Latest / Baba ji Vijay Vats / 15 Jan 26 - मकर सक्रांति का असली सच: भीष्म पितामह ने क्यों चुना यह दिन? 58 दिन का इंतजार क्यों?
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- 0:17स्वामी संदीप भारती। बाबा जी मकर संक्रांति का क्या
- 0:39महत्त्व है? क्यों भीष्म पिता मानें 58 दिन तक
- 1:04वान शिया का दर्द सहना ठीक समझा जबकि वो।
- 1:14प्राणों को अपनी इच्छा से पहले भी छोड़ सकते थे।
- 1:20सुंदर सवाल या पुत्र? शांतनु ने देवव्रत को यह वरदान
- 1:31दिया था कि तुम जब चाहो मरोगे। तुम्हारी मृत्यु तुम्हारी इच्छा
- 1:38के बिना नहीं आएगी। किसी भी बात को हम ज्यादा नहीं
- 1:50खोलेंगे क्योंकि अगर कहीं भी भटके तो प्रसंग इतना लंबा हो जाएगा।
- 1:59कि मैं अपनी पूरी जिंदगी में बोल न सकूँ।
- 2:04यह विराट संसार की विराटता है लेकिन उसका उत्तर सिंबल्स में
- 2:14दिया जाता है। मकर संक्रांति क्यों?
- 2:25भीष्म पिता माने मकर संक्रांति को देह त्याग के लिए चुना जबकि।
- 2:3358 दिन शेष बजे के अभी मकर सर आइए हम इतिहास के गहरे परतों में उतर
- 2:42चले महाभारत का युद्ध। आज कल हम जब दिवाली मनाते हैं,
- 3:00कार्तिक की अमावस्या को पोषण शुरू हुआ था।
- 3:10जीस दिन हम दीपावली मनाते हैं। वो उसका पहला दिन था युद्ध का नोट
- 3:18करने वाले अपनी डायरीज में नोट कर सकते हैं वहाँ से लेकर।
- 3:31वेषम पितामह सबसे पहले पहले सब के कमांडर इन चीफ थे क्योंकि सबसे
- 3:42बड़े थे बुजुर्ग थे और निसर्ण आते थे।
- 3:51उनका हक भी बनता था। 10 दिन तक वेषम पिता माने युद्ध
- 4:07लड़ा। जब कृष्ण ने देखा कि अर्जुन के
- 4:17बाण किसी योद्धा के बाण नहीं है तो कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि
- 4:27अर्जुन तेरे बाण पोते के बाण है। पोते के भान है न कि योद्धा के।
- 4:39अतः अपने वर्णनों की गति को पैने पन को बढ़ा दें।
- 4:48नहीं माना अर्जुन। तो कृष्ण खुद नीचे उतरे और
- 4:54उन्होंने किसी रथ का पहिया उठा लिया और जब उसको शस्त्र की तरह
- 5:03चराने लगे तो अर्जुन पांव में पड़ गया।
- 5:08अर्जुन कहता प्रभु ने, क्योंकि वह उनका विराट और स्वरूप देख चुका
- 5:15था। नहीं, अब मेरे वर्णनों में इतना
- 5:22पैनापन होगा कि मैं 1 दिन में ही धराशायी कर दूंगा।
- 5:28तुम एक बार इसको रथ के भइया को छोड़ दो और कृष्ण ने व्रत का पिया
- 5:35छोड़ दिया। क्रोध तो भगवान को भी आता है
- 5:45लेकिन आता कब है? जब पापी व्यक्ति या पापियों के
- 5:50संग रहने वाला व्यक्ति पति रेख कर देता है और सामने वाला व्यक्ति
- 6:02कोई जवाब नहीं देता। तो भगवान को खुद शस्त्र उठाने
- 6:07पड़ते हैं। यही इस कहानी का गहरा अर्थ भी है।
- 6:19अर्जुन ने वाणो का तीखा पन पैना पन शुरू कर दिया।
- 6:24और भीष्म धराशाई हो गया। साँझ ढलते ढलते भीष्म वाणी
- 6:32सेयापथी और ये बहुत बड़ा महारथी था।
- 6:54खैर लेकिन उस दिन तो नौवीं तिथि थी।
- 7:01कार्तिक के शुक्ल पक्ष कार्तिक के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को शुरू
- 7:10किया था। युद्ध का पहला था और कार्तिक के
- 7:16कृष्ण पक्ष को शुरू किया था शुक्ल पक्ष की नवमी को।
- 7:21सांज ढलते ढलते यही करीब 4:05 बजे के करीब भीष्म पदामा वानसिया पर
- 7:35लेट गए। उस दिन का युद्ध खत्म हो गया।
- 7:46बेश्म ने कहा हे माधव शरीर का रोमा रोमा दर्द से कराह रहा है।
- 8:00लेकिन मैं अभी प्राणों को त्यागना नहीं चाहता।
- 8:08मुझे वरदान है स्वेच्छिक मृत्यु का, इसलिए मैं प्राणों को
- 8:15त्यागूंगा कब जब सूर्य। मकर की तरफ मकर में दान से मकर
- 8:29में प्रवेश कर मकर की तरफ मुख करेगा।
- 8:37ये समझने वाली बात है। तुमने कहा कि मत भेद हैं और अगर
- 8:46गणना के हिसाब से देखें तो ये 70 दिन बनते हैं।
- 8:50बिलकुल बनते हैं फिर ये शास्त्रों में।
- 8:5858 दिन या 56 दिन या शताब्दन क्यों दिखा रहा हो?
- 9:03आइए ऐसे समझते हैं और महत्त्व भी समझते हैं।
- 9:15क्यों चुना? क्या कारण था?
- 9:20क्यों दर्द को इतना बड़ा है बेशम पिता अम्मा ने उसका कार्थ बेशम
- 9:36पिता अम्मा एनलाइटन तो थे। लेकिन एनलाइटन्ड से आगे की जो
- 9:47मैंने आपको बताई यात्रा, वह भी विषयों की हुई नहीं थी।
- 9:54अगर कोई एनलाइटन्ड पर्सन जैसे ही सूर्य मकर की तरफ मुख करता है।
- 10:10उसको आधुनिक पंचांगों के हिसाब से आप देखोगे पंचांग में लिखा होगा
- 10:17सूर्य, सायन, सायन और नारायण। जो दो गतियाँ होती हैं, दो
- 10:25स्थितियाँ होती हैं, जब सूर्य सायन मकर में हो जाएगा, वो वेला आ
- 10:37गया कि जब उत्तरायण शुरू हो गया। और उत्तरायण में प्राण त्यागना से
- 10:48क्या होता है बहुत गहरा विषय हम फाउंडेशन से चले प्रत्येक व्यक्ति
- 11:04के जीवन में। आकाशीय गणनाएं आपके क्षेत्र का
- 11:16भाव सर्कमस्टैंसेस यह काउंट करते हैं।
- 11:25देश, काल और परिस्थिति जैसा आप समझो, क्या आप बड़ी मौज में हो?
- 11:39कोई खुशखबरी मिल गई है, आप नाच रहे हो?
- 11:46एन्जॉय कर रहे हो उन मोमेंट्स को और परमात्मा ऑक्सीजन को खेंच ले।
- 12:00क्या हुआ? क्या तुम जश्न मनाओगे?
- 12:09नहीं बना पाओगे क्यों? क्योंकि सरकमस्टैंसेस बदल गया।
- 12:16अगर सरकमस्टैंसेस बदल जाए तो तुम्हारा अहंकार प्रतिक्षण जमीन
- 12:25पर गड़बड़ेगा। यह सर्कमस्टैंस से भी यह है जो
- 12:34तुम्हारे अहंकार को चालू रखने में मदद करता है।
- 12:43तुम कितना ही नाच रहे हो। अगर वह सर्जन हारा ऑक्सीजन को फेच
- 12:50ले, ये एक ग्रह के ऊपर हुआ था। मुझे याद आता है।
- 12:58बायो ग्राफी में मैंने बोला भी था।
- 13:03किसी ग्राहक के ऊपर किसी वैज्ञानिक ने ऑक्सीजन खींच ली थी
- 13:10क्योंकि सारा ज़माना वहाँ का राज़ तंत्र उसके खिलाफ़ हो गया था।
- 13:25इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ संत से पंगा मत लेना पता नहीं वह किसी
- 13:31ऐसी युगत को जानता है जिससे तुम्हारी साइंटिस्ट भी नहीं
- 13:38जानते। तो लेने के देने पड़ जाएंगे।
- 13:47तुम फौजी लेके आ रहे हो और संत वहाँ से ऑक्सीजन खींच ले, तुम आगे
- 13:56बढ़ नहीं पाओगे। इन्हें कहते हैं सर कमसेंस
- 14:01परिस्थितियां इस छोटे से उदाहरण से तुम सीख गए होगे पता लग गया
- 14:13होगा कि कैसे परिस्थितियों के हम गला।
- 14:19और परिस्थितियों के गुलाम होते हुए हम कहते हैं, मैं करता हूँ
- 14:28वास्तविकता क्या है वास्तविकता मैं करता हूँ इट डिपेंड्स अपॉन दी
- 14:35सर्कमस्टैंसेस। परिस्थितियां वैसी हैं, ज़रा भी
- 14:40उत्सुक हो जाये तुम्हारा शरीर गिर जाये।
- 14:43किसका भरोसा है भरोसा है किसी बड़े से बड़े सेट का कोई बिल
- 14:58गेट्स का कोई ऐलन मस्त का कोई भरोसा है अगला पल?
- 15:03सास आए के ना और तुम जुगत बैठाते हो 100 100 साल अब देखो आज के।
- 15:24राजनीति क्या करें? 2047 में विकसित वार्ता बना था।
- 15:32भरोसा बल का भी न यह मूडता की पराकाष्ठा है।
- 15:46तो मुझसे पूछ लेते हैं संत कौन संत?
