंने उसने शक्ति दी ध्यान से सुनने की।
- 6:26बात। उसने शक्ति का दुरुपयोग किया,
- 6:32उन्हें छोटी छोटी बच्चियों से मुलाकात कर रखा।
- 6:35है। क्योंकि उसके भीतरी अनकक्ष काम
- 6:47वासना में उजू हुई और उससे भी अगला गुनाह ये कि अगर तुम गुनाह
- 7:02करके छुपाओगे। कन्फेशन ना करो इसलिए इसाईत में
- 7:11कन्फेशन का इतना महत्त्व है तुम्हारे पाप धुल ना पाएंगे अगर
- 7:21तुमने उन पापों का कन्फेशन ना किया कन्फेशन ऑफ़ एरर।
- 7:27इज़ लाइक आबरूम दैट सूप्स है दैट एंड मेक्स ए सरफेस क्लीनर दैन वे
- 7:34फ़ॉर मेरे से छुपाता मेरे लिए तो। लेकिन ध्यान रखना लक्ष पांव छुप
- 8:04ना सकेगा। असली नकली जहर घट घट के अंतस की
- 8:13जान भले बरेगी फिर कुछ ना। उससे तो पूछ लेते हैं, क्या आपको
- 8:20पता नहीं? होगा नहीं, क्योंकि पता चलता है।
- 8:28कॉन्सियस मैएंड, सबकॉन्शियस मैएंड, अनकॉन्शियस मैएंड और
- 8:33कलेक्टिव अनकॉन्शियस मैएंड वहाँ जाकर पता चलता है।
- 8:39और वहाँ कोई हमारा वास्ता नहीं पड़ता।
- 8:41जाने का संत पुरुष क्यों जाएगा? किसी के प्राइवेट रूम है, वह
- 8:47तुम्हारा प्राइवेट रूम है। जैसे आप मेरे व्हाट्सएप पे आ जाते
- 8:52हो बिना पूछ। यह मेरा प्राइवेट घर आना नहीं
- 8:56चाहिए। जब कमेंट बैक्स खुला है तो आप
- 9:02कमेंट में लिखो। अपनी दुख तकलीफ कोई प्राइवेसी है
- 9:09तो मुझे पत्र लिखो, व्हाट्सएप पे आना।
- 9:15गुना है लेकिन तुम घुस जाते हो पर बहुत से लोग नेचुरल फेंक जाते
- 9:23हैं, ये बात मैं बोला हूँ, अपने अनुभव से बोला हूँ।
- 9:35अगर किसी को अच्छी नहीं लगी, ना सुने, ना शेयर करे, ना लाइक करे
- 9:41ना फॉर्वर्ड करे। लेकिन मज़े की बात ये है जो खुद
- 9:51उस स्थल पर नहीं पहुंचा वो उस स्थल के कमेंट के ऊपर।
- 9:56टिप्पणी करती है। नहीं नहीं बाबा इट्स ए हैलो सुनिए
- 10:01सुन कोई एनलाइटनमेंट नहीं होती, ऐसा कोई स्थान है ही नहीं तो
- 10:08मैंने कहा फिर परमात्मा ने इतनी सरजना बना के?
- 10:12क्या कोई ऐसा गुलशन आबाद नहीं किया?
- 10:15जहाँ व्यक्ति जाकर घड़ी तो घड़ी के लिए आराम फरमा सके, फिर तो
- 10:23दुखों का घर पैदा कर दिया। फिर उस ऐसे सृजन हार को?
- 10:31मैं फीटे का लानत कहूंगा, इसने नरक का ही निर्माण किया जो स्वर्ग
- 10:38न बना सका, नहीं परमात्मा ऐसा नहीं परमात्मा ने स्वर्ग पहले
- 10:48बनाया। तेरे पास सके मेरा वह तू गुजर
- 11:00जाता है। दो घड़ी के लिए गम जानें किधर
- 11:14जाता है तेरे पास आके मेरा? जा।
- 11:34मुझे सूचनाएं मिली बाबा आप कैसे व्यक्ति को कैसे परिवार को घर में
- 11:41प्रवेश दे रहे हो, इनकी छाया ही बढ़ी।
- 11:51इसे ही हमारे समाज में पैरा का नाम दिया गया है।
- 11:59कुछ कुछ व्यक्ति होते हैं जिनके चले जाने से आबादी आ जाती है।
- 12:04और कुछ कुछ व्यक्ति होते हैं जिनके प्रवेश से।
- 12:09बर्बादी आ जाती। है।
- 12:17विभीषण ऐसा ही विभीषण का अंतः ऐसा निर्बल था अन्यथा प्रभु रामू से
- 12:25स्वीकार न करता और जैसे ही वो लंका से निकला।
- 12:35लंका के 2 दिन आ गए। इससे पहले भी लाख बुराइयां कर
- 12:40चुका था। रबन लेकिन तुम्हे जानकर बड़ी
- 12:47हैरानी हो गई। एक बंदे के कारण सारी लंका आबद।
- 12:56इसलिए कहावत है और इन कहावतों में दम हुआ करता है।
- 13:07भगवान राम के जमाने की कहावत है। लेकिन कहावतों को बिगाड़ दिया
- 13:13गया। मैंने पहले भी कहा, परानों में
- 13:16बड़ा रस भरा है, जलेबी की तरह तुम उस रस को निकाल नहीं सकते, पी
- 13:21नहीं सकता है? उसी कुछ ऐसी प्रवृत्ति के लोग
- 13:36होते हैं जिनके जाने से खिज आ जाती है।
- 13:48कुछ ऐसी प्रवृत्ति के लोग होते हैं जिनके आने से फिजा आ जाती है।
- 14:01अचानक से मैं वहाँ गया, तब इशारा आया मेरे पास मैं बीमार नहीं लगा,
- 14:10मैं पागल हो गया। मेरे शरीर के सभी यंत्र ओल्ड जूल।
- 14:21सब वेबसाइट हो गया। अब तुम जानकर हैरान मत हो ना
- 14:30लेकिन मेरी बातों को गौर से सुन आदिकाल से हमारे सनातन में यह बात
- 14:39आई। किसी किसी का पेड़ बड़ा खराब होता
- 14:41है। यानी वह है व्यक्ति फिजिकली
- 14:48तुम्हारे पास होना चाहिए। पेड़ का मतलब क्या होता है और
- 14:58किसी किसी व्यक्ति का पेड़ बड़ा खराब।
- 15:00होता है बड़ा अच्छा भी होता है। अच्छे दिन आ जाते हैं, वास्तव में
- 15:07आ जाते हैं और अगर वो चला जाए तो बुरे दिन भी आ जाता है।
- 15:13ऐसा ही हुआ विभीषण के साथ विभीषण ने बहुत कहा, भईया क्षमा करो।
- 15:27अब बहुत ताकतवर हो भाभी मुझे रोज़ कहते हैं किसको समझाओ मैं क्या
- 15:37समझाऊं? चारों वेतों के ज्ञानी हो तुम।
- 15:48और भाभी मंदोदरी समझा समझा के हार गई, सब गए, लेकिन रावण दुर्बुद्धि
- 16:02हो गया था। पिनाश काले विपरीत बुद्धि।
- 16:11और मुझे प्रेरणा हुई। के तुम इस व्यक्ति के कलेक्टिव
- 16:19अनकॉन्शियस में जाओ, वैसे मैं किसी के कलेक्टिव अनकॉन्शियस में
- 16:24जाता नहीं क्योंकि ये उसकी प्राइवेसी।
- 16:27है। वह अच्छा है।
- 16:32तो सुख भोग लेगा, वह भूरा है तो दुख भोग लेगा, लेकिन खुद ही तो
- 16:38भौगेगा ना? हमें क्या आवश्यकता पड़ी लेकिन
- 16:48प्रेरित हुआ और मैं उसके कोलेक्टिव अनकॉन्शस में घुस गया।
- 16:57और मैंने जाके उसकी हरकतें देखीं, मेरी रूहों का घर में ऐसी ऐसी
- 17:11नर्त होने शुरू हो गए। तुम एनलाइटन भी हो जाओ।
- 17:22लेकिन कुछ व्यक्तियों का बेड़ा तो मैं नाश।
- 17:26कर सकता हूँ? खैर।
- 17:33भगवान राम ने सुसाइड क्यों किया माँ सीता ने?
