Latest / Baba ji Vijay Vats / 2 Apr 26 - 'राम' भगवान या शैतान? 'मन्य ग्रंथि' और विनाशकारी व्यक्तित्व का सत्य। Must Watch
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- 0:19प्रणाम गुरुदेव कीर्ति आजाद एक छोटा सा प्रश्न बहुत सालों से
- 0:40आपको सुन रहा हूँ। और लगातार मेरे मन में अगर मुझे
- 0:54आप ब्लॉक ना करें तो अज्ञा हो तो इसके बारे में बोलने का कष्ट
- 1:05करें। फिर आप मेरी बात का जवाब ही न
- 1:11देना, लेकिन ब्लॉक न करे क्योंकि कभी कभी कुछ बहुत जरूरी बातें
- 1:23हैं। मैंने आपसे पूछी है और समस्याओं
- 1:27का हल हुआ है भगवान राम राजा के उनके शासनी व्यवस्था में।
- 1:52तथाकथित शूद्र का राजाराम ने वध कर दिया था संभोग उसका नाम था
- 2:11अयोध्या में किसी ब्राह्मण का। अल्प आयु में पुत्र मर गया था।
- 2:23उसने राजाराम से गुहार लगाई के अवश्य ही कोई शूद्र तप कर रहा है।
- 2:37भगवान को पानी। क्योंकि मेरे अल्पायु पुत्र की
- 2:45मृत्यु हो गई। मुझे इंसाफ दिलाइए।
- 2:58कौन है वह दुष्ट जो परमात्मा को पाना चाहता है?
- 3:08शुद्र होने के बावजूद बाबा जी कृपया इसको वस्त्रार्थ से समझाने
- 3:19का कष्ट करें। प्रश्न बड़ा शानदार है।
- 3:26और। खोपड़ी को हिलाने वाला है।
- 3:31अच्छा किया तुमने मेरे रहते रहते प्रश्न पूछ लिया।
- 3:42अन्यथा ये कलंक श्रद्धा के लिए शास्त्रों में लिखा रह जाता और
- 3:56इसका जवाब किसी के पास नहीं, दिमाग से, दिमाग तक, कानों से
- 4:04कानों तक। यह कहानी गूँजती रहती और शंभू को
- 4:11न्याय मिलता। आपसे प्रार्थना हैं कि आप सत्य की
- 4:22विवेचना करने में दक्ष हैं। निर्भयता से बोलते हैं।
- 4:29अगर आप व्याख्यान नहीं कर पाओगे तो फिर हम आगे से प्रश्न पूछना
- 4:35बंद कर देंगे। किसी और से कोई बात नहीं, पुत्र,
- 4:42घबराओ। हमारे दिमाग में फिच्यूटरी ग्रैंड
- 4:54के पास हाइपोथेल्मस नाम का एक ब्रेन का हिस्सा है, इसको मास्टर
- 5:06ग्रैंड कहते हैं। यह हमारी पिच्यूटरी ग्रैंड को।
- 5:15कंट्रोल करता है जो पिच्यूटरी ग्रैंड हमारे हार्मोन को कंट्रोल
- 5:24करते हैं। उस हाइपोथैलोम में से एक छोटी सी
- 5:34गर्विथी निकलती है, वह किसी किसी व्यक्ति में होती है।
- 5:41पता नहीं, विज्ञान ने वह खोजा कि नहीं खोजा, उसको मन कहते हैं मन
- 5:52मन नहीं मन हमारी। भाषा साइंटिफिक भाषा में खोजी की
- 6:04नहीं खोजी, क्या नाम रखा मुझे पता नहीं।
- 6:09वह ग्रंथि किसी किसी की होती है जैसे आपने देखा बहुत से लोग मर
- 6:18जाते हैं। उनके भीतर से एक आत्मा राम निकला
- 6:22करता है। यह सभी के नहीं होता।
- 6:27यह हड्डी का बना हुआ एक प्रारूप सा होता है, लेकिन होता कैसे
- 6:33कैसे? के।
- 6:34सभी के नहीं होता। और जिसके ये होता है वह व्यक्ति
- 6:41भाग्यशाली माना जाता है। खैर, इसकी बात कभी बात में
- 6:47करूँगा, हम मुख्य प्रश्न पर आ जाएं।
- 6:56ब्राह्मण आता है। सुरसेन उसका नाम होता है उसका
- 7:05पुत्र जो मर गया उसका नाम था दीपेंदु सुरसेन ब्राह्मण था।
- 7:19उसका पुत्र दीपेंदु 12 वर्ष की उम्र में स्वर्गवास हो गया।
- 7:35तब जो मैं कहता हूँ, गलत बातों की अफवाह उड़ानी नहीं चाहिए क्योंकि
- 7:45गलत बातों की अफवाह उड़ाओगे तो वह कुछ मंदबुद्धि लोग उसको अपनी
- 7:52विभीषा ग्रंथि में कैद करके रखेंगे।
- 7:55और वो मान्यता ही जाके कहाँ गुल खिलाएंगे, कौन सी पीढ़ी में गुल
- 8:00खिलाएंगे? पता नहीं।
- 8:03खैर आज तो झूठों का संसार है तो दीपिन्दु की मृत्यु के बाद।
- 8:19जब राजा राम से कहा गया के ढूँढियो वह सुत्रिपुण ढूंढा गया
- 8:31तो संभुख नाम का यह व्यक्ति। वृक्ष के साथ उलटे होकर शीष शासन
- 8:41के बल तप कर रहा था। भगवान राम ने पूछा।
- 9:01हे भक्तजन तुम्हारा नाम क्या है उसने का जनक भगवान राम राजाराम
- 9:13आपकी जब। मैं तप कर रहा हूँ मेरा नाम शंभू
- 9:23है बगची आपका आपका जाति क्या है? उनिका जी मैं शुद्र हूँ।
- 9:46क्या आपको मालूम नहीं कि शुद्र को भागवत प्राप्ति के लिए कोई यत्न
- 9:52नहीं करना चाहिए? जी मालूम है, फिर जानते पहचानते।
- 10:02तुमने यह कुकृत्य क्यों किया? शंभू को मौन हो गया।
- 10:18वक्त वक्त पर समाज और समाज को दिशा देने वाले लोग कुछ
- 10:26भ्रांतियां ऐसी फला देते हैं। जो भविष्य में जाकर जानलेवा सिद्ध
- 10:32होते हैं जैसे राधे राधे राम राम पांच नौ ये भविष्य के लिए घातक
- 10:41विष। ऐसे ही ब्राह्मणों ने अपने लोभ के
- 10:48कारण के हम पूज्य नहीं आ रहे हैं। हमें सदा पूजा जाए, हमारी जय
- 10:56जयकार हों, बाकी जातियों को अपना गुलाम बनाने के लिए।
- 11:06क्षत्रिय के हाथों में बल था। इनकी बुद्धि में बल था तो गांठ
- 11:13शांठ करके दोनों ने दोनों को दबाने का काम किया है।
- 11:23हम दो हमारे को। तो ब्राह्मण और क्षति ने वेश और
- 11:32शुद्र को दबाया। वैश्य शब्द कोई ज्यादा अच्छा शब्द
- 11:37नहीं है। तुम जानकर चकित मत हो।
- 11:42वैश्य वैश्य से बना है और वैश्य वैश्य से बने।
- 11:49व्यश्य यानी जो लेन देन का व्यापार करे, पैसे के बदले शरीर
- 11:56को बदल दिया, पैसे के बदले अपना ज्ञान बेच दिया, अपनी प्रतिभा बेच
- 12:04दी। पैसे के बदले नामदान दे दिया।
- 12:11ये व्यश्य हैं, पैसे के बदले न्याय बेच दिया है, न्याय कर दे
- 12:23तो कोई बात नहीं। यहाँ थोड़ा सा कुछ व्यक्ति ने
- 12:29ऐतराज उठाया था। मैं साफ करता हूँ मैंने कहा जो
- 12:37पैसे के पीछे न्याय भेज देता है। जैसे सी जे आई भी।
- 12:43क्यों न हो तो ऐतराज हो। यह क्वांटम का फोर्ट है।
- 12:52मैंने कब कुछ भी है। मैं सत्य को सत्य कहने से गुरेज
- 12:56नहीं करता। मैंने जो बात कही मैं आज फिर कर
- 13:04रहा हूँ। जो पैसे के पीछे न्याय को भेजते
- 13:11रह वैश्य चाहे सीजेआई ही क्यों ना हो, बस इससे परसों की होता ही
- 13:20नहीं, अभी एक जज के घर से। आग लग गई।
- 13:31परमात्मा भी कुछ दृश्यों को उवार दिया करता है जिसे तुम कहते को है
- 13:37नहीं, लेकिन फिर उनका क्या होगा जिन्होंने देख लिया?