- 15:49वह जो जानता है, मैं हूँ ही नहीं। मैं कुछ नहीं कर सकता।
- 15:57वह सही मायने में संत। वैश्यम पितामह वाज़ एनलाइटन
- 16:09पर्सन। लेकिन उस स्थल पर नहीं पहुंचा
- 16:17जहाँ कृष्ण पहुंचे कबीर पहुंचे, नानक पहुंचे, दादू पहुंचे, महावीर
- 16:24पहुंचे। मेरा मंच मीरा की कहानी अक्सर
- 16:32आपको मिलती होगी। मेरा वृंदावन में मूर्ति में
- 16:36समाहित हो गया यह सिम्बोलिक रिप्रजेंटेशन परमात्मा में मर्ज
- 16:42हो जाना यह कहता है। इन्सर्ट यूरसेल्फ़ कंप्लीट्ली और
- 16:49उसका सुराग भी न मिला। मीरा की भौतिक देह भी न मिली।
- 16:55कहानी कहती है यद्यपि मीरा मरी भौतिक देह छोड़ गई।
- 17:02और भौतिकुदे कहाँ दफन है मैं जानता भी हूँ आई कैन ट्रिस दैट
- 17:07पैरिस लेकिन यह एक सिम्बोलिक है तुम्हें प्रकात्मक रूप से समझाया
- 17:25गया है। कि जब आखिर में तुम परमात्मा में
- 17:30मर्द हो जाओगे, कंप्लीट्ली इन्सर्ट हो जाओगे तो परमात्मा ही
- 17:37हो जाओगे। जैसे बूंद समुद्र में मिलकर अपना
- 17:43बूंदत्व खो देते। और समुद्रत्व में समा जाती है,
- 17:51फिर वह कभी नहीं कहती। मैं हूँ बूंद की तरह, फिर वह कहे
- 17:57कि मैं हूँ और मैं ही हूँ और हम परमास्म।
- 18:07अनलहक यह वो स्थिति है जब मेरा वृंदावन में कृष्ण की मस्ती में
- 18:16समा जाती। जीस स्थिति में भीषण थे।
- 18:36उससे आगे का थोड़ा सा पड़ाव बाकी रहता है जो अभी बुद्ध का बाकी है,
- 18:44ओशो का बाकी है और बहुत से संतों का बाकी है।
- 18:51और बहुत से संत जो करुणावश रह गए। करुणा भी एक प्रकार का जी का
- 19:06जंजाल होता है। यह भी वासना है इतनी वासना भी ना
- 19:15रह जाए क्यों रहे? क्योंकि जब तुमने बनाया कुछ नहीं।
- 19:27अगर बताया हो तो मुझे बताओ और फिर तुम्हारे साथ मरने के बाद जाता
- 19:35कुछ नहीं, शरीर के कपड़े छोड़ो, गहने गड्ढे छोड़ो, जमीन जायदाद
- 19:41छोड़ो, यह शरीर अपने आप ही नहीं अपने साथ जाता।
- 19:46कहाँ तुम्हारे साथ जाता है सिर्फ़ तुम होते हो चेतना कब हो?
- 19:54अंश जो पत्थर से चला और उसके साथ उसके कर्म प्रारूप?
- 20:08दे ही जैसे मैं कहता हूँ और दे ही जैसे कृष्ण।
- 20:23वासंशी जलनानी अथव विहार नवानी घृणाती नरोपराण तथा श्री रानी
- 20:39विहार जीर्ण अननयाणि संयाति नवनि देही देही?
- 20:52वह देही का गलना ही निर्माण है, वह देही का गलना ही केवल है, देही
- 21:04का गलना ही मुक्त है। तुम प्रबुद्ध तो हो जाते हो अपने
- 21:21आप को जानने के बाद, लेकिन जानते कितना हो?
- 21:25मैं शरीर नहीं विचार नहीं मन बहुत सा।
- 21:30जानना भी शीष रह जाता है। न्यूटन ने मरते हुए कहा, आई हॅव
- 21:40कोलेक्टेड ओनली ए फ्यू फाइबर्स ऑन दी सीशोर।
- 21:50मैंने जाना ही क्या है? बहुत से समुद्रों में से एक
- 21:57समुद्र के किनारे कुछ कंकड़ पत्थर छीन लिए हैं छू गए हैं।
- 22:06व्हाई इस दी ओशन्स ऑफ़ नॉलेज के लिए मैं न नक्स प्रोजेक्ट जब कि
- 22:11अभी न जाने कितने समुद्र तो खोजे ही न गए वास्तव में कितने हैं कोई
- 22:18पता नहीं मैंने क्या किया है तुम मुझे महारथ ही न कहो।
- 22:27आई हैव कलेक्टेड ओनली ए फ़्यू पैड बारिश और नशीशा एक समुद्र के
- 22:33किनारे पर कुछ कंकड़ पत्थर मैंने चुना।
- 22:43यह विराट वास्तव में विराट है, कल्पना में विराट है, इसलिए मैं
- 22:51सदा से कहता हूँ, हिंदू कल्पना में जीता है।
- 22:59सभी धर्म पहुंचाए कि हिंदू नहीं पहुंचा क्योंकि कल्पना से पहुंचने
- 23:04का मार्ग नहीं है। प्रतिबद्ध है हिंदू नाम का धर्म?
- 23:20किसी द्वेष करने वाले ने जो नफरत करता था इन लोगों से सिंधु नदी के
- 23:29इस पार जो रहते थे उसकी इजाद है हिंदू।
- 23:39यद्यपि ग्रीक भाषा में है, को सह बोला जाता है जैसे पंजाबी में श
- 23:48को ख बोला जाता है। हम कहेंगे वर्षा पंजाबी में कहा
- 23:53जाएगा बरखा, हम कहेंगे शिष्य। पंजाबी में कहेंगे?
- 23:59सिख वैसे ही यूनानी भाषा में स नहीं बोला जाता है।
- 24:10बोला जाता है सिंधु को हिंदू कहा गया।
- 24:17और हिंदू जो धर्म आज आपने संजो दिया, मैं आपको सही मार्ग
- 24:26प्रदर्शित करने आया हूँ। मेरा किसी से कोई वैर नहीं है, ना
- 24:35कहूं से दोस्त? न काहु से बैर, कबीरा खड़े बाजार
- 24:41में सबकी माँ के खैर, लेकिन मैं भलीभाँति जानता हूँ कि हिंदू
- 24:50कल्पना में जीता है। और कल्पनाओं से केंद्र तक पहुंचने
- 24:57का कोई रास्ता है ही नहीं। तुमने कृष्ण को तो कब का छोड़
- 25:11दिया? कृष्ण तुम्हें समर्पित होना
- 25:17सिखाते हैं। काश।
- 25:20तुम यह सीख लेते हैं, कृष्ण तुम्हें समर्पित होना सिखाते हैं,
- 25:28सर्वधर्माणपत्र छोड़ दे इन धर्मो को धर्मो को चलाने वाले, धर्मो की
- 25:40व्याख्या करने वाले, धर्मो को सिखाने वाले।
- 25:46भी कहीं नहीं पहुँचेंगे। आप भी डुबो के सनम यजमान को भी ले
- 25:57डुबो के। हिंदू धर्म कल्पनाओं पे जीता है
- 26:15और देखिए मैं जब परिधि का चक्कर लगाता हूँ और परिधि के बीच में
- 26:22केंद्र तक पहुंचने का। सारे मार्ग ढूंढता हूँ तो मुझे
- 26:28कल्पना से केंद्र तक जाने का कोई मार्ग नहीं मिलता है, होता ही
- 26:32नहीं है इसलिए मैं इतने आश्वस्त भाव से बोलता हूँ कि सब पहुँच
- 26:43जाएंगे। उनमें कोई न कोई गुण है लेकिन
- 26:51हिंदू नहीं पहुंचेगा। क्यों हिंदू ने शाश्वत को त्याग
- 26:56दिया? हिंदू कृष्ण को कब का छोड़ चूके
- 27:00हैं? कृष्ण मानता था समर्पण तुमने शुरू
- 27:05कर दी पूजा। प्रचार पूजा शिव
- 27:18में मृत्यु को देवता है तुमने शिव के अनुष्ठान करने से कर दिया
- 27:33रुद्रभिशेक तुमने हर चीज़ को पूजा में डाल दिया।
- 27:44और उसके मूल तत्व को चुक गए। कृष्ण मानते हैं तुमसे समर्पण और
- 27:51कहते हैं समर्पण कर दे परिपूर्ण हम तुम सर्व पापे भव मोक्ष श्याम
- 27:57हिमांशु मैं तुम्हें तेरा। कहाँ अर्जुन ने प्रायश्चित किया?
- 28:07बताओ 40,00,000 लोग मरकर प्रायश्चित किया, अर्जुन ने नहीं
- 28:13किया कहाँ कृष्ण ने प्रायश्चित किया नहीं किया?
- 28:22क्यों? क्योंकि कृष्ण मूल तत्व को जनता
- 28:27है। सनातन जब हिंदुत्व में आ गया।
- 28:41तो बिखर गया सनातन अगर कृष्णमयी रहता तो ही भला था।
- 28:52जैसे ही सनातन ने कृष्ण का दामन छोड़ा।
- 28:58और पूजा में उलझ गया छठ सो पूजा और पूजन रुद्रभिशेक वगैरह
- 29:03कर्मकांडों में उलझ गया तो सनातन खो गया।
- 29:11कर्मकांड बचे और कर्मकांड तो महज क्रियाएं हुआ करती।
- 29:18उसमें कोई बदलाव नहीं होता, बदलाव होता है।
- 29:23हवन की सामग्री बन जानो, हवन में सामग्री को फेंकना नहीं, हवन की
- 29:31सामग्री स्वयं ही बन जाना। तुम्हारा अहंकार, हवन की सामग्री
- 29:39स्वयं ही बन जाए, तुम्हारा अहंकार ही आहूत हो जाए, सामग्री को ग्रत
- 29:48व्हाय तुम हवन सामग्री को ग्रत हो?
