Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 Mar 25 - नाम जप का सम्पूर्ण निचोड़ - अब तक की सभी जानकारियों का सार! नाम जप की सम्पूर्ण गाइड!
Transcript
- 0:07प्रहलाद आर्य आज से करीब 5 साल पहले कोरोना काल में।
- 0:25आपकी प्रथम वीडियो से साक्षात हुआ उस दिन से लगातार आपको सुनता आ
- 0:35रहा हूँ, सारे इलूशन खंड खंड कर दिए आपने।
- 0:47एक इल्ल्यूशन बच गया। अगर कृपया करके उस इल्ल्यूशन को
- 0:56भी समाप्त कर दें तो हम मुक्त हो जाएंगे।
- 1:04प्रहलाद आर्य शस्त्र भरे पड़े हैं।
- 1:13नाम की महिमा से संतों की वाणी में नाम ही नाम दमकता है और आप?
- 1:33नाम की अभेला करते है, नाम की काट करते है।
- 1:44बस ये शब्द हमें अटकाए खड़े हैं। जाना तो उन्हें भी था, अपने अंदर
- 1:57तो उतरे हुए भी थे, फिर क्या उनसे गलती हो गई या कि आप गलत है?
- 2:18अंत में निकला यह परिणाम राम से बड़ा राम का नाम सभी धर्म, कोई
- 2:37पांच नाम देता, कोई एक नाम देता। ये क्या है?
- 2:50क्या ये सभी पाखंड है? आप अकेले ही ठीक हो ये गुंडी ऐसी
- 3:00फंसी केस गुंडी ने सब रोक लिया सारा फ्लो।
- 3:09रुक गया। किसी तरह से क्या आप इस गुंडी को
- 3:15निकाल पाएंगे? बिलकुल निकाल पाऊंगा।
- 3:27अंत में निकला ये परिणाम राम से बड़ा राम का नाम लीजिये, हम शुरू
- 3:40करें। इसके बाद तो कोई प्रश्न नहीं
- 3:47रहेगा। आइए एक शब्द उच्चारण करें ना
- 4:19मुझको। ऐसे ऐसे नाम मुझे पूछे ऐसे ऐसे।
- 5:02ऐसे ऐसे ध्रुव पहला तू जब हर जैसे।
- 5:20नाम जब नाम से तो बड़ा आसान मिल जाता है कलयुग केवल नाम धारा सुमर
- 5:39सुमर नर उतरने पर। सलीका नहीं आया तुम्हें रोने वाले
- 5:54तुझे रोने का सलीका ही नहीं। अश्क पीने के लिए हैं या की बहाने
- 6:05के लिए नाम बड़ा सुगम है सरल है।
- 6:27सभी संतों ने इसका जिक्र किया है। निश्चित।
- 6:36फिर मैं राम की अवहेलना क्यों करता हूँ?
- 6:40नहीं, मैं कहता हूँ तुम्हें सेलिका आज तुमने प्रश्न किया, मैं
- 6:52जवाब दे सकता हूँ। कृष्ण ने कहा यज्ञों में मैं जब
- 7:05यज्ञ हूँ नाम के द्वारा तो बड़ी आसानी से पहुँच जाओगे कैसे
- 7:23पहुंचोगे? संतों ने यूं ही नहीं कहा।
- 7:35कबीर कहते हैं, नाम से भी पहुँच ही जाओगे, पलके आसानी से पहुँच
- 7:44जाओगे, वाल्मीकि ने नाम को उल्टा करके जपा, उल्टा नाम जपे ते जाना।
- 8:01बालमीक भव्य ब्रह्मसमाना यह भी एक तरीका है।
- 8:09उसने राम मरा मरा मृत्यु को याद मृत्यु याद आ गई तो भी पहुँच जाता
- 8:18है मृत्यु। मृत्यु सत्य है और सीधा सीधा अगर
- 8:29नाम जपना है तो अभी पहुँच जाओगे फिर मैं क्यों कर सकता हूँ?
- 8:39क्यों करूँगा? सलीका ने कबीर कहते हैं नाम तू
- 8:52जपो राम जपो जी ऐसे ऐसे। ऐसे जपुन कैसे ध्रुव प्रहलाद
- 9:18जप्यो हर जैसे तुम जपते नहीं। ऐसे कहाँ जाते हो तुम तो संख्या
- 9:30पूरी करते हो तुम नाम को भी धन की तरह लेते हो, देखो तुमने कहा नाम,
- 9:40धन। कबीर ने नाम धन नहीं कहा।
- 9:46कबीर कहते हैं संतोष धन जब आवे संतोष धन सब धन दूध समान, तुम
- 9:55कहते हो नाम धन। राम का नाम कागज़ों पर लिख लिख कर
- 10:02बैंक में जमा कर देते हो। मेरे बैंक में इतने नाम जमे हैं
- 10:08उसे मेरे पास लोग आ जाते हैं। बाबा बैंक में मेरे अरबों नाम जमा
- 10:14है। सेठों के होंगे अरबों रुपए।
- 10:22मेरा नाम जमा है ए नाम भी तुम्हारा अहंकार का पर्याय बन
- 10:31गया, कबीर कहते नाम जबो। लेकिन कैसे चपु ये नहीं पता
- 10:43तुम्हें माला तो कर मैं फिर है जीब फिर है मुखमा मनीराम चाहु देश
- 10:53फिर है यह तो सुमरण। तुम तो ऐसे ही झपते हो संत कहते
- 11:08हैं नाम को ऐसे झपो तो इससे एक क्षण मुक्त हो जाओगे कैसे झपु?
- 11:20ध्रुव, प्रह, लात जप्यो हर जैसे कैसे जपा प्रह लात ने कैसे जपा
- 11:29ध्रुव ने वैसे ये तुम जपलो नाम तो बड़ी आसान कसते हैं।
- 11:40नाम के कश्ती पे कितने पार हो गए है?
