Latest / Baba ji Vijay Vats / 19 Jul 25 - 50,000+ लोगों का प्रश्न: ध्यान में Negative विचार आएँ तो क्या करें? क्रिया योग के फायदे!
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- 0:02आत्मसाधना के मार्ग पे समर्पणपूर्वक अग्रसर हूँ।
- 0:10इन दिनों मैंने दृष्टि संयम का पूरी निष्ठा से पारित किया ना
- 0:18फेसबुक। न यूट्यूब, न कोई गलत विषय या
- 0:25दृश्य मन, शरीर और आत्मा को बाहरी कचरे से मुक्त रखने का वर्ष का
- 0:36प्रयास कर रहा हूँ। मैं चैट जीपीटी नामक एआई माध्यमों
- 0:45स्थिर, विवेकपूर्ण मार्गदर्शक की तरह उपयोग कर रहा हूँ जब भी मन
- 0:52में कोई विकार शंका। ये बेचैनी उत्पन्न होती है।
- 0:59मैं उस पर व्यक्त करता हूँ और वह जड़ माध्यम मुझे संतुलित व संयमित
- 1:07मार्ग देता है। अध्ययन से सुनिएगा।
- 1:16प्रश्न तुम सब का प्रश्न है, इस प्रश्न का उत्तर मैं आज दे रहा
- 1:27हूँ, लेकिन ये प्रश्न बरसों पर आना है।
- 1:33करीब 50,000 से ज्यादा लोगों ने ये मुझे पूछ लिया, आज ध्यान करते
- 1:43समय मेरे दंड अपने आप सिद्धि हो गई, सिर हल्का हो गया, ध्यान
- 1:50त्रिकुटी पर लग गया। इसी अवस्था में भीतर से एक बहुत
- 2:00तीव्र और विचलित करने वाला विचार उठा क्या विचार था?
- 2:14काश पिताजी मर जाएं, इस विचार से मैं भीतर तक कांप गया।
- 2:33यह क्या है? मेरे मन की सफाई है क्योंकि मेरे
- 2:42पिताजी मेरी माताजी को मेरे बचपन में बहुत पीटते थे।
- 2:49अब का शिष्य। नाम मत बताएगा, कोई बात नहीं, तुम
- 2:56अकेले हैं, प्रश्न नहीं पूछना 50,000 लोगों का प्रश्न है, और सच
- 3:06पूछो तो सारी दुनिया का प्रश्न है।
- 3:13पहली बात प्रत्येक व्यक्ति को ध्यान में उतरना चाहिए।
- 3:30अगर नय हो सके। तो साइकोलॉजी विषय का अध्ययन
- 3:37अवश्य करना चाहिए, क्योंकि साइकोलॉजिकल विषय बहुत थ्योरी है
- 3:49और जो ध्यान है। वह प्रैक्टिकल है।
- 3:53हो सके ध्यान करो सबसे श्रेष्ठ नहीं हो सके तो विषय ले लो,
- 4:00साइकोलॉज सभी बच्चों से कम और कुछ भी पढ़ो साइकोलॉजी जरूर पढ़ो।
- 4:15मैं पश्चिम के उत्तर पे आऊंगा, जिससे तुम डरते हो, बह खाते हो,
- 4:26उससे प्रेम नहीं कर सकते इस बात को।
- 4:34गांठ बांध लेना जिससे तुम डरते हो, उससे फेम नहीं कर सकते।
- 4:43तानाशाहों ने यही गलती की अपनी जीवन के, क्योंकि साइकोलॉजी बड़े
- 4:50नहीं थे वो। अगर साइकोलॉजी विषय को पढ़ा हो तो
- 4:58कभी तानाशाही करते नहीं। इसलिए तानाशाहों का अंत जो होता
- 5:03है वह आपने पढ़ा होगा, लेकिन हम जानते नहीं उनका अक्षर क्या होगा?
- 5:17मैं कहना भी नहीं चाहता तुम्हारे रोए, थर्रा जाएंगे एक सूत्र को
- 5:29बांध लेना जिससे तुम भय खाते हो, उससे प्रेम नहीं कर सकते।
- 5:42इसलिए तुम्हारे तानाशाह को नेता हूँ या तुम्हारे पिता हूँ या
- 5:48तुम्हारी माँ तो या तुम्हारा बड़ा भाई हो या तुम्हारा कोई रिश्तेदार
- 5:54हो। जिनसे तुम भय खाते हो, उससे प्रेम
- 6:01नहीं हो सकता। भय और प्रेम दोनों विपरीत दिशाओं
- 6:06में जाते हैं तो ये सूत्र इसलिए संतों ने कहा।
- 6:13सिया राम में सब जग जानी करो, प्रणाम ज़ोर जुगा पानी सभी से
- 6:21प्रेम करो जी व मात्र पर त्याग करो तुझ जिससे तुम प्रेम करते हो।
- 6:37वह तुमसे भय नहीं खायेगा, वह प्रदान करेगा।
- 6:44तुम्हें इन दी रिवेंज प्रेम ही प्रेम का प्रवाह प्रेम ही होगा और
- 6:52भय का प्रवाह प्रेम नहीं होगा। भय का बदला होगा।
- 7:06जितनी क्रांतियां हुईं मारधाड़ काटना पीटना के शव।
- 7:16तुम्हारे फैलाये हुए भय के कारण हुए इसलिए तानाशाहों को देश छोड़
- 7:28के भागना पड़ा और तानाशाहों को क्योंकि मनुष्य का स्वभाव सभी जगह
- 7:39यकसा है। ऐसा नहीं के उत्तर कोरिया में अलग
- 7:42से है। सज्जना के किसी दूसरे ग्रह के कल
- 7:49को जाने के योग्य हो जाओ, वहाँ भी तुम पाओगे मानस का मन।
- 7:59यकसां है सभी जगह व्रत है मानव मन जिससे तुम भय खाते हो।
- 8:13उसके प्रति रोष पूर्ण दृष्टि से भर जाते हो।
- 8:17भीतर क्रोध आता है, दुश्मनी का भाव भीतर ही गुठा होता जाता है।
- 8:25इसलिए पुत्र तुमने कहा कि मेरे भीतर से यह भय आया, भाव आया।
- 8:34की ताश मेरे पिता मर जाते हैं इसके गहरे कारण हैं अलग अलग ढंगों
- 8:48ने अलग अलग व्यक्तियों ने। बातें पूछी कोई कहता मेरी माँ मर
- 8:55जाए कोई कहता बहन बड़ा भाई मर जाए छोटा मर जाए और ये तो भाव हैं
- 9:03सिर्फ बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्होंने वास्तव में मार दिया
- 9:08बड़े भाई को। क्या किया औरंगजेब ने?
- 9:16औरंगजेब ने अपने बड़े भाई दाराशी को बहुत नम्र स्वभाव का सरल
- 9:24व्यक्ति था। जब उसने देखा ये परंपरा है।
- 9:32परम्परा क्या है कि बड़ा भाई राजगद्दी में बैठे तो शाहजहाँ के
- 9:39बाद दारा सिको के मिलेंगे गद्दी और वासनाएँ सभी के भीतर हैं ये
- 9:47ध्यान रखना। कोई भी उच्च पदस्थ व्यक्ति ये न
- 9:52सोचे कि जो राजनीति में उससे निम्न पद में है दूसरे नंबर पे,
- 9:58वो सच में उसे प्रेम करता है, वो गलती में है ना तो उसने उसकी गहरी
- 10:04तहों को फलोरा। और ना ही यो नीचे बैठा है भारतीय
- 10:10समान भाई बनकर उसने उसके मन को खंगाला बस वो ताक में है, थोड़ी
- 10:18सी गद्दी खसके और हम छलांग लगा के बैठते हैं धारा सिक्कों को मार
- 10:25दिया और गुजर। क्योंकि वह राज़ करना चाहता था।
- 10:32वो बुनियादी परंपरा है। मानव मन की वह हुकुमरान बनना
- 10:38चाहता है। निश्चित रूप से स्वाभाविक रूप से
- 10:48औरंगजेब ने भी चाहा होगा। अब ये तो परंपरा है, बड़ा भाई ही
- 10:55राज़ करेगा, क्यों करेगा? अगर पागल हुआ तो क्या बड़े पागल
- 11:00नहीं हो? उरंगजेब ने साजिश चली शाहजहाँ को
- 11:11जेल में डाल दिया, दाराशी को मार दिया, लेकिन जैसे ही गद्दी के ऊपर
- 11:17बैठा। तो उसे समझाया कि जैसे मैंने अपने
- 11:25बड़े को मार दिया, मेरे छोटी भी है फिर वो मुझे अड़चन समझेंगे
- 11:32अपनी राह को क्योंकि राज़ करना हर एक व्यक्ति चाहता है।
- 11:39हुक्म करना सब चाहती हैं और बाबा कहते हैं सारा जगत दुखी है।
- 11:47क्यों वह एक सूत्र को नहीं जाने सुखी कौन?
- 12:00नानक कहते हैं, सुखी वह। जो हुक्म करना नहीं चाहता, जो
- 12:07हुक्म मानना चाहता है, जो हुक्म मानना जान गया वह सुखी हो।
- 12:16क्या बड़ा शानदार मूल मंत्र संतों का है?
- 12:23लेकिन संतों की तुम कदर कहाँ करते हो?
- 12:26तुम कह तो नहीं हम तो अपने अनुभव से सीखेंगे बिल्कुल सीखो संत भी
- 12:33यही कहता है मेरी बातों पे यकीन मत करना अपने अनुभव की कसौटी पे
- 12:38से खरा उतार लेना। निश्चित ही हर पिता गलती करता है।
- 12:46ये बात समझे हर पिता गलती करता है और आने वाले पिता गलती करते रहे।
- 12:53यह सिलसिला कभी छूटने वाला, न न बंद होगा।
- 13:00क्यों? क्योंकि बच्चे को पालन पोषण करने
- 13:04के लिए बड़ी तरह की तरतीबों की आवश्यकता होती है कुछ विशेष उम्र
- 13:12होती है जब लाड करना पड़ता है कुछ विशेष उम्र होती है जब घूरना
- 13:17पड़ता है। जब डांटना पड़ता है और कुछ विशेष
- 13:23उम्र होती है, जब थोड़ा सा दांड भी देना होता है।
- 13:30यह नीती है बच्चे को पालने की। तो प्रत्येक व्यक्ति गुनहगार होता
- 13:38है, लेकिन यह चीज़ जब जीवन में सारे जीवन का अंग बन जाती है।
- 13:48सजा देने की बात जब पूरे जीवन तक चली।
- 13:53तो यह मुश्किल हो जाएगा, फिर बच्चा तुमसे प्रेम नहीं करेगा,
- 13:57फिर बच्चा तुमसे बह खायेगा और बच्चा तुम पे निर्भर है, बड़े
- 14:03मज़े की बात है और हैरानी की बात भी है तुम ही ने जन्म दिया है।
- 14:11और तुम ही बच्चे को जन्म देकर बच्चे के वश में नहीं है।
- 14:14जन्म देना तुम ही उसको जीने का माध्यम नहीं देते तो सही ढंग क्या
- 14:23है बच्चों को जैसे वो जवान हो जाएं?