- 17:39सुसाइड क्यों किया? तुम तो बड़ी सुंदर सुंदर नाम दे
- 17:42देते हैं, जल समाधि ले ली, सीता माता धरती में समा गई, धरणी में
- 17:54समा गई क्योंकि धरती में उसकी माता थी नहीं, ऐसा नहीं।
- 17:59तुम्हें सच्चाई का पता नहीं। कभी विराट ढंग से बोलेंगे तो
- 18:09कोलेक्टिव अनकॉन्शियस में जाके मैं उसकी जो कृत्य देखें मैं समझ
- 18:15गया कि ये पर्दा क्यों डाल? रहा था।
- 18:21उस व्यक्ति पर एक नहीं अनगणित वास्को ऐक्टर लगनी चाहिए और वो
- 18:29जहाँ रहेगा वहाँ बर्बादी ही रहेंगी।
- 18:37फिजाएँ उनसे दूर नहीं जाएंगे। फिजाएँ उनका दम नहीं झूमेगी
- 18:54क्यों? क्या दुर्गंध का कोई कसूर होता
- 18:58है? सुगंत का?
- 19:10आप उसको सुगंत को इतना पुरस्कार देते हो?
- 19:15दुर्गंत को नाक भौं सिकोड़ लेते। हो दुर्गंत ने क्या किया, सुगंत
- 19:24ने क्या किया? लेकिन दुर्गंध ने कुछ ऐसा किया
- 19:34जिसके पास बैठने को मन नहीं करता। गटर के पास खड़े होने को आपका मन
- 19:39नहीं करता, फूलों के बगीचे में टहलने का आपका मन करता।
- 19:43है। ऐसा हुआ मेरे जीवन के साथ हुआ दर
- 19:58बदर भटकने की बात ये सभी संतो का अंत कैसे हुआ?
- 20:05मैं उनके कारण जानता हूँ। क्यों हुआ कैंसर कृष्ण मुक्ति?
- 20:15राम कृष्ण पर मंस को गली का कंस को राम ने जल समाधि ले ली।
- 20:22यानी सुसाइड कमिट किया को माँ सीता ने सुसाइड कमिट किया।
- 20:30ये बातें बढ़िया, महत्वपूर्ण हैं और बड़ी गोपनीय भी, क्योंकि जब
- 20:36तुम सुनोगे राज़ वो तुम्हारी धरती थर्रा जाएगी ये ऐसे गहरे राज़।
- 20:48जिससे संक्षेप में आदि गुरुओं ने ऋषियों ने ये कहकर निपटा दिया कि
- 20:58किसी किसी का पेड़। खराब होता है।
- 21:02किसी किसी के पग फेर खराब होता है।
- 21:06लेकिन इस बात को सहेजे सहेजे मत लेना ये बड़ी विचारणीय और बड़ी
- 21:15अंतर से आयी हुई बात जीस व्यक्ति के आने से अनिष्ट शुरू हो जाए।
- 21:26गोस्वामी तुलसीदास ने एक बहुत सुन्दर शब्द लिखा इसको सुनना वैसे
- 21:39ये इसका सार था ये मंथ में। ये गोस्वामी तुलसीदास ने जो बातें
- 21:44लिखीं। सूरज इतनी दूरी पर है या जो भी
- 21:49बातें लिखीं वो चुराई गई बातें थीं जैसे वाच साई ने खुद तो
- 21:56ब्रह्मचारी था, काम सूत्र लिखे, अनुभवी लोगों से पूछ पूछ के रखे।
- 22:06लेकिन खुद भर में जा रही थी। ऐसे ही बहुत से संत तुम्हे दे रहे
- 22:20हैं दूसरों दूसरों को सुन के। उपदेश आना चाहिए।
- 22:31खुद के स्वय अनुभव से तुम जाओ, उस स्थल पे वहाँ बैठो।
- 22:39आराम। करो वहाँ कुछ पल कुछ गड़ियां
- 22:44बिताओ। सोते सोते तो तुम रोज़ रात बिताते
- 22:49हो? जागते जागते बताओ, ध्यान की
- 22:58गलियों में खो जाओ तुम्हें जीने का सलेका आ जाएगा।
- 23:07वह मेरे लिए महंगे उपहार लेके आता बाहर से सब करता हूँ क्योंकि बड़े
- 23:18कम लोग है मेरे पास यह परिवार के पास बड़ा मौका था।
- 23:28लेकिन गंगा क्या करे अगर गंदे ना ले उसको भी मलेनम करते हैं मैं
- 23:40बीमार रहने लगा, बुरी लाचार रहने लगा।
- 23:47और मुझे भीतर से आवाज आई किसके कोलेक्टिव अनकॉन्शियस में जाओ
- 23:55तुम्हारी सर से। ये बातें गुजर जाएंगे क्योंकि ना
- 24:01तुम्हें कलेक्टिव अनकॉन्शियस का पता, ना तुम्हें अनकॉन्शियस का
- 24:06पता ना सब कॉन्शियस का पता तुम्हें सिर्फ चेतन का पता है, वो
- 24:10भी थोड़ा सा। तो मैं वहाँ गया आदेश था गया और
- 24:22जाके देखा मैं देख नहीं सकता। मैंने बाहर आके सार्वजनिक रूप से
- 24:39कह दिया कि यह व्यक्ति। जहाँ रहेगा वहाँ बर्बादी होगा
- 24:50क्योंकि मैंने देख लिया था कर्मों के परिणाम क्या होता है?