- 11:47लेकिन वो कश्ती कागज़ के नहीं थे, वो कश्ती थी श्रद्धा की विश्वास।
- 12:01नाम की कश्ती पर श्रद्धा की पतवार लेकर आरूढ़ हो जाओ और पाठ खुले
- 12:16छोड़ दो। हवाएं जिधर ली जाएं, कश्ती को
- 12:23जाने दो पतवार को नौका फिर दो खै, भैया न बनो।
- 12:42ऐसे ध्रुव ने जपा था ऐसे प्रहलाद ने जपा था प्रहलाद के सभी वृत्त
- 12:54थे प्रजात वृत्त थी। क्योंकि राजा का पुत्र था और
- 13:02राजाओं को अक्सर भ्रम होता है। हम हैं तो दुनिया है, हम न रहेंगे
- 13:11तो दुनिया मिट जाएगी। सभी राजाओं को भ्रम होता है, राजा
- 13:15बनने से पहले किसी को नहीं होता। पराया मार्ग अहंकार पैदा करता है।
- 13:24देखा रिश्वत बाजों को कितने अहंकार होते हैं क्या हुआ?
- 13:31पराया खून चढ़ गया, मेल नहीं खाया।
- 13:41ए बी वाले को या ओह वाले को ए बी लगा दो, क्या होगा?
- 13:51माइन में से लगा दो ओलोटेपटो लगा दो मर जाएगा।
- 13:59रिश्वत वाला पागल कुत्ते की तरह पागल हो जाता है क्योंकि बगाना
- 14:08खून जहर होता है, मैच नहीं करता आपसे आपका ए बी है।
- 14:18उसका ए माइनस है कैसे बोलेंगे, आपके लिए जहर साबित होगा, इसलिए
- 14:27रिश्वतखोर अंककारी हो जाते हैं। क्या हो गया अचानक इनको?
- 14:38खून जहरीला चढ़ गया। तुम्हारा नहीं था वो तुम्हारे
- 14:43शरीर ने बनाया नहीं था, किसी के शरीर ने बनाया था, किसी के शरीर
- 14:48के लिए था, चढ़ा दिया तुमने मरोगे, और क्या करोगे?
- 14:57रिश्वतखोर व्यक्ति अहंकारी हो जाता है और आखिर में अपने अहंकार
- 15:03के कारण मर जाता है। ऐसे ही राजनीतिज्ञ होते हैं
- 15:12बेगाना खून होता है हम हाथ काट कर दे देते हैं।
- 15:16वो उसके नहीं होते, आवारे होते हैं, बेगाना खून चढ़ गया और वही
- 15:23राजा जो मरे चूहे की तरह फेर रहा था।
- 15:28आज शेर हो जाता है, बब्बर शेर हो जाता है।
- 15:33वो ही कहता है मैं हूँ तो जहान है क्या हो गया खून बेगाना छोड़ गया।
- 15:50पराया खून अहंकार पैदा करता है क्योंकि मैं क्या नहीं खाता?
- 16:00ए वाले को बी चढ़ जाता है, ए बी वाले को ओह चढ़ जाता है।
- 16:07माइनस वाले को प्लस छड़ जाता है। प्लस वाले को दूसरा छड़ जाता है
- 16:12मैच नहीं खाता। वो तुम्हारा नहीं, तुम्हारे शरीर
- 16:14ने बनाया। इसलिए राजनीतिक उनकी दशाएं देखना
- 16:24राजनीतिज्ञों। के चेहरे पर मुर्दानगी का लक्षण
- 16:29पाओगे हुआ क्या है? दिल ए नालान तुझे हुआ क्या है?
- 16:52आखिर इस दर्द की दवा क्या है? संत के चेहरे पे तुम लावण्य
- 17:01पाओगे। वो लावण्या हक हलाल की है खुशी
- 17:13बुध मांग के खाते हैं, शंकर मांग के खाते हैं, चेहरे पे नोट होता
- 17:18है मांग कर खाना बेगान। मांगा है।
- 17:28किसी ने दे दिया तो भला नहीं दिया तो भला लेकिन छीन के खा लेना।
- 17:38दूसरे ने अमानत की तरह आपके पास रखा और आप उसे अपना समझने लगा।
- 17:46यही होता है रिश्वतखोरों के साथ और यही होता है राजनेताओं के साथ
- 17:52हजम नहीं आता सली का है नाम का कबीर कहते हैं जैसे तुम जबते हो।
- 18:13वैसे तो तुम सारी कल तक जब ते रहोगे नहीं पहुँचोगे माला तो कर
- 18:25मैं फिरै जीव फिरै मुकम्मा मनीराम, मैं चहुँ ती फिरै।
- 18:33ये तो सुमरण है तुमने कहा प्रहलाद सभी गुंडियां आपने तोड़ दी सभी
- 18:47गांठियां आपने खोल दी क्या इस गांठ को खोल पाओगे?
- 19:00यह रास्ता बड़ा आसान है, लेकिन इस रास्ते की शर्त बड़ी कठिन है।
- 19:11रास्ता आसन राजपथ है। शर्ते दुर्गम हैं शर्ते कठिन
- 19:24शर्ते क्या है ध्रुव प्रहलाद जपयो हर जैसे कैसे जपना नाम के जपने की
- 19:40ढंग की महत्ता है ना के नाम की महत्ता है।
- 19:46पानी राम चहुदि से रह, राम राम कर रहे हो कोई भी नाम जप रहे हो, मन
- 19:59भटक रहा है। अपने नौकर से कह रहे हो राम?
