Latest / Baba ji Vijay Vats / 28/5/26 - मुक्ति और पुनरागमन का विज्ञान: क्या मोक्ष के बाद आत्मा दोबारा जन्म लेती है?
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- 0:10ज्योति बाबा जी चृस्पश क्या जो एक बार व्यक्ति मुक्त हो जाता है वह
- 0:32फिर संसार में? कभी लौटने की इच्छा नहीं करता।
- 0:41कृपया इस उलझन को समझाने का कष्ट करें।
- 0:52यह प्रश्न बहुत वर्षों से मेरे दिमाग को झंझोर रखता है।
- 0:59इतनी मेहनत भी करें, फिर मुक्त हो जाएं, फिर उस रस में समुद्र में
- 1:09डूब जाएं और कल को फिर वही कुछ हो।
- 1:17संसार में आने का मन फिर करें। मेरे मन की बात है बापू इसे
- 1:32सुलझाने का। कष्ट करें,
- 1:48उससे पहले एक छोटा सा स्वाद ले ले।
- 1:54बाबा क्या पोस्ट ऑफिस में सीनियर सिटीजंस के खाते में जो पैसा पड़ा
- 2:00है? क्या वह चीफ है?
- 2:09हमारे हरियाणा में कहावत है, बूढ़ा मृजवान हत्या ताईं काम।
- 2:20कहीं भी पैसा पड़ा है है तो वो सरकार का और है वो मोदी के अधीन
- 2:31तुमने कहा पुत्र के भारत माता के पैसे को तो ये नहीं छेड़ेगा।
- 2:40अरे पुत्र जिसने अपनी माता के घणों को नहीं छोड़ा, वो भारत माता
- 2:47की घणों को कहाँ छोड़ देगा? इतनी सिंपल सी क्रोनोलॉजी तुम्हें
- 2:54समझी नहीं होती। जिसने स्वयं की माता की जेवरात
- 2:59चुरा लिया और पिता को अटैक आ गया। ये भारत माता के गहनों को कहाँ
- 3:07छोड़ने वाला है और तुम दुर्दशा नहीं देख रहे हो?
- 3:1212 सालों से अब तो लोग भी बोल रहे हैं।
- 3:17आंकड़े बता रहे हैं कि हमारा रुपया बांग्लादेश से श्रीलंका से
- 3:27पाकिस्तान तक से घर गया है। यह कोई व्यक्ति नहीं कहता, यह
- 3:36आंकड़ा कहता है। डॉलर के मुकाबले रुपया पाकिस्तान
- 3:41से भी ज्यादा घर गया है। टका से भी ज्यादा घर गया है।
- 3:45बांग्लादेश से यह कोई व्यक्ति नहीं बोल रहा है।
- 3:52आइएमएफ वर्ल्ड बैंक कब से? हमें चेतावनी दे रहे थे।
- 3:58जो उनका फर्ज भी था, उन्होंने पूरा किया, लेकिन हम नहीं संभले
- 4:04तो क्या करें? अब अगर आज अमेरिका का कोई व्यक्ति
- 4:14कहता कि हिंदुस्तान तो हमारा ही है।
- 4:19फिर ये पता तो तब चलेगा ना जब यह गद्दी से उतरेगा, नया व्यक्ति
- 4:26आएगा और नया व्यक्ति बीजेपी में से नहीं होना चाहिए क्योंकि वह तो
- 4:33पढ़ा पढ़ाया है। वह इनकी सीक्रेसी को नहीं खोलेगा।
- 4:40कौन खोलेगा कोई अपोजिशन? का?
- 4:46किसी को भी बता? दो।
- 4:50वह इनकी फाइल खोलेगा। सबके।
- 4:55वह पूछेगा ईडी से कि तुम्हारा कोई पर्सन दुश्मनी तो था नहीं, जो
- 5:03तुमने एक व्यक्ति को इतना बदनाम कर दिया।
- 5:07सुबह से शाम तक उसके घर को घेरे रखा।
- 5:10तमाशा बन गया मोहल्लों में। इतना नाम जो बदनाम हुआ इसका मापजा
- 5:20कौन देगा? मैं कहता हूँ जिसके घर के ऊपर छपा
- 5:26पड़े निकला तो कुछ है नहीं निकलता कुछ है ही नहीं या पहले ही चूस
- 5:31लिया गया सब कुछ क्या अब क्या निकलेगा?
- 5:35तुमने कभी गाय को धोते हुए देखा है?
- 5:39जब गाय के थानों में दूध खत्म हो जाता है तो उसको कितने ही भी चलो
- 5:45दूध नहीं निकलता है। अरे भाई अच्छा अच्छा लू पी गया
- 5:49है। अब माता की गणी हूँ कि पोस्ट ऑफिस
- 5:54में माता की गणी हूँ, इसने कर दिया वो रफर कितने देशों में गया?
- 6:06136 देशों में गर्व बिना काम के गया वह क्या लेके गया क्या कारण?
- 6:12पैसे लेके गया था एक जगह अगर जमा करवा देंगे तो एक जगह ढूंढ लेंगे
- 6:20सर और अगर इतनी जगह जाऊंगा सब जगह सबको मित्र बना लूँगा सब को जमा
- 6:26करवा दूंगा कहाँ कहाँ से लेके आओगे तुम?
