Latest / Baba ji Vijay Vats / क्या अविमुक्तेश्वरानंद असली शंकराचार्य हैं? बाबा जी की आँखों देखा प्रमाण!! Must Watch
Transcript
- 0:05अभी हाल ही के दिनों में जो प्रयागराज संगम पर मौनी अमावस्या
- 0:16के दिन अभिमुक्तेश्वरानंद अपने शिशुओं सहित स्नान करने गए थे।
- 0:25वहाँ एक ववाद खड़ा हुआ, बच्चों की चोटियां फाड़ ली गईं, पीटा गया
- 0:39बड़ी बुरी तरह से यह दुर्भाग्य। और ऊपर से स्वामी मुक्तेश्वरानंद
- 0:53अभिमुक्तेश्वरानंद जी को नोटिस दिया गया कि तुम।
- 1:02शंकराचार्य आइए हम बात को साफ करते हैं, क्योंकि मेरा अनावश्यक
- 1:10था स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जीके गुर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वत को
- 1:24मैं अच्छी तरह से जानता हूँ। जब 2014 में इन्होंने साईं बाबा
- 1:35की फोटो को तस्वीर को गंगा में गहरा दिया था।
- 1:43मंदिर से उखाड़कर। तो मैंने वहाँ जाकर इसका विरोध
- 1:48किया था। मैंने स्वरूपानंद से कहा कि जी
- 1:58आपने ठीक नहीं किया, यह एनलाइटन पसंद है और यह आपने ठीक नहीं
- 2:08किया। तो स्वरूपानंद जी सरस्वती कहने
- 2:15लगे, यह है हमारी पद्धति के अनुकूल नहीं है।
- 2:27लेकिन मैंने अपना विरोध जताया था। स्वरूपानंद महाराज शरीर से बड़े
- 2:38भारी थे। उनका जब देहांत हुआ, मुझे सूचित
- 2:45किया गया। रविवार का दिन था।
- 2:50सांझ के 4:00 बजे के करीब का वक्त था।
- 2:5411 सितंबर को मुझे सूचना दी गई के महाराज स्वरूपानंद जी सरस्वती पर
- 3:04लोग गबन करते हैं। हम एनलाइटन पर्सन किसी वक्त किसी
- 3:16व्यक्ति की मृत्यु पर हाजिर हुआ ही करते हैं।
- 3:23ये हमारी परंपरा है तो उस वक्त क्योंकि मैं 28 अक्टूबर।
- 3:321985 को एनराइटिंग हो गया। मेरा कर्तव्य था और मैं वहाँ 11
- 3:41तारीख को गया। सांझ करीब 5:00 बजे उस वक्त में
- 3:46एस्ट्रल ट्रैवलिंग करने का बड़ा शौकीन था।
- 3:51उस वक्त मैंने यूट्यूब पर अपने चैनल पर बोलना भी शुरू कर दिया
- 3:56था। मैं गया तो मध्यप्रदेश में इनके
- 4:03आश्रम में इनकी देह अमृता अवस्था में पड़ी थी।
- 4:10मैंने प्रणाम करके वापस आ गया। अगले दिन इनको समाधि दी जाने से
- 4:20समाधि के वक्त में सारा वक्त वहाँ मौजूद रहा।
- 4:23करीब 3:00 बजे से लेके 4:00 बजे तक की समाधि का 4:15 बजे तक समाधि
- 4:27का वक्त था। अब आज यह विवाद है कि अभी
- 4:39मुक्तेश्रानंद शंकराचार्य ने। तो 11 सितंबर को शाम स्वरूपानंद
- 4:54जी महाराज का पार्थिव श्री दर्शनार्थ रख दिया गया।
- 4:59उनके आश्रम में नरसिंहपुर में। परशुराम कुंड आश्रम, नरसिंहपुर,
- 5:14मध्य प्रदेश। लोग आते गए, पुष्प अंजलि अर्जित
- 5:20करते गए, अर्पित करते गए और जाते गए।
- 5:26जब उन्हें अंतिम विदाई दी जा रही थी तो एक मुश्किल आती है की उनका
- 5:33शरीर बड़ा भारी था उनको उठाने में करीब।
- 5:3710 लोगों का सहारा लेना पड़ा क्योंकि उनका वज़न करीब डेढ़
- 5:42कंटेंट था। स्वरूपानंद सरस्वती
- 5:46अभीमुक्तेश्वरानंद के गुरु अभीमुक्तेश्वरानंद के गुरु?