- 20:04राम, राम, राम, राम ऐसा करो इसको मूंगी डाल दो, मिर्ची डाल दो,
- 20:11हल्दी डाल दो, मसाला डाल दो। राम राम, राम, राम, राम राम ये
- 20:17डंग ने कबीर कहते हैं। ध्रुव पर है लाल जपयो हर्ष जैसे
- 20:27उन्होंने भी जपा था नाम की महिमा सब शास्त्र में लिखी है, निश्चित
- 20:36लिखी है और महिमा है अभी, लेकिन ढंग।
- 20:43सलिका सलीका आ गया तो नाम से आसान कोई रास्ता नहीं है।
- 20:53सिलिका क्या है, सिलिका पूछो प्रहलाद से पूछो ध्रुव से।
- 21:02प्रहलाद के विपरीत हैं। उसका बाप हिरण्यकशप राजा राजा है,
- 21:12रियासत का मालिक है। राज्य की सारी शक्ति उसके अधीन
- 21:21है। सिप ए साला और उसके जायदाद उसकी
- 21:25मोती माणिक उसके प्रजा, उसकी शस्त्र उसके पास साधन उसके पास
- 21:35लेकिन अपना ही पुत्र बगावत करके हरिण केशव क्या करे?
- 21:41और बगावत ठीक है क्योंकि हिरण्य कश्यप की शर्त गलत थी।
- 21:47वो कहते हैं मुझे मानो ना रहे हैं मुझे मानो भगवान मैं हूँ, भगवान
- 21:55प्रहलाद के तने ये नहीं होगा। तुम भगवान हो नहीं जो बहुत से लोग
- 22:05अपनी शर्तों पे बाप बनते हैं। हालांकि ये बाप बनते हैं, स्वाद
- 22:15के कारण उनका कोई योगदान नहीं होता।
- 22:19माँ बनने में कोई योगदान नहीं होता।
- 22:21प्रकृति भान्ति है। सब स्पर्म और अंडाण का मेल बढ़ता
- 22:27अपने आप और 1 दिन बच्चा भ्रूण से बालक हो जाता है और जन्म ले लेता
- 22:38है। क्या किया पिता क्या किया माँ ने
- 22:43मौज किया और कुछ नहीं किया फिर तुम आशा करते हो कि माँ बाप की
- 22:57पूजा करो, इसलिए मैं कहता हूँ तुम बच्चे नहीं जन्मते, तुम गलान
- 23:03जानते हो। तुम बच्चों से अपनी आकांक्षाएं
- 23:07पूरी कराना चाहती हों, जो आकांक्षाएं तुम्हारी अपूरित नहीं
- 23:14हुई, तुम कुछ बनना चाहते थे, नहीं बन पाए, बच्चों पे थोप देते हैं।
- 23:26ऐसी सड़ी सड़ी खोपड़ियां रह के हरण्यक शप जैसी कैसे संसार खिलेगा
- 23:35बगिया की तरह संसार गड्ड की तरह सड़ाध मारने जो लग गया है आज उसका
- 23:43कारण यही है। कि तुमने अपनी शर्तों पर बच्चों
- 23:49को जन्म दिया ऐसा नहीं बच्चे जन्म गए, तुम बेहोश थे तुम मुर्षित थे
- 23:58तुमने बीज बो दिया, पता भी न चला बच्चा जन्म ले गया।
- 24:06और तुमने अपनी आकांक्षाएं थोपनी शुरू कर दी है, ऐसा करो, ऐसा करो,
- 24:12ऐसा करो ऐसा करो, कोई अग्रीमेंट भी नहीं किया बच्चा कैसे?
- 24:22बहुत से बच्चे मुझे कह चूके हैं बाबा कोई अग्रीमेंट तो किया नहीं,
- 24:28अब वो कहता ऐसा करो, मेरा मन नहीं करता, मैं क्या करूँ?
- 24:39आज जो झगड़ा है संसार का। सिर्फ यही झगड़ा है, झगड़ा है के
- 24:51मालिक कौन? प्रहलाद केता मैं मालिक अपना
- 24:58रेण्य के सब केता मैं मालिक तुम्हारा यही झगड़ा है।
- 25:07जब तुमने बच्चे को स्वतंत्र पैगा किया तो तुम मालिक कैसे होगे और
- 25:17तुम मालिक बनने के योग्य भी तो नहीं हो?
- 25:24खेल खेल रहे थे, बच्चा जन्म ले गया, अब तुमने मरकाए थपनी शुरू कर
- 25:30दी। हम मालिक हैं, हम पिता हैं, इसके
- 25:33इतना शुक्र है बच्चा आपका नाम लिख देता है की मेरे पिता का नाम और
- 25:39कई बच्चे तो अपने पिता का नाम हिरन के शब्द लिख देते हैं।
- 25:45अब क्या करें? उनसे?
- 25:49वो यही मानते हैं कि मेरे पिता हरण्यकशप जैसा है, अपने स्वार्थ
- 25:55की पूर्ति करना चाहता है। मुझ से कबीर कहते हैं ऐसे जपु।
- 26:03जैसे प्रहलाद ने जपा ऐसे जपु जैसे ध्रुव ने जपा।
- 26:10ध्रुव ने कैसे जपा, प्रहलाद ने कैसे जपा?
- 26:17प्रहलाद उसकी नाव पे बैठ गए। और अपने जीवन की नैया को छोड़
- 26:27दिया। उस विराट के ऊपर नारायण के ऊपर अब
- 26:34तू ले जा जहाँ लेके जाना चाहे मार चाहे छोड़ो।
- 26:40ध्रुव, प्रहलाद, जब्बो हर जैसे जैसे ध्रुव और प्रहलाद नहीं जपा।
- 26:52ऐसे जपो मैं कब कहता हूँ ना जब्बो?
- 27:03लेकिन उसके जहाज पर आरूढ़ हो जाओ तो जिसके जहाज पर आरूढ़ हो, अपने
- 27:13आप को खुद को उसकी शरण में छोड़ दो, तू जो करेक्ट्रिक?