- 29:50एमडी एच यह बाजार से ले गए। और तुम्हें शायद पता नहीं इस आवन
- 29:59सामग्री में करोड़ों जानवर होते हैं जो साथ ही जल जाते हैं जो
- 30:08तुम्हें दिखाई भी नहीं पड़ता। ऐसी सामग्रियां मैंने बहुत बार
- 30:14देखी हैं। और तुम आग में उन्हें जला देते
- 30:19हो, फिर तुम कहते हो इसी ज़िन्दगी में मैंने कोई पाप नहीं किया ठीक
- 30:28कहते हो क्योंकि तुम्हारी आँखों ने वो पाप होता दिखाई।
- 30:39हवन में स्वयं को आहूत करना था। नाम यज्ञ में आपने स्वयं को उस
- 30:47यज्ञ में आहुति बनकर स्वाहा होना था।
- 30:52आप रेपेटिशन करने लगे। और मेरे पास लोग आ जाते हैं।
- 30:59देखो कृष्ण ने लिखा है हाँ लिखा है, मैं भी कहता हूँ मैं कहाँ में
- 31:05हूँ? लेकिन इस नाम यज्ञ का अर्थ क्या
- 31:10है उस यजीन की आग में? स्वयं की आहुति बन जाओ स्वयं की
- 31:20सामग्री को सामग्री क्या बनेगी तुम्हारा अहंकार हवन सामग्री नहीं
- 31:26तुम्हारी अहंकार सामग्री बना जाए और तुम्हारा अहंकार सामग्री बन के
- 31:32उस आग में स्वाह हो जाए। जैसे क्षमा में परवान स्वाहा हो
- 31:39जाता है। तुम बचोना तुम राख बिना रहो।
- 31:52मकर संक्रांति का दिन क्यों सुनो? कई डायमेंशन से बोलेंगे तो इसे
- 32:04समझने की चेष्टा करना। एक्सिस साइंस प्रैक्टिकल साइंस
- 32:12मैंने एक शब्द बोला था जब सूर्य सायन मकर में आ जाए।
- 32:18नरेन नहीं, सायन नरेन तो होली से अगले दिन क्षमा करना लोहड़ी से
- 32:25अगले दिन आता है, वह नरेन होता है, मैं सायन की बात कर रहा हूँ
- 32:36जब वह धानु से मक्कर के बीच में शुरू कर दी उसने यात्रा।
- 32:45मकर मुखी हो गया। वह तो उत्तरायण शुरू हो गया, उसी
- 32:52दिन से अब तुम खो सकते हो क्यों? क्योंकि सर्कमस्टैंसेस ठीक हो गए,
- 33:06अभी जो दिन चल रहा है, जैसे मैं आज बोल रहा हूँ, जब वीडियो
- 33:12तुम्हारे पास आएगी तब तक मकर संक्रांति होगी।
- 33:19सूर्य मकर राशि में अद्विष्ट हो जाएगा, लेकिन सूर्य मकर राशि में
- 33:32मुख्य तो बहुत पहले ही मर चुका है।
- 33:37जीस दिन सूर्य मकर राशि में मुख कर लेता है, उसको उत्तरायण कॉल
- 33:43कर। उत्तरायण तो करीब करीब 21 दिसंबर
- 33:48के आसपास अगर ईसा से गढ़ा न करें तो 2021 दिसंबर के आसपास उत्तरायण
- 33:56शुरू हो जाता है। तो उत्तरायण तभी का शुरू होगा,
- 34:10उसी काल से तुम्हारी अध्यात्मिक प्रगति शुरू हो सकती है।
- 34:22एनलाइटनमेंट से परमात्मबोधक, स्वयबोध से परमात्मबोधक, आत्मबोध
- 34:31से परमात्मबोधक जैसे ही सूर्य सायन मकर में पहुंचा।
- 34:42दिशा के हिसाब से करीब 2021 दिसंबर होगा।
- 34:55तो समझ लो सूर्य उतराय में आ गया। सूर्य जी ने अपनी दिशा बदल ली।
- 35:03पहले दक्षिण आयन था, अब उत्तरायण दक्षिण में ज्यादा किया गया
- 35:12प्रयास, कम फली बहुत होता है और उत्तरायण में।
- 35:19कम किया गया प्रयास ज्यादा फली बहुत होता है, इसे ही
- 35:25सर्कमस्टैंसेस करते है अगर ऑक्सीजन इतनी कम हो जैसे हम आज से
- 35:34भी पेड़ काटते है। तो हमें स्वास्थ लेना ही मुश्किल
- 35:39हो जाएगा। काम के खाक करें और यही हम सब
- 35:47आयोजन कर रहे हैं कुछ पागल हिंदुओं के पीछे।
- 35:57हिंदू वृक्षों को काट रहा है लेकिन जो गैर हिंदू है वो ग्रीनरी
- 36:05को बचाया जाता है। वो देखता है बेसिक फाउंडेशन ऑफ़
- 36:09लाइफ दट। इस ऑक्सीजन, ऑक्सीजन को बचाओ सबसे
- 36:15पहले। पवन गुरु पानी पिता पहले पवन को
- 36:19बचाओ फिर पानी को बचाओ, आपका पानी पी दूषित आज अभी मध्य प्रदेश में
- 36:29जैसे आप स्मार्ट सिटी बन गए थे। उसमें कितने ही लोग मर गए।
- 36:37पानी पीने से, पानी पीने से, शराब पीने से जहरीली शराब पीने से
- 36:42मैंने व्यक्ति मरते दिख लेकिन पानी पीने से इतनी ज्यादा मात्रा
- 36:49में पहली बार। लोग मुझे मरते दिखे।
- 36:52आपकी स्मार्ट सिटी के अंदर क्या है?
- 36:54यह कल्पना नहीं है, कल्पनाएं धोखेबाजी होती है और हिंदुओं ने
- 37:03इस धोखे को चुन लिया है तो धोखा किसी गैर से नहीं करोगे।
- 37:10धोखा तुम वैसे भी करोगे, दिल्ली का एक यूआइ कितना?
- 37:17क्या व्यक्ति को उसमें सांस लेना चाहिए?
- 37:20क्या तुम किसी फॉरेनर को यहाँ बुला सकते हो?
- 37:23घूमने के लिए उनके पास एक यूआइ के यंत्र होते हैं, वो देखेंगे।
- 37:29अरे? ये क्या?
- 37:30सात 800 1000 वो वापिस पड़ते जाएंगे यहाँ छुट्टियाँ मनाने नहीं
- 37:41आएँगे वो क्योंकि हवा सबसे जरूरी है पवन गुरु पानी पीता फिर दूसरा
- 37:47पन पानी पीते शुद्ध नहीं। माता धरती महत के 500 से भी
- 38:00ज्यादा वर्ष पहले बाबा नानक बोल गए हमारे भैया तो हम क्या बोलेंगे
- 38:06अपने वन अपनी? रिश्तों के लिए हम क्या देके जा
- 38:13रहे हैं उन्हें कभी सोचा यह जहरीली हवा यह विष मिलापन हम
- 38:26देखते हैं खुली आँखों से। लोग मरते हैं, हम ज़रा भी उससे
- 38:31बात नहीं होता क्यों? क्योंकि हमें जहरीले इन्जेक्शन
- 38:37देते हैं। बोलेंगे सिर्फ वही जिसकी या तो
- 38:42इम्युनिटी उस जहर को भी गई या जिसने लगाया ही नहीं।
- 38:47मैंने बाबा से पूछा। मुझसे मेरे किसी शिक्षा नहीं
- 38:51पूछा। बाबा जी वैक्सीनेशन लगानी है बाबा
- 38:58कहते हैं बिलकुल नहीं लगाना। जब दवा सही है तो पूना वालों को।
- 39:13डोनेशन क्यों देना पड़ता है? सरकार को आपातकाल चल रहा है।
- 39:20भाई कोरोना महामारी पैन्डेमिक बनके उभरा है, उसको इनाम देना
- 39:29चाहिए। क्या तुमने वैक्सीन बनाई?
- 39:32लेकिन उल्टा पूना वाला परिस्वा देता है, सरकार को भाग जाता है।
- 39:45वैज्ञानिक का घर खोजेगा तो इसके गहरे।
- 39:51परिणामों को नहीं खोज पाएगा। कौन खोजेगा वही जो सूक्ष्मदर्शी
- 39:59और सूक्ष्मदर्शियों से मैंने पूछा सबसे ज्यादा सूक्ष्मदर्शी और कौन?