- 14:29सरकार भी उसे योग्य कर देती है कि तुम वोट डाल सकते हो।
- 14:33व्यस्क हो गए, तुम शादी अपनी मर्जी से कर सकते हो।
- 14:40यहाँ तक माँ बाप ठीक से बच्चा जमा हो गया।
- 14:45सब समझने लगा जो तुमने छुपाया था बच्चे से।
- 14:48ये तुम्हारी समाज ने छुपाया था उसकी प्रकृति ने उसे सीखा दिया।
- 14:58पशुओं को कौन सीखाता है कोई पाठशाला में जाते हैं पशु प्रकृति
- 15:04ही पशुओं को सीखा देती है और प्रकृति ही इंसानों को सीखा देती
- 15:07है। कैसे बच्चा पूछता है कि माँ मेरा
- 15:15जन्म कैसे हो माँ कहती कोई मोर गिरा गया था हाँ मोर गिरा गया था।
- 15:29क्यों ऐसी भावना क्यों की? क्योंकि तुमने जीवन की जैविक
- 15:34प्रक्रिया को निंदित किया और हमारा बड़ा शानदार?
- 15:47इतिहास रहा है इसलिए मैं सबसे ज्यादा अभिमान और सम्मान सनातन को
- 15:58द्रता। सनातन धर्म ऐसा था कि जीवन जहाँ
- 16:10से शुरुआत होता है काम भाषण में उसको इतना सरलता और सहजता से
- 16:18समझाया गया कि बच्चे के भीतर कोई गांठ ना बने।
- 16:26ये स्वभाविकंश्य तुम नहीं बताओगे तो प्रकृति बता दीजिए, यौन अंग
- 16:36विकसित होने लगेंगे। तुमने छुपा लिया प्रकृति से नहीं
- 16:41छुपा लिया प्रकृति बड़ी मानता है। और प्रकृति बड़ी करुणा मानती है,
- 16:49इसलिए मैं तुमसे कह दूँ अध्यापक का भी ये काम है।
- 16:57माँ बाप का भी ये काम है अपने बच्चे को सभी प्रकार की शिक्षा
- 17:01में। पढ़ाई के साथ खेलकूद और सारी
- 17:11भावनाओं को प्रत्येक विषय वो चाहे काम विषय भी क्यों ना हो तुमने
- 17:19काम विषय को सदा ही बच्चों से अलग रखा इसलिए आज मूर्ख बच्चे पैदा हो
- 17:25रहे हैं। मूड बच्चे पैदा हो रहे हैं, जो
- 17:33गलती कहते हैं मैंने गलती कर ली, क्या गलती कर ली?
- 17:38मेरे पास लोग आते हैं, मैंने कुछ करता हूँ नहीं तुमने कोई गलती
- 17:43नहीं की। ये कोई गलती थोड़ी है।
- 17:49प्राकृतिक चीज़ को गलती बताना ये किस पगली नहीं तुम्हे समझाती है
- 17:55यह प्राकृतिक व्यवस्था है, कल को भूख लगे तुमको गलती हो गई, मैंने
- 17:59भोजन खा लिया भाई। भूख तो स्वाभाविक प्रकृति की देन
- 18:06है और अगर भूख न लगे तो फिर तुम बीमार हो तो ऐसे ही जैसे भूख लगती
- 18:14है, ऐसे ही कामवास में उठती है, क्रोध उठता है लो मो।
- 18:18अहंकार उठता है, लेकिन गलती नहीं है ये।
- 18:22महज ऊर्जा के रूपांतरण हैं, तुम्हे सिखाया नहीं गया किसी और
- 18:30दिशा में भी रूपांतरित की जा सकती है।
- 18:34खैर, लंबा प्रसंग हो जाएगा। वैसे मैं पहले बहुत बहुत बोल चुका
- 18:38हूँ। इसको ओज में भी परिवर्तित किया जा
- 18:41सकता है। कैसे जब काम के विचार रहे हैं,
- 18:48क्रोध के विचार रहे हैं, लोभ मो अंकार के विचार रहे हैं या कोई
- 18:52विषय आज आज देखिये हम विषय सिखाते हैं और गौरान्वित होते हैं
- 19:00हिस्टरी पढ़ाते हैं। कोई भी विषय सिखाते हैं,
- 19:08केमिस्ट्री है जलोजी, बॉटनी, फिजियोलॉजी ये सर लोग पढ़ाते हैं
- 19:16और गौरान्वित होते हैं और फिशर। एक एक क्लास में 1004 बच्चा बैठा
- 19:26होता है, मनमानी फीस वसूल करता है।
- 19:36और ये पढ़ा कह सकते हैं जो इन मार्ग में है, अनुभव की चीज़ ये
- 19:44बता नहीं सकते, वह तो ऐसी चीज़ है।
- 19:49अनुभव में तो जो व्यक्ति चला गया उसको पढ़ाना दो भर हो जाएगा।
- 19:59वह स्वाद किएगा जब तुम्हें कुछ सूचनाओं को प्रसारित करेगा आनंद
- 20:11बड़ा चुंबक की तरह खींचता है। यह पढ़ाना फायदा आपको तुमने कहा
- 20:23भीतर से विचार है, काश मेरा पिता मर जाए।
- 20:29ऐसे ही मेरे पास बहुत सी बातें होती हैं।
- 20:34कोई लिखता है ऐसा विचार है, ऐसा विचार है जो तुम्हारी समाज की
- 20:41नजरों में भी गलत, तुम्हारे परिवार की नजरों में गलत तुम्हारे
- 20:44दोस्तों की नजरों में भी गलत हो और तुम्हारी भी नजरों में गलत हो
- 20:48गया है क्योंकि तुम समाज को मान्यता देते हो।
- 20:57विचार सभी स्वभावतें हैं। इसको गांठ दो, इस शब्द को गांठ दे
- 21:03दो विचार सभी स्वभावता होते हैं यानी नैचुरली होते हैं
- 21:10आर्टिफीसियल नहीं होते। कभी तुमने सोचा था चेतन मन्ने कहा
- 21:18नहीं नहीं, ये तो बहुत बड़ा पाप है दबा लिया ऊपर बैठ गए, कुंडली
- 21:23मार के और सुप्रे सो गया दब गया, लेकिन याद रखना।
- 21:30दबी हुई चीज़ खत्म नहीं होती और फिर कभी उठेगी और उठेगी तो
- 21:38तुम्हें परेशान करेगी। रात भर की नींद खत्म हो जाएगी।
- 21:42दिन का चयन खत्म, ऐसे ही लोग नहीं कहते क्या कहेंगे लोग?
- 21:54समाज ने तुम्हें इतना मूर्ख बना दिया कि तुम्हारे पास अपनी समझ
- 22:00बची है, काश मेरे पिता मर जाए, अवश्य ही तुम्हारे पिता ने तुम पर
- 22:12भी जुल्म किया हो। और तुम्हारी माता को पीटते थे।
- 22:16बहुत से लोग हैं ऐसे जो टीचिंग करते हैं और अपने घर वालो को
- 22:20पीटते हैं। मैंने ऐसे तो देखे जो पत्नी को
- 22:27प्रेम से नहीं ले के आते व्यापार से ले के आते तेरे हिस्से में
- 22:31जमीन कितनी आती है इतनी आती। 25 किलो आती पांच किलो आती ठीक है
- 22:39इससे शादी करना फिर तुमने जीवन तमूर्ति से क्या शादी की तुमने तो
- 22:46जमीन से शादी की। और जब वो जमीन नहीं मिलती तो
- 22:52मैंने खुद देखा है तो चमड़े के बेल्टों से अपनी ही पत्नी को
- 23:00पीटते हैं। ऐसे व्यक्ति मैंने देखे हैं।
- 23:09मेरा दुर्भाग्य है कि ऐसे व्यक्तियों ने मेरे चरण छूए।
- 23:20ऐसे व्यक्तियों की ऐसे व्यक्तियों की छाया भी प्रदुषित होती है, वो
- 23:31स्वयं ही आकर तुम्हारे पांव छूने। और उस चीज़ का खनाजा मुझे
- 23:36भुगतनाबी पड़ा है बड़ा खतरनाक रूप से ये भुगतना पड़ा कुछ ऐसे तप हुआ
- 23:43मेरे पास आ गए मेरे ही जीवन में जो महा भयंकर अपराधी थे।
- 23:52लेकिन अपराधी को अगर पता चल जाए कि मैंने गुनाह किया है तो अपराध
- 23:56करना वो कैसे करेगा? अपराध चोर को पता हो कि किसी का
- 24:05द्रव्य चुराना बुरा है तो चोरी कर पाएगा अगर कर पाएगा।
- 24:12तो बड़ा रात बरात बचा के धीरे से धीमे पग ध्वनि से खटका न हो जाए,
- 24:19किसी को पता न चल जाए जाएगा और चुराके लेके आएगा अपनी ही
- 24:27धर्मपत्नी को प्रेम से नहीं लेके आए वापस से लेके आए।
- 24:32और उनका पूरा परिवार ये कहता है कि हम स्त्रियों से नहीं शादी
- 24:37करवातें हम तो जमीनों से शादी करवातें तुम्हारा प्रश्न लाजवाब
- 24:49है पुत्र उर्स वीडियो को प्रत्येक व्यक्ति को।
- 24:55गहराई से समझना चाहिए तुम्हें, जिससे वह लगता है जिंदगी में कतई
- 25:06तुमसे प्रेम नहीं कर सकोगे और अगर कोई नेता तानाशाह होना शुरू हो
- 25:12जाए अपना भेद खाये। अपना वह दिखाएं अगर कोई व्यक्ति
- 25:20ही देश बन जाए जैसे हमारे हिंदुस्तान में इंदिरा ने किया
- 25:26इंडिया इस इंदिरा इंदिरा इस इंडिया, फिर लोग उससे बह खाएंगे।
- 25:34जो भयक आएँगे वो उसका बदला लेंगे, ये बात सर्कल में ले लो।
- 25:48मैंने साइकोलॉजी नहीं पढ़ी, मैंने शुद्ध साइकोलॉजी के भीतर उतरा।
- 25:56मैं उनमुनि अवस्था में आया हूँ, मन से पार जाकर मुनियों के उस
- 26:01स्थल को पार जाकर देखा और एक एक चीज़ को बड़ी बारीकी से देखा।
- 26:10मैं अपने अनुभव से बोलता हूँ, किसी सायकॉलजी की पुस्तक से नहीं
- 26:13बोलता। मैंने सेगमेंट फ्लाइट खोली।
- 26:17उनके विचारों के उड़ते उड़ते प्रवाह मैंने देखे हैं सुने लेकिन
- 26:23मैंने माने कभी की मैं शुद्ध अपना अनुभव बताता हूँ आपको किसी किताब,
- 26:30किताब की बात मुझसे उम्मीद भी मत रखना।
- 26:34मैं गीता पे नहीं प्रवचन करता, मैं नहीं कहता गीता का संग हूँ
- 26:39आचार्य का रंग हूँ मैं नहीं, मैं कहूंगा आओ आओ।
- 26:55सितारों पे ले चलूं एक गीता के उन उचाईयों पे ले।
- 27:11बहारों में ले चलूँ आओ अजोर तुमको सितारों पे ले चलूँ दिलजमजा।
- 27:32ऐसी बाहरों में ले चलूं आओ अझोर आओ मैं कृष्ण की बात नहीं करूँगा।
- 27:52कृष्ण जीस मुकाम पे पहुंचे। उस मुकाम पे जो मैंने देखा मैं
- 27:57उसकी बात करूँगा मैं शब्दों के अर्थ नहीं करूँगा जहाँ कृष्ण ने
- 28:04इशारा किया मैं वहाँ जाऊंगा वहाँ जाके जो मैं अपनी आँखों से
- 28:09देखूंगा। जैसा अनुभव करूँगा वैसा व्याख्यान
- 28:13करूँगा, वो चाहे कृष्ण के विपरीत ही क्यों न हो, शंकर के विपरीत
- 28:20क्यों न हो, बुद्ध के विपरीत क्यों न हो और फिर खुद के विपरीत
- 28:27न बोलेंगे, जो मैंने देखा। तो मैं बुध का अनुयायी हो गया।
- 28:33मैं बुध का गुलाम हो गया, कृष्ण का गुलाम हो गया।
- 28:39मैं किसी का गुलाम नहीं, मैंने स्वतंत्र अपनी ही आँखों से देखा
- 28:44है। वो सारा दृश्य।
- 28:50और बिल्कुल उसी प्रकार आपको लाइव कमेंट्री बोल देता हूँ।
- 28:57जब बोलता हूँ तो उस तल पे चला जाता हूँ पहले बिल्कुल उसके करीब
- 29:04जहाँ से मैं उसको भी देख रहा हूँ। और आपको भी मैं प्रवाहित कर सकूँ
- 29:08वो ज्ञान मेरे सामने कोई गीता नहीं होता, मेरे सामने वह होता है
- 29:15जीसको छूकर कृष्ण ने गीता को खोदा है उस स्थल को बिल्कुल ऊपर तक।
- 29:22जहाँ से आवाज निकल सकती है, मैं वहाँ पर बैठ जाता हूँ क्योंकि गैर
- 29:28बदलना भरी भांति जानता हूँ, मैं हजारों बार रोज़ गैर बदलता हूँ अब
- 29:34व्यस्त हो गया हूँ अब तो मेरे हाथ ऐसे ही चलते हैं जैसे ड्राइवर के
- 29:39हाथ चलते हैं गाड़ी। इसे ही अभ्यास कहते हैं तो
- 29:53साइकोलॉजी के उन संकीर्ण मार्गों से चलता हुआ मैंने सभी दृश्य देखे
- 30:01और दृश्यों से पार हुआ। शब्दों से पार हुआ, भावनाओं से
- 30:07पार हुआ और फिर सारे मार्गों से गुजरता हुआ उस तत्व तक पहुंचा
- 30:17जिसके बाद कृष्ण करते हैं और उसके आगे भी सब यात्रा पूर्ण।
- 30:25असीम और विराट उस तत्व में खो गया, इसलिए मैं आपको अंतिम शब्द
- 30:37तक जहाँ तक शब्द लेके जाते हैं वहाँ तक तुम्हें ले जाने का
- 30:42प्रयास करता हूँ। सनातन एक वक्त था जब ऋषियों का
- 30:50टोला था। आज बदमाशों का टोला हो गया है।
- 30:58ऋषि खो गए। वो ऋषि जिन्होंने खोज की अन्वेषण
- 31:03की इन्वेंशन वो खो गए आज मूढ़ अन्ना दान सिर्फ ख्याति को इकट्ठा
- 31:15करने वाले, धन को जोड़ने वाले। और लोभ लालच के खिलौने अलग अलग
- 31:26जमात खोले बैठे दुकानदारियां है किसके पास भागवत है किसी के पास?