- 27:22तो मार मर जाएंगे तो बचा बच जाएंगे।
- 27:28हमारी औकात है क्या है? ऐसे झपों मैं करता हूँ का बोझा
- 27:41लेकर राम राम जपने का कोई फायदा नहीं।
- 27:45मैं हूँ तो जहान है ये बोझा लेकर राम राम जपने का कोई अर्थ नहीं
- 27:51है। नाम की बात कर रहा हूँ मैं सिर्फ
- 27:54राम ने राम हो, राधा हो, अल्लाह हो, वह गुरु हो, सतनाम हो, गॉड
- 28:00हो, कुछ भी हो। नाम की बात करता हूँ अकेला रंग
- 28:11तुम कृष्ण कृष्ण करो, तुम राधे राधे करो, तुम राम राम करो, कुछ
- 28:15भी करो तुम पूरे का पूरा पाठ करो। पूरा रामायण पढ़ लो तुलसी के पूरा
- 28:26रामायण पढ़ लो वाल्मीकि के पूरा गर्म से साहब पढ़ लो, लेकिन अगर
- 28:30ऐसे पढ़ लिया कि मैं नहीं पढ़ा तो गलती खा गया।
- 28:40ध्रुव प्रहलाद जपयो हर जैसी उसकी गस्ती में सवार हो जाओ और सारा
- 28:49बोझा उसके ऊपर रख दो, मैं अक्सर एक कहानी सुनाया करता हूँ, एक
- 28:54वृद्धा औरत सर पे लकड़ी का गट्ठा, बड़ा भार।
- 29:00डालती उम्र 80 साल की लकड़ी का गट्ठा बड़ा भा रहा।
- 29:08शरीर दुर्बल, पीछे से राजा आ रहा है।
- 29:18रथ वैसे भी खाली कहा रथवान रथ रोको ये सामने देखते हो वृत्ता
- 29:30हाँ मालिक इसकी गठड़ी उठा के यहाँ।
- 29:38और इसको बैठा दो, रथ के आराम से चली जाती पूछो कहाँ रुकना है वहाँ
- 29:46छोड़ देंगे इसको रथवान ने रथ रोका, वृद्ध को बिठा लिया, वृद्ध
- 30:00बैठ तो गयी। राजा अपनी मस्ती में बैठा है।
- 30:05राजा अक्सर अपने स्वर में ही रहते हैं।
- 30:10राजा और संत अपने स्वर में रहते हैं।
- 30:17राजा बिगाने बल के कारण अपने स्वर में रहता है।
- 30:21और संत अपने बल के कारण है। परमात्मा के बल के कारण अपने सुर
- 30:29में रहता है। बस बलों का फर्क है।
- 30:34एक के पास बेगाना बल है, एक के पास अपने ही पिता का बल है।
- 30:44तो उसने देखा नहीं, पीछे वृद्धा ने गट्ठर लक्कड़ का अपने सर के
- 30:52ऊपर रख लिया बैठी है, आराम से धन्यवाद दे रही है।
- 30:59जीते रहो लाख लाख साल जियो। परमात्मा तुम्हारे बच्चों की उम्र
- 31:04ज्यादा का है, तुम सदा राजा बने रहो, खुशहाल रहो, दवाई देते जा
- 31:11रहे है। राजा ने खुश फंसाते हुए देखा को
- 31:18पीछे झाँका। तो गट्ठर तो सर के ऊपर है हैरान
- 31:27हो गया बोला माता ये गट्ठर को रथ के ऊपर रख दे अब काहे ढो रही है?
- 31:40अब तू रथ के ऊपर सवार है, रथ अपने आप ले जाएगा तुझे भृता बोली नहीं
- 31:47राजा आपने बड़ी कृपा दी मुझे भटक अब कम से कम गठ्ठर का भार तो मैं
- 31:54उठा लूँ ये तो तुम पे न डालो। रथ पहले से ही मेरा भार उठा रहा
- 32:02है। गट्ठर का भार तो मैं उठा लूँ बस
- 32:06ऐसे ही तुम्हारे दिशा तुम समझदार हो या मूर्ख हो, इसी बात से
- 32:14अंदाजा लगा लो। गट्ठर अगर उसके रथ पे बैठ करे
- 32:22गट्ठर अपने सर पे रखे तो तुम मुर्खो जिसके रथ पे बैठे उस पर ही
- 32:31भार पड़ेगा गट्ठर का भी चाहे अपने सर पे रख लो चाहे रथ के ऊपर रख
- 32:38लो। अब ये तुम्हारी समझ के ऊपर
- 32:42दारमदार है कि तुम गट्ठर का भार रखते कैसे हो?
- 32:58सलीका नहीं आता सुमर सुमर नर उतर हीं पा रहा कलयुग केवल नाम अधारा।
- 33:16नाम तो बड़ा सरल तरीका है, इसलिए संतोनी से चुना प्रायोरिटी बेस पे
- 33:27प्राथमिक बेस पे सुनो लेकिन इसका शैलिका है गट्ठर को अपने सिर से
- 33:35उतारो। जिसके रथ पे बैठे उसके रथ पे ही
- 33:40रख दो, वैसे भी आपका और गट्ठल का भार रथ पे ही पड़ता है, इस
- 33:50गलतफहमी में मत रहना। कि हम परमात्मा की इस सृष्टि में
- 33:55हैं तो हम अपने कामों का भार खुद उठा के चलते हैं तो वह कुछ हल्का
- 34:04हो जाएगा। ये मूर्खता की बातें मत करो, उसके
- 34:10रथ पे बैठ गए तो इस तरह बैठो। जैसे प्रहलाद बैठ के ऋण के शब्द
- 34:17कहता है, तुझे मार दूंगा और मार भी देता है, पहाड़ की चोट से गिरा
- 34:25देता है, हाथी के पांव तले मस्त हाथी के पांव तले कुचलवाने की
- 34:30चेष्टा करता है। लेकिन जाको राखे सैन्य मार सके ना
- 34:38कोई बाल, ना बाकू कर सके जो जग भरी होए जाको राखे मेरा।
- 34:50सतगुरु प्यारा जा को राखे मेरा सतगुरु प्यारा, उसे कौन है मारण
- 35:07हारा। चाहे जगवन दुश्मन सारा उसे कौन है
- 35:19मारण हारा ऐसे जियो। अपने पिता के रथ पे सवार रहो,
- 35:34चीजें का मत करो वह पिता है, सचमुच पिता है, उसके रथ पे सवार
- 35:43हो गए हो तो गट ठड के। सिर के ऊपर ढ़ूंढ़ने का कोई अर्थ
- 35:49नहीं रह जाता अपने जीवन की सब भार, वो गट्ठर है तो सब फेंक दो
- 36:02उसके ऊपर पे उठाने को तैयार। तुम्हारी बुद्धि बड़ी क्षुद्र है,
- 36:13ये सारा विराट घूमता है, उसका भार किसपे है।
- 36:24तुम सारी श्रृष्टि का आनंद उठाते हो ये सूर्य चाम, तारे ग्रहण
- 36:31नक्षत्र इनका भार किस पे है ये पेड़ पौधे?