- 13:47तुम कल को मुझे कह दो कि ताजमहल नहीं है, बना कि मैं मानूंगा भला
- 13:57ताजमहल में मैं सैकड़ों बाहर जाके बैठा हूँ।
- 14:06जब हमारी दुकान थी लेदर शूज की, तो मैं ही परचेसिंग करने आग्रा
- 14:12जाया करता था और मेरा यह असुर था कि मैं अपना लगेज होटल में रख के।
- 14:27स्नान करके सबसे पहले ताजमहल के अंदर बैठा करते थे।
- 14:37वहाँ बड़ी शानदार रेंज है। जो लोग मुझे पूछते हैं आग्रा के
- 14:43आसपास के कि बाबा हम ध्यान में कैसे गए?
- 14:48कोई ऐसी समाधि स्थल बता दो तो समाधि स्थल अगर आपको चाहिए।
- 14:59तो मुमताज़ की कमर के पास बैठ जाये शी वास् ए अनलाइक एंड लेडी
- 15:08आज परसों बार मैं ये राज़ खोल रहा हूँ इसलिए वहाँ इतना सुकून।
- 15:27राजा ने कहा क्या जाती है? यह समाज की बथानी वक्त वक्त पर
- 15:37बदलती रहती है और आने वाली पीढ़ियों से मैं कहूंगा इनको आग
- 15:44लगा दिया करो। सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग?
- 15:53मैं तुम्हें मनमुखी नहीं बना रहा हूँ, मैं तुम्हें आत्मबान बना रहा
- 16:00हूँ। प्रत्येक व्यक्ति अगर निर्लेप और
- 16:05निर्दोष है, उसकी आत्मा उसे कुछ मार्गदर्शन दिया करती है।
- 16:12उन मार्गदर्शकों को सुनने की चेष्टा करो और उसी तरफ निकल जाओ।
- 16:23तो भगवान राम ने अपनी तलवार निकाली चमचमाती और शंभु का सिर
- 16:31उड़ा दिया। बिलाशक मैं यहाँ उसे भगवान नहीं
- 16:40कहता। शैतान शैतान राम जो अपने ही परज
- 16:50से न्याय न कर सके, वह भगवान कैसे और यह एक अकेला उधार नहीं।
- 17:00अपनी ही प्रजा अपनी ही धर्मपत्नी जिनको शादी करके लेके आये और अपने
- 17:06ही बच्चे जो गर्व में थे उनको देश निकाला दे दिया बिना किसी कारण के
- 17:14जैसे अब ईरान के ऊपर अमेरिका ने हमला कर दिया।
- 17:24कि हमें शक है कि तुम अनुबम बना लोगे।
- 17:33इजरायल के तक हमें शक है तुम। अनुबम बना लोगे?
- 17:43नंगा आदमी नंगे आदमी। सी।
- 17:47यह कहे, हमें शक है कि तुम नंगे हो जाओगे, यह ठीक है बात।
- 18:00अमेरिका की बात यह ठीक होती अगर उसने खुद शांति का दूत मसीहा बनने
- 18:07की कवायद शुरू की होती। अपने सारे एटोमिक बम, जो उसने जैन
- 18:14एडिट किया, सब समाप्त कर देता। तुम्हें पता नहीं तुम कितने ही
- 18:23अकंप हो, लेकिन तुम्हारी आत्मा भीतर से थर्रा रही है।
- 18:32हजारों की तादाद में अनुपम हैं और दुनिया को।
- 18:40300 बार मटाने के लिए काफी, रशिया के पास 6000, अमेरिका के पास 5000
- 18:52और ईरान से कहते हैं कि तुम नहीं बना सकोगे यह गुंडा गर्दी।
- 19:00परमात्मा की संपत्ति को अकेले अकेले हड़पने का षड़यंत्र
- 19:05ब्राह्मणों की खोपड़ी से आया और उन्होंने बलिष्ठ व्यक्तियों का
- 19:22सहारा लेकर वैश्य का भी शोषण किया।
- 19:30सूत्रों का भी सोचें। वेश्यों को भरमाया कि तुम अगर दान
- 19:41करोगे तो तुम्हें स्वर्ग मिलेगा। अगर सीनों में किसी का तो नर्क
- 19:49मिलेगा? ऐसी मान्यताएँ बनावना की किताब
- 19:54में जकली के ये ऋषि नहीं थे। ये गुंडे थे, ये दुष्ट थे,
- 20:02हत्यारे थे, डाकू थे। इसलिए मैं कहता हूँ राम राम राम
- 20:20का नाम लेने वाले आज नहीं कल पागल हो जाएंगे।
- 20:28मैं सत्यवचन पूरा करता हूँ। राम राम करने वाले व्यक्ति
- 20:37प्रबुद्ध तो न हो पाएगा, लेकिन आज नहीं।
- 20:42कल इनका मुकाम पागलखानों में होगा या फिर अगर कभी सारा संसार ही
- 20:51पागल हो गया? तो फिर सारा संसार पागलखाना बन ही
- 20:57गया, पागलों में पागलों की टक्कर मारते रहेंगे ठूडे खाते रहेंगे।
- 21:04आज ऐसा ही है। हम विषय पर लौटे।
- 21:15हाइप्रोथेलेमस के पास वह चुट्री ग्लैंड होती है, उसमें मन्य नाम
- 21:22का एक रस निकला करता है मन्य। वह रस जिसके भीतर से निकलता है
- 21:42क्षमा का मुज वह जहाँ चला जाता है वहाँ विनाश हो जाता है और भगवान
- 22:03राम ऐसे ही व्यक्ति थे। तुम अवश्य सोचोगे, भगवान भी कह
- 22:13रहा है और ऐसा अलंकार दे रहा है बाबा जहे जहे चरण पड़े, संतन के
- 22:28कहें तहे भयो बिना। यह मान्य नाम का रसायन द्रव्य कह
- 22:35लो रसायन नहीं होता है। इसे हम हार्मोन नहीं कह सकते।
- 22:48यह जिसके पैदा होता है वह व्यक्ति जहाँ बैठता है।
- 23:01अपना वातावरण दूषित कर देता। है।
- 23:06इसलिए तुम कहते हो राम राम चप, मैं कहता हूँ भूल के भी राम राम
- 23:12मत चप। क्योंकि उस व्यक्ति का भी नाम
- 23:21क्या लेना है और ज़रा देखना जन्म के बाद राम जहाँ भी गए वहाँ उजड़ा
- 23:31कि नहीं उजड़ा। गौर से देखोगे?
- 23:37वहाँ सब कुछ उछड़ गया। दशरथ के पैदा हुए राजा दशरथ की
- 23:46इच्छा थी कि मेरा पुत्र राम राज़ करे।
- 23:52लेकिन राज़ क्या किया? दशरथ की मृत्यु का कारण बना रहा
- 23:58हूँ। अपनी ही बाप की मृत्यु का कारण
- 24:03बना रहा हूँ जो राम राम करते हुए मृगए इसको अपने ढंग से अनुवाद
- 24:11करेंगे ये उनकी मर्जी। यह सब कराती है मन नाम के जैसे
- 24:21आपको आपके हार्मोन न चाहती हैं अगर डोपमीन बन गया सैराटोनिन बन
- 24:27गया नाचो। अगर कार्टिसल बन गया एडरनालिन बन
- 24:33गया तुम्हारा मुख लपट जायेगा लम्प जायेगा दुखी मालूम पड़ोगा यह
- 24:42करामात है हार्मोन्स की देखिये। सीता को ब्याह के लेके आए।
- 25:02जो व्यक्ति बिल्कुल नए लेप है, अवैध बुद्धि है।
- 25:09गौर से सोचियेगा सीता को एक क्षण के लिए बिल्कुल शांति मिले।
- 25:19और सीता ने आखिर में मरते वक्त जब सुसाइड किया सी कमिटेड, सुसाइड और
- 25:27राम के व्यवहार से तंग आकर बड़े सपने सज में।
- 25:34कि मेरा पति ये तो तुम पेंट कर सकते हो, असलियत का तुम्हें पसंद
- 25:44है। प्रत्येक स्त्री अपने पति के लिए
- 25:53स्वप्न लोक की तारीफ से जाती है। हमारा एक छोटा सा परिवार होगा,
- 26:09फुलवाड़ी होगी, उसमें फूल महकेंगे और हम दोनों।
- 26:17सब चकनाचूर हो। गया।
- 26:27कोई कसूर नहीं के का? यह मन्ने नाम की ग्रंथि का कसूर
- 26:33है। ऐसा व्यक्ति जहाँ बैठ जाता है,
- 26:38उजाड़ हो जाता। है।
- 26:43थोड़ा सा बीच में और नरेंद्र मोदी के यही मान्य नाम की ग्रंथि है
- 26:57जीस दिन। यह भारत की गद्दी पर आसीन होना
- 27:03था। बाबा मुझे कहने लगे आप कमरे में
- 27:08बैठ जाओ, मैंने कहा ठीक है बाबा काफी देर जाकर बाद में बताया।
- 27:20कि यह कारण हरा भरा यह। देश?