- 24:59कोई किसी को जहर पिलाके खुद अमृत की कामना न करे और फिर इस व्यक्ति
- 25:08ने छुपाया। इसका अंदाज बड़ा निराला।
- 25:11था। मुझे भनक भी न लगने दे जब मुझे
- 25:20पता चला मैंने इसे बुलाया अकेले में बुलाया।
- 25:30मैंने से कहा आज के बाद यह मत आना चले जाओ गुरु के सामने कभी कोई।
- 25:43बल्कि तुम उसके सामने बोलोगे तो मुक्त हो जाओगे यही कन्फेशन होता।
- 25:48है। गुरु के सामने अपने पाप बोलने से
- 25:53कट जाते हैं, जो किसी न तीर्थ स्नान से करते, न गंगा स्नान से
- 25:59कटते, न हाजि यात्रा करके आते। हैं।
- 26:04महज एक ठोर है, जहाँ जाकर कन्फेशन करने से हमारे सभी पाप समाप्त हो
- 26:12जाते हैं। यह बड़ी गोपनीय बात है हमारे
- 26:16शास्त्रों में इसलिए बड़ी संवेदनशीलता से छुपा के रखे।
- 26:24क्योंकि इसका दुरुपयोग भी हो सकता है।
- 26:30कोई पाप करेगा, संत पुरुष के जाके पास बैठ जाएगा, कन्फेशन करेगा
- 26:35मैंने ये पाप किया मुक्त हो जाएगा।
- 26:38और फिर वह और पाप करने के लिए तैयार हो जाना।
- 26:44ये सब समझो कि गंगा में जाकर स्नान तुमने कर लिया, वहाँ तो पाप
- 26:49कटते नहीं है वहाँ तो तुम स्नान करके आते हो 2 दिन बाद
- 26:56हॉस्पिटलाइज़्ड हो जाते हो। क्योंकि पाप नहीं घटेगा।
- 27:00भय तो सिर्फ तुम्हें एक इशारा किया था, कुछ ऐसे तीर्थ होते हैं
- 27:10तीर्थनामा जय तिस पावे। अगर उसकी कृपा हो जाए तो ऐसे
- 27:15तीर्थों के दर्शन हो जाते हैं। ऐसे तीर्थों में स्नान भी होता।
- 27:20है। संतों ने आपको इशारे किये?
- 27:25इन्हीं को मैं जलेबी का रस कहता हूँ।
- 27:30वह जानते थे कि आम व्यक्ति से ना समझ पायेगा।
- 27:37और समझना चाहिए क्योंकि आम व्यक्ति को समझ में आ गया तो वो
- 27:43दुरूपयोग करेगा जैसे एटम बम कैसे बनता यूरेनियम?
- 27:49कैसे प्यूरीफाई होता यह सारा छुपा लिया गया।
- 27:57और जो इसे बताएगा, दोषी समझा जायेगा उसको सजाओगे क्यों?
- 28:05क्योंकि एटम बम को बनाने का फॉर्मूला बस जैसे आपने संसार को
- 28:14इंसानियत को। ध्वस्त करने का काम करती है।
- 28:19ये सार्वजनिक नहीं होना चाहिए। इसलिए ऐसी बातें श्रुतियां
- 28:25कहलायीं श्रवण, कानों से कान कान में धीरे से आवाज़ मारते।
- 28:33हैं। ये श्रुतियां।
- 28:38तुम आज वेद उपनिषित की बातों को श्रुतियां मानते हो?
- 28:43ये नगरी श्रुतियां ये हैं जिनकी एक छोटी सी झलक मैं तुम्हें आज
- 28:50पेश कर रहा हूँ कुछ स्मृतियां। उन्हें पता था शास्त्र जलाये जा
- 28:57सकते हैं, किताबों को आग लगाई जा सकती है।
- 29:06बख्तियार ने जला दिया नालंदा। तो स्मृतियां शुरू से ही जानते थे
- 29:17बहुत सी बातें समृतियों में आज भी हमारे घर के की औरते आदमी,
- 29:26माताएं, नानी, दादी, बूढ़ी औरतों के पास कुछ ऐसी बातें?
- 29:34जिनमें बड़े गहरे तत्व हैं और हम उनको अंधविश्वास कहे कि उपेक्षित
- 29:44कर देते है। नहीं नहीं ये पुराने ज़माने की
- 29:47घिसी पीठी बातें है। घिसी पेटी नहीं, इन्हीं में रस
- 29:51है, इन्हीं में तंत है। उगाड़ने वाला चाहिए तो जानते थे
- 29:58जब कोई आएगा इन अक्षरों को बाचने वाला हर एक व्यक्ति फारसी भी तो
- 30:07नहीं ना पड़ सकता? हर एक व्यक्ति चाइनीज नहीं पढ़
- 30:15सकता। हर व्यक्ति कोई भाषा नहीं पढ़
- 30:17सकता। वाह रे तेरी कुदरत के खेल बड़े
- 30:28फारसी बेचे तेल। फारसी बड़ी मुश्किल जुबान।
- 30:34है। तो ऐसी शब्दावली में लिख दी गई जो
- 30:45बांच सकेगा, वह जान सकेगा। बस भीतर का तत्व ऐसी ही फारसी है।
- 30:58जिसने बाचा वही बता सकेगा। यह ऐसी फारसी है जिसने देखा खुद
- 31:10वहाँ जाकर वही बता सकेगा। अन्यथा यूट्यूब चैनल के ऊपर आज
- 31:21कितने अंधे बैठे हैं। मीडिया कितने मूर्खों का प्रसार
- 31:27कर रहा है। इनके वाणी में न अनुभव है।
- 31:36अभी कल एक व्यक्ति मुझे पूछ रहा था अगर प्रेम आनंद मर गए तो मैंने
- 31:40कहा कोई तूफान नहीं आ जाएगा। ऐसे लोगों को बोलना चाहिए भी नहीं
- 31:46जिन्होंने देखा ही नहीं। ये धरती आज अवनाश के कगार पे
- 31:55पहुंची। इन लोगों के कारण पहुँच इन्हें
- 32:02मैं दुष्टजन कहता। हूँ।
- 32:08जो बिना स्वय अनुभव के किसी से पढ़ के लिख के सुन के उस गहरी
- 32:18सत्य का प्रगटीकरण कर देते हैं। शायद प्रगटीकरण के शब्द सही हों।
- 32:28लेकिन रसन आपका रस तो उसी में आएगा जिसने जाकी पिया अमृत उसकी
- 32:38वाणी में आनंद होगा, रस होगा, एक मीठा होगा।
- 32:45हो सकता है शब्दों की नकल कर ले कोई इट्स पॉसिबल लेकिन अनुभव की
- 32:51नकल न हो पाएगा। वह नकल में आता नहीं इमिटेट कर
- 32:57सकते हो तुम शब्दों को। तो संतो ने इन बातों को प्राणों