- 6:33इसलिए मैं कहता हूँ इससे भागने मत देना यह कहेगा मैं तो जाज लेके
- 6:40चला मेरे को तो वहाँ पर काम है और तुम इससे जाने मत देना।
- 6:50सत्ता किसी और को संभाल 212 सालों में तो कुंभ दूसरी बार आ जाया
- 6:56करता है। पता है तुम्हें?
- 6:59कुंभ दूसरी बार हर 12 वर्ष में कुंभ का स्नान फिर फिर से आ
- 7:04जाएगा। कब कुंभ आया था?
- 7:0612 वर्षों के बाद फिर वहीं आ जाएगा।
- 7:17तो पुत्र कोई सेफ नहीं है। जब गर्म हवा चलती है, वह पशुपंछी
- 7:27से लेकर आदमी तक प्रभावित करती है।
- 7:33ना कोई रहा है ना कोई रहेगा खाता पीता रहूंगा बाकी मोदी रहूंगा जीस
- 7:47व्यक्ति के घर में 1200 के करीब इन्होंने रेड डाली सजा हुई दो
- 7:55आदमियों को। 1198 लोगों को मानहानि का मुकदमा
- 8:03दर्ज करना चाहिए। एडी के ऊपर जिन लोगों ने इनकी
- 8:08इज्जत का मजाक बना लिया था, तुम्हारे घर पुलिस आ जाये, कोई
- 8:14अच्छा प्रभाव थोड़ी पड़ता है। यह बदनाम सस्ता है।
- 8:22आए तो लोग इनको मोदी के कुत्ते कहने शुरू कर दिए।
- 8:26मोदी को उड़ाने का कुत्ता कह रहे ईडी को मोदी का कुत्ता कह रहे
- 8:32कहाँ जाएगा ये देश? क्या यहाँ बीजेपी को छोड़कर सभी
- 8:38अपराधी बसते हैं? लेकिन इनके पास कोई जवाब है नहीं,
- 8:47बोले क्या? मनमोहन के पास सभी बात का जवाब
- 8:54होते हुए भी वह मून रहता था। इसके पास किसी बात का जवाब है ही,
- 9:05इसलिए ज्यादा इसका चर्चा मत किया करो।
- 9:14किसी ने जो करना धरना था वो कर दिया, लेकिन हम देख नहीं सके।
- 9:21हिंदुस्तान की तकदीर पूरी थी। माँ के गहनों से लेकर पिता की
- 9:27हत्या का जिम्मेदार? गोधरा कांड में हिंदू तक मरवाती
- 9:33है। नारी शक्ति वंदन की बात करने वाला
- 9:39मानसी सोनी को जंजीरों में जकड़ के रखता है।
- 9:42हर वक्त उसकी स्वतंत्रता पर पहरेदार बिठा देता है अमित शाह।
- 9:51तुम क्या करते हो जी, ये कोई बात सूझने वाली थोड़ी ही है जी अब तुम
- 10:00सारा पैसा ले लो, सोना खरीद लो। सोना सोना ही होता है।
- 10:13करेन्सी तो रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया और छाप देगा, लेकिन उसका
- 10:16मूल्य क्या है? हमारे पास रिज़र्व भंडार लगातार
- 10:25कम होता जा रहा है। ज़रा पूछेगा?
- 10:31हमारा रिज़र्व भंडार लगातार खत्म हो रहा है।
- 10:39बाहर से आ नहीं रहा डॉलर, वरना बाहर के लोग डॉलर वापस खींच रहे
- 10:45हैं। यह जो तुम्हें चढ़त दिखाई पड़ती
- 10:49है ना सेंसेक्स की, यह नकली है। इसलिए मैं कहता हूँ के एलआइसी में
- 10:56पैसे निकालो क्योंकि एलआइसी खरीदती है आपके पैसों से और ये
- 11:04नकली गुब्बार है। गुब्बारा हवा से फूलता है ना कि
- 11:11सॉलिड द्रव्य से और हवा का क्या है?
- 11:15थोड़ी सी पिन्न मारो और निकल जाती है फौक यह अमीर लोग पंगा खाना कर
- 11:24रहे हैं। अब देखो।
- 11:30शुक्रवार को मार्केट ऊंची बंद हुई।
- 11:34अब सोमवार को मार्केट खुलेगी तो नीचे खुलेगा, फिर ऊंची हो जाएगी,
- 11:40फिर नीचे हो जाएगी इस ऊंची नीचे में।
- 11:44बड़े खिलाड़ी आपका पैसा चूस लेंगे और आप मजबूर निगाहों से देखते रह
- 11:53जाओगे। लूटते रह जाओगे मेरा पोता एक।
- 12:07बच्चों को चटपटा खाने की आदत होती है।
- 12:12₹2 का पैकेट उसने खोला उसके बीच में से कुछ नहीं निकला।
- 12:25वो पोता कहने लगा, दादू देखना। इसमें से कुछ निकला तो है ही
- 12:30नहीं। मैंने कहा रैप लिया, उसके ऊपर
- 12:36लिखा था ढूँढ़ते रह जाओगे, मैंने कहा बेटा कितने है, मेरे अंदर
- 12:42दोगे जब ऊपर पहले ही लिख दिया कि ढूँढ़ते रह जाओगे।
- 12:48तो भीतर मिलेगा क्या खाक ऐसा ही हाल है मोदी जी का घर से चले थे
- 13:00हम गहने चुराए थे, गुजरात रहा हमें मिला वो भी तो लूट लिया।
- 13:09जिसने जहाँ बैठाया सब लूटपाट लिया बठा उसको जहाँ उठाना है सुपुत्र
- 13:27जब राजा बेईमान बढ़ा देते हैं हम। गलती हुई, गलती हुई रजत शर्मा ने
- 13:39इसका बहुत बारिश हो किया था और उसमें बड़े बड़े लफंडर बैठे थे।
- 13:48रामदेव जैसे निश्चित रूप से जब हम पूछेंगे।
- 13:54ये बताओ आपको ₹60 पेट्रोल चाहिए की ₹30, आप क्या जवाब देंगे?