- 27:36सोचा था दशरथ ने मेरा पुत्र बड़ा प्यारा है, समिता है।
- 27:46बिखर गए। कहीं किसी का।
- 28:29यार? जले बिखर गए बचपन के सपने लेकिन
- 28:46आराम चले हैं। दशरथ ने कहा बेटा मत जाओ,
- 28:53तुम्हारे बिना मैं मत जाऊंगा, मुझे तुमसे बहुत संभव है।
- 28:58अरे ये मोह बड़ी अजूबी चीज़ है, ये आदमी चाह कर भी नहीं तोड़
- 29:05सकता। इसके लिए सिर्फ साक्षित्व होना ही
- 29:10एक विधि है। अन्य कोई ढंग नहीं आपके मोह को
- 29:16तोड़ने का। आप जीस पांच नाम को जपोगे उसका भी
- 29:20मोह हो जाएगा आपके साथ, वो भी आपकी एक चिपका हट बन जाएगी।
- 29:27जीस दिन पांच नाम नहीं जपोगे उस दिन कुछ सुना सुना सा लगेगा कि आज
- 29:32कुछ चूक गए नहीं तो भरा भरा सा लगेगा बस तुम्हारा मन भरा है
- 29:41तुमने आज कुछ माने टाइम अपने चेतन में फेंकी नहीं।
- 29:47इसलिए खाली खाली सा। लगेगा तो राम को बड़ा प्यार करते
- 29:55थे दशरथ प्यारे से लेकिन बात तो ये है।
- 30:06यह जो द्रव्य ही निकलता। था।
- 30:08मान्य यह है विनाशकारी यह है जय है चरणों पड़े तो सीतागति में भी
- 30:19चलूँगा। विनाश विनाश को अपनी तरफ खींच
- 30:25लेता है। बहा न कोई भी बन जाए 14 साल और
- 30:35फिर सीता का हरण और गलती राम की। क्यों हुक्म दिया?
- 30:44एक विद्वव और शृपनखा सुंदर है। रावण की बहन अति सुंदरी है।
- 30:54इसका नाम स्वरूपनखा। इसका नाम था स्वरूप नखा सु रूप
- 31:05नखा बड़ी सुन्दर नैन नक्श वाली रूप नखा सुन्दर नैन नक्श वाली।
- 31:15तुम सुर पनखा कह देते हो नहीं सुर पनखा नहीं आते।
- 31:20इसका नाम था सुर पनखा और ये बहुत सुंदर लड़कियों में से और इसकी लव
- 31:27मैरिज हुई थी। नाग लोके एक।
- 31:32वरीष्ठ प्राणी से जिसका नाम था विद्युत जीवा।
- 31:37वह नागलोक का राजा था। प्रथम दृष्टि में इसका स्वगाई हो
- 31:43गया। वो वो स्वरूप से बोला, देखो मैं।
- 31:51और तुम्हें देख कर मोहित हो गया हूँ, क्या तुम मुझसे शादी करोगी?
- 31:55मैं राजा हूँ, नागलोक का विद्युत जीव आह सुरपनखा रावण के पास गई है
- 32:09भैया। यह लड़का मुझसे शादी के प्रपोजल
- 32:15रखता है। मुझे भी अच्छा लगता है, क्या मैं
- 32:19शादी कर दूँ? रावण कहते ठीक है, बड़े फिराक
- 32:25दिलते हैं, कंजूस नहीं। जो व्यक्ति अपने 10 बार सिर काट
- 32:31के शंकर की भेंट कर देता है, उसको तुम कंजूस कह सकते हो क्या?
- 32:41नहीं? नहीं, वह बड़ा शीश का दानी है।
- 32:44तुम्हारे श्याम बाबा ने तो एक बार सिर दिया था।
- 32:48रावण से बड़ा दानी कौन हो सकता है जो 10 बार शेर काट के दे दिया?
- 32:53पूजा करनी है तो रावण की करो छोड़ो इससे सिरकटिए को।
- 33:01श्याम भाभी को। इसकी भी क्या पूजा करनी?
- 33:06और प्रतीकों की कभी पूजा हुआ करती है जो है नहीं, जो था कभी कहानी
- 33:14है चला गया और कहानी है अकेले सिर कभी जिंदा रहा करते हैं, इस इट
- 33:21पॉसिबल अगर अकेले सिर जीवित रहते। तो गणेश जी जीवंत रहते फिर नया
- 33:29सिर लगाने की जरूरत नहीं थी। उसका सिर जीवंत रहता, अकेला उसका
- 33:34दृढ़ अलग से जुड़ता रहता। लेकिन नहीं ये सारी अंतरंग
- 33:41व्यवस्था इंटरमिंगल है। विशाल विराट ब्रम्हंड तो उसने
- 33:54शांति कर दी। विद्युत जीवा।
- 34:02स्वरूप नखा को अपने नागलोक में ले गया वहाँ रानी बना के रखा बहुत
- 34:16सुखी थी अपने घर में स्वरूप नखा 1 दिन रावण।
- 34:22के घर आई माँ कैकसी जिंदा। थी।
- 34:27पिता विशरभा यह पुरुष ऋषि के पोते थे, रावण परस्ती का पुत्र विशरभा
- 34:37विशरभा का पुत्र रावण और रावण की बहन।
- 34:46प्लस ऋषि की संतान तो रावण अपनी सत्ता के नशे में चूर रहा करता
- 34:59था। किसी बात के ऊपर विवाद हो गया और
- 35:07रावण ने विद्युत जीवा का भरे दरबार में सिर काटा।
- 35:15यह मर गया। अपनी ही बहन को विधवा बनाने का
- 35:22जिम्मा रावण का था। लेकिन स्वरूपनखा सुंदर बहुत थी वह
- 35:36अपने भाई के इतना राज्य था लंका का घूमती भरती स्वच्छंद और घूमते
- 35:48घूमते उसे। राम और लक्ष्मण अब हम आज प्रपोज
- 35:53डे मनाते हैं, वैलेंटाइन डे मनाते हैं और पता नहीं कौन कौन से दिन
- 35:59मनाते हैं तो प्रपोज ही तो दी आ सकती है ऐसा।
- 36:09स्वरूपन था ने लक्ष्मण सुंदर लगाम से लक्ष्मण बलिष्ट था।
- 36:16जति राम के साथ उसकी धर्मपत्नी थी और वैसे भी दब्बू हो जाता।
- 36:21आदमी अगर धर्मपत्नी साथ हो ऐसा। तो राम के साथ सीता थी तो पति के
- 36:34साथ पत्नी हो तो पति दब्बू हो जाता।
- 36:36है। चाहे मन आया ही हो लेकिन कहता है
- 36:45वो मेरा भाई है, उसके पास जाओ। वो अकेला है।
- 36:50उसकी घरवाली उर्मिल यह नहीं बताये, उसके पास जाओ, वो तुम्हारा
- 36:56प्रपोज स्वीकार कर लेंगे। ठीक है, राजाओं में 223355
- 37:00शादियां होती हैं। मेरे पिता ने खुद ने तीन शादियां
- 37:03की। और सही तो 352 353 शादियों थी।
- 37:10दशरथ की 353 शादियों थी। खैर कहानी लंबी हो जाएगी तो यह जो
- 37:19ग्रंथी में से निकलती है मान्य नाम की एक रस।
- 37:24यह व्यक्ति जहाँ बैठ जाता है वहाँ विनाश हो जाता है।
- 37:34अपने पिता की मृत्यु का कारण माने बात कितनी थी?
- 37:40जब दशरथ ने कहा तो मुझे कैद कर लो फिर ये चंडालनी क्या करेगी?