- 36:41ए जेव जंतु ये जंगली जीव जंतु, ये पानी, ये हवाएं, ये पत्थर, ये
- 36:51पर्वत, ये श्रृंखलाएं, इनका भार किसके ऊपर है?
- 36:57जब इतना भार वो वहन कर रहा है, तुम तो बड़े शूद्र हो।
- 37:07एक कण के से भी बहुत गम भार है तुम में यही कहा कृष्ण ने अनन्या
- 37:14चिंतित तो माँ यह जना पर वास्ते। ते श्याम नित्या गुप्ता नाम योग
- 37:20कक्षेमं वाहमं मैं बहेन करूँगा तो मुझपे छोड़ दे और इससे ज्यादा कह
- 37:29भी कह सकता है पिता पिता यही तो कह सकता है पुत्र मेरे पे छोड़
- 37:35दे। मैं निपट लूँगा, तू बच्चा है, तू
- 37:42थक जाएगा, तू हार जाएगा, मैं बलवान हूँ, मैं जोरावर हूँ, मैंने
- 37:49उत्पन्न किया, मैं निपट लूँगा, मुझपे छोड़ते हैं और प्रहलाद छोड़
- 37:55देते हैं। कोई एक प्रहलाद छोड़ता है, कोई एक
- 37:58धर्म छोड़ता है तुम नहीं छोड़ते तुम्हें लाख समझाएं, तुम छोड़ते
- 38:05हैं तुम्हें यकीन ही नहीं आता कोई वो है।
- 38:14और ऊपर से ये शक शोभा में डालने वाले लोग निरंतर पैदा होते रहते
- 38:20है। कोई चार वाक पैदा हो गया, कोई
- 38:22मार्क्स पैदा हो गया, नीचे से पैदा हो गया आधुनिक।
- 38:34ये तार के खिलाफ़ अर्थ का अनर्थ करते है।
- 38:38ये कहते कहाँ है जो देखा नहीं? जो समझ में नहीं आता वो होता।
- 38:45नहीं अब इनका। क्या करे?
- 38:50बहुत सी चीजें तो देखी नहीं जाती। बहुत सी चीजें तो समझ नहीं आती
- 38:55फिर वो क्या नहीं है, वो भ्रमण कितना दूर तक फैला हुआ है ये तुम
- 39:03पूरा पूरा नहीं देख सकते। सागर कभी गागर में समा पाया है
- 39:21तुम्हारी शर्तों पर नहीं चलता वो तुम उसकी सृष्टि के खिलाड़ी हो,
- 39:29मात्र अपना खेल खेलो और चले जाओ। मैं नहीं कहता नाम से नहीं मिलता
- 39:44नाम से जितना आसानी से मिलता है उतना किसी चीज़ से उतना रास्ता
- 39:50कोई आसान है ही नहीं। यह राजपथ है, लेकिन शर्त बड़ी
- 39:56गंभीर है वही तुम करने को तैयार। मैं जानता हूँ शर्त नहीं मानोगे
- 40:04तुम और बात तो शर्त की है। सलीका नहीं आएगा तुम्हें।
- 40:15कब से कहता हूँ कितनी बार बोला खंगालो प्राणों प्रवचनों को सब उस
- 40:20पर छोड़ दो। नाम नाम पर छोड़ना है, नाम को
- 40:39जपना नहीं है क्योंकि नाम सब जगह है।
- 40:47नाम आईएस ओमनी प्रेसेंट बाबा ने कहा बिन नावें नाहीं कोठा, ओमनी
- 41:00प्रेसेंट ही आईएस ओमनी प्रेसेंट। कोई स्थान नहीं जहाँ नाम नहीं
- 41:08जेता। किता तेता ना ये सारा प्रसारा
- 41:11सारी एक्सिस्टेंस इसको बाबा कहते हैं ये नाम है और इस वृहत पे इस
- 41:19व्याट पे इस नाम पे? शब्दों का हेर फेर है नाम पे छोड़
- 41:26दो बात नाम की नहीं है, बात तुम्हारी छोड़ने की है, तुम्हारी
- 41:37कैप्चरिंग को कलिंगिंग को मिटाने की बात है।
- 41:46और नाम पे छोड़ो, या नाम ही पे छोड़ो क्या फर्क पड़ता है तुम्हें
- 41:51सलीका नहीं है आओ तुम्हें थोड़ा सूत्र देता हूँ आज।
- 42:01इस सूत्र को अच्छे से हृदय में उतर रहा हूँ।
- 42:06कैसे जपना है नाम? प्रहलाद ने कैसे जपा द्रव ने कैसे
- 42:16जपा बस तुम पहुँच गए अगला पल? मोमेंट ऑफ एनलाइटनमेंट होगा तो
- 42:28मुक्त हो जाओगे गठड़ी को सर के ऊपर से उतार के रस पे ही तुड़कना
- 42:36है इतना सा काम बोले शाह ने ठीक कहा।
- 42:39रब दा की कणों उतरों पुटना हैदर लाना गट्ठर को सर से उतार दो, रथ