- 13:59पूछने का ढंग ही ऐसा है। आप कहोगे ₹30 60 कोई नहीं कहेगा
- 14:11देख लो अब ₹30 बिक रहा है। बाहर से तो टीसी आर है, बात तो ये
- 14:18है कि इनका पेट नहीं भर रहा है, इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ आज
- 14:25हिंदुस्तान को एक ईमानदार व्यक्ति की जरूरत है।
- 14:31हिंदुस्तान में संपदा तो बहुत है लेकिन अडानी, अंबानी जैसे दौरतों
- 14:41ने छुपा रखी और यह भी नहीं बाहर के मुल्कों में छुपा रखी।
- 14:50इनसे पूछना पड़ेगा। इसीलिए मैं कहता हूँ इन भाग जब
- 14:59तुम गद्दी पर आओ या कोई प्लान पाने तो हवाई अड्डे बंद कर दें।
- 15:08फिर पूछने के तरीके हमें आते हैं, फिर जैसा इजराइल में डांस किया
- 15:17वैसा डांस भी दिखाएंगे हमें ये और बताएंगे भी कहाँ पड़ा पैसा और
- 15:22लेके भी आएँगे कितने दौड़ा दिए इन्होंने लोग पैसा दे दे।
- 15:29और विजय माल्या कहते मैं देखे तो गया तो 25,00,00,000 भाजपा को भाई
- 15:34अरुण जेटली को देखा, पता है ना ऐसे ये फ्री इन्होंने भी नहीं
- 15:42भागने दिया। कलाकार हैं।
- 15:47भाग्य ने दिए हैं भाजपा के लिए पैसे लेके ऐसे ही भाजपा में पैसे
- 15:51थोड़ी आ गए, ऊपर से आ गए एक व्यक्ति 600 कुछ में नंबर पे था
- 15:59और दो नंबर पे आ जाते हैं वर्ल्ड रैंक में ऐसे ही थोड़े है, कहीं
- 16:04से तो पैसा। हिंडन वर्ग किसी और की रिपोर्ट
- 16:11नहीं कर देता। अडानी की क्यों करता है?
- 16:15उसकी कोई दुश्मनी है? क्या एक व्यक्ति अडानी के लिए काम
- 16:20कर रहा है या देश के लिए और चुना देश ने था के अडानी ने?
- 16:28नॉर्वे गया, भारत के पेट्रोल पे गया और यहाँ से कह के गया कि
- 16:34पेट्रोल की खपत कम करो। वह जो जहाज था उसमें भारत के लगे
- 16:40हुए पैसे थे। पेट्रोल के जहाज भी यहाँ भारत का
- 16:43था। नार्जे क्यों गया?
- 16:46अडानिका के सॉल्व करना है अमेरिका क्यों गया अडानिका के सरफ़त फक?
- 16:56हर जाने किसने दिया मोदी ने मोदी को कौन देता है हमारी जनता टैक्स
- 17:02के रूप? तो पैसा किसका हुआ?
- 17:05जनता का लुटा कौन? जनता का अय्याशी किसने की?
- 17:12मोदी अडानी फिर अब समझाने की कोई जरूरत है तुम्हे देखो मैं तो
- 17:23कितना भी बोल लूँ। मैं देश हित में बोलता चला
- 17:30जाऊंगा। 24 तारीख को मेरे 14 वर्ष पूरे हो
- 17:35गए हैं। एक स्थान पे बैठने अन्य का एक
- 17:39गाना भी मैंने ग्रहण में किया लेकिन मैंने रत्न?
- 17:43बुरा है। मेरे भीतर का सिस्टम अब व्यस्त हो
- 17:48गया है। ना मैं अन्न खाऊंगा, ना मैं बाहर
- 17:53जाऊंगा। अब आज वोटिंग चल रही है, मेरा वोट
- 18:00है। लेकिन मैं बाहर नहीं जाऊंगा।
- 18:04वोट कष्ट करने के लिए पंजाब में वोटिंग चल रही है।
- 18:07नगरपालिका एक बार उस आनंद के सूत्र में बूँद
- 18:28सामान्य संबंध में। पर आनंद को पीकर क्या कभी ऐसा हो
- 18:37सकता है कि वह बूंद फिर से संसार में?