- 40:05जिसने इस सर्जना को अंजाम दिया। बाबा कहते नहीं लगाना और मैंने जो
- 40:13मेरे जो मेरे प्रभाव क्षेत्र में आते थे, जिन्होंने मुझे पूछा,
- 40:20मैंने कहा बिलकुल मत लाओ, मैंने खुद भी निर्भय।
- 40:30क्या था? इसमें वैज्ञानिक से नहीं खोल
- 40:34सकेगा। इसमें कुछ ऐसा था जो अच्छे सवस्थ
- 40:46आदमी का अर्थ एक दम से। स्टॉप करता है।
- 40:57आपका सांस आय अगले क्षण आय और उम्र कितनी थी 22 साल उम्र कितनी
- 41:03थी 18 साल उम्र कितनी थी 23 वर्ष? जो व्यक्ति आत्माबोध को प्राप्त
- 41:17हो चुका है, उसने पर आत्माबोध तक जाना है तो यह दिन जिन्हें हम
- 41:25उत्तरायण कहते। आत्मा से परमात्मा बोध करने का यह
- 41:36इजी वक्त है। सहायक वक्त है सीधा सीधा मैं आपको
- 41:46मोटे मोटे तौर पर समझाऊं तो? आत्मा से परमात्मा होना इसी काल
- 41:56में ज्यादा संभव है। इसलिए आप देखो जो परमात्मा बोध
- 42:07में गए वो करीब वो उतराय में गए। जो दक्षिणायन में पहुंचे बुद्ध
- 42:15जैसे लोग वो आत्मतत्व तक ही सीमित रह गए।
- 42:23ब्रह्मात्मा तत्व तक जो पहुंचा वो उतरायण काल में पहुंचा।
- 42:34इसे अगर पंचांग में अगर आप देखना चाहो मैं उन शिष्यों के लिए भी
- 42:40बता दूँ कि सायन उत्तरायण लिखा होगा।
- 42:46सायन सूर्य मकर में उत्तरायण प्रारंभ।
- 42:53उत्तरायण की तरफ मुख हो गया है सूरज का और वह मकर में प्रविष्ट
- 43:01हो चला है। मकर के क्षेत्र में आ गया है,
- 43:07इससे बनती हैं ऋतुएँ। हर दो महीने के बाद यह सायन बदल
- 43:18जाता है तो 12 महीनों में यही छह ऋतुआ हमारे हिंदुस्तान में होती
- 43:26है। हर दो महीने के बाद साइन बदल
- 43:33जाएगा। अब साइन मकर है, कुंभ को छोड़ 212
- 43:41ही राशियां होती अब जब मीन में आएगा।
- 43:54तो अगला वक्त शुरू होगा ऋतु बदल जाएगी, अगली ऋतु शुरू होगी बहस
- 44:05बसंत ऋतु होगी। अब शिष्यर ऋतु है तो छः ऋतु ऐसे
- 44:11बनती है। दो दो महीने के बाद जब साइन बदलता
- 44:17है वैसे ऋतु बदलती है आप देखना पेंशन छः ऋतु दो दो महीने के बाद
- 44:31जब साइन में ग्रह आएगा। तब रेत में बदल जाएंगे।
- 44:40यह फिलॉसोफिकल बात नहीं है, यह गणित अग्रवाल, मैथमैटिकल है और
- 44:51मैथमैटिकल। कनेक्ट करती है।
- 44:54अध्यात्म के साथ यह मैं जोड़ रहा हूँ।
- 44:59साफ साफ जो सत्य है उसके साथ जुगाड़ नहीं है, ये ये सत्य है।
- 45:13उत्तरायण काल आत्मा से परमात्मा होने की यात्रा में बहुत साधक
- 45:22करता है, बाधक नहीं होता, साधक होता है, दक्षिणाइन काल बाधक होता
- 45:29है। तो उस दिन जैसे पूर्ण रूप से मकर
- 45:39में सूर्य अदृष्ट हो जाएगा, उसे मकर संक्रांति कहते हैं।
- 45:50यह सब आध्यात्मिक उपाय थे हमारे विषयों के जो हमने कर्मकांडों में
- 45:56तब्दील कर दिया। यहीं हिंदू धर्म मार्ग आ गया वरना
- 46:01उसकी विरासत बड़ी शानदार थी पुनः हिंदू धर्म को हिंदू धर्म छोड़ना
- 46:09को। पुनः हिंदू धर्म को सनातन में
- 46:13प्रवेश करना होगा तो फिर उससे बढ़िया कोई धर्म नहीं।
- 46:22जब तक हिंदू हिंदू की तरह रहेगा, वह रोज़ ज्यादा पागल होता चला
- 46:27जायेगा। और 1 दिन ऐसा आएगा कि पागलों में
- 46:33पागलों का कोई पता ही नहीं चलता। सारा हिंदुस्तान पागल हो जाएगा जी
- 46:41आपको अंत मैंने बता दिया क्यों? कल्पनाओं में जो जीते हैं उनका
- 46:46यही हसर हुआ करता है। सत्य में जो जीता है आध सत्य
- 46:51जुगाद सच, हैपी सत्य, नानक और सिंह भी सच वह आनंद में जीता है
- 47:00उसके लिए हर पल स्वर्ग का बने सदा दिवाली सातक है।
- 47:08उसके लिए रोज़ वाली है रोज़ होली है आठों पहरा आनंद वह आठों पहर
- 47:15आनंद में रहता है ना उसे कुछ खाने पीने की चाहत है ना उसे कुछ भोगने
- 47:24की चाहत, ना उसे कुछ। बोलने फेरने की चाहत सब चाहते हैं
- 47:33क्यों? क्योंकि वह मिल गया जिसके मिलने
- 47:46से अगर संसार भी मिल जाए तो फीका है।
- 47:50अगर वह मिल गया तो सब र सुधार, बाकी धर्म तुम्हें कोई ठोस मार्ग
- 48:06बताते हैं। हिंदू धर्म तुम्हें कल्पना बताता
- 48:14है, मान लो देखिये। यह कॉन्वेक्स लैंड है इसको मैं
- 48:25मान लूँ तुम्हारे कहने से कि ये शेर है गहराता भी चला जाऊं यह शेर
- 48:34है, यह शेर है तो मैं खुद तो पागल हो जाऊंगा।
- 48:39लेकिन यह उत्तर लाइन से कभी शेर नहीं बनेगा, बस यही धारणा है।
- 48:45हिंदू 1 दिन पागल हो जाएगा, सत्य कभी नहीं बदलेगा।
- 48:50यह सत्य है कॉन्वेक्स लेंस विल बी कॉन्वेक्स लेंस टुडे एंड टुमारो।
- 49:02आज सच जो सच पहले था, जो आज सच है भी सच वो आज भी है नानक को सिंह
- 49:12भी सच वो होगा। सभी धर्म कोई न कोई मार्ग बताते
- 49:16हैं। हिंदू धर्म तुम्हें मार्ग क्या
- 49:20बताता है? कल्पना कर लो, शेर के ऊपर बैठी
- 49:24हुई माता शक्ति रोपा है कल्पना कर लो, पर मैं कहता हूँ, कल्पनाएं
- 49:32कभी सत्य नहीं होती, तुम पागल हो जाओ कर लो स्नान।
- 49:41कुंभ में कर लो, किसी तीर्थ पे कर लो, तुम में बदलाव नहीं होंगे।
- 49:48बात है कि तुम बदलो ट्रांसफॉर्मेशन तुम्हारे में हो।
- 49:57तुम अपने विचारों को बदलकर कल्पना को बदल लेते हो, अपने आप को नहीं
- 50:03बदलते। बदलना क्या था जो तुमने माना था
- 50:12कि शेर है? उसे तुम ठीक से सत्य जान लो कि
- 50:17नहीं यह कन्वैक्सीलैंड है, यह है बदलना जीस आवरण को तुमने मैं माना
- 50:30यह नाक, आंख, कान, मुँह। यह दाढ़ी, यह वस्त्र, यह सब कुछ
- 50:38मैं हूँ, यह विचार यह मैं हूँ तो सनातन कहता है यह झूठ है फिर क्या
- 50:50करना होगा सर्च करो। सर्च यूर सैड जन खोजा तन पाया।
- 50:58गहरे पानी, पेट और उसमें बहुत गहराई तक जाना होगा।
- 51:02आपको भीतर उतरना होगा गहरे पानी, पेट गहरे उतरना होगा।
- 51:10मैं वपुरा वू डंडा। बुद्धि बड़ी कमजोर है।
- 51:15जो व्यक्ति बुद्धि तक बैठा रहा, वह कभी शास्त्रीय नहीं होगा।
- 51:19वह तो चरण चुम्बक होगा वो तो कहेगा ₹60 दे दो, हम तो अब हम तो
- 51:24तुम्हारे पांव दबाते हैं, इट इस दी सेफेस्ट वे।
- 51:35ट्रांसफर यूरसेल्फ़ एंटायरली जिन खोजा जिनपाई ट्रांसफर होगा कौन,
- 51:45जो खोज नहीं चलेगा सत्य को वास्तव में कौन आज पता लगा ही ले, आज
- 51:53भ्रम मिटा ही दे। वह पा भी लेता है गहरे पानी पर,
- 52:03लेकिन बहुत गहरे उतरना पड़ता है रसातल को छूना पड़ता है मैं वपुरा
- 52:13वो डंडरा एक तंज कस रहे हैं कभी। मैं बिचारा अशक्त बूढ़ा डर गया और
- 52:24मैं बुद्धि में ही बैठा रहा गया किनारे बैठ बुद्धि किनारा या कोई
- 52:30हलचल नहीं या कोई ट्रान्सफर्मेशन नहीं होती विचारों का
- 52:34ट्रान्सफर्मेशन इस नॉट ऐक्चुली ट्रान्सफर्मेशन।
- 52:39इस नॉट ए रियल ट्रांसफरमेंट तुम्हारे विचार रोज़ बदलते हैं,
- 52:43तुम कभी कहते हो परमात्मा है, वह भी गलत है क्योंकि तुमने जाना
- 52:49नहीं, तुम कभी कहते हो परमात्मा नहीं है, वह भी झूठ है क्योंकि
- 52:54तुमने खोजा नहीं है। ऐसे ही तुम बदलते हो रोज़ सत्य को
- 53:02जाने बिना तुम्हारे विचार बदलते हैं।
- 53:08तुम्हारे विचार कभी कहते हैं कि वह नहीं कुछ ऐसा गलत हो गया होगा।
- 53:17और उसके कारण तुम्हारे विचार बदल के एक वो नहीं है और फिर कुछ ठीक
- 53:23हो गया तो तुमने कहा आहे ईश्वर तेरा बड़ा धन्यवाद तो क्या बदला
- 53:30सर के से बदले और उन्होंने तुम्हारे विचार बदले लेकिन तुमने
- 53:35नहीं बदले? कबीर कहते हैं तो नहीं बदलना
- 53:41होगा। जे तो प्ले म मिलन।
- 53:55की जा जे तो प्रेम मिलन की जा। शी स दलीधर शी स तलीधर शी स
- 54:26तलीधर। घर मेरे आं जय तुम प्रेम मिलाने।
- 54:41की चाह, यू विल हैव टू बी ट्रांसफॉर्म?