- 37:48तुम कैद कर लो, मैं तुम्हें वचन देता हूँ, मैं तुम्हें राजा घोषित
- 37:53कर चुका हूँ बात वो ठीक ठीक लक्ष्मण के अंदर ठीक है भैया तुम
- 38:01राजा घोषित तो हो ही गए हो, बस सिर्फ वो संस्कार नहीं होगा।
- 38:12लेकिन राम के लेकिन वो मन्य ग्रंथी विनाश फैलाती ही फैलाती।
- 38:23बहाना कोई भी बन जाए, चले गए और गए तो फिर ज़रा देखो।
- 38:31रावण के कुल की नाश का कारण बना बना की नहीं बना, किस किन्ता गए,
- 38:45बाली के नाश का कारण बना बना की नहीं बना।
- 38:58फिर वापस आया लेकिन उस मान्य रसने दिखने नहीं देती।
- 39:06वो मान्य रस उसने निर्दोष सीता को फिर निकाल दिया।
- 39:16दो बच्चे हैं पेट में। ज़रा सोचिएगा इस कहानी को मैंने
- 39:23कभी मैं राम का रोल करता था। 14 साल तक मैंने रोल किया।
- 39:28मैंने लव कुश का ड्रामा कभी नहीं खेला।
- 39:30मैंने कह के नहीं खोला, यह है पागलपन मैं तो नहीं करूँगा।
- 39:38कहते राम पागल थे अबल से रे के बेवकूफ से रे।
- 39:42इस मामले में थोड़ी भी समझदारी नहीं थी।
- 39:46अरे कसूर तो देख लेते है, देखो हमारे मोदी जी की छाती।
- 39:53उसने एक व्यक्ति के कहने से अपनी ही सीता को जिसे आजमा चूके थे,
- 40:00अग्निपरीक्षा ले चूके थे, उसको निकाल दिया और गर्भवती और कार्तिक
- 40:05महीने की रात। को।
- 40:07एक गठड़ी सी पकड़ा दिया बेचारी को लक्ष्मण को कह दिया।
- 40:13की जाए इसको छोड़ के लक्ष्य तो हड़बड़ाएं व्रत कोई भ्राता व्रता
- 40:23नहीं चुप करके छोड़ें इसको भैया कुछ नहीं, बस छोड़ आओ।
- 40:33ऐसा व्यक्ति जिद्दी बहुत होता। है।
- 40:37उस जिद्दी को तुमने मर्यादा का नाम दे दिया।
- 40:45मर्यादा का गहन अर्थ एक बहुत बड़ी जद भी होती।
- 40:49है। कुछ भी हो जाए हम असुलों से पार
- 40:53नहीं जाएंगे। यह एक प्रगाढ़ की जिद्द भी है और
- 40:57यह ग्रंथी के भीतर से निकला हुआ मान्य नाम का रस व्यक्ति को
- 41:02जिद्दी बना देता है। थोड़ी गहरी बातें हैं प्यार से
- 41:06सुनना। जहाँ जहाँ गए पहले अयोध्या को
- 41:21उजाड़ा, फिर लंका को उजाड़ा किशकिंदा में बाली का घर उजाड़ा,
- 41:37उसके बाद आकर। सीता को निकाल दिया, अपने ही
- 41:42बच्चे महलों में पलने थे, क्या क्या सोचा होगा?
- 41:47सीता ने सीता ऐसे ही नहीं सुसाइड कर दी।
- 41:53इसके दुष्टाना व्यवहार से तंग आकर उसने धरणी से कहा, भस्मा।
- 42:00और फट जाम। इस मूर्ख के तमाशे मुझसे देखे
- 42:05नहीं जाते। ये कभी इजराइल जा के न जाता है और
- 42:15वहाँ का बीड़ा गर्क हो जाता है। अब देखा तेल अवीव का।
- 42:22क्या हाल बन गया है भक्तों देखो अच्छी तरह कबाड़ हो गया है तेल
- 42:29अभी और कोई जान सकता था कि इतना बड़ा।
- 42:38विशाल मुल्क, आर्थिक रूप से भी समृद्ध एक नंबर की ताकत जिसकी
- 42:48अर्थव्यवस्था। को तुम सोच ही नहीं सकते।
- 42:56कम से कम तुमसे सात आठ गुना हर फैसिलिटीज है वहाँ तुम वहाँ जाने
- 43:06को तरसते हो और वहाँ के लोगों को ट्रंप हथकड़ियों में डाल के।
- 43:13सैनिक के जहाज में यहाँ भेज देता है मार कूट करके और साहब तुम एक
- 43:20बार क्वेश्चन नहीं उठाते कि ठीक है, तुम डीप वर्ड कर देते, लेकिन
- 43:26हमारे नागरिक को तुम्हें टूटने पीटने की जरूरत तुम कैसे कर गए?
- 43:33लेकिन कुछ नुखते छुपा रखे अपराधी व्यक्ति राजा भी ना हो जाए
- 43:45क्योंकि कमजोर रग उसके हाथों में जिसके होंगे उसके हाथों में
- 43:49नाचेगा और फिर। तुम ये मत सोचना कि अकेला मोदी
- 43:53नाच रहा है, नहीं मैं बटकन यह 146,00,00,000 लोग नाच रहे हैं,
- 44:03तुम तो अभी सोए पड़े हो, मुझे पता है तंद्रा, लेकिन जब जागोगे तो
- 44:09तुम कहोगे इस। व्यक्ति ने राज़ किया, अरे हमारी
- 44:14अकल कहाँ गई थी? हम जागते थे, सोए थे के मर गए थे
- 44:24पुत्र तुम न तो मरे थे न सोए थे। तुम्हारी बुद्धि का हरण हो गया
- 44:32था। इस व्यक्ति के राज़ के कारण यह अब
- 44:38वेतर का विज्ञान तुम्हें साफ हो गया होगा तथा राजा तथा प्रजा यहीं
- 44:44से बना। जब राजा के भीतर से ये मान्य रस
- 44:47बहने लग जाता है तो चारों तरफ विनाश ही विनाश हुआ करता है और आज
- 44:53ऐसे राजा बहुत हो गए हैं क्योंकि ऐसे राजा कर तो कुछ नहीं सकते।
- 45:02कोशिश तो की होगी कि विकास कर लूँ।
- 45:04घर में एकाध लेकिन नहीं हुआ तो फिर आपदा को अफसर बना लिया तो फिर
- 45:13चिल्लाने लगे कि मैंने देश के लिए सारा छोड़ दिया।
- 45:17परिवार अरे भाई परिवार बना ही नहीं, ऐसे कहो ना।
- 45:25ठीक है तुम्हारी इंद्रियाँ लेकिन तुम्हारे स्वम नहीं है, जिससे
- 45:31विकास पैदा हो। आपदा में अवसर खोजने का तरीका
- 45:44कोई। इनसे सीखें जिनके भीतर मान्य रस
- 45:49बहता है। राम ने भी ऐसा ही किया भला कभी
- 45:57किसी ने सोचा? बंदरों की राक्षिशों की बालू की
- 46:02एक फौज हुआ करते थे। हसो मत कब सोचा आपने ऐसी फौज हुआ
- 46:10करती है बालू बंदर काकभुसुंडी। तो रावण का विनाश ऐसा किया उसने
- 46:39एक लखपूत सवा लख नाती जा के घर दिया ना बाते।
- 46:47विनाश हो गया। बाली का नष्ट कर दिया।
- 46:57इतना शानदार व्यक्ति था बाली और बाली ने कहा भी राम को ए प्रभु ने
- 47:08के क्या? किया।
- 47:12तुम मुझे ही कहते अगर ऐसा बात था तो मैं रावण को गर्दन से पकड़ के
- 47:17घसीट के ले आता। छः महीने तक कहते हैं कहानियों
- 47:23काक में लिए फिरता रहा। इतना बलि था बाली बाली शब्द भी
- 47:29बली से ही बना है। तो अगर ऐसी ही बात थी तो यह पाप
- 47:37कमाने की क्या जरूरत थी? छुप?
- 47:43के मारना जोरों की तरह मारना। धोखे से मारना, पीछे से कतल करवा
- 47:49देना, हीरेन पांडे का फिर सारे सबूत छुपा देना फिर जहाँ जहाँ
- 47:55सबूत थे उनको मिटा देना क्या ड्रामेबाजी है तुम?
- 48:04बस यह फ़िल्म ही फ़िल्माने आए थे। अक्टिंग ही सीखने आई थी शाबाश
- 48:18तुम्हारे मिस्टर नरेंद्र मोदी तो राम ने सब सत्यानाश कर दिया।
- 48:29मुझे बाबा कहने लगे तुम भीतर बैठ जाओ, जाके मान्य ग्रंथी वाला
- 48:34प्रथम बार आ रहा है वो राजा के रूप में जब आ जाए फिर तुम्हें पता
- 48:43है सारी प्रजा। यथा राजा प्रथा प्रथा जैसा राजा
- 48:52व्यवहार करेगा। दूसरे लोग सोचेंगे कि इनकी प्रजा
- 48:55ऐसी ही होगी। हम अमेरिकन वासियों से कोई।
- 49:03अच्छा थोड़ी उनका व्यवहार समझते हैं चाल चरित्र हम खराब समझते हैं
- 49:09थोड़े दिन पहले मेरी बहन का फ़ोन आता, मैंने कहा तुम यहाँ कुत्ते
- 49:18का नहीं करते होगे, सारा दिन कहते नहीं भैया।
- 49:22मैंने कहा ये तुम्हारे ट्रंप कहते भैया अब क्या करें?