- 5:58एक मटके शंकराचार्य थे भर के दो मटके शंकराचार्य थे, एक तो शारदा
- 6:03पीठ शारदा पीठ के स्वामी सदानंद सरस्वती, शारदा पीठ द्वारका।
- 6:20और अभिमुक्तेश्वर हैना ज्योतिस्मित को घोषित किया गया
- 6:32उनकी मौखिक आखिरी बिल वसीयत। क्योंकि बहुत करीबी शिष्य थे।
- 6:42अभिमुक्तेश्वरानंद और सदानंद भी बहुत करीब शिष्य थे।
- 6:50उनके एक और मज़े की बात करता हूँ। ये जो महाराज स्वरूपानंद जी
- 7:03सरस्वती, इनको भी गद्दी दोनों ही विरासत में मिले ज्योतिषपीठ
- 7:13बद्रीनाथ उत्तराखंड। तो मौखिक विल वसीयत में वहाँ
- 7:24मौजूद था अश्वरीय रूप से महा कौन कौन थे वसीयत किसने पढ़ी, वसीयत
- 7:35पढ़ी स्वामी? मुक्तेश्वरानंद ने स्वयं जब
- 7:41मृत्यदेह उनके सामने पड़ी थी उस जगह पे जहाँ उनकी मृत्यदेह पड़ी
- 7:53थी, उस आश्रम के भीतर नरसिंहपुर में।
- 8:03ये वसीयत पड़ी मौखिक रूप से अविमुक्तेश्वर्यमत है सदानंद को
- 8:13और स्वयं अविमुक्तेश्वरानंद को घोषित किया और वह।
- 8:21बाकी शिक्षकगण भी मौजूद थे। बहुत से शिक्षकगण मौजूद थे।
- 8:30उनकी मौजूदगी में मेरे सामने यह विल पड़ी है।
- 8:37उरी के शंकराचार्य वहीं थे निश्लानंद जी।
- 8:40पूछिए ज़रा वो तो जिंदा है शृंगेरी मटके शंकराचार्य वहाँ
- 8:52मैंने देखे नहीं या मुझे देखे, अब मैं इसके बारे में कुछ नहीं कह
- 8:58सकता लेकिन उनका किसी तरह से। कोई ऐतराज नहीं था, क्योंकि जब
- 9:05वसीयत पढ़ रहे थे अभिमुक्त श्रावण तो वे वहाँ मुझे दिखे ही नहीं,
- 9:13लेकिन कोई आपत्ति भी नहीं थी उनकी तरफ से।
- 9:15इसलिए सब ने मौन स्वीकृति में सर हिला दिया।
- 9:18श्रद्धा नहीं तो वहाँ बैठे थे। शायद उस वक्त के 11 सितंबर 2022
- 9:29के अखबारों में आप इन्हें ढूंढ सकते हो।
- 9:32मेरी दृष्टि में आपको नवभारत टाइम्स में यह सब मिल जाएगा।
- 9:42मैंने पढ़ा नहीं, लेकिन मेरा अंदाजा है द्वारका गुजरात के भी
- 9:56सरस्वती जी महाराज। स्वरूप पनानजी कृष्ण बौद्ध आश्रम
- 10:07उनके गुरु थे। उनके पास भी इन्हीं दो गद्दियों
- 10:11की शंकराचार्य की बात दोनों गद्दी के।
- 10:23और उनसे ही उत्तराधिकार स्वरूपानंद सरस्वती को मिला था।
- 10:30इससे पहले भी दोनों गदियां एक ही व्यक्ति के पास थीं।
- 10:35स्वामी कृष्णन बौद्ध आश्रम अब देखिए ये जो लोग जिन्होंने कुछ
- 10:47देखा नहीं, कुछ जानते नहीं यह विवाद खड़े कर रहे है योगी
- 10:57आदित्यनाथ हठधर्मता कर रहे है। इतना हठ अच्छा नहीं लगता।
- 11:06इनको इतना अनुभव मुझे दिखाई पड़ता नहीं या ये रूचि नहीं रखता।