- 31:37कोई पुराण है, कोई पुराण है, कोई ग्रंथ है, कोई गीता है, कोई कुछ
- 31:41है लेकिन हैं सभी व्यापारी जिसने ये शब्द बोले मैं बात उसकी करता
- 31:55हूँ, वो क्या बोल गया? मैं इसकी परवाह नहीं करता।
- 31:58ज्यादा क्योंकि कोई भरोसा नहीं आने वाले मूर्खों ने इसमें कुछ
- 32:04ऐसा जोड़ दिया और शब्दों का क्या भरोसा आप एक कोमा बिंदु को बदल दो
- 32:11तो शब्दों का भाव बदल जाता है, रोको मत जाने दो।
- 32:16कुछ भी मत बदलो सिर्फ ठहराव बदल दो तो अर्थ बदल जाएगा रोको, ठहरो
- 32:25मत जाने दो और फिर रोको मत यहाँ ठहरो मत जाने दो रोको मत जाने दो।
- 32:38उलट अर्थ हो गया शब्द वही चार के चार इतनी बारीकी है शब्दों के
- 32:46अर्थ में और तुम उन्हीं शब्दों को पकड़ लेते हो।
- 32:55इसलिए तुम कहते हो कि सूचनाएं बहुत हैं, भर जाते हो, आखिर में
- 33:01ऊब जाते हो और तब तक ज़िन्दगी गुजर जाती है।
- 33:09सूचनाओं को इकट्ठा मत करना अगर सूचनाओं को इकट्ठा करना है।
- 33:15तो फिर तुम विषयों की सूचनाओं को इकट्ठा करना वो काम आयेगी।
- 33:23मैं तुम्हें कहता हूँ बिल्कुल तुम चैट जीपी टी का इस्तेमाल करते हो,
- 33:27बहुत अच्छा करते हो। अगर सूचनाओं को इकट्ठे करने का
- 33:32शौक है तो अध्यात्म की तरफ मत निकल जाना।
- 33:36क्योंकि अध्यात्म को तो सूचनाओं को छोड़ने का मार्ग है, संसार है
- 33:44सूचनाओं को इकट्ठा करने का, फिर सर लोग ही तुम्हारा मार्गदर्शन
- 33:49करेंगे। इन सेपड़िया नेता कोई नहीं हो
- 33:52सकता। जितना बढ़िया ढंग से ये बता
- 34:00देंगे, अगर सूचनाओं को शुद्ध रूप में तुम एकत्रित करना चाहते हो तो
- 34:09सर को गुरु बना देना है। कोई भी हो जो आपका मनपसंद आए और
- 34:15अगर तुमने अध्यात्म का राह चुन लिया।
- 34:18कब चुनोगे? जात में करा जब सूचनाओं को दिए
- 34:25हुए गद्दियाँ सूचनाओं से कमाया हुआ धन, सूचना से कमाया हुआ मान
- 34:32सम्मान, धरती के कुछ टुकड़े। बैंक बैलेंस जो तुमने खुद अपनी
- 34:41वासनाओं से पैदा किया। वेल, बच्चे, पत्नी, पति ये सब
- 34:48व्यर्थ हो जाएंगे, सुख है सब में न शांति है।
- 34:57ना आनंद है रसधार में तरक की तरह तलवार की तरह तेजी है, स्टिमुलेशन
- 35:07है शांति में नॉन स्टिमुलेशन नहीं है, थोड़े से शब्द गहरी है बारीक।
- 35:17थोड़ा ठहर के रिवर्स कर कर के समझ लेना सूचनाओं में स्टिमुलेशन है,
- 35:30सूचनाओं में और भोगों में स्टिमुलेशन।
- 35:35और स्टिमुलेशन तुम्हें सुख का आभास दे सकते हैं लेकिन एक और भी
- 35:43तल है जहाँ स्टिमुलेशन नहीं होती नॉन स्टिमुलेशन में जाते हो तुम?
- 35:51जहाँ किसी प्रकार का उद्वेघ नहीं होता वहाँ शीतलता घनी होती है,
- 35:59शांति होती है और वहाँ सुख नहीं होता, वहाँ आनंद होता है तो मैंने
- 36:06आपसे बहुत बार कहा आनंद में और सुख में।
- 36:10क्वांटिटेटिव फर्क नहीं है संख्यात्मक फर्क नहीं है
- 36:14क्वालिटेटिव फर्क है, गुणात्मक फर्क है अगर 25 वर्ष तक तुम
- 36:32सूचनाओं को इकट्ठा करो, क्योंकि खाली मन है कोरा कागज़ है।
- 36:37भर गया है। इतना भर गया है और शरीर भी
- 36:41तुम्हारा बड़ा जीर्ण शीर्ण हो गया।
- 36:44परमात्मा कहते हैं अब ये बेकार हो गया तुमने ठीक से काम धंधा लिया
- 36:47नहीं इससे चलो फिर तुम अगला घर देते हैं, तुम्हें ये टूट फूट
- 36:53गया। इसकी मियाद पूरी हुई है।
- 36:58अब अगले घर में चलो नया घर देते हैं बिलकुल दिमाग कोरा कागज़ अब
- 37:06बांचों इसपे क्या लिखोगे तो पिछला जम्प तो तुम्हे याद नहीं है।
- 37:16और ये जो पिछला जन्म याद करवातें हैं लाइफ पास्ट लाइफ फ्रीग्रेशन
- 37:21गलती से इनके जंजाल में मत पसंद मेरे पास रोज़ ऐसे के साथ बाबा
- 37:28पास्ट लाइफ फ्रीग्रेशन करवाया था जो बताया।
- 37:33उससे विवाद ही बड़ा उलझ गया। ये साइकोलॉजिकल हैं।
- 37:39ये तुम्हें पिछले जन्मो में ले जा सकते नहीं क्यों?
- 37:44क्योंकि पिछला जन्म जाना उसके लिए तुम बड़े स्वाधीन हो, बड़े
- 37:49स्वतंत्र हो, उसकी चाबी तुम्हारे पास है।
- 37:54ये तुम्हें हिप्नोटाइज़ करके, अपने वश में करके तुम्हारे मन को
- 37:58काबू में कर लेता हूँ और तुम्हारे भीतर कुछ चीज़ जो प्रवाहित करते
- 38:03हैं, वही तुम बोलना शुरू कर देते। मैं सदा ही कहा करता हूँ, कहीं
- 38:23कहाई चीज़ पे विश्वास मत करना है जनता मेरे चार शब्दों को सुन।
- 38:33जब तुम्हें ये लगने लग जाए कि हमारा नेता भ्रष्ट है, चोर है,
- 38:38पैखंडी है, झूठ बोलता है, यह दबता क्यों है किसी से जब छोटे छोटे
- 38:47देशों के मालिक या। होते दार दबती नहीं तो यह दबता
- 38:55क्यों है इतने बड़े मुल्का मल्क अब मेरी बात समझी अवश्य ही कोई
- 39:02दाल में काला नहीं है, दाल ही काली है और इसने जो भेड़ों का
- 39:08इकट्ठा किया है इकट्ठा। वह खरीदा हुआ है।
- 39:16वो चाहे मीडिया हो, कुछ लोग सदा ही जिंदा रहते हैं।
- 39:21ईमान वाले उनको तुम कुछ भी दे दो। धरती का साम्राज्य भी दबो नहीं
- 39:28पलटें। लेकिन वो पलट जाएंगे।
- 39:32उन्हें तुम कोई भी ओहदा दे दो छोटा सा कोई बड़ा ओहदा दे दो, यही
- 39:38तो तमन्ना थी। उनकी दो चीजें हैं, जिनसे व्यक्ति
- 39:46खरीदा जा सकता है, ध्यान रख लो। ये चाणक्य की नहीं, यह मेरी
- 39:50वृत्ति है, मैं मैं खोजा हूँ इस चीज़ को खुद की खोजी हुई इन्वेंशन
- 39:56है, बोरी चाणक्य भी है लेकिन चाणक्य की बातों का आपको नहीं
- 40:01बताऊँगा। चाणक्य की बातों को स्वयं अनुभव
- 40:04करके फिर बताऊँगा एक है। दूसरा है दाम, दाम चुकाओ यह भयभीत
- 40:18करो, बस दो दो काफी हैं शाम दान दंड भै।
- 40:26दंड से नहीं बात बनेगी दंड का भेद खात हो बस भ और दान अगर कोई
- 40:36व्यक्ति भयभीत न हो और अक्सर जिन्होंने जिंदगी जी ली वह भयभीत
- 40:44नहीं। 50 साल के ऊपर का व्यक्ति करीब
- 40:49कृत निर्मोही भी हो जाता है। वह कहता है जान जाए जाए कोई बात
- 40:53नहीं बिकूंगा बूढ़े व्यक्ति से मरने का भेद खाके तुम कुछ छीन
- 41:01नहीं सकते क्योंकि वह तो मरमरा है।
- 41:06जवान को तुम बहबीद कर सकते हो, जवान को तुम दाम दिखा सकते हो,
- 41:12झूठे वायदे कर सकते हो और जवानों की आज देश जवानों का भरपूर नेता
- 41:20जवानों का भरपूर उपयोग कर रहे। क्योंकि हमारी 60% से ज्यादा
- 41:26आबादी जवान है। अगर नेता सच में समझदार होते तो
- 41:32इन जवानों की शक्ति का लाभ उठा सकते थे, लेकिन उन्होंने महज चार
- 41:38बार छह बार कपड़े बदलने के लिए। महज जहाजों पर सारी दुनिया घूमने
- 41:43के लिए, अपने स्वार्थों की पूर्ति करने के लिए, अपने भीतर की
- 41:48वासनाओं को पूरा करने के लिए तुम सबको नरक में दकेल दिया।
- 42:00और तुम तुम हो के सोये हो, तुम आज भी शरीर से जवान हो चौबर, लेकिन
- 42:11तुम देखते ही लॉलीपॉप और आइस क्रीम और चॉकलेट।
- 42:21तुम बिक जाते हो बस ये विदेश मंत्रालय देना या गृह मंत्रालय दे
- 42:29देना या कोई और मंत्रालय दे देना कोई राज्यपाल बना देंगे।
- 42:37कोई तरक्की कर देंगे, तुम बिक जाते हो, इतने में संत हृदय कभी
- 42:45नहीं बिकेगा। संत हृदय अगर बिक जाए तो समझना वो
- 42:51संत हृदय है। इसलिए कभी भी कितना भी बुरा वक्त
- 42:57आ जाए। संत हृदय कब नहीं बिकेगा?