- 49:30मैंने कहा देखो तुम कुछ नहीं कर सकते लेकिन अमेरिकन वासियों का
- 49:35नाम। तो?
- 49:36चरित्रहीनता में लिखा गया क्योंकि राजा ही ऐसा है जीस राजा की।
- 49:42प्रजा तुम हो वैसा ही तुम अनुकरण करोगे।
- 49:47यही कृष्ण भगवान ने कहा राजा को ऐसा होना चाहिए की उसकी प्रजा
- 49:56उसका अनुकरण करे। फिर ज़रा देखो जैसे ईरान के ऊपर
- 50:08बम करा दिया वो के तभी तू 440 किलो यूरेनियम पड़ा है ये ले जा
- 50:15अगर तेरे को शक है तो। लेकिन वो नहीं लेके आया।
- 50:21बात तो ये थी कि हमने तुम्हें मारा न था, बस बातचीत तो बहाना
- 50:28था, दरअसल तो तुमको मिटाना था लेकिन बात समझ लेना।
- 50:46फानूस बनकर जिसकी हिफाजत खुदा करे फानूस बनकर जिसकी हिफाजत खुदा करे
- 50:57और शम्मा क्या भजे जिसे रोशन खुदा कर।
- 51:04फानूस बनकर जिनकी इफ़ाज़त हवा करे वो क्षमा क्या बुझे जिसे रोशन को
- 51:12जाकर क्या है शुरुआत तुम्हारा कभी सोचा था तुमने अमेरिका ऐसा?
- 51:24आई वेन आई वेन आई स्टॉप दी वेन ऐसा हाल हो जाएगा।
- 51:35कभी सोचा था पता है अगर मैंने आइटम बॉम्ब करा दिया और हराम खोल।
- 51:48जब तेरे पास 6000 एटम बम्ब 5000 एटम बम्ब पड़े और बड़े हेवी हेवी
- 51:56तू दूसरों को रोकने का ये कौन सी नीती है, यह तो वही।
- 52:10पंडितों वाली नीती हो गई। ए खुद तो घोड़ी चढ़ो, अगर कोई
- 52:15शूद्र घोड़ी चढ़े तो उसको मार दो, खुद तो शीतल जल पियो, लेकिन अगर
- 52:21शूद्र का बेटा अगर वहाँ से पानी पियो तो पिट।
- 52:25पीट के मार दो। शुद्र के ऊपर पेशाब कर दो, ये
- 52:34तुम्हारी नफरती चाल बहुत ही चल गई।
- 52:41राक्षी सांड संस्थान आरएसएस राक्षसी सांड संस्थान अब और नहीं
- 52:53चलने वाली आ गया है। वो जिसका इंतजार था।
- 53:08इसलिए मैं रोज़ कहा करता हूँ निभाने मत देना।
- 53:16जो व्यक्ति 14 वर्ष से भीतर बैठा। है कुछ तो कर रहा होगा।
- 53:31यह जो तुम आपस में टकरा रहे हो, गदर मच रहा है, यूं मच रहा है।
- 53:39पित्रा नय साधु नाम? जदा जदा ही धर्म से ज्ञानेर भवती
- 53:46भारत। अब्दुथानम अधर्वस्य तद आत्मानम
- 53:51सृजा में हम पृतृ नय साधु न विनाशाई से दुष्कृता धर्म
- 53:58संस्थापना अर्थात संभवानु जुगे जुगे।
- 54:06ऐसे व्यक्ति को खुद ही। और देखिए रामपणे समझदार जाते जाते
- 54:15सीता को तो ले ही डूबे सीता तो पहले ही चली गई थी उसके।
- 54:19सामने मैं तुमसे आज एक और बात बता दूँ।
- 54:30तुम चुप रहने वालो, अगर अपराधी को उसका अपराध नहीं बताओगे तो तुम
- 54:37सदा ही दंड भुगतोगे अपराधी को उसके अपराध का बताना चाहिए कि
- 54:47तुमने ये अपराध किया। जैसी अदालत बताती है दंड देने से
- 54:50पहले कि तुमने ये किया, तुम कहोगे हमारी अदालतों ने बरी कर दिया,
- 54:58ठीक है, कर दिया। अदालतों ने बरे नहीं किया ठीक?
- 55:12मैंने कहा अब शी जय साहब से आप नार्को की अनुमति दे दें, कोई
- 55:18जवाब और कल को कह देंगे। आपकी वीडियो तो हमें मिली ही नहीं
- 55:25क्योंकि इन्हें पता है ये खुद भी दागदार है।
- 55:31आज वक्त ऐसा आ गया कि पागलखानों से बाहर पागल हैं और जो ठीक दमाक
- 55:43वाले हैं वो पागलखानों में धकेले जा रहे हैं।
- 55:47आज उल्ट काम है। इसलिए थोड़े से लोग पागलखाने में
- 55:51हैं। आज क्योंकि सारे पागल तो संसार
- 55:55में आ गए। जब ज्यादा हो जाता है अनुपात तो
- 55:59फिर क्षेत्र बदलना पड़ जाता है तो पागल संसार में फिर रहे हैं।
- 56:08समझदार लोग पागलखानों में हैं जो क्रिमिनल लोग हैं और राजाओं के
- 56:17साथ बंटे हैं। किसी ने थार चढ़ा दी।
- 56:20किसानों पर किसी के कारण 750 किसान मर गए और ये सहाय पूछते
- 56:27हैं। ये मेरे कारण मर रहे हैं तो कानून
- 56:31किसने पास किए थे? ये बाबा विजय भट्ट ने पास किए थे
- 56:38या नेहरू जी पास करके या इंदिरा जी ने पास कर दिया?
- 56:44अब अमेरिका के साथ डील जवाहरलाल नेहरू करके आया।
- 56:49उसकी आत्मा भटकती ही फिर रही है और मोदी जी का पीछा नहीं छोड़ते,
- 57:00बहाने बाजी मत करो। तुम ये भी मत समझना कि हम त्याग
- 57:06पत्र देकर अपना पीछा छुड़ा लेंगे। यद्यपि दुनिया यही चाहती है।
- 57:10लेकिन मैं कुछ और चाहता हूँ, मैं चाहता हूँ दुष्ट को दंड मिलना
- 57:22चाहिए, भागना नहीं चाहिए और अगर तुम भाग गए।
- 57:31ज्ञान जयंती महाराज राजीव जयंती महाराज तुम जहाँ भी हो पाताल के
- 57:35साथ में, पाताल में भी मैं वो से हूँ जो कयामत की खबर रखता।
- 57:41हूँ। मैं वो से हूँ जो कायनात की खबर
- 57:45रखता हूँ। तो मैं ढूंढ नहीं करूँगा इतने
- 57:53अपराध करके भागोगे कहाँ भागोगे, इसलिए रोज़ कहता हूँ अमित शाह जी
- 58:00मोटा भाई सुन लो। मरना तो है ही, फिर तुम आकर क्षमा
- 58:16क्यों नहीं मांग लेती? मेरा 25 वर्ष का पुत्र मर गया आज
- 58:29मेरी। धर्मपत्नी का भतीजा मर गया, आज
- 58:33अभी मैं प्रवचन कर रहा हूँ। उससे पहले मुझे खबर मिल गई थी,
- 58:37मैंने कहा कोई बात नहीं तुम उसको जाके अग्नि दे आओ और मेरा पुत्र
- 58:43कुणाल और धर्मपत्नी दोनों उसको अग्नि देने के लिए गए हुए हैं।
- 58:49मैं यहाँ वीडियो बना रहा। हूँ।
- 58:58मैं अपना दायित्व निभा रहा हूँ। कर्मनीय वाधिका रिश्ते महफलेशु
- 59:06कालच मैं अपना करण करने का अधिकार छूर्तन प्रस्थिति जो है कोई भी
- 59:13हो। तो ऐसे व्यक्ति को बाबा ने पहले
- 59:26बता दिया मुझे अब वक्त आ गया, तुम बैठो ये जो मैं कहता हूँ वो करो
- 59:32जगत कल्याण करो, इन दुष्ट मान्यताओं का नष्ट करो।
- 59:42सही उपदेश तो सही व्यक्तियों को उसका आत्मस्थान बताओ स्थिति
- 59:48प्रज्ञता बताओ ऑब्जर्वर बताओ सब चीजें ठीक?