- 11:13इन्होंने इतिहास की भी कोई ज्यादा खबर नहीं लगती।
- 11:15मुझे कृष्ण बोधायश्रम से ये गतियाँ गई महाराज स्वरूपानंद जी
- 11:27महाराज उदय के बड़े भारी थे। अंतिम समय में बहुत वर्षों तक वो
- 11:32चले एक ही स्थान पर बैठे रहे। लेकिन एनलाइटन पसंद है तो जब
- 11:45इन्होंने 2014 में जून की कोई तारीख थी मुझे याद।
- 11:58साईं बाबा की तस्वीर मूर्ति को गंगा में घरा दिया।
- 12:02हरिद्वार में तो मैं इनके पास जाकर आपत्ति दर्ज करा के आया था
- 12:08कि आपने ट्वीट नहीं किया। अब द्वेष फैला रहे हैं और किसी
- 12:14संत व्यक्ति को। उस स्थल पर पहुंचे व्यक्ति को यह
- 12:18शोभा नहीं देता तो उन्होंने मुझे दो शब्दों में बात खत्म कर दी थी।
- 12:25यह हमारी परंपरा के अनुकूल है। हम किसी मानव की किसी मंदिर में
- 12:33पूजा नहीं कर सकते। मैंने कहा यह मानव का?
- 12:38यह तो एनलाइटन पर्सन है, यह तो उस स्थान पे पहुँच गए हैं जैसे बुद्ध
- 12:43हैं, वैसे ही हैं। खैर, पुरानी बात है, 2022 में
- 12:51इनका देहांत और हमें जाना पड़ता है।
- 12:55जब किसी की मृत्यु हो तो एनलाइटन पर्सन को वहाँ जाना होता है और
- 13:01मैं सारे कार्यक्रम में वहाँ मौजूद था शिंगेरी मटके शंकराचार्य
- 13:13मुझे नहीं दिखें, शायद हूँ। अंत समय तक मैं अंत्येष्टि
- 13:21महासमाधि तक मैं वहीं था और 4:15 बजे के बाद आया हूँ।
- 13:2712 तारीख को 12 सितंबर 2022 को। उस वक्त तक मैं बंद कमरे में रहता
- 13:39था। किसी को आने जाने की परमिशन नहीं
- 13:42थी और मैं शरीर से बाहर होता था और यह शरीर देख रेख में रहता था।
- 13:50उस वक्त मुझे एस्ट्रल ट्रैवलिंग का बहुत शोक था।
- 13:53मैं इस बात का साक्षी हूँ और साक्षी मैंने आपको ये बता दिया।
- 14:03पूरी के संकरचार निश्चलन जी महाराज वहीं थे जब यह मौखिक।
- 14:13विरासत वसीयत पढ़ी जा रही थी के सदानंद एक मठके और
- 14:22अविमुक्तेश्वरानंद दूसरे मठके ज्योतिष मठके बद्रीनाथ और श्रद्धा
- 14:29मठके गुजरात के श्रद्धानंद सरस्वती।
- 14:34इनको घोषित किया जाता है। सबने मौन स्वीकृति की।
- 14:39वहाँ तालियां बजते हैं। राजनीतिक यह घोषणाएं मौन स्वीकृति
- 14:46होती है। उनकी लाश बड़ी है, अभी दफन नहीं।
- 14:53उनकी मौजूदगी में यह घोषणा की गई और वह निशला न भी बैठे थे, पूछ के
- 14:59आप उनसे निशला न तो जिंदा है, अभी शरीर ने ही छोड़ा है अभी मुक्ति
- 15:11शरण चलो इनवाल्व है सदानंद तो इन्वाल्व नहीं है।
- 15:15सदानंद का नाम ठीक है। इन्होंने इंडिया पहले दो मठ का एक
- 15:22मत होता था। शंकराचार्य अब दोनों मठ के दो