- 42:46के ऊपर रख वैसे भी रथ के ऊपर ही है बाहर बट तुम्हें मालूम नहीं है
- 42:55अब कोई क्या कर रहा है? क्रिया क्रिया और कर्म इसको लिख
- 43:19लो क्रिया में परिपूर्ण रूप से समाहित हो जाओ।
- 43:32इन्सर्ट कंप्लीटली इन एक्शन इन्सर्ट यूरसेल्फ़ कंप्लीटली।
- 43:43इन एक्शन कर्म में अपने आपको परिपूर्ण तलीम कर दो समाहित कर
- 43:49दो। क्रिया में अपने आप को खुद को
- 43:53परिपूर्ण रूप से समाहित कर दो। अगर तुम ऐसा होकर नाम जपोगे तो
- 44:06अगला फल आएगा इसी क्षण। इसी क्षण तुम मुक्त हो जाओगे
- 44:13लेकिन तुम कर पाओगे। ये मन 1000 गड़बड़ियां पैदा
- 44:20करेगा। ऐसा करना मन की मृत्यु है, मन
- 44:27जानता है। मन 1000 गड़बड़ियां पैदा करेगा।
- 44:32वहीं गड़बड़ी ने तो विवेकानंद को मार दिया।
- 44:38सिर्फ 2 मिनट का वक्त अगर और दे देता रामकृष्णा को तो गया था उस
- 44:46विशाल सागर में। सटोरी तो मिल गई थी, राम किशन उसे
- 44:54धकेल देते उस कुंए में और कुंए के किनारे पे उसे खड़ा कर देते यहाँ
- 45:05फिर धक्का देना उसे आसान। लेकिन वो डर है।
- 45:11मन ऐसे ही उपद्रव खड़े करता है। जब मन को मरने जैसा कहीं भी लगता
- 45:18है, मन भाग जाता है मन से कोई भी बहाना करके हम धरेन्द्र अनाथ कहते
- 45:26हैं। विवेकानंद कहते हैं, स्वामी जी
- 45:32मुझे डर लगता है, मेरे माँ बाप भी हैं, भाई बहन भी हैं, मेरे ऊपर
- 45:38जिम्मेदारी भारी। राम किशन कहते हैं फिर बाहर आजा
- 45:48बैठे। और राम किस से अपना हाथ उठा लेता
- 45:53है? 2 मिनट की बात एक व्यक्ति संबोधि
- 46:04को उपलब्ध होता होता है और वह भी कृपा से।
- 46:15वैसे ही तो जब मिलता है कृपा से ही मिलता है।
- 46:18नदरी मोख द्वार मुक्ति का द्वार उसकी नदर के बिना नहीं खुलता।
- 46:26बाकी तुम्हारी फर्क है क्यों नहीं खुलता, क्यों नहीं खुलता, कैसे
- 46:30नहीं खुलता? हमने क्या बिगाड़ा?
- 46:33उसने क्या पकड़ा ये तुम्हारे मन के तर्क है।
- 46:35यही तर्क तुम्हें मर जाते है। इन्सर्ट कंप्लीटली इन्वॉल्व
- 46:45कंप्लीटली योरसेल्फ इन एनी एक्शन। किसी भी कर्म में किसी भी क्रिया
- 46:54में अपने आपको टोटली समग्र रूपेण समाहित कर देना हो गया।
- 47:01काम नाम ही बचे, नाम ही बचे नाम लेने वाला ना बचे।
- 47:12जिसका नाम ले रहे हो वो ना बचे, ना नाम जपने वाला बचे ना जिसका
- 47:21नाम ले रहे हो वो बचे नाम ही भी ना बचे।
- 47:26नाम लेने वाला भी ना बचे। मात्र नाम बचे, ओनली एक्शन रिमेन
- 47:34नृत्य बचे नृत्यक न बचे, नृत्य बचे, एक्शन बचे करम बचे।
- 47:48और वैसे भी जहाँ दो होते हैं तब तक व्यक्ति पहुंचता है प्रेम गली
- 47:56अति सांकरीता में दो न सामान जब मैं था तब हरी नहीं अब हरी है मैं
- 48:04न कभी आखरी वक्त में करती। अब मैं नहीं हूँ पहले मैं था तब
- 48:11हरि नहीं था, अब हरि ही हरि है, मैं नहीं बड़ी सांकरी गली है
- 48:19प्रेम गली ताम में दो न समा उसमें दो नहीं आती।
- 48:26एक ही बचेगा और देखो एक कैसे बचेगा अगर तुम नाम को ऐसे जप सकते
- 48:34हो, जपने वाला ना बचे और जिसका नाम ले रहे हो वह भी ना बचे सिर्फ
- 48:42क्रिया बचे, नाम बचे इसलिए कहा है।
- 48:46राम से बड़ा राम का नाम नाम तो मैं पहुंचा देगा, लेकिन
- 48:57पहुंचायेगा कैसे? ये सली का आना चाहिए इसलिए मैंने
- 49:04कहा। रोने वाले तुझे रोने का सलेका ही
- 49:07नहीं अस्क पीने के लिए है या के बहाने के लिए नाम ही बचे इसलिए