- 54:53तुम्हें बदलना होगा। तुम बुद्धि के किनारे पे मत बैठे,
- 54:59आचार्य बनके मत बैठे रहो। धन को मालोगे संस्थाओं बना लोगे,
- 55:05गलत मतलब व्याख्यायित कर दोगे। अब आचार्य से कोई पूछता है के
- 55:14शादी करनी चाहिए, मेरा ऊंट पटांग जवाब देगा, मेरे पास सीधा जवाब
- 55:20है, मैं कहता हूँ करना चाहिए लेकिन आफ्टर एनलाइटनमेंट करना
- 55:26चाहिए जब तुम्हें कोई आग जला ना सके।
- 55:31जब तुम्हे कोई बंधन बांध न सके जब तुम्हे कोई हवा उड़ा न सके जब
- 55:39तुम्हे कोई पानी का बार बह ना सके जब तुम्हे कोई आग जला न सके।
- 55:48कोई शस्त्र तुम्हें काट ना सके तब तुम शादी करा लेना, शादी तो कबीर
- 55:58न बिक रहा है कहाँ बंधन हुआ? और शादी तुलसी भी कराते हैं, बड़ा
- 56:09बंधन बनता है, मोह ही बंधन हो जाता है।
- 56:15रत्नावली कहती है जितना प्रेम तुमने मुझसे किया अगर इसे आधा
- 56:21प्रेम भी भगवान राम से कर लेते। तो तुम में क्रांति घटित हो जाती
- 56:27है। देखिये कितनी शर्म की बात है।
- 56:32वह जश्न मनाना चाहता है और उसकी धर्मपत्नी उसे मार्ग दिखाती है।
- 56:51जिन्होंने खोजा तिनपालिया इन कल्पनाओं को मिटाना होगा सास्व तक
- 57:01पहुंचने के लिए और तुमने हजारों नहीं लाखों ने करोड़ों।
- 57:10मान्यताएँ कल्पनाएँ थोप ली हैं। अपनी बुद्धि में निरौंज ठसा ठस भर
- 57:17रही है। तुमने अचेतन ठस ठस भर लिया है।
- 57:24तुमने सामूहिक चेतन को भी भर लिया है।
- 57:31और तुमने इस चेतन को भी भर लिया, इसलिए तो रात को नींद नहीं आती,
- 57:36मौत का 1 दिन मैयन है नींद क्यों रात भर नहीं आती क्योंकि तुमने?
- 57:44इस असत्य संसार को सत्य समझ लिया। 1 दिन मर जाओगे तो चिर निद्रा में
- 57:52समा जाओगे लेकिन आज आज तुम नींद के लिए बोली आंखो आज तुम जो कल
- 58:03आया नहीं, उसके फिक्र में नहीं सो सकोगे।
- 58:07जो तुम्हें पता ही नहीं आएगा कि नहीं आएगा और जो तुम्हें पता ही
- 58:13नहीं जीस कंपनी से ग्रस्त होकर तुमने सारी रात गवां दी।
- 58:20वह होगा भी कि नहीं होगा? तो कबीर कहते हैं मैं वो मैं
- 58:33बेचारा बूढ़ा ये जो बुद्धि के ऊपर बैठे रहते हैं ये बेचारे मैं
- 58:42कितनी वो बेचारा कहते बेचारा कहता है राधे राधे चपते रहो।
- 58:50बेचारा कहता है लिव इन में रहना, बंधन मत कर लो बेचारा कहता है
- 58:58हनुमान चिलिस्सा का पाठ कर लेना बेचारा कहता है दुर्गा चिलिस्सा
- 59:04पाठ कर देना। हवन जज करवा लेना, ये सब विचारों
- 59:12के काम है मैं बपरा उठन धरा के वो किनारे बैठ किनारा बुद्धि है
- 59:20बुद्धि पर जो बैठा रह जाता है, अपने अंत में उतरने का साहस नहीं
- 59:25करता। और साहस क्यों नहीं करता?
- 59:29क्योंकि जैसे ही तुम अपने अंत में जाओगे, वैसे ही तुमने अतीत में जो
- 59:34कर्म किए वो तुम्हारे सामने आएँगे और तुम अतीत में जो किया हो उसको
- 59:40देखना नहीं चाहते कर तो दिया तुमने।
- 59:45देखना नहीं चाहते कि हमने कभी किसी की हत्या भी की थी।
- 59:56सीना 56 इंच नहीं चाहिए। कलेजा 156 इंच का चाहिए।
- 1:00:02फिर तुम देख सकोगे फिर तुम शक्ति का व्याख्यान कर सकोगे कि 1।
- 1:00:09मैं फादर वास् ऑन दी डेथ वेट आई वास् ऑन दी बेड विथ कसूर फिर तुम
- 1:00:20कह सकोगे 56 इंच नहीं, 156 इंच का कलेजा था उसमें।
- 1:00:28छाती तो 36 ही होगी। इससे भी कम जॉर्ज पंचम के सामने
- 1:00:37जो वह फौलादी जगरा दिए खड़ा हो गया और जॉर्ज पंचम को ऐसा आघात
- 1:00:44लगा कि मरकर ही पिंडा छूटा उसका। उसके बाद वो गिर गया।
- 1:00:50वह चारपाई पकड़ ली। उसने यह बंदा मुझे कह किया गया।
- 1:00:56इसकी रेंज कैसी थी कि तुमने मेरे हिंदुस्तान के वस्त्र लूट लिए और
- 1:01:03खुद है भी नंका तो क्या मैंने लूट लिए?
- 1:01:09बिलकुल तुमने लूट लिए जार पंचम बिलकुल तुमने लूट लिया तुम बचने
- 1:01:18का उपाय तो बहुत करते हो बुद्धि बचने का उपाय तो बहुत करती है।
- 1:01:25तो फिर ये सर्कमस्टैंसेस काम आते हैं आत्मा से परमात्मा तक की
- 1:01:32यात्रा में क्या होता है? हमने कर्मकांड में डाल लिए।
- 1:01:41यह वो वेला होता है जब हम आसानी से छोड़ सकते हैं, इसलिए इन दिनों
- 1:01:49में महत्त्व क्या किया गया? सबसे ज्यादा महत्त्व कैसा?
- 1:01:53आप देखना कल यहाँ स्टाल लगेंगे, बड़े पड़े पूरी छोले।
- 1:02:00खीर, पकोड़े पनीर के न जाने दुनिया भर की चीजें कर सारी उम्र
- 1:02:09जिन्होंने गरीबों का लहू चूसा, मुकल स्टार्च लगाएं।
- 1:02:20आज बांटते हैं क्यों? मकर संक्रांति में छोड़ना बड़ा
- 1:02:25आसान हो जाता है। व्यक्ति आत्मबोध तक होकर भी अपने
- 1:02:37शरीर को थोड़ी सी मुश्किल से छोड़ पाता है।
- 1:02:41वह मुश्किल भी ना रहे तो फिर बाहर का सर्कमस्टैंस ठीक होना चाहिए।
- 1:02:52तो भीष्मिता माँ कृष्ण से कहते हैं वासुदेव एक तो मैं प्यासा।
- 1:02:59मुझे पानी पे रख दो एक कहता मेरे रूम तुम में दर्द हो रहा है।
- 1:03:07अर्जुन के तीर बड़े तीखे थे और बड़े ज़ोर से चलाये उसने तुमने
- 1:03:15चक्का क्या उठाया? उसके वाण मेरी छाती को बेचते ही
- 1:03:19चले गए और वाणिशयों से आज मैं लेटा हूँ तो तुम्हारे कारण तो
- 1:03:30वासुदेव मुस्कुरा है। अर्जुन से कहा अच्छा वाण चला।
- 1:03:39नीचे से गंगा प्रकट कर पानी और उसकी प्यास बजा।
- 1:03:45निश्चित ही लहू रिस रहा होगा, डिहाइड्रेशन हो गया होगा, इसको
- 1:03:51पानी बुला दे। तो प्रभु रोमा रोमा दर्द कर रहा
- 1:03:59है, करेगा ही पितामय यह रोमा रोमा तीरों से मर चुका है।
- 1:04:07तीर आड़ पर बेंध गए हैं तुम्हारे फिर अब कोई उपाय कर दो।
- 1:04:17वैसे में एक उपाय होगा कृष्ण 64 कला सम्पूर्ण हैं, उस दृष्टि से
- 1:04:25एक दृष्टि से 16 एक दृष्टि से 64 ये दोनों आंकड़े तुम पाओगे।
- 1:04:3316 मुख्य 64 ब्रांचेस के समेत जैसे तने 16, मुख्य तने आगे
- 1:04:48ब्रांचेस उनके बिखर के 64 हो जाए जैसे शरीर तो एक लेकिन डॉक्टर तो
- 1:04:54कोई दांतों का है, कोई कानों का है, कोई आँखों का है।
- 1:04:57कोई दिमाग ये मनीष दिमाग के नाम पर बड़ा
- 1:05:12हस्ता है कहते जब तुम मुर्ख कहते तो बड़े अच्छे लगते है।
- 1:05:30तो भीष्म कहने लगे ज़रा ज़रा दर्द से दुखी है, कोई उपाय करता हूँ उस
- 1:05:43वक्त कृष्ण अपनी उन कलाओं का उपयोग करके?
- 1:05:51बेसम पदामों को दर्द मुक्त कर देते हैं, इसीलिए तो 58 दिन बने
- 1:05:55रहे, लेकिन देखिए अब मैं आपका यह संख्या भी निवृत्त करता हूँ।
- 1:06:05सही हिसाब से अगर कैलकुलेट करेंगे तो दिन बनेंगे 77 बिल्कुल बनेंगे।
- 1:06:13लेकिन शास्त्रों में लिखा 56 और 58 फिर ये फर्क क्यों है?