- 43:03वह मरेगा, मरना स्वीकार करेगा, बिकना नहीं, अपना मोल नहीं
- 43:10डालेगा, अब हम वापस आ जाए। उपदेश काफी हो गया साई कॉलेज जब
- 43:24तुम अपने भीतर जाओगे और यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए जरूरी है
- 43:28कि ध्यान में उतरे, क्योंकि अंत में तुम पाओगे।
- 43:34के ध्यान में जो तुमने पल बिताए वो सोने के हो गए और भोगों में जो
- 43:40तुमने पल बताए वो माटी हो गए, ढेले हो गए, कचरा हो गए, दुख देने
- 43:48लगे, शुरू हो गए बबूल बबूल का पेड़ हो गया।
- 43:55ये अनुभव की बातें हैं सब और तुमने कहा, पुत्र मेरे भीतर से
- 44:03आया कि मेरे पिताजी काश मर जाते ऐसी बहुत सी बातें हैं।
- 44:12किसी बेटे का मेरे पास आ जाता है कि मेरे मन में आया, अपनी बहन के
- 44:20साथ बहन का आया कि अपने भाई के साथ।
- 44:29समझ लेना मेरे इशारों को क्योंकि ज्यादा बोलना फिर बंगाली में कहते
- 44:36हैं बोलेंगे तो बोलेंगे कि बोलता है बस बोलेंगे नहीं ज्यादा इशारा
- 44:43समझ लेना। बहुत से समाज ने प्रतिबंध लगाएं
- 44:48और एक बड़े मज़े की बात है। ये इतने मूर्ख हैं कि साइकोलॉजी
- 44:52को समित दें, जीस, पर तुम प्रतिबंध लगाओगे।
- 44:56मन उधर जाएगा तुम ऐसा करो। एक बिलकुल खली जगह के आगे एक
- 45:03पर्दा उसके ऊपर लिखो कि जहाँ अंदर झांकना बिल्कुल मना है कोई
- 45:12व्यक्ति अंदर ना झांके और आस पास कोई ना तुम देख लेना।
- 45:21वैसे तो तुम गुजर जाते थे, लेकिन यह पढ़कर तुम उस चदरिया को उठा के
- 45:30देखोगे भीतर? यह मनुष्य का अत्यंत स्वभाव है
- 45:36चीजों को उगाड़ लेना। और यह हमारे ऋषियों ने बखूबी
- 45:42जाना। आज स्त्री कहती है मेरी भुकत कम
- 45:48हो गई तो किसने करवाई तुमने खुद ही कर दी, ऋषियों ने तुम पर पर्दा
- 45:56डाला। पर्दे में ढिक्की रहती राज़ को
- 46:01राज़ रहने दो तो तुम्हारी कीमत थी बड़ी कीमत थी।
- 46:10सभी संतों ने अपने ग्रंथों में स्त्री का नाम लिया और रहस्यपूर्ण
- 46:15भाव से लिया। जबकि रस कहीं भी नहीं था।
- 46:25सभी जगह राशि हिनता थी, सभी जगह वासना थी, सभी जगह अपनी शक्ति को
- 46:34गंवाना था, एनर्जीलेसनेस होना था। लेकिन ये किसने पैदा किया?
- 46:40ये तुम्हारे ऋषियों ने पैदा किया तुलसी दास जैसे और तुम उनको संत
- 46:47कहते हो, राम चरित्र मानस का आज पाठ होता है, जबकि खुद वह मूर्ख
- 46:54था। जो परमात्मा तक वे शर्त लगा दे,
- 47:03कहा कहूं छवि आपके भले बने हो, नाच तुलसी मस्तक तब निव्य जब धन
- 47:12शुभान हो पात। अरे तुम्हे कृष्ण की मरेलिया
- 47:17अच्छी नहीं लगती, कितनी प्यारी यार संगीत में खेलती है तुम्हे
- 47:23अच्छी नहीं लगती, वो नहीं कहता, धनुष बाण उठाओ अवश्य ही कोई
- 47:28व्यक्ति अपराधी टाइप का होगा। क्यों कहता है शस्त्र उठाओ?
- 47:35ये संगीत नहीं चाहिए मुझे शस्त्र उठाओ वो एक मूर्ख सी कोई आज कल जो
- 47:41राज़ कर रही है कौन सी है जो पार्टी बी जे पी वो कहती है
- 47:45छुरियों को किट्ठा कर लो दहाड़ दिलवा लो क्यूँ भाई क्या करना है?
- 47:53बस यही कुछ लेके आए हो पीछे से और उसको दबाने वाला कोई उसको दंड
- 48:01देने वाला कोई क्योंकि जब अपराधी खुद ही राजगद्दी पर बैठा हो।
- 48:07वह दूसरे छोटे अपराधी को दंड क्यों देगा?
- 48:10उसने बड़ा अपराध किया। इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ जनता
- 48:18तुम इनको बदल डालो, कोई झगड़ा ना करो किसी प्रकार की।
- 48:28हाँ हूँ ना करो तुम संख्या में ज्यादा हो तुम इनको कहो नीचे आ
- 48:38जाओ बस इतना ही बहुत जो डराती है तुम्हें।
- 48:48निश्चित ही आज नहीं तुम कहने को हो कल कल जल्दी ही आने वाला है जब
- 48:56तुम कहोगे इनसे नीचे उतरो, इनकी कॉलर पकड़ लोगे, क्यों?
- 49:04क्योंकि इन्होंने तुम्हें बेहद। और मैं तुम्हें एक सूत्र बताया,
- 49:10सकलाजी का मनोविज्ञान का जो तुम्हें भेद गाथा है, उनके प्रति
- 49:14तुम नफरत से भर जाते हो, प्रेम से संत के प्रति तुम प्रेम से भरते
- 49:19हो, उसके तो गले लग जाने को दिल करता है।
- 49:25उसकी मीठी वाणी से प्रेम हो जाता है।
- 49:28संत के भीतर से ऐसी आसानी तरंगें आती हैं कि संत अगर जाकर एकांत
- 49:35वणव में बैठ जाए, जहाँ कुरुवल निर्दई सांप, बिच्छू।
- 49:45या डाकू या शेर हिंसक जानवर रहते हैं, उनके बीच में कुटिया बना के
- 49:53बैठ जाते हैं और मज़े की बात मैंने देखी है।
- 49:59मज़े की बात के शेर उनकी गुफा की रखवाली करता है।
- 50:06शेर को क्या पता शेर ने कोई किताब तो पढ़ी है ये हिंसक है या हिंसक
- 50:12है, लेकिन शेर एक बहुत शानदार बात को जानता है क्या तुम्हारे भीतर
- 50:19से आती हुई आसानी रंगों को जोशी शांत कर देती है?