- 18:46आने की इच्छा प्रकट करे और संसार में आ जाए नहीं, ऐसा नहीं होता।
- 18:52पुत्र समझता हूँ तो मेरे पिछली वीडियो तुम तो बहुत पुरानी लिसनर
- 19:05हो। तुमने जरूर सुनी होगी बात की।
- 19:11यह यात्रा फ्रम मैटर टु सुपरकॉन्शियसनेस है फ्रम मैटर टु
- 19:18सुपरकॉन्शियसनेस परम जड़ता से। परम चेतना तक की यात्रा, पाथर से
- 19:28परमात्मा तक की यात्रा याद आया। अब मैंने एक बात कही थी जब पत्थर
- 19:38से यात्रा शुरू होती है तो पत्थर में भी चेतना है।
- 19:42थोड़ी सी बहुत थोड़ी सी। जब तुम प्रभुध होगे और तुम अपने
- 19:50पिछले जन्मो में जाना शुरू होगे, तुम ध्यान रखना, पीएलआर वालों पे
- 19:55कोई भरोसा ना करना ये ठग है। ये व्यापारी है, ये तुम्हें लूट
- 20:00लेंगे, इधर उधर के पता नहीं क्या स्वंग रचेंगे।
- 20:07मैं सीधी और स्पष्ट वांती कहना जानता हूँ क्योंकि मैं बखूबी
- 20:12जानता हूँ। ये संघ कुछ जाएगा इन्होंने शायद
- 20:20संघ ले के जाना होगा कुछ। इसलिए इनकी मैं बातें नहीं करता,
- 20:26इनको पीएलआर करने दो, इनको फर्वर्स बनाने दो, इनको बड़े बड़े
- 20:32इदारे खड़े कर लेने दो। इनको संस्थानों के हाथ मजबूत कर
- 20:36लेने दो। मैं अपनी राह पर निर्बाध आनंद में
- 20:42परिपूर्ण हूँ। रात दिन उस रस का पान करता रहता
- 20:47हूँ। कहीं जाने की तमन्ना ही नहीं
- 20:55होती। ऐसा नहीं कि मैंने खुद को सुप्रयत
- 20:57कर लिया है। खेंच खोज के मैंने अपने आपको
- 21:04स्थान पर बिठाया नहीं है। वरुण जाने को मन नहीं करता वह
- 21:09अमृत का स्वाद ऐसा है, छोड़ने को नहीं करता।
- 21:18निघा ही मिलाने को जी च ता। निगाहे मिलाने को जी चाहता निगाहे
- 21:41मिलाने। जी चाहता है आगे न जाने जी चाहता
- 21:57है जी चाहता। निगाहे मिलाने, मिलाने को जी
- 22:08चाहता है, जी चाहता है जी तो यह चाहता है जी नहीं कहता बाहर घूम।
- 22:23जब चीतना उस परम आनंद के रस समुद्र में उतर जाती है तो वापस
- 22:31लौट आने का मन करता ही है। अब सारी पीछे की रहस्यत्मक
- 22:40विवेचना को सुन लोग उतरे। यह प्रश्न कई औरों का है।
- 22:47वैज्ञानिक अपनी भाषा में एक शब्द बोलते हैं थिस यूनिवर्स इस
- 22:53कंस्टेंटली एक्सपेंडिंग। यह भ्रमण निरंतर फैल रहा है।
- 23:07कहाँ से आ रहा पता कहाँ जाएगा? जायेगा तो आनंद के सूत्र में,
- 23:19लेकिन पता नहीं यह जड़ कहाँ से आया है।
- 23:25मैं जितना जान पाया अपने सर्वोत्तम प्रयास से वह इतना ही
- 23:33है। कि जाना तो पता है कहाँ है, वह तो
- 23:38परम रस है, लेकिन यह जड़ आता कहाँ से है ये नहीं पता।
- 23:46इसी को कहते हैं साइंटिस्ट यूनिवर्स इज़ कंस्टेंटली
- 23:51एक्सपेंडेड। यह लगातार बढ़ रहा है और यह
- 24:04यात्रा फ्रम मेटर टु सुपरकंसिसेस मेटर जड़ से परम चेतना तक की
- 24:17यात्रा है। सारी यात्रा।
- 24:20जब पत्थर की चेतना थोड़ी सी चेतना जब तुम बैग में जाओगे, अपनी पिछले
- 24:27जन्मो में उतरोगे और पीछे पीछे जन्मो में जाओगे महत्म बुधनी।
- 24:37अपने पिछले जीवनों के संस्मरणों में सैकड़ों जन्मों का जिक्र
- 24:44किया। लेकिन बहुत बाद तक अगर तुम जाओगे
- 24:51तो एक चीज़ पाओगे के पत्थर में भी चेतना।
- 24:57थोड़ी सी यह जो ऋषिगण कहते हैं कि पानी में भी चेतना है, मेमैरि
- 25:07मेमैरि का मतलब चेतना ही होता है, इसलिए हम पानी को साक्षी करते
- 25:15हैं। जब फेरे लेते हैं, वर वधु तो
- 25:21अग्नि को साक्षी करते हैं क्योंकि अग्नि में भी चेतना है धरती वहाँ
- 25:27होती ही है जीस पर बैठे हो तुम वायु वहाँ पर है।
- 25:33आकाश सब जगह तो पंचतत्व साक्षी हो जाते हैं और यह पंचतत्वों में
- 25:45कान्शस्नस है। थोड़ी सी मात्रा में वेरी फ्यू।
- 25:57क्वांटिटी तो यहाँ से जब मेट्र से पत्थर से यात्रा शुरू होती है, यह
- 26:07यात्रा है जड़ की। तो मैंने कहा, फ्रॉम मैटर, उसकी
- 26:20सारी चेतना संघ चलती है, पाथर की सारी चेतना संघ चलती है और इसे ही