- 1:06:18फर्क है निरायन और साइन साइन के हिसाब से देंगे तो 58 बनते हैं।
- 1:06:26लेकिन 58 में दिन पीशम पिदामा ने शरीर छोड़ा नहीं।
- 1:06:33अब क्या हुआ उस दिन 58 में दिन? अट्ठावनवें दिन जैसे ही सूर्य मकर
- 1:06:43में मुख किए उस दिन ये घटना घटनी शुरू हो गई।
- 1:06:49छोड़ने की उन्होंने देह को छोड़ना शुरू किया।
- 1:06:57क्योंकि तब बाहर का वातावरण छोड़ने के अनुकूल हो चुका था।
- 1:07:08इसलिए आपको ब्राह्मण समझाते हैं। संत समझाते हैं कि इस वेला में
- 1:07:14छोड़ो और सबसे ज्यादा छोड़ना आसान।
- 1:07:20क्या है धन? शरीर तो तुम बहुत मुश्किल से
- 1:07:25छोड़ोगे शरीर कहाँ छोड़ पाते हो तुम शरीर तो तुम खुद ही हो धन अभी
- 1:07:31तुम खुद नहीं हुए हो तो धन से शुरू करो, इसलिए कल तुम देखना।
- 1:07:4214 तारीख को मकर संक्रांति वाले दिन हर व्यक्ति जिसने सारा साल
- 1:07:48कंजूसी की, वह कल विस्तार लगाएगा। कोई चाय पिलाएगा, कोई कॉफी, कोई
- 1:07:55छोले पूरी खिलाएगा, कोई बटोरे खिलाएगा।
- 1:08:01कोई पनीर के पकौड़े खिलाएगा, तरह तरह के पकवान होंगे और हमारे
- 1:08:10गदड़वा में तो कुछ ज्यादा ही होता है।
- 1:08:18यहाँ तो आस्ती का प्रभाव कुछ ज्यादा है।
- 1:08:23सारा पंजाब, हिंदू, सिख की महिम में जलता रहा, लेकिन हमारे गदड़वा
- 1:08:31में एक चिड़ी भी नहीं हुई। यहाँ संतों का कुछ छोड़ा हुआ जो
- 1:08:40आनंद का प्रभाव है वो बना ही रहा। हम अपने बहुधा कार्यक्रम
- 1:08:47गुरुद्वारों में अंजाम देते हैं और सिख लोग बहुधा कार्यक्रम
- 1:08:54मंदिरों में अंजाम देते हैं। ये भाईचारा है, वैसे भी भाईचारा
- 1:09:02है, सिख धर्म हिंदू से तो निकला है।
- 1:09:10माता सुलखनी, तृप्ता राणी कालूराम मेहता ये सब हिंदू ही तो थे।
- 1:09:26तो वंशेज तो वही है हरे डेटरी कैरेक्टर तो वही है क्रोमोसोमन
- 1:09:32व्यवस्था भी वही है इसलिए कहीं भीतर से दरार नहीं है।
- 1:09:39दरार ऊपरी ऊपरी है। अरे, कभी भी मिट सकती है और
- 1:09:47प्रगाढ़ भी हो सकती है। अगर तुमने कहा कि हम हिंदू
- 1:09:51राष्ट्र लेंगे तो तुम देख लेना कल को सिख भी कहेगा जब हिंदू राष्ट्र
- 1:09:57मांगना कावा नहीं, जग गुनाह नहीं तो सिख राष्ट्र मांगना क्यों बना?
- 1:10:05हम तो सदा से तुम्हारे साथ सहदियां देते रहे बल्कि तुम्हारे
- 1:10:09लिए सहदियां दी हैं, हमने तो कोई ऐसा।
- 1:10:22हिंदू दिखाओगे जिसने सिख को बचाने के लिए आप खंगाल लेना सारा इतिहास
- 1:10:36कोई ऐसा हिंदू नहीं मिलेगा जिसने सिखिस्म को बचाने के लिए त्याग।
- 1:10:43लेकिन सिखों की तो बरमार में लगी सारे गुरु हिन्दुओं के लिए
- 1:10:48कुर्बान हो गए। कोई जद्दी हुई तभी पर बैठ गया।
- 1:10:54गुरु तेग बहादुर ने शीश कटा दिया। शीशगंज गुरुद्वारा जहाँ बना।
- 1:11:01ज़रा देखो कि खालिस्तान पहले बनना चाहिए था या हिंदू राष्ट्र?
- 1:11:07अब ये तुमने राड छेड़ी को महज राज़ करने के लिए तुमने गलत
- 1:11:13चिंगारी को भड़कने का मौका दे दिया।
- 1:11:19यह चिंगारी तुम्हें लगानी ही नहीं चाहिए।
- 1:11:26तुमने इतिहास से कुछ सीखा नहीं, जब तक इतिहास को जानते हो, तुम
- 1:11:31जानते हो कि हम कायर बोल रहे हैं। आरएसएस से जन्मी हैं और आरएसएस
- 1:11:39कायरों का एक समूह है जुड़ है। तुम मार सकते हो लेकिन तुम्हारे
- 1:11:47में करुणा नहीं पढ़ सकता। फोर्स हिंदू तो वह है।
- 1:11:55जो कल्पना में जीता है और सनातनी कौन जो करुणा से बराबर है, जो
- 1:12:04जानता है कि मैं कभी मरता नहीं तो कभी जे खाई पड़ी जाएगी।
- 1:12:09ये खाई का पाठ कब मिलेगा? हिंदू कल्पना में उलझा हुआ और
- 1:12:15सनातनी सत्य में मज़े लेता हुआ बीच में एक गहरी खाई है कल्पना से
- 1:12:22कैसे पहुंचोगे तुम सत्य तक कोई रास्ता बता दियो मुझे?
- 1:12:28मेरा ओपेन चैलेंज है प्रत्येक आरएसएस प्रत्येक हिंदू से कल्पना
- 1:12:35कैसे तुम्हें पहुंचाएगी? सत्य तक मुझे कोई बता दे शब्दों
- 1:12:40से ही समझा दे तथ्यों से तो छोड़ मैं तो तुम्हें सत्य से तथ्यों से
- 1:12:46बता रहा हूँ। तुम शब्दों से ही मुझे समझा दो की
- 1:12:50कल्पना विल कन्वर्ट इंटू दी ट्रुथ हाउ कल्पना तुम्हें पागलपन में
- 1:13:01घसीट ले जाएगी आज मेरी बातों को अंजाम।
- 1:13:07जब आएगा तब देख लेना और अंजाम क्या आएगा?
- 1:13:12तुम सभी पागल खाने में कैद हो जाओ या फिर हिंदुस्तान को तुम
- 1:13:17पागलखाना घोषित कर दोगे? इसके सिवा और कोई रस्ताना।
- 1:13:25मुझे कोई हिंदू कहने वाला अपने आप को मुझे यह सत्य से समझाने की
- 1:13:34चेष्टा कर दे अल्फा से कि कैसे कल्पना सत्य तक पहुंचने का?
- 1:13:43पुल बन जाएगी। मुझे ये बता दें और मैं उसको
- 1:13:49आशीर्वाद ऐसा दूंगा कि वो याद रखेगा, लेकिन मुझे पता है कोई
- 1:13:54रास्ता नहीं। मैं रोज़ इस सूफी के ऊपर घूमता
- 1:13:58हूँ। 1000 बार।
- 1:14:00और रोज़ मैं अपनी बुद्धि से उस अस्तित्व में छलांग लगाता हूँ
- 1:14:04हजारों बार दिन भर रात मेरा यही तो काम है, ऐसे ही थोड़ा बैठा हूँ
- 1:14:15टिक के स्थायित्व में स्थिरियम। ऐसे ही थोड़ा बैठा हूँ बिना किसी
- 1:14:23स्वाद के वह मिल गया है, जो परम स्वाद है, वह मिल गया है जो परम
- 1:14:39स्वाद है। और परम स्वाद के मिलने की पहचान
- 1:14:45भी है। लक्षण भी है क्या छोटे स्वादों को
- 1:14:50छोड़ देता है? अब इसको आप अच्छे से सर्किल में
- 1:14:55दे लेना बड़े स्वाद के मिलने का लक्षण भी है।
- 1:15:04कि वह छोटे स्वादों को छोड़ देगा, डरेगा नहीं?
- 1:15:10छोटे स्वादों से समझना बात को छोटे स्वाद उसे बंदन में नहीं
- 1:15:17डालेंगे, लेकिन बस ऐसे हो जाएगा। जैसे बाप जाता है बाजार में तो
- 1:15:26छोटा बच्चा पूछता है पिता सिंह के डैडी आप बाजार गए थे हाँ तो फिर
- 1:15:34छणकना ले के आये नहीं बेटा तो फिर क्या खा के ले के आये जैसे कुछ?
- 1:15:41बाजार से और कुछ लाने की चीज़ ही ना हो, बच्चे के लिए तो छिड़कना
- 1:15:47ही सबसे बढ़िया है। बाहर की परस्तियां छोड़ने में
- 1:15:57इमदाद देती हैं और वह उत्तरायण का वक्त होता है और तुम्हें साफ समझा
- 1:16:03दिया मैंने। अब मैं आपका ये कन्फ़्यूज़न दूर
- 1:16:06करता हूँ। 58 दिन होते हैं साइन में जब
- 1:16:11सूर्य साइन में प्रवेश कर देता है और ऋतु बदल जाती है।
- 1:16:17ऋतु क्या बदल जाती है? शीर ऋतु का आरंभ हो जाती है।
- 1:16:25वह जो छैवीं ऋतु है शीर्षक, उसके बाद बसंत आएगा ऋतुएँ बदलती हैं।
- 1:16:35सायन के हिसाब से इसको जो नई नई। सीख रहे हैं एस्ट्रोलॉजी वह नोट
- 1:16:47कर लें। ये बेसिक है ऋतुएं बदलती हैं।
- 1:16:53सायन के हिसाब से सायन, सूर्य, सायन में मकर में ऋतु बदल गया।
- 1:17:02उसी दिन उसी वेला पे ऋतु बदल जाएगी तो शिष्य ऋतु पर आरंभ लिखा
- 1:17:08होगा। उत्तरायण की क्यों प्रतीक्षा की?