- 33:08में गढ़ दिया। ये श्रुतियां कहलाईं और कुछ ऐसा
- 33:13था, जो श्रुतियों से भी ठीक नहीं आएगा, क्योंकि एक कांत से दूसरा
- 33:20दूसरे कांत से तीसरा व्रती ऐसी होती है आमतौर से स्त्रियों की
- 33:24होती है। जीस बात को तुमने शाम तक सारे नगर
- 33:29में डिंढोरा पिटवाना हो किसी स्त्री के कान में गए खास तौर
- 33:35किस्से होती है क्षमा करना मुझे हर एक स्त्री में शाम तक सारे।
- 33:45गांव को पता लग जाएगा और प्रत्येक स्त्री दूसरे से कहेगी देखो मैंने
- 33:51तुम्हे बताती आगे मत बताना लेकिन शाम तक खबर सारे ग्राम को मिल
- 33:57जाएगा। यह होतल है जहाँ ये कहावत सही
- 34:09होती है, बड़े फारसी बेचें। तेल के यूट्यूब के ऊपर बिना अनुभव
- 34:20के बोलने वाले लोग ऐसे हैं ये ना होते तो ज्यादा अच्छा था।
- 34:28कुछ लोग गदियों पर। बैठकर बड़ी दुष्टता का काम कर रहे
- 34:37हैं। उन्हें देख लेना चाहिए हमारे आने
- 34:39से फिजाएं आईं यक गई जाए। और देश के हित के लिए उन्हें
- 34:50स्वयं को दूर रखना चाहिए। खैर मैं भी इशारों में ही बोल रहा
- 34:57हूँ, समझने वाले समझ ही जाएंगे तो तुलसीदास ने लिखा इन शब्दों को।
- 35:09बड़ी सहायता से सुनना ये शब्द किसी के थे, तुलसी ने नकल कर ली
- 35:14जैसे मैं आज बोलूं, मैंने देखे तो नहीं, एटम ना इलेक्ट्रॉन,
- 35:24प्रोटॉन, न्यूट्रॉन। कुछ नहीं दिखा।
- 35:28सर विश्वास और इतना गहन विश्वास कि साइंटिस्ट तो कभी झूठ नहीं
- 35:33बोले, इसलिए देखने की आवश्यकता भी नहीं समझे और मेरे पास देखने की
- 35:41उपयोगशाला भी नहीं है, लेकिन मैं जानता हूँ।
- 35:48सत्य सार्वभौमिक होता है, लेकिन तुम शक्ति को सार्वभौमिक बनाने की
- 35:56चेष्टा करते हो। तुम इमिटेशन को तुम नकलों को तुम
- 36:02जो सर्कस करते हो। उनको सार्वभौमिक बनाने की चेष्टा
- 36:07करती हो। कैमरे के आगे ऐसे संत पुरुषों की
- 36:12फोटो खेंचें। जाती।
- 36:16हैं भला? रात को 1:30 बजे दर्शन के लिए
- 36:18जगाना पाग गए जब उन्हें। कहीं कहीं हमारे शास्त्रों में
- 36:26लिखा सोए हुए व्यक्ति को जगाना पाप है क्योंकि वो गहन ने द्रम
- 36:32है। वह शुशुक्ति में हैं और शुशुक्ति
- 36:36अर्ध ध्यान की अवस्था होती है और ध्यानी को तुम जगा दोगे फिर?
- 36:46मैं कई बार मेरे पास फ़ोन आ जाता है, मैं कई बार कहता हूँ, देखो
- 36:51मुझे फ़ोन करके तुने बड़ा पाप किया है आगे से मत।
- 36:55करना हर वक्त जो उस आनंद के रस का प्याला भी रहा।
- 37:04उससे छेड़छाड़ करना ठीक नहीं होता।
- 37:09तुम्हारा मन तो ऐसे ही दुखी है, चलता रहेगा, लेकिन जो पीता है उसे
- 37:17तो पी लेने दो और ये पीना ऐसा। कि तुम तृप्त भी हो जाओगे, फिर भी
- 37:27तुम पीते ही रहोगे। क्योंकि अब बाँट न है तुलसी दास
- 37:36ने लिखा बिछुर्त? एक प्राण कर ली।
- 37:45एक व्यक्ति ऐसा होता है जो जब बिछड़ता है प्राण भी ले जाता है
- 37:51साथ खुद ही नहीं जाता जैसे तुम्हारी प्रेम का तुम से रखो कही
- 37:57हो जैसा तुम्हारा प्रेम ही तुम्हे छोड़ के।
- 38:05तुम बिछुर का है, तुम्हारा प्राण भी लेके आओ बिछुरत एक प्राण हर ले
- 38:18मिलत एक दुख दार बनते हैं। और एक ऐसा कि मिल जाए तो दुखों का
- 38:28अनंत समुद्र तुम्हारे जीवन में आ जाता है तो देखना थोड़ा आराम से
- 38:34बैठ के ध्यान इसलिए होता है घंटा आध घंटा ध्यान में बैठना चाहिए।
- 38:41आत्मा निरीक्षण करना चाहिए। क्यों?
- 38:44मैं आज दुखी हूँ क्यों मैं आज प्रसन्न हूँ, ऐसा क्या हुआ और
- 38:50तुम्हे सूत्र मिल जायेगा तो विभीषण को गद्दार कहने वाले आज
- 39:01ओशो हैं नहीं। लेकिन हैं जहाँ वहाँ तक मेरी बात
- 39:08मैंने पहले ही पहुंचा दी। तुम यहाँ जो गंदगी फैला के गए हो
- 39:12ना उसको धरती सैकड़ों वर्षों तक हजारों वर्षों तक भोगे।
- 39:21तुम एनलाइटन क्या हुए जैसे एक पनौती बन के आकर उस रस को बीते
- 39:29ज्यादा बढ़िया। था।
- 39:31तुम्हें बोलना नहीं। था।
- 39:36तुम्हारी ये फिलॉसोफी के अमे लोगों के लिए जहर साबित हुई।
- 39:43लिबरल सेक्स कमाल है, मुझे बड़ी हैरानी होती है।
- 39:57और हवाला देती हैं खजुराहो के मतलब को।
- 40:02बहुत मूर्तियाँ भी हैं, लेकिन उनके अर्थ कुछ और है, लेकिन
- 40:06दार्शनिक व्यक्ति अपने ढंग से अर्थों को खोज लेगा।
- 40:10इसलिए मैं कहता हूँ उसको को नहीं बोलना।
- 40:12चाहिए। कामवासना के बारे में औरतों को
- 40:24ज्यादा फायदा होता है। हाथ में से तुम्हें बोलना चाहिए
- 40:36था जो तुम्हें दर्शन दिए वृक्ष पर बैठे तुम नीचे आए।
- 40:45तुम्हें जो हुआ वो बोल देते ही ज्यादा शुभ।
- 40:47था। लेकिन लायब्ररी सक्षक है कि तुमने
- 40:53ऐसा काम कर दिया। तंत्र क्यों फैल हो गया?