- 59:54ठीक बताओ, उलझाओ मत, ठीक है? और मैं शांत होकर एक एक ही जगह
- 1:00:07बैठा। हूँ।
- 1:00:15बिना कुछ लज्जत वाली चीजों को खाने के लज्जत वाली चीजों को
- 1:00:25भोगने के। लज्जत वाली चीजों को भ्रमण करने
- 1:00:29की कोई इच्छा नहीं है। इच्छाएं खत्म हैं, जीने तक की
- 1:00:36इच्छा खत्म है। तो आपने पूछा तो इसका संक्षेप
- 1:00:45मैंने सारा बता दिया। अब।
- 1:00:47मोरल के रूप में सर जनता बुरी नहीं होती, प्रजा बुरी नहीं होती,
- 1:00:58राजा के भीतर और ऐसी ग्रंथि है। तो वह उसके जो पास बैठेगा, जैसे
- 1:01:09तुम गडर के पास खड़े होते हो। तुम्हें नाक बंद करना पड़ता है
- 1:01:13ना, पर जैसे जैसे तुम गडर के पास ही बैठे रहोगे तो तुम्हारा नाक मर
- 1:01:20जाएगा। फिर तुम कहोगे देखो मैं कितना सो
- 1:01:22बाकी साली हूँ। मैं गटर के पास हुआ और गटर की
- 1:01:27दुर्गन्ध ही जाती रही, तुम्हें पता नहीं हमारी सूंघने की शक्ति
- 1:01:32खत्म हो गई, आदत पड़ गई शरीर अपने आप को उसी ढंग से डाल लेता है।
- 1:01:40जैसे अब मैं दूध पीता हूँ, सिर्फ तीन बार शरीर ने अपने आपको वैसे
- 1:01:44ही कर लिया और सब बोलता हूँ और गहरे गहरे प्रवचन जाके बोलता हूँ,
- 1:01:52तुम अवश्य ही सोचते होंगे। लेकिन शरीर की परमात्मा ने
- 1:02:00व्यवस्था बनाई। जैसे हमें चोट लगती है ना तो शरीर
- 1:02:05तुम सोए पड़े हो, चोट लगते हैं, तुम्हें तो पता नहीं तो वेंज में
- 1:02:12से लहू निकलना शुरू हो जाता है लेकिन आटोमेटिक सिस्टम परमात्मा
- 1:02:16ने बनाया है। ऑटोबैंडिस वह आपके भीतर जो हमारी
- 1:02:25प्लेटनेट्स हैं, वो एक तरह के जाल बुन देंगे, वो जाल पट्टी की तरह
- 1:02:33होगा, फ़ोन निकलना बंद हो जाएगा। नहीं तो चलो बाहर से तो तुम कर
- 1:02:37लेते हो, भीतर क्या करोगे? ये ऑटो सिस्टम है भगवान का जिसने
- 1:02:45प्रकृति को बनाया और तुम तो एक जर्रा बनाने की हिम्मत नहीं रखते
- 1:02:52और तुम बात इतनी बड़ी बड़ी करते हो।
- 1:02:57साहब ये कहते हैं कि जब मुझे बनाया, वैसे तो भगवान ने लाइफ
- 1:03:03वाइफ से हाथ धोए थे। कहते मेरे भीतर जो आईटी कलाकार
- 1:03:08थे, उन्होंने ऐसा पुर्जा बंद कर दिया।
- 1:03:12कि मैं कम कल्पना कर ही नहीं सकता।
- 1:03:15मैं निकट मैं तो तुम्हें बिलकुल उल्टा सिखाऊंगा कि कल्पना ही मत
- 1:03:25करना। अगर शक्ति को झोंकना ही है तो
- 1:03:31शक्ति को देखने में झोंकना, कल्पना करने में मत झोंकना सपन सब
- 1:03:37जवाब ना देखना, ना दिखाना तो इन साहब के भीतर पुर्जा होगा, लेकिन
- 1:03:46हमारे भीतर ऐसा पुर्जा है। जो सत्य को देखता है वो सत्य को
- 1:03:52दिखाता है। सारी भ्रांतियां मैं तो सब तोड़
- 1:03:57के जाऊंगा, जितनी मेरे सामने आएंगी और जैसे जैसे आती जा रही
- 1:04:05हैं, मैं अपना कर्तव्य निभाता जा। रहा हूँ।
- 1:04:15राजा अगर ऐसा हो तो। यह पंडितों ने बनाई थी।
- 1:04:21जैसे देखो ना आप आज किया खुद ने कुछ नहीं।
- 1:04:30और वेश्याओं को लगा दिया ऊंचे ऊंचे बोलने के लिए तुम जो चाहे कर
- 1:04:35लेना कोई बात नहीं या कुछ नहीं, कुछ नहीं कर सकता।
- 1:04:42वेश्याओं को लगा दिया बोल कर ये चिल्ला रहे हैं।
- 1:04:47ब्रेकिंग ब्रेकिंग ब्रेकिंग क्या अतीक अहमद को मूर्ति आई?
- 1:04:51यह भी कोई ब्रेकिंग है? अरे मूर्ति है ना, कोई ब्रेकिंग
- 1:04:56न्यूस है क्या? और अगर गोली ही मारना है तो फिर
- 1:05:02डालते हैं किसलिए? जश्न तुमने गोली मारी थी अति को
- 1:05:11हिंदू, मुसलमान का यहाँ कोई मतलब नहीं, बात इंसान है और बात
- 1:05:16संविधान का तुमने उल्लंघन किया और ये अदालतें इतनी बिकी हुई हैं।
- 1:05:24के से संज्ञान नहीं लिया। अब मेरे कहने के बाद कौन सा
- 1:05:27संज्ञान ले लेंगे? तुमने अतीक अहमद को गोली क्यों
- 1:05:34मारी जबकि गोली मरवाने का अधिकार तो किसी को भी नहीं?
- 1:05:42हमारे संविधान में फांसी लटकाने का प्रावधान है।
- 1:05:45अगर किसी को मृत्यु दंड दिया तो गोली मारने का अधिकार तो किसी को
- 1:05:49भी नहीं दिया। संविधान ने तुम मृत्यु दंड दे
- 1:05:54सकते हो लेकिन वो भी न्यायाधीश? तुम्हारे पास ही ये व्यवस्था कहाँ
- 1:06:02से आई? तुमने अधिकार कहाँ से प्राप्त
- 1:06:04किया कि चार व्यक्तियों को भेज दिया और गोली मार के वापस आ गए?