- 1:17:18सायन उत्तरायण के प्रारंभ होते ही छोड़ना आसान हो जाता है और वहाँ
- 1:17:26तक आप पाओगे कि अगर दीपावली के दिन कार्तिक अमावस्या का पहला दिन
- 1:17:33था महाभारत जंग का। तो वहाँ से आप पाओगे 58 या 56 दिन
- 1:17:42हो गया तिथि बढ़ती बढ़ती रहती है एक 2 दिन फर्क पड़ जाएगा अगर साइन
- 1:17:50से और वहाँ से शुरू करता है भीष्म अपनी दे को छोड़ना।
- 1:17:56और देह छोड़ने में यह 20 के करीब दिन लग जाते हैं तो 5658 दिन से
- 1:18:08शुरू होती है। आत्मबोध से शुरू होता है।
- 1:18:14परमात्मबोध तक का सफर और इसमें 1920 दिन लग जाते हैं तो पूरे तो
- 1:18:21सतर्क नहीं लगे बलाशक लेकिन यात्रा प्रारंभ हो गई 20 दिन
- 1:18:28पहले। 5758 दिन के बाद शुरू हो गया।
- 1:18:37इसलिए इसी वेला को हमारे दो सनातन धर्म में कहा कि छोड़ो धन छोड़ो।
- 1:18:53सामग्री छोड़ो, पदार्थ छोड़ो इसीलिए दान का महत्त्व है।
- 1:18:57आज कल देखना आप कितने रड़ियां लगी होंगी यहाँ और आपको बुलाया जाएगा
- 1:19:05के आओ यहाँ से कुछ खा के जाना ऐसे नहीं जाने देंगे।
- 1:19:11कारण क्या है? छोड़ना स्वाभाविक है।
- 1:19:15ऐसे सर्कमस्टैंसेस आ गए। आकाशीय घटनाएँ ऐसी हो गई, बड़ी
- 1:19:22सरल हो गई। बांट में बड़ा सरल हो गया।
- 1:19:29तो शरीर छोड़ना सरल हो गया। 58 दिन उसके बाद जैसे जैसे
- 1:19:37परमात्मा तक होने की कवायद बढ़ी तो उनका दर्द भी घटता गया।
- 1:19:48और जैसे ही उत्तरायण में सूर्य आ गया, मकर में स्थित ही हो गया।
- 1:19:53पहले तो प्रविष्ट हुआ था, अब स्थित हो गया।
- 1:19:59मकर में तो कल 14 तारीख को मकर में स्थित हो जाएगा।
- 1:20:05जैसे ही स्थित हुआ। और तैसे ही बड़ी प्यारी घटना घटी।
- 1:20:15वो घटना घटी जो भीष्म पिता में भगवान हो गए।
- 1:20:24आत्म से परमात्म बोध बोध कहता हूँ।
- 1:20:29उन्हें बोध हुआ। अहम् ब्रह्मास्मा का अन्न और साथ
- 1:20:36में ये भी बोध होता है। परमात्मा बोध का और आत्म बोध का
- 1:20:42बोध होने के बाद यह बोध होता है। खलक खलक, खलक मैं खलक सृष्टि में
- 1:20:54परमात्मा है और परमात्मा में सृष्टि है खालक खालक खलक मैं खालक
- 1:21:03जड़ में चेतन है और चेतन में जड़ है।
- 1:21:08यही एक रूप हो जाती है यकसा हो जाती है यही वेद को मिटना मैं
- 1:21:13कहता हूँ सदस्या जहाँ वेद मठ जाते हैं।
- 1:21:22भ्रम जिसे मैं कहता हूँ, वह आपकी माया थी।
- 1:21:30ब्रह्म सत्यम जगत सत्यम ब्रह्ममित्या यह ब्रह्ममित्या था
- 1:21:37कि मैं शरीर हूँ, मैं विचार हूँ, मैं मन हूँ मैं वा बना हूँ, यह
- 1:21:43मिट गया स्नाक है, मैं परमात्मा हूँ।
- 1:21:48तुम्हारा ओर छोर बाकी न बचा तुम्हारा मेज़रमेंट न रहा सब गन
- 1:21:56नए बेकार हो गए तुम भूतत्व हो गए बस।
- 1:22:06जिसका कोई नाम नहीं है। जीसको जो भी नाम दे दोगे शुभ है
- 1:22:14तुम आज इन नामों पे झगड़ा कर रहे हो आज तुम्हारे हिंदू, तुम्हारे
- 1:22:23सिख तुम्हारे मुसलमान। तुम्हारे इसाई, तुम्हारे, यहूदी,
- 1:22:29तुम्हारे पारसी नामों पर झगड़ा पड़ता है।
- 1:22:33इन सब में अगर एक कोम को चुनना पड़े, मुझे पूछा ये प्रश्न है?
- 1:22:40अगर सभी धर्मों में तुम्हें एक धर्म चुनना पड़े, तो कौन सा
- 1:22:44चुनोगे? पारसी चुनोगे।
- 1:22:51इसके व्याख्या का भी फिर वक्त हुआ जाता है।
- 1:22:57अगर सभी धर्मों में यानी संप्रदाय।
- 1:23:01एक और सम्प्रदाय तुम्हें चुनना पड़े तो कौन सा चुनोगे?
- 1:23:05पारसी सुनोगे पारसी में ऐसा क्रमोसोम व्यवस्था है, ऐसी किसी
- 1:23:17में भी नहीं है, वो भी सनातन है। मैंने पहले भी कहा सभी धर्म सनातन
- 1:23:24तो हैं क्योंकि सभी धर्म उस केंद्र की तरफ ही ओणमक हो जाते
- 1:23:29हैं। सफीर का कोई भी अंश सदा उसका
- 1:23:37निशाना होता है केंद्र। सफियर पर कोई भी अंश उसका निशाना
- 1:23:44केंद्र की तरफ होता है तो पारसी धर्म को चुनूंगा।
- 1:23:56जीस तल पर तुम जाकर आत्मा से परमात्मा हो जाते हो जीस तल पर
- 1:24:02तुम जाकर साकार से निराकार हो जाते हो जीस तल पर तुम जाकर सगुण
- 1:24:08से निर्गुण हो जाते हो जीस तल पर तुम जाकर शूद्र से।
- 1:24:14ब्राह्मण उत्सव हो जाते हो बहुत तल तुमने पाना है, अर्जन करना है
- 1:24:21यह कोई जन्मजाति प्रथा नहीं है जो तुम ऊपर से छैवल हो, यह कोई चंदन
- 1:24:27थोड़ी है जो तुम माथे के ऊपर लगा लो।
- 1:24:31भीतर से उस खुशबों को पैदा करना पड़ेगा और भीतर वो है तुम आशा
- 1:24:38करने के लिए चंदन लगा लेते हो लगा लो, यह दिखावा है और हिंदू धर्म
- 1:24:45देखाबे के बिना और कुछ है। हिंदू धर्म में सब दिखावा है और
- 1:24:53दिखावा एक पाखंड दिखावा करना झूठ भी है क्योंकि वैसा है नहीं जैसा
- 1:25:05तुम दिखाते हो भीतर से लड़की आए हो।
- 1:25:10बाहर से तुम ताड़ियाँ मारते जाते हो, हाथ में हाथ बाजार में तुम
- 1:25:15चूमते हो, एक दूसरे को भीतर से तुम लफड़ों लफड़े होके आए हो, जूत
- 1:25:20पटांग होके आए हो तो यह दिखावा ही तो है, ऐसा ही तो तुम्हारा गृहस्थ
- 1:25:27जीवन है। लेकिन कबीर और लोई के जीवन में
- 1:25:30ऐसा कब घटना है? नहीं घटता जो घर के भीतर से वैसे
- 1:25:38ही बाहर है, ज़रा भी फर्क नहीं पड़ता।
- 1:25:46मकर संक्रांति का महत्त्व मैंने आपको बताया।
- 1:25:49उस दिन सब छोड़ना आसान हो जाता है।
- 1:25:55ऐटमोस्फेरिक व्यवस्था ऐसी होती है सर्कमस्टैंशियल व्यवस्था ऐसी होती
- 1:26:02है। तुम छोड़ सकते हो बड़े मज़े से
- 1:26:05इसिली यही तो मुश्किलात है कि तुम शुद्र से ब्राह्मणत तक जा नहीं
- 1:26:16सकते अगर चले जाओ। तो वह क्षण हीरे, मोती, जुआरातो
- 1:26:28से जुड़ा हुआ क्षण होगा। तुमने अपने जीवन से नाता तोड़
- 1:26:33लिया है। हिंदू तुमने अपने जीवन से नाता
- 1:26:38तोड़ लिया है, आज तो सभी धर्मों ने पराया है।
- 1:26:42अपने मूल स्रोत से नाता तोड़ लिया।
- 1:26:50चक की मैं कोई बोलो। तकदीर की मैं कोई भूल हूँ डाली से
- 1:27:10बिछुड़ा हुआ फूल हूँ तकदीर की। मैं कोई बोलूं डाली से बिछुड़ा
- 1:27:28हुआ फूल हूँ 713 नहीं। 713 नहीं संग दुनिया चले भी तो
- 1:27:49क्या है? 713 नहीं।
- 1:27:59713 ने संग दुनिया चले भी तो क्या है?