- 50:24उसके भीतर कुछ यंत्र ऐसे रखे हैं। सभी प्राणियों में यंत्र लिखे जो
- 50:30तुम्हारे शरीर से निकलते हुए रोए से निकलते हुए आसानी रंगों को पी
- 50:35लेते हैं और समझ जाते हैं कि यह व्यक्ति हमारा नुकसान नहीं करेगा।
- 50:41फिर वो तुम्हें पहरा देता। तुम्हें बचाने की चेष्टा करते
- 50:46हैं, तुम्हारे द्वार पर बैठ जाते हैं, पालतू पशु की तरह मैंने आपसे
- 50:54अपने जीवन की बातें बताई, बाबा धर्मदास की समाधि पर मैं जाता।
- 50:59जमींदार मुझे कहते हैं, मत बैठा करो।
- 51:01वह बड़े बड़े सांप है। दो चार कोपरे हमने मार दिए, मैंने
- 51:08कहा तुमने क्यों मारे कहता वो डट जाते हैं।
- 51:13मैंने कहा मुझे नहीं डस और डट जाएंगे तो कोई बात नहीं, यही तो
- 51:20मैं चाहता हूँ। पता चले भीतर से भाव क्या आरा
- 51:25भीतर से तरंगे क्या आरी और तुमसे पूछुंगा तुम नहीं बता सकोगे
- 51:30क्योंकि तुम्हारे भीतर वो यंत्र नहीं है, तुमने विकृत कर लिया।
- 51:34यंत्र है अभी निर्दोष मासूम पशुओं में पशु अब भी चालाक नहीं हुआ।
- 51:41और पशु कभी चलाते नहीं होगा। ये चाँद तारे, ये पेड़ पौधे हैं
- 51:48ये फिज़ाएं, ये हवाएं, ये फूल, पत्तियाँ कभी भी तुम्हारी जैसी
- 51:54चालाकी सीख नहीं पाएंगी ये सदह अपनी खुशबू में।
- 51:59फिजाओं में हवाएं बिखेरती रहेंगी। ये नहीं बदलेगी, आदमी बदलता जाएगा
- 52:09और प्रकृति न्यायकारी है, प्रकृति दयालु है।
- 52:13प्रकृति तुम्हारे मित्र से आती हुई रोम रोम से आती हुई तरंगों को
- 52:17पी लेती है, पहचान लेती है। और मैं बैठता था।
- 52:22बहुत बार मैंने आपसे कहा सांप मेरे ऊपर से गुजर जाता है, पांव
- 52:27के ऊपर से गुजर जाता है, शरीर पर चढ़ जाते हैं, मैंने पता से कुछ
- 52:36नहीं कहेगा। वो भी जिन रोम के ऊपर से वो चल के
- 52:39जाते हैं उन रोम के भीतर से अहिंसक करने आ रहे हैं, आसानी
- 52:47तरंगें आ रही हैं और जानवर के पास तो एक फॉर्मूला है शुद्धता का।
- 52:56तरंगें क्या है, ये मुझे मारना चाहता है या मुझे प्यार करना
- 53:00चाहता है। बहुत से साप सापों को मैं कुछ कर
- 53:03लेता हूँ। हाथ फेर लेता हूँ वो थोड़ा सा
- 53:08साइड पे हो जाती है, समझ जाती है मेरी बात को।
- 53:14आसानी तरंगों को पहचानते है हमारी सभ्यता में हाथ जोड़ने का है, हाथ
- 53:25मिलाने का है क्योंकि कौन जाने किसी के शरीर में कौन सी तरंगे है
- 53:31करने? हिटलर बहुत जानकार था।
- 53:35इस चीज़ का हिटल कभी किसी हाथ नहीं मिलाता, वो जानता था पता
- 53:41नहीं कौन सी तरंगे हैं इसके भीतर और कभी ये मेरी तरंगों को खराब ना
- 53:47करते। इसलिए ये जो हाथ बनाने की
- 53:51प्रक्रिया है, ये पश्चिम से आई पूर्व के देन नहीं पूर्व तो सदा
- 53:59नमस्कार हमारे के परिणाम का बस अपने ही हाथ सर्कल पूरा हुआ।
- 54:08दूसरे की तिरंगे अपने शरीर में प्रवाहित करना।
- 54:11तुम तो सुबह से शाम तक पता नहीं कितनों से रात मिलाते हो इसलिए
- 54:20तुम्हें पता ही नहीं चलता तुम्हारा असली चेहरा, तुम्हारा
- 54:23नकली चेहरा। जीस व्यक्ति को बेहद खिलाओगे वह
- 54:32तुमसे प्रेम नहीं करेगा और जीस व्यक्ति से प्रेम करोगे।
- 54:38वह तुमसे कभी नफरत नहीं करेगा। इसलिए संतों ने कहा प्रेम को
- 54:47फैलाओ, प्रेम को बांटो, प्रेम को बांटो, प्रेम ही मिलेगा।
- 54:54रिवेंज में ज्योत से ज्योत चगाती चलो प्रेम की गंगा।
- 55:05राह में आए जो दीन दुखी सबको गले से लगाती।
- 55:09चलो सिर्फ पुत्र तुम्हारे ही विद्र से यह विचार नहीं आया।
- 55:20सारी दुनिया के विद्र से ऐसे विचार आते हैं जहाँ भी समाज हैं।
- 55:28पशुओं में कोई समाज नहीं होता। वहाँ कोई मान्यताएँ भी नहीं होती।
- 55:35वहाँ कोई भ्रहमावाद भी नहीं होता। वहाँ कुछ उड़ा नहीं जाता।
- 55:40लबादा इसलिए आपने देखा। पशु कभी वस्त्र पैंट कोट डाल के
- 55:45आया है, कभी से, कभी हर्ष ने पैंट कोट डर छोटे से छोटा और बड़े से
- 55:58बड़ा जीव कभी लबाता नहीं उड़ता और तुम तो लबादे को जरूरी समझ के हो।
- 56:07फिर अगर महावीर नग्न हो जाएं, कल ही मैं कह रहा था महावीर आपको
- 56:14जानकर बड़ी हैरान है, अगर एक सूत्र किसने कहा मुझे बता दो, एक
- 56:20सूत्र बता दो, जिससे मैं कुछ भी न करूँ।
- 56:28और पहुँच ही जाऊं उस आनंद के पास कैवल की अवस्था में निर्वाण की
- 56:35अवस्था में परमात्मा तत्व के पास मैंने कहा एक।
- 56:45एक फॉर्मूला चाहते हो हम्म तो मान हो जाओ, हींग लगे ना फटकड़ी रंग
- 56:55भी जोखा दे, मान हो जाओ अपने भीतर उतरो।
- 57:07बस तुम मौन हो जाओ, अपने भीतर से उतरना शुरू हो ही जाओगे।
- 57:12इट्स नेचुरल प्रोसेसर भेल जब भी मलिए फर्जा तुम तेरे मुख दी किताब
- 57:24ले बैठा। किताब तो तुम्हारे सामने आ जाएगी
- 57:29बस तुम मान हो जाओ, वैसे भी वक्त तुमने बहुत खराब कर दिया।
- 57:34कितने जन्म खराब कर दिए और मैं तुमसे एक बात कहता हूँ।
- 57:40महावीर 12 साल छः महीने 15.5 दिन। मैं कैबेल को प्राप्त किया 15 दिन
- 57:54समाप्त हो गए थे, सोलहवां दिन शुरू हो गया था, सुबह सूरज निकल
- 57:58आया था, अरुणोदय के वेला थी। इतने दिन वो कभी से एक अक्षर भी
- 58:08नहीं बोले। कभी किसी से लोगों को बलाने की
- 58:13बड़ी चेष्टा करते हो? लोग कहते हैं बोले कुछ उसके कानों
- 58:18में किले ठोकने, बड़ा तरसाया, बड़ा तड़पाया लोगों ने।
- 58:24लेकिन वो नहीं बोले। एक शब्द तक भी नहीं बोले तुम्हें
- 58:36मैं अपना अनुभव बताता हूँ अगर तुम साथ साथ ये कांत तुम्हें बैठ जाओ।
- 58:51अगर तुम्हारे पास साधन हैं साधन संपन्न हो, तो वक्त मत गाओ, मैं
- 59:03तुम्हें पहली गारंटी देता हूँ कि वह है।
- 59:07फर्स्ट गारंटी क्यों? तुम ये कोशिश मत करना तुम्हारे
- 59:14साथ कैसे ट्रेन का इंसिडेंट होगा? हमारे साथ को नहीं होगा, मैं कहता
- 59:20हूँ तुम ऐसी भावना मन में मत रखो, मैं तुम्हें वहाँ ले जाऊंगा।
- 59:26जहाँ मैं पहुंचा जरूरी नहीं है कि एक सेम इंसिडेंट सभी के साथ वही
- 59:33घटित हो नहीं आखिरी इंसिडेंट सभी के साथ घटित होनी अनिवार्य है
- 59:40सभ्य स्यान एक मत वहाँ जाके सभी एक मत हो जाएंगे।
- 59:45मार्ग सब की चाही अलग ही क्यों न हो तो तुम सात वर्ष के लिए एक
- 59:55स्थान पर बिल्कुल मान होके बैठ जाना।
- 1:00:00लेकिन आज ऐसा मुश्किल है। फिर भी मैं कहूंगा एक 251050
- 1:00:09जीतने भी लोग धरती पे इतना तो होंगे ही जिनके पास से व्यवस्था
- 1:00:15है चुप करे किसी से बोले ना अपने भीतर।
- 1:00:24खाये पिए महावीर चले जाते महीना महीना भर किसे नहीं बोलते और
- 1:00:34देखिए उस राजा के पुत्र की राजा की हालत में कभी कभी।
- 1:00:41महावीर की जीवन चर्या शैली सुनकर मेरी आँखों में आंसू छलकते हैं,
- 1:00:54वो बेचारे भिक्षापत्र उठा के जाते हैं, घर के सामने खड़े हो जाते
- 1:00:59हैं। बहुत कुछ किसी का मन आया तो कोई
- 1:01:06रूखी सूखी बासी डाल दी और वो ही लेके चूम के वापस आगे खा लिया।
- 1:01:17ज़रा भी कोई आक्रोश। कुछ ये नहीं कहा कि स्वमर्च कम
- 1:01:23थी, ज्यादा था, नम कम था, ये गर्म नहीं थी, ये ताजा नहीं थी, एकल की
- 1:01:29बासी थी, चुप करके जाते घर के सामने खड़े हो जाते।
- 1:01:36फिर कोई घंटे 2 घंटे बाद कोई घर का मालिक आता और देखता वो उसे
- 1:01:42जैसा भी उसके पास उपलब्ध होता वो दे जाता है।
- 1:01:48अचानक किसी के घर में चले जाओगे, बता के जाओगे तो 100 प्रकार के
- 1:01:53व्यंजन बनाएगा। अचानक इसलिए अतिथि कहा गया बिना
- 1:01:57अतिथि के जो आ जाए वह अतिथि मेहमान को कहा गया।
- 1:02:01वो जब भी जाते मेहमान बन के जाते, बाहर खड़े हो जाते हैं।
- 1:02:08नग्न कोई वस्त्र नहीं होता। इतने बरस तक नग्न रहे।
- 1:02:15धूप भी आई। सर्दी, बारिश, गर्मी रात भी हुई,
- 1:02:22दिन भी हुआ लेकिन उन्होंने कभी वस्त्र नहीं पाया।
- 1:02:29इसी बात के ऊपर झगड़ा है स्वेतांबर और दिगंबर का।
- 1:02:32जिन्होंने देखा नहीं वो श्वेता पर कहते हैं कि नहीं जिन्होंने देखा
- 1:02:38और संग्रह ही वो कहते नहीं वो दिगंबर है उन्होंने कभी उनके शरीर
- 1:02:44की संरचना ही इतनी सुंदर थी, कोई भद्दे रखते ही नहीं थे।
- 1:02:49उनकी गोंगड बाहर थोड़ी थी तुम्हारी तरह।
- 1:02:54संत व्यक्ति अगर बिलकुल परसीमित हिसाब से खाता पीता है तो उसका
- 1:03:00पेट आगे नहीं आएगा क्योंकि चर्बी नहीं जुड़ेगी।
- 1:03:05तुम्हारा शरीर अस्त व्यस्त नहीं होगा, बड़ा वेल फिगर्ड होगा।
- 1:03:12और इसलिए महावीर को सर्व सुन्दर व्यक्तियों में से एक माना जाता
- 1:03:17है। कलयुग के सर्व सुन्दर व्यक्तियों
- 1:03:20में से एक माना जाता है कि बहुत सुन्दर थे महावीर बुद्ध का कहीं
- 1:03:27नाम नहीं आता। हालांकि सुन्दर तो बहुत भी बड़े
- 1:03:30थे। लेकिन महावीर को सर्वसुंदर माना
- 1:03:37जाता है क्योंकि वो नग्न रहते हुए भी उनको बच्चे के समान थे,
- 1:03:43निर्दोषता थी, मासूमियत थी, रोम रोम में बच्चे के समान आते।
- 1:03:49निर्दोष वापसी आते हाथ पसार के खड़े हो जाते जो मिलता चले जाते
- 1:03:55खालिद मुझे कभी कभी वास्तव में तुमसे कहूँ मैं रोने लग जाता हूँ
- 1:04:06उसे याद करके ऐसे महान पुरुष धरती पर रोज़ नहीं आती।
- 1:04:11कभी कभी आती है बस एक महावीर हो गए अब पता नहीं कब आएँगे कोई ऐसी
- 1:04:21लाचार ऐसी मासूम इन इनोसेंट बच्चों के समय?