- 26:32पूरी यात्रा दे ही की यात्रा। रूप बदलते हैं।
- 26:41चीतन का एवोल्यूशन होता है, शरीरों का भी एवोल्यूशन होता है
- 26:50जैसे शरीर को जितनी चीतन की आवश्यकता होती है।
- 26:55प्रकृति का विधान उसे उतनी ही चेतना मयाकरा देता है।
- 26:59थोड़े शब्द गहरे हैं। इसको आराम से सुन यह बेसिक
- 27:03क्वेश्चन है पुत्री तुम्हारा इसलिए इसको आराम से सुनना तुम्हें
- 27:08किसी शास्त्र में नहीं मिलेगा। तो पाथर से जब चेतना चलती है
- 27:17जितनी भी अचीव क्वांटिटी, लेकिन उसकी यात्रा तब्दील होनी है, परम
- 27:28चेतना में वह परम चेतना जिसे हम कहते हैं।
- 27:33समुद्र बूंद समानी समुद्र में बूंद की तरह शुरू हुई थोड़ी सी
- 27:40चेतना संग जाती है। आप पिछले प्रवचनों को जब सुनोगे
- 27:45सुने ही होंगे, तुम्हें याद आ जाएगा।
- 27:50वह चेतना का थोड़ा सा अंश के साथ चलता है।
- 27:55सारी प्रोग्रेस उस चेतना? के।
- 28:00जो पाथर की, बहुत ही छोटी क्वांटिटी में चल, बाहरी अवर्ण
- 28:07बदली। कभी पेड़ बनो।
- 28:11यूनिसेल्युलर ऑर्गनिस्म मल्टी सेल्यूलर ऑर्गनिस्म दो पाहा चार
- 28:18पाहा। बढ़ता चला गया ये लाखों सालों में
- 28:26एवोल्यूशन घटा? परमात्मा की सृष्टि कितनी साल
- 28:33पुरानी है? यू कैनोटेक्स बोले, लेकिन आप अपनी
- 28:41तकनीकों से। कार्बन डेटिंग करके बता देते हो
- 28:49कि यह इतनी प्राणी है लेकिन वो सही नहीं है इसलिए बाबा ने कहा जा
- 28:57करता सिर्फी को साजय अब के जाने सोई वही जानता है।
- 29:04कब उसने निर्वाण किया था ना कोई पंडित जानता है, ना कोई मोरबी
- 29:13जानता है ना कोई सयाना जानता है कोई नहीं जानता या करता सृष्टि को
- 29:22साध्य। आप पे जाने सोये वही जानता है कौन
- 29:28सा वेला वक्त कवन जीत पाया, आकार कौन सा वक्त था, कौन सी तिथि थी,
- 29:38कौन सा वक्त था जब यह आकार घटा? क्या तुम नहीं जान सकोगे।
- 29:47सर्जना कभी नहीं जान सकेगी कि उसकी उत्पत्ति सर्जक ने कब की, यह
- 29:55सर्जना के बलबूते की बाहर की बात है।
- 30:00यह तो सर्ज की ही जानता है। मूर्तिकार ही जानता है कि मैंने
- 30:04मूर्ति कब बनाई। मूर्ति नहीं जान सकती कि मेरी
- 30:10उत्पत्ति मूर्तिकार ने कब की। थोड़े गहरे शब्द हैं, आराम से
- 30:15सुनियेगा इसको रिवर्स कर लेना। रिवाइंड करके सुन लेना तो वहाँ से
- 30:26बिल्कुल स्मॉल क्वांटिटी ऑफ कान्शस्नस ट्रैवल्स बढ़ता ही चला
- 30:33गया। बाहर के आकार बदलते चले गए, आकार
- 30:38बदले। आकार के अनुरूप चेतना का
- 30:43कान्शस्नस भी हुआ जब तुम ऐसे भी कहते हो कि चेतना के कान्शस्नस के
- 30:51साथ साथ उसको तदान उपुर शरीर भी मिला।
- 30:57दोनों में से दोनों ही बातें कह सकते हो।
- 31:00तुम इदर कान्शस्नस बढ़ी उदर शरीरों के आकार बदलो।
- 31:14यह लाखों करोड़ों वर्षों सील रहा है।
- 31:20सनातन कहता है यह सृष्टि एक अरब 95,00,00,000 वर्षपराण एक अरब 95
- 31:34अब बना, इसका हिसाब कैसे लगा कुछ ऋषियों ने?
- 31:40तो कि ऋषि हमारे साइंटिस्ट थे। रिसर्चर्स थे किन विधियों के
- 31:49द्वारा ये खंगाला हुआ था अन्यथा पंडितों में इतना दे मार्ग नहीं
- 31:58एक अरब। 95 96,00,00,000 साल का यह सृष्टि
- 32:04जो अब चल रहा है सनातन के अनुसार यह शीत 12 कल्प चल रहा है।
- 32:18अब। शेतवाराहा कल्प के सातवें मन्नू
- 32:26का वह वस्वत मनु चल रहा है। सातवें मन्नू का वह वस्वत मनु चल
- 32:34रहा है। कुल होते हैं 14।
- 32:40इसे ऐसा समझिए। एक कल्प में 14 मन्नू होते हैं और
- 32:47हम सात में मन्नू में चल रहे हैं। अभी सात बार में ये हिसाब खोजने
- 33:00वालों ने खोजा है। तो बढ़ता चला गया मैटर की यात्रा,
- 33:11पेड़ भी बनी जीवन तो था जीवन तो पात्र में भी था शायद तुम ऐसी
- 33:24हल्की सी। यादास्त तुम्हें पहुँच जाओ, यहाँ
- 33:29तुम्हें याद आया कि कोई रथ मेरे ऊपर से गुजर रहा है और मैं
- 33:36पत्थरों का एक रस्ता हूँ, तो यह तुम्हें कैसे पता चला?