- 40:59मात्र श्री फैल हो गया। आज तांत्रिक क्यों नहीं मिलते
- 41:04आपको? इसी कारण सूत्र तो मेरे पास हुए
- 41:13हैं। किसी व्यक्ति को जब चाहे तुम खत्म
- 41:18कर सकते हो। लेकिन क्या मैं उस सूत्र का उपयोग
- 41:22करूँ? किसी व्यक्ति को हज़ारों मील दूर
- 41:30बैठे जब चाहो मौत की निद्रा में सुला दो इसीलिए छुपाया था संतो ने
- 41:41ऐसे व्यक्ति को जो पात्र को। जो कानों का और मुक्का कच्चा न जो
- 41:51किसी भी कीमत पर सर जाए जाए, धड़ जाए जाए लेकिन सार्वजनिक न करें।
- 42:04मेरे पास यहाँ थोड़ी तू शेक फ़ोन आता बाबा मुझे सूत्र बता दो, नहीं
- 42:12मार दूंगा तो मैं मैंने कहा भाई लाखों व्यक्तियों को मारने से
- 42:18अच्छा तो मुझे मार दो। ज्यादा बेहतर होगा संसार के लिए
- 42:24कि मैं मर्जम क्योंकि अगर तुम जैसे कच्चे लोगों को बता के
- 42:29बताऊँगा बताया है, लेकिन कुछ ऐसे खिलाड़ियों को बताया।
- 42:38इसलिए गुरु अच्छी तरह से ठोक बजा लेता है शिष्य को।
- 42:41और। उसके घर वाले आज भी पूछते हैं
- 42:46इसने तो बड़े शुभ काम किए थे, इसको क्यों भगा दिया?
- 42:49उन्हें बताइए फनौती व्यक्ति को? तो घर की चौकड़ से ही वापस हो
- 43:03जाना। चाहिए।
- 43:05क्षमा करना, मेरे घर के द्वार से बहुत व्यक्ति मैंने वापस किया और
- 43:15तुम सबने देखा होगा। और तुम सबने बुरा भी मनाया होगा
- 43:20जो वापस चले गए। आखिर क्या बिगड़ता था?
- 43:24बाबा को मेरे शिष्य मुझे बता देते हैं बाबा ये देखो क्या बिगड़ता था
- 43:36अगर हम दर्शन कर लेते। भाई बिगड़ता तो कुछ नहीं था।
- 43:41मेरे आंतरिक तत्वों का कुछ नहीं बिगड़ता था।
- 43:45मैं तो सदस्या हूँ, आज सच जुगा सच हैप्पी सच न न कहो से भी सच।
- 43:56लेकिन इस ढांचे को स्केच कर जाता हूँ।
- 44:01और अभी तुम्हें जरूरत। है।
- 44:07तब तक मेरा शास्त्र भी परिपूर्ण नहीं होगा और लोग चाहते थे कि मैं
- 44:15गाँधी जैसा रोल निभाऊं। गाँधी अब पैदा नहीं होगा क्यों?
- 44:23क्योंकि जब तुम ने ऐसी पनीर पैदा कर ली जो गाँधी को मारने वाले
- 44:32गोडसे को सम्मानित करे तो गाँधी पैदा होने की जगह कहाँ रखे?
- 44:40अगर कोई तुम्हारे हित की बात करेगा तो उसको गोली मार दोगे।
- 44:46एक बात गिना दो एक बात सही समझ से गाँधी ने जो गलती की हो गलती
- 44:51इंसान तो करता है और भगवान था भी नहीं गाँधी।
- 44:57भगवान तो इस जन्म में गाँधी हुए उस जन्म में गाँधी भगवान नहीं थे
- 45:06और इंसान गलती करता है हो गई होगी लेकिन ये बताओ उसने जो किया
- 45:11ईमानदारी से किया या नहीं किया? बस इतनी सी बात।
- 45:15है। पूर्ण शक्ति से किया या नहीं
- 45:20किया, ईमानदारी से किया नहीं किया।
- 45:27कौन चाहता है अपनी बैरिस्ट्री का सूट?
- 45:32टाय? एक संदूक में बंद कर दे और कुछ दे
- 45:36लंगोटी पहन के फिर बड़ी सर्दी में उसे तो आजादी चाहिए ही नहीं थी।
- 45:43अकेले को सारा देश आजाद होना था और वह अकेला भोंकता फिरा।
- 45:53और जब देश के आजाद होने की घोषणा हो गई तो तुम्हे क्या बताऊँ
- 45:58तुम्हे रोना आएगा। गाँधी अकेले अपने लठ के 778 साल
- 46:04का वह व्यक्ति जिसे छह महीने आजादी के दर्शन नहीं करने दिए
- 46:09तुमने। नवाखली में अकेला फिर जाये और
- 46:12उसके साथ छोटा बच्चा भी नहीं। तुम आज़ादी का जश्न मना रहे हो पर
- 46:20वो अकेला बूढ़ा व्यक्ति उसको पूछने वाला कोई नहीं और फिर उसको
- 46:27गोली मार दी गई। अनाप शनाप कारण बता।
- 46:32के। और उन्हीं गाँधी के बल पर गोडसे
- 46:37ने आखिरी पली ली कि गाँधी क्योंकि अहिंसावादी थे, अगर तुम मुझे मार
- 46:42दोगे तो गाँधी जीके सिद्धांतों का तिरस्कार हो जाएगा।
- 46:47इसलिए मुझे क्षमा कर दो। बेगैरती की हद हो गयी।
- 46:59गाँधी ने जो किया कम से कम स्वार्थ के लिए नहीं किया गलती
- 47:03क्यों हो गया? मैं मानता हूँ, लेकिन जीसको तुम
- 47:07गलती कहते हो उसको विचार करके देखना क्या वो गलती भी थी?