- 15:26शंकराचार्य हो गए। विभक्त हो गया।
- 15:32सबको अलग अलग जिम्मेवारी मिली। कई बार ऐसा होता है।
- 15:35योग्य व्यक्ति नहीं मिलता तो एक व्यक्ति को दो दीये जलाने होते
- 15:39हैं। ऐसा काल आया होगा और यह
- 15:46शंकराचार्य के पद वगैरह। बड़े अस्तव्यस्त रहे हैं।
- 15:54गुलामी काल में इनकी पूरी परंपरा अगर मैं आपको बताने लग जाऊं तो
- 16:00आपके वोक्स सख्त हो जाएंगे। तो गुलामी के काल में यह बड़ा
- 16:10अस्तव्यस्त था। इसी कारण से कोई योग्य व्यक्ति
- 16:15नहीं मिला होगा। तो कृष्ण बहुधाश्रम को ये दोनों
- 16:20का शंकराचार्य नृत्य किया गया। वह भी अनलाइक्ड पर्सन थे।
- 16:31उसके बाद इन दोनों को गलतियाँ थी। सदानंद को अब ये कहते हैं कि।
- 16:39आप नहीं हो अब इसका साक्षी बोल इसका साक्षी मैं स मैंने खुद ये
- 16:51सारा कार्यक्रम पहले लिखा मैं प्रणाम करके आया हूँ कि पार तक
- 16:56देखो। जब वो दर्शनार्थ रखी गई थी।
- 17:03बिलकुल लोग कहेंगे कि ये आपने करवाया है।
- 17:06आपके आपके हाथ में सारी व्यवस्था है योगी आदित्य नाच।
- 17:15आप कहते हो की आप हो ही नहीं शंकराचार्य कौन, कैसे शंकराचार्य
- 17:22इसका प्रत्यक्ष प्रमाण आप शंकराचार्य पुरी के शंकराचार्य से
- 17:27कुछ वो जीवित है। अभी उनके सामने वसीयत पड़ी गई और
- 17:33पढ़ने वाले स्वामी। अभी मुक्तेश्वरानंद स्वयं थे और
- 17:37उनकी मृत देह सामने पड़ी थी। तमाम लोगों के बीच में मौखिक रूप
- 17:52से ऊंची आवाज़ में अभी मुक्तेश्वरानंद ने यह विरासत पड़ी
- 17:57बसियत पड़ी। के मेरे बाद शारदा पीठ, गुजरात
- 18:08सदानंद सरस्वती और ज्योतिष पीठ के अध्मुक्तेश्वर।
- 18:19बद्रीनाथ बिल्कुल स्पष्ट घोषणा और खुद ही खुद अभी मुक्ति शुरानंद
- 18:27पड़ रहे थे। ऐसा नहीं कि सदानंद पड़ रहे थे,
- 18:30अभी मुक्ति शुनर। शंकराचार्य वहाँ मौजूद नहीं थे।
- 18:41जा मुझे दिखाइयो बैठ जावे, बस सिर्फ 98 साल की आयु में इनका
- 18:53देहांत। मेरी दृष्टि में शायद इनका जन्म
- 19:011924 का था। जहाँ तक मैं समझता हूँ और 2022
- 19:07में इनका इंतज़ार हुआ। 11 सितंबर को और 12 सितंबर को
- 19:14इनके अंतिम अरदास के लिए समाधि दी गई।
- 19:19को महा समाधि जो व्यक्ति एनलाइटन हो जाता है उसको समाधि दी जाती
- 19:24है। अभी मैंने भी अपनी समाधि साथ में
- 19:28कवर खुलवा ली है। आखिर देख लो अगर कोई।
- 19:31देखने का होता है ऐसी होती है खबर जलाया नहीं जाएगा क्योंकि उस
- 19:41एनलाइटनमेंट के क्षणों में जो अमृत जीस मात्रा में पी लिया गया
- 19:47समुद्र के समुद्र पी लिया गया। वह लाखों लाखों सालों तक बिखरता