- 33:44कि मेरे ऊपर से कोई रथ गुजरा है क्योंकि पत्थर में भी कुछ स्मरण
- 33:51शक्ति है तो अकेले पानी में स्वर्ण शक्ति नहीं होती, पत्थर
- 33:57में भी होती है, अगणी में भी होती है, वायु में भी होती है, आकाश
- 34:02में तो होती है। मैंने आपको बताया।
- 34:05किसी भी चीज़ के तथ्य को जानना हो, तो ब्राह्मणीय आकाश में जाकर
- 34:11वहाँ का आपको कोड पता होना चाहिए लगाओ कोड और कोड और पता करो वहाँ
- 34:16हर चीज़ रिकॉर्ड है वहाँ जैसा हम कह देते हैं।
- 34:24के क्लाउड में सब कुछ है या उससे ऊपर कोई चीज़ बन जाए उसमें सब कुछ
- 34:28है। वह सांझा सूचनाओं का भंडार है तो
- 34:39वहाँ से भी हम जान सकते हैं। एक हम अपने अंतः में ही जानकर
- 34:44कलेक्टिव अनकॉन्शियस मैएंड में भी जान सकते हैं।
- 34:48सभी के भीतर क्या है और व्यक्ति खुद भी अपने भीतर जाकर देख सकता
- 35:00है। ये तीन तरीके हैं जानने के किसी
- 35:04भी सूचना को किसी भी कर्म। लेकिन परमात्मा की साक्षी है और
- 35:10हर जगह मौजूद है बराबर आपके हर कर्म के ऊपर उसकी गतिविधि है तो
- 35:18उसके रिकॉर्ड होता रहता है। व्हाटएवर यू अरे डूइंग
- 35:23कॉन्स्टेंट्ली एवेरी मोमेंट? हर क्षण लगातार तुम क्या कर रहे
- 35:29हो यह वह जानता है, फिर ये सारा वहाँ इकट्ठा हो जाता है जिसे
- 35:38ब्राह्मण्डीय रिकॉर्ड कहते हैं, वहाँ से आप घंगाल सकते हो थोड़ा
- 35:43सा मुश्किल। जी प्रश्न छेड़ लिया आपने उसको
- 35:49आराम से कई बार सुनना पड़ेगा जड़ से चला पात्र के रूप में जड़ की
- 36:06यात्रा परम चेतना के शिखर तक। जड़ में चेतना तो थोड़ी सी होती
- 36:16है, इसलिए आनंद नहीं होता जहाँ जहाँ तुम्हें चेतना नहीं मिलेंगे
- 36:23वहन वहन आनंद का अभाव होगा जहाँ जहाँ।
- 36:28आनंद बहुत मात्रा में मिलेगा, वह वह चेतना प्रचुर मात्रा में होगा
- 36:35और वह जो आखिरी जिसे तुम सागर कहते हो अमृत का तुम प्यार का
- 36:49सागर। है तू प्यार का सागर है तेरी
- 37:04इकबू। ंद के प्यार से हम तुम प्यार का सागर
- 37:17है ठुकरा जुदिया तुने। लौटा जो दिया तुने ले जाएं होंगे
- 37:38जहाँ से हम तो प्यार का। सागर है वह प्यार का सागर है जहाँ
- 37:57प्यार है, वहाँ आनंद है जहाँ क्रोध है, वहाँ दुख है वहाँ नी
- 38:10रास्ता है। जहाँ प्रेम है वहाँ रस वहाँ अंध
- 38:19है, सुगंध है, अहोभाव है, नृत्य है, गायन है और जहाँ प्यार नहीं।
- 38:32वहाँ सब चीजें नदारद होती हैं। रूखा, सुखा सा, वीरान, नीरस, नीरस
- 38:38सी फिजाएं तुम्हें मिलेंगी आस में वो फिजाएं ही वो खजाएं होंगी।
- 38:51यह सारी यात्रा मैटर की यात्रा है।
- 38:57फ्रम मैटर टु सुपरकन्शियसनेस परम चेतना तक पहुंचने का मैटर में
- 39:06आनंद नहीं होता, न के बराबर होता है।
- 39:14और थोड़ी सी चेतना है, वही तो इच्छा प्रकट करेगी।
- 39:19अगर बिल्कुल ही ना हो तो विराट होने का सपना कौन संजोएगा इसलिए
- 39:27पास्त्र में थोड़ी सी चेतना होती। पानी में भी, वायु में भी अग्नि
- 39:32में भी आकाश और यह छोटी सी चेतना इच्छा करती है जिसे हम कहते हैं
- 39:41संकल्प कि मैं परम चेतन हो जाऊं, मैं उस परम चेतन का आनंद पाऊं।
- 39:49मैं उस परम रस में डूब जाऊं यह इच्छा करती है पाथर की चेतना और
- 39:58इस इच्छा से ही बढ़ती जाती है चेतना।
- 40:06हमारे ग्रंथ कहते हैं कि परमात्मा ने संकल्प किया एक को हम बहुत मैं
- 40:12एक से बहुत हो जाऊं, ऐसे ही पाथर की चेतना संकल्प करती है।
- 40:18इच्छा करती है कि मैं थोड़े से अनंत हो जाऊं, मैं थोड़े रस से
- 40:24अनंत रस हो जाऊं। और 1 दिन हो जाते हैं।
- 40:38ये सलाम कहता है के ईश्वर ने कहा हो जा और प्रकृति हो गई ये सारा
- 40:48चेतना का खेल। जैसे जैसे तुम्हारी चेतना बढ़ती
- 40:54जाएगी तो हमारे संकल्प साकार रूप लेना शुरू कर देंगे।
- 41:03बस यही सारी पीछे की क्रोनोलॉजी है।
- 41:08क्यों संत का कह सत्य हो जाता है? ऐसे चलते चलते वह चेतना मानव का
- 41:21जमा धारण करती है। चेतना भी बढ़ जाती।
- 41:26है। करीब 6070%।
- 41:30तक। और जामा भी बढ़ जाता।
- 41:34है। पत्थर से मानव की योजना बन गई।
- 41:39ध्यान रखना। मानव की।
- 41:41योनी से नीचे। नहीं जाया जा सकता।
- 41:44एक बार जो व्यक्ति मानव योनी में आजा।
- 41:50फिर आपने क्या करना है इस स्थिति में आकर?