- 47:13प्रत्येक व्यक्ति अपनी समझ से चलता है।
- 47:15उसकी समझ थी गलती तो वह बिल्कुल नहीं करता, लेकिन उसकी समझ थी
- 47:23उसने वैसा कर लिया। लेकिन ये बताओ कि उसने जो किया
- 47:32गाँधी ने ईमानदारी से किया नहीं किया, बेईमान तो नहीं था, धोखेबाज
- 47:40तो नहीं था, गद्दार तो नहीं था, आजादी में बाधा तो नहीं बना?
- 47:49किसी को ये विश्वास तो नहीं दिलाया कि फिकर मत करो, मैं
- 47:54हिंदुस्तान को आजाद नहीं होने दूंगा।
- 47:57चरण तो पकड़ के नहीं बैठे हैं। ₹60 की पेंशन तो नहीं ली देखिए उस
- 48:04वक्त ₹42 कलेक्टर की तमकाव थी, ज्ञान से सुनो।
- 48:10₹42 कलेक्टर की तन्खा होती थी और कलेक्टर की इतनी बड़ी पोस्ट होती
- 48:16है और साबरकर को पेंशन मिलती थी। ₹60, तुम अलग अलग बहाने लगा सकते
- 48:24हो, लेकिन लगाते जाओ। अब गाँधी भी गए, गाँधी आज नहीं
- 48:31है, आज गाँधी की प्रतिमूर्ति है और तुम्हें भी ओपेन मैं कहता हूँ
- 48:45यू कैन मर्डर में कोई वंदन नहीं है।
- 48:50ज़रा बता देना मैं तुम्हें मारने आया हूँ, मैं तुम्हें इतनी भी
- 48:54तकलीफ नहीं दूंगा, मैं अपना प्रवचन छोड़ के भी आ जाऊंगा
- 49:05विश्वरत् एक प्राण भर लें एक व्यक्ति कितना प्यारा होता।
- 49:11है। गाँधी जब मरे सारा देश सोया, रोया
- 49:18मगरमच्छ के आंसू सर्दी का महीने था, रजाईयों में मुँह दे दे कर
- 49:26रोया सारी सारी रात रोया उस दिन आधा हिंदुस्तान भूखा सोया।
- 49:35हो गई थी 5:17 पर रात को रोटी नहीं आधा हिंदुस्तान भूखा सोया,
- 49:44रोता हुआ सोया कितना पाप गॉड से कैसे मुक्त हो जायेगा?
- 49:55ध्यान रखना मैं उस कहानी से संबंधित बात कह रहा हूँ गुड से
- 50:03कैसे मुक्त हो जाएगा करोड़ों लोगों की रात भर की।
- 50:13आह, रोना बेलखना। और वियोग के भीतर रोना इतना दुखद
- 50:21परिस्थितियों में रोना सारा हिंदुस्तान गम की मूर्ति हो।
- 50:25गया था उस दिन 10,00,000 लोग। 10।
- 50:37लाख लोग उसकी अर्थी के पीछे चल रहे थे।
- 50:42बिछुर्त एक प्राण हरले। मैं कहाँ से बोल रहा हूँ, मैं
- 50:45क्यों बोल रहा हूँ इस बात को अच्छी तरह से समझ लेना ऐसे लोगों
- 50:52की छाया से भी बचना। हमारा कल ही जा ले जाता है वो
- 51:08व्यक्ति जैसे तुम्हारी माशू का तुमसे अलग हो गया जैसे तुम्हारे
- 51:19प्रेमी ने तुम्हे छोड़ दिया क्या गुजरेगी तुम्हारे दिल?
- 51:31दूसरा मिल तो एक दुख दारू नमी एक व्यक्ति ऐसा कि बिछुड़ गया दूर
- 51:37चला गया हमारा मन कहता है ना जा ना जा रे ना जा रे ना जा।
- 51:49ना जा आ जा ना जा रे ना जा रे ना जा ये को सिल्ला का जीप है जब राम
- 52:06जाते हैं बनवास को। बिछृत एक प्राण हर लें अयोध्या के
- 52:21प्राण आज अयोध्या से जा रहे हैं और प्राण विहीन अयोध्या।
- 52:25क्या करें कैसे जी एक? सारी अयोध्या रोई राम ज्ञान से
- 52:46सुनना, पुरुष रस तक पहुँच जाना जो मैं बोल रहा हूँ गुरु के आगे।
- 52:54या तो गुरु बनाना मत किसने कहा तुम्हें गुरु बनाने के लिए या
- 53:00गुरु के आगे और ध्यान रखना वह नकली गुरु नहीं होना चाहिए अन्यथा
- 53:07तुम्हें ब्लैकमेल करेगा। ऐसे पर्सन मेरे पास है।
- 53:17इन फर्स्ट लाइफ रेग रिएक्शन करने वालों ने सब कुछ उगलवा लिया और
- 53:23फिर मुझे ब्लैक मिल गया। इन लोगों का धंधा हो जाता है,
- 53:27फिरौती मांगते हैं। हनी से हम बताएंगे।
- 53:42बिछृत एक प्राण भर लेना जैसे आत्मा देह से निकल जा ऐसी अयोध्या
- 53:55आज सोनी पड़ी है, लोग हैं, सांस लेती हुई मिट्टी की मूर्तियां
- 54:02हैं। तमाम कायनात गमगीन, बेकसूर राम को
- 54:17किसके लिए मेरा पुत्र राजा हो जाए, तुम भी तो यही करते हो।
- 54:29कुछ देर के राजभोग के लिए क्या कुछ नहीं करते।
- 54:32तुम तिकड़प में बिछाते हो और ध्यान रखना मेरी इस बात को आप
- 54:38अर्धा पे लिख लेना राजाओं के लिए बोल रहा।
- 54:43हूँ मैं। चैन तो में फिर भी नहीं मिलेगा।
- 54:48मैं ऐसे लोगों को नमस्कार किया करता जो बिल्कुल मुफ्त में सही
- 54:57प्रयोग कर ये लोग हैं। इन्हें नमन किया कर बहुत बार बोल
- 55:02चुका मैं। ये देश का बोझ अपने ऊपर लाद देते
- 55:09हैं। कुछ लोगों को खारिज करने में आनंद
- 55:12आता है। पता नहीं इससे कोड हो जाएगा।
- 55:19खारिज करने से खारिज कोड में बदल सकते हैं।
- 55:24नाखूनों में गंदे कटानु हो सकते हैं।
- 55:28लेकिन ये वो ऐसे लोग हैं जो खारिज करने में मज़ा आता है।
- 55:35मेरा का मित्र था। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में
- 55:37प्रोफेसर था रणबीर सिंह वो कहता शादी कर लो।
- 55:44या खारिश का रोग कर लो, दोनों बराबर है बल्कि खारिश का रोग
- 55:49ज्यादा बढ़िया है। दिन भर रात तो मज़ा देता है।
- 55:57शादी थोड़ी देर के लिए मज़ा देती है।
- 56:02मैं कहता हूँ बिलकुल तुमने ठीक कहा।
- 56:06खारिश भी बिल्कुल उतना ही मज़ा देती है जितना तुम।
- 56:10शादी करवा के ले लेते हो और। खारिश, कोई तुम्हारे पे बोझ नहीं
- 56:17बनते, कोई ऐसा नहीं की बच्चा बनना पड़ेगा, बड़ा करना पड़ेगा, पढ़ाना
- 56:22लिखाना पड़ेगा। मतलब मूत्र करना पड़ेगा, खारिश से
- 56:26ज्यादा बढ़िया है, पर इसीलिए ये रोक खारिश को अच्छा समझता है।
- 56:34ये गधे है इनको नमन किया कर जान बूझ कर देश के वार को उठा लेना।
- 56:45मैं सदा हीन प्रणाम करता हूँ, कह देवतागण मैं नतमस्तक हूँ, आपके
- 56:55त्याग के आब तुमने अपना सुख छोड़ दिया जो असली सुख।
- 57:01है। तुमने नकली सुख अपना दिया।
- 57:07असली सुख को छोड़कर बस इतनी सी बात इन्हें पता हाँ अगर इन्हें
- 57:15पता चल जाए यह सुख असली नहीं है। कहीं इन्हें एक बूंद मिल जाए, इस
- 57:21सुख की उसकी ये छोड़ देंगे और फिर इन्हें कोई भी कहे।
- 57:28अब मुझे के लोग कहते हैं कि आप को राजनीति में आना चाहिए।
- 57:35मैं हाथ जोड़ लेता हूँ भाई। तो मुझे गधा क्यों बनाने पे तुले
- 57:40हुए हो? जो गधा बनने के इच्छुक हैं?