- 19:56रहेगा, इवैपरेट होता रहेगा और उसके गरीब बैठने वाला व्यक्ति और
- 20:03उसके आसपास का एरिया तीर्थ बन जाता है।
- 20:07इसलिए उसके शरीर का दहन नहीं करना होता।
- 20:12शरीर तो वशु का भी दहन नहीं करना चाहिए था, लेकिन मजबूरी थी।
- 20:17मैं आपको ठीक से नहीं बता पाऊंगा। उनकी मजबूरी थी, वो डर रहे थे कि
- 20:23कहीं शरीर का पोस्टमॉर्टम न हो जाए।
- 20:27फिर बहुत फंसते स्वामी अमृत्यों जैसे बहुत लोग फंसते खैर छोड़ो उस
- 20:32बातों को ये प्रसंग भी नहीं। ऐसे व्यक्ति के शरीर को जलाना
- 20:40नहीं चाहिए क्योंकि शरीर का बहुत बड़ा शरीर का भाग।
- 20:45उनके रोम को भी जाते हैं उस अमृत को जो झड़ता रहता है लाखों सलोतक
- 20:53चलो। इन्हें भी दफन कर दिया गया।
- 20:58साधना सफल बड़ा शानदार है। मध्यप्रदेश के व्यक्ति इस स्थान
- 21:03पर जाकर साधना कर सकते हैं। अब विवाद इस बात का खड़ा है और जो
- 21:10विवाद करने वाले लोग हैं वो अति मूर्ख मूड है।
- 21:15जिन्हें कुछ भी तो पता नहीं ना तो इतिहास का पता है ना एनलाइटनमेंट
- 21:19का पता है ना शंकराचार्य की पाध्वी का पता है ना शंकराचार्य
- 21:23की। ढंग का पता है कौन सा शंकराचार्य?
- 21:25उसने चारों व्यवस्थाएँ कैसे की? उत्तर पूरब, पश्चिम दक्षिण कुछ
- 21:33नहीं पता है। ऐसे लोग रवि मुक्तेश्वर आनंद का
- 21:41ये खरीदे हुए लोग हैं। बाड़े के चट्टू हैं, न कोई ज्ञान,
- 21:48न अपने भेतियों से, न साधना की। जहाँ तक सवाल है, अभी मुक्तेश्वर
- 22:00आनंद का, सदानंद सरस्वती का ये बिलकुल शंकरे जा रहे है कन्फर्म।
- 22:10और इनकी घोषणा जब हो रही थी भरे दरबार में घोषणा हो रही थी उस
- 22:16वक्त आई वॉज़ प्रेशर दे अरे ऐट दट मोमेंट।
- 22:28कोई व्यक्ति इस मुगालते में न रहे के अभी मुक्तेश्वरानंद घड़े घड़ाए
- 22:38किसी के बनाए हुए मुखौटा लगा के बैठ गए हैं ने यह बिल्कुल।
- 22:46इन्होंने बड़ी सेवा की है, उनके करीब रहे हैं और स्वामी
- 22:51स्वरूपानंद सरस्वती को मैं बहुत अच्छी तरह से करता हूँ।
- 22:56मैंने आपको बताया भी मैंने ऐतराज भी किया जब इन्होंने।
- 23:02साईं बाबा की मूर्ति को उखाड़ कर हरिद्वार के एक मंदिर से और गंगा
- 23:07जी में भटक दिया था और दुर्भावना के हिसाब से भटक दिया था।
- 23:12तब मैंने एतराज जताया था कि ये आपको नहीं करने से ही आज कैसे
- 23:17व्यक्ति को यह शोभा नहीं है। खैर, इन बातों को छोड़िए, आज
- 23:24हमारा विषय है कि क्या अभिमुक्तेश्वरनंद जिनके ऊपर ऐसा
- 23:30करूर आघात हो इज्जत हद तक की गई? कहते हैं?