- 1:06:12मेरे साथ भी ऐसा हो सकता है क्योंकि मैं।
- 1:06:18सत्य कहने से चुकूंगा नहीं और तुम ऐसे कायरे ईजड़े हो कि तुम मैं
- 1:06:24सुनने की क्षमता नहीं तुम मुझे मार ही दोगे, मुझे पता है और मैं
- 1:06:29हसर जानकर ही बोल रहा हूँ ना मैं पागल हूँ ना मैं मुर्शीत हूँ।
- 1:06:39ना मुझे तंद्रा नहीं गेरा है, सब जानता हूँ मैं और यह भी जानता
- 1:06:44हूँ। हो रही हो रही भूल निसार हो रही
- 1:07:08बुलबुल गोलों पे क्यों निसार है खड़ा।
- 1:07:17माली वो पीछे होशियार है, खड़ा पीछे वो माली होशियार मारकर।
- 1:07:35गोली गिरा ली जाएगी जब तेरी डोली उठा ली जाएगी।
- 1:07:53बे मुहूरत के उठा ली। जाएगी।
- 1:08:00मरते सबवरकर भी हैं कार्यकर्ता मरते सरदार भगत सिंह भी हैं,
- 1:08:08लेकिन वीरता से मरते हैं। वो कहते हैं, माफी नहीं चाहिए और
- 1:08:15तुम्हारी सावरकर कहते हैं, तुम बोलने के योग्य हो।
- 1:08:25अपने डीएनए तो देख लो। मेरे बड़े भाई की मृत्यु हो गई
- 1:08:30थी। सुरेश तो मैं उसकी लाश देख कर आ
- 1:08:39रहा था ऊपर कमरे में तीसरी मंजिल में था हमारा मकान बेक साइड से
- 1:08:48तीन मंजिला। था आगे से एक मंजिला था।
- 1:08:54तो तीसरी मंजिल पे वो रहता था उसकी डेड बॉडी देख के आया मैं चेक
- 1:09:01किया अच्छे से ठीक मैं नीचे आया तो माता कहने लगी।
- 1:09:10सुरेश ठीक है, मैंने कहा हम बिल्कुल ठीक है, मेरी आवाज में
- 1:09:15कोई कंपनी कहती वैसे तो मुझे तेरे पे यकीन नहीं तू मुलिया डेढ़ झूठ
- 1:09:24बोल देता है। मैं कहन्नी माँ ऍम, मैं झूठ।
- 1:09:27नहीं बोल रहा हूँ। वो ठीक है अच्छा तू मेरे सिर
- 1:09:31क्यों प्रार्थ यही कहते हैं आपत्ति काले मर्यादा नाश्ते तुम
- 1:09:41असूलों पर चलने वालो तुम फ्लेक्सिबल नहीं हो।
- 1:09:45मैंने माता के सिर पे हाथ रख। दिया।
- 1:09:48मैंने के माँ तेरी सौगंध, वह है जिंदा और माँ शांत हो गई जब तलक
- 1:09:57पता चले तब तक तू शांत हो बाद की बात में देखी जाएगी।
- 1:10:05तो मेरे पिताजी कहने लगे डीएनए की बात कर रहा हूँ, मैं बिल्कुल सही
- 1:10:11बात है। बहुत लोग जिंदा होंगे इस सबूत के
- 1:10:14तौर पर। क्योंकि 1980 में 19 जून की सुबह
- 1:10:19को मृत पाया गया था 18 जून की रात को।
- 1:10:2318 जून को ही उसकी रात की शादी। थी।
- 1:10:26एक वर्ष बाद उसने कहा था मेरी मृत्यु हो जाएगी और हो गई हमारे
- 1:10:33घर में अजूबे हैं, बहुत अजूबे हैं तो मेरे पिताजी कहने लगे विजय
- 1:10:40मैंने कहा। मैं सैर कर रहा हूँ मैंने कहा करो
- 1:10:48तो पिताजी सैर करने से देखे, रोज़ गउशला मंत्र जाते जहाँ मैं जाया
- 1:10:52करता दातिल कर रहे हैं, राम राम करते जाते हैं सभी।
- 1:11:01गौशाला मंत्र तक गए, उससे भी आगे तक कच्ची पटड़ी थी।
- 1:11:07वहाँ से जाकर फिर वापस आ गए। आते भी राम राम का जाते भी राम
- 1:11:11राम का घर आ गए। जब उसको अंतिम संस्कार के लिए ले
- 1:11:22के गए अग्नि मैंने ही दी थी तो मुझे लोग कहने लगे।
- 1:11:34कब में मृत्यु हुई इसकी मैंने कल रात को रात को हुई नहीं क्यों?
- 1:11:41क्योंकि? पंडित जी तो हमें सुबह राम राम
- 1:11:44करके गए हैं, सैर करने आए थे और गौशाला तक हो के और कच्ची पटड़ी
- 1:11:51पे हो के मैंने कहा देखो जीना मरना अपनी जगह होता है सैर करना
- 1:11:58अपनी जगह। होता है।
- 1:12:01जो मर गया। उसके लिए अफसोस तब करना चाहिए अगर
- 1:12:06वो बचाया जा सके। जब वो बचाया ही नहीं जा सकेगा तो
- 1:12:13फिर तुमने अपनी दिनचर्या को नष्ट करनी है, इसलिए मैंने पिताजी से
- 1:12:18कहा, बिल्कुल आप सैर करते हो? लेकिन आपके गले के नीचे नहीं
- 1:12:26उतरती है बाद हमारे डीएनए में बहुत शुरू से कई पीढ़ियों से ऐसा
- 1:12:35किया। हम द्वारो को वैज्ञानिक ढंग से
- 1:12:42लेते हैं। हाँ, हमारे सामने कोई
- 1:12:44ऐक्सिडेंटाइज़ है, कोई बीमार है, हम उसको बचाने की पूरी चेष्टा
- 1:12:49करेंगे लेकिन अगर वह क्लिनिकली डेड हो गया तो हम तुरंत वो छोड़
- 1:12:58देंगे। फिर अपना काम कर तुम निभाते हो।
- 1:13:11सिर्फ। फॉरमलिटीस हम फॉर्मलिटीस में ज़रा
- 1:13:25भी विश्वास नहीं करते शून्य प्रतिक्षण हम जो बोलेंगे
- 1:13:32ऑथेंटिसिटी से बोलेंगे, उसमें कोई फॉर्मलिटी नहीं है।
- 1:13:37नाम किसी को राम राम कहते हैं, फार्मासिस्ट किसी तरह की कोई
- 1:13:43फोटोग्राफी नहीं और नहीं करूँ चलो।
- 1:13:52कोई बात नहीं। किसी तरह का कोई सर्कस बाजी नहीं,
- 1:13:58किसी तरह का कोई लफासेबाजी नहीं। क्योंकि लिफाफेबाजी दूसरे व्यक्ति
- 1:14:04के साथ झूठ उसकी जिंदगी के साथ एक छलावा है और तुमने तो
- 1:14:10146,00,00,000 लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया है और मैंने कल
- 1:14:16ही बोला था मेरी सरकार आएगी। और मैं आते ही ये कानून बना
- 1:14:23दूंगा, जिसने जिंदगी में कभी भी अगर वो चिंता है तो छलावा किया
- 1:14:31है, पर फोर्चूनेटली ही विल बी पनिश्ड।
- 1:14:36अगर 146,00,00,040 करोड़ लोगों से तुमने छलावा किया 15,00,000 दे
- 1:14:43दूंगा, रोजगार दे दूंगा, 2,00,00,000 महंगाई कम होगी, रुपए
- 1:14:47की वैल्यू पर जाएगी, अच्छे दिन आएँगे।
- 1:14:54चार महीने का बच्चा पकड़ रहा है। देखो दखाविबाज़ी की अब अपना चार
- 1:15:02महीने का बच्चा उतनी ही उम्र होती है, मगर मछ के आदमी इतने चार
- 1:15:08महीने का बच्चा जिसके दांत भी नहीं आए अपना बच्चा को उठा के ले
- 1:15:13जाए। क्या वह कोई उसको काटेगा?
- 1:15:16नहीं काटेगा मगरमच्छ 12 साल से कम उससे कोई खतरा नहीं होता।
- 1:15:23जब मैं तुम्हें जनरल नॉलेज की बात बता रहा हूँ, 12 वर्ष से ज्यादा
- 1:15:27भी उससे खतरा नहीं होता। मगरमच्छ से खतरा होता ही नहीं जब
- 1:15:31तक के आप उसको छेड़ना हो। वह आक्रमण करेगा और कोई भी जानवर
- 1:15:37मैं सांपलों के बीच में बैठा रहता था।
- 1:15:40मुझे किसी साँपने का भी कोई नुकसान नहीं दिया।
- 1:15:44कोई भी जानवर जब तुम उसे मारने की इच्छा करोगे तो वो तुम्हारी रेंज
- 1:15:49को पकड़ लेगा। मैं तुम्हारी भाषा नहीं जानता।
- 1:15:53फिर वो तुम पर अटैक करेगा, अनीता को अटैक नहीं करेगा और तुमने तो
- 1:16:02सारे कफन ही कफन लपेट लिए हैं लफाफेबाजी के।
- 1:16:10वक्त आ गया। लोग कहते हैं मोदी जी इस्तीफा दो,
- 1:16:15मैं कहता हूँ ठीक इस्तीफा तो दो ही बने रहने का अधिकार तो है
- 1:16:18नहीं, शायद तुमने सोचा नहीं होगा बड़े ब्याब्रु होकर तेरे कुचे से
- 1:16:26हम निकले। बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर
- 1:16:47भी कम निकले मैं बोला तो बहुत हूँ लेकिन पूरा नहीं बोल पाया।
- 1:16:53बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले बड़े बेयाबर होकर।
- 1:17:00तेरे कुर्चियों से हम निकले अभी तो हमने भोगना था एपस्टीन अभी तो
- 1:17:06हमने राज़ करना था, अभी तो हमने भगवान बनना था।
- 1:17:11और अभी अभी पर्दे खुलती जा रही हैं।
- 1:17:15खुलेंगे भाई? कितने साल तुमने 13 और 122525
- 1:17:21वर्ष एक पूरे का पूरा व्यवस्था होती है?
- 1:17:25जिंदगी की एक आश्रम 25 वर्ष का गिणा जाता है।
- 1:17:34खैर थीम में आ जाऊं। प्रजा क्या करती है इसका प्रजा
- 1:17:41स्वयं भोगगी प्रत्येक व्यक्ति के कर्म, उसका प्रभाव परिणाम वह खुद
- 1:17:47भोगगा लेकिन राजा के कर्मों का प्रभाव जनता हो अगर कोई व्यक्ति
- 1:17:54सडांध उसके शरीर से। बदबू आ रही है तो वह जहाँ बैठेगा
- 1:18:02उसको खुद को बदबू आये या ना आये लेकिन दूसरे तो नाक से खोल लेंगे।
- 1:18:09गटर कभी नाक से खोलता है गटर नहीं, उसके पास से गुज़रने वाले
- 1:18:15नाक तो। तो राम जिनका तुम नाम?