- 49:20नाम महत है। कहने वाले ने तो ठीक किया, तुम
- 49:24समझ पाए। अंत में निकला यह परिणाम सब जगह
- 49:35भूँक भूँक लिए टकरें मस्त मंदिर, मस्जिद, गुरद्वारे मस्जिद सब जगह
- 49:40जाए चर्च क्या परिणाम निकला? राम से बड़ा राम का नाम नाम बड़ा
- 49:49है लेकिन ये होगा कैसे? दो न बचे भेद न बचे एक ही बचे
- 50:00क्या बचे न नामी बचे? ना नाम को जपने वाला बच्चे खो
- 50:07जाए, सब विलीन हो जाए वास्तुभूत हो जाए सिर्फ नाम बचा एक्शन
- 50:20तुम्हें कंप्लीट्ली एवोल्व कर दे। शब्द गहराई से सुनिएगा तो अगलापन
- 50:32नहीं आएगा, शब्द गहरे में उतर जाएं अक्शैन तुम्हें एबोलिस कर
- 50:43दे, एक्टर को एबोलिस कर दे अक्शैन।
- 50:48कर्म कर्ता को अववालिश कर दे मात्र कर्म ही बचे जाए करता न बचे
- 50:59मात्र कर्म ही बचे करने वाला, न बचे करता न बचे।
- 51:09अगर ऐसा तुम कर सकते हो नाम ऐसा ही जपा प्रहलाद में ऐसा ही जपा तो
- 51:22फिर कोई आपत्ति नहीं, कोई बात नहीं, नाम जल्दी ही पहुंचा देगा।
- 51:30मैं बात करता हूँ इन मूर्खों के जो तुम्हें भगाती हैं ठहराते मैं
- 51:41तुम्हें कहता हूँ सलीका बैठीणा कैसे है, बैठी तो बुढ़िया भी है।
- 51:49रथ के ऊपर लेकिन क्या वो ठीक बैठे राजा ने बना दी उसे तरस खाके बैठ
- 52:01जाओ इतना बोझा तुमसे डोया नहीं जाएगा इतनी वृद्धा हो ऊपर से
- 52:07कमजोर। गरीबी तो रस पे बैठ जाओ, मैंने
- 52:12उधर जाना ही है वैसे भी वो तुम्हारा बाहर उठाता ही है और
- 52:26वैसे भी बाहर उसके ऊपर है जब तुम रस के ऊपर बैठ गए।
- 52:31तो गठ्ठल का भार उसके ऊपर है। तुम्हारे शरीर समेत भार उसके ऊपर
- 52:35है। थोड़ी समझदारी भर दो।
- 52:41इस गठ्ठल को उठाकर जीस रथ पे बैठे उस रथ पे रख दो।
- 52:48रथ पे भार उतना ही रहेगा। तुम रथ की फिक्र न करो, वह बड़ा
- 52:52बली है, एह परवर दीगार रहमो करी। विशाल विराट।
- 53:10शक्तिमान, सर्वशक्तिमान्, सर्वव्यापक, सर्वज्ञ वो सब
- 53:16संभालेगा तुम अपना भार उसको संभालने वाले बनो कितने कितने
- 53:23भाग्यहीन हो तुम। भार उठाने वाला कहता है ये भार
- 53:30मुझे दे दे सर्वधर्माण प्रतिज्ञ माँ मैं कम शरण वृक्ष और तुम हो
- 53:40के भार को डोए ही चले जाते हो गिरते टूटते फिरते वृद्ध, अशक्त,
- 53:46बीमार। तुम अपना भार कहते हो नहीं ये तो
- 53:52पाप हो जाएगा पाप तो अब कर रहे हो तुम बोझा खुद उठा के पाप कर रहे
- 54:00हो क्योंकि तुम्हें पता नहीं ये बोझा अंतिम पड़ता तो रथ पे ही है।
- 54:09तुम्हारा डोना गठड़ी का सिर पे व्यर्थ है, ढोते रहो समझदार इसको
- 54:22ही मूर्ख कहते हैं। कबीर कहते हैं सभी सयाने एक मत
- 54:31सभी सयानों का एक मत अपने सिर का गट्ठर वैसे भी उसके रथ के ऊपर है
- 54:41तो उसके रथ पे ही रख दो, मूर्खा अपनों अपनी।
- 54:46लेकिन मूर्ख हैं की अपना भार खुद ही ढोते चले जाते हैं और ये
- 54:51मोटिवेशनल स्पीकर ये सर लोग तुम्हें कहेंगे 999 आई एस वै ना
- 54:57यू बीएस सी करना, राज़ करना, राज़ किसपे करना भाई।
- 55:05अपनी वासनाओं तक वे राज़ नहीं कर पाए, जो कि तुम्हारी आँखों के
- 55:11सामने सदा तुम्हें सताती रहती है। लोगों पर क्या खास राज़ करोगे?
- 55:22वासनाई तुम्हे उलझाई फटती वासनाई तुम्हे घुट घुट के जीने पर विवश
- 55:29करती हैं और तुम कहते हो राज़ करना है इसको राज़ कहते हो तुम?