- 57:43बहुत से लोग हैं दिल्ली में सब गधे बैठे हैं पार्लियामेंट में
- 57:48खास तौर से ये हिन् हैं, लेकिन इनकी बात में कोई सुर नहीं होता।
- 57:57गधे में कभी शोर होता हैं ही नहीं नाते बस ग्लूटनी मारने में
- 58:04नुस्वाद आता हैं तो कुमार जानता हैं दोपहरी को इसे रेत के अंदर
- 58:10गुलाटनी खोवा देता हैं। 10 पांच ग्लूटनी खाता हैं गधा फिर
- 58:15फ्रेश हो जाता हैं। बसेछ खाना नरम गद्दों पे बैठना,
- 58:26हकूम मत चलना, आग को तंग करने के लिए कानून बनाना।
- 58:34इसी में खुद की स्वायत्तता इसमें खुद का हाकम बन जाते हैं।
- 58:44ये वैसे तो हाकम बन नहीं सकते। हाकम तो एक ही है और वह बनाने
- 58:49कहते हैं, हुक्मय अंदर जो चले। तुम हक्म बनने की चेष्ठा कभी मत
- 58:56करना मुझे सुनने वालो, हुक्म को मानने की चेष्टा करना, तुम सुखी
- 59:03हो जाओगे और सुख ही अंतरिम वृष है, वही तुमने पाना है अगर खारिश
- 59:11अभी खारिश का मज़ा लेना है, तो तुम स्वतंत्र रहो।
- 59:17इसलिए जब कोई ऊंट पटांग ऐसा कमेंट आ जाता है, मैं गुंठा लगा देता
- 59:21हूँ। तुम तो जाओ भाई तुम्हे नकली सुख
- 59:27चाहिए, वो तुम्हे मिल जाएगा संसार में।
- 59:34यहाँ अड़ंगा वड़ंगा मत लिखो, मिल तो एक दुख दार न दे एक ऐसा कि जब
- 59:49मिलता दुखों की पोटली। न दुखों की पॉइंट साथ लेके आता।
- 1:00:03ये बिलकुल गोडसे जैसे लोग हैं जिन्होंने अतीत में इससे भी बुरे
- 1:00:07काम? किये हैं।
- 1:00:10और अपने अपनी पोटली को साथ लिए फिरता है।
- 1:00:16यह है पोटली इनका पीछा नहीं छोड़ेगी, भुगते ये नहीं पोटली
- 1:00:26इनका संघ नहीं छोड़ेगी तो इनका इलाज क्या है?
- 1:00:30इलाज है कन्फेशन। कन्फेशन कहाँ वहाँ जो व्यक्ति उस
- 1:00:40स्थल पे पहुँच। के।
- 1:00:45हर अरे गरे व्यक्ति के सामने कन्फेशन करना तो वह तुम्हें
- 1:00:50ब्लैकमेल करेगा। संत के आगे कन्फेशन करोगे और देखो
- 1:00:55बोल के भी न करना संत अगर वास्तव में संत है तो वह तुम्हारी भीतर
- 1:01:03की आवाज़ को सुनेगा, तुम बस उसके दायरे में खड़े हो जाना दायरा
- 1:01:08कितना? संत का दायरा 20 से लेकर 60।
- 1:01:11फूट तक होता है। उसके दायरे में खड़े हो जाना और
- 1:01:16बाहर के बाहर निकल जाना प्रमुख तो।
- 1:01:22हुए। गंगा में गोता लगाने की कोई
- 1:01:25आवश्यकता नहीं, ये साक्षात जीते जागते तीर्थ।
- 1:01:37ये कभी कभी थोड़ी थोड़ी देर के लिए आते।
- 1:01:39हैं। फिर विदा रुखसत हो जाते हैं।
- 1:01:44इसलिए बुद्ध को तथागत कहा गया तथ आह गत जैसे ही आये वैसे ही चले
- 1:01:53गए। जैसे हवा का झरोका।
- 1:01:55तुम गिनती करते हो कितनी जड़ों की आज ऐसे ही बहुत जाते हैं पता नहीं
- 1:02:02चल। रहे।
- 1:02:06कि मैं आया था और चले भी जाते हैं तथ आग।
- 1:02:16इनको अलंकार मिला जैसे महावीर को महावीर का खिताब था, नाम तो उनका
- 1:02:21वर्धमान था की खिताब मिला करते हैं।
- 1:02:25तुम तो कायरों को वीर की उपाधि दे देते हो, तुम्हें तो प्रणाम है।
- 1:02:36मान्यताओं से खुश होने वाली राजनीतिज्ञों तुम्हें शत शत
- 1:02:42सहेत्र सहेत प्रणाम कोटि कोटि प्रणाम है तुम्हें जो मान्यताओं
- 1:02:48से ही। संतुष्ट हो जाती।
- 1:02:53पर मुझे सुनने वालो ये बात ध्यान में रखना, मान्यता को तोड़ देना
- 1:02:58क्योंकि ये तुम्हें दुख देती है। मान्यताएँ जब मिलती हैं मिलो तो
- 1:03:03एक दुख धारण दें। इसीलिए मान्यता को ढूंढ के अच्छी
- 1:03:08तरह से अगर तुम्हे कोई बतला दे कबीर पागल नहीं है जो कहते नींद
- 1:03:12को अपने पास बिठा लो इन सब बातों की लड़ी बांध लेना मैं बांधने जा
- 1:03:19रहा हूँ तुम थोड़ा हृदय में बसाते जाना इन बातों को।
- 1:03:26कबीर कहते हैं जो आपको आपकी कमियां बता दे उसको पास उठा लेना
- 1:03:33आँगन कुट्टी छबाई बिना साबुन, बिना वार के सकला मैला धुल चाई
- 1:03:41सारे पाप खत्म तो कई तरीके बताये। गंगा में स्नान करने से कुंभ में
- 1:03:47स्नान करने से कुछ नहीं होता। होता है तो संत पृष के दायरे में