- 23:36उनका छतर तोड़ दिया गया। अखिलेश के जमाने में तो इन्हें
- 23:45पीटा पे दिया था। वो वक्त हुई मुझे याद है लेकिन
- 23:51छोटे छोटे बच्चे हैं, गुरुकुलम में पढ़ने वाले बच्चे हैं।
- 23:57संस्कृत का अध्ययन करने वाले बच्चे बटुक उनको पीटा गया और बुरी
- 24:05तरह से मारा गया। आज ये दुनिया इतनी दुखी जो है ना।
- 24:16सुबह से शाम तक मेरे पास तांता लगा रहता है और मैं किसी को आने
- 24:20नहीं देता और मेरे दो ही अलफ़ाज़ होते हैं।
- 24:27जिसने किया है वो भरे भागिन आप कर तो देते हो?
- 24:35लेकिन जब भोगना पड़ता है तो फिर किसी संत के शरण में जाते हो कि
- 24:38भोग तो बोलेंगे बह, क्यों भोग लेगा?
- 24:43जब किया आपने प्रकृति का ऐसा नियम ही नहीं है, जो करेगा वह करेगा।
- 24:52फिर संत के द्वार पर आप संतो के द्वार को खटखटाते हो इससे बेहतर
- 24:57यही नहीं कि आप पाप करना छोड़ दो, संचय करना छोड़ दो।
- 25:01क्यों गरीबों को मार रहे हो, भूख से तड़पा रहे हो?
- 25:05क्यों ठंडी से मरे जा रहे हैं तो? अपनी जमीन जायदादों को साथ लेके
- 25:12जाना है कोई कण भर लेके गया है आजतक आप बेहोश हो आपको होश नहीं?
- 25:25खैर आज का मेरा प्रवचन सांझ में रिकॉर्ड कर रहा हूँ।
- 25:29यद भी मैं इस वेला में कभी रिकॉर्ड नहीं किया करता लेकिन
- 25:35मजबूरन में से रिकॉर्ड कर रहा हूँ क्योंकि उन्हें कोई साक्षी चाहिए
- 25:43वो ज़रा दिखिए ये बताओ कि अगर ये मामला कोर्ट में जाता है, कोर्ट
- 25:49को क्या पता? की स्वरूपानंद जी सरस्वती ने
- 25:58इन्हें अपना शंकराचार्य गद्दी का घोषित किया था।
- 26:12दो गद्दी के दो अलग अलग शंकराचार्य घोषित किए थे, वो भी
- 26:16जीतेगी सदानंद सरस्वती। तो मेरे ख्याल में शायद रिश्ते
- 26:23में भी थे, जहा तक मुझे लगता है लेकिन ये उनके बड़े प्रिय शिष्यों
- 26:32में से थे। मुखर रहे हैं सदा से पॉलिटिकल
- 26:37वार्ता बड़ी? मैं इनके शब्दों से सहमत हूँ या
- 26:46ना हूँ, यह बाद की बात है। बात आज ये है कि क्या ये शंकरह
- 26:53चाह रहे हैं भी की नहीं? ऑथेंटिक हैं या आर्टिफिशियल।
- 26:57नहीं, ऑथेंटिक कृत्रिम नहीं ऑथेंटिक है।
- 27:03और इन्होंने उस विल को बढ़ते हुए मैंने सुना है उस वक्त जब पार्थिव
- 27:11शरीर स्वामी स्वरूपण की सरस्वती का सामने पड़ा।
- 27:22और शिवराज सिंह चौहान परमहंस गंगा आश्रम नरसिंहपुर में इन्हें
- 27:30पुष्पांजलि अर्पित कर रहे थे। इनका पार्थिव शरीर आश्रम के
- 27:36वितरित था। वहाँ तो ये मैंने देखे ही नहीं
- 27:40कहीं थे भी नहीं। मध्यकाल में उत्तर भारत में बड़ा