- 41:57तुमने अच्छे कर्म करने। बेजवान।
- 42:03जानवरों को। चारा खिलाओ गायों।
- 42:08को पक्षियों को चौगा खिलाओ, कीड़ों को तेल, चावल, चीनी खिलाओ।
- 42:19गर्मी के अंदर सर्दी। में तिल, चावल, शक्कर फैलाओ।
- 42:24गर्मी में पानी फैलाओ। पंछियों को ऊपर कुंडे आते मिट्टी
- 42:30के कुंडे आते हैं, क्योंकि पंछियों को भूख कम लगती है।
- 42:35गर्मियों में प्यास ज्यादा। और अब आसपास नहरें।
- 42:40कम होनी शुरू होंगी। पंछियों को पानी पीने।
- 42:45के लिए बहुत दूर तक जाना पड़ता है।
- 42:48हर घर के ऊपर कम से कम दो या तीन गुंडे जरूर रखने चाहिए।
- 42:53वह बड़ा पुण्य का काम है, बड़ी सहायता करेगा।
- 42:59मेरे खुशी ऐसी हैं। जो लगातार सात आठ वर्षों से अखंड
- 43:05लंगर चलाए हैं पंछियों के लिए। उसमें सभी प्रकार की दाल।
- 43:11है गेहूं है चावल। और मोरों के लिए।
- 43:19मोर। मक्की को बड़ा खुश।
- 43:21हो के खाता है। वहाँ अटूट रंगर चलता।
- 43:25है 24 घंटे। और पानी के कुंडे।
- 43:29भरे रहते हैं। पंछी खाना खाते हैं।
- 43:34पानी पीते हैं। तृप्त होकर आशीर्वाद देके उठ जाते
- 43:39हैं। यही आशीर्वाद।
- 43:42तुम्हारी चेतना को बढ़ाने का काम करता है आशीर्वाद और यह आशीर्वाद
- 43:50द्रव्य से मिलता है। यह प्रोसेसर थोड़ा सा।
- 43:56उल्टा लगेगा धन? को दान करने से।
- 44:00सीधे सीधे पेट भर दोगे? दो तरह से पेट भर।
- 44:06सकते हो? ब्राह्मण का पेट भी भर सकते हो जो
- 44:10पहले से ही पेट फुलाए बैठे हैं। वह गाली निकालेगा, किस दुष्ट ने
- 44:16इतना भोजन करवाया? वह आशीर्वाद नहीं, वह तुम्हारी
- 44:21चेतना की कान्शस्नस की। प्रोग्रेस में काम नहीं आएगा
- 44:29भूखे। को भोजन करो।
- 44:30ब्राह्मण को। भूखे का जब पेट।
- 44:35भरेगा। तो वह आशीर्वाद।
- 44:39देगा। यह आशीर्वाद तुम्हारी चेतना को
- 44:43बढ़ाएगा, प्रोस्परस करेगा। बाबा नानक को।
- 44:50₹20 दिए उसके पिता ने। तो साधुओं की।
- 44:55जात में पूछी उसने। साधु ने कहा, बेटा।
- 44:59भूखे। और वो ₹20।
- 45:04बाबा नानक ने भूखे बेटों को फैलाकर रख दिया।
- 45:104 दिन से भूखे वो। लोग भीतर से आशीर्वाद निकला
- 45:17आशीर्वाद। तुम देते नहीं हो।
- 45:20आशीर्वाद भीतर से निकला करता है। वह परमात्मा की आवाज होती है।
- 45:25आवाज ए फलक नकारा ए खुदा। वह तुम्हारी खलक के।
- 45:31भीतर से आई हुई परमात्मा का नगाड़ा।
- 45:36वह तुम्हारी चेतना को। स्पर्श करेगा।
- 45:42ऐसे तुम्हारी चेतना एक। दिन पर विकसित हो जाएगी बुरा मत
- 45:47करो। क्यों बेकसूर जानवरों को काटते
- 45:53हो? वृक्षों में भी चेतना।
- 45:58होती है, क्यों काटते? हो वृक्षों को काटकर।
- 46:03तुम्हें पसंद तुम अपनी आने वाली नस्लों फसलों को काट रहे हो?