- 1:18:23लेते अगाते वह इसी व्याधि से पीड़ित थे।
- 1:18:33यही ग्रंथि से निकली हुई मान्य रस उनके भीतर था, इसलिए मैं कहता हूँ
- 1:18:41कि ऐसे लोग जहाँ जहाँ चरण पड़े संथन के तह तह वयो विनाश देखिए।
- 1:18:52मैं उनकी मर्यादा की सदा ही कदर किया हूँ।
- 1:18:57मैंने खुद उनका रोल किया, जानते हुए और 14 वर्ष तक और किया।
- 1:19:05लेकिन जो सत्य है वो मैं बोलेंगे, चाहे कोई भी हो।
- 1:19:12मेरा बोलना उसके आड़े में नहीं आएगी।
- 1:19:17कोई चीज़ सत्य निर्बाध रूप से मैं बोलता रहूँगा, उसके बीच में कोई
- 1:19:22चीज़ आड़े नहीं आएगी, सदा से बोलता।
- 1:19:26रहा हूँ, सदा से बोलता रहूँगा। तुम इसे कैसे भी रूप में लो, मानो
- 1:19:33ना मानो हमारे ऊपर में कोई तानाशाही प्रवृत्ति का व्यक्ति
- 1:19:40नहीं है। मैं अहिंसक हूँ और मेरा ये एक
- 1:19:46माटु है। क्या जियो और जाने दो?
- 1:19:52बस सिर्फ इसी बात के माटों से संसार खुशहाल रह सकता है।
- 1:19:59अनिशा कितना ही तुम सुबह सुबह प्रयास किए जाओ हे ईश सब सुखी
- 1:20:04हों, कोई ना हो दुखारी। कोई फर्क नहीं पड़ेगा जब तुम अपने
- 1:20:11मन के भीतर इस चीज़ को बढ़ा लोगे, एक सिर्फ एक जियो और जाने दो।
- 1:20:25तो ज़िन्दगी में धरती पर खुशहाली हो जाएगी।
- 1:20:27यही सज्जकंड है, यही सतलोक है। यही स्वर्ग है और यही नरक है और
- 1:20:35मेरे ख्याल में प्रजा कभी भी दुष्ट नहीं होती।
- 1:20:39प्रत्येक व्यक्ति अपने अपने कर्म फूकेगा लेकिन राजा अगर।
- 1:20:46मन रस निकल रहा है उसके भीतर से तो वह जहाँ जाएगा वहाँ विनाश हो
- 1:20:52जाएगा। राम जन जन के प्रिय हैं अपने
- 1:21:02व्यवहार के कारण लेकिन उस ग्रंथि का क्या होगा?
- 1:21:08जो कुदरतन उसे दे दी गई है, वह तो विनाश करेगी ही करेगी।
- 1:21:20नाते रे। लेख किसी के समझ इसे ही पैदा कहते
- 1:21:40हैं, किसी किसी व्यक्ति का पैदा खराब होता है, हम कह सकते हैं
- 1:21:43होता है यह मान्य ग्रंथि के कारण। वेदना तेरे लेखक किसी के समझ न
- 1:22:02आते। मेरी एक शिक्षा है।
- 1:22:08नाम नहीं बताऊँगा। उसके भीतर एक इससे बिल्कुल विपरीत
- 1:22:14ग्रंथी होती है। वह व्यक्ति जहाँ बैठ जाएगा वहाँ
- 1:22:21लक्ष्मी उसके चिरण ही चुमेगी खुशहाल ही उसके चरण चुमेगी।
- 1:22:26मेरी शिक्षा और मेरे से दीक्षित है।
- 1:22:28जब वो दीक्षित दीक्षा लेने के लिए आई थी तो मैंने उस ग्रंथि को देख
- 1:22:33लिया था। मैंने उसे दीक्षा दी, मन में बहुत
- 1:22:39खुशी हुई। यह जल्दी पहुँच जाएगा।
- 1:22:45ये अभी पता है। मुझे तो ऐसे लोग होते हैं जिनके
- 1:22:52भीतर दूसरी गलती होती है। उसकी उसकी बात आप प्रश्न पूछ
- 1:22:56लेना, मुझे याद कर दिया तो मैं इसका भी आपको विस्तार से उत्तर दे
- 1:23:02दूंगा। वेदनाते रे लेखक से समझ न आते
- 1:23:19हैं। जब रावण का जन्म हुआ तो विसर्भा
- 1:23:27कहने लगे केक शी से के प्रिय मैं तुझे ब्याह के लेके आया था।
- 1:23:34अब हमारे कुल में ऐसा व्यक्ति पैदा हो गया है जिसके भीतर यह है
- 1:23:39मान्य ग्रंथी। यह सब नाश कर देगा।
- 1:23:46यह सोने की लंका भी जो भगवान शंकर से मांगी गई थी सब नाश हो जाएगा।
- 1:23:54तुम बोलो अपने पति के संग जाना चाहती हो या सोने की लंका का
- 1:24:00लुत्फ लेना चाहती हो? अब तुम मुझे फैसला करके बता दो,
- 1:24:06आज का दिन बाकी है। सांझ होते ही मैं निकल जाऊंगा।
- 1:24:13अब केक सिंह तो जानती नहीं थी, लेकिन।
- 1:24:17अभी शर्मा को पता था। बिसर्भा कहने लगे यह को लगाती
- 1:24:26कोलका नाश कर दे क्योंकि इसके भीतर वो ग्रंथी।
- 1:24:31है तो केक से कहने लगी पति देव। आप जाओ, मैं तो अपने पुत्र के साथ
- 1:24:42ही रहूँगा। पुत्र पुत्र के साथ ही रहूँगा
- 1:24:45विभीषण थे, उसके पुत्र रावण थे, ये उसके पुत्र थे और पुत्री थे
- 1:24:53सिर्फ। तो केकसी वहाँ रह गई और विसर्भा
- 1:24:59उसी रात सोनी के लंका को कौन छोड़ा करता है?
- 1:25:06लेकिन समयदार व्यक्ति जलते हुए घरों में नहीं रहा करते।
- 1:25:17वेदनाते रहे लेखक से के समझ न आते हैं।
- 1:25:36तो राम को इस चीज़ का एहसास हो गया, राम को पता रख गया सर्वज्ञ
- 1:25:42हैं कि यह ग्रंथी के कारण सब लूट बैठ गया।
- 1:25:48सीता गई, लक्ष्मण चले गए। जैसे ही सीता ने ऐसे कटु वचन कहे
- 1:25:57और छोटे छोटे बच्चे आके बोल गए कि फिर तुम ब्याह के क्यों लेके आए
- 1:26:01थे? तुमने ये क्या किया?
- 1:26:03राजा हम गर्भ में थे और तुमने हमारी माता को निकाल दिया।
- 1:26:11तो वह बर्दाश्त नहीं कर सका। उसने कहा बस बहुत हो गया एंड ही
- 1:26:18कॉमेटेड सुसाइड सविद अर्थ देखिए मेरी इस बात को सुनकर कोई सुसाइड
- 1:26:29ना करे। मैंने सर्प तथ्यों से अवगत कराया
- 1:26:34है, चिपके रहो, कोई परेशानी नहीं है।
- 1:26:40हमें क्या परेशानी है? ₹10 और दूध महंगा हो जाएगा।
- 1:26:45ये ना भी महंगा होगा। तो?
- 1:26:48जो मरेगा वो मैं नहीं हूँ। नैनम चिदंतीशस्त्रण नैनम बहुत ही
- 1:26:55भाव का बेहतरी इसी में है कि तुम रहम खाओ, इतनी प्रजापे सारे से
- 1:27:03ज्यादा पापुलेच्ड कंट्री है, क्या रहम खाओ, रहम खाओ।
- 1:27:10तुम छोड़ दो गद्दी और अपने आपको सुपुर्दे कानून कर दो नार को
- 1:27:19कराया जाएगा निश्चित सब पता चल जाएगा तुमने क्या किया और अगर
- 1:27:24ईमानदार हो तो खुद खुद बता। दो।
- 1:27:27कि मैनेजर किया नहीं, उखड़ तो जायेगा ही।
- 1:27:31जन जन के प्रिय को जाते हैं। हो वेदनातेर लेख किसी के।
- 1:28:03समझ न प्रियरा लखन सिया बन को।
- 1:28:23जाते हैं हूँ बिदना तेरे लेख किसी।
- 1:28:38समझ न आते, धन्यवाद।