- 1:03:56आकर और कहीं संत पृष के चिन्ह स्पर्श हो जाये तो तुम मुक्त हो।
- 1:04:07इसलिए मैं अंगूठा लगाता हूँ और तुम्हें कह देता हूँ तो मुक्त हो
- 1:04:10गया है। जाओ पाप मत करना, किसी का मन मत
- 1:04:15तूखाना सेवा करना, दान करना, सहायता करना, भूखों का भोजन
- 1:04:22कराना, बाबा नानक की तरह। लंगर की तरह लांगरी कभी खुद पहले
- 1:04:28नहीं खाता। बाद में खाता है।
- 1:04:30अगर बच जाए तो ये खादस्य धर्म भी बड़ा अद्भुत है।
- 1:04:38बाबा नानक ने ऐसा बीज बोया। जो हजारों हजारों सालों तक चलता
- 1:04:44रहेगा और ऐसा वट वृक्ष बन जायेगा जो संसार में छा जायेगा।
- 1:04:51सत्य सभी जगह सर्वमान्य और सभी जगह फैलता है।
- 1:04:57सबको क्षण देता है, धूप नहीं देता।
- 1:05:04भीष्मृत एक प्राण हर मृृत एक दुख दार उगती।
- 1:05:12संतो के दारे में आ जा रहे। है।
- 1:05:17संतो से बिछुड़ के। तो इतना दुःख पाओगे कभी सोचना कभी
- 1:05:24तुम्हारे जीवन में कोई संत आया हो जब चला गया तो तुम्हारी ज़िन्दगी
- 1:05:30को साथ ले गया ज़िन्दगी तुम्हारे जीवन की घड़ियाँ है तुम्हारे रस
- 1:05:38की घड़ियाँ। जो आनंद तुम उस वक्त उठाती थी
- 1:05:42उसकी मौजूदगी में आज कहाँ है, कहाँ है वो सुख?
- 1:05:55इसको ही कहा गया था। आत्मा निरीक्षण आत्मा विनिग्रह
- 1:06:15पतंजलि ने कहा यम, सत्य, अहिंसा, अस्थय, ब्रह्मचर्य, अपग्रह ये
- 1:06:22पांच सूत्र से शुरू करना शोज संतोषितप स्वाथ्य।
- 1:06:38आत्मनिरीक्षण करना, स्व अध्याय स्वय का अध्ययन करना सोच संतोष जो
- 1:06:50मिल जाए सब। क दरि समझ लिया मका दरि समझ लिया
- 1:07:08बस इतना ही था तेरा प्रसाद समझ के तुम ग्रहण करो।
- 1:07:17जो खो गया मैं उसको बुलाता चला गया।
- 1:07:27हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया।
- 1:07:35मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया।
- 1:07:40ये आखिरी पहरा तुम्हारी जिंदगी को बदल देगा।
- 1:07:44मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया व्हाटएवर इस गोइंग ऑन जो भी हो
- 1:07:50रहा है, जो चल रहा है। उसके संग होरो जो हो रहा।
- 1:07:56है। ठीक हो रहा।
- 1:07:58है विपरीत मत तैरो बहो मैं जिंदगी का साथ निभा था चला गया।
- 1:08:14इसको एक मंत्र बना लेना, छोड़ देना, राधे राधे को छोड़ देना,
- 1:08:18राम राम को छोड़ देना, पांच नाम को सब छोड़ देना, अगर याद करना है
- 1:08:23तो इसे याद करना, याद रखना कि सदा मौत आएगी।
- 1:08:29तुमने देखी है मौत जीस परमात्मा को तुम याद कर रहे हो वो इन्होंने
- 1:08:35भी नहीं देखा जो पांच नाम दे रहा इनका नार्को करा लो, पता चल
- 1:08:43जायेगा मेरा नार्को करा लो पता चल जायेगा।
- 1:08:52नहीं नहीं, ये झूठ बोल रहे हैं क्योंकि लक्षण नहीं है।
- 1:09:00ये गुरुकुल के कहाँ चले गए? लोग जो एक संख्या विशेष में रखा
- 1:09:06करते थे एक अलग जाता। कोई नीचे ऊंची जात के कारण नहीं
- 1:09:12किया। तुम्हारे शास्त्र में झूठ बोलाया
- 1:09:17द्रोणाचार्य कहते हैं नहीं भाई जीतने शिष्य चाहिए, उतने हैं मेरे
- 1:09:20पास इससे जात में पढ़ा नहीं सकता। क्षमता होती है व्यक्ति की कोई
- 1:09:26उच्च नीच जात का मतलब नहीं। ये तो गलत तुमने बनाए जैसे आज
- 1:09:34गाँधी के कितना कितना कुछ बोले छोटी छोटी बच्चियां जो मरकर दो
- 1:09:40बार फिर पैदा हो गई, वो कह रही हैं मैं अपने शुभ हाथों से?
- 1:09:46ये शुभकृत्य करती हैं मैं कहता हूँ तू आज कर ले ये बैठा पर इसके
- 1:09:51बाद नहीं आएगा अंतिम खाना तू दे दे अपने हाथों से मैं तो निहाल हो
- 1:10:03चुका। अंतिम गोली तू मार दे ज़रा हाँ तू
- 1:10:13आएगी तो बदल के जाएगी। लाली खोजन में गई लाली मेरे लाल
- 1:10:41की। लाली खोजन में चली, मैं भी हो गई
- 1:10:56ला आओ तो तुम गोली मारने वालो। तुम खुद ही बदल जाओगे, भला
- 1:11:13तीर्थों के ऊपर आकर कभी निशापाप हुए बिना वापस गया है कोई व्यक्ति
- 1:11:21अगर गया है तो वो तीर्थ नहीं है। लाली मेरे लाल की जीत देखूं तितला
- 1:11:40लाली खोजन में चली। मैं भी हो गयी ना।