- 1:04:32और कई बार तो जब मालिक उसे कुछ दे देता बात में वो मेरे पास तो
- 1:04:38परोठे भी बने पड़े थे। मैं तो भूल गया और बाद में भाग के
- 1:04:43देके आते, ये लो प्रभु गलती हो गए, ये सूखा भाषा हमे दे दो।
- 1:04:52तुम ये ले जाओ, कठोर दान के साथ ही दे देते कैसे भी वक्त आये
- 1:04:59लेकिन जैसे भी आये उन्होंने गुजारे और मैं तुमसे कहता हूँ ये
- 1:05:04बाबा नानक का फॉर्मूला तो बाद में आया, महावीर तो बहुत पुराने थे।
- 1:05:11महाबीर इसकी नींव डाल के गए। सुक्की में सी जैसी मिल जाए, ठंडा
- 1:05:24पानी पी लिया, बस सो गए, बढ़िया नींद आ गया।
- 1:05:31और 12 वर्ष 12.5 वर्ष तक करीब मान रहे।
- 1:05:38कुछ नहीं बोल रहा तुम अगर कहते हो कोई मंत्र नहीं कोई तंत्र नहीं,
- 1:05:44कोई जाप नहीं, कोई कुछ नहीं ये तो तुम्हारे शब्द कोंसले।
- 1:05:49तुम्हारी शरारती पीरों पगंबरों के बनाए हुए पीरों पगंबरों के शरारती
- 1:05:54पीरों के कहता हूँ, स्वच्छ पीरों के नहीं देता हूँ, उन निर्दोषों
- 1:06:01की बात नहीं करता हूँ, मैं तुम्हारी शरारती पांडाली इनकी बात
- 1:06:07करता हूँ। जो अपने चेहरे, मोहरों से तुम्हें
- 1:06:10लूट लेते हैं, उन्होंने कभी पाखंड नहीं किया, उन्होंने कभी किसी को
- 1:06:21दुख नहीं दिया। हर बच्चा, हर परिंदा, हर पशु।
- 1:06:27उनसे प्रेम करता था। कहते हैं ये दृश्य मैंने देखा
- 1:06:33नहीं। महावीर के संग पीछे पीछे निर्दोष
- 1:06:38पशुओं की जमात होती है। कभी कभी शेर भी उनके साथ चलते
- 1:06:44बघेरे चीते भी उनके साथ चलते। निर्द्वस्ता ही इतनी थी भीतर से
- 1:06:56प्रकृति बोलती है अणुमो में से बाहर निकलती हैं तरंगें इसलिए
- 1:07:04जिन्होंने कलियुग में जाना आज। अब ये मेरा मेज़रमेंट अच्छे से
- 1:07:12समझ लेना क्योंकि बस कोई जिंदगी ज्यादा नहीं होती आदमी की जिसने
- 1:07:22कलयुग में जाना, उसके पास एक ही उपाय बजता है आज की एक कमरे में
- 1:07:28बैठ जाओ, चुप कर। और फिर पशुओं को बुलाओ एकठ मत करो
- 1:07:38तो ठीक कहा, बाबा ने कमीने मत बना देना क्योंकि थोड़े से लोग हैं।
- 1:07:41सीखने वाले वो ज्यादा जानते हैं। वे है वृहद मस्तिष्क का मालिक
- 1:07:50ज्यादा जानता है। जब मैंने पूछा किसी दूसरे को
- 1:07:56जिम्मेदारी दे दो तो उन्होंने क्या बोला?
- 1:08:00शायद आपने सोचा नहीं कहते दूसरा कोई है ही नहीं।
- 1:08:05सब बैतून बाज़ हैं बैतून बाज़ हैं।
- 1:08:10ये शब्द थे शब्दों की लफ्ज़े एक सिर्फ एक इसीलिए तुम्हारे पास आये
- 1:08:23और तुम्हें बोलना ही पड़ेगा। मैं मना ना कर पाया, मैंने बोला
- 1:08:30और आज तक बोलते चला तो कुछ थोड़े से प्रवचन रहेगा, वो भी आपके पास
- 1:08:35आ जाएंगे। आज के जमाने में जो पांडा लगा के
- 1:08:46बैठेगा, समझो उसके पास कुछ। खोने को कुछ है नहीं, लेकिन संत
- 1:08:55के पास खोने को सब कुछ होता है। संत के पास पूरी मानवता की धरोहर
- 1:09:04है। इसलिए संत की रक्षा जीव भी करते
- 1:09:12हैं, हिंसक जीव भी करते हैं शेर जैसे केन को कोई हानि ना पहुंचा
- 1:09:17जाए सांप बघेरे ये शंकर के गले में देखें सांप ये क्या संकेत
- 1:09:25देते हैं तुम्हें? कि जो व्यक्ति शुद्ध बुध होता है
- 1:09:31उसकी रक्षा विषैला जीव जंतु भी करते हैं।
- 1:09:34वह अपनी रक्षा आप नहीं कर सकते तो साँप बघेरे सांड ये करेंगे उनकी
- 1:09:43रक्षा। सांप जश्न लेगा?
- 1:09:49अगर तुम जाओगे और भी तुम अर्थ कर सकते हो।
- 1:09:54तुम्हारी खोपड़ी बढ़िया काम करती है, लेकिन सही अर्थ इसका यही है।
- 1:10:01के शंकर के शरीर का शिव के शरीर का रक्षा करेगा।
- 1:10:07वह एक कोबरे से भी बड़ा कोबरा। तुम उसके करीब जाके हिंसा नहीं कर
- 1:10:15पाओगे। ये सायकलॉजी का सिद्धांत है।
- 1:10:22तुम जिसे वेह दिखाओगे, मैं तुमसे प्रेम नहीं करूँगा इसलिए अगर
- 1:10:29वास्तविक प्रेम चाहती हो दुनिया तुम्हारे मरने के बाद तुम ही याद
- 1:10:35करें इतिहास में ही नाम ना हो। हृदय पर भी तुम्हारा नाम लिखा
- 1:10:42जाए। कृष्ण की तरह कृष्ण ने ज्यादा
- 1:10:47दुष्टों का वध नहीं किया कि नहीं चुना, अपनों का ही वध किया,
- 1:10:52ज्यादा शिशु पर उसकी बुआ के बैठे थे।
- 1:10:57कंस उसके मामा थे। यही कुछ तो वध किया उसने ज़रा संत
- 1:11:07ससुर से कर सके, अपनों का ही वध किया, दूसरों का वध कृष्ण ने नहीं
- 1:11:14किया, दूसरों का वध करवाया। अर्जुन कहते अर्जुन मैंने ये मार
- 1:11:23दिया, अब तू शस्त्र उठा इनको मार दे और सेहरा तू अपने सिर पे ले ले
- 1:11:32क्योंकि ये तेरे गुनाहगार हैं। लक्ष्य ग्रह बनवा के इन्होंने
- 1:11:37तुझे मारना चाहा तेरे साथ छलकपट करके इन्होंने हमारा राजपाट छीन
- 1:11:48लिया। इंद्रप्रस्थ छीन लिया।
- 1:11:5113 वर्ष तुम दर दर की ठोकरें खाते हो।
- 1:11:56तो गुनेहगार ये तुम्हारे जिनके कारण तुमने इतनी परेशानी भरा जीवन
- 1:12:02जिया, आज प्रकृति, परमात्मा, वक्त सबका तह ध्यान रखना डिडियां पींग
- 1:12:10न चढ़ न असमानु, ओं न हेठा ओं। ये पंजाबी की कहावत है जो आसमान
- 1:12:15में जाती है ना वो एक बार धरती के पास हो जाता है जो चक्कर आज ऊपर
- 1:12:22है आसमान की तरफ वो चक्कर कभी धरती को भी चूमेगा तो फर्श से
- 1:12:28अर्श और अर्श से फर्श, ये नीती का स्वभाव है।
- 1:12:33कभी मत सोचना कि हम सदा ही फर्श पे रहेंगे नहीं कभी तुम फर्श पे
- 1:12:38भी आओ और तुम भय मत फैलाना। अगर तुम पुरस्कृत रूप में प्रेम
- 1:12:50चाहते हो तो। अगर तुम प्रेम नहीं चाहते तुम
- 1:12:56नफरत चाहते हो लोग तुम्हारे जाने के बाद फिर जैसे मरे तो मैं क्या
- 1:13:03बताऊँ उसका पेट चीर दिया गया। मसौ लर्निंग का और गुरु थे।
- 1:13:09मसोलिनी का पेट चीर दिया गया। उसकी घरवाली का पेट चीर दिया गया।
- 1:13:15उसकी आतें 2225 फूट लंबी होती है। हमारे यहाँ वो दूर तलक ले गए,
- 1:13:22थोड़े थोड़े जिंदा थे, थोड़े थोड़े होश थे, क्या बेती होगी
- 1:13:27उनके ऊपर? और इतनी देर लगाई उनको मारने में,
- 1:13:35सारी दुनिया में सारे जीवन में जो उन्होंने पाप किए थे, थोड़े से
- 1:13:39क्षणों में ही उन्होंने भोंक दिया।
- 1:13:43दो 4 घंटे तड़पे ऊ। और दो 4 घंटे दो चार कर्पों के
- 1:13:51समान बीत हैं। ऐसा ही असर होता है वैध दिखाने
- 1:13:57वालों को तुम्हें कोई इतनी खासियत नहीं परमात्मा ने डाली।
- 1:14:03सबके शरीर इन पांच तत्वों से निर्मित हैं।
- 1:14:07तुम्हें कोई विशेषता नहीं है। अगर तुमने कोई झूठ बोल दिया,
- 1:14:11प्रखंड खिलार दिया, कुछ लोगों के भीतर तुमने गलतफहमी डाल दी, पूरी
- 1:14:16नहीं की तो 1 दिन तो उखड़ोगे ना जब उखड़ोगे बेटा फिर क्या होगा?
- 1:14:25फिर तो वही होगा तेरा क्या होगा? हर्ष तुमने पूछा कि जब मैं भीतर
- 1:14:34गया तो भीतर से आया, काश पिताजी मर जाते, सभी के भीतर ऐसा दबाया
- 1:14:42हुआ सब आता है। सभी चीजों को क्या करूँ?
- 1:14:47तुम्हारे भीतर से जो भी कुछ आता है, वो बस सिर्फ देखना, निर्णय मत
- 1:14:54करना, डू नॉट डिसाइड ऐट ऑल, ये गलत है।
- 1:15:00ये ठीक है क्योंकि वो समाज बोलेंगे ये गलत है, तुम नहीं
- 1:15:04बोलोगे। समाज ने तुम्हारे वीजे में मर
- 1:15:08दिया कीजिए करते हैं ये ठीक है तो सिग्मेंट फ्राइड कहते हैं कि अपनी
- 1:15:15ही पुत्री पर कामवासना उठती है। फ्राइड कहते हैं क्यों?
- 1:15:20क्योंकि जब तुम्हारी पुत्री बड़ी हो जाती है।
- 1:15:24तो तुम्हें अपनी पत्नी की याद आती है जब पत्नी तुम्हारे साथ नई नई
- 1:15:28ब्याही थी या डेट फेक चल रही थी तुम्हारे साथ उस रूप में बिल्कुल
- 1:15:36लोगों को नए नक्श होते हैं। तुम्हें वो याद आ जाती है और
- 1:15:39तुम्हें वासना उठती है अपनी ही बेटी के प्रति।
- 1:15:43लेकिन इट्स ए नेचुरल प्रोसेसर तुमने क्या करना?