- 27:47अस्थिर समय आया तब शंकराचार्य की उपाधियाँ खतरे में थी।
- 27:57उस वक्त हम गुलाम मिथ हैं। गुलामी के वक्त का यह है वक्त
- 28:08बड़ा खतरनाक ना धर्म बचा ना आजादी बची उस वक्त क्या कुछ किताबें
- 28:16वगैरह विकृत कर दी गईं? सो, बद्रीनाथ उत्तराखंड के
- 28:23शंकराचार्य हैं। अभिमुक्त शरणत मैं स्टेम पर गाता
- 28:31हूँ, उस पर मेरे सामने यह बिल पड़ी गई पार्थिव देह के आगे।
- 28:3912 सितंबर 2022 को परशुरामकुंडा आश्रम में यह वसीयत पढ़ी गई।
- 28:51अभी मुक्ते शरण जी द्वारा। मैं आपको आँखों देखी बात कहना
- 29:02चाहता हूँ, यह कोई शास्त्रीय प्रमाणन यह प्रमाण शास्त्रों में
- 29:13दर्ज हो जाएगा। और मैं उस वक्त वहाँ मौजूद था
- 29:17अश्वरीय रूप में मौजूद 12 सितंबर को 2022 उस दिन शायद सोमवार शायद
- 29:29कह रहा हूँ क्योंकि उससे पहले 11 सितंबर जब मुझे यह सूचना मिली।
- 29:36तब रविवार का दिन था 4:15 बजे के करीब चार 4:15 बजे करीब मुझे
- 29:47सूचना दी गई और इतने ही बजे करीब तीन से लेके 4.25 चार 4:15 बजे तक
- 29:55इनका अंतिम। जो भूमिगत इनको साधारण दी जाती है
- 30:05बैठाया जाता है। पद्मासन इनको दिया नहीं जा सका।
- 30:12कोशिश तो की थी लेकिन इनको सिद्धासन में ही बैठाया गया था।
- 30:17क्योंकि देह बड़ा भारी ज्यादा ना कहता हुआ आज क्योंकि विषय यही है।
- 30:29आपके कहने से कुछ नहीं होगा क्योंकि उस वक्त का गवाह कोई ना
- 30:36कोई तो होता ही है। स्वामी मिश्रानंद जी बिल्कुल वहीं
- 30:42बैठे थे। गंगाजल व पंचामृत से पहले इनको
- 30:49देय को स्नान किया गया। फिर इनके कश्याय, वस्त्र, दंड,
- 30:54कमंडल, रुद्राक्ष वगैरह का। फिर वेद मंत्र उपनिषद,
- 30:58रूष्ट्राध्याय रूष्ट्राध्याय शंकराचार्य स्रोत पढ़े गए।
- 31:08फिर इनको समाधि दी गई। शरीर भारी होने के कारण पद्मश्री
- 31:12नहीं बैठा सके। तो सिद्धार्थन में इनको समाध्यक्ष
- 31:16किया गया, सो व्यर्थ की डिस्कशन वगैरह में मत पड़े, क्योंकि आपको
- 31:26इस गुरु शिष्य परंपरा का कुछ पता नहीं है।
- 31:31इसको मैं जानता हूँ और मैं इसका। आँखों देखा प्रमाणिक व्यक्ति हूँ,
- 31:38यह बिल्कुल सत्य है और अभी मुक्तेश्वर आनंद शायद मुझसे कभी
- 31:43मिलेगा नहीं, लेकिन मैं इस बात में मोहर लगाता हूँ।
- 31:55कि ये बिल्कुल सही स्टेम्प्ड शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के
- 32:09शिष्य इसमें कोई भी शंका की बात नहीं है।
- 32:17इसके ऊपर किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं होना चाहिए।
- 32:22धन्यवाद।