- 46:09वृक्ष नहीं होंगे तो। ऑक्सीजन कम होगी नहीं होगी
- 46:13तड़पिता। को कम मर जाएंगे।
- 46:15वो स्वास्थ्य के बिना जैसे कोरोना काल में मरे वृक्षों को मत काटो।
- 46:26और। जो वृक्षों को।
- 46:28काटने का हुक्म देता है। उस गद्दार को बदल।
- 46:33डालो वह कितनी भी बड़ी पोस्ट पर है।
- 46:38जो वृक्षों को काटता। है उस सेठ की गर्दन काट।
- 46:46वृक्षों को मत करने देना। क्योंकि यह जीवनदायिनी ऑक्सीजन
- 46:52पैदा करते हैं और। कोई तरीका ही नहीं।
- 46:56ऑक्सीजन को पैदा करने का वृक्षों के अलावा।
- 47:01ऐसे की इतना बढ़ेगी। और चेतना बढ़ते बढ़ते।
- 47:061 दिन तुम सुपरकंसियस में समय उतर जाओ, यही है तुम्हारी चरम पर।
- 47:15देखिए यह। यात्रा अलग सी है।
- 47:21फिर यह चेतना जो। बूंद सामान्य समुद्र में।
- 47:26इतना आनंद पीकर। बना कौन कहेगा?
- 47:32बुरे दिनों से तुम। निकले हो भला?
- 47:35वापस उन बुरे दिनों। में जाने का तुम्हारा मन करता है
- 47:39नहीं। इतने परम आनंद।
- 47:42में सुगंध में मदहोशी के आरंभ में जब तुम खो जाते हो, नहाते हो,
- 47:48उसमें स्नान करते हो, अठखेलियां करते हो, इतनी मौज में से निकलने
- 47:54का मन कभी नहीं होता तो ये। प्रश्न ही बेकार।
- 47:58था लेकिन मैंने। क्योंकि समझाना था इसलिए।
- 48:03समझा दिया कि यह। बिल्कुल नई यात्रा है।
- 48:08यह पुरानी कॉन्शसनेस समुद्र में से नहीं निकलेगी बूंद क्योंकि वह
- 48:14तो प्रोस्परस है। वह पूरी डेवलप्ड हो गई।
- 48:20वह नहीं घट सकती और कान्शस्नस कभी घटती भी नहीं।
- 48:24मैंने पहले भी कहा था। तो नई चेतना आएगी।
- 48:29पाथर से परमात्मा की यात्रा करेगी और वह बोध समुद्र में मिल जाएगी।
- 48:36ये है प्रोसेसर? जो एक बार संत्र में चला गया, उस
- 48:41कौन से सुनेत के अब देखो मैं यहाँ बैठा हूँ 14 साल।
- 48:46पूरे हो के कहाँ? यूज़ करता हूँ।
- 48:49संसार में जाने। का मन करता है।
- 48:51नहीं करता तो। फिर वहाँ से आने।
- 48:54का मन कैसे करेगा? अभी तो देह में बैठा।
- 49:00हूँ और जब। देह से पार यह।
- 49:02भी थोड़ा सा बंधन तो है देह। से पार।
- 49:06परमुक्ति की अवस्था में चला जाऊंगा।
- 49:09फ़िल्म कौन लौटने का मन करेगा? नहीं फिर तो।
- 49:14उसके आगोश में सोना जाऊंगा। और फिर तो आने।
- 49:19की याद भी नहीं आएगी। फिर तो तुम उस मुकाम पे आजाओगे।
- 49:27के लौट के जाने। का मन नहीं करेगा।
- 49:34निगाहें। मिलाने को जी चाहता, निगाहें
- 49:45मिलाने को जी चाहता। आके न।
- 49:54जान आके न जान को जी चलता है आके। न।
- 50:09जाने। को जी चाहता है निगाहे मिलान ने
- 50:19को जी चाह त आके न जाने को जी। फिर तुम ऐसी स्थान पे आ जाओगे।
- 50:33जहाँ भटकन नाम की। चीज़ होगी जहाँ भटकने का मन ही
- 50:37नहीं करेगा तुमने वो पा लिया जीसको पाने के बाद न तो खोना होता
- 50:44है, न कुछ और पाना होता है। इसलिए उपनिषद का यह वचन पूर्णमदह
- 50:52पूर्णमिदं पूर्णमद पूर्णमदच्यते पूर्ण से पूर्णमादायें पूर्णमयवा
- 50:59बुशिषते पूर्णमय से कुछ निकाला नहीं जा सकता।
- 51:05पूर्ण कभी भी। पूर्ण पूर्ण ही रहेगा।
- 51:10कहने की बात है, समझाने की बात है, ढंग है।
- 51:15पूर्णस्य पूर्ण मादाएँ पूर्ण मेवा वशिष्ठे पूर्ण में से पूर्णगोभी
- 51:19निकाल लो तो भी पूर्ण ही शेष बचेगा, भटके?
- 51:25तुम भटकने को नहीं हो तुम उस स्थान पे आ गए हो, पॉइंट ऑफ नो
- 51:30रिटर्न वहाँ से वापसी संभव नहीं एक बार चले जाओ तो एक बार।
- 51:37चले जाओ तो। फिर।
- 51:40वापस आने का मन। नहीं करेगा।
- 51:49धन्यवाद।