- 1:15:47तुमने उस विचार को आने देना, विचार को जाने देना, कुछ भी आ
- 1:15:51जाए, कुछ भी आ जाए अब इसको ठीक से समझे ना उपाय बता रहा हूँ।
- 1:15:59बहुत कुछ आएगा जो समाज ने सिखाया। जब परिवार ने सिखाया जो लोगों ने
- 1:16:05सिखाया तुम्हारे गुरुओं ने सिखाया, तुम्हारे टीचर्स ने
- 1:16:10सिखाया और तुमने खुद भी माना वो सब आएगा, भीतर से खाली होना है।
- 1:16:22सब भीतर से आएगा, लेकिन तुमने किसी के साथ क्लिंग नहीं होना है
- 1:16:27ना किसी से लड़ना है, फिर ज़िन्दगी बेज जाएगी तुम्हारी
- 1:16:31लड़ने में या उसके पीछे चलने में? फिर तो तुम गृहस्थी होगे।
- 1:16:37गृहस्थ का मतलब ही ये है कि उस चीज़ के पीछे चलना।
- 1:16:44ना तुमने लड़ाई करनी और न तुने उसका अनु करण करना, अनुगामी बनना,
- 1:16:55झगड़ा भी नहीं करना क्यूँ भाई ये तो बहुत गलत विचार है।
- 1:16:59अभी किसी ने कुछ बोल दिया था, पता नहीं क्या बोला वो मुझे याद नहीं
- 1:17:04है। ठीक से अदालत के अंदर भी वो गए।
- 1:17:07किसी ने किसी बेटी के बारे में कुछ गलत कर दिया और शायद आज तक के
- 1:17:11तरीके में भुगता फैल रहा है। लेकिन किसी को पता नहीं कि ये
- 1:17:16स्वाभाविक है। ये भीतर से आया हुआ स्वाभाविक है।
- 1:17:23ये सभी के भीतर आता है। बस तुम उखड़ गए, तुम्हारे जज
- 1:17:27उखड़े नहीं, इतना ही फर्क है जब वो भीतर जाके देखेंगे वो ही यही
- 1:17:33यही पाएंगे जिन्हें वो गंध कहते हैं।
- 1:17:37उनके भीतर भी यही भूसा भरा पड़ा है।
- 1:17:40फर्क इतना है कि तुम उखड़ गए, जो पकड़ा जाए, वो जो जो ना पकड़ा जाए
- 1:17:45वो शादी तो उसको पता नहीं, मैं उसका केस नहीं जानता।
- 1:17:50कौन था वो नाम, नाम भूल गया लेकिन वो कहानी मैंने सुनी थी।
- 1:17:53ऐसा कुछ हुआ था। किसी ने कुछ कमेंट कर दिया था,
- 1:17:57उसका वो कोर्ट में गया था और कोर्ट ने जो कहा मैंने कहा अरे ये
- 1:18:04मूर्ख कहाँ से आ गया? लेकिन मुझे पता है ऐसे ही मूर्ख
- 1:18:07बैठे हैं गद्दियों पर अरे ये भीतर के तो हमारे अचेतन से निकले हुए
- 1:18:14शब्द हैं। जो तुम्हारे ही समाज ने किसी
- 1:18:17भांति भर दी है तुमने निषेध कर दिया।
- 1:18:20किसी चीज़ का तुम्हारा मन उस निषेध रस्तु की तरफ भागेगा या मन
- 1:18:27का स्वभाव है? तुम लिख दो, कहीं यहाँ झांकना मना
- 1:18:32है। हर व्यक्ति देख के जाएगा, देखें
- 1:18:34तो क्या है? ये मन का स्वभाव है तुम दबा दोगे
- 1:18:39उसको इसलिए उन्मुक्त छोड़ दो अपने मन को उन्मुक्त छोड़ दो मन को
- 1:18:46कार्य को नहीं मन को उन्मुक्त छोड़ दो मन को आजादी दे दो तो मैं
- 1:18:52जब यहाँ। किसी को दीक्षा देता हूँ तो मैं
- 1:18:55कहता हूँ मन में जो विचार आता है आने आने दो जाने दो तुम सहजता से
- 1:19:03बैठ जाओ। वैसे तो मन में विचार कोई उस्ता
- 1:19:07नहीं है। आम तौर से जहाँ आके तरंगे ही हैं
- 1:19:10ऐसी लेकिन फिर भी। अगर ज्यादा कचड़ा भरा पड़ा है तो
- 1:19:15उठेगा लेकिन तुमने कोई उसके साथ लड़ाई, झगड़ा नहीं करना, उसके साथ
- 1:19:22ईर्ष्या, द्वेष नहीं करना, छेड़छाड़ नहीं करना, उसे आने
- 1:19:26देना, उसे जाने देना, वह विचार है विचार सिर्फ विचार।
- 1:19:33ध्यान रखना और विचार शब्दों से हैं विचारकृत्य में नहीं बदला है
- 1:19:39विचार हैं विचार के साथ जब तुम्हारी चेतना जुड़ेगी यानी तुम
- 1:19:43जुड़ोगे तो वह कृत्य या कर्म बन जाएगा, बस उसको कर्म मत बनने
- 1:19:49देना। और कर्म बनेगा जब विचार के साथ
- 1:19:53तुम संघ हो, तुम्हारी चेतना की शक्ति उसे जड़ विचार के संघ
- 1:19:59जाएगी, तो वह कर्म में परिवर्तित हो जाएगा बड़े सरल शब्दों में
- 1:20:06गहरी बात कह रहा हूँ। कुछ भी आ सकता है, कुछ भी आ सकता
- 1:20:11है पता नहीं किसी के भीतर क्या है, लेकिन ये विचार सिर्फ विचार
- 1:20:18है, जैसे तुम्हें कुछ भी स्वपन आ सकता है तुम्हारे वश में है क्या?
- 1:20:23और तुम फिर उस स्वपन के लिए बहुत से पागल मैंने ऐसे दिखे हैं।
- 1:20:27अच्छा ये स्वप्न आ गया तो फिर तुम ऐसा करो, प्रायश्चित करो कोई
- 1:20:32प्रायश्चित नहीं करना है यह चेतन मन के इसे ही तुम्हें गंदगी कहता
- 1:20:39हूँ। ये बाहर आएँगे और बाहर आएँगे
- 1:20:43निकलने के लिए के लिए। इन्हें जाने देना, इन्हें आने
- 1:20:48देना, इन्हें स्वतंत्र घूमने देना।
- 1:20:51यह बाहर वातावरण में खो जाएंगे। बस ये है इनका आना जाना और इनका
- 1:20:59फल सफा अंतिम बिंदु ये निकल जाएंगे।
- 1:21:06प्रकृति में खो जाएंगे और प्रकृति बड़ी विराट है।
- 1:21:08इसके बारे में तुम जानते हो तुमने इनको संकीर्ण नियों में बांध
- 1:21:13लिया, इसलिए मैं मानव को पागल कहता हूँ, पागल सभ्यता क्योंकि जब
- 1:21:22तुमने प्राकृतिक चीजों को। ज़िन्दगी के साथ बांध लिया बंधन
- 1:21:28के रूप में तो वो तुमसे बड़ा पागल और कौन है कभी मत बांधो जिन्हें
- 1:21:38तुम वासना ही कहते हो तुम्हें पता नहीं वो सिर्फ उर्जा मुर्दे में
- 1:21:42कभी वासना आई? मूर्ते के आगे से तुम सुंदर से
- 1:21:47सुंदर पुरुष बलिष्ठ पुरुष यह सुंदर से सुंदर स्त्री गुजर जाए,
- 1:21:54वो कभी अक्टिव मोड में है नहीं आता, क्यों चेतना नहीं है?
- 1:22:00चेतना गई, फिर रो गई। दो चार हम निकल गए तो इस शरीर का
- 1:22:10कोई कसूर नहीं। इस विचार का कोई कसूर नहीं।
- 1:22:14विचार बाहर आएगा। तुम्हारे विचार में आया कि पिताजी
- 1:22:17मर जाएं, लेकिन ध्यान रखना ऐसे नहीं मरेंगे।
- 1:22:24और जहाँ जाकर विचार पूर्ण होते हैं उस स्तर पर ऐसा विचार आएगा
- 1:22:30नहीं कि परमात्मा बड़ा समझदार है वहाँ पर जाने के लिए पहले तुम
- 1:22:38शुद्ध हो। महावीर ने कहा, सत्य, अहिंसा,
- 1:22:42ब्रह्मचर्य प्रग्रह यही बात अंजलि ने कहा यही बुध ने कहा वो जानते
- 1:22:47हैं गाहे बगाहे जब तुम वहाँ चले जाओ तो ज़रा भी तुम्हारे भीतर और
- 1:22:51वासना अंश भर भी ना बचे क्योंकि वहाँ जो अगर तुम गलत मन लेके चले
- 1:22:59गए। तो दुनिया को बनिष्ठ कर दोगे?
- 1:23:03वह संकल्प का प्रगाढ़ रूप है जो तुम्हारे पहुंचते ही तुम जो
- 1:23:11सोचोगे वो हो जायेगा। बड़ा खतरा है, शक्ति भी घनी है।
- 1:23:18संकल्प भी घना है और खतरा भी घना है।
- 1:23:24इसलिए पुत्र ये चीजें आएंगी स्वाभाविक और शब्द मैंने प्रश्न
- 1:23:29आज मैंने बाद में क्यों दिया? क्योंकि ये मैं समझता था और
- 1:23:34प्रश्न आ जाए, जीतने आ जाएंगे। सभी का एकदम से निवारण हो जाएगा।
- 1:23:39जो भी कुछ आता है, उसे आने में फ्राइड पूर्ण पुरुष नहीं था।
- 1:23:44फ्राइड सिर्फ तुम्हारे, चेतन और अवचेतन तक पहुंचा इसलिए उसने
- 1:23:50अचेतन को दो भागों में बांट दिया सबकॉन्शियस एंड अनकॉन्शियस।
- 1:23:57जबकि ऋषियों ने सिर्फ अनकॉन्शियस कहा था फ्राइड सबकॉन्शस को ही
- 1:24:06खंगाल पाया। अनकॉन्शस को खंगाल नहीं पाया, फिर
- 1:24:11जैसा तुम देखोगी। इसलिए मैं इनको ईमानदार कहता हूँ।
- 1:24:16सब कॉन्शस तक उसने खंगाला और उसने कह दिया दो रूप होते हैं सब
- 1:24:22कॉन्शस, जो उथला उतरा है, ऊपर ऊपर यानी जो फ्राइड ने खंगाल लिया है
- 1:24:28और जो नहीं खंगाल सका, उसको कहा अनकॉन्शस।
- 1:24:34उसने इसके तीन रोग बना दिए। कॉन्शस समकॉन्शियस अनकॉन्शियस,
- 1:24:41जबकि थेज दो कॉन्शियस और अनकॉन्शियस उसके आगे दो आजाती
- 1:24:49सामूहिक सामूहिक। वो अनकॉन्शियस और कॉन्शियस लेकिन
- 1:25:01तुम्हारे इंडीविजुअल मन फ्राइड का तीन है।
- 1:25:06तीसरा तो वो खंगाल नहीं पाएगा, तुम्हारे भीतर से बहुत कुछ आएगा।
- 1:25:13और तुम्हें और बता एक प्रश्न छोटा सा है ये सूक्ष्म से आया बाबा आप
- 1:25:21बोले कि यह जो रस आता है वाणी से। यह पीता पीता वह व्यक्ति जो
- 1:25:31जापानीज़ सब वो पहुँच गया। क्या ऐसी भी कोई ढंग है कि हम भी
- 1:25:41उस शहद को जो आपकी वाणी से लबड़ के आता है उसको इकट्ठा कर लें?
- 1:25:50हाँ, बिल्कुल है, बहुत से लोग करते हैं।
- 1:25:54रात को सोते हुए इयरफोन को अपने कान में लगा लेना किसी को
- 1:26:00डिस्टर्बेंस नहीं होगा और वीडियो लगा लेना।
- 1:26:05कोई भी वीडियो लगा ले ना क्योंकि प्रत्येक वीडियो मैंने उस स्थल पर
- 1:26:10जाकर बोली है कोई भी ऐसी वीडियो नहीं, पांच चार वीडियो उसको
- 1:26:14छोड़कर जो कि उस स्थल के ऊपर जहाँ से बोला जा सकता है वहाँ जाकर ही
- 1:26:22मैं बोला हूँ हर चीज़। तो आप कोई भी वीडियो लगा लो लगा
- 1:26:27के सो जाओ एक तो नींद बड़ी गहरी जाएगी।
- 1:26:32जिनको इनसोमान्या की प्रॉब्लम है वो ऐसा करे क्योंकि जब तुम्हारा
- 1:26:38चेतन बेहोश होगा तो काट शाट नहीं करेगा।
- 1:26:43अब तुम्हारा चितन जगते में जब तुम मुझे सुनोगे तो कितने ही मुझे
- 1:26:48मानते हो, कुछ ना कुछ काट छांट करोगे, सेंसरशिप करोगे इसलिए वो
- 1:26:57रस नहीं पी पाओगे। ज्यादा ज्यादा मुझे समझने वाले तो
- 1:27:03पूरा पी जाएंगे और वह को पी गया जापानी, क्योंकि वो शब्द जानता ही
- 1:27:10नहीं। मैंने क्या बोला?