- 1:28:15एक तो न मेला मेरा कहती है मेरे विरह का मेरी तड़पन का एक एक आंसू
- 1:28:25तेरे दामन में करना चाहिए। से लिपट के जोरो लेते हम तुझसे
- 1:28:42लिपट के जोरो लेते हम। आंसू नहीं थे वो मोती से कम तुझसे
- 1:29:00लिपटके जो रो लेते हम। आंसू नहीं थे वो मोती से कम तेरा
- 1:29:15दामन तेरा दान तेरा दामन। नहीं तेरा दामन नहीं, आंसू ढले भी
- 1:29:37तो क्या है? तेरा दामन नहीं तेरा दामन नहीं,
- 1:29:53ये आंसू ढले भी तो क्या है? एक तू ना मिला एक तू ना मिला सारी
- 1:30:11दुनिया मिले भी तो क्या है एक तू? ना मिला धरती हूँ मैं और तू है
- 1:30:30गगन धरती हूँ मैं। और तू है गगन होगा, कहा तेरा मेरा
- 1:30:46मिलन धरती हूँ मैं। और तू है गगन होगा कहाँ तेरा मेरा
- 1:31:02मिलन वे लाख पहरे यहाँ सो मन में। लाख मान्यता है वो पहरे की तरह
- 1:31:15बैठे हैं लाख बहरे यहाँ मैंने कहा मैं 25,00,00,000 दूंगा लोग कहते
- 1:31:29कैसे दोगे? यह मान्यताएँ हैं, तो भाई भगवान
- 1:31:37क्या नहीं कर सकता बस यह तुम जानते नहीं और तुम्हारी यह
- 1:31:44मान्यता है कि जो देखा नहीं वो होता नहीं।
- 1:31:50काश तुमने वह देखा होता जो लोहे को सोने में तब्दील कर देता है
- 1:32:01बड़ा कीमती शब्द है, इसलिए मैं आखिर में बोल रहा हूँ धरती हूँ
- 1:32:07मैं। ओर तू है गगन होगा कहाँ तेरा मेरा
- 1:32:20मिलन धरती हूँ मैं। और तू है गगन होगा कहाँ तेरा मेरा
- 1:32:35मिलन लाख पहरे यहाँ। जो विज्ञान मानता था के फोटान कण
- 1:32:50है और फोटान वेब भी है, तिरंग भी है लेकिन ये यक सा देखे जा सकते
- 1:33:04हैं। आइस क्रीम कहता था लेकिन भौहर ने
- 1:33:10आके इसके सिद्धांत को काट दिया। भौहर कहता है कि जब तुम गौर से
- 1:33:20देखोगे तो कण। और पार्टी का तुम देखोगे तो वह कण
- 1:33:29की तरह लगेगा नहीं देखोगे तो पार्टी का कैसे लगेगा?
- 1:33:33क्षमा करना लहर की तरह लगेगा और आइंस्टाइन कहता है कि यू कैन सी।
- 1:33:45ऐट ए टाइम दोनों को इकट्ठे देख सकते हो नहीं देख सकते कण कण है
- 1:33:54छोटे से पार्टी पर और लहर कणों का फैलाव है।
- 1:33:59कण में कण कण जुड़ते जाएं तो लहर लंबी है।
- 1:34:04और कण बिल्कुल मामूली पार्टिकल है।
- 1:34:06दोनों इकट्ठे कैसे देखोगे? तो भौहर ने आकर इस समय मिथ्याब्रह
- 1:34:12को तोड़ा। ये पहरे हैं तुम्हारे दिमागों पर
- 1:34:16तुमने क्या कुछ थप दिया है इस शेर पे बैठी हुई तुम्हारी ही बनायी
- 1:34:22हुई? मूर्ति यह सर्वशक्तिमति है यह
- 1:34:29पापहारणीय असितगिरि समम स्यात का जन्म सिन्धु पात्र है।
- 1:34:36सुरतर्भ साखा लेक ने पत्रमर्भित लक्ष्य अधिग्रहीत शारदा सर्वकालम
- 1:34:42तद पे तब गुणाना में इस बार बनाया था।
- 1:34:48असित करिश्मा के जन्म सिंधु पात्र है।
- 1:34:55बोहर कहते नो जब पार्टिकल दिखेगा। तरंग दिखना बंद हो जाएगा और जब
- 1:35:03तरंग दिखेगा वर्टिकल दिखना बंद हो जाएगा।
- 1:35:07एक वक्त में तुम दोनों स्वरूप इकट्ठे नहीं देख सकते।
- 1:35:11टूट गया ना इस टाइम? लाख पहरे यहाँ बहुत गहरी बात है
- 1:35:24ध्यान से समझना इसको यह सभी उपनिषदों का गीता का स्ट्रावक्र
- 1:35:32गीता का सार यह पहरा। लाख पहरे यहाँ तुम्हारी मान्यता
- 1:35:41ही लाख प्यार दिल में पले भी तो क्या है वह तत्व अगर हृदय में आ
- 1:35:54भी जायेगा तो मानेगा कौन? प्यार दिल में पले भी तो क्या है
- 1:36:05अगर अस्तित्व हृदय तक पहुँच जाए, लेकिन तुम्हारी।
- 1:36:15थोपी हुई व्यवस्थाएँ माने हुए झूठ, पाखंड तुम्हारी माने हुई
- 1:36:25गोलामियां और रोक लेगी उन्हें। कि लाख पहरे यहाँ प्यार दिल में
- 1:36:41पले भी तो क्या है? एक तू ना?
- 1:36:48मिला सारी दुनिया आखिर में तुम यहीं आओगे?
- 1:36:58सब भोग लो सब भोग लो, गरीब की झोपड़ी से लेके।
- 1:37:08टु व्हाइट हाउस भोग लो, लेकिन आखिर में कहा आना पड़ेगा।
- 1:37:15आखिर में तुम्हे संत के पास आना पड़ेगा और संत बखूबी जानता है।
- 1:37:19किस बात को आएँगे तुम मेरे पास क्यों?
- 1:37:25क्योंकि संत भी कभी व्हाइट हॉउस में था।
- 1:37:30संत ने व्हाइट हाउस न जाने कितनी बार देखा, न जाने कितने जन्मों
- 1:37:36में वह गद्दी निशीं रहा और आज भी यहीं है।
- 1:37:42यहीं क्यों है? क्योंकि गद्दी निशीं होकर नहीं
- 1:37:45पाया जाता वो? दन्ना सेठ भी रहा बहुत बार, लेकिन
- 1:37:51आज भी यही है यहाँ क्यों है क्योंकि दन में वह मिलता नहीं
- 1:37:57जिसकी आरजू तुम्हारे अंत स्थल को है भीतर आरजू कुछ हो रहा है
- 1:38:03तुम्हारी। उस उस आरजू को पिए बिना तुम तृप्त
- 1:38:10ना होगे तब तक तुम भटकते ही रहोगे जब तक वो भीतर की आरजू तृप्त नहीं
- 1:38:17होती। अगर तुम प्यासे हो तो लाख 1000
- 1:38:20चीजें खाते चलो पानी के बिना प्यास कहाँ बुझेगी?
- 1:38:27प्यासे को पानी ही तृप्त कर पायेगा, भूखे को भोजन ही तृप्त कर
- 1:38:32पायेगा और तुम्हारी आत्मा चिल्लाता है, मुझे सस्ती चाहिए,
- 1:38:40मुझे सस्ती चाहिए तुम्हारी खोपड़ी झूठ बोलती चली जाती है।
- 1:38:44वो देखो एवं जो बने वो देखो भगवान की मूर्ति, वो देखो आज मैं चला
- 1:38:51हूँ जहाँ पिटे थे 1000 साल पहले गजन भी लूट के ले गया था और बड़े
- 1:38:58बड़े सिद्धांत तुम लोग पैदा करोगे।
- 1:39:00लेकिन इन सिद्धांतों में क्या रखा है?
- 1:39:04कुछ नहीं रखा। बस तुम सिर्फ भोगना चाहते हो और
- 1:39:08मैं भोगने से बिल्कुल भी मना नहीं करता तुम्हें मुझे कल ही किसी ने
- 1:39:13प्रश्न पूछा अगर मोदी जी सबको 25,00,00,000 दे दे तो मैंने कहा,
- 1:39:1925,00,000 ही दे दे। अच्छा बलो भयो, हरि भी सरो सर
- 1:39:25सेठली बला मेरे भीतर तो कुछ मन्ना बाकी ही नहीं जीने तक की तो मन्ना
- 1:39:33बाकी नहीं, तुम राज़ करने की बात करते हो बलो भयो, हरि भी सरो सर
- 1:39:39सेठली बला। तुम 25,00,00,000 की बात करते हो,
- 1:39:43मैं 25,00,00,000 दे सकता हूँ, लेकिन मैं कहता हूँ मोदी जी तुम
- 1:39:4725,00,000 ही दे दो, तुम छोड़ो, तुम 15,00,000 ही दे दो, जो वायदा
- 1:39:51करके आए थे तुम छोड़ो, तुम रोजगार ही दे दो 2,00,00,000।
- 1:40:01तुम अच्छे दिन कहाँ से लेके आओगे? जो गार्ड तो बना रहे हो वो बुरे
- 1:40:08से बुरे दिनों का कैसे आ जाये बनो सभी का छीन के एक की जेब में
- 1:40:15डालना। अच्छे दिनों का प्रारंभ है या
- 1:40:18बुरे से बुरे दिनों का सोच के देखिएगा और फिर मुझे कमेंट
- 1:40:26कीजिएगा, तुम सोच क्या रहे हो, इस पर डिपेंड नहीं करता।
- 1:40:33तुम चल कहाँ रहे हो? इस पर निर्भर करता है तुम्हारा
- 1:40:38रास्ता कहाँ है तुम जाना चाहते हो बॉम्बे लेकिन तुम्हारे जहाज का
- 1:40:43मुक्त तो लाहौर की तरफ है तुम पाकिस्तान पहुंचोगे तुम कंधार
- 1:40:51पहुँच जाओगे अफगानिस्तान पहुंचोगे।
- 1:40:56तुम्हारी चाल बताएंगे, कर्म बताएगा तुम्हारी इच्छा नहीं
- 1:41:00बताएंगे इच्छा तुम्हारी क्या है? कुछ भी हो, लेकिन रास्ता सही होना
- 1:41:07चाहिए रास्ता तुम्हारा गलत है कल्पना ही कभी।
- 1:41:12सत्य तक नहीं पहुंचाती, कोई पोड़ी नहीं है।
- 1:41:16ऐसी मैंने अच्छी तरह से खंगाल लिया है।
- 1:41:19इसलिए मैं बिल्कुल छाती ठोक के कहता हूँ कि हिंदू धर्म कभी नहीं
- 1:41:26पहुंचेगा। लाख पहरे यहाँ लाख पहरे यहाँ
- 1:41:41प्यार दिल में प्यार दिल में पले भी।
- 1:41:48प्यार दिल में पले भी तो क्या है एक तू ना मिला तू ना मिला तू ना
- 1:42:05मिला। धन्यवाद।