- 55:41राज़ ऐसा होता है क्या? राज़ तो बड़ा मजेदार होता है,
- 55:50राज़ करता है संत और राज़ करना सीखाता है संत।
- 56:02माँ वेकम शरण पर मुझे एक ही शरण में आ जाना मैं तुझे भारत से
- 56:09मुक्त कर दूंगा। वैसे भी भारत मेरे ऊपर है आहम तो
- 56:13हम सर्व पापे भवमुख स्वामी माँ सुचह वैसे भी भार मेरे पे है।
- 56:21इस गट्ठर को सिर से उठाकर नीचे रख देगा तो कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 56:27बस इत्ता सा है मूर्ख अपनों अपनी सभ्य सयाने एक मत कबीर कहते हैं
- 56:33सयानी गट्ठर को उतारते हैं और रथ पे रख देते हैं।
- 56:40तुम भजन तो बड़े खाते हो, मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है।
- 57:01मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा करते हो तुम।
- 57:17कन्हैया करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है है मेरा, आपकी कृपा
- 57:35से। सब काम हो रहा है लेकिन अपना भारत
- 57:49अपना। ये भार ही हैं तुम्हारी वासनाएँ
- 58:02ये घड़ी 5,00,000 की चाहिए। समय वही बताती है, समय तो मोबाइल
- 58:08ही बता देता है, घड़ी की आवश्यकता का बड़ा ऐक्युरेसी से बताता है और
- 58:15मोबाइल भी तुम्हें नया चाहिए। और वो भी एक विशेष क्वालिटी का
- 58:20चाहिए और केहनी भी। भागवत कथा है।
- 58:27लोगों को बुधु ही बनाना है कचरा लेकिन तुम्हें पता नहीं।
- 58:34एवरी एक्शन देर इस एन इक्वल एंड अबाउट डायरेक्शन, ये तुम पे ही
- 58:39आएगा वापस प्रत्येक तुम्हारा कर्म प्रतिकर्म बनकर तुम्हारे पर ही
- 58:45गिरेगा जब गिरेगा तुम रहोगे सर धन धन पछताओ के आज 6 दिन पाछे गए
- 58:52गुरु से किया ना हेत। बांची जाओ कौन कहता है तुम
- 58:59अष्टावक्र गीता न बांचो तुम निषेध न बांचो तुम कृष्ण को न बांचो
- 59:04बांचो लेकिन वक्त आएगा जब ये तुम्हारे किए हुए कृत्य।
- 59:14वासनाओं के कारण किए हुए कृत्य मेरा विशाल साम्राज्य है।
- 59:20मेरे विशाल फ्लावर्स हैं विशाल लोग जयजाकार करें कितने लोगों की
- 59:28जयजाकार हुई कौन रहा है? सब बीत गए।
- 59:35बीते दिनों की बातें हैं, कोई न रहा तुम भी नहीं रहोगे।
- 59:44अच्छे दिन पा अच्छे गए वो अच्छे दिन थे बीत गए।
- 59:53गुरु से किया ना हेत अपने ही भीतर बैठे हुए गुरु से मिलन नहीं किया,
- 1:00:00अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई, खेत बना दो किताबें।
- 1:00:11भरमा दो लोगों को नाम प्रसिद्ध कर दो, जय जयकार करवा लो, अपने
- 1:00:20शब्दों से, अपने ज्ञान से, अपनी समझ से लोगों को सुनिश्चित कर दो,
- 1:00:29जय जयकार करवा लो। लेकिन ध्यान रखना जिंदगी बड़ी
- 1:00:33छोटी है। मार कर मार कर गोली गहरा ली
- 1:00:47जाएगी। बे मुहूर्त के उठा ली जाएगी जब
- 1:01:02तेरी डोली निकाली जाएगी। बे मुहूर्त के उठा ली जाएगी जब
- 1:01:17तेरी जर सिकंदर का यहीं पर रह गया।
- 1:01:27जो कमाया था यहीं रह गया लाखों गर्दनी कांटी उनका धन छीन लिया।
- 1:01:38जर सिकंदर का यहीं पर रह गया और गलती में मत रहना सिर्फ सिकंदर का
- 1:01:46ही। यहाँ रह गया सभी का दर्द यहाँ रह
- 1:01:49जाता है मरते दम लुक मान भी ये कह गया ये तुम दावे करते हो ना तो
- 1:02:01मुझे सुन लो आचार्य का संघ हो। गीता के रंगों में क्या बात है?
- 1:02:15आनंद ही आनंद है, आओ मिल जाओ होलो ऑनलाइन पर।
- 1:02:27ये मूर्हताएं तुम पे ही गिरेंगी 1000 सिकंदर का यहीं पर रह गया
- 1:02:40मरते दम। लुक मान भी ये कह गया क्या कहता
- 1:02:48ये घड़ी? ये घड़ी हर गिज नटाली जाएगी।
- 1:02:58ये घड़ी हर गिज नटाली जाएगी। जीसको मृत्यु दिख जाती है,
- 1:03:12ट्रांसफॉर्मेशन के भीतर हो जाता है।
- 1:03:16वह फिर ऐसी बेहूदा बातें नहीं किया करता।
- 1:03:24गीता एक बार बोलती गई। कृष्ण ने अपनी बोली अष्टावकर ने
- 1:03:32अपनी बोली अपनिषदों ने अपनी बोली तुम बीच में क्यों फंसते हो?
- 1:03:44किसने कहा? क्यों फ़ोन डायल सजाते हो?
- 1:03:49किसने कहा? बाबा?
- 1:04:00नाम नाम को इस। तरह से अगर जपोगे।
- 1:04:08नाम? ही रह जाए नामी।
- 1:04:10खो जाए। नाम जपने वाला खो जाए इसको जप
- 1:04:15यज्ञ कहते हैं। कृष्ण उस यज्ञ की अग्नि में
- 1:04:18भस्मिभूत हो जाए जप करने वाला है। तुम अपने आप को आहूत।
- 1:04:26नहीं करते, तुम नारियल को आहूत कर देते हो।
- 1:04:28हवन सामग्री को आहूत कर देते हो, कपूर को आहूत कर देते हो, देसी घी
- 1:04:33को आहूत कर देते हो, खुद आहूत नहीं होते, खुद को बचा लेते हो,
- 1:04:37जबकि खुद ही ने आहूत होना था। सामग्री तो चाहे बचा।
- 1:04:42लेते हो उनके विचारों? का क्या कसूर?
- 1:04:47तुम सामग्री को आहूत करते हो खुद। को बचा लेते हो और प्रगाढ़ हो।
- 1:04:53जाता है में नाम जपो, ऐसी है ऐसे। ध्रुव प्रहलाद, जब यो हरि जैसे
- 1:05:15नाम जब ऐसे ऐसे। ध्रुव पे लादु जप्योहार जैसे नाम
- 1:05:35जपो हे धन्यवाद। जातिस।
- 1:05:49पा हुक्म मना जातिस पावै हुक्म मनावै।
- 1:06:09इस बेड़े को पार लगावै इस बेड़े को पार लगावै।
- 1:06:27नाम जपा। से ऐसे ऐसे ध्रुव प्रहलाद जब योहर
- 1:06:42जैसे। जो तो।
- 1:06:46दुपावे हुकुम मनावे। इस बीड़े।
- 1:06:51के ऊपर बैठ जाओ। उसके हुकुम में चलो पार हो जाओगे।
- 1:06:57निश्चित इसे। ही नाम कहते हैं।
- 1:07:05धन्यवाद।