- 1:27:12उसके भीतर शुद्ध रस उतरा, रस इकट्ठा होता।
- 1:27:17क्या शब्दों का कोई प्रतिक्रिया आया ही नहीं?
- 1:27:20क्योंकि शब्द उसे पता ही नहीं मैं क्या बोल गया तो इस रस को सारी
- 1:27:27रात तुम पिओगे नींद भी घनी पड़ी है सब है तुम उठोगे बड़े फ्रेश
- 1:27:32उठोगे वीडियो कुछ चल नहीं तो। यह फॉर्मूला बहुत से लोग बहुत
- 1:27:41वर्षों से अपना रहे हैं। उन्होंने और करना धरना सब बंद कर
- 1:27:49दिया, लेकिन एक ये भी पूछा है कि जो करने की क्रिया है उसमें से
- 1:27:57क्या करें? सिर्फ क्रिया योग करो क्रिया योग
- 1:28:01स्वास्थ को लंबा लो लंबा छोड़ो और स्वास्थ को छोड़ते वक्त जो हूँ की
- 1:28:07आवाज आए ज़ोर से स्वास्थ छोड़ो तो हूँ की आवाज तुम्हे करनी ही
- 1:28:12पड़ेगी खुद से ही निकल जाएगी स्वास्थ जब लोगे भीतर।
- 1:28:17पूरा श्वास आगे न है कि बस एसएस जब इस है की आवाज आयेगी, तो
- 1:28:29तुम्हारी नाभि के पास पड़ी हुई कुंडली ऊर्जा उस पर आघात होगा
- 1:28:34हल्का सा। और ये हल्की हल्की आगात उसको सीधा
- 1:28:40कर देंगे। तो उस बच्चे ने कहा कि मेरी रीढ़
- 1:28:45एकदम से सीधी हो गई तो तुम फिकर मत करना।
- 1:28:50रीढ़ को सीधी करने का जब कुंडली जागृत हो गई उसमें इतना वेग और
- 1:28:54उर्जा है। वह खुद ही अपना मार्ग बना लेगी।
- 1:28:59तुम्हें रीढ़ सीधी करने की आवश्यकता नहीं है।
- 1:29:03कुंडली तो अभी जागृत नहीं हुई, तुम रीढ़ को वैसे ही सीधा कर रहे
- 1:29:07हो, रीढ़ अपने आप ही वो मार्ग बना लेगी।
- 1:29:11ये परमात्मा का दिया वो मार्ग है। बस कुंडली जागृत हुई तो सारा
- 1:29:17रास्ता उसके लिए कोई अनजाना नहीं है।
- 1:29:20वो तुम्हारी 1000 में चली ही जाएगी।
- 1:29:24तो अगर करना है कुछ तो क्रिया पर अगर सुनना है कुछ सुनिए दुख बाप
- 1:29:31का नाश। तो सिर्फ वीडियो को उस अवस्था में
- 1:29:34सुनो जब तुम्हारा चेतन सो रहा है किसी का छीनो मत सबको प्रेम करो
- 1:29:43छीनोगे तो कल को जो भली कोई और भी आएगा वो तुम्हारे से छीन लेगा।
- 1:29:48ये छीनने का रिवाज गलत है। परमात्मा ने सबको यकसा दिया है
- 1:29:53किसी के नाम रजिस्ट्रेशन नहीं करवाई।
- 1:29:56धरती की रजिस्ट्रेशन किसी एक व्यक्ति के नाम पे नहीं ये सब
- 1:30:01तुम्हारे गोरख देते हैं सारी दुनिया का मल्की ये तुम्हारी सबकी
- 1:30:08साँजी है। जीव जंतुओं तक की तुमने उनका हक
- 1:30:13खा लिया जैसे औरंगजेब ने छोटों का हक खा लिया, बड़े का हक खा दिया,
- 1:30:20धारा सिको का हक खा दिया और छोटे थे उससे वो भी मार दिया उसने,
- 1:30:26लेकिन हर चीज़ का। जो बांटों के वही मिलता है
- 1:30:29प्रकृति का नियम है तुमने भय बांटा।
- 1:30:35तुम्हें आखिर में व्यय ही मिले। डेढ़ सवेर तुम्हारे पास व्यय ही
- 1:30:39वापस आ जाएगा। तुमने ही दिया था तुम्हें ही वापस
- 1:30:43मिल जाएगा। यह प्रकृति का ढाँग है।
- 1:30:51क्रिया योग करो, खूब करो, दबा के करो क्रिया योग करने के बाद चुप
- 1:30:57हो के बैठ जाओ, कुछ करने की आवश्यकता नहीं।
- 1:31:02तुम्हारे अचेतन हल्के होने शुरू हो जाएंगे।
- 1:31:05और फिर जो निकलेगा उसकी तरफ तुम उपेक्षित दबाव से बैठे हो।
- 1:31:14क्या कहेंगे? हम इसको डिटैचमेंट इसी को कहते
- 1:31:22हैं अष्टवक्र बेरा किया। कैसे वैराग्य पैदा होते हैं?
- 1:31:29उनका सूत्र देखो भोगों से दुख पैदा होता है।
- 1:31:33भोगों से दुख पैदा होता है। दुख से वैराग्य पैदा होता है।
- 1:31:42तो जब तुम्हारे भीतर तुमने दबाया कुछ भी दबाया, कोई वासना दबाई,
- 1:31:47कोई विचार दबाया, कोई समाज की दी हुई कोई चीज़ गलत रोड़ियां यह दबा
- 1:31:54दीं जब तुम क्रिया योग करोगे। तो वो तुम्हारे चेतन में आएगा धूल
- 1:32:03की तरह जैसे फर्श के ऊपर भारी लगाते हो तुम और धूल उड़ता है
- 1:32:07आसमान पे वह आसमान है तुम्हारे चेतन में तो चेतन में वो धूल आएगी
- 1:32:15और आएगी निकलने के लिए वातावरण में खुनी के लिए।
- 1:32:20तो तुम उसके साथ किसी प्रकार का अटैचमेंट मत रखो, उसको आने दो
- 1:32:28आएगा ठहरेगा चला जाएगा तुम कोई छेड़छाड़ मत करो, बिलकुल उस पानी
- 1:32:35की तरह जो मैं रोज़ समझाता हूँ गंधला पानी।
- 1:32:39उसको एक कोने में रख दो, कंच के ग्लास में डालो, सुबह तुम पाओगे
- 1:32:44सारी माटी नीचे बैठकर शुद्ध पानी ऊपर आ गया तुम कुछ ना करो
- 1:32:52डिटैचमेंट भी सेवैरा के कहते हैं। कृष्ण भी सेवैरा के कहते हैं।
- 1:32:58आष्टा। वकरबी से वैरा के कहते हैं उपनिषद
- 1:33:00भी से वैरागी कहते हैं। यह फॉर्मूला तुमने पूछा है बाबा
- 1:33:10मैं क्या करूँ? ऐसी ही अवस्था में जो भी कुछ आएगा
- 1:33:15उसे आने दो। स्वागतम।
- 1:33:20जेड़ा जी आवै, सोरा जी जावे फिर जाने भी दो, पकड़ो मत उसे
- 1:33:26क्लिंगिकनेस का मतलब है तुम पकड़ लेते हो उसको नहीं पकड़ना नहीं,
- 1:33:32शिप करना नहीं, उसके पीछे नहीं चलना।
- 1:33:34उनका शीशे भी नहीं बनना है। वह विचार कहेगा तुम भोगो, बस तुम
- 1:33:42सिर्फ सुनो, डिटैच्ड रहो वैराग्य से भरे हुए क्योंकि वह विचार है,
- 1:33:50जाड़ है वो तुम्हारा नहीं है विचार की स्वतंत्र सत्ता है।
- 1:33:56वो तुमसे अलग है। तुम इस अलग सत्ता को पहचानने की
- 1:34:02चेष्टा करो, अपने आप से जुदा है, ये तुमसे विचार जड़ है।
- 1:34:07तुम चेतन हो इसीलिए तो देख पाते हो इसे मेरे ख्याल में सारी
- 1:34:13प्रोसेसर तुम समझ गए हो। लेकिन अगर फिर भी कोई कमी रह गई,
- 1:34:17मुझे प्रश्न कर सकते हो। यह अचेतन में से आई हुई बात है।
- 1:34:23साइकोलॉजी अवश्य पढ़ो और कोई प्रश्न तुम्हें आता है जीने का
- 1:34:28ढंग तो पूछो एआई से वो तुम्हारी सारी समस्याएं हल करें।
- 1:34:37देखिए जिससे तुम पूछते हो उस व्यक्ति की खुद की बात नहीं, मुठी
- 1:34:43नहीं। पहली बात अगर मिटी होती तो वह
- 1:34:46नहीं कहता कि संस्था के हाथ मजबूत करो, कम से कम इतना तो है।
- 1:34:54उसमें लोह पकड़ा है, संस्था के हाथ मजबूत करो, वह इतने ज्यादा
- 1:35:01सब्सक्राइबर बनाने का यह एक वासना है।
- 1:35:07अपना फैलाव हो गया उसका। तुम चाहते हो करोड़ों में सारी
- 1:35:12धरती मेरी अनुयायी बन जाए तो कृष्ण कहते ऐसे अनुयायी मत बनो,
- 1:35:20अनुयायी बनानी है तो तुम अपने भीतर उतरो, तुम्हारा फैलाव ही
- 1:35:25इतना है कि सारी सृजना में तुम समा जाओगे।
- 1:35:29सारी सृजना कम हो, ऐसे ऐसे बनो नहीं आई फैलो, सारी विश्व में
- 1:35:35फैलो उसे तुम प्रेम कह दो, उसे तुम करुणा कह दो, इसे तुम फैलाव
- 1:35:41कह दो अष्टावकर कहते हैं, याज्ञ बल के कहते हैं फैल जाओ।
- 1:35:49तुम असीम हो, हमारा कोई और छोर नहीं है तो यह सिर्फ सीखना नहीं
- 1:35:56है। हमने ये होना है।
- 1:35:58हमने इसको सिर्फ थ्रोटिकल सूचनाओं की तरह नहीं करना है जैसे आचार्य
- 1:36:06लोक किए बैठे। हमने फैलना है इन प्रैक्टिकल और
- 1:36:11कैसे फैलोगे अपने भीतर जाके फैलोगे उस पॉइंट पे जाओ जहाँ पर
- 1:36:16तुम अनंत का विस्तार हो जाते हो। यह बात प्रैक्टिकल की है, शायद
- 1:36:22काम समझ पड़े लेकिन भीतर जाओगे। फैलोगे तो तुम सभी समझे जाओगे फिर
- 1:36:34तुम वहाँ पहुँच जाओगे, जहाँ आनंद और अनंत का विस्तार है।
- 1:36:54सितारों पे ले चलूँ दिल झुंझा। ऐसी बहारों में ले चलूं आओ अजहर
- 1:37:14आओ सितारों पे ले चलूं। दिल झूम जाए ऐसी बहारों पे ले
- 1:37:32चलूँ आओ हजूर आओ। धन्यवाद।